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                <title>Asthma - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>Asthma Symptoms: अस्थमा, काला दमा से बचना है तो करें ये खास उपाय! जानें, एक्सपर्ट डा. हनीष बजाज से समाधान</title>
                                    <description><![CDATA[Black Asthma Symptoms: गुरुग्राम (संजय कुमार मेहरा)। बढ़ते प्रदूषण के बीच अस्थमा व काला दमा के मरीजों के बढ़ोत्तरी हो रही है। सर्दियों के मौसम में इसके मरीज और बढ़ जाते हैं। अगर हम खुद को स्वस्थ रखना चाहते हैं तो प्रदूषण से तो बचना ही होगा, साथ ही धूम्रपान से भी दूर बनानी होगी। […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/home-and-family/how-dangerous-is-black-asthma-and-what-are-the-ways-to-avoid-it/article-64356"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2024-11/black-asthma.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Black Asthma Symptoms: गुरुग्राम (संजय कुमार मेहरा)। बढ़ते प्रदूषण के बीच अस्थमा व काला दमा के मरीजों के बढ़ोत्तरी हो रही है। सर्दियों के मौसम में इसके मरीज और बढ़ जाते हैं। अगर हम खुद को स्वस्थ रखना चाहते हैं तो प्रदूषण से तो बचना ही होगा, साथ ही धूम्रपान से भी दूर बनानी होगी। शराब जैसे नशों को भी छोड़ दें, नहीं तो यह बीमारी जीवन को खतरे में डाल देगी। Asthma Symptoms</p>
<h3>बाहर निकलना मजबूरी है तो मास्क जरूर लगाएं</h3>
<p style="text-align:justify;">सर्दियों के मौसम में लोगों को कई तरह की बीमारियां परेशान करती हैं। इम्यूनिटी कमजोर होने की वजह से सर्दियों में मौसम में ब्लैक अस्थमा (सीओपीडी) या क्रोनिक आॅब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज का खतरा कई गुणा बढ़ जाता है। ब्लैड अस्थमा फेफड़ों की ऐसी बीमारी है, जो सर्दियों के मौसम में तापमान कम होने की वजह से बढ़ जाता है। कई बार ब्लैक अस्थमा जैसी बीमारी हवा में मौजूद प्रदूषण और धूल के कणों से भी होती है।</p>
<p style="text-align:justify;">अस्थमा के कई प्रकार होते हैं। एलर्जिक अस्थमा, नॉन-एलर्जिक अस्थमा, सिजनल अस्थमा और अकुपेशनल अस्थमा के प्रकार हैं। जब भी अस्थमा का दौरा आए तो तुरंत इन्हेलर लेना चाहिए। अस्थमा से बचाने के लिए हमें कुछ उपाय करने चाहिए। प्रदूषण, धूल, मिट्टी और हवा के गंदे कणों से बचने के लिए चेहरे पर मास्क लगाएं। अगर किसी को पुरानी खांसी या फेफड़ों से संबंधित कोई बीमारी है तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।</p>
<h3 style="text-align:justify;">क्या है बीमारी</h3>
<p style="text-align:justify;">बात करें काला दमा की तो इसे सीओपीडी भी कहा जाता है। यह एक क्रॉनिक फेफड़ों की बीमारी है। इसमें सांस की नलियां सिकुड़ जाती हैं और उनमें सूजन आ जाती है। अस्थमा का दौरा तब पड़ता है, जब वायु मार्ग सूजने के साथ ही सिकुड़ जाता है। इस कारण से सांस लेना मुश्किल हो जाता है। अस्थमा के दौरे के दौरान लक्षण बहुत खराब हो जाते हैं। गंभीर अस्थमा से पीड़ित लोगों को अक्सर अस्थमा के दौरे पड़ते हैं। सामान्य तौर पर शरीर की रक्षा प्रणाली सक्रमण से लड़ने में मदद करती है। कुछ लोगों में प्रतिरक्षा प्रणाली के कारण सूजन पैदा होती है। ऐसा होने पर वायुमार्ग सूज जाते हैं और ज्यादा बलगम बनता है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">क्या कहते हैं विशेषज्ञ | Asthma Symptoms</h3>
<p style="text-align:justify;">यहां सेक्टर-15 स्थित नारायणा अस्पताल से एक्सपर्ट डा. हनीष बजाज के मुताबिक वायुमार्ग के आसपास की मांसपेशियां भी कठोर हो सकती हैं। इससे सांस लेना और भी कठिन हो जाता है। अस्थमा का सही कारण पता न होने के कारण अस्थमा को रोकना मुश्किल है। अस्थमा अक्सर तब होता है, जब शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली विकसित हो रही हो। एक रिसर्च के अनुसार आप अस्थमा को बढ़ने से रोकने के लिए घर को नमी और फफूंदी से मुक्त रखने के साथ ही वायु प्रदूषण से बचने जैसे कदम उठा सकते हैं। बहुत से लोग अस्थमा के साथ अच्छा जीवन जीते हैं। डॉक्टर आपके अस्थमा का प्रबंधन करने के लिए बेहतर तरीका ढूंढने में मदद कर सकते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">डा. हनीष बजाज सर्दी के मौसम में इन बीमारियों से बचाव के लिए जागरुक करते हुए हैं कि इन दिनों में खांसी, जुकाम के मरीजों में काफी बढ़ोतरी हो रही है। प्रदूषण का स्तर बढ़ रहा है। ऐसे में बीमार ना हों, इसलिए सुबह की सैर तो तुरंत बंद कर देनी चाहिए। विशेषकर बड़े-बुजुर्गों को इसका ध्यान रखना चाहिए। अगर बाहर निकलना जरूरी है तो मास्क जरूर पहनकर निकलें। क्यों बहुत अधिक प्रदूषण वातावरण में है। एयर प्यूरीफायर का भी उपयोग करें। फ्लू वैक्सीन लगवाएं।</p>
<p><a title="Gold-Silver Price Today: सोना और चांदी और सस्ती हुई, इतनी गिर गई कीमतें!" href="http://10.0.0.122:1245/gold-and-silver-became-cheaper-prices-fell-so-much/">Gold-Silver Price Today: सोना और चांदी और सस्ती हुई, इतनी गिर गई कीमतें!</a></p>
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                                                            <category>देश</category>
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                                            <category>घर परिवार</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 15 Nov 2024 18:01:50 +0530</pubDate>
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                <title>भारत में लगभग 30 मिलियन अस्थमा के मरीज, जान बचाने को हीट वेव से बचें</title>
                                    <description><![CDATA[हीट वेव से हर साल अस्थमा के बढ़ जाते हैं 5 प्रतिशत मरीज | Gurugram News सांस के रोगियों के लिए खतरे से खाली नहीं हीट वेव गुरुग्राम (सच कहूँ/संजय कुमार मेहरा)। Asthma: यह बहुत बड़ा आंकड़ा है कि भारत में लगभग 30 मिलियन अस्थमा के मरीज हैं। हर साल यह संख्या 5 प्रतिशत बढ़ […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/nearly-thirty-million-asthma-patients-in-india-avoid-heat-wave-to-save-lives/article-57417"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2024-05/gurugram-news-2.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:justify;">हीट वेव से हर साल अस्थमा के बढ़ जाते हैं 5 प्रतिशत मरीज | Gurugram News</h3>
<ul style="text-align:justify;">
<li>सांस के रोगियों के लिए खतरे से खाली नहीं हीट वेव</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>गुरुग्राम (सच कहूँ/संजय कुमार मेहरा)।</strong> Asthma: यह बहुत बड़ा आंकड़ा है कि भारत में लगभग 30 मिलियन अस्थमा के मरीज हैं। हर साल यह संख्या 5 प्रतिशत बढ़ जाती है। इस कारण हीट वेव को भी माना गया है। सांस के रोगियों के लिए हीट वेव खतरे से खाली नहीं है। इसलिए सांस के रोगियों को इस मौसम में एहतियात बरतनी चाहिए। विश्व स्तर पर हुए रिसर्च में भी इस बात का पता चला है कि जहां हीट वेब होता है वहां अस्थमा के मरीजों के अस्पताल में भर्ती होने की दर बढ़ जाती है। Gurugram News</p>
<p style="text-align:justify;">अस्पताल में भर्ती होने की दर में यह वृद्धि श्वसन संबंधी बीमारियों से पीड़ित लोगों के लिए अत्यधिक गर्मी के खतरों को दशार्ता है। गर्मियों के महीनों में हम अस्थमा के केसों में बढ़ोतरी देखते हैं। इस मौसम में हीट वेब के कारण अस्थमा केसों में ज्यादा वृद्धि होती अनुमान है कि भारत में लगभग 30 मिलियन अस्थमा के मरीज हैं। मरीजों की इतनी बड़ी संख्या होने के कारण अक्सर भीषण गर्मी पड?े से भारत में गर्मियों के महीनों में अस्थमा के मरीजों के अस्पताल में भर्ती होने की दर में वृद्धि होने की संभावना बढ़ जाती है। गर्मियों के दौरान बहुत ज्यादा धूप और गर्मी लगने से अस्पताल में भर्ती होने की घटनाएं बढ़ रही हैं। भारत में भीषण गर्मी के चलते पल्मोनोलॉजिस्ट अस्थमा के मरीजों को अस्पताल में भर्ती होने से बचने के लिए अतिरिक्त सावधानी बरतने का सुझाव दे रहे हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">अधिक गर्मी सांस के वायु मार्गों को बाधित कर सकती है: डा. अरुणेश</h3>
<p style="text-align:justify;">पारस हेल्थ के पल्मोनोलॉजी डिपार्टमेंट के प्रमुख डॉ. अरुणेश गर्मी और अस्थमा के बीच संबंध बताते हुए कहते हैं कि अत्यधिक गर्मी सांस के वायु मार्गों को बाधित कर सकती है। सूजन पैदा कर सकती है। यह ठीक वैसे ही होता है जैसे एलर्जी पैदा करने वाले पदार्थों को सांस के जरिए अंदर लेने पर वायु मार्ग सूज जाता है। इसके अलावा गर्म मौसम अक्सर ग्राउंड-लेवल ओजोन सांद्रता में वृद्धि कर देता है।</p>
<p style="text-align:justify;">ग्राउंड-लेवल ओजोन एक गैस प्रदूषक है, जो जलते हुए ईंधन उत्सर्जन और वाष्पशील कार्बनिक यौगिकों, गर्मी और सूरज की रोशनी के बीच रासायनिक प्रतिक्रियाओं से बनता है। यह गैस फेफड़ों और वायु मार्गों में सूजन पैदा कर देती है, जिससे इस समस्या से पीड़ित लोगों में अस्थमा के लक्षण दिखने शुरू हो जाते हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">डॉक्टर्स के इन सुझावों पर भी मरीज करें अमल | Gurugram News</h3>
<p style="text-align:justify;">विश्व अस्थमा दिवस पर पारस हेल्थ के पल्मोनोलॉजिस्ट एक मल्टी स्टेप (बहु-चरणीय) दृष्टिकोण का पालन करने का सुझाव देते हैं। इस दृष्टिकोण में डॉक्टर द्वारा निर्धारित दवा को खाना होता है, फिर आप चाहे भले ही स्वस्थ महसूस कर रहे हों। डॉक्टर की बताई गई दवा आपको खानी ही होगी। शरीर को डी-हाईड्रेसन से रोकने के लिए पूरे दिन लगातार तरल पदार्थ पीकर हाइड्रेटेड रहना महत्वपूर्ण है। क्योंकि अगर डी-हाईड्रेसन हो गया तो अस्थमा के लक्षण बदतर हो सकते हैं। सुबह या शाम को ज्यादा मेहनत न करने से गर्मी से राहत मिलती है। अचानक होने वाले अस्थमा के दौरे के लिए तुरंत प्रतिक्रिया के लिए हमेशा एक क्विक-रिलीफ इनहेलर साथ रखें। एयर कंडीशन वाली जगह पर ठहरने से गर्मी से राहत मिलती है और सांस लेने में कठिनाई कम होती है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">ये लक्षण हों तो तुरंत डॉक्टर के पास पहुंचें</h3>
<p style="text-align:justify;">सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अगर आपको खांसी, घरघराहट, सांस लेने में तकलीफ या सीने में जकड? जैसे अस्थमा के लक्षण बिगड़ते हैं, तो अपने डॉक्टर से कंसल्ट करें। डॉक्टर से कंसल्ट करने पर समय रहते हस्तक्षेप और उचित इलाज संभव हो जाता है। इन सावधानियों का पालन करके और गर्मी से जुड़ी सलाह के बारे में जानकारी रखकर, अस्थमा से पीड़ित व्यक्ति गर्मियों में बेहतर नियंत्रण के साथ जी सकते हैं और अस्थमा के बदतर होने के खतरे को कम कर सकते हैं।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:–  </strong><a title="Hill Stations: स्विट्जरलैंड की वादियों को भी भूल जाओगे, यदि भारत के इन सस्ते हिल स्टेशनों पर घूमकर आओगे!" href="http://10.0.0.122:1245/these-cheap-hill-stations-of-india/">Hill Stations: स्विट्जरलैंड की वादियों को भी भूल जाओगे, यदि भारत के इन सस्ते हिल स्टेशनों पर घूमकर आओगे!</a></p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>हरियाणा</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
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                <pubDate>Sun, 12 May 2024 17:47:13 +0530</pubDate>
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                <title>अब दमा रोग से छुटकारा पाने की राह आसान</title>
                                    <description><![CDATA[उज्जायी प्राणायाम बना सहायक (Asthma) तीस वर्षीय अभिषेक कुछ समय पहले तक अपनी उम्र के दूसरे लोगों से बिल्कुल अलग तरह की जिन्दगी जीता था, क्योंकि उसे दमा है। बार-बार किसी भी जगह पर पड़ने वाले दौरों के कारण उसे बहुत ही संभल कर चलना पड़ता था। बाद में उसने उज्जायी प्राणायाम का सहारा लिया। […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/health/now-the-way-to-get-rid-of-asthma-is-easy/article-86973"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-02/health3.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:center;"><strong>उज्जायी प्राणायाम बना सहायक (Asthma)</strong></h2>
<p style="text-align:justify;">तीस वर्षीय अभिषेक कुछ समय पहले तक अपनी उम्र के दूसरे लोगों से बिल्कुल अलग तरह की जिन्दगी जीता था, क्योंकि उसे दमा है। बार-बार किसी भी जगह पर पड़ने वाले दौरों के कारण उसे बहुत ही संभल कर चलना पड़ता था। बाद में उसने उज्जायी प्राणायाम का सहारा लिया। हालांकि शुरू में उसे काफी दिक्कतें आईं, परन्तु अब वह काफी हद तक ठीक है। उज्जायी शब्द उत उपसर्ग तथा जय शब्द के संयोग से बना है। उत उपसर्ग का अर्थ है ऊपर की ओर उठना या फैलाना तथा जय का अर्थ विजय या सफलता होता है। यह प्राणायाम प्राणिक चेतना को ऊपर की ओर जाने की दिशा देकर जीवन को सफलता की ओर बढ़ाता है। इस प्राणायाम को अतीन्द्रिय श्वसन के नाम से भी जाना जाता है, क्योंकि यह साधक को इंद्रियों से दूर सूक्ष्म मानसिक अवस्थाओं में ले जाता है।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>ऐसे करें ये प्राणायाम</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">केवल यही एक ऐसा प्राणायाम है, जिसका अभ्यास किसी भी प्रकार जैसे बैठकर, खड़े होकर अथवा चित्त लेटकर तथा किसी भी समय किया जा सकता है। इस प्राणायाम की दो अवस्थाएं हैं। पहली अवस्था में साधक किसी आसन या कम्बल पर पद्मासन में बैठ जाएं और हथेलियों को घुटनों पर रखकर तर्जनी के अग्रभाग को अंगूठे से मिलाएं। यह ज्ञान मुद्रा है, इस दौरान दूसरी अंगुलियों को ढीला छोड़ दीजिए।</p>
<p style="text-align:justify;">चेहरे पर से तनाव की रेखाएं हटाकर, उसे ढीला छोड़कर आंखों को बिल्कुल ढीला बंद करें। इसी दौरान दो मिनट के लिए मौन होकर मन को अंतमुर्खी कर लें। खेचरी मुद्रा लगाने के लिए जीभ के अग्रभाग को मुंह में पीछे की ओर इस तरह मोड़ें कि जीभ की निचली सतह ऊपरी तालू को स्पर्श करे। अब तक गहरी श्वास बाहर निकाल कर पूरक करें। पूरक करने के लिए नासाद्वार से सावधानी पूर्वक इतनी हवा भरें कि दोनों फेफड़े पूरी तरह भर जाएं। भरने के बाद रेचक करें।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>रेचक करने में ये बरतें सावधानी</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">रेचक करने के लिए सावधानी पूर्वक धीरे-धीरे अंदर भरी हवा को बाहर निकालें। इस प्रकार से हवा को तब तक बाहर निकालें, जब तक कि फेफड़े पूरी तरह खाली न हो जाएं। पूरक और रेचक करते समय लय का ध्यान रखना बहुत जरूरी है। श्वास-प्रश्वास की क्रिया सहज तथा बिना किसी रुकावट के होनी चाहिए।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>दो सप्ताह बाद करें द्वितीय अवस्था का अभ्यास</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">लगभग दो सप्ताह तक उपरोक्त अवस्था का नियमित अभ्यास करने के बाद द्वितीय अवस्था का अभ्यास शुरू करना चाहिए। इसके लिए अवस्था एक की तरह ज्ञान मुद्रा में बैठकर गहरी श्वास लेकर पूरक करें और अर्न्तकुम्भक करें अर्थात् श्वास को अंदर ही रोक लें। इस स्थिति में तब तक रहें, जब तक आप आराम से इस स्थित में रह सकें। बाद में अवस्था एक की तरह रेचक करें।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>अर्न्तकुम्भक में दक्षता के बाद करें जालन्धर बंध का अभ्यास</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">जब आप अर्न्तकुम्भक में प्रवीणता प्राप्त कर लें, तब जालन्धर बन्ध लगाने का अभ्यास करें। इसके लिए पूरक करने के बाद अर्न्तकुम्भक (श्वास को अंदर रोककर) करें। हाथ की कुहनियों को सीधा रखें और फिर घुटनों पर दबाव डालते हुए हाथ को सीधा रखें और फिर घुटनों पर दबाव डालते हुए हाथ को सीधा तान दें। इसके बाद सिर को सामने इतना झुकाएं कि ठुड्डी कंठ कूप से लग जाए। आरामदायक स्थिति तक इस अवस्था में रुकने के बाद सिर तथा हाथों को सामान्य कर पहली अवस्था की तरह रेचक करें। जालन्धर बंध के अभ्यास के साथ-साथ हम मूलबंध का अभ्यास भी कर सकते हैं।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>ऐसे करें मूलबंध</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">मूलबंध में मूलाधार क्षेत्र को कसकर संकुचित किया जाता है। मूलाधार क्षेत्र पुरुषों में मलद्वार और जननेन्द्रीयों के बीच होता है। महिलाओं में यह क्षेत्र वहां होता है जहां योनि और गर्भाशय मिलते हैं। अर्न्तकुम्भक करते समय मूलबंध तथा जालन्धर बंध का अभ्यास एक साथ भी किया जा सकता है और अलग-अलग भी। जब अर्न्तकुम्भक करने में पर्याप्त दक्षता प्राप्त हो जाए तो रेचक और पूरक के बीच श्वास रोकने की कोशिश करनी चाहिए इसे बर्हिकुम्भक कहते हैं।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>उड्डियान बंध में अपनाएं ये नियम</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">उज्जायी श्वसन के बाद उड्डियान बंध लगाना चाहिए। इसके लिए पूरी तरह रेचक करने के बाद कुहनियों को सीधा कर लें। फिर घुटनों पर दबाव डालते हुए हाथ को सीधा तान दें। साथ ही पेट की मांसपेशियों को सीने की ओर ऊपर तथा रीढ़ की ओर भीतर की ओर अधिक से अधिक संकुचित करें। आरामदायक स्थिति तक इस अवस्था में रहने के बाद पेट को सामान्य अवस्था में ले आएं और पूरक करें। यह क्रिया लगभग 20 बार की जानी चाहिए, तत्पश्चात 10 मिनट श्वासन करें। प्राणायाम का प्रारंभ रेचक (गहरी श्वास बाहर निकालकर) और अंत पूरक (गहरी श्वास अंदर लेकर) करना चाहिए।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>तनाव मुक्त होकर करें अभ्यास</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">कोई भी प्राणायाम शुरू करने से पहले आसनों में प्रवीणता होना जरूरी है, इसलिए कम से कम एक आसन को तनाव रहित होकर एक लम्बी अवधि तक करने का अभ्यास करें।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>सात्विक भोजन ही खाएं</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">प्राणायाम का अभ्यास करने के दिनों में विशेष रूप से सात्विक भोजन करें और अति भोजन से बचें।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>इन बातों का रखें खास ख्याल</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">लेटकर उज्जायी श्वसन करते समय कभी खेचरी मुद्रा न लगाएं। हालांकि सभी लोग इस प्राणायाम का अभ्यास कर सकते हैं परन्तु कुछ रोगों में कुछ विशेष बातों का ध्यान रखना जरूरी है जैसे जिन्हें स्लिप डिस्क हो उन्हें मकरासन में उज्जायी श्वसन करना चाहिए। इसी प्रकार हृदय रोगियों तथा उच्च रक्तचाप वाले लोगों के लिए कुम्भक का निषेध है। परन्तु उन्हें रेचक को नियमित करने का अभ्यास करना चाहिए।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>विषाद और निम्न रक्तचार पीड़ित दें ध्यान</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">विषाद तथा निम्न रक्तचाप से पीड़ित लोगों को बर्हिकुम्भक नहीं करना चाहिए। सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइटिस के रोगी जालन्धर बंध तथा पेट के अल्सर वाले व्यक्ति उड्डियान बंध न लगाएं। यों तो सभी लोग इस प्राणायाम कर सकते हैं।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>विशेषज्ञ की देखरेख में करें अभ्यास</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">परन्तु विशेषत: वे लोग जो किसी गंभीर बीमारी से ग्रस्त हैं, किसी योग्य प्रशिक्षक की देखरेख में ही इसका अभ्यास करें।</p>
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                <pubDate>Mon, 08 Feb 2021 15:51:29 +0530</pubDate>
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