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                <title>Global Economy - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>UN Budget 2026: यूएन ने बजट और नौकरियों में कटौती के साथ की नव वर्ष 2026 की शुरुआत</title>
                                    <description><![CDATA[UN Budget 2026: संयुक्त राष्ट्र। विश्व की सबसे बड़ी बहुपक्षीय संस्था संयुक्त राष्ट्र इन दिनों गहरे वित्तीय दबाव का सामना कर रही है। इसी पृष्ठभूमि में वर्ष 2026 की शुरुआत संगठन कम संसाधनों और बड़े पैमाने पर पदों में कटौती के साथ करने जा रहा है। महासभा ने 3.45 अरब अमेरिकी डॉलर के नियमित बजट […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/the-un-begins-the-new-year-2026-with-budget-and-job-cuts/article-79887"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-01/un-budget-2026.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">UN Budget 2026: संयुक्त राष्ट्र। विश्व की सबसे बड़ी बहुपक्षीय संस्था संयुक्त राष्ट्र इन दिनों गहरे वित्तीय दबाव का सामना कर रही है। इसी पृष्ठभूमि में वर्ष 2026 की शुरुआत संगठन कम संसाधनों और बड़े पैमाने पर पदों में कटौती के साथ करने जा रहा है। महासभा ने 3.45 अरब अमेरिकी डॉलर के नियमित बजट को स्वीकृति दी है, जो महासचिव एंटोनियो गुटेरेस के प्रस्ताव पर आधारित है।  UN Budget</p>
<p style="text-align:justify;">हालांकि स्वीकृत राशि उनके सुझाए गए 3.238 अरब डॉलर से कुछ अधिक है, लेकिन यह 2025 के 3.72 अरब डॉलर के बजट की तुलना में लगभग 270 मिलियन डॉलर, यानी करीब 7.25 प्रतिशत कम है। यह बजट केवल संयुक्त राष्ट्र के केंद्रीय प्रशासनिक कार्यों के लिए निर्धारित है, जबकि शांति अभियानों और यूनेस्को, विश्व स्वास्थ्य संगठन जैसी एजेंसियों के लिए अलग-अलग बजट तय किए जाते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">नियमित बजट में भारत का योगदान 1.016 प्रतिशत निर्धारित किया गया है। यह हिस्सेदारी सकल राष्ट्रीय आय, जनसंख्या और अन्य आर्थिक-सामाजिक मानकों के आधार पर तय होती है। इससे पहले महासभा की पांचवीं समिति को संबोधित करते हुए सहायक महासचिव चंद्रमौली रामनाथन ने बताया कि खर्च में कटौती के तहत लगभग 2,900 पद समाप्त किए जाएंगे। इसके अतिरिक्त करीब 1,000 कर्मचारी स्वेच्छा से सेवा से हटने पर सहमति जता चुके हैं।</p>
<h3>इतनी कठिन परिस्थितियों में सहमति बनना अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि</h3>
<p style="text-align:justify;">193 सदस्य देशों के बीच लंबी और जटिल बातचीत के बाद इस बजट को अंतिम रूप दिया गया। इस प्रक्रिया को लेकर रामनाथन ने कहा कि इतनी कठिन परिस्थितियों में सहमति बनना अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि है। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, एक दिसंबर तक सदस्य देशों की कुल बकाया राशि 1.586 अरब डॉलर तक पहुंच चुकी थी। इसमें वर्ष 2024 के 709 मिलियन डॉलर और 2025 के लिए 877 मिलियन डॉलर शामिल हैं। इसी कारण सदस्य देशों से आग्रह किया गया है कि वे वर्ष 2026 का अपना योगदान समय पर जमा करें। UN Budget</p>
<p style="text-align:justify;">बजट को सर्वसम्मति से पारित किए जाने से पहले दो संशोधनों को अस्वीकार कर दिया गया। इनमें एक संशोधन रूस द्वारा प्रस्तुत किया गया था, जो सीरिया में मानवाधिकार उल्लंघनों की जांच से संबंधित था, जबकि दूसरा संशोधन क्यूबा की ओर से नागरिकों की सुरक्षा से जुड़े महासचिव के सलाहकार की भूमिका पर केंद्रित था। भारत ने इन दोनों प्रस्तावों पर मतदान में भाग नहीं लिया।</p>
<p style="text-align:justify;">संयुक्त राष्ट्र के नियमित बजट में सबसे बड़ा योगदान संयुक्त राज्य अमेरिका का है, जिसकी हिस्सेदारी 22 प्रतिशत है, जबकि चीन 20 प्रतिशत के साथ दूसरे स्थान पर है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लंबे समय से संयुक्त राष्ट्र के आलोचक रहे हैं। उनके कार्यकाल के दौरान अमेरिका ने वर्ष 2025 के लिए स्वीकृत राशि अब तक जारी नहीं की, जिससे संगठन की वित्तीय स्थिति और कमजोर हुई है। इसके अलावा ट्रंप ने अगले वर्ष के नियमित बजट में अमेरिका के योगदान को घटाकर 610 मिलियन डॉलर करने का प्रस्ताव रखा है। यदि ऐसा होता है, तो हाल ही में स्वीकृत बजट की दीर्घकालिक स्थिरता पर भी प्रश्नचिह्न लग सकता है। UN Budget</p>
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                                                            <category>विदेश</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 01 Jan 2026 10:20:56 +0530</pubDate>
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                <title>Economy crisis: युद्ध का असर, वैश्विक अर्थव्यवस्था के डगमगाते कदम !</title>
                                    <description><![CDATA[Economy crisis: वैश्विक स्तर पर विभिन्न देश आर्थिक समस्याओं से लगातार जूझ रहे हैं। साथ ही, रूस यूक्रेन के बीच युद्ध अभी थमा भी नहीं था कि आतंकवादी संगठन हमास ने इजराइल पर हमला कर दिया, जिससे अब इजराइल एवं हमास के बीच युद्ध छिड़ गया है और अब तो एक तरह से लेबनान भी […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/impact-of-war-wavering-steps-of-global-economy/article-53627"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-10/global-economy.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Economy crisis: वैश्विक स्तर पर विभिन्न देश आर्थिक समस्याओं से लगातार जूझ रहे हैं। साथ ही, रूस यूक्रेन के बीच युद्ध अभी थमा भी नहीं था कि आतंकवादी संगठन हमास ने इजराइल पर हमला कर दिया, जिससे अब इजराइल एवं हमास के बीच युद्ध छिड़ गया है और अब तो एक तरह से लेबनान भी इस युद्ध में कूद गया है। इन विपरीत परिस्थितियों के बीच, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आइएमएफ) ने अपनी विश्व आर्थिक परिदृश्य रिपोर्ट-2023 में कहा है कि चालू वित्त वर्ष 2023-24 में जहां वैश्विक विकास दर तीन प्रतिशत रहेगी, वहीं भारत की विकास दर 6.3 प्रतिशत रहेगी। आज भी भारत दुनिया में सबसे तेज विकास दर वाला देश है। Economy crisis</p>
<p style="text-align:justify;">चूंकि अमेरिका और रूस के साथ-साथ दुनिया के अधिकांश देश भारत के साथ लगातार आर्थिक मित्रता बढ़ा रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने अपने विश्व आर्थिक अनुमान में कहा है कि भारतीय अर्थव्यवस्था इस साल पहले के अनुमान से कहीं अधिक तेजी से बढ़ेगी। साथ ही, इस साल और अगले साल भी दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बनी रहेगी। वैसे, एक चिंताजनक अनुमान यह भी है कि विश्व स्तर पर महंगाई के चलते दुनिया में विकास दर थोड़ी धीमी रहेगी। वहीं रूस-यूक्रेन युद्ध ने यूरोप सहित विश्व भर के अनेक देशों में तेल व ऊर्जा का संकट बढ़ाया है। इसके अलावा अब अरब क्षेत्र में युद्ध छिड़ गया है, तो चिंता बहुत ज्यादा बढ़ गई है। Economy crisis</p>
<p style="text-align:justify;">गौर करने की बात है कि दुनिया भर में एक तिहाई से ज्यादा तेल की आपूर्ति अरब देशों से ही होती है। ऐसे में, यदि आपूर्ति प्रभावित होती है, तो दुनिया भर में हाहाकार की स्थिति बन जाएगी। भारत में अब तो त्यौहारी मौसम की शुरुआत होने जा रही है। नवरात्रि, दशहरा, दीपावली, क्रिसमस दिवस, नव वर्ष, महाशिवरात्रि, होली, आदि जैसे बड़े त्यौहार आने वाले हैं, जिन्हें भारत के नागरिक बड़े ही उत्साह के साथ मनाते हैं एवं इन त्यौहारों का भारतीय अर्थव्यवस्था में भारी योगदान रहता है। साथ ही, भारत में अब धार्मिक एवं आध्यात्मिक पर्यटन भी बहुत तेज गति से बढ़ रहा है, जिससे निश्चित ही भारत के आर्थिक विकास को बल मिलेगा। वहीं भारत भी युद्धग्रस्त क्षेत्रों को शांति की अपील कर चुका है, जिसमें सबकी भलाई ही है। Economy crisis</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="FD Rates: आरबीआई के फैसले का प्रभाव, अपना बचत खाता खाली कर रहे लोग एफडी में दिखा रहे रूचि!" href="http://10.0.0.122:1245/best-fd-rates-for-senior-citizen/">FD Rates: आरबीआई के फैसले का प्रभाव, अपना बचत खाता खाली कर रहे लोग एफडी में दिखा रहे रूचि!</a></p>
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                                                            <category>देश</category>
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                                            <category>विचार</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 13 Oct 2023 15:56:13 +0530</pubDate>
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