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                <title>Mecca - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>577 Haj Pilgrims Die: भीषण गर्मी, लू में 577 हज यात्रियों की मौत</title>
                                    <description><![CDATA[577 Haj Pilgrims Die: मक्का (एजेंसी)। सऊदी अरब में हज यात्रा के दौरान रेगिस्तानी क्षेत्र में भीषण गर्मी और लू के कारण अब तक 577 लोगों की मौत हो गई। अरब राजनयिकों ने पुष्टि की कि गर्मी और लू में 323 मिस्रवासी मुख्य रूप से गर्मी से संबंधित बीमारियों के कारण मारे गये। अल-मुआइसेम अस्पताल […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/577-haj-pilgrims-die-in-extreme-heat-heatwave/article-58823"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2024-06/macca.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>577 Haj Pilgrims Die: मक्का (एजेंसी)।</strong> सऊदी अरब में हज यात्रा के दौरान रेगिस्तानी क्षेत्र में भीषण गर्मी और लू के कारण अब तक 577 लोगों की मौत हो गई। अरब राजनयिकों ने पुष्टि की कि गर्मी और लू में 323 मिस्रवासी मुख्य रूप से गर्मी से संबंधित बीमारियों के कारण मारे गये। अल-मुआइसेम अस्पताल से प्राप्त कुल संख्या का हवाला देते हुए एक राजनयिक ने कहा,‘‘सभी मिस्रवासी गर्मी के कारण मरे हैं, भीड़ के कुचलने के दौरान एक व्यक्ति को घातक चोटें भी आर्इं।’’ Mecca News</p>
<h3>मस्जिद में तापमान 51.8 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया | Mecca News</h3>
<p style="text-align:justify;">राजनयिकों ने बताया कि अम्मान की रिपोर्ट के अनुसार 60 जॉर्डनवासी मारे गए जो 41 की आधिकारिक संख्या से अधिक है। एक सऊदी अध्ययन से संकेत मिलता है कि तीर्थयात्रा उद्योग जलवायु परिवर्तन से काफी प्रभावित हो रहा है, जिससे तापमान में सालाना 0.4 डिग्री सेल्सियस की वृद्धि हो रही है। सऊदी राष्ट्रीय मौसम विज्ञान केंद्र ने बताया कि सोमवार को मक्का की सबसे बड़ी मस्जिद में तापमान 51.8 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। Mecca News</p>
<p><a title="Taiwan Visa-on-arrival : अब आसान होगा भारतीयों के लिए ताइवान जाना! ताइवान शुरू करने जा रहा है ये सुविधा!" href="http://10.0.0.122:1245/now-it-will-be-easier-for-indians-to-go-to-taiwan-taiwan-is-going-to-start-visa-on-arrival/">Taiwan Visa-on-arrival : अब आसान होगा भारतीयों के लिए ताइवान जाना! ताइवान शुरू करने जा रहा है ये सुव…</a></p>
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                                                            <category>विदेश</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 19 Jun 2024 18:12:30 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>कौड़ियों के भाव खरीदा जा रहा मक्का</title>
                                    <description><![CDATA[6 माह की मेहनत के बाद अनाज मंडियों में पहुंचा मक्का, थानेसर में 14694 क्विंटल हुई अब तक आवक सच कहूँ, देवीलाल बारना/कुरुक्षेत्र। आमतौर पर कहा जाता है कि घाटे का सौदा बन चुकी कृषि में यदि विभिन्न प्रकार की फसलों का उत्पादन किया जाए तो कृषि घाटे का सौदा न बनकर फायदे का सौदा […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/mecca-being-bought-at-a-low-rate/article-4181"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-06/makka.jpg" alt=""></a><br /><h1 style="text-align:center;">6 माह की मेहनत के बाद अनाज मंडियों में पहुंचा मक्का, थानेसर में 14694 क्विंटल हुई अब तक आवक</h1>
<p><strong>सच कहूँ, देवीलाल बारना/कुरुक्षेत्र।</strong></p>
<p style="text-align:justify;">आमतौर पर कहा जाता है कि घाटे का सौदा बन चुकी कृषि में यदि विभिन्न प्रकार की फसलों का उत्पादन किया जाए तो कृषि घाटे का सौदा न बनकर फायदे का सौदा भी बन सकती है। लेकिन इन फसलों के भी उचित दाम न मिलने से किसानों को भारी नुकसान का सामना करना पडता है। कुछ प्रगतिशील किसान खेती से मुनाफा लेने के लिए दो की बजाए तीन फसलें अपने खेतों से पैदा करते हैं,</p>
<p style="text-align:justify;">लेकिन इन फसलों के दाम सही न मिलने से ज्यादा मुनाफा नही मिल पाता। वर्ष 2016-17 की यदि बात करें तो मटर व मक्का इत्यादि फसलों का उत्पादन करने वाले किसानों को काफी घाटे का सामना करना पडा था, लेकिन 2017-18 में इन फसलों से किसानों को कुछ मुनाफा भी मिला है।</p>
<h1 style="text-align:center;">मक्के खरीद की हो जांच व मिले बोनस: सतीश कुमार</h1>
<p style="text-align:justify;">गांव अहबल से मक्के को बेचने आए किसान सतीश कुमार का कहना है कि मक्का खरीद में किसानों के साथ धोखा किया जा रहा है। सरकार बेशक 1450 रूपए में मक्का खरीदने का ढिंÞढ़ोरा पीट रही है लेकिन किसानों का मक्का मात्र 1000 से 1200 रूपए के बीच बिक रहा है। सतीश कुमार ने सरकार से मांग की कि मक्के की खरीद की जांच करवाई जाए व किसानों को बोनस दिया जाए।</p>
<p style="text-align:justify;">वहीं किसान रमेश ने बताया कि मक्के की कटाई से लेकर अनाज मंडी तक पहुंचने में ही लगभग 10 हजार रूपए खर्च हो जाता है। यदि बुअइाई से मंडी पहुंचने तक का खर्च देखा जाए तो किसानों को मिल रहे दाम से तो मक्के के खर्च की भी पूर्ति नही हो पाती।</p>
<h1 style="text-align:center;">अब तक 14694 क्विंटल हुई थानेसर अनाज मंडी में मक्के की आवक</h1>
<p style="text-align:justify;">मंडी विश्लेषक चंद शेखर सैनी ने बताया कि थानेसर अनाज मंडी में अब तक 14694 क्विंटल मक्के की थानेसर अनाज मंडी में आवक हो चुकी है। उन्होने बताया कि अभी तक अनाज मंडी में मक्के की आवक जारी है। अब तक मक्के का मिनीमम रेट 1086 व मैक्सीमम रेट 1230 रूपए रहा है।</p>
<h1 style="text-align:center;">सरकारी खरीद न होने से कम दाम में बिक रहा मक्का</h1>
<p style="text-align:justify;">बेशक इस वर्ष मक्के की फसल पकने के बाद बरसात न पडने से क्वालिटी काफी अच्छी रही है, लेकिन उचित दाम न मिलने से मक्के मेें किसानों को नुकसान हुआ है। हालांकि सरकार द्वारा मक्के का समर्थन मूल्य 1450 रूपए निर्धारित किया गया है। लेकिन थानेसर अनाज मंडी में सरकारी खरीद न होने के चलते मक्का लगभग 200 से 300 रूपए तक सस्ता बिक रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">थानेसर में अनाज मंडी में सभी प्राईवेट एजेंसी खरीद कर रही हैं, जिसमें बंसल ब्रदर्स, अरोडा एंटरप्राईजिज, मां वैष्णों देवी एंटरप्राईजिज, गुरु ब्रह्मानंद एजेंसी, मुकंद लाल-सुरेश कुमार व एसएस एंटरप्राजिज सहित कुछ एजेंसी खरीद कर रही हैं।</p>
<h1 style="text-align:center;">समर्थन मूल्य 1450 तो कम दाम में क्यों बिक रहा मक्का : रामपाल</h1>
<p style="text-align:justify;">थानेसर अनाज मंडी में मक्के की फसल बेचने आए गांव कोल्हापुर निवासी रामपाल सैनी का कहना है कि जब सरकार द्वारा मक्के का समर्थन मूल्य 1450 निर्धारित किया है तो किसानों को क्यों लुटा जा रहा है। किसानों की 6 माह की मेहनत को कौड़ियों के भाव खरीदा जा रहा है। रामपाल ने सरकार से मांग की कि किसानों को मक्के का समर्थन मूल्य पूरा दिया जाए।</p>
<p> </p>
<p> </p>
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                                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 15 Jun 2018 09:07:10 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>जाने धान, अरहर, मक्का बाजरा की फसलों के बारे में</title>
                                    <description><![CDATA[धान : उत्तर भारत में वीरवार से धान की रोपाई का काम शुरू हो गया है। यदि आप भी धान की रोपाई की तैयारी में हैं तो यह जानकारी आपके बेहद काम आएगी। पौधों की रोपाई लाइनों में करे। लाइन से लाइन की दूरी 15-20 सेमी. रखें। एक स्थान पर कम से कम दो पौधे […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/culture-and-society/know-regarding-the-crops-of-paddy-arhar-mecca-millet/article-1281"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-06/crops.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:justify;"><strong>धान :</strong></h2>
<p style="text-align:justify;">उत्तर भारत में वीरवार से धान की रोपाई का काम शुरू हो गया है। यदि आप भी धान की रोपाई की तैयारी में हैं तो यह जानकारी आपके बेहद काम आएगी। पौधों की रोपाई लाइनों में करे। लाइन से लाइन की दूरी 15-20 सेमी. रखें।</p>
<p style="text-align:justify;">एक स्थान पर कम से कम दो पौधे रोपें। खरपतवारों की रोकथाम प्रारम्भ से ही की जाए। असिंचित दशाओं में मैदानी क्षेत्रों में सीधी बुवाई के लिए 90-110 दिन में पकने वाली जातियों की बुवाई करनी चाहिए। बीज की मात्रा 70-80 किग्रा. प्रति हैक्टेयर की दर से प्रयोग करना चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">लाइन से लाइन की दूरी 20 सेमी. रखनी चाहिए। यदि पलेवा लगाकर धान की बुवाई करनी हो तो 100-110 कि.ग्रा. बीज प्रति हैक्टेयर की दर से प्रयोग करें। बीज को 12 घण्टे पानी में भिगोकर लगभग 45 घण्टे तक ढेर बनाकर रखना चाहिए जिससे बीजों में अंकुरण शुरू हो जाए।</p>
<h2 style="text-align:justify;"><strong>मूंग :</strong></h2>
<p style="text-align:justify;">पकी हुई फलियों की चुनाई कर लें या 60-80 प्रतिशत फलियों के पकने पर कटाई करें। उर्द की कटाई फसल पूरी पक जाने पर करें। इस समय फलियां काली पड़ जाती हैं।</p>
<h2 style="text-align:justify;">अरहर :</h2>
<p style="text-align:justify;">कम अवधि में तैयार होने वाली किस्मों की बुवाई इस माह में कर ले। नमी की कमी में पलेवा करके बुवाई करे। 12-15 कि.ग्रा. बीज प्रति हैक्टेयर पर्याप्त होता है। बुवाई कतारों में 45-60 सेमी.की दूरी पर करें।</p>
<h2 style="text-align:justify;">मक्का :</h2>
<p style="text-align:justify;">इस माह मक्का की बुवाई करे। ध्यान रहे कि नमी के अभाव में पलेवा अवश्य करें। प्रति हैक्टेयर 18-20 किग्रा. बीज पर्याप्त होता है। बुवाई लाइनों में करें। कंचन, सूर्या नवीन, पंत संकुल मक्का-3 प्रजाति आदि किस्मों की बुवाई करें। यह ध्यान रहे कि संकर किस्मों का बीज प्रति वर्ष नया प्रयोग करें।</p>
<h2 style="text-align:justify;">बाजरा :</h2>
<p style="text-align:justify;">बारानी क्षेत्रों में मानसून सत्र की पहली अच्छी वर्षा पर बुवाई शुरू कर दें। औसतन 4-5 किग्रा. बीज प्रति हैक्टेयर की दर से प्रयोग करें। फसल की बुवाई 45 से.मी. की दूरी पर 4 से.मी. गहरे कूड़ों में करें।</p>
<h2 style="text-align:justify;">मूंगफली :</h2>
<p style="text-align:justify;">बुवाई माह के अन्तिम सप्ताह से शुरू करें तथा जुलाई के प्रथम सप्ताह तक पूरी कर लें। फैलने व कम फैलने वाली किस्मों की लाइन से लाइन की दूरी 45 से.मी. या गुच्छेदार किस्मों में 30से.मी. एवं पौधों की दूरी 15-20 से.मी. रखें। गुच्छेदार किस्मों के लिए 80-100 कि.ग्रा. एवं फैलने वाली किस्मों के लिए 60-80 किग्रा गिरी प्रति हैक्टेयर की दर से पर्याप्त होती है।</p>
<h2 style="text-align:justify;">सोयाबीन :</h2>
<p style="text-align:justify;">मैदानी क्षेत्रों में जून के अन्तिम सप्ताह से जुलाई के प्रथम सप्ताह का समय बुवाई के लिए सर्वोत्तम है। सोयाबीन का 75-80 कि.ग्रा बीज प्रति हैक्टर प्रयोग किया जाय। बुवाई 45 से.मी. की दूरी पर लाइनों में करें। बीज से बीज की दूरी 3 से 5 सेमी. रखें। बीज को 3-4 से.मी. से अधिक गहरा नहीं बोना चाहिए।</p>
<h2 style="text-align:justify;">ज्वार:</h2>
<p style="text-align:justify;">ज्वार की बुवाई का सही समय जून के अन्तिम सप्ताह से जुलाई का प्रथम सप्ताह है। एक हैक्टर क्षेत्रफल के लिये 12-15 कि.ग्रा. बीज की आवश्यकता पड़ती है। बुवाई 45 से.मी. की दूरी पर लाइनों में करें। पौधे से पौधे की दूरी 15-20 सेमी. होनी चाहिए।</p>
<h2 style="text-align:justify;">गन्ना :</h2>
<p style="text-align:justify;">आवश्यकतानुसार सिंचाई करते रहें व खेत में खरपतवार निकालते रहें। यूरिया की अन्तिम टॉपडेंसिंग न की गई हो तो इस माह अवश्य कर लें। फसल पर मिट्टी चढ़ायें। यदि नमी या वर्षा के बाद पायरिला का प्रकोप दिखाई दे तो तो मैलाथियान 50 ई.सी. की 1.00 लीटर या क्लोरपाइरीफास 20 ई.सी. का 1.50 लीटर को 500-600 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें।</p>
<p style="text-align:justify;">अंगोला बेधक, तना बेधक व जड़बेधक की रोकथाम के लिए मोनोक्रोटोफास 36 एस.एल का 1500 मिली. दवा को 500 लीटर पानी में घोलकर प्रति हैक्टर की दर से छिड़काव करें। पत्ती के भूरा धब्बा रोग की रोकथाम के लिये ब्लाइटाक्स 50 नामक दवा 2-2.5 कि.ग्रा. आवश्यक पानी में मिलाकर प्रति हैक्टर की दर से छिड़काव करना चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">
</p><p style="text-align:justify;">
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                                                            <category>संस्कृति एवं समाज</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/culture-and-society/know-regarding-the-crops-of-paddy-arhar-mecca-millet/article-1281</link>
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                <pubDate>Fri, 16 Jun 2017 00:43:03 +0530</pubDate>
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