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                <title>सिख विरोधी दंगे 1984: सुप्रीम कोर्ट ने SIT को दिया जांच पूरी करने के लिए दो महीने का वक्त</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली (एजेंसी)।  सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को 1984 के सिख विरोधी दंगों पर सुनवाई करते हुए एसआईटी को 186 मामलों में अपनी जांच पूरी करने के लिए दो महीने का वक्त और दिया है। दरअसल, 2017 में सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में एसआईटी जांच की मांग करने वाली याचिका पर उत्तर प्रदेश सरकार […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><p><strong>नई दिल्ली (एजेंसी)। </strong> सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को 1984 के सिख विरोधी दंगों पर सुनवाई करते हुए एसआईटी को 186 मामलों में अपनी जांच पूरी करने के लिए दो महीने का वक्त और दिया है। दरअसल, 2017 में सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में एसआईटी जांच की मांग करने वाली याचिका पर उत्तर प्रदेश सरकार को नोटिस दिया था, जिसके बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने इन मामलों की जांच के लिए एक एसआईटी का गठन किया था।</p>
<h2>जानें पूरा मामला</h2>
<p>31 अक्टूबर 1984 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की उनके दो सिख बॉडीगार्डों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी। इसके बाद देश के कई हिस्सों में हिंसा भड़की और लोगों ने सिखों को निशाना बनाना शुरु कर दिया था। दिल्ली में हुआ कत्लेआम के बाद कानपूर में भी सबसे ज्यादा सिखों को मारा गया था।</p>
<p>कानपुर में 300 से अधिक सिखों के मारे जाने और सैकड़ों घर तबाह होने के आरोप लगे थे। हालांकि इस मामले की जांच करने वाले रंगनाथ मिश्रा आयोग ने महज 127 सिखों की मौत को दर्ज किया था। सिखों का आरोप है कि कानपुर में सिखों का कत्लेआम किया गया था, लेकिन इस मामले में बहुत दिनों तक कोई एफआईआर दर्ज नहीं की गई थी। बाद में जब एफआईआर दर्ज की गई तो स्टेटस रिपोर्ट में कोई पुख्ता सबूत नहीं होने की बात कहकर केस को खत्म कर दिया गया था।</p>
<h2>सज्जन कुमार दोषी</h2>
<p>गुरुवार को भी सुल्तानपुरी क्षेत्र में हुए सिख विरोधी दंगे के एक मामले की सुनवाई करते हुए पटियाला हाउस कोर्ट में गवाह जोगिद्र सिंह ने मामले में आरोपित सज्जन कुमार की पहचान की थी। सिंह ने कहा कि दंगे में उनके भाई की हत्या कर दी गई थी और सज्जन कुमार भीड़ का नेतृत्व कर रहा था। सज्जन उस भीड़ को दिशा-निर्देश दे रहा था, जो सिख समुदाय के लोगों को मार रही थी। दिल्ली सिख दंगों को लेकर सज्जन कुमार को दोषी करार देते हुए पिछले साल 17 दिसंबर को दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा सुनाए गए फैसले में उम्रकैद की सजा सुनाई थी।</p>
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                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
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                <pubDate>Fri, 29 Mar 2019 12:54:12 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>फ्रांस में भी गरमाया राफेल मुद्दा,  NGO ने की जांच की मांग</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली(एजेंसी, Edited By Vijay Sharma)।   राफेल डील को लेकर देश की राजधानी में भूचाल आ गया है। सड़क से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक राफेल डील का मामला ​छाया हुआ है। केवल भारत ही नहीं, फ्रांस में भी यह मुद्दा गरमा चुका है। फ्रांस के एक एंटी-करप्शन एनजीओ ने इस डील पर सवाल उठाते हुए […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/national-anti-corruption-ngo-demands-rafale-inquiry/article-6681"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-11/rafale.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली(एजेंसी, Edited By Vijay Sharma)। </strong>  राफेल डील को लेकर देश की राजधानी में भूचाल आ गया है। सड़क से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक राफेल डील का मामला ​छाया हुआ है। केवल भारत ही नहीं, फ्रांस में भी यह मुद्दा गरमा चुका है। फ्रांस के एक एंटी-करप्शन एनजीओ ने इस डील पर सवाल उठाते हुए फ्रांसीसी राष्ट्रीय वित्तीय अभियोजक के कार्यालय में एक शिकायत दर्ज कराई है।</p>
<p style="text-align:justify;">खबरों के अनुसार, सितंबर 2016 में भारत और फ्रांस के बीच हस्ताक्षर की गई 59,000 करोड़ रुपए की राफेल डील की जांच की मांग की गई है। शेरपा नामक एनजीओ ने अपनी शिकयत में राफेल लड़ाकू विमान के निर्माता दसॉ एविएशन द्वारा भ्रष्टाचार के संभावित कृत्यों, अनुचित फायदे और मनी लॉंन्डरिंग जैसे मामलों की जांच के लिए अनुरोध किया गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">एनजीओ शेरपा के संस्‍थापक विलियम बोर्डन के अनुसार इस डील में जो कुछ भी हुआ, वह गंभीर है। यह शिकायत पूर्व मंत्री और भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई लड़ने वाले एक वकील की ओर से सीबीआई में दायर शिकायत के आधार पर की गई है। यह शिकायत अक्टूबर के अंत में राष्ट्रीय वित्तीय अभियोजक के कार्यालय के साथ दर्ज की गई थी, जिसमें परिस्थितियों की जांच की मांग की गई है।</p>
<h2 style="text-align:justify;">क्या है मामला</h2>
<p style="text-align:justify;">बता दें कि इस डील के तहत दसॉ द्वारा उत्पादित 36 लड़ाकू विमान भारत को बेचे जाने हैं। पिछले कई महीनों से कांग्रेस और राहुल गांधी राफेल लड़ाकू विमान सौदे पर सवाल खड़े करते आए हैं। उनका आरोप है कि संप्रग सरकार के समय विमान की तय कीमत के मुकाबले मोदी सरकार ज्यादा कीमत अदा कर रही है। इस सौदे में ऑफसेट साझेदार के तौर पर हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स को उपेक्षित रखा गया और रिलायंस डिफेंस को फायदा पहुंचाया गया है। सरकार की तरफ से कांग्रेस और राहुल गांधी के इन आरोपों को सिरे से खारिज किया गया है।</p>
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                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 24 Nov 2018 11:18:27 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>भारत विरोधी है महबूबा का बयान</title>
                                    <description><![CDATA[जम्मू कश्मीर की सत्ता जाते ही, महबूबा मुफ्ती के स्वर भी बदलने लगे हैं। उन्होंने अभी हाल ही में कहा है कि उनकी पार्टी को तोड़ने के प्रयास किए गए तो कश्मीर में 1990 जैसे हालात बन जाएंगे, इस बयान से ऐसा ही लगता है कि जैसे 1990 के हालात के लिए पीडीपी ही जिम्मेदार […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/indias-anti-mehbooba-statement/article-4845"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-07/mahbooba.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">जम्मू कश्मीर की सत्ता जाते ही, महबूबा मुफ्ती के स्वर भी बदलने लगे हैं। उन्होंने अभी हाल ही में कहा है कि उनकी पार्टी को तोड़ने के प्रयास किए गए तो कश्मीर में 1990 जैसे हालात बन जाएंगे, इस बयान से ऐसा ही लगता है कि जैसे 1990 के हालात के लिए पीडीपी ही जिम्मेदार है, वह जानती है कि ऐसे हालात कैसे बनाए जाते हैं। महबूबा मुफ्ती का आतंकवादियों के प्रति उनका नरम रवैया किसी से छिपा नहीं रहा है। अब तो उन्होंने आतंकी पैदा करने की धमकी देकर अपने अंदर आतंकियों व पाकिस्तान के प्रति छिपे प्रेम को सरेआम उजागर कर दिया है। उन्होंने यह कहकर आतंकियों की पैरवी की है कि यदि उनकी पार्टी में तोड़फोड़ की गई तो सलाउद्दीन व यासिन मलिक जैसे आतंकवादी पैदा होंगे। आतंकी पैदा करने की बात करके महबूबा मुफ्ती देश को क्या संदेश देना चाहती हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">महबूबा मुफ्ती को यह समझना चाहिए कि उनकी पार्टी के अंदर जो भी चल रहा है, वह उन्हीं के कर्मों का फल है। वह खुद तो अपना घर संभाल नहीं पा रही है और दूसरों पर इसका दोषारोपण मढ़ कर अपनी नाकामियों को छिपाने में लगी हुई है। पीडीपी की वास्तविकता यह है कि यह पार्टी केवल एक परिवार की पार्टी बनकर रह गई है। इसमें आम कार्यकतार्ओं के बारे में सौतेला व्यवहार किया जाता है। चाहे पार्टी में कोई पद देने की बात हो या फिर सत्ता की मलाई खाने की बात हो, महबूबा ने दोनों में अपने परिवार के लोगों को महत्व दिया। ऐसे में पार्टी में बगावत होना एक स्वाभाविक प्रक्रिया है।</p>
<p style="text-align:justify;">जम्मू कश्मीर में दूसरी पार्टी नेशनल कान्फ्रेंस की बात की जाए तो कमोवेश उसके हालात भी लगभग पीडीपी जैसे ही हैं, उसके नेता भी केवल अपने परिवार पर केन्द्रित करके पूरी पार्टी का संचालन करते दिखाई देते हैं। इन्होंने भी अपने बयानों के माध्यम से अलगाववादी नेताओं का समर्थन करने जैसे बयान दिए हैं। जम्मू कश्मीर में चुनाव के बाद जब पीडीपी के साथ भाजपा ने गठबंधन कर सरकार बनाई, तब महबूबा को भाजपा ने कश्मीर की जनता के हितों को ध्यान में रखकर उसका समर्थन किया, लेकिन महबूबा का रवैया नहीं बदला। महबूबा मुफ्ती ने कश्मीरी हिन्दुओंं को घाटी में बसाने के लिए भी कोई कदम नहीं उठाए।</p>
<p style="text-align:justify;">भारतीय जनता पार्टी का कश्मीरी हिन्दुओं के बारे में प्रारंभ से ही यह उद्देश्य रहा है कि कैसे भी करके उनकी वापसी के बारे में सोचा जाए, लेकिन महबूबा शुरू से ही इस तिकड़म में लगी रहीं कि विस्थापित कश्मीरी पंडितों का मुद्दा ही न उठ पाए। उल्लेखनीय है कि कश्मीर में अलगाववादी आतंकियों के बढ़ते प्रभाव और उन्हें मिले राजनीतिक संरक्षण के चलते कश्मीरी हिन्दुओं को वहां से विस्थापित होना पड़ा।</p>
<p style="text-align:justify;">पूरा देश इस बात का गवाह है कि महबूबा मुफ्ती के मुख्यमंत्रित्व वाले कार्यकाल में किस तरह से रमजान के दिनों में आंतकवादियों और पत्थरबाजों ने वहां तांडव किया। बेगुनाह लोगों का कत्ल किया गया, पत्रकारों की हत्या हुई। इसे या तो राज्य सरकार की नाकामी कहा जा सकता है या आतंकियों को ऐसा करने के लिए राजनीतिक संरक्षण माना जा सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">यह बात सही है कि महबूबा की सरकार ने आतंकियों के विरोध में वैसे कदम नहीं उठाए जैसे उठाने चाहिए। यानी उनकी सरकार का आतंकियों के बारे में हमेशा नरम रवैया ही रहा। अपनी जिम्मेदारी का ठीक से निर्वहन नहीं करना ही सरकार की बहुत बड़ी विफलता थी, ऐसे में भाजपा ने समर्थन वापस लिया तो यह कदम न्याय संगत ही कहा जाना चाहिए। लेकिन अब महबूबा ने अपना असली रुप दिखा दिया है, उनका भाजपा के प्रति दोस्ताना रवैया कम, आतंकियों के प्रति उदारता ज्यादा दिखाई। इससे जम्मू कश्मीर के हालात और बिगड़ते जा रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">उधर, केंद्र सरकार ने विकास के लिए जो पैकेज दिए उसे भी जम्मू कश्मीर की जनता की भलाई के लिए नहीं लगाया गया। वह केवल आतंकियों को सुरक्षित करने वाले एजेंडा पर ही काम करती हुई दिखाई दे रही थीं। कश्मीर में सेना पर हमला करने वाले पत्थरबाजों को बच्चा कहकर उन्हें माफ किया गया। एक तरह से कानून व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा गई थी।</p>
<p style="text-align:justify;">अब कह सकते हैं कि जब से वहां राज्यपाल शासन लागू हुआ है तब से हालातों में सुधार हैं। सारे पत्थरबाज किसी गुफा में छिप गए हैं। खूंखार आतंकवादी मारे जा रहे हैं। कई आतंकवादी जंगलों में छिप गए हैं। ऐसे में जिन राजनीतिक दलों का आतंकियों को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष समर्थन मिलता रहा है, उन्हें अब दर्द तो होगा ही। अब आतंकियों को किसी भी प्रकार का सरकारी संरक्षण नहीं मिल रहा, इसलिए महबूबा ने और आतंकी पैदा करने की बात कही है।</p>
<p style="text-align:justify;">कश्मीर में राज्यपाल शासन लगने के बाद अब जब कश्मीर में शांति व्यवस्था कायम होने लगी है, आतंकवादियों का सफाया हो रहा है और इस सैन्य कार्रवाई से पाकिस्तान भी घबराया हुआ है, तब ऐसे में महबूबा मुफ्ती का बयान निश्चित ही जम्मू कश्मीर के वातावरण में जहर घोलने जैसा है। उनके इस बयान से जाहिर होता है कि वह जम्मू कश्मीर में शांति नहीं चाहती है। वे जिस सलाहुद्दीन व यासीन मलिक जैसे आतंकियों के पैदा होने की धमकी दे रही हैं, उनका इतिहास किसी से छिपा नहीं है।</p>
<p style="text-align:justify;">इन दोनों ने ही अलग अलग आतंकवादी संगठन बनाकर देश को नुकसान ही पहुंचाया। सैयद सलाहुद्दीन हिजबुल मुजाहिदीन का सरगना है। उसने 1990 में अपना नाम यूसुफ शाह से बदलकर सैयद सलाहुद्दीन कर लिया था। सलाहुद्दीन ने 1987 में विधानसभा चुनाव लड़ा, लेकिन हार गया। उसी के बाद से उसने हाथों में बंदूक थाम ली। वहीं, यासीन मलिक जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (जेकेएलएफ) का प्रमुख है। वह कश्मीर को भारत से अलग करने की वकालत करता रहा है। कश्मीर में शांति से रहने वालों का खून बहाने में इन दोनों ने ही कोई कसर नहीं छोड़ी। अब तो सलाहुद्दीन को अमेरिका द्वारा अंतरराष्ट्रीय आतंकी भी घोषित किया जा चुका है।</p>
<p style="text-align:justify;">पीडीपी में जिस प्रकार के बगावत के सुर बढ़ रहे हैं, उसके मूल में महबूबा की नीतियां ही जिम्मेदार हैं। यह विद्रोही स्वर सरकार जाने के बाद से सुनाई दे रहे हैं, ऐसी बात नहीं है, लेकिन महबूबा पार्टी के घमासान को जिस प्रकार से मोड़ देने का प्रयास कर रही हैं, उससे ऐसा ही लगता है कि वर्तमान में वह बौखला रही हैं। हम जानते हैं कि जब भाजपा के साथ यहां सरकार थी, तब भी पीडीपी में बगावत के सुर सुनाई देते रहे हैं। अलबत्ता अब इतना जरूर हुआ कि भाजपा से समर्थन वापस लेने के बाद पीडीपी के असंतुष्ट विधायक खुल कर महबूबा के खिलाफ आ गए हैं और महबूबा इसका ठीकरा वह भाजपा पर फोड़कर अपना दामन बचाना चाहती हैं।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>सुरेश हिन्दुस्थानी</strong></p>
<p> </p>
<p> </p>
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                <pubDate>Sun, 15 Jul 2018 14:51:34 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मांगों को लेकर किसान-मजदूरों का फूटा गुस्सा</title>
                                    <description><![CDATA[सब तहसील दीनानगर में केंद्र और पंजाब सरकार की नीतियों के खिलाफ नारेबाजी की ख़ुदकशी करने वाले किसानों-मजदूरों के लिए मांगा 20 लाख का मुआवजा गुरदासपुर (सरबजीत)। कुल हिंद किसान सभा और खेत मजदूर सभा जिला गुरदासपुर द्वारा आज सब तहसील दीनानगर में केंद्र और पंजाब सरकार की किसान विरोधी नीतियों के खिलाफ नारेबाजी की […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/punjab/workers-protest-against-anti-farmer-policies/article-1273"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-06/raised-farmers1.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:justify;">सब तहसील दीनानगर में केंद्र और पंजाब सरकार की नीतियों के खिलाफ नारेबाजी की</h2>
<ul>
<li style="text-align:justify;"><strong>ख़ुदकशी करने वाले किसानों-मजदूरों के लिए मांगा 20 लाख का मुआवजा</strong></li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>गुरदासपुर (सरबजीत)</strong>। कुल हिंद किसान सभा और खेत मजदूर सभा जिला गुरदासपुर द्वारा आज सब तहसील दीनानगर में केंद्र और पंजाब सरकार की किसान विरोधी नीतियों के खिलाफ नारेबाजी की गई। किसान नेता मांग कर रहे थे कि किसानों और खेत मजदूरों के सभी कर्ज माफ किये जाएं और स्वामीनाथन कमीशन की सिफारिशें लागू की जाएं।</p>
<p>इसके इलावा उन्होंने प्रत्येक फसल का सरकारी भाव निर्धारित करने, हरेक किसान-खेत मजदूर की 60 साल के बाद 10 हजर रुपए पैंशन लगाने, फसलों की बर्बादी रोकने के लिए आवारा पशूओं का प्रबंध किये जाने, किसानों को यंत्र, दवाएं और खाद सस्ते रेटों पर दिए जाने, किसानों की कुर्कियां पूरी तरह से रोके जाने और खुदकुशी करने वाले किसानों-खेत मजदूर को 20 लाख रुपए का मुआवज बिना देरी के दिए जाने की मांगें भी रखी।</p>
<h2>मांगों की पूर्ति के लिए नायब तहसीलदार को दिया मांग पत्र</h2>
<p style="text-align:justify;">इस मौके पंजाब किसान सभा के जिलााध्यक्ष कामरेड बलबीर सिंह , पूर्व अध्यक्ष जसबीर सिंह, पंजाब खेत मजÞदूर सभा के जिलाध्यक्ष कामरेड सुखदेव सिंह काहलोंं और सर्व भारत नौजवान सभा के प्रांतीय सचिव सुभाष कैरे ने कहा कि अब तक जितनी भी सरकारें आई हैं किसी ने भी किसानों और खेत मजदूरों को उनके बनते हक नहीं दिए।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि चुनाव के दिनों में उनके साथ बड़े-बड़े वायदे और दावे किये जाते हैं परन्तु सरकार बनते ही सत्ताधारियों को सब वायदे भूल जाते हैं और वह किसानों के खिलाफ नीतियां बनाते हैं। इस मौके नेताओं ने प्रधान मंत्री व मुख्यमंत्री पंजाब के नाम मांग पत्र नायब तहसीलदार प्रेम कुमार को सौंपा और मांग की कि उनके मांगों को तुरंत पूरा किया जाए।</p>
<p style="text-align:justify;">इससे पहले संगठनोंं की तरफ से सीपीआई कार्यलय में जलसा किया गया और समूह नेता और किसान मार्च करते हुए सब तहसीलदार के कार्यलय पहुंचे। जहां पर किसानों और मजÞदूरों की तरफ केंद्र और पंजाब सरकार खिलाफ नारेबाजी की गई। इस मौके बलॉक प्रधान गुरदीप सिंह कलीजपुर, सुभाष चौंता, गुरचरन सिंह वालिया, तरसेम सिंह जंडी, ओंकार सिंह , सुरिन्दर सिंह काहलों, दर्शन पाल, सुखदेव राज अवांखा, दर्शन अवांखा, बलबीर सिंह ग्याला, मस्त राम, बऊ मसीह, कमल शर्मा, बब्बू शर्मा, सुनील कुमार कुंडे, जरनैल सिंह, अंग्रेज सिंह और चिमन लाल उपस्थित थे।</p>
<p style="text-align:justify;">
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                                                            <category>पंजाब</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 15 Jun 2017 23:13:40 +0530</pubDate>
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