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                <title>Coronavirus :  चीनी नागरिकों से लोगों ने बनाई दूरी , होटल ने लिखा-नो एंट्री</title>
                                    <description><![CDATA[कोरोनावायरस (Coronavirus) से बढ़ते खतरे के बीच पूरी दुनिया में चीन विरोधी भावनाएं भी बढ़ती जा रही हैं। कई देशों ने चीन के यात्रियों पर प्रतिबंध लगा दिए हैं।
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/people-made-distance-from-chinese-citizens-all-over-the-world-hotel-restaurant-wrote-no-entry/article-12903"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-02/coronavirus.jpg" alt=""></a><br /><h2>चीन में कोरोनावायरस की वजह से अब तक 361 की मौत, 14,562 लोग चपेट में |Coronavirus</h2>
<h4>Edited By Vijay Sharma</h4>
<p><strong>सियोल(एजेंसी)।</strong> कोरोनावायरस <strong>(Coronavirus)</strong> से बढ़ते खतरे के बीच पूरी दुनिया में चीन विरोधी भावनाएं भी बढ़ती जा रही हैं। कई देशों ने चीन के यात्रियों पर प्रतिबंध लगा दिए हैं। वहीं, दक्षिण कोरिया, जापान, हॉन्ग कॉन्ग और वियतनाम में कई रेस्त्रां ने चीनी ग्राहकों से दूरी बना ली है। इनके लिए नो एंट्री के बोर्ड लगा दिए हैं। फ्रांस और ऑस्ट्रेलिया और एशिया के अन्य हिस्सों में चीनी नागरिकों को अपमान झेलना पड़ रहा है। चीन में कोरोनावायरस की वजह से अब तक 361 की मौत हो गई है। वहीं, 14,562 लोग इसकी चपेट में हैं। वहीं, फिलीपींस में कोरोनावायरस की वजह से एक व्यक्ति के मारे जाने की खबर है।</p>
<h2 style="text-align:justify;">दक्षिण कोरिया में लोगों ने चीनी नागरिकों से दूरी बनाई | Coronavirus</h2>
<p style="text-align:justify;">न्यूज एजेंसी के मुताबिक, दक्षिण कोरियाई वेबसाइटों पर ऐसी अनेक टिप्पणियां आ रही हैं, जिन पर चीन के लोगों को बाहर निकालने या उन पर प्रतिबंध लगाने की मांग हो रही है। सियोल में एक सी फूड रेस्त्रां ने एक बोर्ड लगा दिया कि चीनी नागरिकों को प्रवेश नहीं। लेकिन विरोध के बाद इसे हटा लिया गया। अमेरिका की एरिजोना स्टेट यूनिवर्सिटी में किसी ने चीनी-अमेरिकी नागरिक एरी देंग को लेकर यह अफवाह फैला दी कि उसे कोरोनावायरस है। वह कैम्पस में अपने दोस्तों के साथ बैठी थी। इसी दौरान छात्र परेशान होने लगे और अपना सामान लेकर वहां से निकल गए। इटली के एक रेस्त्रां में नोटिस लगाया गया कि जो लोग चीन से आ रहे हैं, उन्हें अंदर आने की इजाजत नहीं है।</p>
<h2 style="text-align:justify;">हॉन्ग कॉन्ग में खाना परोसने से इनकार किया | Coronavirus</h2>
<ul>
<li style="text-align:justify;"><strong>हॉन्गकॉन्ग में जापान के एक रेस्त्रां ने चीन के लोगों को भोजन परोसने से इनकार कर दिया है।</strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong> फ्रांस में भी ऐसी स्थिति भी देखने को मिली ।</strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>जब लोगों ने एशियाई दिख रहे</strong><strong> व्यक्ति को देखकर अपना रास्ता बदल लिया। </strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>पेरिस में चीनी समुदाय के कानूनी सलाहकार सोक लाम ने कहा कि लोगों को यह नहीं मानना चाहिए कि हम एशियाई हैं,</strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong> हमारे जरिए वायरस फैलने की संभावना ज्यादा है।’ </strong></li>
<li><strong>इटली के एक रेस्त्रां में नोटिस लगाया ।</strong></li>
<li><strong>नोटिस कहा कि जो लोग चीन से आ रहे हैं, उन्हें अंदर आने की इजाजत नहीं है।</strong></li>
</ul>
<p><a href="http://10.0.0.122:1245/">Hindi</a><strong><a href="http://10.0.0.122:1245/"> News </a>से जुडे अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें <a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a> और <a href="https://x.com/SACHKAHOON">Twitter</a> पर फॉलो करें।</strong></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>विदेश</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 03 Feb 2020 11:53:09 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>असंतोष की सर्दी: नागरिक बनाम धारा 144</title>
                                    <description><![CDATA[एक जीवंत लोकतंत्र नागरिकों के विरोध प्रदर्शन अथवा सभी की राय और सहमति-असहमति का सम्मान करता है। इस बडी राजनीतिक चुनौती के समक्ष सरकार को सभी पक्षों के साथ वार्ता शुरू करनी चाहिए और लोकतंत्र में लोगों के विश्वास को बहाल करने के लिए तालमेल स्थापित करना चाहिए।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/winter-of-discontent-citizens-vs-section-144/article-11973"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2019-12/citizenship-amendment-prote-1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong><em>-कुछ लोगों का मानना है कि नागरिकता संशोधन कानून और राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर संघ की उस बडी योजना का अंग है जिनका उपयोग वह भारत के संविधान को बदलने का प्रयास कर रहा है। साथ ही वह लोगों को यह भी समझाने का प्रयास कर रहा है कि उत्पीडित अल्पसंख्यकों के संरक्षण का विरोध कौन करेगा। एक शिक्षाविद् के अनुसार भाजपा ने ऐतिहासिक दृष्टि से धार्मिक धु्रवीकरण का उपयोग एक चुनावी रणनीति के रूप में किया है और अब वह यही नीति अपनाकर कानून बना रही है और इस संबंध में नागरिकता संशोधन कानून सांकेतिक है क्योंकि इससे भारतीय नागरिक प्रभावित नहीं होते हैं।</em></strong></p>
<p style="text-align:justify;">यह संतोष का सर्दी का मौसम है। देश के सभी भागों में विभिन्न शहरों में आक्रोश और असंतोष व्याप्त है। विभिन्न शहरों में छात्र नागरिक समाज के कार्यकर्ता और राजनेता नागरिकता संशोधन कानून के विरोध में प्रदर्शन कर रहे हैं जिसके चलते दिल्ली का जामिया मिलिया विश्वविद्यालय, अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय और लखनऊ का नदवा विश्वविद्यालय और कई जिले युद्धक्षेत्र जैसे बन गए हैं और यह सरकार के प्रति उनके आक्रोश को प्रदर्शित करता है।</p>
<p style="text-align:justify;">इस कानून को लागू करने के संबंध में हिंसा की किसी को संभावना नहीं थी और इसके विरुद्ध हिंसा के चलते गृह मंत्री अमित शाह ने स्पष्ट किया है कि यह कानून ऐसे किसी नागरिक की नागरिकता नहीं ले रहा है जो भारत में 1987 से पहले पैदा हुआ है या जिसके माता पिता 1987 से पहले भारत के नागरिक थे। इसमें किसी को भी नागरिकता संशोधन कानून को लेकर चिंता नहीं करनी चाहिए। सरकार ने बंगलौर, अहमदाबाद, उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र के कई शहरों आदि में धारा 144 लागू की है और प्रदर्शनकारियों के विरुद्ध पुलिस कडी कार्यवाही कर रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">किंतु नागरिकता संशोधन कानून का तात्पर्य क्या है? क्या प्रत्येक नागरिक को अधिकरण के समक्ष पेश होना पडेगा और जो लोग इसमें विफल हो जाएंगे उन्हें विदेशी समझा जाएगा? नागरिकता साबित करने के लिए क्या दस्तावेज चाहिए? यह सच है कि इस कानून से उन हिन्दू, जैन, सिख, इसाईयों और पारसी शरणार्थियों को राहत मिली है जो भारत में विभिन्न शरणार्थी शिविरों में रह रहे हैं और अब उन्हें नागरिकता मिल जाएगी। किंतु इससे श्रीलंकाई हिन्दुओं और अफगानी मुस्लिम प्रवासियों की स्थिति में बदलाव नहीं आएगा।</p>
<p style="text-align:justify;">कुछ लोगों का मानना है कि नागरिकता संशोधन कानून सभी धर्मों को समान मानने की संवैधानिक कसौटी पर खरा नहीं उतरता है। प्रश्न यह भी उठता है कि सरकार इन शरणार्थियों को कहां बसाएगी क्योंकि भारत में पहले ही जनसंख्या विस्फोट है और इन लोगों को नागरिकता देने से संसाधनों पर दबाव पडेगा तथा बेरोजगारी बढेÞगी। प्रश्न यह भी उठता है कि क्या धार्मिक आधार पर धु्रवीकरण सत्तारूढ़ भाजपा की योजना का अंग है या नहीं। कुछ लोग जानना चाहते हैं कि क्या यह प्रदर्शन केवल मुसलमान कर रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">किंतु पूरे देश में नागरिकता संशोधन कानून के विरुद्ध प्रदर्शन में लोगों को सरकार के प्रति अपने आक्रोश को व्यक्त करने का अवसर मिला है। पूर्वोत्तर क्षेत्र विशेषकर असम ने नागरिकता संशोधन कानून का सबसे पहले विरोध किया और उसे बंगाली हिन्दुओं समेत सभी अप्रवासियों से समस्या है। असम देश का पहला ऐसा राज्य है जहां पर राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर बनाया गया और उसमें 19 लाख लोग शामिल नहीं किए गए जिनमें अधिकतर हिन्दू हैं किंतु यह विरोध प्रदर्शन केवल नागरिकता संशोधन कानून को लेकर है।</p>
<p style="text-align:justify;">पूर्वोत्तर क्षेत्र के अलावा शेष देश के लोग सोचते हैं कि नागरिकता संशोधन कानून विपक्षी पार्टियों द्वारा उठायी गयी एक सांप्रदायिक समस्या है। उनका मानना है कि नागरिकता संशोधन कानून और संपूर्ण देश में राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर बनाने की संभावना भारत के संविधान के मूल चरित्र धर्मनिरपेक्षता के विरुद्ध है। कांग्रेस सरकार पर आरोप लगा रही है कि वह जनता की आवाज दबा रही है जबकि मित्र से शत्रु बने शिव सेना के ठाकरे ने युवा बम की चेतावनी दी है और जामिया की घटना की जलियांवाला बाग की घटना से तुलना की।</p>
<p style="text-align:justify;">तमिलनाडू में द्रमुक के स्टालिन ने विरोध प्रदर्शन की अगुवाई की तो केरल में इसके विरोध में माकपा के मुख्यमंत्री विजयन और विधान सभा में विपक्ष के नेता चेनीथला के बीच इस मुद्दे पर एकता देखने को मिली। तृणमूल की ममता सड़कों पर उतर कर इस मुद््दे पर संयुक्त राष्ट्र जनमत संग्रह की मांग कर रही है जिसे बाद में उन्होंने वापस ले लिया था और उन्होंने स्पष्ट किया कि वह पश्चिम बंगाल में नागरिकता संशोधन कानून या राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर कानून लागू करने वाली नहीं है। उनका विरोध राजनीति प्रेरित है किंतु 2021 में राज्य में विधान सभा चुनाव होने हैं और राज्य के कुछ जिलों में मुस्लिम जनसंख्या 30 से 35 प्रतिशत है। इसी तरह कांग्रेस शासित मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ तथा आप शासित दिल्ली ने भी इस कानून को लागू न करने की बात कही है।</p>
<p style="text-align:justify;">भाजपा के सहयोगियों में जद (यू) ने भी बिहार के संदर्भ में यही बात कही और गारंटी दी कि जब तक वे हैं राज्य में अल्पसंख्यकों के साथ अन्याय नहीं होगा। विडंबना देखिए। संसद में नागरिकता संशोधन कानून के पक्ष में मतदान करने वाले बीजद के पटनायक ने भी इस कानून को ओडिशा में लागू करने से इंकार किया है।</p>
<p style="text-align:justify;">भगवा संघ भी नागरिकता संशोधन कानून के बारे में विशेषकर मुस्लिम जनता को अवगत कराने के लिए कार्यशालाएं और व्याख्यान देने की योजना बना रहा है। अंतर्राष्ट्रीय दृष्टि से मोदी की छवि पर प्रभाव पडा है। नागरिकता संशोधन कानून का प्रभाव यह रहा है कि जापान के प्रधानमंत्री आबे ने अपनी भारत यात्रा रद्द कर दी। अमरीका, ब्रिटेन, फ्रांस आदि पश्चिमी देशों ने भी इसकी आलोचना की। बंगलादेश की शेख हसीना सरकार ने भी विदेश मंत्री का भारत दौरा स्थगित किया। भारत सरकार अफगानिस्तान और बंगलादेश में मित्र सरकारों को यह समझाने का प्रयास कर रही है कि वहां की वर्तमान सरकारों ने धार्मिक उत्पीडन नहीं किया है। हावर्ड और एमआईटी जैसे विश्वविद्यालयों ने पुलिस कार्यवाही की आलोचना की है।</p>
<p style="text-align:justify;">एक समाजशास्त्री के अनुसार नागरिकता संशोधन कानून के अंतर्गत उत्पीडित अल्पसंख्यकों की वापसी का अधिकार एक मूलवंशीय लोकतंत्र है जो भाजपा की हिन्दू राष्ट्र की अवधारणा से मेल खाता है। कुछ आलोचकों का मानना है कि यह मोदी-शाह के गुजरात मॉडल की पुनरावृति है जिसके अंतर्गत बांटो, धु्रवीकरण करो और लाभ उठाओ जिसके अनुसार नागरिकता संशोधन कानून और राष्ट्रीय जनगणना रजिस्टर के विरुद्ध प्रदर्शन का दीर्घकालीन प्रभाव यह होगा कि गुजरात की तरह पूरे देश में मुसलमान दोयम दर्जे के नागरिक बन जाएंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">किंतु संघ परिवार इसका यह कहकर प्रत्युत्तर देता है टुकडे टुकडे गैंग, शहरी नक्सलवादी और छद््म धर्मनिरपेक्षतावादी जितना अधिक विरोध करेंगे हिन्दुत्व के नायक के रूप में हमारी छवि उतनी ही मजबूत होगी। यह एक नए इतिहास का निर्माण होगा जहां पर मुस्लिम वोट बैंक राजनीति को राजनीतिक आत्महत्या समझा जाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;">कुल मिलाकर यह आवश्यक है कि केन्द्र, राज्य और सभी राजनीतिक दल नागरिकता संशोधन कानून-राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर के बारे में गतिरोध दूर करने का प्रयास करें और शांति बनाए रखे। एक जीवंत लोकतंत्र नागरिकों के विरोध प्रदर्शन अथवा सभी की राय और सहमति-असहमति का सम्मान करता है। इस बडी राजनीतिक चुनौती के समक्ष सरकार को सभी पक्षों के साथ वार्ता शुरू करनी चाहिए और लोकतंत्र में लोगों के विश्वास को बहाल करने के लिए तालमेल स्थापित करना चाहिए। देश में राष्ट्रवाद, वर्चस्ववाद के एक नए चरण में प्रवेश कर रहा है और इसका अमल भी किया जाने लगा है। वर्तमान में व्याप्त असंतोष बताता है कि भारत का लोकतंत्र अभी भी जीवंत है और आगे बढ़ रहा है।<br />
<em><strong>-पूनम आई कौशिश</strong></em></p>
<p> </p>
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                <pubDate>Tue, 24 Dec 2019 20:27:39 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>अपने कर्त्तव्यों का पालन करें देश के नागरिक</title>
                                    <description><![CDATA[देश का युवा अपने पथ से भटक रहा है। जहां कहीं देशभक्ति की बात आती है, तो हर किसी के अंदर देशप्रेम की भावना हिलोरें लेने लगती है, मगर इस दायरे से बाहर आते ही फिर से लोग अपनी-अपनी स्वार्थ पूर्ति के लिए भिन्न-भिन्न कृत्यों में संलग्न हो जाते हैं। वर्तमान में व्यक्ति का मकसद […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/country-citizens-follow-your-obligation/article-2947"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-08/citizens.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">देश का युवा अपने पथ से भटक रहा है। जहां कहीं देशभक्ति की बात आती है, तो हर किसी के अंदर देशप्रेम की भावना हिलोरें लेने लगती है, मगर इस दायरे से बाहर आते ही फिर से लोग अपनी-अपनी स्वार्थ पूर्ति के लिए भिन्न-भिन्न कृत्यों में संलग्न हो जाते हैं। वर्तमान में व्यक्ति का मकसद स्वार्थ सिद्धी रह गया है। व्यक्ति को केवल भौतिक सुख चाहिए, चाहे जैसे भी मिले और इसकी पूर्ति के लिए लोग ठगी, बेईमानी और भ्रष्टाचार के काले धंधे में लिप्त हुआ पड़ा है।</p>
<p style="text-align:justify;">क्या आपने कभी सोचा कि अपने कृत्यों से आप देश को क्या दे रहे हैं? क्या हम देश के प्रति अपने दायित्वों को समझ रहे हैं? आज का मानव केवल और केवल अपने अधिकारों की ही बात करता है और कहता है कि मुझे देश ने क्या दिया? लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आपने देश के लिए क्या किया? चलो हम सामान्य बात करते हैं। जब आप सड़क का प्रयोग कर रहे होते हैं, तब क्या आप सड़क सुरक्षा के नियमों का पालन करते हैं? सड़क पर चलते समय चाहे आप पैदल हैं या गाड़ी में हैं, केले, मूंगफली और कचरे को यहां-वहां फेंक देते हैं। यानि आप सफाई का बिल्कुल भी ध्यान नहीं रखते। दूसरा, आपके द्वारा फैंके गए छिलकों पर कोई व्यक्ति फिसल कर गिर सकता है, मोटर साइकिल या अन्य दुपहिया वाहन चालक फिसल कर चोट खा सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">अब बात है प्रदूषण की। एयर कंडीशन में रहना, एयर कंडीशन में चलना आज का फैशन सा बन गया है। जबकि हर किसी को पता है कि इससे कितना प्रदूषण वातावरण में फैल रहा है। फिर आज की युवा पीढ़ी के कुछेक नौजवानों का जवाब नहीं, जो साइलेंसर रहित मोटर साइकिल का प्रयोग करते हुए पटाखों की कर्कश ध्वनि से ध्वनि प्रदूषण फैला रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">बहुत बार देखने में आता है कि किसी कार्यक्रम के तहत सैकड़ों-हजारों लोगों का हुजूम इकट्ठा हो जाता है और देशभक्ति का स्वरूप बनाने की कोशिश की जाती है। जैसे आजकल कावड़ ले जाने वाले युवा तिरंगे झंडे को लेकर बड़े ही आदर के साथ यात्रा कर रहे हैं। ये एक अच्छी पहल है, क्योंकि हमारे लिए तिरंगे से बढ़कर कुछ भी नहीं हैं। लेकिन यही युवा दूसरी ओर यातायात के नियमों को खुलम-खुल्ला चुनौती दे रहे हैं। फिर एक पुलिस वाला वर्दी में सड़क के चौराहे पर खड़ा होकर यातायात को सुरक्षित गुजार रहा है। ऐसे में देश के हर नागरिक का कर्त्तव्य बनता है कि वह सड़क सुरक्षा के नियमों का पालन करके भी अपनी देशभक्ति का परिचय दे।</p>
<p style="text-align:justify;">देश 15 अगस्त को 70वां स्वतंत्रता दिवस मना रहा है। आज देश में जागरूकता और सही मार्ग दर्शन की आवश्यकता है। देशभक्ति को जगाने के लिए हमें अपने सोये हुए जमीर को जगाना होगा। अपने नागरिक कर्त्तव्यों को आत्मसात करना होगा। हमारी पुरातन सभ्यता, जो पूरे विश्व में प्रथम स्थान पर है, उसका मान-सम्मान बनाए रखने का दायित्व देश के प्रत्येक नागरिक के कंधों पर है। इस समय जब चीन, पाकिस्तान जैसे देश हमारे देश पर आंख लगाए बैठे हैं, ऐसे में हमारी सीमा पर तैनात सैनिक उनसे लड़ने को तैयार हैं ही, साथ देश के प्रत्येक नागरिक को भी अपनी जिम्मेवारी समझते हुए देशहित के कार्य करने चाहिएं।</p>
<p style="text-align:justify;">कई बार लोग कहते हैं कि मैं भी समाज सेवा करना चाहता हूँ। तो मैं उन्हें कहता हूँ कि समाज सेवा अपने घर से आरम्भ करें। अपने बच्चों को अच्छे और देशभक्ति के संस्कार दें। समाज में रहते हुए कई छोटे-छोटे कार्य हैं, उनके माध्यम से हम समाज सेवा कर सकते हैं। उदाहरण के लिए सफाई व्यवस्था, पेड़-पौधे लगाना, वातावरण को शुद्ध रखना, सड़क सुरक्षा के नियमों का पालन करना, कानून का सम्मान करना इत्यादि आप बच्चों को सिखा सकते हैं। आज हमारे देश का सौभाग्य है कि प्रधानमन्त्री के रूप में हमे नरेंद्र मोदी जी जैसे राजनायक मिले हैं, जिन्होंने लोगों में देशप्रेम की भावना जगाने में अहम् भूमिका अदा की है।</p>
<p style="text-align:justify;"><em>देश 15 अगस्त को 70वां स्वतंत्रता दिवस मना रहा है। आज देश में जागरूकता और सही मार्ग दर्शन की आवश्यकता है। देशभक्ति को जगाने के लिए हमें अपने सोये हुए जमीर को जगाना होगा। अपने नागरिक कर्त्तव्यों को आत्मसात करना होगा।</em></p>
<p style="text-align:justify;"><strong><br />
-डॉ. अशोक कुमार वर्मा इन्सां</strong></p>
<p style="text-align:justify;">
</p><p><a href="http://10.0.0.122:1245/">Hindi News </a>से जुडे अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें <a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a> और <a href="https://x.com/SACHKAHOON">Twitter</a> पर फॉलो करें।</p>
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                                                            <category>लेख</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 07 Aug 2017 03:58:03 +0530</pubDate>
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                <title>हर नागरिक से भरवाया जाए संपत्ति का फार्म</title>
                                    <description><![CDATA[प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के काले धन पर प्रहार से अपना कुछ न कुछ काला धन बचाने के लिए कालाबाजारियों ने सबसे पहले सर्राफा कारोबारियों का रूख किया। रातों रात सुनारों के शोरूम खाली कर दिये गए और 31000 रूपये प्रति दस ग्राम बिकने वाला सोना 60000 रूपये प्रति ग्राम तक खरीदे जाने की भी खबरें […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/citizens-fill-there-property-form/article-342"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2016-11/jangana.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के काले धन पर प्रहार से अपना कुछ न कुछ काला धन बचाने के लिए कालाबाजारियों ने सबसे पहले सर्राफा कारोबारियों का रूख किया। रातों रात सुनारों के शोरूम खाली कर दिये गए और 31000 रूपये प्रति दस ग्राम बिकने वाला सोना 60000 रूपये प्रति ग्राम तक खरीदे जाने की भी खबरें आई। लेकिन पिछल्ले दो दिन से आयकर अधिकारियों की सक्रियता से सोना बेच रहे व खरीद रहे लोगों में दहशत छा गई है और सरेआम काली कमाई को पीली धातु में बदले जाने का कारोबार रूकने लगा है। अब काली कमाई वाले उस पैसे को गरीबों के खाते में डाल रहे है, ताकि जब नई करंसी आयेगी तो ये धन वापिस निकाल लेंगे उसके लिए कालाधन रखने वाले गरीब लोगों को छूट दे रहे हंै कि लाख के बदले उन्हें भले 60 हजार ही लौटा देना। जिसके चलते ये लोग अपने विश्वास वाले नौकरों सहायक कर्मचारियों, आस पड़ौस के शरीफ गरीबों को अपना धन बांट रहे हैं। पश्चिम बंगाल के माल्दा में तो सरेआम कालाधन रिक्शा चालकों, फड़ी लगाने वालों, कचरा बीनने वालों व भिखारियों में बांट दिया गया, और ये गरीब लोग उस धन को बैंक के बाहर लाइन में खड़े लहरा-लहरा कर मीडिया व आने-जाने वालो को दिखाते रहे। कालेधन के विरूद्ध सरकार द्वारा छेड़ी गई लड़ाई की तैयारी यूं तो पिछले साल भर से हो रही थी। जब से सरकार ने जनधन योजना के अतंर्गत करोड़ों गरीब लोगों के बैंक खाते खुलवाए। तत्पश्चात कालाधन रखने वालों से अपील की गई कि वह अपनी अवैध कमाई की घोषणा कर दें और कुछ टैक्स भरकर ये कमाई को वैध कर लें। आखिर सरकार ने एक बड़ा स्ट्राइक शॉट खेल दिया और बडेÞ नोट बन्द कर दिये। अब बैकों में नयें नियम भी आ गए हैं कि पुराने नोट जमा होने या पहले हफ्ते तक एक ग्राहक को सिर्फ दो हजार नगद मिलेंगे, फिर अगले हफ्तों में ये नगद सीमा बढ़ाकर 10 से 20 हजार की जा रही है, लेकिन उससे आगे क्या होना है? उस पर अभी सरकार का मंथन चल रहा है। जापान में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने साफ कहा है कि देशवासियों को नगद का कारोबार छोड़ कर अपना सारा कारोबार बैकों के माध्यम से करने की आदत डाल लेनी चाहिए। साथ ही उन्होने यह भी स्पष्ट किया है कि कालेधन के विरूद्ध उनकी लड़ाई अभी बहुत गहराई तक मार करेगी। प्रधानमंत्री ने कहा कि ईमानदार लोगों को घबराने की कतई आवश्यकता नहीं है। लेकिन जो लोग काली कमाई का मोह नहीं छोड़ रहे उन्हें 1947 तक का हिसाब देना पड़ेगा। एक तरह से भाजपा अपना वह वादा पूरा करने की ओर आगे बढ़ रही है जिसमें उसने कहा है कि देश के हर नागरिक के खाते में धन होगा। अब गरीब से लेकर बूढ़े मां-बाप तक के खाते भी लोगों द्वारा भरे जा रहे हैं। आगे सरकार यदि नगद राशि निकाले जाने की सीमा नहीं बढ़ाती है तब यह तय है कि काली कमाई गरीबों के खातों में बंद होकर रह जाएगी जिसे कि वह चैक से पुन: कैश करवाने की योजना बना रहे हंै। सरकार को चाहिए कि वह हर नागरिक से उसकी संपत्ति की घोषणा के विवरण भरवाए कि उनके पास जमीन, सोना, नगद, मशीनरी, फैक्ट्री क्या-क्या है। यदि ऐसा हो जाता है तब जिन लोगों ने आज सोना खरीदा है वह भी बाहर आ जाएगा। भविष्य के लिए भारत में लोग अपनी पीढ़ियों को कमाई करने की शिक्षा देने के साथ-साथ यह शिक्षा भी देंगे कि भले जितना मर्जी कमाना लेकिन कमाई को काली कर रखने की भूल नहीं करना।</p>
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                                                            <category>सम्पादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 12 Nov 2016 22:50:12 +0530</pubDate>
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                <title>भ्रष्टाचार विरूद्ध इस अभियान का नागरिक खुलकर दें साथ</title>
                                    <description><![CDATA[प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कालेधन के विरूद्ध कारगर व एक तरह से आखिरी प्रहार करने का निर्णय लेते हुए 500 व 1000 रुपए के नोट बंद कर दिए हैं। अर्थशास्त्री व बुद्धिजीवी पिछले काफी समय से कालेधन पर रोक लगाने की प्रभावी कार्रवाइयों की मांग कर रहे थे। वर्तमान सरकार ने कालेधन पर रोक लगाने […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/please-open-the-campaign-against-corruption-with-citizens/article-306"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2016-11/modi-salute.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कालेधन के विरूद्ध कारगर व एक तरह से आखिरी प्रहार करने का निर्णय लेते हुए 500 व 1000 रुपए के नोट बंद कर दिए हैं। अर्थशास्त्री व बुद्धिजीवी पिछले काफी समय से कालेधन पर रोक लगाने की प्रभावी कार्रवाइयों की मांग कर रहे थे। वर्तमान सरकार ने कालेधन पर रोक लगाने के लिए जहां जीएसटी पारित करवाकर कर ढांचे में सुधार किया है, वहीं आयकर अधिकारियों को सक्रिय करते हुए हवाला व बेनामी सम्पत्ति का कारोबार करने वालों के यहां छापामार कार्रवाइयां भी तेज की हैं। अनुपालन खिड़की योजना के द्वारा भी कालाधन रखने वालों को चार माह तक का वक्त दिया गया है कि वह इस स्कीम के अंतर्गत अपनी अघोषित आय का खुलासा करें। नतीजा, सरकार के पास 62000 करोड़ रुपए की अघोषित आय की घोषणा हुई, जिससे सरकार को करीब 30000 करोड़ रुपए की कर आमदन हुई। परंतु इन प्रयत्नों के बावजूद भी बड़ी मात्रा में काली कमाई वालों ने धन को छुपाए रखा, जिस पर अब प्रधानमंत्री मोदी ने 500 व 1000 रुपए का चलन तत्काल प्रभाव से बंद कर जोरदार प्रहार कर दिया है। देश में यह दूसरी दफा हुआ है। इससे पूर्व 1978 में जनता पार्टी की सरकार ने भी 100 रुपए के अलावा 500, 1000 व 10000 हजार के नोटों को बंद कर दिया था। मोदी सरकार के इस देश हितकारी निर्णय की आमजन, राजनीतिक हल्कों में भरपूर प्रशंसा हो रही है। आम आदमी पार्टी ही ऐसा दल है, जिसने अपनी आदतनुसार सरकार के इस निर्णय की आलोचना कर दी है। आम आदमी पार्टी की यह बात ठीक है कि अब 1000 का नोट आठ सौ रुपए में बिक रहा है, लेकिन बड़े करंसी नोटों को एकदम से बंद के निर्णय को तुगलकी फरमान कह देना कतई उचित नहीं है। इस बात में कोई शक नहीं कि केन्द्र सरकार को नोट बंद कर देने का यह फैसला देश में चल रहे हवाला कारोबार, नकली करंसी व्यापार व आतंकी गतिविधियों की कमर तोड़ देने वाला है। इससे पहले आतंकी नकली करंसी देश में बांटकर गरीब युवाओं से अपने लक्ष्यों को पूरा करने के रोजमर्रा के काम करवा रहे थे। सरकार के यकायक आए इस निर्णय से सामान्यजन को थोड़े दिन परेशानी का सामना करना पड़ सकता है, लेकिन आखिर में इस फैसले ने आमजन को काफी राहत पहुंचानी है। अत: आमजन जिस तरह से इस निर्णय की प्रशंसा कर रहा है, ठीक उसी तरह तकलीफ के एक-आध सप्ताह को भी गुजारे। यहां बड़े कारोबारियों या अवैध लेन-देन करने वालों का कर्त्तव्य बनता है कि वह देशहित में अपनी काली कमाई का समर्पण कर दें। आम नागरिकों में भी इस वक्त काफी उत्सुकता बनी हुई है कि काली कमाई वाले अब बैंकों में करंसी बदलवाने के लिए उनकी सहायता मांगेंगे, जिसे वह अच्छी-खासी रकम वसूल कर मदद करेंगे, यह नहीं किया जाना चाहिए, ऐसा करना जहां नैतिक तौर पर सरकार के उद्देश्यों को विफल करना होगा, वहीं नागरिक जिन कालेधन वालों पर कार्रवाई के लिए सरकार पर दबाव बनाते आए हैं, उन्हीं कालेधन वालों का साथ देना होगा। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अपने प्रभावी निर्णयों से तेजी से भ्रष्टाचार को देश में से साफ कर रहे हैं। अत: नागरिकों को एकजुट होकर इस अभियान में सरकार का साथ देना चाहिए।</p>
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                                                            <category>सम्पादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 09 Nov 2016 19:26:22 +0530</pubDate>
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