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                <title>One Nation One Election - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>One Nation, One Election: एक राष्ट्र, एक चुनाव देश के लिए नई व्यवस्था नहीं: सुनील भार्गव</title>
                                    <description><![CDATA[One Nation, One Election: जयपुर। एक राष्ट्र एक चुनाव जन जागरूकता अभियान के प्रदेश संयोजक सुनील भार्गव ने प्रेसवार्ता कर बताया कि स्वतंत्रता के बाद से अब तक लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के 400 से अधिक चुनावों ने निष्पक्षता और पारदर्शिता के प्रति भारत के चुनाव आयोग की प्रतिबद्धता को प्रदर्शित किया है। हालाँकि, अलग-अलग […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/rajasthan/one-nation-one-election-is-not-a-new-system-for-the-country-sunil-bhargava/article-67982"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2025-03/one-nation-one-election.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">One Nation, One Election: जयपुर। एक राष्ट्र एक चुनाव जन जागरूकता अभियान के प्रदेश संयोजक सुनील भार्गव ने प्रेसवार्ता कर बताया कि स्वतंत्रता के बाद से अब तक लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के 400 से अधिक चुनावों ने निष्पक्षता और पारदर्शिता के प्रति भारत के चुनाव आयोग की प्रतिबद्धता को प्रदर्शित किया है। हालाँकि, अलग-अलग और बार-बार होने वाले चुनावों की प्रकृति ने एक अधिक कुशल प्रणाली की आवश्यकता पर चर्चाओं को जन्म दिया है। इससे ह्यह्यएक राष्ट्र, एक चुनावह्यह्य की अवधारणा में रुचि फिर से जग गई है। One Nation One Election</p>
<p style="text-align:justify;">ह्यह्यएक राष्ट्र, एक चुनावह्यह्य के इस विचार को एक साथ चुनाव के रूप में भी जाना जाता है, जो लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के चुनावों को एक ही साथ कराने का प्रस्ताव प्रस्तुत करता है। इन चुनावी समय-सीमाओं को एक साथ जोड़ने के दृष्टिकोण का उद्देश्य चुनावों के लिए किए जाने वाले प्रबंध से जुड़ी चुनौतियों का समाधान करना, इसमें लगने वाले खर्च को घटाना और लगातार चुनावों के कारण कामकाज में होने वाले व्यवधानों को कम करना है।</p>
<p style="text-align:justify;">संयोजक सुनील भार्गव ने बताया कि भारत में एक साथ चुनाव कराने के संबंध में उच्च स्तरीय समिति की रिपोर्ट को 2024 में जारी किया गया था। रिपोर्ट ने एक साथ चुनाव के दृष्टिकोण को लागू करने के लिए एक व्यापक रूपरेखा प्रदान की। इसकी सिफारिशों को 18 सितंबर 2024 को केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा स्वीकार किया गया, जो चुनाव सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इस प्रक्रिया के समर्थकों का तर्क है कि इस तरह की प्रणाली प्रशासनिक दक्षता को बढ़ा सकती है, चुनाव संबंधी खर्चों को कम कर सकती है और नीति संबंधी निरंतरता को बढ़ावा दे सकती है। भारत में शासन को सुव्यवस्थित करने और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को उसके अनुकूल बनाने करने की आकांक्षाओं को देखते हुए एक राष्ट्र, एक चुनाव की अवधारणा एक महत्वपूर्ण सुधार के रूप में उभरी है जिसके लिए गहन विचार-विमर्श और आम सहमति की आवश्यकता है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">देश में पहले भी हो चुके एक साथ आम चुनाव | One Nation One Election</h3>
<p style="text-align:justify;">एक साथ चुनाव कराने की अवधारणा भारत में नई नहीं है। संविधान को अंगीकार किए जाने के बाद, 1951 से 1967 तक लोकसभा और सभी राज्य विधानसभाओं के चुनाव एक साथ आयोजित किए गए थे। लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के पहले आम चुनाव 1951-52 में एक साथ आयोजित किए गए थे। यह परंपरा इसके बाद 1957, 1962 और 1967 के तीन आम चुनावों के लिए भी जारी रही। हालाँकि, कुछ राज्य विधानसभाओं के समय से पहले भंग होने के कारण 1968 और 1969 में एक साथ चुनाव कराने में बाधा आई थी। चौथी लोकसभा भी 1970 में समय से पहले भंग कर दी गई थी, फिर 1971 में नए चुनाव हुए।</p>
<p style="text-align:justify;">पहली, दूसरी और तीसरी लोकसभा ने पांच वर्षों का अपना कार्यकाल पूरा किया। जबकि, आपातकाल की घोषणा के कारण पांचवीं लोकसभा का कार्यकाल अनुच्छेद 352 के तहत 1977 तक बढ़ा दिया गया था। इसके बाद कुछ ही, केवल आठवीं, दसवीं, चौदहवीं और पंद्रहवीं लोकसभाएं अपना पांच वर्षों का पूर्ण कार्यकाल पूरा कर सकीं। जबकि छठी, सातवीं, नौवीं, ग्यारहवीं, बारहवीं और तेरहवीं सहित अन्य लोकसभाओं को समय से पहले भंग कर दिया गया। इन घटनाक्रमों ने एक साथ चुनाव के चक्र को अत्यंत बाधित किया, जिसके कारण देश भर में चुनावी कार्यक्रमों में बदलाव का मौजूदा स्वरूप सामने आया है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">एक साथ चुनाव कराने के संबंध में उच्च स्तरीय समिति | Rajasthan News</h3>
<p style="text-align:justify;">भारत सरकार ने 2 सितंबर 2023 को पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की अध्यक्षता में एक साथ चुनाव कराने पर उच्च स्तरीय समिति का गठन किया था। इसका प्राथमिक उद्देश्य यह पता लगाना था कि लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के लिए एक साथ चुनाव कराना कितना उचित होगा। समिति ने इस मुद्दे पर व्यापक स्तर पर सार्वजनिक और राजनीतिक प्रतिक्रियाएं मांगीं और इस प्रस्तावित चुनावी सुधार से जुड़े संभावित लाभों और इसकी चुनौतियों का विश्लेषण करने के लिए विशेषज्ञों से परामर्श किया। यह रिपोर्ट समिति के निष्कर्षों, संवैधानिक संशोधनों के लिए इसकी सिफारिशों और शासन, संसाधनों तथा जन-मानस पर एक साथ चुनाव के अपेक्षित प्रभाव का विस्तृत अवलोकन प्रस्तुत करती है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">राजनीतिक दलों की प्रतिक्रियाएँ | Rajasthan News</h3>
<p style="text-align:justify;">47 राजनीतिक दलों ने इस विषय पर अपने विचार प्रस्तुत किए। इनमें से 32 दलों ने संसाधनों के सर्वोत्तम उपयोग और सामाजिक सद्भाव जैसे लाभों का हवाला देते हुए एक साथ चुनाव कराने का समर्थन किया। 15 दलों ने संभावित लोकतंत्र विरोधी प्रभावों और क्षेत्रीय दलों के हाशिए पर जाने से जुड़ी चिंताएं व्यक्त कीं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">विशेषज्ञ परामर्श</h3>
<p style="text-align:justify;">समिति ने भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीशों, पूर्व चुनाव आयुक्तों और विधि विशेषज्ञों से परामर्श किया। इनमें से अधिकाधिक लोगों ने एक साथ चुनाव कराने की अवधारणा का समर्थन किया और बार-बार चुनाव कराने से संसाधनों की बर्बादी तथा सामाजिक-आर्थिक बाधाओं पर ज़ोर दिया ।</p>
<h3 style="text-align:justify;">आर्थिक प्रभाव</h3>
<p style="text-align:justify;">सीआईआई, फिक्की और एसोचौम जैसे व्यापारिक संगठनों ने प्रस्ताव का समर्थन किया। उन्होंने बार-बार चुनाव से जुड़ी समस्याओं और खर्च में कमी लाकर आर्थिक स्थिरता पर इसके सकारात्मक प्रभाव को उजागर किया।</p>
<h3 style="text-align:justify;">कानूनी और संवैधानिक विश्लेषण</h3>
<p style="text-align:justify;">समिति ने भारतीय संविधान के अनुच्छेद 82ए और 324ए में संशोधन का प्रस्ताव रखा है, ताकि लोकसभा, राज्य विधानसभाओं और स्थानीय निकायों के लिए एक साथ चुनाव कराए जा सकें।</p>
<h3 style="text-align:justify;">एक साथ चुनाव कराने का औचित्य</h3>
<p style="text-align:justify;">पूर्व राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद की अध्यक्षता में एक साथ चुनाव कराने संबंधी उच्च स्तरीय समिति द्वारा जारी रिपोर्ट के निष्कष जारी किए। इसमें बताया गया कि देश के विभिन्न भागों में चल रहे चुनावों के कारण, राजनीतिक दल, उनके नेता, विधायक तथा राज्य और केंद्र सरकारें अक्सर शासन को प्राथमिकता देने के बजाय आगामी चुनावों की तैयारी पर अपना ध्यान केंद्रित करते हैं। एक साथ चुनाव कराने से सरकार का ध्यान विकासात्मक गतिविधियों और जन कल्याण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से नीतियों के कार्यान्वयन पर केंद्रित होगा।</p>
<p style="text-align:justify;">चुनावों के दौरान आदर्श आचार संहिता के कार्यान्वयन से नियमित प्रशासनिक गतिविधियाँ और विकास संबंधी पहल बाधित होती हैं। यह व्यवधान न केवल महत्वपूर्ण कल्याणकारी योजनाओं की प्रगति में बाधा डालता है, बल्कि शासन संबंधी अनिश्चितता को भी जन्म देता है। एक साथ चुनाव कराने से आचार संहिता के लंबे समय तक लागू होने की संभावना कम होगी, जिससे नीतिगत निर्णय लेने में देर नहीं होगी और शासन में निरंतरता संभव होगी।</p>
<p style="text-align:justify;">चुनाव ड्यूटी के लिए बड़ी संख्या में कर्मियों की तैनाती, जैसे कि मतदान अधिकारी और सरकारी अधिकारियों को उनकी मूल जिम्मेदारियों से हटाकर चुनाव कार्यों में लगाना संसाधनों के उपयोग के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है। एक साथ चुनाव आयोजित होने से, बार-बार तैनाती की आवश्यकता कम हो जाएगी, जिससे सरकारी अधिकारी और सरकारी संस्थाएं चुनाव-संबंधी कार्यों के बजाय अपनी प्राथमिक भूमिकाओं पर अधिक ध्यान केंद्रित कर सकेंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">देश भर में चल रहे चुनावों का चल रहा चक्र सुशासन से ध्यान भटकाता है। राजनीतिक दल अपनी जीत सुनिश्चित करने के लिए चुनाव-संबंधी गतिविधियों पर अधिक ध्यान केंद्रित करते हैं, जिससे विकास और आवश्यक शासन के लिए कम समय बचता है। एक साथ चुनाव पार्टियों को मतदाताओं की ज़रूरतों को पूरा करने के लिए अपने प्रयासों को समर्पित करने की अनुमति देते हैं, जिससे संघर्ष और आक्रामक प्रचार की घटनाओं में कमी आती है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">वित्तीय बोझ में कमी | One Nation One Election</h3>
<p style="text-align:justify;">एक साथ चुनाव कराने से कई चुनाव चक्रों से जुड़े वित्तीय खर्च में काफी कमी आ सकती है। यह मॉडल प्रत्येक व्यक्तिगत चुनाव के लिए मानव-शक्ति, उपकरणों और सुरक्षा संबंधी संसाधनों की तैनाती से संबंधित व्यय को घटाता है। इससे होने वाले आर्थिक लाभों में संसाधनों का अधिक कुशल आवंटन और बेहतर राजकोषीय प्रबंधन शामिल हैं, जो आर्थिक विकास और निवेशकों के विश्वास के लिए अनुकूल वातावरण को बढ़ावा देता है One Nation One Election</p>
<p><a title="IIFA Awards 2025: मुख्यमंत्री, उप मुख्यमंत्री से आईफा आयोजन समिति के सदस्यों ने मुलाकात कर दिया निमंत्रण" href="http://10.0.0.122:1245/iifa-organizing-committee-members-meet-chief-minister-deputy-chief-minister/">IIFA Awards 2025: मुख्यमंत्री, उप मुख्यमंत्री से आईफा आयोजन समिति के सदस्यों ने मुलाकात कर दिया निमं…</a></p>
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                                                            <category>लेख</category>
                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>विचार</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 05 Mar 2025 18:01:42 +0530</pubDate>
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                <title>One Nation One Election: वन नेशन-वन इलेक्शन लागू हुआ तो राजस्थान, यूपी-बिहार समेत इन राज्यों में बदल जाएगा चुनावी गेम, समझे पूरी डिटेल</title>
                                    <description><![CDATA[One Nation One Election: केंद्रीय कैबिनेट ने वन नेशन वन इलेक्शन पर पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की अध्यक्षता वाली समिति के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी हैं, बिल को शातकालीन में संसद से पास करा लिया जाएगा, जिसके बाद यह कानून बन जाएगा और इसके साथ ही देश में एक साथ चुनाव कराने के द्वार […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/if-one-nation-one-election-is-implemented-then-the-electoral-game-will-change-in-these-states-including-rajasthan-up-bihar/article-62456"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2024-09/one-nation-one-election-1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">One Nation One Election: केंद्रीय कैबिनेट ने वन नेशन वन इलेक्शन पर पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की अध्यक्षता वाली समिति के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी हैं, बिल को शातकालीन में संसद से पास करा लिया जाएगा, जिसके बाद यह कानून बन जाएगा और इसके साथ ही देश में एक साथ चुनाव कराने के द्वार भी खुल जाएंगे, तो आइए जानते हैं कि यदि एक देश एक चुनाव लागू किया जाता है और सभी विधानसभा चुनाव 2029 के लोकसभा चुनाव के साथ होंगे, तो कौन-कौन से राज्य में इसका क्या प्रभाव पड़ेगा।</p>
<p><a href="http://10.0.0.122:1245/these-leaves-will-suck-out-the-extra-sugar-from-your-veins-a-panacea-for-diabetes-patients/#google_vignette">नसों सें एक्स्ट्रा शुगर को चूस लेंगे ये पत्ते, डायबिटीज मरीज के लिए रामबाण इलाज, आयुर्वेद ने माना लोहा…</a></p>
<h3 style="text-align:justify;">पहले 22 राज्यों में कराने पडेंगे चुनाव | One Nation One Election</h3>
<p style="text-align:justify;">वन नेशन वन इलेक्शन लागू होने से आंध्र प्रदेश, अरुणआचल प्रदेश, ओडिशा और सिक्किम पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा, क्योंकि यहां लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ होते हैं, इसके अलावा 22 ऐसे राज्य हैं जहां समय से पहले चुनाव कराने होंगे। वन नेशन वन इलेक्शन लागू होने के बाद असम, बिहार, गोवा, गुजरात, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, झारखंड, कर्नाटक केरल महाराष्ट्र मणिपुर मेघालय नागालैंड दिल्ली पुडुचेरी पंजाब तमिलनाडु त्रिपुरा उत्तर प्रदेश उत्तराखंड जम्मू कश्मीर और पश्चिम बंगाल में समय से पहले चुनाव कराने होंगे।</p>
<h3 style="text-align:justify;">इन 5 राज्यों में देरी से कराएं जाएगे चुनाव | One Nation One Election</h3>
<p style="text-align:justify;">एक देश एक चुनाव लागू होता है तो छत्तीसगढ़, मजिरोम, मध्य प्रदेश, राजस्थान और तेलंगाना में देरी से चुनाव होंगे, सूचना एंव प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने प्रस्ताव को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने मिली मंजूरी की जानकारी देते हुए कहा कि पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की अध्यक्षता वाली समिति की सिफारिशों को आगे बढ़ाने के लिए एक क्रियान्वयन समूह का गठन किया जाएगा और अगले कुछ महीनों में देश भर के विभिन्न मंचों पर विस्तृत चर्चा की जाएगी उन्होंने बताया कि सरकार अपने मौजूदा कार्यकाल में इसे लागू कर देंगी।</p>
<p style="text-align:justify;">बता दें कि देश में 1951 से 1967 के बीच एक साथ चुनाव हुए थे, लेकिन उसके बाद मिड टर्म चुनाव सहित विभिन्न कारणों से चुनाव अलग-अलग समय पर होने लगे। इस वर्ष मई-जून में लोकसभा चुनाए हुए थे, जबकि ओडिशा, आंध्र प्रदेश, सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश जैसे राज्यों में भी संसदीय चुनाव के साथ ही विधानसभा चुनाव हुए।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>सच कहूँ विशेष स्टोरी</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 21 Sep 2024 11:23:43 +0530</pubDate>
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                <title>One Nation One Election: एक देश, एक चुनाव को मंजूरी, शीतकालीन सत्र में पेश होगा बिल</title>
                                    <description><![CDATA[One Nation One Election: नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)। केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने देश में लोकसभा, विधानसभाओं और स्थानीय निकायों के चुनाव एक साथ कराने के मोदी सरकार के महत्वाकांक्षी लक्ष्य ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ को लागू करने के संबंध में एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए इस बारे में रामनाथ कोविंद समिति की सिफारिशों को बुधवार […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/other-news/one-nation-one-election-news-2/article-62356"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2024-09/one-nation-one-election.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>One Nation One Election: नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)।</strong> केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने देश में लोकसभा, विधानसभाओं और स्थानीय निकायों के चुनाव एक साथ कराने के मोदी सरकार के महत्वाकांक्षी लक्ष्य ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ को लागू करने के संबंध में एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए इस बारे में रामनाथ कोविंद समिति की सिफारिशों को बुधवार को मंजूरी दे दी। सूचना और प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में हुई बैठक में लिए गये निर्णयों की जानकारी देते हुए एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘मंंत्रिमंडल ने आज एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है और एक राष्ट्र, एक चुनाव के संबंध में उच्चस्तरीय समिति की सिफारिशों को मंजूरी दे दी है।</p>
<p><a href="http://10.0.0.122:1245/new-railway-lines-will-be-laid-in-these-cities-of-rajasthan/">Rajasthan Railway: राजस्थान के इन शहरों में बिछाई जाएगी नई रेलवे लाईन, बनेंगे 10 रेलवे स्टेशन, जमीनों के बढ़ेंगे दाम, किसान होगा मालोमाल</a></p>
<p style="text-align:justify;">वैष्णव ने कहा कि सरकार इस व्यवस्था को दो चरणों में लागू करने पर विचार कर रही है। पहले चरण में लोकसभाओं और विधानसभाओं के चुनाव एक साथ कराने का प्रस्ताव है जबकि दूसरे चरण में इनके साथ ही स्थानीय निकायों के चुनाव भी कराये जायेंगे। उन्होंने कहा कि एक राष्ट्र,एक चुनाव के प्रस्ताव को देशभर में व्यापक समर्थन मिला है। इससे पहले संसद की कुछ समितियों तथा सामाजिक संगठनों ने भी इस प्रस्ताव की वकालत की है। उन्होंने कहा कि इससे आर्थिक वृद्धि को गति मिलेगी। उल्लेखनीय है कि कोविंद समिति ने अपनी सिफारिश में कहा है कि बार बार चुनाव के कारण आदर्श आचार चुनाव संहिता लागू होने से सरकारों के योजना संबंधी फैसले प्रभावित होते हैं और विकास के कार्यों की गति बाधित होती है। उल्लेखनीय है कि कोविंद समिति को दिये गये ज्ञापन में भारतीय जनता पार्टी और उसके तमाम सहयोगी दलों ने इस अवधारणा का स्पष्ट समर्थन किया था जबकि कांग्रेस , आम आदमी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी तथा तृणमूल कांग्रेस जैसे दलों ने इस पर अपनी अलग अलग आपत्तियां दर्ज करायी थी। जानकारों का कहना है कि सरकार को एक राष्ट्र एक चुनाव की व्यवस्था लागू करने के लिए संविधान में संशोधन का विधेयक लाना होगा।</p>
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                                                            <category>देश</category>
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                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 18 Sep 2024 15:56:45 +0530</pubDate>
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                <title>‘एक देश, एक चुनाव’ पर पीएम मोदी ने सभी दलों से की ये अपील</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी (Narendra Modi) ने गुरुवार को लाल किले की प्राचीर से ‘एक देश-एक चुनाव’ की व्यवस्था का आह्वान करते हुये सभी दलों से सहयोग की अपील की। मोदी ने 78वें स्वाधीनता दिवस पर राष्ट्र के नाम संबोधन में कहा कि देश में थोड़े-थोड़े अंतराल पर कहीं न कहीं […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/pm-modi-made-this-appeal-to-all-parties-on-one-country-one-election/article-61114"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2024-08/new-delhi-17.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)।</strong> प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी (Narendra Modi) ने गुरुवार को लाल किले की प्राचीर से ‘एक देश-एक चुनाव’ की व्यवस्था का आह्वान करते हुये सभी दलों से सहयोग की अपील की। मोदी ने 78वें स्वाधीनता दिवस पर राष्ट्र के नाम संबोधन में कहा कि देश में थोड़े-थोड़े अंतराल पर कहीं न कहीं चुनाव आ जाते हैं, जिससे देश की प्रगति में बाधा पड़ती है।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री (Narendra Modi) ने कहा कि ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ (एक देश, एक चुनाव) पर एक समिति ने सबसे चर्चा के बाद एक अच्छी रिपोर्ट दी है। मोदी ने संबोधन में कहा, ‘देश में बार-बार चुनाव, इस देश की प्रगति में रुकावट बन रहे हैं, गतिरोध पैदा कर रहे हैं। आज कोई भी योजना को चुनाव के साथ जोड़ देना आसान हो गया है, क्योंकि हर तीन महीने, छह महीने कहीं न कहीं चुनाव चल रहा है। उन्होंने कहा कि मीडिया को देखें तो देश में हर काम को चुनाव के रंग से रंग दिया गया है। उन्होंने कहा कि एक चुनाव के मुद्दे पर देश में व्यापक चर्चा हुई है तथा सभी राजनीतिक दलों ने अपने विचार रखे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">इस विषय में एक समिति (रामनाथ कोविंद समिति) ने बहुत बढ़िया रिपोर्ट तैयार की है। प्रधानमंत्री ने कहा, ‘वन नेशन, वन इलेक्शन के लिये देश को आगे आना होगा। मैं लाल किले से तिरंगे की साक्षी में देश के राजनीतिक दलों से आग्रह करता हूं, देश के संविधान को समझने वाले लोगों से आग्रह करता हूं कि भारत की प्रगति के लिये भारत के संसाधनों का सर्वाधिक उपयोग जनसामान्य के लिये हो, उसके लिये एक देश एक चुनाव के सपने को साकार करने के लिये हमें आगे आना चाहिये।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि यह भारत का स्वर्णिम कालखंड है और इसमें 2047 तक देश को विकसित भारत बनाना है। मोदी (Narendra Modi) ने कहा, ‘बाधायें, रुकावटें, चुनौतियां, उसको परास्त करके एक दृढ़संकल्प के साथ ये देश चलने के लिये प्रतिबद्ध है। और साथियों, मैं साफ देख रहा हूं, मेरे विचारों में कोई झिझक नहीं है। मेरे सपनों के सामने कोई पर्दा नहीं है। प्रधानमंत्री ने कहा कि अगर हमारे 40 करोड़ पूर्वज आजादी के सपनों को पूर्ण कर सकते हैं तो आज 140 करोड़ देशवासी भी समृद्ध और विकसित भारत के सपने को साकार कर सकते हैं। मोदी ने इस अवसर पर परिवारवाद, जातिवाद से भारत के लोकतंत्र को हो रहे बड़े नुकसान की बात की और कहा, ‘देश की राजनीति को हमें परिवारवाद और जातिवाद से मुक्ति दिलानी होगी।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने लाल किला मैदान पर दर्शक दीघार्ओं में उपस्थित ‘माई भारत’ के बैनर का उल्लेख करते हुये कहा कि इस संगठन के कई मिशनों में एक मिशन जल्द से जल्द देश में राजनीतिक जीवन में जनप्रतिनिधि के रूप में शुरूआत में एक लाख ऐसे नौजवानों को आगे लाना चाहते हैं, जिनके परिवार में किसी की भी कोई राजनीतिक पृष्ठभूमि नहीं हो, ‘जिसके माता-पिता, भाई-बहन, चाचा, मामाझ्रमामी कभी भी राजनीति में नहीं रहे। उन्होंने कहा कि ये युवा किसी भी राजनीतिक दल में जा सकते हैं। मोदी ने कहा कि ऐसे होनहार नौजवान नगर पालिका , जिला परिषद, विधानसभा या लोकसभा किसी स्तर की राजनीति में आयें ताकि जातिवाद से मुक्ति मिले, परिवारवाद से मुक्ति मिले, लोकतंत्र को समृद्धि मिले और जरूरी नहीं है कि एक दल में जायें, उनको जो पसंद हो उस दल में जायें। उन्होंने कहा कि इससे राजनीति में नयी ऊर्जा और नयी सोच आयेगी तथा भारत का लोकतंत्र समृद्ध होगा।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="Haryana: रक्षाबंधन पर महिलाओं को सीएम सैनी ने दिया बड़ा तोहफा, मिलेंगे इतने हजार रुपये, सीएम ने की घोषणा" href="http://10.0.0.122:1245/nayab-saini-announced-to-give-shagun-amount-to-the-anganwadi-workers-of-haryana-on-the-occasion-of-raksha-bandhan/">Haryana: रक्षाबंधन पर महिलाओं को सीएम सैनी ने दिया बड़ा तोहफा, मिलेंगे इतने हजार रुपये, सीएम ने की घो…</a></p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 15 Aug 2024 14:42:36 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>समय की मांग है ‘एक देश-एक चुनाव’</title>
                                    <description><![CDATA[One Nation One Election:- अब जबकि पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के नेतृत्व में ‘एक देश एक चुनाव’ पर विचार हेतु केंद्र सरकार ने एक समिति का गठन कर दिया है, तब यह मुद्दा बहुत विचारणीय हो गया है। स्वस्थ, टिकाऊ और विकसित लोकतंत्र वही होता है, जिसमें विविधता के लिए भरपूर जगह होती है, लेकिन […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/the-need-of-the-hour-is-one-country-one-election/article-51936"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-09/one-nation-one-election.gif" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">One Nation One Election:- अब जबकि पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के नेतृत्व में ‘एक देश एक चुनाव’ पर विचार हेतु केंद्र सरकार ने एक समिति का गठन कर दिया है, तब यह मुद्दा बहुत विचारणीय हो गया है। स्वस्थ, टिकाऊ और विकसित लोकतंत्र वही होता है, जिसमें विविधता के लिए भरपूर जगह होती है, लेकिन विरोधाभास नहीं होते। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भविष्योन्मुखी दृष्टि वाले नेतृत्व में विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र भारत धीरे-धीरे इसी दिशा में आगे बढ़ रहा है। ‘एक देश-एक टैक्स’ की सफलता ने इस बात को सही साबित किया है। अब तक देश के लगभग एक तिहाई राज्यों में लागू हो चुके ‘एक नेशन-एक राशन’ कार्यक्रम के ऐसे ही सकारात्मक परिणाम मिल रहे हैं। इसी प्रकार, एक देश-एक कानून (यूनिफॉर्म सिविल कोड) लागू किए जाने के विचार को भी जनता के एक विशाल वर्ग का अपार समर्थन मिल रहा है। One Nation One Election</p>
<p style="text-align:justify;">‘एक देश-एक चुनाव’ लोकसभा और राज्यों की विधानसभाओं का चुनाव एक साथ करवाने का एक नीतिगत उपक्रम है। इसे समझने के लिए हमें चुनाव की प्रक्रिया को समझना होगा। हमारे देश में केंद्र और सभी राज्यों में, केंद्र शासित प्रदेशों को छोड़कर, जनता द्वारा चुनी हुई सरकारें कार्य करती हैं। इनका कार्यकाल पांच वर्ष का होता है। ये कार्यकाल, किसी भी महीने पूरा हो सकता है। जब किसी निर्वाचित सरकार का पांच वर्ष का कार्यकाल पूरा हो जाता है, तो उस राज्य में अथवा केंद्र में एक निर्धारित अवधि के अंदर नए चुनाव कराना आवश्यक होता है, ताकि वहां नई सरकार गठित की जा सके और देश और उस प्रदेश का काम फिर से सुचारू ढंग से चलना सुनिश्चित किया जा सके। One Nation One Election</p>
<p style="text-align:justify;">चुनावों की प्रक्रिया को निर्बाध व निष्पक्ष ढंग से सम्पन्न कराने के लिए, काफी बड़े तंत्र व खर्च की आवश्यकता होती है। जितने ज्यादा चुनाव, उतनी ही ज्यादा व्यवस्था। 2023 को ही लें। इस साल राजस्थान, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, कर्नाटक, तेलंगाना, जम्मू-कश्मीर, त्रिपुरा, मेघालय, नागालैंड और मिजोरम सहित देश के दस राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं (इनमें से कुछ राज्यों में इस साल चुनाव हो चुके हैं)। इनमें कितने समय, धन और व्यवस्था की जरूरत पड़ेगी, इसका अंदाजा लगाना कोई मुश्किल काम नहीं है। ऊपर से, इन चुनावों के खत्म होते-होते लोकसभा चुनावों की गहमागहमी शुरू हो जाएगी। अब सोचिए कि यदि इन राज्यों के और लोकसभा के चुनाव एक साथ कराने की व्यवस्था की जा सके तो देश का कितना समय और धन बचेगा। One Nation One Election</p>
<p style="text-align:justify;">आज यदि हम देश के राजनीतिक परिदृश्य पर नजर डालें, तो पाएंगे कि हर वर्ष देश का कोई न कोई हिस्सा चुनावमय बना रहता है। लेकिन, शुरूआत में ऐसा नहीं था। देश के पहले आम चुनावों से लेकर अगले पंद्रह सालों तक, 1952, 1957, 1962, 1967 में चार बार लोकसभा चुनाव हुए और हर बार राज्यों की विधानसभाओं के चुनाव भी इनके साथ-साथ ही करवाए गए। लेकिन, जब 1968-69 में अलग-अलग कारणों से कुछ राज्यों की विधानसभाएं उनका कार्यकाल खत्म होने से पहले ही भंग कर दी गर्इं, तो यह सिलसिला बाधित हो गया। यहां तक कि पहली बार लोकसभा चुनाव भी समय से पहले ही करवा लिए गए। चौथी लोकसभा का कार्यकाल 1972 तक था, लेकिन आम चुनाव इसके पूरा होने से पहले ही 1971 में करवा लिए गए। सच तो यह है कि ‘एक देश, एक चुनाव’ की अवधारणा काफी पुरानी है।</p>
<p style="text-align:justify;">इस विषय पर संविधान समीक्षा आयोग, विधि आयोग, चुनाव आयोग और नीति आयोग जैसे प्रभावशाली संस्थानों की राय भी काफी सकारात्मक है। अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मजबूत नेतृत्व में राजग सरकार, राष्ट्रहित में इस विचार को और अधिक लटकाए न रखकर एक ठोस व साकार रूप देना चाहती है। ‘एक राष्ट्र एक चुनाव’ के पीछे सबसे बड़ा उद्देश्य तो यही है कि राजकोष पर पड़ने वाला चुनाव खर्च के बोझ को कम से कम किया जाए, जो पिछले कुछ दशकों में लगातार बढ़ता ही गया है। इसके अलावा थोड़े-थोड़े अंतराल के बाद होने वाले चुनावों के दौरान आचार संहिता लागू हो जाने से बहुत सारे विकास कार्य और जनहित कार्यक्रम बाधित होते हैं, इससे भी बचा जा सकेगा। One Nation One Election</p>
<p style="text-align:justify;">यदि हम खर्च की ही बात करें तो पिछले पैटर्न की बात करें तो पहले आम चुनावों से लेकर पिछले आम चुनावों तक उम्मीदवारों की संख्या करीब पांच गुना बढ़ी है, लेकिन चुनावों पर आने वाला खर्च पांच हजार गुना से भी ज्यादा हो गया है। 1951-52 में जब पहले लोकसभा चुनाव हुए थे, तो इनमें 53 राजनीतिक दल चुनावी समर में उतरे थे। इन चुनावों में 1874 उम्मीदवारों ने चुनाव लड़ा और खर्च आया कुल 11 करोड़ रुपए। अब 2019 के लोकसभा चुनावों को देखते हैं। इनमें कुल 9000 उम्मीदवारों ने चुनाव लड़ा और खर्च था लगभग 60 हजार करोड़ रुपए। यानि हर लोकसभा क्षेत्र पर औसतन 110 करोड़ का खर्च। जबकि 2014 के आम चुनावों पर इसका आधा ही यानी लगभग 30 हजार करोड़ रुपए खर्च आया था। One Nation One Election</p>
<p style="text-align:justify;">अब देश में विधानसभा सीटों की बात करते हैं। सभी राज्यों में कुल मिलाकर विधानसभा की चार हजार से अधिक सीटें हैं। मोटे-मोटे तौर पर एक लोकसभा क्षेत्र में करीब आठ विधानसभा सीटें आती हैं। यदि हम 2019 के आम चुनावों के खर्च को विधानसभा चुनावों के परिप्रेक्ष्य में देखें, तो यह लगभग 15 करोड़ रुपए प्रति विधानसभा सीट बैठता है। मान लीजिए कि एक लोकसभा सीट और उसके अंतर्गत आने वाली आठ विधानसभा सीटों के लिए दो अलग-अलग समय पर चुनाव होते हैं। ऐसे में यह खर्च दोगुना हो जाएगा। लेकिन, यदि हम इन्हीं चुनावों को एक साथ करवाएं तो इस खर्च को काफी हद तक कम किया जा सकता है। इससे जो धन राशि बचेगी, उसका उपयोग शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यावरण, पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित कराने जैसे कार्यों में किया जा सकता है, जिससे लोगों के जीवन स्तर में सुधार आएगा।</p>
<p style="text-align:justify;">केवल खर्च ही नहीं, बल्कि अन्य कई दृष्टि से भी ‘एक देश एक चुनाव’ का विचार काफी फायदेमंद है। इसमें प्रशासनिक तंत्र और सुरक्षा बलों पर बार-बार पड़ने वाला बोझ कम होगा, जिससे वे चुनावी गतिविधियों से बचा समय दूसरे उपयोगी कार्यों को दे सकते हैं। मतदाता सरकार की नीतियों को केंद्र व राज्य दोनों स्तर पर परख सकेंगे। बार-बार चुनाव होते रहने से शासन-प्रशासन के कार्यों में जो बाधाएं आती हैं, उनसे बचा जा सकेगा। साथ ही एक निश्चित अंतराल के बाद चुनाव कराए जाएंगे तो जनता को भी राहत मिलेगी और राजनीतिक दलों, चुनाव आयोग, चुनावों में सुरक्षा व्यवस्था संभालने वाली एजेंसियों को इनकी तैयारी के लिए पर्याप्त समय मिल सकेगा। One Nation One Election</p>
<p style="text-align:justify;">हालांकि, इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता कि भारत जैसे विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र में इस राह में बहुत सारी चुनौतियां भी सामने आ सकती हैं। इनमें सबसे बड़ी समस्या तो लोकसभा और विधानसभाओं के कार्यकाल के बीच सामंजस्य स्थापित करने की है। यदि हम 2024 के आम चुनावों को ही लें तो देश के करीब आधे राज्यों की विधानसभाएं इन चुनावों के दौरान ऐसी होंगी, जिन्होंने अपना आधा कार्यकाल भी पूरा नहीं किया होगा। ऐसे में उन्हें बीच में भंग कर नए चुनाव कराना बहुत सारे राजनीतिक विवादों का सबब बन सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">मान लीजिए कि राजनीतिक दल आपसी सहमति से इसके लिए तैयार भी हो जाते हैं, तो इस विचार को व्यावहारिक धरातल पर उतारने के लिए कई विधानसभाओं के कार्यकाल को घटाना पड़ेगा और कई के कार्यकाल को बढ़ाना होगा। इसके लिए संविधान में अनेक संशोधनों की आवश्यकता होगी। दक्षिण अफ्रीका, इंडोनेशिया, जर्मनी, स्पेन, हंगरी, स्लोवेनिया, अल्बानिया, पोलैंड, बेल्जियम जैसे दुनिया के कई ये देश हैं, जो केंद्र और राज्यों के चुनाव एक साथ ही कराते हैं, ताकि उनके विकास की गति बाधित न हो। भारत इन देशों के अनुभवों का लाभ उठा सकता है।                                                                                      <strong>प्रो. संजय द्विवेदी, वरिष्ठ लेखक एवं स्वतंत्र टिप्पणीकार</strong></p>
<p style="text-align:justify;"><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="कनाडा के वैंकूवर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर दो विमानों में टक्कर" href="http://10.0.0.122:1245/two-planes-collide-at-vancouver-international-airport-canada/">कनाडा के वैंकूवर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर दो विमानों में टक्कर</a></p>
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                                                            <category>विचार</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 04 Sep 2023 13:51:08 +0530</pubDate>
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                <title>एक राष्ट्र एक चुनाव संदेह को बढ़ावा देने वाला: स्टालिन</title>
                                    <description><![CDATA[चेन्नई (एजेंसी)। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम के स्टालिन (M. K. Stalin) ने रविवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाली केन्द्र सरकार के ‘एक राष्ट्र-एक चुनाव’ पर जोर देने की लोचना करते हुए इसे संदेह को बढ़ावा देने वाला बताया। स्टालिन ने कहा यह संघवाद को कमजोर करने का एक जबरदस्त प्रयास है, यह […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/one-nation-one-election-promoting-doubt-stalin/article-51924"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-09/modi-one-nation1.gif" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>चेन्नई (एजेंसी)।</strong> तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम के स्टालिन (M. K. Stalin) ने रविवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाली केन्द्र सरकार के ‘एक राष्ट्र-एक चुनाव’ पर जोर देने की लोचना करते हुए इसे संदेह को बढ़ावा देने वाला बताया। स्टालिन ने कहा यह संघवाद को कमजोर करने का एक जबरदस्त प्रयास है, यह लोकतंत्र नहीं बल्कि तानाशाही का नुस्खा है। उन्होंने यहां एक पार्टी पदाधिकारी के विवाह समारोह में कहा कि केंद्र की भाजपा सरकार का ‘एक राष्ट्र-एक चुनाव’ पर जोर देना हमारे संघीय ढांचे को कमजोर करने का एक जबरदस्त प्रयास है।’ उन्होंने कहा, ‘यह केंद्रीकृत शक्ति की ओर एक कदम है जो राज्यों के संघ, भारत के सार के खिलाफ है।’ One Nation One Election</p>
<p style="text-align:justify;">स्टालिन ने बाद में एक सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, यह अचानक घोषणा और उसके बाद पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द की अध्यक्षता में उच्च-स्तरीय समिति का गठन केवल संदेह को बढ़ावा देता है। ‘एक राष्ट्र एक चुनाव’ तानाशाही का नुस्खा है, लोकतंत्र का नहीं।’ उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाले राजग शासन पर तीखा हमला करते हुए कहा कि ‘एक राष्ट्र एक चुनाव’ लाने का विचार महज एक साजिश है और यह लोकतंत्र नहीं बल्कि तानाशाही है जिसका सामना आज देश कर रहा है। उन्होंने कहा, ‘पीएम मोदी ‘एक देश, एक चुनाव’ की साजिश रच रहे हैं। Chennai News</p>
<p style="text-align:justify;">द्रमुक के सुप्रीमो ने विपक्षी महागठबंधन ‘इंडिया गठबंधन’ पर कहा कि भाजपा इससे डरी हुई है। यह देश के संघीय ढांचे की रक्षा के लिए भाजपा को सत्ता से बाहर करने के मुख्य लक्ष्य के साथ बना है। उन्होंने कहा, ‘केंद्र ने पूर्व राष्ट्रपति को टीम का प्रमुख बनाया है। भले ही वह पूर्व राष्ट्रपति हैं, लेकिन उन्हें राजनीति से दूर रहना चाहिए। एक ऐसी टीम बनाई गई है जो भाजपा की आवाज पर चलती है। यह तानाशाही है। स्टालिन ने कहा, इंडिया गठबंधन की ‘मुंबई में आखिरी बैठक में, हमने विभिन्न टीमों का गठन किया। भाजपा ऐसी चीजों को देखकर डर गई है। अब सरकार ने संसद सत्र बुलाया है और समय से पहले चुनाव कराने की कोशिश की जा रही है। One Nation One Election</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="बीपीएल कार्ड व फैमिली आईडी पर आया बड़ा अपडेट" href="http://10.0.0.122:1245/government-should-remove-the-problems-coming-in-bpl-card-and-family-id-sandeep-garg/">बीपीएल कार्ड व फैमिली आईडी पर आया बड़ा अपडेट</a></p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 04 Sep 2023 10:49:36 +0530</pubDate>
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                <title>One Nation One Election: दुनिया के इन देशों में होते हैं एक साथ चुनाव, जानें भारत में कब बंद हुआ था ये सिस्टम</title>
                                    <description><![CDATA[One Nation One Election: भारत सरकार यानी पीएम मोदी की सरकार सालों से जिस ‘एक देश-एक चुनाव’ की बात करती आ रही थी, अब उसे अमलीजामा पहनाने की तैयारी शुरू कर दी है। दरअसल केंद्र सरकार ने अब एक कमेटी का गठन किया है। इसकी अध्यक्षता पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को सौंपी गई है। बता […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/elections-are-held-simultaneously-in-these-countries-of-the-world-know-when-this-system-was-stopped-in-india/article-51841"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-09/one-nation-one-election-2.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">One Nation One Election: भारत सरकार यानी पीएम मोदी की सरकार सालों से जिस ‘एक देश-एक चुनाव’ की बात करती आ रही थी, अब उसे अमलीजामा पहनाने की तैयारी शुरू कर दी है। दरअसल केंद्र सरकार ने अब एक कमेटी का गठन किया है। इसकी अध्यक्षता पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को सौंपी गई है। बता दें कि ये कमेंटी एक देश-ए चुनाव को लेकर काम करेंगी। वहीं सरकार ने इस कमेंटी का गठन ऐसे समय पर किया है, जब इस बात की चर्चा जोरो-शोरों पर है यानी इस बात की चर्चा जोर पकड़ रही है कि संसद के विशेष सत्र में एक देश-एक चुनाव को लेकर बिल लाया जा सकता है, संसद का विशेष सत्र 18 से 22 सितंबर तक चलेगा।</p>
<p style="text-align:justify;">दरअसल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अक्सर एक देश-एक चुनाव की वकालत करते रहे थे, पिछले महीने राज्यसभा में चर्चा के दौरान भी उन्होंने एक देश-एक चुनाव को समय की जरूरत बताया था। दरअसल एक साथ चुनाव कराने के समर्थन में एक तर्क यह भी दिया जाता है कि इससे सरकारी मशीनरी का सही इस्तेमाल हो सकेगा और बार-बार आचार संहिता न लगने से विकास कार्य पर भी असर नहीं पड़ेगा। वहीं भारत में इसे लेकर पहले शुरू हो गई है, लेकिन आपको बता दें कि दुनिया के कई देशों में पहले से ही ऐसी व्यवस्था है, वहां पहले से ही एक साथ सारे चुनाव होते हैं।‌</p>
<h3 style="text-align:justify;">किस किस देश में एक साथ होते हैं चुनाव | One Nation One Election</h3>
<p style="text-align:justify;">दरअसल दुनिया में कहीं ऐसे देश है जहां पर सारे चुनाव एक साथ किए जाते हैं यानी यहां पहले से ही सारे चुनाव एक साथ किए जाते हैं। ये कुछ देश है जहां एक साथ चुनाव किए जाते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>साउथ अफ्रीका:</strong> साउथ अफ्रीका में संसद, प्रांतीय विधानसभाओं और नगर पालिकाओं के चुनाव एक साथ होते हैं। यहां हर पांच साल में चुनाव कराए जाते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>स्वीडन:</strong> स्वीडन में भी एक साथ ही सारे चुनाव होते हैं। यहां हर 4 साल में आम चुनाव के साथ-साथ काउंटी और म्यूनिसिपल काउंसलि के चुनाव होते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>बेल्जियम:</strong> बेल्जियम में भी 5 तरह के चुनाव होते हैं और यह हर 5 साल के अंतर पर होते हैं। जानकारी के लिए बता दें कि ये सारे चुनाव एक साथ ही कराए जाते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>यूके:</strong> यूके में हाउस ऑफ कॉमन्स, स्थानीय चुनाव और मेयर चुनाव एक साथ में ही होते हैं। यहां पर मई के पहले हफ्ते में सारे चुनाव कराए जाते हैं।‌ यूके के संविधान के तहत, समय से पहले चुनाव तभी हो सकतें हैं जब सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पास हो जाए और दूसरी पार्टी सरकार न बना सकें। One Nation One Election</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>इंडोनेशिया:</strong> इंडोनेशिया में राष्ट्रपति और लेजिसलेटिव इलेक्शन साथ में होते हैं, इसके अलावा जर्मनी, फिलिपींस, ब्राजील, बोलीविया, कोलंबिया, कोस्टा रिका, ग्वाटेमाला, गुआना, जैसे देशों में भी एक साथ ही सारे चुनाव होते हैं।</p>
<p><a href="http://10.0.0.122:1245/one-nation-one-election-considered-a-big-decision/">एक देश, एक चुनाव : माना जा रहा बड़ा फैसला</a></p>
<p style="text-align:justify;">वहीं बता दें कि आज भले ही देश में लोकसभा और सभी विधानसभाओं के चुनाव एक साथ नहीं होते हो, लेकिन एक समय था जब सारे चुनाव एक साथ होते थे। देश की आजादी के बाद देश में पहली बार 1951-52 में लोकसभा चुनाव हुए थे। उस समय लोकसभा के साथ साथ सभी राज्यों के विधानसभा चुनाव भी कराएं गये थे। इससे बाद 1957, 1962 1967 में लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराए गए। लेकिन 1968 और 1969 में कई विधानसभा समय से पहले भांग भी की गई है वही 1970 में लोकसभा को समय से पहले भंग किया गया था 1970 के बाद ही ‘एक देश, एक चुनाव की परंपरा खत्म हो गई थी। इस तरह से एक साथ चुनाव कराए जाने का ये सिलसिला टूट गया।</p>
<p style="text-align:justify;">इसके बाद 1999 में लॉ कमीशन ने पहली बार अपनी रिपोर्ट में एक साथ चुनाव कराने की सिफारिश की थी। इसके बाद 2015 में संसदीय समिति ने भी ऐसा ही सुझाव दिया था। फिर अगस्त 2018 में लॉ कमीशन ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि मौजूदा संवैधानिक ढांचे के तहत एक साथ चुनाव नहीं कराया जा सकते, हालांकि कुछ संवैधानिक संशोधन कर ऐसा किया जा सकता है।</p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 02 Sep 2023 10:50:46 +0530</pubDate>
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                <title>एक देश, एक चुनाव : माना जा रहा बड़ा फैसला</title>
                                    <description><![CDATA[One Nation One Election: केंद्र सरकार ने 18 सितंबर से संसद में विशेष सत्र बुलाया है। इस घटना की गंभीरता का अनुमान इसी बात से लगाया जा सकता है कि सभी दलों में आंतरिक विचार-विमर्श जारी है। चर्चा के मुताबिक ही सरकार ने एक देश-एक चुनाव पर चर्चा के लिए संसदीय समिति का गठन किया […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/one-nation-one-election-considered-a-big-decision/article-51839"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-09/modi-one-nation.gif" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">One Nation One Election: केंद्र सरकार ने 18 सितंबर से संसद में विशेष सत्र बुलाया है। इस घटना की गंभीरता का अनुमान इसी बात से लगाया जा सकता है कि सभी दलों में आंतरिक विचार-विमर्श जारी है। चर्चा के मुताबिक ही सरकार ने एक देश-एक चुनाव पर चर्चा के लिए संसदीय समिति का गठन किया है। विपक्षी दल इस कमेटी पर हैरानी व्यक्त रहे हैं, लेकिन अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि सत्र में इस पर कार्रवाई होगी या नहीं। राजनीतिक गलियारों में विशेष सत्र को किसी बड़े फैसले के रुप में माना जा रहा है। जहां तक ​​लोकसभा और विधानसभा चुनाव का सवाल है, तो यह मामला पुराना है। One Nation One Election</p>
<p style="text-align:justify;">ऐसा 1970 से पूर्व होता रहा है। भारत विश्व का सबसे बड़ा व मजबूत लोकतंत्र है, जहां लगभग एक अरब मतदाता हैं। चुनाव लोकतंत्र की आत्मा हैं। चुनाव का विषय सुधार का विषय हैं, यदि चुनाव एक साथ कराए जाएं तो इसके कई फायदे हो सकते हैं। अरबों रुपये के खर्च को बचाया जा सकता है। फिर भी इस विचार पर आपत्तियां भी उचित हो सकती हैं। यदि संपूर्ण चर्चा के बाद बिल पेश किया जाता है तो इससे देशों को लाभ हो सकता है। चुनाव प्रक्रिया में सुधार होना अति आवश्यक है, लेकिन इस निर्णय के पीछे मंशा क्या है, यह भी साफ होना चाहिए। One Nation One Election</p>
<p style="text-align:justify;">नि:संदेह देश को आर्थिक रूप से सुदृढ़ बनाने के लिए फिजूलखर्ची को कम करना होगा अन्यथा हमारा देश चुनावों का देश बनकर रह जाएगा। कभी लोकसभा चुनाव आते हैं, कभी विधानसभा, पंचायत, कभी शहरी, कभी उपचुनाव। देश की पहले लोकसभा चुनाव केवल दस करोड़ खर्च पर हुए थे। 2019 में यह खर्च बढ़कर आठ अरब को पार कर गया। एक रिपोर्ट के मुताबिक, सरकारी व गैर-सरकारी खर्चों को जोड़ा जाए तो यह खर्च 60 हजार करोड़ के करीब पहुंच जाता है। यदि चुनाव का आधा खर्च भी बचा लिया जाए तो देश के हजारों स्कूलों, अस्पतालों, सड़कों, पुलों की तस्वीर बदल सकती है।</p>
<p style="text-align:justify;">विशेष रूप से दुर्गम पहाड़ी और रेगिस्तानी क्षेत्रों में सुरक्षा बलों की तैनाती और स्टाफ की तैनाती बहुत मुश्किल होती है। यदि यह निर्णय किसी राजनीतिक लाभ से ऊपर उठकर लिए जाएं तो अवश्य सुधार दिखेगा। बदलाव प्रकृति का हिस्सा है, फिर भी लोकतंत्र में असहमति और विरोध को भी स्थान दिया गया है। बेहतर होगा यदि सरकार व विपक्ष देश हित में बड़े निर्णयों के संबंध में सकारात्मक एवं जिम्मेदार व्यवहार का प्रमाण दें। One Nation One Election</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="जानें ‘One Nation’, ‘One Election’ से क्या होगा फायदा, पहली बार कब हुआ ‘एक देश एक चुनाव’" href="http://10.0.0.122:1245/one-nation-one-election-news/">जानें ‘One Nation’, ‘One Election’ से क्या होगा फायदा, पहली बार कब हुआ</a></p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>सम्पादकीय</category>
                                            <category>विचार</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 02 Sep 2023 10:32:39 +0530</pubDate>
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                <title>जानें &amp;#8216;One Nation&amp;#8217;, &amp;#8216;One Election&amp;#8217; से क्या होगा फायदा, पहली बार कब हुआ &amp;#8216;एक देश एक चुनाव&amp;#8217;</title>
                                    <description><![CDATA[One Nation One Election News:देश में एक ही चुनाव कराने को लेकर केंद्र सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया है। यानी केंद्र सरकार ने ‘वन नेशन’ , ‘वन इलेक्शन’ को लेकर बड़ा कदम उठाते हुए पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की अध्यक्षता में समिति का गठन किया है। दरअसल रामनाथ कोविंद को इस समिति का अध्यक्ष […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/one-nation-one-election-news/article-51821"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-09/one-nation-one-election-1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">One Nation One Election News:देश में एक ही चुनाव कराने को लेकर केंद्र सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया है। यानी केंद्र सरकार ने ‘वन नेशन’ , ‘वन इलेक्शन’ को लेकर बड़ा कदम उठाते हुए पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की अध्यक्षता में समिति का गठन किया है। दरअसल रामनाथ कोविंद को इस समिति का अध्यक्ष बनाया गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">यह समिति इस मुद्दे पर विचार करने के बाद अपने रिपोर्ट सौंपेगी और इसके बाद ही यह तय होगा कि आने वाले समय में क्या सरकार लोकसभा चुनाव के साथ ही सभी राज्य में विधानसभा के चुनाव कराने की तैयारी करेगी या नहीं। वहीं पिछले कई सालों से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी विधानसभा और आम चुनाव को एक साथ करने के विचार पर जोर दे रहे हैं। लेकिन ऐसा करना आसान नहीं होगा लेकिन ऐसा क्यों चलिए और अगर ऐसा हो गया तो इसके क्या फायदे होंगे। ‌</p>
<p style="text-align:justify;">वन नेशन वन इलेक्शन को लागू करने में कई तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है इसे लागूं करने में सबसे पहले संविधान में संशोधन करना होगा। लोकसभा का कार्यकाल या तो बढ़ाना होगा या फिर समय से पहले इसे खत्म करना होगा, इतना ही नहीं कुछ विधानसभा का कार्यकाल बढ़ाना भी पड़ सकता है, जबकि कुछ विधानसभा का कार्यकाल समय से पहले खत्म करना होगा। इसे लागू करने से पहले सभी दलों में आम राय बनाना जरूरी है, हालांकि एक देश एक चुनाव को लेकर चुनाव आयोग पहले ही कह चुका है कि वह इसके लिए तैयार है। वहीं खास बात यह है कि अगर देश में एक चुनाव को लागू भी किया जाता है तो पंचायत और नगर पालिकाओं के चुनाव इसके तहत नहीं कराएं जा सकते। ऐसा इसलिए भी क्योंकि यह राज्य के विषय है।</p>
<p><a href="http://10.0.0.122:1245/khansi-phlegm-ilaj/">Khansi/Phlegm Ilaj: खांसी या कफ से सिर दर्द का क्या है कनेक्शन जानें, ऐसे में क्या लेना चाहिए एक्शन?</a></p>
<h3 style="text-align:justify;">क्या देश में पहली बार है ‘वन नेशन’ , ‘वन इलेक्शन’? One Nation One Election</h3>
<p style="text-align:justify;">अगर केंद्र सरकार देश में एक देश एक चुनाव को लागू करती है तो यह कोई पहली बार नहीं होगा जब इस तरह देश में चुनाव कराए जाएंगे। इससे पहले भी वर्ष 1952, 1957, 1962 1967 में लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराए जा चुके हैं। 1968 और 1969 में कई विधानसभा समय से पहले भांग भी की गई है वही 1970 में लोकसभा को समय से पहले भंग किया गया था 1970 के बाद ही ‘एक देश, एक चुनाव की परंपरा खत्म हो गई थी।</p>
<h3 style="text-align:justify;">एक देश एक चुनाव से क्या फायदा होगा? One Nation One Election</h3>
<p style="text-align:justify;">अगर देश में एक देश एक चुनाव की परंपरा लागू हो जाए तो इससे चुनाव में पैसों की बर्बादी बचेगी, साथ ही राज्यों के मुताबिक बार-बार चुनाव कराने की चुनौती से भी मुक्ति मिलेगी। जानकारी के मुताबिक ऐसा करने से चुनाव में इस्तेमाल होने वाले काले धन पर भी लगाम लगाया जा सकता है, साथ ही साथ सरकारी संसाधनों का उपयोग सीमित होगा और इससे देश में विकास कार्यों की रफ्तार पर भी कोई असर नहीं पड़ेगा।</p>
<h3 style="text-align:justify;">‘एक देश एक चुनाव’ को लागू करने में आएगी ये चुनौती | One Nation One Election</h3>
<p style="text-align:justify;">जानकारी के अनुसार ‘एक देश एक चुनाव’ को लागू करने से केंद्र में बैठी सरकार के दल को फायदा संभव है। ऐसा हुआ तो जिस दल की केंद्र में सरकार है वो ही अन्य राज्यों में भी सरकार बन सकती है।वहीं इस परंपरा के शुरू होने से छोटे दलों को नुकसान भी हो सकता है, साथ ही इसके लागूं होने के बाद चुनावी नतीजों में भी देरी हो सकती है।</p>
<blockquote class="wp-embedded-content"><p><a href="http://10.0.0.122:1245/coconut-oil-and-aloe-vera/">Coconut Oil And Aloe Vera: जब एलोवेरा जेल और नारियल तेल के फायदे हैं बेमिसाल फिर केमिकल युक्त प्रोडक्ट्स का क्यों करना है इस्तेमाल?</a></p></blockquote>
<p><iframe class="wp-embedded-content" title="“Coconut Oil And Aloe Vera: जब एलोवेरा जेल और नारियल तेल के फायदे हैं बेमिसाल फिर केमिकल युक्त प्रोडक्ट्स का क्यों करना है इस्तेमाल?” — Sach kahoon - Best Online Hindi News" src="http://10.0.0.122:1245/coconut-oil-and-aloe-vera/embed/#?secret=7T9Nfkn1SC%23?secret=bPWyrzEJnU" width="500" height="282" frameborder="0"></iframe></p>
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                <pubDate>Fri, 01 Sep 2023 13:58:07 +0530</pubDate>
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