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                <title>Delhi Liquor Policy Case - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>Delhi Liquor Policy Case: केजरीवाल को कोर्ट से मिली राहत या नहीं, कौन जज करेगा सुनवाई, जानिये कोर्ट का फैसला</title>
                                    <description><![CDATA[Delhi Liquor Policy Case: नई दिल्ली। दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को बड़ा झटका देते हुए अदालत ने उनकी उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा को दिल्ली शराब नीति मामले की सुनवाई से अलग करने की मांग की थी। अदालत ने स्पष्ट किया कि मामले की सुनवाई अब […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/delhi-liquor-policy-case-justice-swarna-kanta-sharma-to-hear-the-matter-kejriwals-petition-dismissed/article-83651"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-04/delhi-liquor-policy-case-1.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;"><strong>Delhi Liquor Policy Case: नई दिल्ली। </strong>दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को बड़ा झटका देते हुए अदालत ने उनकी उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा को दिल्ली शराब नीति मामले की सुनवाई से अलग करने की मांग की थी। अदालत ने स्पष्ट किया कि मामले की सुनवाई अब भी जस्टिस शर्मा ही करेंगी।</p>
<h3 style="text-align:justify;">न्यायिक निष्पक्षता पर कोर्ट की सख्त टिप्पणी | Delhi Liquor Policy Case</h3>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">फैसला सुनाते हुए जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने कहा कि बिना सुनवाई किए खुद को मामले से अलग कर लेना आसान रास्ता हो सकता था, लेकिन उन्होंने संस्थागत अखंडता को प्राथमिकता देते हुए तथ्यों और कानून के आधार पर निर्णय लेना उचित समझा। उन्होंने जोर देकर कहा कि जब तक ठोस सबूतों से किसी न्यायाधीश की निष्पक्षता पर सवाल सिद्ध न हो जाए, तब तक उसे निष्पक्ष माना जाता है। केवल आशंकाओं या व्यक्तिगत धारणाओं के आधार पर किसी जज को मामले से अलग नहीं किया जा सकता।</p>
<h3 style="text-align:justify;">“न्याय दबाव में नहीं झुकता”</h3>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">जस्टिस शर्मा ने अपने फैसले में कहा कि उन्होंने संविधान के प्रति शपथ ली है और वह बिना किसी डर या भेदभाव के न्याय करेंगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अदालत “धारणाओं का मंच” नहीं बन सकती और यदि ऐसे आधारों पर जजों को हटाया जाने लगे, तो न्याय व्यवस्था पर गहरा असर पड़ेगा।</p>
<h3 style="text-align:justify;">‘कैच-22’ स्थिति का जिक्र</h3>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">अपने फैसले में जस्टिस शर्मा ने इस स्थिति को “Catch-22” बताया। उन्होंने कहा कि अगर वे खुद को मामले से अलग कर लेतीं, तो यह माना जाता कि आरोप सही थे, और अगर वे नहीं हटतीं तथा भविष्य में राहत नहीं मिलती, तो पूर्वाग्रह का आरोप लगाया जाता।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">उन्होंने चेतावनी दी कि यदि इस तरह की याचिकाएं स्वीकार की जाती हैं, तो इससे “जज चुनने” की प्रवृत्ति को बढ़ावा मिलेगा, जो न्याय प्रणाली के लिए खतरनाक है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">केजरीवाल के आरोप और तर्क</h3>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">अरविंद केजरीवाल ने अपनी याचिका में दावा किया था कि जस्टिस शर्मा के परिवार के सदस्य केंद्र सरकार के पैनल काउंसल के रूप में कार्यरत हैं, और इससे “हितों के टकराव” की संभावना बनती है। उन्होंने यह भी कहा कि न्याय केवल होना ही नहीं चाहिए, बल्कि होते हुए दिखना भी चाहिए।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">उन्होंने आरटीआई और सरकारी दस्तावेजों का हवाला देते हुए यह तर्क रखा कि जज के परिवार के सदस्यों को बड़ी संख्या में सरकारी मामले आवंटित हुए हैं, जिससे सरकार के साथ उनके पेशेवर संबंध का संकेत मिलता है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">अदालत ने आरोपों को बताया “अनुमान”</h3>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">अदालत ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि इनमें किसी ठोस सबूत का अभाव है और ये केवल “अनुमान और संकेत” पर आधारित हैं। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि न तो किसी प्रकार का स्पष्ट हितों का टकराव सामने आया है और न ही ऐसा कोई कारण, जिससे जज को खुद को अलग करना पड़े। इस फैसले के साथ अदालत ने एक महत्वपूर्ण संदेश दिया है कि न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करने के प्रयासों को स्वीकार नहीं किया जाएगा। जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने स्पष्ट किया कि न्यायपालिका की विश्वसनीयता बनाए रखना सर्वोपरि है और यह केवल तथ्यों और कानून के आधार पर ही संभव है।</p>
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                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 21 Apr 2026 10:28:42 +0530</pubDate>
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                <title>Delhi Liquor Policy Case: आप सांसद संजय सिंह गिरफ्तार</title>
                                    <description><![CDATA[Delhi Liquor Policy Case: नई दिल्ली। दिल्ली के आबकारी घोटाले मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए बुधवार को आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद संजय सिंह (Sanjay Singh) को गिरफ्तार किया है। जानकारी के अनुसार ईडी द्वारा संजय सिंह के दिल्ली वाले घर से सुबह-सुबह छापे के दौरान कई […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/aap-mp-sanjay-singh-arrested/article-53250"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-10/sanjay-singh1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>Delhi Liquor Policy Case: नई दिल्ली।</strong> दिल्ली के आबकारी घोटाले मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए बुधवार को आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद संजय सिंह (Sanjay Singh) को गिरफ्तार किया है। जानकारी के अनुसार ईडी द्वारा संजय सिंह के दिल्ली वाले घर से सुबह-सुबह छापे के दौरान कई दस्तावेज जब्त किए गए थे। संजय से लंबी पूछताछ के बाद ईडी ने बुधवार शाम करीब 5:30 बजे उनको गिरफ्तार कर लिया। बता दें कि आबकारी नीति केस की चार्जशीट में संजय सिंह का नाम शामिल था। इस केस में मनीष सिसोदिया फरवरी से ही जेल में हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">आबकारी घोटाले मामले में ईडी ने की कार्रवाई</h3>
<p style="text-align:justify;">उल्लेखनीय है कि साल के शुरूआत में ईडी ने अपनी चार्जशीट में संजय सिंह का नाम जोड़ा था, जिसको लेकर संजय सिंह ने काफी हंगामा मचाया था। संजय सिंह ने दावा किया था कि ईडी ने उनका नाम गलती से जोड़ दिया है, जिस पर ईडी ने जवाब दिया था कि उनकी चार्जशीट में संजय सिंह का नाम 4 जगह लिखा गया है, इनमें से 3 जगह नाम सही लिखा गया है, केवल एक जगह गलती हो गई थी, जिसके बाद ईडी ने संजय सिंह को मीडिया में बयानबाजी न करने की सलाह दी थी, क्योंकि मामला कोर्ट में लंबित है।</p>
<p style="text-align:justify;">ईडी के अनुसार उनकी चार्जशीट में संजय सिंह पर 82 लाख रुपये का चंदा लेने का जिक्र है, इसको लेकर ही ईडी ने बुधवार को उनके घर पर छापा मारा था। बताया जा रहा है कि दिल्ली शराब नीति केस में ईडी की दूसरी सप्लीमेंट्री चार्जशीट जो 2 मई को जारी की गई थी, इसमें आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा का नाम भी सामने आया था, लेकिन उन्हें आरोपी नहीं बनाया गया है।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="LPG Cylinder Price: मोदी सरकार का बड़ा फैसला, अब गैस सिलेंडर मिलेगा 600 रुपये में" href="http://10.0.0.122:1245/big-decision-of-modi-government-now-gas-cylinder-will-be-available-for-rs-600/">LPG Cylinder Price: मोदी सरकार का बड़ा फैसला, अब गैस सिलेंडर मिलेगा 600 रुपये में</a></p>
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                                                            <category>देश</category>
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                <pubDate>Wed, 04 Oct 2023 18:37:07 +0530</pubDate>
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