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                <title>MSG Bhandara Month - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और राजस्थान की साध-संगत ने धूमधाम से मनाया पावन एमएसजी अवतार माह का भंडारा</title>
                                    <description><![CDATA[ सच्चे रूहानी रहबर व समाज सुधारक पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां के पावन एमएसजी अवतार माह की खुशी में आज रविवार को उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की साध-संगत ने एमएसजी डेरा सच्चा सौदा व मानवता भलाई केन्द्र, शाह सतनाम जी डेरा, बरनावा, जिला बागपत (उत्तर प्रदेश) में और राजस्थान की साध-संगत ने एमएसजी डेरा सच्चा सौदा व मानवता भलाई केन्द्र मौजपुर धाम, बुधरवाली, जिला श्रीगंगानगर में पावन एमएसजी भंडारा मनाया। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/spiritual/holy-sermons/the-devotees-of-uttar-pradesh-uttarakhand-and-rajasthan-celebrated-the/article-90099"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-08/barnava-bhandara.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">MSG August Bhandara: बरनावा/बुधरवाली, (सच कहूँ न्यूज)। सच्चे रूहानी रहबर व समाज सुधारक पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां के पावन एमएसजी अवतार माह की खुशी में आज रविवार को उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की साध-संगत ने एमएसजी डेरा सच्चा सौदा व मानवता भलाई केन्द्र, शाह सतनाम जी डेरा, बरनावा, जिला बागपत (उत्तर प्रदेश) में और राजस्थान की साध-संगत ने एमएसजी डेरा सच्चा सौदा व मानवता भलाई केन्द्र मौजपुर धाम, बुधरवाली, जिला श्रीगंगानगर में पावन एमएसजी भंडारा मनाया। पावन भंडारे में उमस भरी भीषण गर्मी के बावजूद भारी संख्या में साध-संगत ने शिरकत की। MSG Bhandara</p>
<p style="text-align:justify;">इस अवसर पर पूज्य गुरु जी के पावन सान्निध्य में चलाए जा रहे मानवता भलाई के 176 कार्यों के तहत ‘क्लॉथ बैंक मुहिम’ के तहत उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और राजस्थान की साध-संगत ने 59-59 जरूरतमंद बच्चों को मौसम के अनुसार वस्त्र वितरित किए। सुबह 9 बजे पवित्र भंडारे की नामचर्चा सत्संग का आगाज हुआ। भंडारे की शुरूआत पवित्र शाही नारा ‘धन-धन सतगुरु तेरा ही आसरा’ के साथ की गई। इसके बाद कविराजों ने भक्तिमय भजनों के माध्यम से गुरु महिमा का गुणगान किया।</p>
<p style="text-align:justify;">इस पवित्र भंडारे के अवसर पर साध-संगत ने एकाग्रचित होकर शब्दवाणी श्रवण की और पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां के पवित्र अनमोल वचनों को सुना। पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां ने फरमाया कि ये महीना सच्चे दाता रहबर शाह मस्ताना जी, शाह सतनाम जी ने एमएसजी भंडारे के रूप में मनाया, मना रहे हैं और मनाते रहना है। तो आप सबको एमएसजी भंडारे की मालिक बहुत-बहुत खुशियां दे और दृढ़ यकीन बख्शे। सबको बहुत-बहुत आशीर्वाद।</p>
<p style="text-align:justify;">प्यारी साध-संगत जीओ, सांईं मस्ताना जी दाता रहबर ने, शाह सतनाम जी दाता ने सच्चा सौदा बनाया, चलाया, सजाया और वो चला रहे हैं। इतना सीधा यानि सरल, आसान सौदा है कि आप कल्पना नहीं कर सकते। क्या आपने कभी सुना है कि देना वो पड़े जो खोटा सिक्का हो और बदले में वो मिले जो अरबों का काम करे। सांईं जी ने वचन कर दिए, परमपिता जी ने वचन कर दिए कि आओ! अपना खोटा सिक्का दे जाओ, आपके अंदर जो कमियां हैं, काम-वासना, क्रोध, लोभ, मोह, अहंकार, मन, माया, नशा करते हो, बुरी आदतें और माँसाहार, जो भी बुराई आपके अंदर की है, वो दे जाओ।</p>
<p style="text-align:justify;">ऐसा सौदागर कभी सुना नहीं पहले, ना ही ऐसा पढ़ा कि ये सारा दे जाओ और एक पैसा दुनियावी, रुपया, पैसा, धन-दौलत, धर्म परिवर्तन कुछ नहीं करना, बस उस ओउम्, उसे अल्लाह कहो, वाहेगुरु कहो, गॉड, खुदा, रब्ब, उसका गुरमंत्र, उसका तरीका, उसका मैथड ले जाओ, ये अनमोल है, जो एक स्वांस में त्रिलोकी पार करके भगवान के दर्शन करवा सकता है। तो इतना अनमोल खज़ाना और देना क्या पड़ा। अपनी टैंशनें दे गए, बुराइयां दे गए, ये सब छोड़ गए और बदले में इतना बड़ा धन ले गए, इसी का नाम सच्चा सौदा सांईं मस्ताना जी ने रखा, शाह सतनाम जी ने बताया।  पूज्य गुरु जी ने फरमाया कि सच्चे सौदे में जब आप चलकर आते हैं, यहां से कुछ लेकर जाते हैं, यहां से कुछ हासिल करके जाते हैं, खाली हाथ नहीं जाते और अच्छा हासिल करके जाते हैं, बुराइयां छोड़कर जाते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">आपजी ने आगे फरमाया, ‘सुन रे प्राणी, तू राम-नाम जप ले, जपने से खत्म होंगे बहुत से खतरे’। आदमी सोचता है कि मैं राम का नाम क्यों जपूं? क्या फ़र्क पड़ने वाला है? ‘सुन रे प्राणी तू राम-नाम जप ले’ कि भाई सुना, हाथ जोड़कर कह रहे हैं 1948 से, कि राम-नाम जप लो भाई और इससे क्या होगा? आने वाले और जो चल रहे और जो पिछले गुज़र गए, सारे ही ख़तरे आत्मा के सामने जो खड़े हैं खत्म हो जाएंगे। </p>
<p style="text-align:justify;">पूज्य गुरु जी ने आगे फरमाया कि कोई पैसा नहीं लगेगा, कोई अलग से चढ़ावा नहीं, कोई धर्म परिवर्तन नहीं, काम-धंधा भी ना छोड़ो। काम-धंधा करते-करते ओउम्, हरि, परमात्मा का नाम लेते रहो। हाथ कार की तरफ और ध्यान प्रभु यार की तरफ, कि हाथों से काम-धंधा, कार्य करते रहो और जीभा से परमात्मा का नाम लेते रहो, दोनों में ही बरकत ही बरकत, फायदा ही फायदा, खुशियां ही खुशियां। भंडारे के दौरान पूज्य गुरु जी के नशों के विरुद्ध गाए गीत ‘मेरे देश की जवानी’ और ‘आशीर्वाद मांओं का’ चलाए गए, जिस पर साध-संगत ने नाचकर खुशी मनाई। भंडारे की समाप्ति पर साध-संगत को लंगर छकाया गया और प्रसाद वितरित किया गया। MSG Bhandara</p>
<h3 style="text-align:justify;">अवतार दिवस को लेकर दिखाई डॉक्यूमेंट्री</h3>
<p style="text-align:justify;">पावन भंडारे के दौरान पवित्र एमएसजी अवतार दिवस संबंधी डॉक्यूमेंट्री दिखाई गई। डॉक्यूमेंट्री में पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां के अवतार धारण करने, नाम-शब्द की दात की बख्शिश, गुरुगद्दीनशीन होने, डेरा सच्चा सौदा द्वारा चलाए जा रहे 176 मानवता भलाई के कार्यों तथा भलाई कार्यों में कायम किए गए विश्व रिकॉर्डों के बारे में भरपूर जानकारी दी गई।</p>
<h3 style="text-align:justify;">पावन भंडारे की झलकियाँ </h3>
<ul>
<li style="text-align:justify;">क्लॉथ बैंक मुहिम के तहत उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और राजस्थान की साध-संगत ने 59-59 अति जरूरतमंद परिवारों के बच्चों को कपड़े वितरित किए।</li>
<li style="text-align:justify;">सड़कों पर दूर-दूर तक साध-संगत ही साध-संगत दिखाई दी।</li>
<li style="text-align:justify;">पंडाल, ट्रैफिक, सफाई, लंगर सहित विभिन्न समितियों के सेवादारों ने अपनी ड्यूटियां बखूबी निभाईं।</li>
<li style="text-align:justify;">तेज गर्मी को देखते हुए पीने के पानी के लिए जगह-जगह पानी की छबीलें लगाई गईं।</li>
</ul>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>अनमोल वचन</category>
                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>अध्यात्म</category>
                                            <category>सत्संग</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                            <category>उत्तराखण्ड</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 23 Aug 2026 20:38:57 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Manmohan]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>MSG Bhandara Month: पावन अवतार माह पर ब्लॉक दारेवाला ने की जरूरतमंदों की मदद</title>
                                    <description><![CDATA[ पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां के 59वें पावन एमएसजी अवतार माह की खुशी में शनिवार को ब्लॉक दारेवाला की ब्लॉक स्तरीय नामचर्चा गांव गोरीवाला में श्रद्धा, उल्लास और भक्तिमय वातावरण के बीच आयोजित की गई। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/msg-bhandara-month-block-darewala-helped-the-needy-on-the/article-89081"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-08/darewala-msg-bhandara.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">MSG Bhandara Month: गोरीवाला, (सच कहूँ न्यूज)। पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां के 59वें पावन एमएसजी अवतार माह की खुशी में शनिवार को ब्लॉक दारेवाला की ब्लॉक स्तरीय नामचर्चा गांव गोरीवाला में श्रद्धा, उल्लास और भक्तिमय वातावरण के बीच आयोजित की गई। नामचर्चा में ब्लॉक दारेवाला सहित देसूजोधा-चोरमार, मसीतां तथा चक्का-रामपुरा थेड़ी ब्लॉक की साध-संगत ने बड़ी संख्या में शिरकत कर अवतार माह की खुशियां मनाईं। Sirsa News</p>
<p style="text-align:justify;">नामचर्चा कार्यक्रम का शुभारंभ ब्लॉक प्रेमी सेवक अनिल इन्सां ने प्रार्थना के उपरांत विनती का शब्द बोलकर किया। इसके बाद कविराजों ने महापुरुषों द्वारा रचित पावन भजनों के माध्यम से गुरु महिमा का गुणगान किया, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया। साध-संगत ने एकाग्रचित होकर नामचर्चा का श्रवण किया।</p>
<h3 style="text-align:justify;">फूड बैंक मुहिम के तहत जरूरतमंद परिवारों को राशन | Sirsa News</h3>
<p style="text-align:justify;">पावन अवतार माह की खुशी को मानवता भलाई के कार्यों को आगे बढ़ाते हुए नामचर्चा के दौरान फूड बैंक मुहिम के तहत दो अति जरूरतमंद परिवारों को राशन वितरित किया गया। साध-संगत ने इसे पूज्य गुरु जी की पावन शिक्षाओं पर अमल बताते हुए जरूरतमंदों की सेवा को सर्वोपरि बताया।</p>
<p style="text-align:justify;">ब्लॉक प्रेमी सेवक अनिल इन्सां ने साध-संगत को पावन एमएसजी अवतार माह की बधाई देते हुए पूज्य गुरु जी की पावन प्रेरणा से 176 मानवता भलाई कार्यों को अपने-अपने गांवों और क्षेत्रों में पूरी निष्ठा के साथ करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि बरसात के मौसम में 15 अगस्त को चलाए जाने वाले पौधारोपण अभियान के लिए अभी से उपयुक्त स्थान चिन्हित कर तैयारियां शुरू कर दी जाएं।</p>
<p style="text-align:justify;">सच्चे नम्र सेवादार तार इन्सां एवं राकेश इन्सां गिंदड़ा ने सेवादारों की सेवा भावना की सराहना करते हुए कहा कि ब्लॉक के सेवादार निरंतर निस्वार्थ भाव से मानवता भलाई के कार्यों में योगदान दे रहे हैं। उन्होंने भविष्य में भी इसी समर्पण के साथ सेवा कार्यों में बढ़-चढ़कर भाग लेने का आह्वान किया। नामचर्चा के समापन पर साध-संगत ने पवित्र सिमरन किया तथा सभी को प्रसाद वितरित किया गया। इस अवसर पर गांव के प्रेमी सेवक, सच्ची प्रेमी समितियों के सेवादार, एमएसजी आईटी विंग, शाह सतनाम जी ग्रीन एस वेलफेयर कमेटी सहित विभिन्न समितियों के सेवादार एवं बड़ी संख्या में साध-संगत उपस्थित रही। Sirsa News</p>
<p style="text-align:justify;"> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>हरियाणा</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>मानवता भलाई कार्य</category>
                                            <category>प्रेरणास्रोत</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 02 Aug 2026 14:32:59 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>MSG Bhandara Month: इस तरह गाँव का नाम कैले बांदर से ‘नसीबपुरा’ पड़ा</title>
                                    <description><![CDATA[Param Pita Shah Satnam Ji Maharaj: सन् 1967 में पूजनीय परम पिता शाह सतनाम सिंह जी महाराज अपनी जीवोद्धार यात्रा के दौरान सत्संग फरमाते हेतू गांव कैले बांदर जिला भंठिडा पहुँचे। गाँव की साध-संगत खुशी से नाच उठी। साध-संगत ने सत्संग हेतू तैयारियों में पूर्ण सहयोग दिया। सारे गांव की सफाई की गई तथा सड़को […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/spiritual/holy-sermons/when-the-revered-father-shah-satnam-singh-ji-maharaj-arrived-in-the-village-of-kaila-bandar-in-bathinda/article-80824"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-01/param-pita-ji-shah-satnam-ji1.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">Param Pita Shah Satnam Ji Maharaj: सन् 1967 में पूजनीय परम पिता शाह सतनाम सिंह जी महाराज अपनी जीवोद्धार यात्रा के दौरान सत्संग फरमाते हेतू गांव कैले बांदर जिला भंठिडा पहुँचे। गाँव की साध-संगत खुशी से नाच उठी। साध-संगत ने सत्संग हेतू तैयारियों में पूर्ण सहयोग दिया। सारे गांव की सफाई की गई तथा सड़को पर पानी छिड़का गया। रात्रि  को पहला सत्संग हुआ। भजन समाप्ति के उपरांत पूजनीय परम पिता जी ने इस भजन की सुंदर व्याख्या की। सत्संग का कार्यक्रम सारी रात चलता रहा और सभी सत्संग में इतना मंत्रमुग्ध हुए कि सुबह होने का पता ही नहीं चला। MSG Bhandara Month</div>
<div></div>
<div style="text-align:justify;">सारी सांध-संगत प्रेम से बैठी हुई थी। सत्संग के इस प्रेम को देखते हुए परम पिता जी बहुत खुश हुए व अपने अमृतयुक्त वचनों द्वारा अनेक बख्शिशें की। दूसरे दिन फिर सत्संग प्रारंभ हुआ और पंडाल साध-संगत से भरा हुआ था सत्संग के उपरांत सतगुरु जी ने बड़ी संख्या में जीवों को ‘नाम-शब्द’ देकर भवसागर से पार किया । उक्त सत्संग के बाद पूजनीय परम पिता जी ने जब इस गांव में आगामी सत्संग फरमाया तो गांव की साध-संगत का प्रेम देखकर परम पिता जी बहुत खुश हुए और वचन फरमाया,‘‘बेटा! तुम्हारे गाँव का पहला नंबर है।’’</div>
<div></div>
<div style="text-align:justify;">सतगुरु जी ने बहुत प्रसन्न होकर उस गाँव का नाम कैले बांदर से बदलकर ‘नसीबपुरा’ रख दिया और फरमाया,‘‘ बेटा! यह तो नसीबों वाला नगर है।’’ पूजनीय परम पिता जी ने उस समय गाई जा रही कव्वाली में यह पंक्ती जोड़ दी-‘गांव तर गया नसीबपुरा सारा गुरु के साथ तार जोड़ के।’ MSG Bhandara Month</div>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>हरियाणा</category>
                                            <category>अनमोल वचन</category>
                                            <category>अध्यात्म</category>
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                <pubDate>Fri, 30 Jan 2026 10:46:54 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>MSG BHANDARA Month: ‘तेरे मकान का एक कंकर लाख रुपये में भी नहीं देंगे’</title>
                                    <description><![CDATA[Shah Satnam Ji: पूजनीय शाह मस्ताना जी  महाराज ने हरबंस सिंह जी (पूजनीय परम पिता शाह सतनाम सिंह जी महाराज का बचपन का नाम) के पास संदेश भेजा कि अपना मकान तोड़कर घर का सारा सामान डेरे में लेकर आ जाए। आप जी तो पहली बार ही दर्शन करते ही अपने प्यारे सतगुरु पर तन […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/spiritual/holy-sermons/we-wouldnt-sell-a-single-pebble-from-your-house-even-for-a-lac-rupees/article-80576"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-01/param-pita-shah-satnam-ji-maharaj2.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">
<p>Shah Satnam Ji: पूजनीय शाह मस्ताना जी  महाराज ने हरबंस सिंह जी (पूजनीय परम पिता शाह सतनाम सिंह जी महाराज का बचपन का नाम) के पास संदेश भेजा कि अपना मकान तोड़कर घर का सारा सामान डेरे में लेकर आ जाए। आप जी तो पहली बार ही दर्शन करते ही अपने प्यारे सतगुरु पर तन मन से न्यौछावर हो चुके थे। आप जी को जैसे ही अपने सतगुरु जी का फरमान प्राप्त हुआ, आप जी ने बिना देरी किए, तत्काल ही कुदाल व गंधाला उठाया और ह्यधन धन सतगुरू तेरा ही आसराह्ण का नारा लगाकर अपना मकान अपने हाथों से तोड़ना शुरू कर दिया। MSG BHANDARA Month</p>
<p>इस काम में आप जी के पूजनीय माता जी ने जी भी आप जी का साथ देते हुए कहा कि सार्इं जी के किसी भी हुक्म को नहीं मोड़ना। जैसा भी वह कहें, वैसा ही करना है। पूजनीय माता जी भी आप जी के साथ मकान तोड़ने लग गए। उसी दौरान एक प्रेमी ने आकर आप जी को सतगुरू जी का वचन सुनाते हुए कहा कि एक कमरे व एक बैठक को नहीं तोड़ना है, परिवार कहां बैठेगा और कहां सोएगा?</p>
<p>इधर आप जी अपने सतगुरू प्यारे की कृपा व खुशी प्राप्त करने के लिए उनके आदेश से खुशी-खुशी अपना मकान तोड़ रहे थे, एक बड़ा कमरा तथा एक बैठक को छोड़कर आप जी द्वारा अपना सारा मकान तोड़ कर गिरा दिया गया। पूजनीय सतगुरु जी का यह अनोखा खेल कई दिनों तक चलता रहा। लोग इस घटना को देखकर व सुनकर आश्चर्यचकित रह जाते तथा मन ही मन विचार करते कि आप जी को क्या हो गया है? आप अपना मकान क्यों तोड़ रहे हैं? उन बेचारे गांव वालों को प्यारे सतगुरु जी के रहस्य का क्या पता था? MSG BHANDARA Month</p>
<h3>आप जी घर का सामान ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में भरकर डेरा सच्चा सौदा, सरसा ले आए</h3>
<p>इस प्रकार आप जी घर का सामान रेडियो, घड़ी, पानी वाली टंकी, गाड़ी, कपड़ों से भरी पेटियां, संदूक, बिस्तर, मोटरसाईकिल, फर्नीचर तथा जो भी अन्य सामान घर में मौजूद था, उसे ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में भरकर डेरा सच्चा सौदा, सरसा में ले आए। उस समय नई ईटों का भाव 28 रूपये प्रति हजार था परंतु ट्रक वाले गांव श्री जलालआणा साहिब से सरसा तक र्इंटों की ढुलाई का किराया 20 रूपये प्रति हजार मांग रहे थे। इसलिए आप जी ने पूजनीय बेपरवाह जी के चरणों में विनती की, ह्यह्यसार्इं जी! यदि आपका हुक्म हो तो पुरानी ईटें इसी गांव को दे देते हैं और यहां नई र्इंटें मंगवा लेते हैं।”</p>
<p>इस पर पूजनीय बेपरवाह शाह मस्ताना जी महाराज ने वचन फरमाया, ह्यह्यनहीं भई! नहीं, तेरे मकान का तो एक-एक कंकर, एक-एक लाख रूपये में भी किसी को नहीं दिया जाएगा। सभी र्इंटें यहां दरबार में उठा लाओ।ह्णह्ण इस तरह अपने प्यारे सतगुरु के आदेश को सर्वोपरि मानते हुए आप जी अपने मकान का सारा मलबा र्इंटें, गार्डर तथा लकड़ी के बड़े-बड़े शहतीर आदि सब कुछ ट्रकों, ट्रॉलियों में भरकर डेरा सच्चा सौदा, सरसा में ले आए। MSG BHANDARA Month</p>
</div>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>हरियाणा</category>
                                            <category>अनमोल वचन</category>
                                            <category>अध्यात्म</category>
                                            <category>प्रेरणास्रोत</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/spiritual/holy-sermons/we-wouldnt-sell-a-single-pebble-from-your-house-even-for-a-lac-rupees/article-80576</link>
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                <pubDate>Wed, 21 Jan 2026 20:30:20 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>MSG Bhandara Month: बेटा, हमारा भी हक बनता है कि हम भी अपने हाथों से सेवा करें।</title>
                                    <description><![CDATA[Param Pita Shah Satnam Ji: एक बार डेरे में दीवार को टीप करने का काम चल रहा था। पूजनीय परम पिता शाह सतनाम सिंह जी महाराज उस दीवार के पास आ गए और स्वयं अपने पवित्र कर कमलों से पानी की भरी हुई बाल्टी और एक डिब्बा लेकर दीवार की तराई करने लगे। जब सेवादारों […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/spiritual/holy-sermons/son-we-also-have-the-right-to-serve-with-our-own-hands/article-80510"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-01/msg-3-1.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">
<p>Param Pita Shah Satnam Ji: एक बार डेरे में दीवार को टीप करने का काम चल रहा था। पूजनीय परम पिता शाह सतनाम सिंह जी महाराज उस दीवार के पास आ गए और स्वयं अपने पवित्र कर कमलों से पानी की भरी हुई बाल्टी और एक डिब्बा लेकर दीवार की तराई करने लगे। जब सेवादारों ने पूजनीय परम पिता जी को सेवा करते हुए देखा तो विनती करने लगे, ”पिता जी, आपके पवित्र कर कमल तो हमें आशीर्वाद देने के लिए हैं, यह सेवा हमें करने दो।” इस पर पूजनीय परम पिता जी फरमाने लगे, ”यह बेपरवाह शाह मस्ताना जी महाराज का लगाया हुआ बाग है। बेटा, हमारा भी हक बनता है कि हम भी अपने हाथों से सेवा करें।”  <strong>पवित्र ग्रंथ सच्चे रूहानी रहबर में से…</strong> MSG Bhandara Month</p>
<h3>इस घोर कलियुग में मालिक का नाम लेना बड़ा मुश्किल</h3>
<p>पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि इस घोर कलियुग में मालिक का नाम लेना बड़ा मुश्किल है। मन और मनमते लोग रोकते-टोकते हैं। इन्सान प्रभु का नाम लेना भी चाहे तो मन तरह-तरह की परेशानी खड़ी कर देता है। आप सुमिरन करने लगते हैं, कुछ देर ही सुमिरन कर पाते हैं और बाद में होश ही नहीं रहता कि मन आपको कहां से कहां ले गया।</p>
<p>पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि इस घोर कलियुग में मन-इंद्रियां बड़े फैलाव पर हैं। मन इन्सान को सुमिरन नहीं करने देता, मालिक की तरफ नहीं चलने देता। जहां मालिक की चर्चा होती हो, वहां मीन-मेख (कमियां) निकालता रहता है, हालांकि उसकी खुद की कमियों का कोई अंदाजा ही नहीं होता। MSG Bhandara Month</p>
<h3>मन बड़ा ही जालिम, शातिर है</h3>
<p>पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि मन बड़ा ही जालिम, शातिर है। आप जब तक सुमिरन नहीं करेंगे, यह काबू में नहीं आएगा। सुमिरन करने से मन काबू में आता है। अगर सुमिरन, भक्ति-इबादत की जाए तो मन काबू में आ सकता है अन्यथा मन बढ़ता चला जाता है और जीव गुमराह हो जाता है। जैसे टायर में हवा भरते हैं तो वह फूलता चला जाता है उसी तरह मन गंदे, बुरे विचारों की हवा देता है और इन्सान फूलता चला जाता है। उसमें अहंकार, घमंड अपने आप आने लगता है। उसे पीर-फकीर के वचन अच्छे नहीं लगते। उसे सिर्फ अपनी बातें सही लगती हैं और दूसरे सभी गलत लगते हैं।</p>
<p>इस तरह से मन इन्सान को भटकाता, गुमराह करता है, मालिक से दूर करता है। पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि मन से लड़ने का एकमात्र उपाय प्रभु का नाम है। आपको घर में, काम-धन्धे में कोई भी परेशानी, दु:ख-तकलीफ है तो आप घर में खाना वगैरह सुमिरन करके बनाओ। चलते, फिरते सुमिरन करो। दो-तीन महीने लगातार सुमिरन करो, मेहनत करो तो यकीनन मालिक अंदर से ख्याल देंगे और आपको परेशानी से निकलने का रास्ता जरूर मिल जाएगा।  MSG Bhandara Month</p>
</div>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>हरियाणा</category>
                                            <category>अनमोल वचन</category>
                                            <category>अध्यात्म</category>
                                            <category>प्रेरणास्रोत</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 20 Jan 2026 14:36:41 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>MSG Bhandara Month: भरी रेलगाड़ी में अचानक एक बुजुर्ग महिला बेहोश होकर पूजनीय परम पिता जी के सामने गिर पड़ी और&amp;#8230;</title>
                                    <description><![CDATA[एक बार की बात है, गुरगद्दी बख्शीश से पहले पूजनीय परम पिता शाह सतनाम सिंह जी महाराज किसी जरूरी कार्य के लिए रेलगाड़ी से अपने गांव से बठिंडा जा रहे थे। जब रेलगाड़ी बठिंडा रेलवे स्टेशन पर पहुंची, तो उस समय भीड़ में अचानक एक बुजुर्ग महिला को दौरा पड़ गया और वह बेहोश होकर […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/spiritual/holy-sermons/suddenly-an-elderly-woman-fainted-and-fell-in-front-of-the-revered-father/article-80442"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-01/param-pita-ji-feild.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">एक बार की बात है, गुरगद्दी बख्शीश से पहले पूजनीय परम पिता शाह सतनाम सिंह जी महाराज किसी जरूरी कार्य के लिए रेलगाड़ी से अपने गांव से बठिंडा जा रहे थे। जब रेलगाड़ी बठिंडा रेलवे स्टेशन पर पहुंची, तो उस समय भीड़ में अचानक एक बुजुर्ग महिला को दौरा पड़ गया और वह बेहोश होकर नीचे गिर पड़ी। सभी लोग रेलगाड़ी से उतर गए, लेकिन बुजुर्ग महिला की तरफ किसी ने ध्यान नहीं दिया। MSG Bhandara Month</p>
<p style="text-align:justify;">पूजनीय परम पिता जी ने तुरंत पानी लाकर उस महिला के चेहरे पर पानी के छींटे मारे तो वह महिला होश में आ गई। उक्त बुजुर्ग महिला ने बताया कि, ‘मैं गांव बल्लुआणा की रहने वाली हूं, मुझे अपने गांव जाना है।’’ पूजनीय परम पिता जी ने अपने कार्य की परवाह न करते हुए पहले उस बुजुर्ग महिला को उसके गांव पहुंचाया। जब उक्त महिला के परिजनों को उक्त घटना के बारे में पता चला तो पूरा परिवार पूजनीय परम पिता शाह सतनाम सिंह जी महाराज का कोटि-कोटि धन्यवाद करने लगा। इस तरह आप जी किसी मजबूर लाचार व्यक्ति की सहायता करने में रत्तीभर भी देर नहीं करते थे। परमार्थी कार्य को अपने निजी कार्य से बढ़कर महत्तता देते हुए उसे तुरंत मौके पर ही पूरा करते थे। MSG Bhandara Month</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>हरियाणा</category>
                                            <category>अनमोल वचन</category>
                                            <category>अध्यात्म</category>
                                            <category>प्रेरणास्रोत</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 18 Jan 2026 10:04:57 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>MSG Bhandara Month: परम पिता जी ने ऐसे बरगद के पेड़ों को अपनी पावन दृष्टि से पार उतारा!</title>
                                    <description><![CDATA[15 सितंबर 1969- पूजनीय परम पिता शाह सतनाम सिंह जी महाराज गाँव त्योणा पुजारियां जिला बठिंडा (पंजाब) में सत्संग फरमाने के उपरांत भाई चन्द सिंह तथा नन्द सिंह के घर गाँव तंगराली में पधारे। उस घर में पूजनीय परम पिता जी के अर्धांगिनी पूजनीय माता गुरदेव कौर जी के ननिहाल थे। वहाँ पर पूजनीय परम […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/spiritual/holy-sermons/saints-do-not-take-anything-from-anyone/article-80407"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-01/param-pita-ji-aashirwad.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">15 सितंबर 1969- पूजनीय परम पिता शाह सतनाम सिंह जी महाराज गाँव त्योणा पुजारियां जिला बठिंडा (पंजाब) में सत्संग फरमाने के उपरांत भाई चन्द सिंह तथा नन्द सिंह के घर गाँव तंगराली में पधारे। उस घर में पूजनीय परम पिता जी के अर्धांगिनी पूजनीय माता गुरदेव कौर जी के ननिहाल थे। वहाँ पर पूजनीय परम पिता जी परिवार के सभी सदस्यों से मिले और सभी की कुशलता पूछी। इस घर के पास बरगद के पेड़ लगे हुए थे। पूजनीय परम पिता जी ने उन पेड़ों को देखते हुए वचन फरमाया, ‘‘अपने डेरे में भी बरगद के पौधे लगाने हैं।’’ MSG Bhandara Month</p>
<p style="text-align:justify;">इस पर परिवार के सदस्यों ने कहा कि हम बरगद के पौधे दरबार में ले आएंगे। जब पूजनीय परम पिता जी वहाँ से चलने लगे तो चन्द सिंह जी (पूजनीय परम पिता जी के रिश्तेदार) पूजनीय परम पिता जी को सम्मान के तौर पर कम्बल देने लगे तो पूजनीय परम पिता जी ने फरमाया, ‘‘चन्द सिंह, अब हम संत हैं। इसलिए हम किसी से कुछ नहीं लेते।’’ भाई चन्द सिंह ने विनती की, ‘‘पिता जी, हम आपको संत के तौर पर नहीं दे रहे बल्कि हम तो रिश्तेदारी (दामाद) के रूप में दे रहे हैं।’’ पूजनीय परम पिता जी ने अपने साथ वाले सेवादारों से कहा, ‘‘ले लो भाई, अब तो इन्होंने सिरे वाली बात कह दी है।’’</p>
<h3 style="text-align:justify;">सच्चे दाता शाह सतनाम जी महाराज ने राम नाम का पाठ पढ़ाया: पूज्य गुरु जी</h3>
<p style="text-align:justify;">सरसा। सच्चे रूहानी रहबर पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि साध-संगत को मालूम है कि जनवरी महीना सच्चे मुर्शिद-ए-कामिल शाह सतनाम जी दाता, रहबर का अवतार माह है। साध-संगत अवतार माह देश-विदेश में अपने प्यार-मोहब्बत, सतगुरु पर दृढ़ विश्वास और श्रद्धा के साथ मनाती है। यानि अल्लाह, वाहेगुरु, राम की भक्ति इबादत में आप आगे बढ़ते चले जाएं। मतलब खुशी का बढ़ना, रहमतों का बढ़ना। आप अच्छे-नेक कामों में बढ़ोत्तरी करें। अच्छे नेक कामों में तरक्की करें और मालिक की कृपा दृष्टि के काबिल बनते चले जाएं, ये आपको आशीर्वाद कहते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">आपजी फरमाते हैं कि सच्चे दाता-रहबर शाह सतनाम जी महाराज, बेपरवाह साईं, दया के सागर, रहमत के मालिक इस धरा पर 25 जनवरी 1919 को आए। जीवों को राम-नाम का पाठ पढ़ाया और ये सिखाया कि आप कैसे इस मृत्युलोक में रहते हुए सुखी रह सकते हैं? कैसे खुशियों का दामन हमेशा पकड़े रखना है और किस तरह इस मृत्यु लोक में भगवान को देखा जा सकता है? इन्सान की इच्छा तो आदिकाल से ये जानने की है कि वो सुप्रीम पावर कौन है? पहले भी सार्इंसदान मान चुके हैं यानि प्रलय, महाप्रलय से पहले और युग बीतने से पहले भी मान चुके हैं और आज वाले भी मानना शुरू कर चुके हैं कि सुप्रीम पावर कोई तो है। जैसे एक बार ऑस्ट्रेलिया या किसी देश में रिसर्च किया गया कि जो राम-नाम जपते हैं और जो राम नाम नहीं जपते उनमें क्या फर्क है? उनमें सेंसर और कंप्यूटर की</p>
<h3>चिप लगाए गए और पूरा कंप्यूटराइज सिस्टम बनाया गया</h3>
<p style="text-align:justify;">चिप लगाए गए और पूरा कंप्यूटराइज सिस्टम बनाया गया कि वहां जरा सी भी कोई तरंग या रेंज, कोई भी कुछ भी अहसास हो, वो सारा मॉनिटर कर रहे थे। कंप्यूटरों में रिकॉर्ड हो रहा था। उन रिसर्चकर्ताओं ने ये माना कि मालिक का नाम जपने वाले बहुत स्ट्रॉन्ग होते हैं। जल्दी से वो गमगीन नहीं होते। दुखी नहीं होते। जो सुबह-शाम प्रेयर, सुमिरन करते हैं, उनकी ये रिडिंग आई कि उनमें सुईसाइड की तो नाममात्र ही भावना होती है, क्योंकि सब मालिक के ऊपर छोड़ा होता है।</p>
<p style="text-align:justify;">दूसरी बात लड़ाई झगड़ा आम दुनिया के मुकाबले बहुत कम होता है। उनके अंदर बर्दाश्त शक्ति ग़जब की होती है। तो जब साइंसदानों ने कंप्यूटरों पर अध्ययन किया तो उसमें यही रिडिंग आई कि ब्रह्माण्ड से कुछ किरणें आती हैं और जब वो प्रेयर करते हैं तो उनके दिलोदिमाग से टकराती हैं यानि वो किरणें सीधी आती हैं और सीधे दिमाग में चली जाती हैं, जिससे उनके अंदर विल पावर आती है, आत्मविश्वास आता है। तो उनका ये मानना था कि ऐसा होने से वो लोग स्ट्रॉन्ग हो जाते हैं, मजबूत हो जाते हैं। इसलिए उनके ऊपर किसी चीज का जल्दी से असर नहीं होता। जब ये बातें सामने आईं तो उन्होंने माना कि ब्रह्माण्ड में कोई अदृश्य सुप्रीम पावर है। हम उसे भगवान, अल्लाह, वाहेगुरु, गॉड, खुदा, रब्ब कहते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">तो सतगुरु मौला ने उसी की चर्चा की, उस सुप्रीम पावर को आप देख सकते हैं। कोई भी इन्सान वचन सुनकर, गुरुमंत्र लेकर उसके नाम का जाप करें और तीन वचनों पर पूरा अमल करें, तो ऐसा करके वो अपने घर में बैठे, परिवार में रहकर उस सुप्रीम पावर का, सबसे बड़ी शक्ति का अहसास भी कर सकते हैं और दर्शन भी कर सकते हैं। तो सतगुरु मौला ने ऐसा नाम दिया, ऐसा बड़ा ही आसान तरीका बताया। जिन जीवों ने सुना, माना वो आज तमाम खुशियां हासिल कर रहे हैं, करते रहेंगे, ये खुशियां बढ़ती ही जानी हैं। ये उनके पवित्र वचन हैं। MSG Bhandara Month</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>हरियाणा</category>
                                            <category>अनमोल वचन</category>
                                            <category>अध्यात्म</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 17 Jan 2026 09:52:06 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>MSG Bhandara Month: काश! उसका घर भी पक्का व सुंदर होता तो&amp;#8230;</title>
                                    <description><![CDATA[Param Pita Shah Satnam Ji: 17 जनवरी 1976 गाँव महमा सरजा (पंजाब) में सत्संग था। पूजनीय परम पिता शाह सतनाम सिंह जी महाराज शाम के समय अधिकांशत: बाहर खेतों में घूमने जाया करते। वहां गुरबचन सिंह फौजी नाम का एक व्यक्ति था, जिसका घर गाँव से बाहर था। उसने सोचा कि काश! उसका घर भी […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/spiritual/holy-sermons/i-wish-his-house-was-also-strong-and-beautiful/article-80372"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-01/param-pita-jil-news.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Param Pita Shah Satnam Ji: 17 जनवरी 1976 गाँव महमा सरजा (पंजाब) में सत्संग था। पूजनीय परम पिता शाह सतनाम सिंह जी महाराज शाम के समय अधिकांशत: बाहर खेतों में घूमने जाया करते। वहां गुरबचन सिंह फौजी नाम का एक व्यक्ति था, जिसका घर गाँव से बाहर था। उसने सोचा कि काश! उसका घर भी पक्का व सुंदर होता तो वह भी पिता जी से अपने घर पर चरण टिकाने की प्रार्थना कर सकता। पिता जी घूमने के लिए खेतों की तरफ जा रहे थे। जैसे ही उस फौजी भाई का घर आया तो पिता जी उसके घर जाकर वहाँ पर रखे एक मूढ़े पर विराजमान हो गए।</p>
<p style="text-align:justify;">फौजी की आँखों से प्रेम व खुशी के आँसू बहने लगे। उसकी खुशी का कोई ठिकाना नहीं रहा। पूज्य परम पिता जी ने उसकी सच्ची तड़प को पूरा किया तथा स्वयं कहकर उससे चाय बनवाई। परम पिता जी ने वचन किए, ‘‘परवाह न कर! मालिक खुशियां बख्शेगा।’’ उस इन्सान पर प्यारे मुर्शिद जी ने इतनी रहमत की कि उस फौजी के चार पुत्रों को सरकारी नौकरी मिल गई। सारा परिवार साध-संगत की सेवा में बढ़-चढ़ कर योगदान देने लगा। MSG Bhandara Month</p>
<p> </p>
<p> </p>
<p> </p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>हरियाणा</category>
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                <pubDate>Fri, 16 Jan 2026 09:49:27 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>MSG Bhandara Month: एक भगत ने जब संतान प्राप्ति की मांग की तो परम पिता जी ने समझाया कि&amp;#8230;</title>
                                    <description><![CDATA[पूजनीय परम पिता शाह सतनाम जी महाराज की सतगुरु के प्रति असीम श्रद्धा भक्ति को देखते हुए पूजनीय शाह मस्ताना जी महाराज गांव श्री जलालआणा साहिब में कई बार पधारे। एक बार बेपरवाह जी इस पवित्र गांव में सत्संग के बाद नाम-शब्द की युक्ति प्राप्त करने आए नए जीवों को बुराईयां त्यागने के बारे में […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/spiritual/holy-sermons/when-a-devotee-requested-a-child-the-supreme-father-explained-that/article-80316"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-01/param-pita-shah-satnam-ji-maharaj1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">पूजनीय परम पिता शाह सतनाम जी महाराज की सतगुरु के प्रति असीम श्रद्धा भक्ति को देखते हुए पूजनीय शाह मस्ताना जी महाराज गांव श्री जलालआणा साहिब में कई बार पधारे। एक बार बेपरवाह जी इस पवित्र गांव में सत्संग के बाद नाम-शब्द की युक्ति प्राप्त करने आए नए जीवों को बुराईयां त्यागने के बारे में समझा रहे थे। किसी-किसी नाम अभिलाषी से परिचय प्राप्त कर रहे थे। किसी-किसी से पूछ भी रहे थे कि तुम नाम-रास्ता क्यों लेना चाहते हो? सभी अपने-अपने तरीके से उत्तर दे रहे थे। इस प्रकार भान सिंह नामक भक्त से बेपरवाह शाह मस्ताना जी महाराज ने पूछा, ‘‘वरी! तू नाम क्यों लेना चाहता है?’’ उसने बताया कि सांई जी, मेरे यहां संतान नहीं है। MSG Bhandara Month</p>
<h3>‘‘असी बच्चे थोड़े ही वंडदे हां’’</h3>
<p style="text-align:justify;">संतान प्राप्त करने के लिए नाम लेना चाहता हूं। सांई जी ने भान सिंह को बताया, ‘‘असी बच्चे थोड़े ही वंडदे हां’’ यह कहकर उसे बाहर भिजवा दिया। भान सिंह ने शाह सतनाम जी महाराज जी के पास जाकर उन्हें सारी बात बताई। पूजनीय परम पिता शाह सतनाम जी महाराज ने उसे समझाते हुए कहा, ‘‘अब तूने जाकर पूजनीय साईं शाह मस्ताना जी महाराज के चरणों में अरदास करनी है कि मैंने अपनी आत्मा के कल्याण के लिए नाम लेना है।’’ फिर उस भक्त ने वैसा ही किया। बेपरवाह जी ने फिर उसे नाम लेने वालों में बैठने का इशारा करते हुए फरमाया, ‘‘वरी! हमारी बात सुन। एक आदमी की कारीगर (लकड़ी का मिस्त्री) से यारी है।</p>
<p style="text-align:justify;">कारीगर रोज शाम को उस आदमी के पास आता है। उस आदमी के पास मंजी (चारपाई) नहीं है। उस आदमी को क्या जरूरत है कि वह कारीगर को कहे कि मुझे एक मंजी बनाकर दे। कारीगर खुद ही देखता है कि मेरा यार नीचे जमीन पर सोता है क्यों न इसे मंजी बनाकर दूं। इसी प्रकार जब तुमने नाम शब्द ले लिया है तो उसे जपो। वह मालिक तुम्हारी सभी जरूरतों को समझता है और वह बिन मांगें ही जायज मांगें पूरी करेगा। ’’ MSG Bhandara Month</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>हरियाणा</category>
                                            <category>अनमोल वचन</category>
                                            <category>अध्यात्म</category>
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                <pubDate>Wed, 14 Jan 2026 10:07:34 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>MSG Bhandara Month: &amp;#8221;ब्रेक फेल होने के बाद गाड़ी जब खाई में गिरने लगी तो मेरी आंखें बंद हो गई!&amp;#8221;</title>
                                    <description><![CDATA[Param Pita Shah Satnam Ji Maharaj: मैं 30 जनवरी 1976 को नागालैंड से अहमदाबाद जाने के लिए रवाना हुआ। वहां से दो दिन का सफर मिल्ट्री गाड़ी में तय करना पड़ा। एक गाड़ी में हम 29 जवान बैठे थे। मैं बैैठा-बैठा सुमिरन कर रहा था। लगभग 12-13 किलोमीटर चलने के बाद हमारी गाड़ी के ब्रेक […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/when-the-brakes-failed-and-the-car-started-falling-into-the-ravine-my-eyes-closed/article-80284"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-01/param-pita-ji1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Param Pita Shah Satnam Ji Maharaj: मैं 30 जनवरी 1976 को नागालैंड से अहमदाबाद जाने के लिए रवाना हुआ। वहां से दो दिन का सफर मिल्ट्री गाड़ी में तय करना पड़ा। एक गाड़ी में हम 29 जवान बैठे थे। मैं बैैठा-बैठा सुमिरन कर रहा था। लगभग 12-13 किलोमीटर चलने के बाद हमारी गाड़ी के ब्रेक फेल हो गए। गाड़ी खाई की तरफ जाने लगी। पहाड़ी इलाका होने के कारण खाई कम से कम दो-अढ़ाई हजार फुट गहरी थी। जब गाड़ी एकदम सड़क को छोड़कर खाई में गिरने लगी तो मेरी आंखें बंद हो गई और मुझे कुछ पता नहीं चला कि क्या हो रहा है। गाड़ी पलटे खाती हुई जा रही थी। MSG Bhandara Month</p>
<p style="text-align:justify;">मैंने अपने सतगुरू को याद किया तो मुझे कुछ ऐसा महसूस हुआ कि जैसे मुझे पूजनीय परम पिता जी ने अपनी गोद में ले रखा हो। जब गाड़ी सड़क से 60-65 फुट नीचे जाकर एक वृक्ष के सहारे रूक गई तो मेरी आंखें खुल गई। मैंने देखा कि मुझे खरोंच तक नहीं आई। मैं उसी समय नीचे उतरा और हाथ जोड़कर पूजनीय परम पिता जी का धन्यवाद करने लगा।</p>
<p style="text-align:justify;">गाड़ी में बैठे जवानों की दर्दनाक चीखें सुनकर मेरे रोंगटे खड़े हो गए। मैं और जिनको कम चोट आई, सभी मिलकर घायल जवानों को पीठ पर लाद-लाद कर ऊपर सड़क पर ले आए। जवानों का इतना बुरा हाल था कि देखा नहीं जाता था। हमनें जैसे-तैसे उन्हें अस्पताल पहुंचाया। मैंने पूजनीय परम पिता जी का लाख-लाख धन्यवाद किया।<br />
<strong>श्री जिले सिंह फौजी, अहमदाबाद (गुजरात) MSG Bhandara Month</strong></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>अध्यात्म</category>
                                            <category>प्रेरणास्रोत</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 13 Jan 2026 09:40:00 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>MSG BHANDARA Month: परम पिता जी धीरे धीरे &amp;#8216;उसके&amp;#8217; पास पहुंच गए और&amp;#8230;</title>
                                    <description><![CDATA[Param Pita Shah Satnam Ji Maharaj: गुरगद्दी पर बिराजमान होने से पहले पूजनीय परम पिता शाह सतनाम सिंह जी महाराज श्री जलालआणा साहिब में अपने खेतों की संभाल व निगरानी खुद करते थे। एक बार आपजी के खेत में चनों की फसल की चोरी होने लगी। पूज्य परम पिता जी ने निगरानी शुरू की व […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/spiritual/holy-sermons/when-satguru-ji-helped-the-thief-give-up-his-habit-of-stealing-in-a-unique-way/article-80213"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-01/param-pita-shah-satnam-ji2.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">
<p>Param Pita Shah Satnam Ji Maharaj: गुरगद्दी पर बिराजमान होने से पहले पूजनीय परम पिता शाह सतनाम सिंह जी महाराज श्री जलालआणा साहिब में अपने खेतों की संभाल व निगरानी खुद करते थे। एक बार आपजी के खेत में चनों की फसल की चोरी होने लगी। पूज्य परम पिता जी ने निगरानी शुरू की व एक दिन किसी व्यक्ति को फसल चुराते देख लिया। चोर ने चनों की भरौटी बांध ली लेकिन मुफ्त के माल के लालच में उस चोर ने अधिक फसल काट दी कि वह भरौटी उससे उठाई ही नहीं गई। परम पिता जी धीरे धीरे उसके पास पहुंच गए। चोर आप जी को देखकर घबरा गया। MSG BHANDARA Month</p>
<p>आप जी ने उसे हौंसला दिया और न डरने के लिए कहा। पूजनीय परम पिता जी ने उसे फरमाया कि इस भरौटी की दो भरौटियां बना लो और हम एक-एक कर उठा लेते हैं। चोर चाहता था कि यह दोनों भरौटियां आप जी (परम पिता जी) के घर ले जाई जाएं। पूजनीय परम पिता जी ने फरमाया, ह्यह्यनहीं यह आपके हिस्से की हैं और आपके घर पर ही लेकर चलेंगेह्णह्ण।</p>
<p>पूजनीय परम पिता जी अपने पवित्र कर कमलों से उस भरौटी को उसके घर छोड़कर आए। जब परम पिता जी उस व्यक्ति के घर से वापिस आने लगे तो उसने आप जी से माफी मांगी व आगे से कभी भी चोरी नहीं करने का वायदा किया। पूजनीय परम पिता जी की महानता वर्णन से परे है, जिनकी दयालुता के कारण चोर को न सिर्फ माफ किया बल्कि उसे चोरी की बुरी आदत छोड़ने के भी काबिल बनाया। MSG BHANDARA Month</p>
</div>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>हरियाणा</category>
                                            <category>अनमोल वचन</category>
                                            <category>अध्यात्म</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 11 Jan 2026 09:48:54 +0530</pubDate>
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                <title>MSG Bhandara Month: परम पिता शाह सतनाम जी महाराज ने अपनी अपार दया-मेहर से बिन मांगे ही पूरी की मुराद</title>
                                    <description><![CDATA[Param Pita Shah Satnam Ji Maharaj: मुख्त्यार कौर, गाँव दानेवाला जिला श्री मुक्तसर साहिब (पंजाब) सच्चे दाता रहबर के परोपकार के एक वृतांत का वर्णन करते हुए बताती है कि मेरे बड़े लड़के अमरजीत सिंह की शादी को 15 वर्ष हो चुके थे, परन्तु अभी तक सन्तान नहीं हुई थी। वह मुझे अक्सर कहता था […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/spiritual/holy-sermons/with-his-immense-grace-and-mercy-satguru-ji-fulfilled-the-wish-after-15-years-even-without-being-asked/article-80177"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-01/param-pita-ji-shah-satnam-ji.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Param Pita Shah Satnam Ji Maharaj: मुख्त्यार कौर, गाँव दानेवाला जिला श्री मुक्तसर साहिब (पंजाब) सच्चे दाता रहबर के परोपकार के एक वृतांत का वर्णन करते हुए बताती है कि मेरे बड़े लड़के अमरजीत सिंह की शादी को 15 वर्ष हो चुके थे, परन्तु अभी तक सन्तान नहीं हुई थी। वह मुझे अक्सर कहता था कि पूजनीय परम पिता शाह सतनाम जी महाराज के चरणों में सन्तान के लिए अर्ज करो, परन्तु मैं उसकी बात को यह कहकर टाल देती कि मालिक तो अंग-संग है, जब मालिक की रहमत होगी तो सन्तान हो जाएगी। सन् 1985 में पूजनीय परम पिता जी मलोट डेरे में पधारे। MSG Bhandara Month</p>
<p style="text-align:justify;">मजलिस के बाद जब पूजनीय परम पिता जी घूमने जा रहे थे तो अचानक मुझे कहने लगे, ‘‘बेटा, तेरे पोता-पोती सब ठीक हैं।’’ मैंने उदास मन से कहा-पिता जी, मेरे लड़के की शादी हुए 15 वर्ष हो गए हैं, अभी तक उनके कोई सन्तान नहीं हुई। इस पर पूजनीय परम पिता जी ने मुस्कुराकर कहा, ‘‘बेटा, तुझे एक प्रेम निशानी दे रहे हैं, इसे अपने पोते-पोतियों को पहना देना।’’ उसी समय पूजनीय परम पिता जी ने मुझे एक फ्रॉक तथा कुछ अन्य कपड़े दिए। मैं यह प्रेम-निशानी लेकर फूले नहीं समा रही थी। पूजनीय परम पिता शाह सतनाम जी महाराज की अपार दया-मेहर से 15 वर्ष बाद मुझे एक पोता व दो पोतियों का सुख मिला। इस प्रकार सतगुरु अपने जीव की हर जायज माँग को पूरी करते हैं। MSG Bhandara Month</p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>हरियाणा</category>
                                            <category>अनमोल वचन</category>
                                            <category>अध्यात्म</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 10 Jan 2026 09:58:54 +0530</pubDate>
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