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                <title>Israel Hamas War Impact - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <description>Israel Hamas War Impact RSS Feed</description>
                
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                <title>Israel Hamas War Impact: हृदयविदारक: चीत्कार मारकर रोते बच्चे, बच्चों पर अमानवीय अत्याचार बंद हो!</title>
                                    <description><![CDATA[Israel Hamas War Impact: घर की लड़ाई हो या फिर दो देशों के बीच युद्ध पर ऐसी स्थिति में निर्दोष बच्चों में महिलाओं पर अत्याचार नहीं होने चाहिए। पर पिछले 7 अक्टूबर से इजराइल में फिलीस्तीन के बीच चल रहे युद्ध में सबसे ज्यादा बच्चों में महिलाओं पर ही मानवीय अत्याचार होते आ रहे हैं। […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/inhuman-atrocities-on-children-should-be-stopped/article-54883"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-11/israil-hamas-war-ipmact.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Israel Hamas War Impact: घर की लड़ाई हो या फिर दो देशों के बीच युद्ध पर ऐसी स्थिति में निर्दोष बच्चों में महिलाओं पर अत्याचार नहीं होने चाहिए। पर पिछले 7 अक्टूबर से इजराइल में फिलीस्तीन के बीच चल रहे युद्ध में सबसे ज्यादा बच्चों में महिलाओं पर ही मानवीय अत्याचार होते आ रहे हैं। यह पूरी मानव जाति के लिए शर्मसार होने की बात है। बच्चे अपने हो या फिर दूसरे के बच्चे, बच्चे होते हैं। बच्चों के मन में किसी के प्रति किसी भी प्रकार की द्वेष भावना नहीं होनी चाहिए। पहली बात तो युद्ध किसी भी बात का समाधान नहीं है। किसी ने किसी दिन दोनों देशों को खुद अपने स्तर पर या फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बातचीत की टेबल पर आना पड़ेगा। ऐसा नहीं हुआ तो विश्व भर में गंभीर मानव संकट का संकेत मिलने जा रहा है। Israel Hamas War Impact</p>
<h3>अंतरराष्ट्रीय समुदाय को शांति बहाली की ओर आगे बढ़ना चाहिए</h3>
<p style="text-align:justify;">यह माना कि इस हमले की शुरुआत सबसे पहले फिलिस्तीन समर्थित हमास के लड़ाकुओं ने की थी। उन्होंने भी इसराइल के बच्चों में महिलाओं के साथ अमानवीय अत्याचार करते हुए को अपने कब्जे में लिया। इसी बात को लेकर इसराइल गुस्से में है। इसी गुस्से में अपने नागरिकों की सुरक्षा सुरक्षित करते हुए इसराइल ने युद्ध की घोषणा की थी। पर अब बहुत हो चुका। अंतरराष्ट्रीय समुदाय को बीच बचाव करते हुए शांति बहाली की ओर आगे बढ़ना चाहिए। यूनाइटेड नेशन व यूनिसेफ इस दिशा में काम भी कर रहा है। पर चिंतनीय स्थिति है कि यूनाइटेड नेशन व इसकी अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा परिषद और यूनिसेफ की बात ना तो इसराइल सुनने के लिए तैयार है और ना ही हमास।</p>
<h3>अस्पतालों पर हमले व गाज़ा पर अधिकार जमाना गलत है</h3>
<p style="text-align:justify;">आखिर इन पर कंट्रोल किसका है? इस दिशा में आगे बढ़ाने की जरूरत है। फिलिस्तीन के समर्थित देश जो कल तक गाजा के समर्थन में बोल रहे थे, उन्होंने भी अब अपना कदम पीछे हटा लिया है। हालांकि उनकी तरफ से युद्ध में कूदना किसी भी स्तर पर सही नहीं ठहराया जा सकता। यह तो उनका अच्छा कदम है। लेकिन इसके बावजूद भी युद्ध विराम के लिए इजरायल और हमास से बातचीत की जा सकती है। इसराइल को बेशक महाशक्ति अमेरिका का समर्थन है। पर अमेरिका भी यह है साफ तौर पर कह चुका है कि इजरायल की तरफ से अस्पतालों पर हमले वह गाज़ा पर अधिकार जमाना गलत है। Israel Hamas War Impact</p>
<p style="text-align:justify;">किसी भी सूरत में गाजा के लोगों की स्वतंत्रता नहीं छिनी जानी चाहिए। जबसे युद्ध शुरू हुआ है तब से ही गाज़ा की मूलभूत आवश्यकताओं की सप्लाई बंद है। बिजली, पानी, ईंधन व पेट भरने के लिए खाने-पीने की वस्तुओं की सप्लाई बंद करना सीधे-सीधे मानव अधिकारों का उल्लंघन है। हालांकि यूनाइटेड नेशन व यूनिसेफ के अधिकारी समय-समय पर इजरायल गाजा पट्टी की यात्रा कर रहे हैं। अपनी चिंता भी जाहिर कर रहे हैं, लेकिन समाधान की ओर आगे नहीं बढ़ पा रहे यह स्थिति भयावह है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">4600 बच्चों की जा चुकी जान</h3>
<p style="text-align:justify;">यूनिसेफ के नए आंकड़ों के अनुसार गाज़ा में अब तक इस भयानक युद्ध में 4600 बच्चों की मौत हो चुकी है, जबकि 9000 के करीब बच्चे घायल है। इनमें से अधिकतर बच्चे जिंदगी और मौत के बीच विभिन्न अस्पतालों में संघर्ष कर रहे हैं। हालांकि इन अस्पतालों में बच्चों को बचाने के लिए किसी भी प्रकार की आवश्यक सुविधाएं फिलहाल उपलब्ध नहीं है। इस तरह से बेकसूर कोमल बच्चों को अपने हाल पर छोड़ना किसी भी सूरत में सही नहीं ठहराया जा सकता। फिलिस्तीन में इजरायल के बीच शांति बहाली के लिए यूनाइटेड नेशन प्रयासरत है। लेकिन इस अंतरराष्ट्रीय संगठन की बात अनसुनी की जा रही है। यूनाइटेड के स्थाई सदस्य जिनकी शांति बहाली में अहम भूमिका हो सकती है। उनमें से भी रस खुद यूक्रेन के साथ युद्ध में कूदा हुआ है। ऐसी स्थिति में शांति बहाली की उम्मीद कैसे की जा सकती है? यूनाइटेड नेशन के अन्य सदस्य भी इस पूरे युद्ध को एक तमाशबीन की तरह देख रहे हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">हृदयविदारक: चीत्कार मारकर रोते बच्चे</h3>
<p style="text-align:justify;">छायावाद के स्तंभ माने जाने वाले सूर्यकांत त्रिपाठी निराला ने अपनी बादल राग कविता में यह कहा था कि रोग शोक में भी हंसता है, बच्चों का सुकुमार शरीर। पर सूर्यकांत त्रिपाठी निराला की यह पंक्तियां भी इस युद्ध में विपरीत दिखाई दे रही है। यहां बच्चे भी चीत्कार मार-मार कर रो रहे हैं। कोई बच्चा मलबे के ढेरों में अपनों की तलाश करता हुआ दिखाई दे रहा है तो कोई अपने जीवन की भीख मांग रहा है। पर इजरायली सी फिलहाल इस युद्ध में अपनी क्रूरता का परिचय दे रही है। यह सीधा-सीधा युद्ध अपराध है क्योंकि यूनाइटेड नेशन की संधि के अनुसार जब भी किसी दो देशों के बीच युद्ध हो या फिर किसी देश के अंदरूनी हिस्सों में किसी भी प्रकार का संघर्ष हो तो वहां बेकसूर बच्चों व महिलाओं पर अत्याचार नहीं किया जा सकता। पर यहां ऐसा हो रहा है।</p>
<h3>बच्चों का जीवन कैसे बचाया जाए | Israel Hamas War Impact</h3>
<p style="text-align:justify;">हालांकि जब युद्ध बंद होगा या युद्ध के साथ-साथ यह मामला अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में चलेगा। जांच के बाद इसे युद्ध अपराध भी घोषित कर दिया जाएगा, लेकिन तब तक बच्चों के जीवन का आखिर जिम्मेदार कौन होगा? इस वक्त यह सबसे बड़ा अंतर्राष्ट्रीय सवाल है? जिसका जवाब किसी भी देश के पास नहीं है। इस युद्ध के बीच दोनों देशों को समर्थन देने वाले देश भी अपने-आप की शक्ति का राग अलाप रहे हैं। पर बच्चों का जीवन कैसे बचाया जाए, इस पर चर्चा नहीं हो रही? सिर्फ यूनिसेफ की चिंता जताने से कुछ नहीं होने वाला। अब भी समय है बच्चों पर अत्याचार बंद होने चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">हालांकि युद्ध में गाज़ा का नक्शा पूरी तरह से पलट चुका है। लगभग तबाह हो चुके गाजा से हमास का कंट्रोल भी लगभग समाप्त हो चुका है। स्थिति बड़ी ही विकराल बनी हुई है। पर बच्चों पर रहम करना चाहिए। बच्चे वास्तव में ही दया के पात्र होते हैं। बच्चे किसी के दुश्मन नहीं होते। पर ऐसा क्यों नहीं हो रहा? यह सोचने समझने से पर ही बात है। पूरे विश्व की अर्थव्यवस्था व बच्चों के जीवन को बचाने के लिए विश्व में शांति चाहिए, युद्ध नहीं। इस विषय पर गंभीर विचार करने की जरूरत है। नहीं तो आने वाला वक्त या प्रकृति किसी को भी माफ नहीं कर पाएगा</p>
<h3 style="text-align:justify;">अस्पताल बने युद्धस्थल | Israel Hamas War Impact</h3>
<p style="text-align:justify;">कसूर जो भी हो ‘अस्पताल युद्धस्थल नहीं हैं’, मानवीय सहायता कर्मियों की पुकार – बच्चों का उत्पीड़न रोका जाना होगा यूनीसेफ़ की कार्यकारी निदेशक कैथरीन रसैल ने ख़ान यूनिस के अल नासेर अस्पताल में शरण लेने वाले लोगों से मुलाक़ात की व उनकी समस्याएं जानी। पर फिलहाल समाधान उनके पास भी नहीं है। बुधवार को शान्ति और सुरक्षा संयुक्त राष्ट्र बाल कोष की कार्यकारी निदेशक कैथरीन रसैल ने, बुधवार को ग़ाज़ा पट्टी की यात्रा के बाद कहा कि वहाँ मौजूद दस लाख बच्चों के लिए, ग़ाज़ा में कोई भी स्थान सुरक्षित नहीं है।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने बताया कि उन्होंने वहाँ जो कुछ भी देखा व सुना, वह अत्यन्त ”भयावह” था यूनीसेफ़ प्रमुख की ये टिप्पणियाँ इन ख़बरों के बीच आईं कि, इसराइल के सुरक्षा बलों ने, बुधवार की सुबह भी ग़ाज़ा के अल शिफ़ा अस्पताल के भीतर छापा मारा है, जहाँ पिछले कुछ दिनों के दौरान भारी युद्ध और हवाई बमबारी में, अनेक मरीज़ों की मौतें हुई हुई। इनमें समय से पूर्व पैदा हुए कुछ बच्चे भी शामिल थे। जिन्हें जीवनरक्षक सहायता पर रखा गया था, मगर बिजली आपूर्ति ठह होने से उनकी ये सहायता बन्द करनी पड़ी थीं।</p>
<p style="text-align:justify;">संयुक्त राष्ट्र के आपदा राहत प्रमुख मार्टिन ग्रिफ़िथ्स ने, सोशल मीडिया मंचों पर लिखा है, “अस्पताल युद्ध के स्थान नहीं हैं।”उन्होंने ज़ोर दिया कि “नवजात शिशुओं, मरीज़ों, चिकित्सा स्टाफ़ और अन्य आम लोगों का संरक्षण सुनिश्चित किया जाना, अन्य तमाम चिन्ताओं से अधिक अहम होना चाहिए।”</p>
<h3 style="text-align:justify;">गम्भीर मानवाधिकार हनन हो रहा</h3>
<p style="text-align:justify;">यूनीसेफ़ की कार्यकारी निदेशक, कैथरीन रसैल ने बुधवार को ग़ाज़ा पट्टी में बच्चों, उनके परिवारों व यूनीसेफ़ के कर्मचारियों से मुलाक़ात की ग़ाज़ा के बच्चे, बार-बार बमबारी, विध्वंस और विस्थापन सह रहे हैं। कैथरीन रसैल ने कहा, ”संघर्षरत पक्ष, बाल अधिकारों का गम्भीर उल्लंघन कर रहे हैं। इनमें हत्या, अपंगता, अपहरण, स्कूलों और अस्पतालों पर हमले एवं मानवीय सहायता पहुँच की अनुमति देने से इनकार तक शामिल है।”</p>
<h3 style="text-align:justify;">मलबे में दबी हो सकती है बच्चों की जिमदगी</h3>
<p style="text-align:justify;">गाज़ा में बहुत से बच्चे लापता हैं और माना जा रहा है कि वे ढही हुई इमारतों और घरों के मलबे के नीचे दबे हुए हैं, जो आबादी वाले इलाक़ों में विस्फोटक हथियारों के इस्तेमाल का दुख़द परिणाम है। इस बीच, बिजली और चिकित्सा आपूर्ति समाप्त होने के कारण, ग़ाज़ा के एक अस्पताल में विशेष देखभाल की ज़रूरत वाले नवजात शिशुओं ने दम तोड़ दिया।</p>
<h3 style="text-align:justify;">बीमारियाँ फैलने का खतरा | Israel Hamas War Impact</h3>
<p style="text-align:justify;">कैथरीन रसैल ने अपनी यात्रा के दौरान, ग़ाज़ा पट्टी में तैनात यूनीसेफ़ के कर्मचारियों से भी भेंट की, जो ख़तरे और तबाही के बीच भी, बच्चों की मदद करने से पीछे नहीं हटे हैं। उन्होंने कहा कि मेरे साथ, अपने बच्चों पर इस युद्ध के प्रभाव, परिवार के सदस्यों की मौत और कई बार विस्थापित होने की अपनी हृदय विदारक कहानियाँ साझा कीं। उन्होंने बताया कि यूनीसेफ़ के कर्मचारी व अपने परिवारों समेत कई अनय लोग, पानी, भोजन एवं ज़रूरी स्वच्छता रहित,भीड़ भरे आश्रयों में रहने को मजबूर हैं। इन स्थितियों में बीमारी फैलने का ख़तरा भी बना रहता है.</p>
<h3 style="text-align:justify;">100 से अधिक कर्मचारियों की भी मौत | Israel Hamas War Impact</h3>
<p style="text-align:justify;">युद्ध के बीच ग़ाज़ा के अंदर काम कर रहे राहतकर्मियों के लिएअत्यन्त जोखिम भरी स्थिति हैं। अक्टूबर से अब तक वठफहअ के 100 से अधिक कर्मचारी मारे जा चुके हैं। कैथरीन रसैल ने कहा, ह्लयूनीसेफ़ और हमारे साँझीदार, यथासम्भव हर कोशिश कर रहे हैं, जिसमें अत्यन्त आवश्यक मानवीय आपूर्ति लाना भी शामिल है। लेकिन डीज़ल ईंधन ख़त्म हो गया है, जिसके कारण कुछ अस्पतालों और स्वास्थ्य केन्द्रों ने काम करना बन्द कर दिया है। ईंधन के अभाव में परिशोधन संयंत्र, पेयजल उपलब्ध नहीं करा सकते हैं, जिससे मानवीय आपूर्ति वितरित करना असम्भव है।</p>
<p style="text-align:right;"><strong>डॉ. संदीप सिंहमार।</strong><br />
<strong>वरिष्ठ लेखक एवं स्वतंत्र टिप्पणीकार।</strong></p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="Diabetes Control Tips : शुगर पर लगाम लगाने के लिए उठाएं ये जरूरी कदम!" href="http://10.0.0.122:1245/necessary-steps-to-control-sugar/">Diabetes Control Tips : शुगर पर लगाम लगाने के लिए उठाएं ये जरूरी कदम!</a></p>
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                                                            <category>देश</category>
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                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 16 Nov 2023 19:00:58 +0530</pubDate>
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                <title>Cease fireln Gaza Now: बंधकों की रिहाई पर बातचीत लेकिन संघर्ष विराम से इनकार</title>
                                    <description><![CDATA[Cease fireln Gaza Now: इजरायल। अमेरिकी राष्ट्रपति जो बिडेन प्रशासन ने इजराइल नागरिकों को दक्षिण की ओर भागने की अनुमति देने के साथ ही उत्तरी गाजा में युद्ध अभियानों में हर दिन 4 घंटे का मानवीय ठहराव देने की बात कही। बिडेन ने संवाददाताओं से यह भी कहा कि उन्होंने हमास द्वारा रखे गए कुछ […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/talks-on-release-of-hostages-but-ceasefire-refused/article-54727"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-11/gaza.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>Cease fireln Gaza Now: इजरायल।</strong> अमेरिकी राष्ट्रपति जो बिडेन प्रशासन ने इजराइल नागरिकों को दक्षिण की ओर भागने की अनुमति देने के साथ ही उत्तरी गाजा में युद्ध अभियानों में हर दिन 4 घंटे का मानवीय ठहराव देने की बात कही। बिडेन ने संवाददाताओं से यह भी कहा कि उन्होंने हमास द्वारा रखे गए कुछ बंधकों की रिहाई पर बातचीत के दौरान इजरायलियों से ‘तीन दिनों से अधिक समय तक रुकने’ के लिए कहा था, वहीं उन्होंने सामान्य संघर्ष विराम की संभावना से इनकार किया। Israel-Hamas war updates</p>
<p style="text-align:justify;">दूसरी ओर यूरोप में, फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन ने गाजा सहायता सम्मेलन की शुरूआत की, जिसमें इजराइल से नागरिकों की रक्षा करने की अपील की गई, उन्होंने कहा कि ‘सभी का जीवन अमूल्य है’ और आतंकवाद से लड़ना ‘कभी भी नियमों के बिना नहीं जाया जा सकता।’ गाजा में हमास द्वारा संचालित स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा कि युद्ध में मारे गए फिलिस्तीनियों की संख्या बढ़कर 10,818 हो गई है, जिनमें 4,400 से अधिक बच्चे शामिल हैं।</p>
<h3>आज यमन में बिना किसी स्पष्टीकरण के इंटरनेट बंद</h3>
<p style="text-align:justify;">हाल ही में हौथी विद्रोहियों द्वारा इजराइल, अमेरिका को निशाना बनाकर किए गए हमलों के बाद युद्धग्रस्त यमन में इंटरनेट बंद हो गया। इस पर वेब मॉनीटरों ने कहा कि युद्धग्रस्त यमन देश में इंटरनेट की पहुंच 10 नवंबर को बिना किसी स्पष्टीकरण के बंद कर दी गई। आउटेज 10 नवंबर की सुबह 12 बजे के आसपास शुरू हुआ और यमननेट पर सभी ट्रैफिक रुक गया, जो लगभग 10 मिलियन उपयोगकर्ताओं के लिए देश का मुख्य प्रदाता है, जिसे अब यमन के ईरानी समर्थित हौथी विद्रोहियों द्वारा नियंत्रित किया जाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">इजराइल के रक्षा मंत्रालय ने बताया कि आईडीएफ उपयोग के लिए लगभग 2,500 टन उपकरण ले जाने वाला एक मालवाहक जहाज गुरुवार को इजराइल में प्राप्त हुआ। गाजा में युद्ध की शुरूआत के बाद से 123 मालवाहक विमान और 7,000 टन से अधिक सैन्य उपकरण ले जाने वाले 7 जहाज सुनिश्चित करने के लिए इजराइल पहुंचे कि आईडीएफ के पास अपने उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए संसाधन हैं। Israel-Hamas war updates</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="Rain in Delhi-NCR : हुई बारिश यहां-वहां, बदली फ़िज़ा की आबो-हया!" href="http://10.0.0.122:1245/rain-in-delhi-ncr/">Rain in Delhi-NCR : हुई बारिश यहां-वहां, बदली फ़िज़ा की आबो-हया!</a></p>
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                                                            <category>विदेश</category>
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                <pubDate>Fri, 10 Nov 2023 12:49:58 +0530</pubDate>
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                <title>India Sends Aid To Palestine: पीड़ित फिलिस्तीनी लोगों के लिए राहत सामग्री भेजना भारत का सही फैसला</title>
                                    <description><![CDATA[India Sends Aid To Palestine: भारत सरकार ने हमास-इजरायल युद्ध के दौरान पीड़ित फिलिस्तीनी लोगों के लिए 38 टन से अधिक राहत सामग्री भेजी है। गाजा में इजरायली हमले से फिलिस्तीनी लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। भारत सरकार का यह फैसला मानव हितैषी सिद्धांत पर आधारित है। भले ही युद्ध […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/indias-right-decision-to-send-relief-material-to-the-suffering-palestinian-people/article-54062"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-10/india-rahat-samgri.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">India Sends Aid To Palestine: भारत सरकार ने हमास-इजरायल युद्ध के दौरान पीड़ित फिलिस्तीनी लोगों के लिए 38 टन से अधिक राहत सामग्री भेजी है। गाजा में इजरायली हमले से फिलिस्तीनी लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। भारत सरकार का यह फैसला मानव हितैषी सिद्धांत पर आधारित है। भले ही युद्ध के पहले दिन भारत सरकार ने इजराइल का समर्थन किया था, लेकिन मानवता की दृष्टि से फिलिस्तीनी लोगों का कल्याण उचित व अनिवार्य है। वास्तव में, हमास और फिलिस्तीनियों को एक रूप में नहीं देखा जा सकता है। Israel Hamas War Update</p>
<p style="text-align:justify;">हमास की कार्रवाई के लिए आम फिलिस्तिनीयों नागरिकों को जिम्मेवार नहीं ठहराया जा सकता। युद्ध के दौरान आम लोग किसी के दुश्मन नहीं होते, युद्ध सशस्त्र दलों का होता है। आमजन के पास हथियार नहीं होते और लोग किसी पर हमला नहीं करते, यहां तक ​​कि एक बहादुर सैनिक भी किसी निर्दोष निहत्थे पर हमला नहीं करता। जहां तक भारतीय संस्कृति का संबंध है, शत्रु सेना के असहाय घायलों की सहायता करने की परंपरा रही है। यह अच्छा है कि भारत ने अपनी विरासत बरकरार रखी है।</p>
<p style="text-align:justify;">अमेरिका ने भी इस बात का समर्थन किया कि इजराइल पर हमास के हमलों के लिए फिलीस्तीनियों को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। फिर यदि गाजावासी निर्दोष हैं तो उनकी सहायता करना सभी का मानवीय कर्तव्य है। पीड़ित फिलिस्तीनियों की मदद के लिए आगे आना जरूरी है। भारत सरकार ने अपनी छवि मजबूत कर ली है कि आतंकवाद का समर्थन नहीं किया जा सकता। साथ ही भारत ने फिलिस्तिीन व इजराइल के प्रति अपनी निष्पक्षता वाली पुरानी कूटनीति को दोहराया है। भारत के इजरायल और फिलिस्तीन के साथ लंबे समय से समान संबंध रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">अमेरिका से निकटता के बावजूद, भारत ने फिलिस्तीन के साथ अपने संबंध बनाए रखे। हमास-इजराइल युद्ध की शुरूआत हमास के हमलों से हुई थी, इसलिए भारत का इजराइल को समर्थन उचित था, जिससे एक बार संदेश गया कि भारत फिलिस्तीन से हट गया है लेकिन भारत सरकार ने कूटनीतिक अवसर का लाभ उठाकर फिलिस्तीनियों की मदद करके अपनी तटस्थता साबित कर दी है।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="Naye baal kaise ugaye: बाल झड़ते-झड़ते बन गया है खालिस्तान तो… यह तरीका करें इस्तेमाल, तेजी से उगने लगेंगे बाल!" href="http://10.0.0.122:1245/naye-baal-kaise-ugaye-%E0%A4%AC%E0%A4%BE%E0%A4%B2-%E0%A4%9D%E0%A4%A1%E0%A4%BC%E0%A4%A4%E0%A5%87-%E0%A4%9D%E0%A4%A1%E0%A4%BC%E0%A4%A4%E0%A5%87-%E0%A4%AC%E0%A4%A8-%E0%A4%97%E0%A4%AF%E0%A4%BE-%E0%A4%B9/">Naye baal kaise ugaye: बाल झड़ते-झड़ते बन गया है खालिस्तान तो… यह तरीका करें इस्तेमाल, तेजी से उ…</a></p>
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                                                            <category>देश</category>
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                <pubDate>Tue, 24 Oct 2023 11:10:03 +0530</pubDate>
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                <title>Israel Hamas War Impact: जिधर देखो चीख पुकार, क्रूरता के लिए कौन जिम्मेदार?</title>
                                    <description><![CDATA[Israel Hamas War Impact: राकेट, मिसाइल व बमबारी…जिधर देखो चीख पुकार, खून से सनी सड़के व लोग, मलबे में दबी जिंदगी। जहाँ तक नजर जा रही है वहीं पर लाशों के अंबार। कोई अपनों से बिछुड़ा हुआ है तो कोई अपनों को खो चुका है। कुछ ऐसे हालात है इजराइल व फिलिस्तीन समर्थित आतंकवादी संगठन […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/everywhere-you-look-there-are-screams-and-cries-who-is-responsible-for-this-cruelty/article-53933"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-10/israel-hamas-war1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Israel Hamas War Impact: राकेट, मिसाइल व बमबारी…जिधर देखो चीख पुकार, खून से सनी सड़के व लोग, मलबे में दबी जिंदगी। जहाँ तक नजर जा रही है वहीं पर लाशों के अंबार। कोई अपनों से बिछुड़ा हुआ है तो कोई अपनों को खो चुका है। कुछ ऐसे हालात है इजराइल व फिलिस्तीन समर्थित आतंकवादी संगठन हमास के बीच जंग के। इतना तो सब जानते हैं कि किसी भी जंग के बीच खून खराब होता ही है। लेकिन जितना खून खराबा पिछले 24 घंटो के दौरान गाजा पट्टी में देखने को मिला, इतना पिछले 12 दिनों के दौरान भी एक साथ देखने को नहीं मिला था। Israel Hamas War Impact</p>
<p style="text-align:justify;">हालांकि दोनों देशों के बीच जंग जारी है। 7 अक्टूबर को जब फिलिस्तीन समर्थित आतंकवादी संगठन हमास ने इसराइल के ठिकानों पर अचानक हमला बोला था, तब से ही बेकसूर लोगों पर अत्याचार हो रहे हैं। पर इसी बीच बुधवार सुबह होते ही दुनिया के सामने जो खबर व खून-खराबे की तस्वीर सामने आई वह न सिर्फ गाजा पट्टी के लोगों के लिए बल्कि पूरी दुनिया के लिए चिंतननीय स्थिति है। 1945 में यूनाइटेड नेशन की जेनेवा संधि के अनुसार विश्व में शांति बहाली जारी रहेगी। लेकिन जब कभी किन्हीं दो देशों के बीच युद्ध की स्थिति बन भी जाए तो तब वहां मानवीय अत्याचार नहीं होगा। पर ऐसा नहीं हुआ।</p>
<p style="text-align:justify;">गाजा पट्टी के सबसे बड़े अस्पताल पर रॉकेट गिराया या मिसाइल। पर इस आसमानी हमले से पूरा अस्पताल जहां खंडहर में तब्दील हो गया। वहीं सैकड़ो की संख्या में उपचार की आस में दाखिल हुए घायल या मरीज लाश बन गए।</p>
<p style="text-align:justify;">मंगलवार को गाजा पट्टी के अस्पताल पर हुए हमले को एक तरफ जहां मानवीय अत्याचार कहा जा सकता है तो वहीं यह हमला युद्ध अपराध की श्रेणी में भी आ सकता है। इस हमले की दुनिया भर में चौतरफा आलोचना जारी है। इस आलोचना के बीच अमेरिका ने इस हमले की जांच के भी आदेश दिए हैं। पर यह हमला इसराइल ने किया या फिर हमास ने। इस बात को कोई भी स्वीकार नहीं कर रहा है। इजराइल व फिलिस्तीन की तरफ से अब तक इस हमले की किसी ने भी जिम्मेदारी नहीं ली। इजराइल का कहना है कि उसने अस्पताल पर किसी भी प्रकार का रॉकेट नहीं दागा और न ही उसने मिसाइल छोड़ी। Israel Hamas War Impact</p>
<p style="text-align:justify;">इजराइल का आरोप है यह हमास के अपने रॉकेट कि गलत दिशा में जाने से ऐसा हमला हुआ। दूसरी तरफ हमास भी अस्पताल पर हुए इस हमले की जिम्मेदारी से भाग रहा है। इसराइल हो या फिर हमास। जिसने भी यह हमला किया है, उस पर अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत युद्ध अपराध का आरोप लग सकता है और लगना भी चाहिए। युद्ध अपराध एक संगीन अपराध है। जिसके लिए अंतरराष्ट्रीय कानून अपना काम करता है। मंगलवार को गांजा पट्टी पर हुए हवाई हमले की जिम्मेदारी इजरायली वायु सेवा ने नहीं ली है।</p>
<p style="text-align:justify;">आईडीएफ ने तो इस हमले के लिए फिलिस्तीन इस्लामिक जिहाद सैन्य समूह के असफल रॉकेट लॉन्च को जिम्मेदार ठहराया है। इजरायली वायु सेवा ने व इजरायल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा है ‘आईडीएफ की परिचालन प्रणालियों के विश्लेषण के अनुसार इजरायल की तरफ रॉकेट श्रृंखला छोड़ी गई थी, जो अस्पताल के आसपास से गुजरी और वहीं फट गई। इस हमले के लिए इस्लामी जिहाद आतंकी संगठन जिम्मेदार है।</p>
<p style="text-align:justify;">पर अब हमले की जिम्मेदारी से दोनों पक्ष बच रहे हैं। लेकिन उससे पहले चिंतनीय स्थिति है कि इस अस्पताल में जो भी बीमार व घायल अपने जीवन की संजीवनी की आस में भर्ती हुए थे। अब उनका जीवन खत्म हो चुका है। उनके अपने रोते-बिलखते हुए आरोप लगाते हुए इजराइल व हमास को दोष दे रहे हैं। लेकिन कुछ भी हो जिनके अपने अस्पताल में इलाज करवाने के लिए आए थे। वे अपनी बीमारी से नहीं मरे, बल्कि उन्हें आसमानी अटैक से मरना पड़ा।</p>
<p style="text-align:justify;">यह उनके लिए मृत्यु दंड से काम नहीं है। विश्व स्वास्थ्य संगठन भी ऐसा मान चुका है कि यदि अस्पताल में भर्ती किसी मरीज पर हमला किया जाता है तो वह मृत्युदंड के बराबर होगा। पर अब इस मामले में होगा क्या? यह सोचने का सवाल है। पिछले 12 दिनों से जारी इस युद्ध में हमास और इजरायल दोनों पर ही अंतर्राष्ट्रीय युद्ध अपराध कानून के उल्लंघन का आरोप लगता आ रहा है। Israel Hamas War Impact</p>
<p style="text-align:justify;">इस मामले में यूनाइटेड नेशन दोनों पक्षों के उल्लंघनों की जांच तो कर रहा है। पर जब तक यह जांच पूरी होगी तब तक इजराइल व हमास खंडहर में तब्दील हो चुका होगा, युद्ध अपराध की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जांच कर उसे लागू करना इतना आसान काम नहीं है। यह सबसे जटिल काम है। हमेशा युद्धों के बाद ऐसे अपराधों की जांच और अपराधियों को सजा के मुकाम तक पहुँचा पाना बहुत जटिल प्रणाली का हिस्सा है। ऐसा आज तक कभी हुआ भी नहीं।</p>
<p style="text-align:justify;">ऐसे मामले में अंतरराष्ट्रीय कोर्ट जब किसी भी राजनेता के खिलाफ गैर जमानती वारंट तक जारी कर देता है तो भी उसे गिरफ्तार कर पाना अंतरराष्ट्रीय कोर्ट के लिए सबसे मुश्किल कार्य होता है। जैसा रूस व यूक्रेन युद्ध में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय कोर्ट में ऐसा हुआ है। पर अभी तक गिरफ्तारी की तो बात ही दूर व्लादिमीर पुतिन तक पहुंचना भी अंतरराष्ट्रीय कोर्ट, यूनाइटेड नेशन व मानवाधिकार संगठनों के लिए असंभव रहा है। आधुनिक सभ्यता के जन्म के साथ या ये कहे कि विज्ञान के बढ़ते कदमों के साथ ही सभी देश हथियारों से लैस हैं और यही एक वजह है कि यही विज्ञान जहां एक वरदान है तो वहां पूरी दुनिया के लिए अभिशाप भी है।</p>
<p style="text-align:justify;">रूस यूक्रेन युद्ध इजराइल फिलिस्तीन युद्ध का उदाहरण सभी के समक्ष है। इससे पहले भी युद्ध में बेकसूर जनता मरती रही है। पर याद होगा हजारों वर्ष पहले एक ऐसी सभ्यता भी थी जिनके पास औजार तो थे पर कोई हथियार नहीं था। यहां हम बात कर रहे हैं सिंधु सभ्यता की। संयुक्त भारत एवं वर्तमान में पाकिस्तान के सिंध प्रांत में स्थित सिंधु घाटी सभ्यता बसी थी। वर्तमान समय में इसे मोहनजोदड़ो के नाम से जाना जाता है, जिसका अर्थ है ‘मुर्दों का टीला’।</p>
<p style="text-align:justify;">पर यहां मुर्दों का टीला प्राकृतिक आपदा के कारण बना था, ना कि किसी हथियारों के प्रयोग से। इतिहासकार ओम थानवी ने अपने लेख ‘अतीत में दबे पाँव’ में इस सभ्यता के बारे में खुलकर लिखा है। हालांकि जिस स्थान पर सिंधु सभ्यता विकसित थी। आज वहां सिर्फ एक अजायबघर घर बना हुआ है। ओम थानवी ने अजायबघर में तनात पुरातात्विक विद्वान अली नवाज के माध्यम से लिखा है कि समूची सिंधु सभ्यता में हथियार कहीं नहीं मिले।</p>
<p style="text-align:justify;">जैसे किसी आजकल के राजतंत्र में होते हैं। उन्होंने लोकतंत्र की बजाय राजतंत्र शब्द का प्रयोग किया है। सिंधु सभ्यता में कहीं पर भी भव्यता का आडंबर नहीं था यानी कि किसी को किसी का डर नहीं था। पर वर्तमान में पूरी दुनिया रूपी आईने में झांककर देखा जाए तो आज चारों तरफ भव्यता का ही आडंबर है। चाहे लोग खुद अपनों से डर रहे हो या किसी विदेशी हमले से। इतना ही नहीं देश के अंदरूनी हिस्सों में हो रहे दंगों से भी लोग इतने भयभीत हैं कि अपने घर-स्थान छोड़ने के लिए मजबूर हो रहे हैं। अभी भी समय बचा है। Israel Hamas War Impact</p>
<p style="text-align:justify;">यूनाइटेड नेशन की सुरक्षा परिषद को पहल करते हुए रूस-यूक्रेन युद्ध व फिलिस्तीन-इजरायल युद्ध को किसी तरह रुकवाना चाहिए ताकि मानवता पर किसी भी प्रकार का कोई संकट न बने। हम सबको मिलकर या सभी देशों को मिलकर एक ऐसी समाज की स्थापना करनी चाहिए, जो राज-पोषित न होकर समाज-पोषित हो। यानी समाज में समाज में ही रहने वाले व्यक्तियों से किसी भी प्रकार का कोई डर ना हो। यदि युद्ध में शामिल लोग या देश अपने अहं के सवाल को छोड़ दें तो ऐसा संभव भी है। Israel Hamas War Impact</p>
<p style="text-align:right;"><strong>डॉ. संदीप सिंहमार, वरिष्ठ लेखक एवं स्वतंत्र टिप्पणीकार</strong></p>
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                                                            <category>देश</category>
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                                            <category>विचार</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 20 Oct 2023 18:12:31 +0530</pubDate>
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                <title>युद्ध विश्व के लिए दुर्भाग्य, परिणाम हो सकते हैं विनाशकारी</title>
                                    <description><![CDATA[Israel Hamas War Impact: युद्ध का परिणाम विकास नहीं विनाश होता है। युद्ध का नतीजा कभी लाभ से नहीं होता युद्ध हमेशा हानि ही देता है। हानि भी ऐसी जिसकी कभी क्षतिपूर्ति नहीं हो सकती। क्या किसी इन्सानी जिंदगी की क्षतिपूर्ति हो सकती है? क्या किसी को दोबारा जीवन दिया जा सकता है? कभी नहीं। […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/war-is-a-misfortune-for-the-world-the-consequences-can-be-disastrous/article-53703"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-10/israel-targets-hamas-targets-in-gaza.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Israel Hamas War Impact: युद्ध का परिणाम विकास नहीं विनाश होता है। युद्ध का नतीजा कभी लाभ से नहीं होता युद्ध हमेशा हानि ही देता है। हानि भी ऐसी जिसकी कभी क्षतिपूर्ति नहीं हो सकती। क्या किसी इन्सानी जिंदगी की क्षतिपूर्ति हो सकती है? क्या किसी को दोबारा जीवन दिया जा सकता है? कभी नहीं। युद्ध का परिणाम हमेशा विनाश ही होता है। विज्ञान ने जितनी तरक्की की है उसका समस्त उपयोग मानव कल्याण हेतु न होकर उसका काफी उपयोग विनाश के लिए हो रहा है। जो चिंता का विषय है। विश्व शांति व खुशहाल समाज की रचना दुनिया की जरूरत है, लेकिन अहंकार व साम्राज्यवाद की होड़ ने इस जरूरत पर कुठाराघात किया है। Israel Hamas War Impact</p>
<p style="text-align:justify;">कहीं जाति-पाति के नाम पर कहीं धर्म के नाम पर दंगे फसाद व युद्ध हो रहे हैं। जबकि सभी धर्मों में प्रेम व अहिंसा की शिक्षा दी गई है। फिर अगर धर्म को मानते हो तो धर्म के नाम पर झगड़े क्यों? असल में ये सब झगड़े धर्मों के नाम पर राजनीतिक आकाओं की ही देन हैं जो अपनी स्वार्थसिद्धी के लिए किसी भी हद तक जा सकते है। दुनिया को युद्ध की आग में धकेलने वालों से पूछना होगा कि युद्ध या आतंक से आखिर क्या हासिल होगा जब दुनिया ही नहीं रहेगी तो फिर क्या मुर्दों पर राज करोगे।</p>
<p style="text-align:justify;">राजनीतिक आकाओं से यह पूछना होगा कि आखिर युद्ध एवम् आतंक की मानसिकता से किसका भला हो रहा है? निर्दोषों की हत्याओं से किसका भला होगा? मासूम बच्चों व महिलाओं से अत्याचार क्या किसी को सुकून दे सकता है? इस प्रकार के कृत्य क्या विश्व शांति के लिए सही है। दो पक्षों की लड़ाई में किसी तीसरे द्वारा आग में घी डालना क्या विनाश को बुलावा देना नहीं? आज यही हो रहा है। इजराइल-हमास युद्ध में अन्य देश कोई शांति प्रयास करने की बजाए अन्दर खाते एक पक्ष के साथ खड़े होकर युद्ध की विभिषिका को बढ़ा रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">बेघर होते लोग, बिलखते बच्चे, करहाती महिलाएं क्या किसी सभ्य समाज का अंग हो सकता है? लेकिन आज ऐसा हो रहा हैं। आधुनिकता के इस युग में हम असभ्य होते जा रहे हैं। युद्ध से किसी एक देश की जीत हो सकती है लेकिन युद्ध के परिणाम मानवता के लिए घातक ही होंगे जिसकी कभी क्षतिपूर्ति नहीं हो सकती। अतीत में हुए दो विश्वयुद्धों से अगर अब तक भी सीख नहीं ले सके तो यह विश्व के लिए दुर्भाग्य है। Israel Hamas War Impact</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="Earthquake: फिर आए भूकंप के झटके, सहमे लोग" href="http://10.0.0.122:1245/earthquake-shocks-again-people-scared/">Earthquake: फिर आए भूकंप के झटके, सहमे लोग</a></p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>सम्पादकीय</category>
                                            <category>विचार</category>
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                <pubDate>Sun, 15 Oct 2023 14:26:12 +0530</pubDate>
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                <title>Israel Hamas War Impact: इजरायल-हमास जंग के बीच टूट रहा अडानी का यह शेयर, निवेशकों में मचा हड़कंप</title>
                                    <description><![CDATA[Israel Hamas War Impact: वैश्विक स्तर से मिल कमजोर संकेतों के साथ ही घरेलू स्तर पर लगभग हर क्षेत्र में हुयी बिकवाली के कारण आज शेयर बाजार में गिरावट रही। बीएसई का सेंसेक्स और एनएसई का निफ्टी गिरावट लेकर बंद हुआ। हमास के आतंकियों और इजरायल के बीच जारी तनाव के कारण वैश्विक स्तर पर […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/business/this-share-of-adani-is-falling-amid-israel-hamas-war-panic-among-investors/article-53463"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-10/israel-hamas-war-impact.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Israel Hamas War Impact: वैश्विक स्तर से मिल कमजोर संकेतों के साथ ही घरेलू स्तर पर लगभग हर क्षेत्र में हुयी बिकवाली के कारण आज शेयर बाजार में गिरावट रही। बीएसई का सेंसेक्स और एनएसई का निफ्टी गिरावट लेकर बंद हुआ। हमास के आतंकियों और इजरायल के बीच जारी तनाव के कारण वैश्विक स्तर पर बन रही भू राजनैतिक स्थिति से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शेयर बाजार में रही गिरावट के दबाव में बीएसई का 30 शेयरों वाला संवेदी सूचकांक सेंसेक्स 483.24 अंक टूटकर 65512.39 अंक पर और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का निफ्टी 141.15 अंक उतरकर 19512.35 अंक पर रहा। दिग्गज कंपनियों की तरह छोटी और मझौली कंपनियों में भी तेजी बिकवाली देखी गयी जिससे बीएसई का मिडकैप 1.22 प्रतिशत गिरकर 31686.69 अंक पर और स्मॉलकैप 1.72 प्रतिशत फिसलकर 37209.94 अंक पर रहा।</p>
<p style="text-align:justify;">बीएसई में सभी समूह गिरावट में रहे जिसमें सर्विसेस में सबसे अधिक 2.73 प्रतिशत की और आईटी में सबसे कम 0.18 प्रतिशत की गिरावट देखी गयी। इस दौरान बीएसई में कुल 3929 कंपनियों में कारोबार हुआ जिसमें से 2804 को नुकसान उठाना पड़ा जबकि 993 हरे निशान में रही। 132 कंपनियों में कोई बदलाव नहीं हुआ। वैश्विक स्तर पर मिश्रित रूख देखा गया। ब्रिटेन का एफटीएसई 0.30 प्रतिशत और हांगकांग का हैंगसेंग 0.18 प्रतिशत की बढ़त में रहा जबकि जर्मनी का डैक्स 0.54 प्रतिशत , चीन का शंघाई कंपोजिट 0.44 प्रतिशत और जापान का निक्केई 0.26 प्रतिशत की गिरावट में रहा।</p>
<h4 style="text-align:justify;">टूट रहा अडानी का यह शेयर</h4>
<p style="text-align:justify;">अडानी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक जोन के शेयरों में सोमवार को 4% से अधिक की गिरावट आई। कंपनी के शेयर इंट्रा डे ट्रेड में शुक्रवार के शेयर प्राइस 830.55 रुपये के मुकाबले 4.5% टूटकर 792.95 रुपये पर पहुंच गए थे। शेयरों में इस गिरावट के पीछे पश्चिम एशिया में बढ़ रही तनाव है।</p>
<h4 style="text-align:justify;">अडानी पोर्ट्स के शेयर पर क्यों पड़ रहा असर</h4>
<p style="text-align:justify;">गौरतलब हैं कि गौतम अडानी समूह ने इजरायल के हाइफा पोर्ट का अधिग्रहण किया हुआ है। अडानी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकनॉमिक जोन (एपीएसईजेड) और इजराइल के गादोत समूह ने इजराइल में हाइफा बंदरगाह के 1.18 अरब डॉलर में निजीकरण के लिए पिछले वर्ष जुलाई में बोली जीती थी। इसमें भारतीय भागीदार अडानी की हिस्सेदारी 70 प्रतिशत और गादोत समूह का हिस्सा 30 फीसदी है। जानकारी के अनुसार आपको बता दें कि हाइफा पोर्ट शिपिंग कंटेनर के मामले में इजराइल का दूसरा सबसे बड़ा पोत और पर्यटक क्रूज शिप के मामले में सबसे बड़ा बंदरगाह है।</p>
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                <pubDate>Mon, 09 Oct 2023 17:44:20 +0530</pubDate>
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