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                <title>G20 Summit - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>विश्व राजनीति व अर्थव्यवस्था के लिए पांच सिद्धान्त</title>
                                    <description><![CDATA[G20 Summit : पिछले सप्ताह दिल्ली में आयोजित जी 20 शिखर सम्मेलन पूर्णत: सफल रहा। विदेशों से प्रधानमंत्री मोदी और उनकी टीम को इस सम्मेलन के सफल आयोजन के लिए बधाई दे रहे हैं और भारतीय टिप्पणीकार इस वैश्विक शिखर सम्मेलन के आयोजन से भारत को होने वाले लाभों को गिना रहे हैं। G20 Summit […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/rajasthan/five-principles-for-world-politics-and-economy/article-52413"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-09/g20-summit-1.gif" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>G20 Summit :</strong> पिछले सप्ताह दिल्ली में आयोजित जी 20 शिखर सम्मेलन पूर्णत: सफल रहा। विदेशों से प्रधानमंत्री मोदी और उनकी टीम को इस सम्मेलन के सफल आयोजन के लिए बधाई दे रहे हैं और भारतीय टिप्पणीकार इस वैश्विक शिखर सम्मेलन के आयोजन से भारत को होने वाले लाभों को गिना रहे हैं। G20 Summit</p>
<p style="text-align:justify;">इस शिखर सम्मेलन की सफलता का मापन करने के लिए अनेक मानदंडों का उपयोग किया जा सकता है जैसा कि ऐतिहासिक पहल जिसमें अफ्रीकी यूनियन को जी 20 में शामिल कर इसे जी 21 बनाना, जैव ईंधन एलाइंस और सम्मेलन में भाग ले रहे नेताओं द्वारा आम सहमति से घोषणा पत्र जारी करना, सम्मेलन के दौरान अनेक द्विपक्षीय बैठकें और बहुपक्षीयता पर बल देना। तथापि जी 20 में भारत की सबसे बड़ी सफलता अफ्रीकी संघ को जी 20 में शामिल करना है और इसके दो प्रमुख कारण हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">पहला, नई दिल्ली में वैश्विक राजनीति का पुनर्गठन किया गया। उत्तर का प्रतिनिधित्व करने वाला यूरोपीय संघ और दक्षिण का प्रतिनिधित्व करने वाला अफ्रीकी संघ एक ही मेज पर बैठ कर विश्व के मुद्दों पर चर्चा और उनका निर्णय कर रहे थे। दूसरा, ग्लोबल साउथ की आवाज अफ्रीकी संघ के 55 देशों के माध्यम से सुनने को मिली और इसे औपचारिक रूप से जी 20 का सदस्य बनाया गया।</p>
<p style="text-align:justify;">जी 20 के दिल्ली शिखर सम्मेलन की अन्य उपलब्धियां भी हैं। हालांकि इस शिखर सम्मेलन को सफल बनाने में अन्य देशों का सहयोग और योगदान भी रहा है। तथापि इस शिखर सम्मेलन के दौरान वार्ता और नेतृत्व कौशल के लिए पूर्ण श्रेय इसके अध्यक्ष भारत को दिया जाता है। भारत नवंबर 2022 से जी 20 की अध्यक्षता कर रहा है और उसने देश के विभिन्न भागों में इस संबंध में 200 से अधिक बैठकें की जिसमें एक लाख से अधिक प्रतिनिधियों ने भाग लिया।</p>
<p style="text-align:justify;">मोदी द्वारा नवंबर में इस संबंध में एक वर्चुअल रिपलेशन मीट का प्रस्ताव भी किया गया। विश्व के भविष्य के निर्माण के लिए प्रधानमंत्री मोदी द्वारा प्रयुक्त पांच सिद्धान्तों के माध्यम से इस शिखर सम्मेलन और उससे परे देखने का प्रयास किया गया। मोदी राष्ट्रीय और वैश्विक राजनीति में रणनीतियों के निर्माण और विद्यमान प्रवृतियों के लिए शब्द निर्माण में माहिर हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">अपने उद्घाटन भाषण में मोदी ने विश्व में व्याप्त विश्वास के अभाव पर चर्चा की और कहा कि इसे समाप्त किया जाना चाहिए और इसके लिए उन्होंने चार लोकप्रिय नारों पर आधारित राष्ट्रीय रणनीति को अपनाने का आह्वान किया जो सबका साथ, सबका विकास, सबका प्रयास और सबका विश्वास है और उन्होंने सबका विश्वास को वैश्विक विश्वास की पुनर्स्थापना से जोड़ा।</p>
<p style="text-align:justify;">अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मोदी ने वैश्विक भविष्य के निर्माण के लिए 5डी गढेÞ। आपको ध्यान होगा कि इस शिखर सम्मेलन का उद्देश्य कथन एक परिवार, एक धरती, एक भविष्य है और जो 5डी इस सम्मेलन के दौरान मोदी ने गढे वे हैं – डेमोक्रेसी, डेमोग्राफी, डेवलपमेंट, डायलॉग और डिप्लोमैसी। जी 20 के नई दिल्ली शिखर सम्मेलन में मोदी ने वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था के लिए इन पांच सिद्धान्तों को बढावा देने पर बल दिया। जी 20 की अध्यक्षता के रूप में भारत के प्रदर्शन पर विचार करना आवश्यक है जिसका समापन जी 20 शिखर सम्मेलन के रूप में हुआ है। G20 Summit</p>
<p style="text-align:justify;">वर्तमान में जी 20 विश्व में सबसे बडा मंच है क्योंG20 Summit कि संयुक्त राष्ट्र संघ पर पांच परमाणु शक्तियों के नियंत्रण और विश्व के मुद्दों पर किसी भी निर्णय लेने में किसी एक सदस्य द्वारा वीटो का स्वेच्छाचारी ढंग से प्रयोग करने के कारण संयुक्त राष्ट्र संघ अप्रभावी हो रहा है। तथापि जी 20 शिखर सम्मेलन में सबसे महत्वपूर्ण सिद्धान्त वार्ता है।</p>
<p style="text-align:justify;">स्पष्ट है कि विगत एक वर्ष के दौरान भारत ने वार्ता और कूटनीति के मामले में अच्छा प्रदर्शन किया है। मतभेदों के शांतिपूर्ण और सौहार्दपूर्ण समाधान के लिए वार्ता आवश्यक है। भारत वार्ता और कूटनीति पर बल दे रहा है कि ये दोनों चीजें साथ साथ चलनी चाहिए और यूक्रेन युद्ध की समाप्ति के लिए भी इनका प्रयोग किया जाना चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">मोदी ने अनेक बार कहा है कि अब युद्ध का समय नहंी रह गया है। हमें वार्ता और कूटनीति का सहारा लेना चाहिए। एक पुरानी कहावत है कि सभी युद्ध कूटनीति की विफलता का प्रतिनिधित्व करते हैं। कुछ तर्क कर सकते हैं कि जब कोई युद्ध के लिए आतुर हो तो उससे वार्ता की अपेक्षा करना हास्यास्पद है। किंतु दूसरी ओर नरेन्द्र मोदी ने कूटनीति का पूर्ण उपयोग किया। नई दिल्ली में शिखर सम्मेलन के आरंभ से एक दिन पूर्व वे आधे दिन के दौरे पर आसियान-भारत शिखर सम्मेलन और पूर्वी एशियाई शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए गए। G20 Summit</p>
<p style="text-align:justify;">इन शिखर सम्मेलनों में उनकी उपस्थिति इस बात का द्योतक है कि भारत इन शिखर सम्मेलनों को कितना महत्व देता है और इसके लिए उन्हें नई दिल्ली में आयोजित किए जा रहे जी 20 के लिए नेताओं की सद्भावना प्राप्त है। दूसरा, भारतीय वार्ताकार दल ने समझौतों और घोषणाओं के लिए एक अलग अलग वार्ता की।</p>
<p style="text-align:justify;">अफ्रीकी यूनियन को जी 20 में शामिल करने के प्रस्ताव का कोई भी देश सक्रिय रूप से इसका विरोध नहीं कर रहा था किंतु किसी ने भी इस दिशा में अग्रलक्षी कदम नहंी उठाए। भारत ने ऐसा किया। मोदी ने जी 20 के नेताओं को शिखर सम्मेलन से बहुत पहले लिखा कि क्या किसी को अफ्रीकी यूनियन को जी 20 में एक स्थायी सदस्य के रूप में शामिल करने पर कोई आपत्ति है और इस तरह उन्हें इन नेताओं की सहमति प्राप्त हुई।</p>
<p style="text-align:justify;">इसी तरह ब्लैक सी ग्रेन कॉरीडोर को पुन: शुरू करने, खाद्य सुरक्षा, डीपीआई, एसपीजी, बहुपक्षीय विकास बैंकों में सुधार, ग्लोबल साउथ के लिए राजनीतिक स्थान आदि मुद्दों पर कदम दर कदम सहमति बनायी गई। शेरपाओं और संबंधित मंत्रियों ने इस संबंध में वार्ता की और जहां आवश्यक हुआ वहां प्रधानमंत्री ने मार्गदर्शन दिया। विकास एक सतत् चलने वाली प्रक्रिया है और यह एक सापेक्ष अवधारणा है। कुछ देश अन्य देशों की तुलना में कम विकसित है और विकास का अलग अलग अर्थ भी है। कुछ देश इसका मापन सकल घरेलू उत्पादन से करते हैं तो कुछ देश सकल घरेलू खुशहाली से करते हैं। G20 Summit</p>
<p style="text-align:justify;">मोदी ने विकास के मापन के लिए सकल घरेलू उत्पाद के स्थान पर मानव केन्द्रित दृष्टिकोण अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने इस बात को रेखांकित किया कि महामारी ने हमें इस बदलाव के लिए मजबूर किया है तथापि विकास कुछ वैश्विक सिद्धान्तों पर आधारित होना चाहिए और वे हैं साझेदारी, समावेशी, न्यापूर्ण और सार्वभौमिक। जनांकिकी विकास और आर्थिक समृद्धि में एक महत्वपूर्ण कारक बन गया है। चीन की चमत्कारी आर्थिक वृद्धि का श्रेय उसके सस्ते श्रम को दिया जाता है किंतु जनांकिकी बदल गई है। चीन में अब जनसंख्या उम्रदराज हो गई है और उसकी श्रम लागत बढ रही है। G20 Summit</p>
<p style="text-align:justify;">दूसरी ओर भारत में लगभग 65 प्रतिशत जनसंख्या कार्य करने की उम्र में है। तथापि अपने जनांकिकीय लाभों का दोहन करने के लिए भारत के लिए आवश्यक है कि वह अपनी श्रम शक्ति को आधुनिक अर्थव्यवस्था के अनुकूल समुचित कौशल प्रशिक्षण दे। किसी भी देश में जनांकिकी को उचित अवसर और गरिमापूर्ण कार्य दशाओं के माध्यम से उत्पादक बनाया जाना चाहिए। ये सभी चार सिद्धान्त पांचवें सिद्धान्त अर्थात लोकतंत्र से जुड़े हुए हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">जी 20 से इतर जी 7 में सभी औद्योगिक लोकतांत्रिक देश शामिल हैं। चीन की आर्थिक विकास ने कुछ देशों को भ्रमित कर दिया है कि क्या चीन का मॉडल संपदा निर्माण के अनुकूल है। किंतु यह सच्चाई से परे है। किंतु चीनी अर्थव्यवस्था के बिना पश्चिमी देश भी कठोर विनियमों के साथ सस्ते श्रम की तलाश कर रहे हैं। अब जब चीन पश्चिमी सर्वोच्चता को चुनौती दे रहा है तो अब वे भारत और अन्य लोकतंत्रों की ओर मूड़ रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">स्थिरता, शांति और समृद्धि के लिए लोकतंत्र अपरिहार्य है। अंतत: मैं पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की टिप्पणी को उद्घत करना चाहता हूं ‘मैं भारत के भविष्य के लिए चिंतित नहीं हूं अपितु आशावादी हूं क्योंकि यह विश्व मंच पर सही मार्ग पर आगे बढ रहा है। किंतु भारत तभी समृद्ध होगा जब यहां पर सौहार्दपूर्ण समाज बना रहेगा।’ नि:संदेह किसी भी देश की विदेश नीति और उसकी अंतर्राष्ट्रीय छवि उसकी सीमाओं के भीतर उसके भूभाग में जो कुछ भी हो रहा है उसको परिलक्षित करता है। आशा की जाती है कि प्रधानमंत्री मोदी और उनकी टीम इस जमीनी वास्तविकता से परिचित होंगे। G20 Summit</p>
<p style="text-align:right;"><strong>डॉ. डीके गिरी,वरिष्ठ लेखक व स्वतंत्र टिप्पणीकार </strong><br />
<strong>(यह लेखक के अपने विचार हैं)</strong></p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="Earth: नासा ने रची इतिहास की नई कहानी, धरती से बड़े इस ग्रह पर भी है जीवन-पानी!" href="http://10.0.0.122:1245/nasa-created-a-new-story-of-history-there-is-life-and-water-even-on-this-planet-bigger-than-earth/">Earth: नासा ने रची इतिहास की नई कहानी, धरती से बड़े इस ग्रह पर भी है जीवन-पानी!</a></p>
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                                                            <category>लेख</category>
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                                            <category>राजस्थान</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 16 Sep 2023 14:21:27 +0530</pubDate>
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                <title>साउथ कोरिया के राष्टपति ने किया गुरूग्राम पुलिस का धन्यवाद</title>
                                    <description><![CDATA[गुरुग्राम (सच कहूँ न्यूज)। साउथ कोरिया के राष्ट्रपति ने अभेद्य सुरक्षा प्रबंधन के लिए गुरुग्राम पुलिस (Gurugram Police) को स्वदेश लौटते समय धन्यवाद कहा। गौरतलब है कि जी20 सम्मेलन में भाग लेने आए साउथ कोरिया के राष्ट्रपति यू सुक येओल अपनी पत्नी व डेलिगेट्स के साथ गुरुग्राम के उद्योग विहार स्थित ओबेरॉय होटल में ठहरे […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/south-korean-president-thanked-gurugram-police/article-52204"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-09/gurugram-news-1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>गुरुग्राम (सच कहूँ न्यूज)।</strong> साउथ कोरिया के राष्ट्रपति ने अभेद्य सुरक्षा प्रबंधन के लिए गुरुग्राम पुलिस (Gurugram Police) को स्वदेश लौटते समय धन्यवाद कहा। गौरतलब है कि जी20 सम्मेलन में भाग लेने आए साउथ कोरिया के राष्ट्रपति यू सुक येओल अपनी पत्नी व डेलिगेट्स के साथ गुरुग्राम के उद्योग विहार स्थित ओबेरॉय होटल में ठहरे थे। उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी गुरुग्राम पुलिस की थी। G20 मीटिंग के समापन उपरांत साउथ कोरिया के लिए प्रस्थान करते समय शनिवार को उन्होंने गुरुग्राम पुलिस द्वारा किए गए अभेद्य व अथक सुरक्षा प्रबंधन के लिए प्रशंसा की। पुलिस अधिकारियों से हाथ मिलाकर धन्यवाद किया। Gurugram News</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="इंटरस्टेट गुमजाल नाके पर जांच दौरान बस से 2 युवक पुलिस को देखकर भागे" href="http://10.0.0.122:1245/police-arrested-two-youths-during-investigation-at-interstate-gumjal-block/">इंटरस्टेट गुमजाल नाके पर जांच दौरान बस से 2 युवक पुलिस को देखकर भागे</a></p>
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                                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 10 Sep 2023 21:32:23 +0530</pubDate>
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                <title>G20 Summit: जी-20 का नेतृत्व एवं भारत के समक्ष चुनौतियां</title>
                                    <description><![CDATA[G20 Summit: जी-20 वैश्विक अर्थव्यवस्था की दशा और दिशा तय करने वाला दुनिया की बीस सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं का समूह है। यह वैश्विक स्तर पर आर्थिक मामलों को समझने और परस्पर सहयोग करने में बड़ी भूमिका निभाता है। दुनिया के राजनीतिक और आर्थिक मुद्दों पर विचार-विमर्श करना इसके एजेंडे का अहम बिन्दू है। यह विश्व […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/leadership-of-g-twenty-and-challenges-before-india/article-52187"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-09/g-20.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">G20 Summit: जी-20 वैश्विक अर्थव्यवस्था की दशा और दिशा तय करने वाला दुनिया की बीस सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं का समूह है। यह वैश्विक स्तर पर आर्थिक मामलों को समझने और परस्पर सहयोग करने में बड़ी भूमिका निभाता है। दुनिया के राजनीतिक और आर्थिक मुद्दों पर विचार-विमर्श करना इसके एजेंडे का अहम बिन्दू है। यह विश्व की दो-तिहाई से अधिक आबादी का प्रतिनिधित्व करता है। विश्व के कुल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में 80 फीसदी भागीदारी अकेले जी-20 देशों की रहती है। विश्व की 65 प्रतिशत से अधिक आबादी वाले इस संगठन की इस साल भारत अध्यक्षता कर रहा है। G20 Summit</p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>जी-20 का इतिहास | G20 Summit </strong></h3>
<p style="text-align:justify;">जी-20 की स्थापना का विचार 90 के दशक में उस वक्त अस्तित्व में आया जब दुनिया के अलग-अलग कोनों में स्थित विकसित और विकासशील देश आर्थिक एवं वित्तीय रूप से विभिन्न समस्याओं का सामना कर रहे थे। पूंजीवादी प्रभाव से उत्पन्न होने वाली समस्याओं के सामूहिक निराकरण की राह तलाशने के उदेश्य को लेकर जी-20 अस्तित्व में आया। समूह की स्थापना की परिकल्पना वर्ष 1999 के वैश्विक मंदी से निबटने के उपायों के लिए जी-7 देशों कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान, यूनाइटेट किंग्डम और संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा की गई थी।</p>
<p style="text-align:justify;">1998 में इस समूह में रूस भी जुड़ गया था और समूह का नाम जी- 7 से जी-8 हो गया। वर्ष 1999 में जर्मनी के कोलोन में जी-8 देशों की बैठक हुई इसमें एशिया के आर्थिक संकट पर चर्चा हुई इसके बाद दुनिया के बीस शक्तिशाली अर्थव्यवस्था वाले देशों को एक मंच पर लाने का फैसला किया गया। अत: 25 सिंतबर, 1999 को औपचारिक रूप से अमेरिका की राजधानी वाशिंगटन डीसी में जी-20 की स्थापना की गई। आगे चलकर जी-8 को राजनीतिक और जी-20 को आर्थिक मंच के रूप में स्वीकार किया गया। G20 Summit</p>
<p style="text-align:justify;">प्रांरभ में जी-20 केवल सदस्य देशों के वित्त मंत्रियों के वार्षिक सम्मेलनों तक सीमित था। लेकिन जब 2008 की वैश्विक मंदी ने यूरोपीय देशों की अर्थव्यवस्था को अपनी चपेट में लिया तो सदस्य देशों के राष्ट्राध्यक्ष और शासनाध्क्ष्ज्ञ स्वयं इस संगठन के वार्षिक सम्मेलनों में उपस्थित होकर आर्थिक मुददों पर चर्चा करने लगे। राष्ट्राध्यक्ष और शासनाध्यक्षों की उपस्थिति के कारण 2008 के बाद जी-20 और अधिक प्रासंगिक हो गया। वर्ष 2014 में क्रीमिया पर कब्जा कर लेने के कारण रूस को इस समूह से बाहर कर दिया गया। क्रीमिया पर कब्जे की घटना के बाद जी-20 की राजनीतिक इकाई अर्थात जी-8 पुन: जी-7 में बदल गया।</p>
<p style="text-align:justify;">आरंभ में जी-20 का एक मात्र उदेश्य केवल मध्यम आय वाले देशों की वित्तीय स्थिति को सुरक्षित करना था। लेकिन बाद में इसके एजेंडे में जलवायु परिवर्तन, सतत विकास, स्वास्थ्य, कृषि, ऊर्जा, पर्यावरण, भ्रष्टाचार विरोध और अन्य वैश्विक चुनौतियां के समाधान को भी शामिल कर लिया गया। हालांकि, अभी तक इसका कोई स्थायी मुख्यालय नहीं है। ऐसे में प्रतिवर्ष जिस देश द्वारा जी-20 शिखर बैठक की अध्यक्षता की जाती है, वही देश अनौपचारिक रूप से इसके मुख्यालय का काम करता है। जहां तक समूह की अध्यक्षता का सवाल है, तो अध्यक्षता का निर्धारण प्रत्येक वर्ष सदस्य देश रोटेशन पद्धति के आधार पर करते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">कौन-कौन से देश शामिल है: आॅस्ट्रेलिया, चीन, ब्राजिल, कोरिया गणराज्य, फ्रांस, जर्मनी, सउदी अरब, रूस, टर्की, यूनाइटेड किंगडम, अर्जेंटीना, कनाडा, जापान, संयुक्त राज्य अमेरिका, इटली, भारत, मेक्सिको, दक्षिण अफ्रीका व यूरोपीय संघ शामिल हैं। अब भारत के प्रस्ताव से इस संगठन में अफ्रीकन यूनियन भी स्थायी सदस्य के रूप में शामिल हो गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">जी-20 की कार्यप्रणाली और उद्धेश्य: जी-20 की कार्यप्रणाली को दो भागों में विभाजित किया गया है। प्रथम, वित्त ट्रैक और द्वितीय शेरपा ट्रैक। वित्त ट्रैक में सदस्य देशों के वित्त मंत्रियों और केद्रीय बैंक के गवर्नरों द्वारा वित्तीय मामलों को लेकर विचार-विमर्श और संवाद किया जाता है, जबकि शेरपा ट्रैक के अंतर्गत नेताओं के निजी दूत राजनीतिक मुद्दों पर बातचीत करते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">जहां तक जी-20 के उद्धेश्यों की बात है जी-20 समूह से जुड़े देश वित्तीय नियमों को बढावा देने और भविष्य के वित्तीय संकटों को रोकने की दिशा में भी प्रयासरत रहते हैं। समूह आर्थिक ढांचे के विकास हेतू तो कार्य करता ही है, साथ ही ग्लोबल परिस्थितियों में आने वाले बदलावों पर भी नजर रखता है। इसके अंतर्गत कृषि, रोेजगार, ऊर्जा, भ्रष्टाचार, आतंकवाद, वैश्विक खाद्य सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण मुददों पर विश्व समुदाय को साथ लेकर काम करता है।</p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>जी-20 की अध्यक्षता और भारत</strong>  | G20 Summit</h3>
<p style="text-align:justify;">भारत की विदेश नीति हालिया दौर में वैश्विक मंच पर नेतृतव के तौर पर विकसित हुई है। इसी कड़ी में 1 दिसंबर, 2022 से भारत जी-20 का नेतृत्व ( अध्यक्षता) कर रहा है। भारत द्वारा तैयार किया गया जी-20 लॉगो भी समूह के प्रति भारत की सोच को प्रदर्शित करता है। भारत द्वारा डिजायन किया गया जी-20 लॉगो भारत के राष्ट्रीय घ्वज के रंगों केसरिया, सफेद, हरे समेत नीले रंग से भी प्रेरित है। यह लॉगो भारत के राष्ट्रीय फूल कमल के साथ पृथ्वी ग्रह की तुलना करता है। जो प्रतिकुल परिस्थितियों में भी विकास का प्रतिनिधित्व करता है। अध्यक्षता के दौरान भारत के छोटे-बड़े शहरों में 200 से अधिक बैठकों का आयोजन किया गया था।</p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>भारत के समक्ष चुनौतियां</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">यूक्रेन पर रूसी हमले के बाद दुनिया दो भागों में बंट गई है। रूस को जी-20 से बहार करने की मांग भी पश्चिमी देशों द्वारा की जा रही है। अहम बात यह है कि भारत के पश्चिमी देशों और रूस दोनों के साथ घनिष्ठ संबंध है। जहां एक और वह पश्चिमी प्रतिबंधों के बावजूद रूस से तेल का आयात जारी रखे हुए है, वहीं दूसरी और भारत लगातार रूस से शांतिपूर्ण समाधान की बात कर रहा है। ऐसे में भारत को न केवल जी-20 को बचाना होगा बल्कि समूह के बहुआयामी एजेंडे की विविध क्षेत्रों में बहुपक्षीय सहयोग भी कायम करना होगा।</p>
<p style="text-align:justify;">इसके अलावा विभाजित दुनिया में 20 बड़े नेताओं को सामूहिक घोषणा पत्र के दस्तावेज पर हस्ताक्षर करने के लिए राजी करना भी सरल कार्य नहीं रहने वाला है। बाली शिखर बैठक के दौरान ऐसा हो चुका है। जहां राष्ट्रपति जोको विडोडी ने संयुक्त घोषणा पत्र पर सहमति के लिए अपने देश की राजनीतिक पूंजी को दाव पर लगा दिया था। ऐसे में भारत को सभी मतभेदों के समाधान तलाशने होंगे और वैश्विक शांति के लिए विभिन्न विचारधाराओं के बीच सेतुओं का निर्माण करना होगा।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>क्या रहेगा भारत का विजन:</strong> जहां तक भारत के विजन का सवाल है तो भारत को इस अठारवें शिखर सम्मेलन में अपने आधार वाक्य एक पृथ्वी, एक परिवार, एक भविष्य पर धैर्य और गंभीरता से के साथ आगे बढ़ना होगा। भारत को जी-20 की अध्यक्षता के दौरान उन देशों के विचारों को भी सामने लाना होगा जिनका समूह में प्रतिनिधित्व नहीं है। इसके अलावा जी-20 के अध्यक्ष और विकासशील देशों की तिकड़ी के हिस्से के रूप में भारत से उन मुद्दों को आगे बढ़ाने की उम्मीद भी की जा रही है, जो गरीब देशों को सकारात्मक रूप से प्रभावित करेंगे। भारत की जी-20 की अध्यक्षता इस बात पर निर्भर करेगी कि भारत कितनी कुशलता से देशों के बीच दूरियां पाटने, विवादों को खत्म करने, शांति स्थापित करने, संघर्ष को शांत करने और टूट चुकी आपूर्ति श्रृखलाओं को फिर से बहाल करने के लिए रास्ते और साधन खोज पाता है।</p>
<p style="text-align:right;"><strong>डॉ. एन.के. सोमानी, अंतर्राष्ट्रीय मामलों के जानकार </strong><br />
<strong>(यह लेखक के अपने विचार हैं)</strong></p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>लेख</category>
                                            <category>विचार</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 10 Sep 2023 16:11:41 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>G20 Summit 2023 Live: जी 20 नेताओं ने दी महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)। G20 Summit 2023 Live: जी-20 शिखर सम्मेलन में भाग लेने आये विश्व नेताओं ने आज राजघाट जाकर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की समाधि पर श्रद्धासुमन अर्पित किये। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में अमेरिका के राष्ट्रपति जोसेफ आर बिडेन, आॅस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बानीज, ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ऋषि सुनक, कनाडा के […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/g20-leaders-paid-tribute-to-mahatma-gandhi/article-52174"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-09/g20-summit-2023-live.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)। G20 Summit 2023 Live: जी-20 शिखर सम्मेलन में भाग लेने आये विश्व नेताओं ने आज राजघाट जाकर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की समाधि पर श्रद्धासुमन अर्पित किये। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में अमेरिका के राष्ट्रपति जोसेफ आर बिडेन, आॅस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बानीज, ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ऋषि सुनक, कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो, चीन के प्रधानमंत्री ली चियांग, इटली की प्रधानमंत्री जिओर्जियो मेलोनी, इंडोनेशिया के राष्ट्रपति जोको विडोडो, जर्मनी के चांसलर ओलोफ शोल्ज, फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रों, रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव तथा अन्य राष्ट्राध्यक्ष/शासनाध्यक्ष और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के प्रमुख राजघाट पहुंचे। G20 Summit 2023 Live</p>
<p style="text-align:justify;">राजघाट पहुंचने पर सभी मेहमान नेताओं का अंगवस्त्र पहना कर स्वागत किया गया। सभी नेता एकसाथ बापू की समाधि पर गये और तीन ओर एक साथ दो मिनट का मौन धारण करके खड़े रहे और फिर पुष्पचक्र अर्पित किये। मेहमान नेताओं ने आगंतुक पुस्तिका पर अपने उद्गार भी व्यक्त किये। राजघाट से लौट कर सभी नेता भारत मंडपम पहुंचे जहां पर जी-20 शिखर सम्मेलन में आखिरी सत्र ‘एक भविष्य’ में शिरकत करेंगे और इसके बाद शिखर सम्मेलन का समापन होगा। शिखर सम्मेलन में दो सत्र एक पृथ्वी एक परिवार की थीम पर कल आयोजित किये गये थे। शिखर सम्मेलन का संयुक्त दस्तावेज ‘नयी दिल्ली घोषणापत्र’ कल जारी हो चुका है जो सर्वसम्मति से जारी किया गया। G20 Summit 2023 Live</p>
<h3 style="text-align:justify;">जी20 के प्रति साझा प्रतिबद्धता जताते हुए आया भारत-ब्राजील-दक्षिण अफ्रीका-अमेरिका का संयुक्त वक्तव्य</h3>
<p style="text-align:justify;">हम, भारत, ब्राजील, दक्षिण अफ्रीका और अमेरिका के नेताओं ने विश्व के लिए साझा समाधान प्रदान करने के उद्देश्य से अंतरराष्ट्रीय आर्थिक सहयोग के प्रमुख मंच के रूप में जी20 के प्रति प्रतिबद्धता व्यक्त करने के लिए शनिवार को यहां एक साझा बयान जारी किया। जी 20 शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए नयी दिल्ली आए अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडे, ब्राजील के राष्ट्रपति लूइज़ इंसियो लूला दा सिल्वा, दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मुलाकात के बाद इन देशों में जी20 के लिए अपने साझी प्रतिबद्धता जतायी। इस संबंध में जारी बयान में कहा गया है , ‘जी20 के प्रति हमारी साझा प्रतिबद्धता की पुष्टि करने के लिए नई दिल्ली में जी20 नेताओं के शिखर सम्मेलन के अवसर पर हमने मुलाकात की।’</p>
<p style="text-align:justify;">जी20 का अगला सम्मेलन ब्राजील , उसके बाद दक्षिण अफ्रीका और उससे अगला अमेरिका की अध्यक्षता में होगा। साझाा बयान में कहा गया है, ‘जी20 की वर्तमान और अगली तीन अध्यक्षताओं के रूप में हम वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए भारत की जी20 अध्यक्षता की ऐतिहासिक प्रगति पर आगे काम करेंगे। इस भावना को ध्यान में रखते हुए, विश्व बैंक के अध्यक्ष के साथ, हम बेहतर, बड़े और अधिक प्रभावी बहुपक्षीय विकास बैंकों के निर्माण के प्रति जी20 की प्रतिबद्धता का स्वागत करते हैं। ’</p>
<p style="text-align:justify;">बयान में कहा गया है, ‘बेहतर भविष्य सुनिश्चित करने के उद्देश्य से अपने लोगों को समर्थन देने के लिए, यह प्रतिबद्धता उन कार्यों पर ज़ोर देती है जो जी20 के माध्यम से एक साथ मिलकर किए जा सकते हैं।’</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>विदेश</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 10 Sep 2023 10:35:56 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>G20 Summit: जी-20 की मेजबानी और भारत की बढ़ती अहमियत</title>
                                    <description><![CDATA[G20 Summit: नई दिल्ली में 9 से 10 सितम्बर को जी-20 सम्मेलन हो रहा है। इस अंतर्राष्ट्रीय संस्था के सम्मेलन की मेजबानी करना भारत की अंतर्राष्ट्रीय मंच पर बढ़ रही लोकप्रियता का संकेत है। बेशक चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रुस के राष्ट्रपति वलादीमीर पुतिन द्वारा इस सम्मेलन में न पहुंचने संबंधी चर्चा ने […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/g-20-hosting-and-indias-growing-importance/article-52066"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-09/g20-summit.gif" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">G20 Summit: नई दिल्ली में 9 से 10 सितम्बर को जी-20 सम्मेलन हो रहा है। इस अंतर्राष्ट्रीय संस्था के सम्मेलन की मेजबानी करना भारत की अंतर्राष्ट्रीय मंच पर बढ़ रही लोकप्रियता का संकेत है। बेशक चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रुस के राष्ट्रपति वलादीमीर पुतिन द्वारा इस सम्मेलन में न पहुंचने संबंधी चर्चा ने कई शंकाए खड़ी कर दी थी परंतु अब चीन द्वारा स्पष्ट कर दिया गया है कि वह भारत की मेजबानी का समर्थन करता है। जिनपिंग की जगह वहां के प्रधानमंत्री ली कियांग भाग ले रहे हैं और इसी तरह रुस के प्रतिनिधि भी आ रहे हैं। G20 Summit</p>
<p style="text-align:justify;">चर्चा यह रही है कि शी जिनपिंग ज्यादातर उन सम्मेलनों में ही हिस्सा लेते हैं जहां वह हॉवी रहे सकें और अपना एंजेडा सेट कर सकें। अगर इस चर्चा को भी सही मान लिया जाए तो यह भी भारत के लिए प्राप्ति वाली बात है कि जी-20 जैसे संगठन में भारत का इतना स्थान बन गया है कि भारत विरोधी एंजेडे के लिए कोई और देश अपनी कामयाबी की उम्मीद नहीं रखता। रुस के राष्ट्रपति की अनुपस्थिति के अपने अर्थ हो सकते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">कुल मिलाकर भारत को विकसित पश्चिम देशों के साथ मिलकर चलने का मौका मिलेगा। चीन और रुस के राष्ट्रपति के ना आने के कारण कुछ भी हो परंतु भारत को मेजबानी मिलने का समर्थन मिलना इस बात का सबूत है कि भारत की सिद्धांतक पहुंच और समर्था को हर कोई स्वीकार कर रहा है। बेशक यह सम्मेलन सीधे तौर पर भारत-चीन संबंधों को रेखांकित करने वाला मंच नहीं है। फिर भी इस बात की उम्मीद करनी जरुर बनती है कि चीन के किसी नेता के आने या ना आने से भारत को कोई फर्क नहीं पड़ने वाला।</p>
<p style="text-align:justify;">पुतिन की अनुपस्थिति की वजह यूक्रेन के साथ रुस का युद्ध भी माना जा रहा है। ऐसे हालातों में रुस की भारत से दूरी का कोई मुद्दा नहीं रह जाता है। सम्मेलन में अमेरिका, इंग्लैंड, जर्मन सहित कई ताकतवार देश भाग ले रहे हैं। इन हालातों में यह सम्मेलन भारत के लिए काफी उपलब्धियों भरा रहने के आसार हैं। यह भी उम्मीद करनी चाहिए कि भारत द्वारा समेलन के माध्यम से विश्व को नई दिशा देने का प्रयत्न करेगा।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="Delhi G20 Summit: 21वीं सदी को एशिया की सदी बनाने में भारत और आसियान में सहयोग जरूरी: पीएम" href="http://10.0.0.122:1245/delhi-g20-summit/">Delhi G20 Summit: 21वीं सदी को एशिया की सदी बनाने में भारत और आसियान में सहयोग जरूरी: पीएम</a></p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>सम्पादकीय</category>
                                            <category>विचार</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 07 Sep 2023 13:28:41 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
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                <title>G20 Summit: जी-20 सम्मेलन से नए विश्व की संरचना संभव</title>
                                    <description><![CDATA[G20 Summit: हिंसा, आतंक एवं युद्ध से संत्रस्त दुनियाभर की नजरें 9 और 10 सितंबर को दिल्ली में होने वाले जी-20 देशों के शिखर सम्मेलन पर टिकी हैं। यह सम्मेलन इसलिए भी खास है कि भारत इस साल जी-20 का अध्यक्ष होते हुए दुनिया को नई दिशाएं एवं नए आयाम दिए हैं। सम्मेलन ऐसे समय […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/structure-of-new-world-possible-through-conference/article-52017"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-09/g-20-summit.gif" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">G20 Summit: हिंसा, आतंक एवं युद्ध से संत्रस्त दुनियाभर की नजरें 9 और 10 सितंबर को दिल्ली में होने वाले जी-20 देशों के शिखर सम्मेलन पर टिकी हैं। यह सम्मेलन इसलिए भी खास है कि भारत इस साल जी-20 का अध्यक्ष होते हुए दुनिया को नई दिशाएं एवं नए आयाम दिए हैं। सम्मेलन ऐसे समय हो रहा है, जब दुनिया रूस-यूक्रेन युद्ध, चीन-ताइवान की तनातनी और उत्तर कोरिया के मिसाइल परीक्षण को लेकर असुरक्षा एवं अशांति की चिंताओं से घिरी हुई है। हालांकि जी-20 सुरक्षा संबंधी मुद्दों का नहीं, आर्थिक मुद्दों का मंच है, लेकिन सुरक्षा, शांति एवं युद्धमिुक्त से होकर ही आर्थिक उन्नति के रास्ते खुलते हैं। G20 Summit</p>
<p style="text-align:justify;">सुरक्षा चिंताओं ने दुनिया की अर्थव्यवस्था को जिस तरह प्रभावित कर रखा है, जी-20 देशों के लिए इसे पूरी तरह नजरअंदाज करना संभव नहीं है। जी-20 के सदस्य देशों की संयुक्त रूप से दुनिया के सकल घरेलू उत्पाद में करीब 85 फीसदी और अंतरराष्ट्रीय व्यापार में 75 फीसदी की भागीदारी है। इस मंच के अध्यक्ष होने के नाते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आर्थिक उन्नति के लिए शांति का सन्देश दिया है, उनका कहना है कि ‘यह युग युद्ध का नहीं है’ सन्देश फिर दुनिया को देने की जरूरत है। चीन की विस्तारवादी नीतियों पर अंकुश के लिए भी सम्मेलन में निर्णायक रूपरेखा एवं दिशाएं तय होनी चाहिए। जाहिर है, दिल्ली शिखर सम्मेलन में जो भी फैसले किए जाएंगे, पूरी दुनिया के लिए महत्त्वपूर्ण होंगे एवं उसी से नई विश्व संरचना संभव होगी।</p>
<h3>विश्व इतिहास के अगले पृष्ठ सचमुच में स्वर्णिम होंगे | G20 Summit</h3>
<p style="text-align:justify;">समूची दुनिया युद्ध नहीं चाहती, अहिंसा एवं शांति की तेजस्विता ही विश्वजनमत की सबसे बड़ी अपेक्षा है, अब अहिंसा कायरता नहीं है बल्कि उन्नत एवं आदर्श विश्व संरचना का आधार है। अब एक दौर अहिंसा का चले, उसकी तेजस्विता का चले तो विश्व इतिहास के अगले पृष्ठ सचमुच में स्वर्णिम होंगे, जी-20 के माध्यम से आर्थिक उन्नति के रास्ते कपोतों के मुंह में गेहूं की बाली लिये होंगे। लेकिन इसकी सबसे बड़ी बाधा चीन एवं रूस पर निर्णय एवं निर्णायक रूपरेखा को तैयार करना ही होगा।</p>
<p style="text-align:justify;">दिल्ली सम्मेलन में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की दूसरे देशों के नेताओं के साथ द्विपक्षीय बैठकों पर सबकी नजरें टिकी थीं, पर दोनों सम्मेलन में शामिल नहीं होंगे। इससे सम्मेलन के उद्देश्यों और संभावनाओं पर खास असर नहीं पड़ेगा। जब अमरीका, ब्रिटेन, आॅस्ट्रेलिया, फ्रांस, इटली, जर्मनी, दक्षिण अफ्रीका और इंडोनेशिया जैसे बड़े देशों के राष्ट्राध्यक्ष सम्मेलन में भाग लेने वाले हैं तो दुनिया की मौजूदा चुनौतियों से निपटने की कोई न कोई दिशा जरूर उभरेगी। इसकी संभावनाएं इसलिए भी बढ़ गई हैं, क्योंकि भारत ने नीदरलैंड्स, मिस्र, स्पेन, नाइजीरिया, संयुक्त अरब अमीरात और बांग्लादेश समेत नौ ऐसे देशों को भी आमंत्रित किया है, जो जी-20 के सदस्य नहीं हैं।</p>
<h3>मोदी ने दुनिया को एक परिवार बनाने की ओर कदम बढ़ाये हैं | G20 Summit</h3>
<p style="text-align:justify;">भारत ने सारी वसुधा को अपना परिवार मानते हुए ही जी-20 के अध्यक्षीय दायित्व को संभाला है। आज से एक सदी पूर्व अमरीका के शिकागो में सर्वधर्म सम्मेलन में उपस्थित प्रतिनिधियों को ‘बहिनों और भाइयों’ के रूप में सम्बोधित कर स्वामी विवेकानंद ने ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ और ‘सर्वे भवन्तु सुखिन:’ की भारतीय भावना का ही विचार तो दिया था, जिसे सुनकर वहां उपस्थित सभी प्रतिनिधि आश्चर्यचकित रह गये और इस संबोधन से गद्गद् होकर बहुत देर तक करतल ध्वनि करते रहे। आज भी मोदी उसी वसुधैव कुटुम्बकम मंत्र को जी-20 का उद्घोष एवं लोगों बनाकर दुनिया को एक परिवार बनाने की ओर कदम बढ़ाये हैं, लेकिन इन राहों में चीन एवं रूस जैसे महत्वाकांक्षी देश कांटे बो रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">दरअसल, दुनिया के देशों को यह समझना होगा कि इस वक्त चीन और रूस, दोनों ही अपने हिसाब से दुनिया को संचालित करना चाहते हैं। दोनों की मंशा अपने पड़ोसी देशों की संप्रभुता को नष्ट करने की है और साथ ही, इस सरासर अन्यायपूर्ण व अमानवीय कृत्य में वे जी-20 जैसे मंचों का समर्थन भी चाहते हैं। कैसे भुला दिया जाए कि पुतिन यूक्रेन के खिलाफ बाकायदा युद्ध लड़ रहे हैं, तो चीन ताइवान व भारतीय इलाकों पर लगातार गिद्ध दृष्टि गड़ाकर बैठा है? इसके बावजूद दुनिया में निरंतर सशक्त होते भारत को न तो निराश होना चाहिए और न हार मानकर बैठ जाना चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">भारत को अपनी परम्परा से मिली ऊर्जा से दुनिया में शांति, सुख एवं समृद्धि की कामना एवं प्रयत्न करते रहना हैं। इतिहास साक्षी है कि सभी प्राणियों के सुख-शांति की कामना करने वाले हमारे पूर्वजों ने कहीं भी राजनैतिक सत्ता की प्राप्ति का लक्ष्य रखकर आक्रमण नहीं किया, किसी देश पर अतिक्रमण नहीं किया, किसी देश की सीमाओं पर कब्जा नहीं किया। यदि कहीं संघर्ष की स्थिति आई थी तो लक्ष्य रहा सज्जनों का परित्राण और दुष्टों का विनाश।</p>
<h3>जी-20 में चीनी प्रधानमंत्री ली केकियांग आ रहे हैं | G20 Summit</h3>
<p style="text-align:justify;">इसके अतिरिक्त जहां कहीं वे गये, वहां अपने सद्व्यवहार और ज्ञान के बल पर उन्होंने भाईचारे और भारतीय संस्कृति की पताका ही लहराई न कि सत्ता के मद में किसी पर आक्रमण किया। आज भारत-चीन द्विपक्षीय संबंधों में गिरावट के लिए अकेले चीनी राष्ट्रपति जिम्मेदार हैं। एकाधिक ऐसे उदाहरण हैं, जिनसे यह सिद्ध किया जा सकता है कि भारत में होने वाले शिखर सम्मेलन में शामिल होने के लिए चीनी प्रधानमंत्री ली केकियांग आ रहे हैं। उम्मीद करनी चाहिए कि जोड़ने-जुड़ने के शिखर मंच पर चीन की ओर से तोड़ने-टूटने की बातें नहीं होंगी। निश्चित ही भारत ने अपनी अध्यक्षता में जी-20 को और ज्यादा समावेशी मंच बनाया है, अनेक नये देशों को इस मंच से जोड़ा गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">भारत के प्रयासों से अफ्रीकी संघ भी जी-20 से जुड़ा, जबकि पहले इस मंच पर अफ्रीका के लोगों की आवाज नहीं थी। वैश्विक आर्थिक संकट से उबरने के लिए 1999 में जब जी-20 का गठन किया गया था तो शुरूआत में सदस्य देशों के वित्त मंत्रियों और प्रमुख बैंक गवर्नर ही सम्मेलन में बुलाए जाते थे। दिल्ली सम्मेलन में पहली बार करीब 40 देशों के राष्ट्राध्यक्ष व कई वैश्विक संगठनों के प्रतिनिधि शामिल होने वाले हैं, निश्चित ही यह सम्मेलन अनूठा एवं विलक्षण होगा और भारत ने इसकी गरिमा के अनुकूल तैयारियां भी भव्य एवं अद्वितीय की है।</p>
<h3>पुतिन यूक्रेन के साथ युद्ध की वजह से आने में असमर्थ हैं</h3>
<p style="text-align:justify;">भारत के लिए यह सम्मेलन सदस्य देशों के साथ रूस-यूक्रेन युद्ध खत्म करने के आधार तलाशने के प्रयास तेज करने का अच्छा मौका है। रूसी राष्ट्रपति पुतिन यूक्रेन के साथ युद्ध की वजह से आने में असमर्थ हैं। इसके पीछे उनकी कोई गहरी कूटनीति नहीं है। बावजूद इसके देखने वाले रूस-चीन के शीर्ष नेताओं की जी-20 को गंभीरता से न लेने एवं उनकी बेरूखी का कोई तो मतलब निकालेंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">ऐसा इसलिए भी होगा, क्योंकि जी-20 में शांतिप्रिय पश्चिमी देशों का वर्चस्व हैै। इसके अलावा, शांति के पक्षधर और पंचशील की बुनियाद रखने वाले युद्ध विरोधी भारत के पास इसकी अध्यक्षता है, जिसे लेकर शुरू से चीन असहज है। उसकी असहजता का कारण उसकी विस्तारवादी गतिविधियों एवं कूटनीति पर पानी फिरना है। भारत के विरोध में वह अलग-थलग है। कूटनीति के जानकार मानते हैं कि शी जिनपिंग ने अपने देश का नया नक्शा ऐसे समय में यूं ही नहीं जारी कराया था।</p>
<p style="text-align:justify;">चीन के नए नक्शे में कई देशों की सीमाओं का उल्लंघन है। चीन ने केवल भारत के अरुणाचल समेत कुछ इलाकों को ही अपने नये नक्शे में नहीं दिखाया है बल्कि मलेशिया, फिलीपींस, विएतनाम को भी अपने नक्शे में दिखाया है। भारत ने इस पर अपना एतराज जाहिर किया है। सत्य तो यह है कि भारतीय संस्कृति एवं राजनीति की सुदीर्घ यात्रा में विश्व-कल्याण और मानव-कल्याण की भावना सदैव सक्रिय रही है। इस संस्कृति के अंतर्गत उपलब्ध संपूर्ण वाङ्मय में वसुधैव कुटुम्बकम और सर्वे भवन्तु सुखिन: की भावना अंत:सलिला सरिता के समान सदा प्रवहमान रही है। इसमें व्यक्ति की अपेक्षा समष्टि को, देश के साथ संपूर्ण विश्व को प्रधानता दी गई है। जी-20 दिल्ली सम्मेलन में विश्व-परिवार की भावना को ही बल दिया जायेगा। G20 Summit</p>
<p style="text-align:right;"><strong> ललित गर्ग, वरिष्ठ लेखक एवं स्वतंत्र टिप्पणीकार</strong></p>
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                <pubDate>Wed, 06 Sep 2023 13:18:42 +0530</pubDate>
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