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                <title>&amp;#8230;जिन्होंने अकेले ही 65 लोगों की जान बचाई</title>
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/single-handedly-saved-the-lives-of-sixty-five-people/article-53366"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-10/trading-news.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Trading News:- 13 नवंबर 1989 की रात को जब पश्चिम बंगाल की रानीगंज महावीर कोयला खदान में कोयले से बनी चट्टानों को विस्फोट कर तोड़ा जा रहा था, तो वाटर टेबल की दीवार में दरार आ गई और पानी तेजी से बहने लगा। खदान में 71 खनिक बुरी तरह फंस गए थे। स्थिति गंभीर देख मौजूद अधिकारियों ने बचाव कार्य शुरू करने से हाथ खड़े कर दिए। इस हादसे के वक्त जसवंत सिंह गिल वहां एडिशनल चीफ माइनिंग इंजीनियर के पद पर तैनात थे। जब इस हादसे की खबर उन्हें मिली, तो उन्होंने अपनी जान की परवाह किए बिना तुरंत पानी से भरी खदान में उतरने का फैसला लिया। वे राहत और बचाव की ट्रेनिंग ले चुके थे। फिर भी कई लोगों और सरकार ने इस बात का विरोध किया, लेकिन उन्होंने रेस्क्यू जारी रखा।</p>
<p style="text-align:justify;">गिल ने सबसे पहले वहां मौजूद अफसरों की मदद से पानी को पम्प के जरिए बाहर निकालने की कोशिश की, लेकिन ये तरीका कारगर नहीं रहा। इसके बाद उन्होंने वहां कई बोर खोदे और एक 2.5 मीटर का लंबा स्टील का एक कैप्सूल बनाया और उसे एक बोर के जरिए खदान में उतारा। उनके दिए आइडिया से खदान में से एक-एक कर 65 लोगों को उस कैप्सूल के जरिए 6 घंटे में बाहर निकाल लिया गया। जब आखिरी में गिल बाहर निकले, तो यह कहते हुए रो पड़े कि वह बाकी 6 लोगों को नहीं बचा सके। यह हादसा अब तक के कोयला खदानों में हुए सबसे बड़े हादसों में से एक था। हादसे के बाद वहां मीडियाकर्मियों और पीड़ितों के परिजनों सहित लगभग एक लाख की भीड़ जमा थी। यदि उन्होंने अदम्य साहस और पराक्रम नहीं दिखाया होता, तो सभी 71 खनिक मर गए होते। पूरा आॅपरेशन उन्होंने प्लान किया था। स्टील का एक कैप्सूल बनाने के आइडिया के कारण उन्हें ‘कैप्सूल गिल’ भी कहा गया।</p>
<p style="text-align:justify;">इस रेस्क्यू आॅपरेशन के लिए गिल को कई बड़े अवॉर्ड्स से सम्मानित किया गया। उनका नाम वर्ल्ड बुक आॅफ रिकॉर्ड्स और लिम्का बुक आॅफ रिकॉर्ड्स में दर्ज है। इतना ही नहीं, 1991 में सिविलियन गैलेन्ट्री अवार्ड सर्वोत्तम जीवन रक्षक पदक से नवाजा गया और साल 2013 में लाइफ टाइम अचीवमेंट अवॉर्ड भी मिला। इसके अलावा आॅल इंडिया ह्यूमन राइट्स काउंसिल ने उन्हें ‘लीजेंड आॅफ बंगाल’ पुरस्कार दिया और आरएन टॉक्स एलएलपी ने उन्हें 2023 के लिए विवेकानंद कर्मवीर पुरस्कार से नवाजा। गिल आज भले ही हमारे बीच नहीं है, लेकिन लोग उन्हें आज भी याद करते हैं। सरकार ने अमृतसर में मजीठा रोड पर एक गेट का नाम उनके नाम पर रखकर इस बहादुर नायक को सम्मानित किया। Trading News<br />
<strong>                                                                                                                 – देवेन्द्रराज सुथार</strong></p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="HOW TO CONCENTRATE ON STUDIES: पढ़ाई में मन लगाने का अचूक उपाय" href="http://10.0.0.122:1245/how-to-concentrate-on-studies/">HOW TO CONCENTRATE ON STUDIES: पढ़ाई में मन लगाने का अचूक उपाय</a></p>
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                <pubDate>Sat, 07 Oct 2023 16:24:53 +0530</pubDate>
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