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                <title>प्रेरणास्त्रोत :उपदेश का समय</title>
                                    <description><![CDATA[स्वामी विवेकानंद से मिलने दूर दूर से लोग आया करते थे। एक बार अपने समय के मशहूर लेखक और पत्रकार सखाराम गदेड़स्कर अपने दो मित्रों के साथ स्वामी जी से मिलने गए। उन दिनों पंजाब में जबर्दस्त अकाल पड़ा हुआ था। बातचीत के दौरान जैसे ही स्वामी जी को पता चला कि उनमें से एक पंजाब के निवासी हैं, उन्होंने बातचीत की दिशा ही बदल दी।
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/inspiration/preaching-time/article-12917"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-02/preaching-time.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">स्वामी विवेकानंद से मिलने दूर दूर से लोग आया करते थे। एक बार अपने समय के मशहूर लेखक और पत्रकार सखाराम गदेड़स्कर अपने दो मित्रों के साथ स्वामी जी से मिलने गए। उन दिनों पंजाब में जबर्दस्त अकाल पड़ा हुआ था।</p>
<p style="text-align:justify;">बातचीत के दौरान जैसे ही स्वामी जी को पता चला कि उनमें से एक पंजाब के निवासी हैं, उन्होंने बातचीत की दिशा ही बदल दी। उन्होंने अकाल-पीड़ितों के बारे में पूरी संजीदगी से चिंता प्रकट करते हुए, वहां के लिए किए जा रहे राहत कार्यों के बारे में उनसे देर तक हालचाल जाने। यह देखकर सखाराम को बड़ी हैरानी हुई। उन्होंने विनयपूर्वक स्वामी विवेकानंद से कहा-‘हम तो आपके पास इस उम्मीद से आए थे कि धर्म के विषय में आपसे उत्कृष्ट उपदेश सुनने को मिलेगा। लेकिन देखा कि आप तो हमारे साथ सामान्य विषयों की ही चर्चा में लगे रहे। हम लोग तो ज्ञान पाने की उम्मीद में यहां आए थे।’</p>
<p style="text-align:justify;">यह सुनकर स्वामी जी क्षण-भर तो चुप रहे, फिर बड़े गंभीर स्वर में बोले-‘देखो भाई, जब तक मेरे देश में एक भी छोटा बच्चा कहीं भूखा है, तब तक उसे खिलाना ही हमारा सच्चा धर्म है। इसके अलावा जो कुछ भी है, वह झूठा धर्म और ज्ञान है। कहीं देशवासी का पेट खाली हो, तो वह उपदेश का समय कैसे हो सकता है। उस समय तो वह निरा दंभ है। उस समय सबसे पहले उन्हें भोजन देने की कोशिश करनी चाहिए।’ यह सुनकर सखाराम को अपना धार्मिक होने का दंभ दिखावा-सा लगने लगा। उन्होंने कहा, ‘आप ठीक कह रहे हैं। आपने उपदेश की भाषा में भले ही नहीं कहा, लेकिन आपकी बातों से हमारी आंखें खुल गईं।’</p>
<p> </p>
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                                                            <category>प्रेरणास्रोत</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 03 Feb 2020 20:27:07 +0530</pubDate>
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                <title>औपनिवेशिकता की बेड़ियां तोड़ने का वक्त</title>
                                    <description><![CDATA[ हवा में रहेगी मेरे ख्याल की खुशबू, ये मुश्ते-खाक फानी (शरीर नश्वर) है, रहे, रहे न रहे। यह शेयर भगत सिंह ने अपनी फांसी के 20 दिन पूर्व यानी 3 मार्च 1931 को अपने छोटे भाई कुलतार सिंह को लिखे एक पत्र में लिखा था। लेकिन, विडंबना है कि देश की आजादी के लिए हंसते-हंसते […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/article/time-to-break-colonial-fleas/article-6553"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-11/time-to-break-colonial-fleas-copy.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"> हवा में रहेगी मेरे ख्याल की खुशबू, ये मुश्ते-खाक फानी (शरीर नश्वर) है, रहे, रहे न रहे। यह शेयर भगत सिंह ने अपनी फांसी के 20 दिन पूर्व यानी 3 मार्च 1931 को अपने छोटे भाई कुलतार सिंह को लिखे एक पत्र में लिखा था। लेकिन, विडंबना है कि देश की आजादी के लिए हंसते-हंसते फांसी के फंदे को चूमने वाले अमर क्रांतिकारी भगत सिंह को अब तक सरकारी दस्तावेजों में शहीद का दर्जा नहीं मिल पाया। हाल ही में एक आरटीआई आवेदक ने राष्ट्रपति भवन से यह सवाल किया है कि क्या भगत सिंह को शहीद का दर्जा दिया जा सकता है या नहीं और अगर ऐसा नहीं किया जा सकता तो इसके लिए भी सरकार तथ्यों के साथ जानकारी दें। राष्ट्रपति भवन के पास जानकारी नहीं होने के कारण उसने इसे गृह मंत्रालय को भेज दिया और उसने बदले में इसे राष्ट्रीय अभिलेखागार के पास प्रतिक्रिया के लिए भेज दिया। एक बार पुन: यह सवाल खड़ा हो गया है कि आखिर सरकार की नजरों में कौन शहीद है व कौन नहीं और सरकारी रूप से शहीद का दर्जा पाने के लिए क्या कानूनी सीमाएं हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">गौरतलब है कि 28 सितंबर 1907 को पंजाब के लायलपुर स्थित बंगा गांव में जन्मे भगत सिंह के मन में बाल्यकाल से ही ब्रिटिश हुकूमत के प्रति घोर घृणा थीं। देश की आजादी के लिए मर मिटने का संकल्प उन्होंने बचपन में ही ले लिया था। खेतों में बंदूक बोने व मौत को अपनी दुल्हन मानने वाले भगत सिंह के मन में देश को आजाद कराने को लेकर हिंसा की भावनाएं कोई जन्मजात पैदा नहीं हुई थीं बल्कि वे तो गांधी के प्रशंसक थे। उन्हें पूर्ण विश्वास था कि गांधी की अहिंसा, सत्याग्रह व अनशन की नीति से देश जरूर आजाद होगा। लेकिन, चौरी चौरा हत्याकांड के बाद गांधी जी द्वारा आंदोलन वापस लेने से आहत हुए भगत सिंह ने अपनी एक अलग राह बनाकर देश को आजाद कराने की ठानी। इसमें उनका सुखदेव, राजगुरु, चंद्रशेखर आजाद, बटुकेश्वर दत्त, जतिन दा जैसे कई क्रांतिकारियों ने अंतिम सांस तक साथ दिया। भगत सिंह चाहते तो फांसी के फंदे से बच सकते थे, उनके पास जेल से भागने के सारे विकल्प मौजूद थे। लेकिन, उन्होंने फांसी को चुना इसलिए कि उनके इस समर्पण के बाद लाखों लोग जगेंगे और देश को आजादी के लक्ष्य तक ले जाएंगे। इसलिए 23 मार्च 1931 को महज 23 साल की उम्र में वे लाहौर के सेंट्रल जेल में फांसी पर झूल गए।</p>
<p style="text-align:justify;">लेकिन, इसके बाद भी इस महान देशभक्त को न तो अन्य स्वतंत्रता सेनानियों की तरह सम्मानजनक स्थान मिल पाता है और न ही उनके परिवार को वित्तीय सहायता मिल पाती है बल्कि आज भी किताबों में क्रांतिकारी आतंकी पढ़ाया जाता है। कहने को देश तो आजाद हो गया लेकिन हमारा शासन अब तक औपनिवेशिकता की बेड़ियां तोड़ने में सफल नहीं हो पाया है। यही कारण है कि आजादी के सात दशक बाद भी न तो हिंदी को राष्ट्रभाषा का गौरव मिला है और न ही भगत सिंह जैसे कई क्रांतिकारियों को शहीद का दर्जा मिल पाया हैं। इसी वजह से आज न तो किसी सरकारी कार्यालय में भगत सिंह की तस्वीर नजर आती है और न ही उनकी जयंती को सरकारी स्कूलों में गांधी, नेहरू व शास्त्री जयंती की तरह धूमधाम से मनाया जाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">अब सवाल है कि आखिर कौनसी ऐसी बाधा है, जो एक महान देशभक्त को शहीद का दर्जा देने में आड़े आ रही है। यदि वह अनुच्छेद18 है जो कहता है कि राज्य को कोई उपाधि देने की अनुमति नहीं है तो क्या इसे संशोधित नहीं किया जा सकता है। क्या अब वक्त नहीं आ चुका है कि हम औपनिवेशिक सोच से उबरकर अपनी सोच पर चलें। दरअसल, भगत सिंह को शहीद का सरकारी दर्जा देने या नहीं देने से, उनके चाहने वालों को कोई फर्क नहीं पड़ेगा। लेकिन, यह विषय राष्ट्रीय गौरव से जुड़ा हुआ है इसलिए सरकार की यह प्राथमिकता होनी चाहिए कि वह संसद में संशोधन प्रस्ताव पारित कर उस महान व्यक्तित्व को क्रांतिकारी आतंकी जैसे शब्द-सूचक से मुक्त करें।</p>
<p style="text-align:justify;"><em><strong>देवेन्द्रराज सुथार</strong></em></p>
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                <pubDate>Sat, 10 Nov 2018 11:50:16 +0530</pubDate>
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                <title>तैमूर को वक्त देना चाहती हैं करीना, कहा: अगली फिल्म अगले साल</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली (एजेंसी)। एक्ट्रेस करीना कपूर खान की फिल्म ‘वीरे दी वेडिंग’ बॉक्स ऑफिस पर अच्छा प्रदर्शन कर रही है।46 करोड़ रुपये के बजट से बनी यह फिल्म 8 दिनों में 60 करोड़ से ज्यादा की कमाई कर चुकी है।  दर्शकों को एक शानदार फिल्म देने के बाद अब करीना स्क्रीन से थोड़ा गैप लेना चाहती हैं।  […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/rangmanch/kareena-wants-to-give-time-to-timur/article-4081"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-06/karina.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (एजेंसी)। </strong>एक्ट्रेस करीना कपूर खान की फिल्म ‘वीरे दी वेडिंग’ बॉक्स ऑफिस पर अच्छा प्रदर्शन कर रही है।46 करोड़ रुपये के बजट से बनी यह फिल्म 8 दिनों में 60 करोड़ से ज्यादा की कमाई कर चुकी है।  दर्शकों को एक शानदार फिल्म देने के बाद अब करीना स्क्रीन से थोड़ा गैप लेना चाहती हैं।  खबरों के मुताबिक करीना अब अगली फिल्म 2019 में ही शुरू करेंगी।</p>
<p style="text-align:justify;">एक्ट्रेस ने अपने बेटे तैमूर को इसकी वजह बताया है।  करीना के कहा- फिल्में करती रहूंगी लेकिन अब एक बार में एक ही फिल्म होगी।  करीना ने कहा कि उनके पति कोई बिजनेसमैन नहीं हैं जो शाम 6 बजे घर वापस आ जाएं।  वो भी एक एक्टर हैं और हम दोनों को तैमूर के लिए वक्त का संतुलन बना कर चलना पड़ेगा।  करीना बोलीं- हमने तय किया है कि अब दोनों एक-एक फिल्म करेंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">करीना ने कहा- मैंने वीरे दी वेडिंग पूरी कर ली है और अब सैफ नवदीप सिंह की फिल्म कर रहा है।  जब वह नवंबर तक अपने कमिटमेंट पूरे कर लेगा तो फिर मैं अपनी फिल्म पर काम शुरू करूंगी।  मैं अपनी फिल्म की शुरुआत जनवरी में करूंगी।  करीना ने कहा कि उनके पास एक प्रोजेक्ट है लेकिन वह खुद कुछ कहने से पहले इस बारे में आधिकारिक घोषणा हो जाने देना चाहती हैं।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>रंगमंच</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 10 Jun 2018 10:21:10 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>समय का मोल पहचानें, शक्ति क्षरण से बचें</title>
                                    <description><![CDATA[डॉ. दीपक आचार्य व्यक्ति की अपनी पूरी जिन्दगी में 50 फीसदी से ज्यादा वह समय होता है जिसको वह फालतू के कामों और बेकार की सोच में गंवा देता है। जो व्यक्ति जीने का अर्थ समझते हैं वे हर क्षण को कीमती मानकर उसका पूरा उपयोग करने की कला में पारंगत हो जाते हैं और […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/article/identify-the-value-of-time-avoid-power-degradation/article-4073"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-06/time-1.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>डॉ. दीपक आचार्य</strong></p>
<p style="text-align:justify;">व्यक्ति की अपनी पूरी जिन्दगी में 50 फीसदी से ज्यादा वह समय होता है जिसको वह फालतू के कामों और बेकार की सोच में गंवा देता है। जो व्यक्ति जीने का अर्थ समझते हैं वे हर क्षण को कीमती मानकर उसका पूरा उपयोग करने की कला में पारंगत हो जाते हैं और जीवन में सफलता के झण्डे गाड़ते हुए मार्गदर्शी और प्रेरणा पुंज बन जाते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">दूसरी ओर ऐसे लोगों की संख्या 90 फीसदी से अधिक है जिनका ज्यादातर समय अनुपलब्धिमूलक और निरर्थक गुजर जाता है। इनमें से भी अधिकांश समय सोने, बेवजह बोलने अर्थात बकवास करने और सुनने में गुजर जाता है। हम इतना अधिक बोलते और सुनते हैं जिसकी हमें आवश्यकता ही नहीं होती मगर बोलना और सुनना तथा फालतू के कामों में रमे रहना आदमी की फितरत में सर्वोपरि होता है और ऐसे में उसे वे सारे काम बेकार लगते हैं जो इनके सिवा हैं।ज्ञानेन्द्रियों और कर्मेन्द्रियों के बेजा इस्तेमाल से इनकी कार्यक्षमता का ह्रास होता है तथा जीवन की पूणार्यु तक पहुँचते-पहुँचते ये जवाब देने लग जाती हैं जबकि इनका सही और युक्तिपूर्वक इस्तेमाल किया जाए तो आजीवन इनकी क्षमता बनी रहती है।</p>
<p style="text-align:justify;">हर व्यक्ति के जीवन में 70 फीसदी समय ऐसा होता है जिसके बारे में यदि वह जान ले तो निहाल हो जाए, मगर अधिकतर लोगों में न जानने की जिज्ञासा होती है न कुछ कर पाने की ललक। बहुत सारे लोग पशुओं की तरह ही जीते हैं। इनके लिए जिन्दगी केवल खाने-पीने और सोने तक ही सीमित रहा करती है। इसके अलावा उनके जीवन का कोई लक्ष्य नहीं है।और इस खान-पान और अपने-पराये के चक्कर में अधिकांश लोग अपनी सारी नैतिकता और मानवीय मूल्यों को भुला देते हैं। जो समय हमारे सामने है उसके बारे में जानकर पूरा-पूरा उपयोग कर लिया जाए तो हमारी जिन्दगी सुनहरी रश्मियों से भरी-पूरी रह सकती है और इसका लाभ न सिर्फ हमें, बल्कि उन सभी को प्राप्त होता है जो हमारे सम्पर्क में एक बार भी आ जाते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">जीवन मेंं आने वाले ऐसे तमाम अवसरों के प्रति सजग रहने की आवश्यकता है। इन अवसरों को शक्ति संचय का माध्यम बनाकर हम दुनिया में चाहें जो कर सकने का सामर्थ्य पा सकते हैं। बात चाहे सफर की हो, कहीं प्रतीक्षा की हो या उन क्षणों की जब हमारे पास कोई दूसरा काम न हो। इन अवसरोंं पर आत्मचिन्तन करें और उनका रचनात्मक प्रवृत्तियों के लिए उपयोग करें। कई बार बैठकों, सभाओं और समारोहों का देरी से शुरू होना, बस या रेल विलम्ब से आना, कहीं काम के लिए जाने पर लम्बे समय तक प्रतीक्षा करते रहने की विवशता या और कोई ऐसा समय, जिसके बारे में हमें यह कहना पड़ता है कि समय काट रहे हैं या प्रतीक्षा कर रहे हैंं, इसका उपयोग अपने हक में शक्ति संचय के लिए अवश्य हो सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">जीवन में सफर के अवसर हों या कहीं भी किसी काम के लिए प्रतीक्षा की विवशता, इन क्षणों में कुढ़े नहीं, न ही रंज या खीज निकालें। इन अवसरों का महत्त्व समझें और इनका दोहन करें। कुछ नहीं तो इन क्षणों को साधना का माध्यम बनाएँ और जिस किसी भगवान या ईष्ट में रुचि हो, उनके किसी छोटे से मंत्र का मन ही मन लगातार जप करते रहें। यों तो आम आदमी घर-गृहस्थी के फण्डों में घनचक्कर होने की वजह से साधना या ईश्वर स्मरण के लिए समय नहीं निकाल पाता है लेकिन सफर और प्रतीक्षा ये दो ऐसे सुअवसर पर हैं जिनका सदुपयोग किया जाना संभव है।</p>
<p style="text-align:justify;">इन क्षणों में हरि स्मरण का फायदा यह होगा कि हम फालतू की चर्चाओं, निन्दा और आलोचनाओंं आदि से दूर रह पाएंगे और दूसरा ईश्वरीय ऊर्जा लगातार संग्रहित होनी शुरू हो जाएगी जिसका लाभ हमें पूरी जिन्दगी अपने आप प्राप्त होता रहता है। केवल इन्हीं क्षणों का ईमानदारी के साथ ईश्वर स्मरण मात्र में ही उपयोग कर लिया जाए तो सिद्धि और सफलता में ये खूब मददगार हो सकते हैं, यह कई साधकों का अनुभव है। इसी प्रकार स्वाध्याय, स्वास्थ्य लाभ की मुद्राएं और विद्वजनों से सत्संग या चर्चा भी की जा सकती है।</p>
<p style="text-align:justify;">कुछ नहीं तो इन क्षणों में उद्विग्न हुए बिना निर्विचार की स्थिति लाने का प्रयास करें। यदि कोई भी व्यक्ति मात्र पाँच-दस मिनट के लिए भी निर्विचार हो जाए तो उसे असीम मानसिक शांति का अहसास होगा। यह भी अनुभूत है। ये भी न कर पाएँ तो अपनी रुचि के कामों का चिन्तन करें और इनसे संबंधित गतिविधियों के बारे में चर्चा करें या व्यवहार में लाएं। इससे भी बौद्धिक, मानसिक एवं आध्यात्मिक बल बढ़ने लगता है। इससे शरीर ऊब और थकान से भी दूर रहता है।</p>
<p style="text-align:justify;">बड़े-बड़े लोग जिनका अधिकांश समय सफर में गुजरता है वे इसी प्रकार साधना से सिद्धि प्राप्त करने का मार्ग खोज लेते हैं। जबकि ऐसा नहीं करने वाले लोग प्रतीक्षा करते-करते इतना थक जाते हैं कि उन्हें हर थोड़ी-थोड़ी देर में उबासियाँ आनी शुरू हो जाती है, बार-बार झल्ला उठते हैं और प्रतीक्षा के अंत न होने की बात कहते हुए खिसियाते रहते हैं। ये स्थितियां मनुष्य को कमजोर ही करती हैं और इससे चिड़चिड़ापन बढ़ जाता है जो अन्ततोगत्वा किसी न किसी तनाव और बीमारी को जन्म देता है।</p>
<p style="text-align:justify;">इन सारी स्थितियों से बचने का एकमात्र यही उपाय है कि जहाँ कहीं प्रतीक्षा करनी पड़े, लम्बा सफर हो तथा हमारे पास कोई काम नहीं हो तब इसी प्रकार की साधना करें। छोटे-छोटे समय का दोहन करते हुए शक्ति संचय की आदत पड़ जाने पर हम किसी भी परिस्थिति में कहीं भी रहें, न कभी तनाव होगा, न खीज या गुस्से की स्थिति आएगी। बल्कि ऐसे मौके जब भी आएंगे, आनंद देंगे। समय का अपने हक में इस्तेमाल कर लेने की कला सीख जाने पर जीवन के कई सारे आनंद बहुगुणित हो जाते हैं और इसी से व्यक्तित्व की सफलता को मिलने लगती हैं ऊंचाइयां।</p>
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                                                            <category>लेख</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 10 Jun 2018 09:00:09 +0530</pubDate>
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                <title>समय प्रबन्धन अपनाना जरूरी</title>
                                    <description><![CDATA[डॉ. दीपक आचार्य संसार के प्रत्येक कर्म की एक निर्धारित समय सीमा होती है जो कार्य विशेष के अनुरूप कम-ज्यादा रहती है। हर काम समय पर होना चाहिए, इसके साथ ही यह जरूरी है कि इसके संपादन के लिए दी गई तयशुदा समय सीमा में ही पूर्ण होना चाहिए। प्रत्येक मनुष्य के लिए हर काम […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/article/time-management-needs-to-be-adopted-2/article-3949"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-06/time.jpg" alt=""></a><br /><p><strong> डॉ. दीपक आचार्य</strong></p>
<p style="text-align:justify;">संसार के प्रत्येक कर्म की एक निर्धारित समय सीमा होती है जो कार्य विशेष के अनुरूप कम-ज्यादा रहती है। हर काम समय पर होना चाहिए, इसके साथ ही यह जरूरी है कि इसके संपादन के लिए दी गई तयशुदा समय सीमा में ही पूर्ण होना चाहिए। प्रत्येक मनुष्य के लिए हर काम की समयावधि निश्चित की हुई है। अलग-अलग प्रकार के लोग इनके संपादन में न्यूनाधिक समय लगाते हैं। कुछ लोग तय समय सीमा में काम कर गुजरते हैं और फिर मस्त रहते हैं। कुछ लोग धीरे-धीरे काम करने के आदी होते हैं और जैसे-तैसे काम को कर पाते हैं। बहुत से लोग पड़े-पड़े खाना-पीना और कमाना चाहते हैं और कोई काम नहीं करते। इनसे काम लेना ही बड़ा भारी काम होता है। ये लोग हमेशा अपनी ही मौज-मस्ती और मनोरंजन में रहना चाहते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">इनके लिए न कार्यस्थल की साख और काम का कोई महत्व होता है और न ही समाज, अपने क्षेत्र या देश से कोई सरोकार। अपने क्षणिक भोग-विलास और आनंद के लिए ये कुछ भी कर सकते हैं। इन खुदगर्जों को कभी कोई शर्म नहीं आती। जिन्दगी भर यह महा बेशर्म बने रहते हैं। तीसरे प्रकार के लोग सभी कामों को निर्धारित समय सीमा में पूरा कर सकते हैं मगर उनका समय प्रबन्धन इतना बिगड़ा हुआ होता है कि कोई भी काम समय पर पूरा नहीं हो पाता और इसके लिए इनके पास खूब सारे बहानों का अक्षय भण्डार होता है जिसका वे पूरा-पूरा उपयोग कर लिया करते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">इन लोगों की कार्यस्थलों, काम-धन्धे के स्थलों और दुकानों-कंपनियों में पर्याप्त समय मिलता है और इनकी पूरे कार्यसमय में नियमित बैठक भी होती है लेकिन दायित्व कर्म के समय ये दूसरे कामों, गप्पों और टाईमपास फालतू के लोगों के साथ बिताते हुए मनोरंजन की दुनिया में खोए रहते हैं अथवा अपनी बतरसिया और दुनिया भर की हलचलों को सुनने-जानने व देखने में भटक जाते हैं। इसलिए इनके काम समय पर नहीं हो पाते और विवश होकर दु:खी मन से अतिरिक्त समय निकालना पड़ता है और इसका मलाल रोज इन लोगों को होता भी है लेकिन आदत ही ऐसी पड़ जाती है कि इनका बस नहीं चल पाता और यही क्रम जिन्दगी भर चलता रहता है। इस श्रेणी के लोगों के पास पुराने से पुराने समय का अधूरा काम लम्बित पड़ा हुआ होता है।</p>
<p style="text-align:justify;">ये लोग कभी पुराने कामों से मुक्ति पाने का अहसास कर ही नहीं पाते कि नए-नए काम इनके पास आते हुए पुराने कामों की सूची में शामिल हो जाया करते हैंं। हमारे इलाके में समाज-जीवन के सभी क्षेत्रों में ऐसे लोगों की भारी भीड़ विद्यमान है जो समय पर काम नहीं कर पाते। ऐसे लोग अपने निकम्मेपन की वजह से ढेर होते जा रहे लम्बित कामों की वजह से दबावों में जीने के आदी हो जाते हैं और ऐसे में तनावों का उनके साथ ऐसा संबंध स्थापित हो जाता है जो मरने तक साथ बना रहता है।</p>
<p style="text-align:justify;">पुराने कामों के बोझ से उत्पन्न तनावोें का ही परिणाम है कि ये लोग नए कामों को भी तय समय सीमा में नहीं कर पाते और इसी प्रकार उत्तरोत्तर इनका बोझ बढ़ता रहता है तो आने वाले समय में पहाड़ की तरह अड़िग रहकर इनके जीवन और कर्मयोग दोनों की राह में आड़े आ जाता है। बात सरकारी क्षेत्र की हो या निजी क्षेत्र की अथवा आधे-आधे सरकारी-गैर सरकारी क्षेत्र की। हर कहीं जमा है ऐसे लोगों की भीड़ जिनके लिए जीवन भर काम का बोझ बना रहता है और इस बोझ के मारे खुद तो परेशान रहते ही हैं, दूसरों के काम भी समय पर नहीं कर पाने की वजह से लोगों की बद्दुआओं के तीर भी इनके जिस्म में चुभते रहते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">ऐसे लोगों के कामों को देखा जाए तो उन्हें रोजाना इतना समय मिलता ही है कि ये आसानी से अपने रोजमर्रा के कामों को निपटा सकें लेकिन इनकी मानसिक शिथिलता और समय प्रबन्धन की कमी के कारण ये समय का पूरा उपयोग नहीें कर पाते और रोजाना कुढ़ते रहने के आदी हो जाते हैं। समय पर काम नहीं कर पाने वाले इन लोगों को पूछा जाए तो यही बहाना होता है कि काम बहुत है, क्या करें। जबकि उन्हीं की तरह दूसरे लोग भी हैं जिनके पास भी उतना ही काम होता है मगर वे उसी समय सीमा में पूरा कर लिया करते हैं जितना समय निर्धारित होता है।</p>
<p style="text-align:justify;">सौंपी गई अवधि में काम नहीं कर पाने वाले लोग फिर अवकाशों के दिनों में या अतिरिक्त समय में अपने कार्यस्थलों में डटे रहने की विवशता या शौक से जुटे रहते हैं और उन सभी बहुमूल्य क्षणोें को यों ही बरबाद करते रहते हैं जो क्षण उन्हें मौज-शौक या घर-गृहस्थी और सामाजिक एवं उत्सवी आनंद के लिए हुआ करते हैंं। इन लोगों के परिवारजन भी इन्हें पसन्द करना छोड़ दिया करते हैं। यह तय मान कर चलना चाहिए कि जो लोग निर्धारित अवधि में सामान्य कार्य नहीं कर पाते हैं वे इस लायक हैं ही नहीं कि उन्हें ये काम सौंपे जाएं। इन लोगों को नालायक नहीं भी कहा जाए तो यह तो मानना ही चाहिए कि इन्हें कोई सा काम सौंपे जाने का अर्थ यही है कि कहीं न कहीं चूक उन लोगों से ही हुई है जिनके द्वारा इन्हें काम सौंपा गया है। वरना इनकी बजाय दूसरे लोग होते तो समय पर और इनसे ज्यादा अच्छा काम करते।</p>
<p style="text-align:justify;">जो जहां कहीं काम कर रहा है उसे चाहिए कि वह अपने कामों के लिए निर्धारित घण्टों का पूरा उपयोग करते हुए काम पूरा करे ताकि किसी भी क्षण अतिरिक्त समय की मांग की कल्पना उसके जेहन में कभी न आए। समय पर काम नहीं करने वालों और आलस्य बरतने वालों के लिए एक ही शब्द काफी है और वह है – दीर्घसूत्री। यह आलसी, प्रमादी, समय प्रबन्धन में विफल हो चुके नाकारा लोगों के लिए प्रयुक्त किया जाता है जो कि कभी कोई काम समय पर नहीं कर सकते।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>लेख</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 04 Jun 2018 23:18:36 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>जगह और दिन के बाद ट्रंप-किम की मुलाकात का वक्त भी मुकर्रर</title>
                                    <description><![CDATA[वाशिंगटन (एजेंसी)। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग उन की मुलाकात की जगह और दिन के बाद अब वक्त भी मुकर्रर हो गया है। दोनों नेता सिंगापुर के समय के अनुसार सुबह नौ बजे मिलेंगे. इस मुलाकात पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हुई हैं। व्हाइट हाउस ने इस मुलाकात के समय का ऐलान […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/international/the-place-and-place-of-trump-kim-after-the-day-is-also-confirmed/article-3692"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-05/kim-joon.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>वाशिंगटन (एजेंसी)।</strong> अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग उन की मुलाकात की जगह और दिन के बाद अब वक्त भी मुकर्रर हो गया है। दोनों नेता सिंगापुर के समय के अनुसार सुबह नौ बजे मिलेंगे. इस मुलाकात पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हुई हैं। व्हाइट हाउस ने इस मुलाकात के समय का ऐलान करते हुए कहा कि 12 जून को स्थानीय समय के अनुसार सुबह 9 बजे दोनों नेता मिलेंगे। प्रेस सचिव सारा सैंडर्स ने बैठक के समय की घोषणा करते हुए कहा कि सिंगापुर में एक टीम तैयारियों को अंतिम रूप दे रही है। वार्ता शुरू होने तक यह टीम वहीं रहेगी। उन्होंने कहा कि ट्रंप बैठक से पहले उत्तर कोरिया पर प्रतिदिन राष्ट्रीय सुरक्षा ब्रीफिंग ले रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">जब से यह मुलाकात तय हुई है, तभी से इस पर संकट के बादल मंडरा रहे थे। एक समय को ट्रंप ने मुलाकात रद्द भी कर दी थी। इससे दोनों की मुलाकात की आस लगाए बैठी पूरी दुनिया को झटका लगा था। इसकी कई देशों ने कड़ी आलोचना भी की थी. हालांकि उत्तर कोरिया ने संयम से काम लिया और इस मुलाकात को बहाल करने के लिए कूटनीतिक वार्ता शुरू की। उत्तर कोरिया के रुख को देखते हुए ट्रंप फिर से इस मुलाकात के लिए राजी हो गए। अब दोनों नेता पूर्व निर्धारित समय और स्थान पर ही मुलाकात करेंगे यानी ट्रंप और किम की मुलाकात सिंगापुर में 12 जून को सुबह 9 बजे होनी तय है। यह पहली बार होगा, जब दोनों नेता एक-दूसरे से मुलाकात करेंगे।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अंतरराष्ट्रीय ख़बरें</category>
                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 05 May 2018 08:20:37 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>दुनिया को परमाणु बम से मुक्त करने का समय आ गया : दलाई लामा</title>
                                    <description><![CDATA[वाराणसी (एजेंसी)। बौद्ध धर्म गुरु दलाई लामा ने कहा है कि अब दुनिया को परमाणु बम और खतरनाक हथियारों से मुक्त करने का समय आ गया है। तिब्बत के धर्म गुरु एवं शांति दूत दलाई लामा ने कहा कि इसके लिए हमें विश्व स्तर पर अभियान चलाकर दुनिया को परमाणु बम और खतरनाक हथियारों से मुक्त […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/the-time-has-come-to-free-the-world-from-the-atom-bomb-dalai-lama/article-3627"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-03/dalai-lama.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>वाराणसी (एजेंसी)। </strong>बौद्ध धर्म गुरु दलाई लामा ने कहा है कि अब दुनिया को परमाणु बम और खतरनाक हथियारों से मुक्त करने का समय आ गया है। तिब्बत के धर्म गुरु एवं शांति दूत दलाई लामा ने कहा कि इसके लिए हमें विश्व स्तर पर अभियान चलाकर दुनिया को परमाणु बम और खतरनाक हथियारों से मुक्त कराना होगा। साथ ही उन्होंने कहा कि भारतीय पारंपरिक ज्ञान भावनाओं पर आधारित है। उन्होंने कहा, ‘मैं’ और ‘तुम’ की भावना ही आज तमाम समस्याओं की जड़ है इसलिए भारत में वो शक्ति है जिससे कि वो पूरी दुनिया को शांति का संदेश दे सकता है। इस निधि का समावेश हमें आज की आधुनिक शिक्षा में करना होगा। इससे ही डर और क्रोध की जगह अहिंसा और करुणा स्थापित की जा सकती है।</p>
<p style="text-align:justify;">दलाई लामा सारनाथ स्थित केंद्रीय उच्च तिब्बती शिक्षा संस्थान में भारतीय विश्वविद्यालय संघ के 92वें अधिवेशन के उद्घाटन सत्र को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि परमाणु शस्त्रों से किसी भी देश का भला नहीं हो सकता। ऐसे में हमें पृथ्वी पर मानवता की रक्षा के लिए नि:शस्त्रीकरण के लिए प्रयास करना ही होगा और यह उचित शिक्षा के माध्यम से ही संभव है। दलाई लामा ने भारतीय विश्वविद्यालय संघ नई दिल्ली द्वारा प्रकाशित यूनिवर्सिटी न्यूज के विशेषांक तथा चार अन्य ग्रंथों का विमोचन भी किया। अधिवेशन में भारतीय विश्वविद्यालयों के तकरीबन 150 कुलपति तथा देश-विदेश के शिक्षाविद शामिल हुए।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 20 Mar 2018 06:57:34 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>हमसफर एक्सप्रेस को सुपरफास्ट ट्रेन का होगा दर्जा प्राप्त</title>
                                    <description><![CDATA[5 घंटों से ज्यादा समय की होगी बचत श्रीगंगानगर (सच कहूँ न्यूज)। श्रीगंगानगर से तिरुचिरापल्ली के बीच चलने वाली हमसफर एक्सप्रेस ट्रेन को आगामी 8 अगस्त से सुपरफास्ट ट्रेन का दर्जा प्राप्त हो जाएगा। इससे यात्रा का समय कम होने के साथ ही इस गाड़ी के नंबर भी बदल जाएंगे। उत्तर पश्चिम रेलवे के वरिष्ठ […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/rajasthan/humsafar-express-gets-superfast-train-status/article-2839"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-08/train-1.jpg" alt=""></a><br /><h1 style="text-align:center;">5 घंटों से ज्यादा समय की होगी बचत</h1>
<p style="text-align:justify;"><strong>श्रीगंगानगर (सच कहूँ न्यूज)।</strong> श्रीगंगानगर से तिरुचिरापल्ली के बीच चलने वाली हमसफर एक्सप्रेस ट्रेन को आगामी 8 अगस्त से सुपरफास्ट ट्रेन का दर्जा प्राप्त हो जाएगा। इससे यात्रा का समय कम होने के साथ ही इस गाड़ी के नंबर भी बदल जाएंगे। उत्तर पश्चिम रेलवे के वरिष्ठ वाणिज्य मंडल प्रबंधक सीआर कुमावत ने बताया कि गाड़ी नंबर 14715 श्रीगंगानगर-तिरुचिरापल्ली हमसफर एक्सप्रेस ट्रेन सुपरफास्ट के रूप में अपने नए नंबर 22497 से सोमवार-मंगलवार की रात्रि नये समय रात्रि 12.55 बजे रवाना हुआ करेगी व वीरवार को दोपहर 1.30 के स्थान पर 11.20 बजे तिरुचिरापल्ली पहुंचेगी।</p>
<p style="text-align:justify;">इस प्रकार यात्रा के समय में 2 घंटे 40 मिनट की बचत होगी। वापसी में गाड़ी संख्या 14716 प्रत्येक शुक्रवार को अपने नये नंबर 22498 से प्रात 4. 45 बजे तिरुचिरापल्ली से प्रस्थान कर रविवार को 2.40 बजे श्री गंगानगर पहुंचा करेगी। इस प्रकार इस प्रकार इस यात्रा में 5 घंटों से ज्यादा समय की बचत होगी।</p>
<h3 style="text-align:justify;">श्रीगंगानगर-हावड़ा में एसी कोच की होगी बढ़ोतरी</h3>
<p style="text-align:justify;">श्रीगंगानगर से हावड़ा के लिए जाने वाली गाड़ी में एक थर्ड एसी कोच की स्थायी रूप से बढ़ोतरी होगी। उत्तर पश्चिम रेलवे के वरिष्ठ वाणिज्य मंडल प्रबंधक सीआर कुमावत ने बताया कि गाड़ी संख्या 13007/13008 श्रीगंगानगर-हावड़ा-श्रीगंगानगर उद्यान आभा तुफान एक्सप्रेस में आगामी 28 नवम्बर से एक थर्ड एसी कोच स्थायी रूप से बढ़ाया जाएगा। श्रीगंगानगर रेलवे स्टेशन अधीक्षक डी.के.त्यागी ने बताया कि इस आशय के आदेश श्रीगंगानगर रेलवे स्टेशन पर पहुंच चुके हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">
</p><p><a href="http://10.0.0.122:1245/">Hindi News </a>से जुडे अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें <a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a> और <a href="https://x.com/SACHKAHOON">Twitter</a> पर फॉलो करें।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/rajasthan/humsafar-express-gets-superfast-train-status/article-2839</link>
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                <pubDate>Thu, 03 Aug 2017 06:25:03 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पार्किंग के वक्त कारों के शीशे थोड़े खुले छोड़ दें</title>
                                    <description><![CDATA[पटौदी में 5 साल की दो जुड़वां बच्चियां एक खड़ी कार में दम घुटने से मौत के आगोश में पहुंच गई। अभी 20 दिन पहले अमेरिका के टेक्सास में भी ऐसा ही हुआ, जब एक शॉपिंग मॉल के बाहर खड़ी कार में दो छोटे बच्चे दम घुटने से दम तोड़ गए और उनकी मां जो […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/editorial/leave-the-car-mirror-open-at-the-time-of-parking/article-1271"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-06/car.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">पटौदी में 5 साल की दो जुड़वां बच्चियां एक खड़ी कार में दम घुटने से मौत के आगोश में पहुंच गई।</p>
<p style="text-align:justify;">अभी 20 दिन पहले अमेरिका के टेक्सास में भी ऐसा ही हुआ, जब एक शॉपिंग मॉल के बाहर खड़ी कार में दो छोटे बच्चे दम घुटने से दम तोड़ गए और उनकी मां जो खरीददारी कर रही थी, को पता भी नहीं चला।</p>
<p style="text-align:justify;">देश के किसी न किसी शहर में आए माह कोई न कोई ऐसी दु:खद घटना सामने आ ही जाती है। इस तरह की दुर्घटना का शिकार ज्यादातर 10 वर्ष से छोटी आयु के बच्चे हो रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">या बहुत छोटे बच्चे जोकि माता-पिता की लापरवाही से गाड़ी में रह जाते हैं। खेलने-कूदने की आयु के बच्चे थोड़े चंचल स्वभाव के होते हैं, जिन्हें व्हीकल पर बैठना, उनमें चढ़ना, हॉर्न बजाना, स्टेरिंग घुमाना जैसे खेल बहुत लुभाते हैं। ये खेल भी बच्चे अक्सर माता-पिता या बड़ों की आंख चुराकर खेलते हैं। बस यही इनके लिए जानलेवा साबित हो रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">आजकल गर्मी का मौसम है, तापमान बहुत ज्यादा बढ़ा हुआ है। ऐसे में किसी व्हीकल में बंद हो जाने पर बहुत जल्द दम घुटने लगता है। कारों की बनावट भी ऐसी बना दी गई है कि उनमें बंद बच्चे की चीख-पुकार भी बाहर सुनाई नहीं पड़ती। कारों में दम घुटकर मरने वाले बच्चों की बढ़ रही दुर्घटनाओं को रोकने के लिए मां-बाप, कार-कंपनियों एवं सरकार को शीघ्र कोई उपाय खोजना चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">पहले तो समस्या का हल कंपनीज करें। वह कारों में ऐसी व्यवस्था कर दें कि उनमें किसी का दम नहीं घुट पाए और अंदर बंद होने पर भी पीड़ित को ताजी हवा मिलती रहे। जब तक कार कंपनीज कोई उपाय नहीं करती, तब बड़ों को चाहिए कि वह अपने व्हीकल को खड़ा करते वक्त खिड़की के शीशे एक-आध सेंटीमीटर खुला छोड़ दें।</p>
<p style="text-align:justify;">इससे जहां वाहन चोरी होने का भी डर नहीं रहेगा, वहीं भूलवश यदि उनमें कोई छोटा बच्चा फंस भी जाए, तब उसका दम नहीं घुटेगा और उसकी रोने व चीखने की आवाज भी बाहर सुनाई पड़ सकेगी।</p>
<p style="text-align:justify;">सरकार को चाहिए कि वह इस विषय में अभिभावकों एवं कार निर्माता कंपनियों के लिए निर्देश जारी करे कि वह अपने वाहनों को इस तरह रखें कि कोई दुर्घटना का शिकार नहीं हो। चूंकि कारों में बच्चों के दम घुट जाने की समस्या ज्यादा बड़ी नहीं है, अत: माता-पिता एवं कार निर्माता कम्पनीज जरा-सी सावधानी व उपायों से इस विपत्ति को टाल सकती हैं, जिसे कि हर संभव बहुत जल्द टाला जाए।</p>
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                <pubDate>Thu, 15 Jun 2017 22:45:47 +0530</pubDate>
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