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                <title>Uttarkashi Tunnel Accident - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <description>Uttarkashi Tunnel Accident RSS Feed</description>
                
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                <title>Watch: सामने आया सिलक्यारा सुरंग में फंसे श्रमिकों का पहला वीडियो, देखें कैसे रह रहे हैं लोग</title>
                                    <description><![CDATA[सिलक्यारा/देहरादून (सच कहूँ न्यूज)। Uttarakashi Tunnel Rescue Operation:  उत्तराखंड के उत्तरकाशी जनपद में निमार्णाधीन सिलक्यारा सुरंग में 41 श्रमिकों की पहली बार तस्वीरें सामने आयी हैं। गौरतलब है कि 12 नवम्बर को सुरंग में मलबा गिरने के कारण 41 श्रमिक फंस गए थे और आज यानी मंगलवार की सुबह इन श्रमिकों की तस्वीरें सामने आयीं। […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttarakhand/uttarakashi-tunnel-rescue-operation/article-55069"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-11/uttarakashi-tunnel-rescue-operation.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>सिलक्यारा/देहरादून (सच कहूँ न्यूज)। </strong>Uttarakashi Tunnel Rescue Operation:  उत्तराखंड के उत्तरकाशी जनपद में निमार्णाधीन सिलक्यारा सुरंग में 41 श्रमिकों की पहली बार तस्वीरें सामने आयी हैं। गौरतलब है कि 12 नवम्बर को सुरंग में मलबा गिरने के कारण 41 श्रमिक फंस गए थे और आज यानी मंगलवार की सुबह इन श्रमिकों की तस्वीरें सामने आयीं। राहत की बात यह है कि तस्वरों में सभी श्रमिक स्वस्थ दिख रहे हैं। इन श्रमिकों की तस्वीरें एंडोस्कोपिक फ्लेक्सी कैमरे से ली गयी हैं। इसके अलावा मौके पर दो रोबोट भी पहुंच चुके हैं, जिन्होंने सुरंग के भीतर घुसने का काम शुरू कर दिया है। Uttarkashi Tunnel Accident</p>
<blockquote class="twitter-tweet">
<p dir="ltr" lang="en" xml:lang="en">VIDEO | First visuals of workers stuck inside the collapsed Silkyara tunnel in <a href="https://twitter.com/hashtag/Uttarkashi?src=hash&amp;ref_src=twsrc%5Etfw">#Uttarkashi</a>, Uttarakhand.</p>
<p>Rescuers on Monday pushed a six-inch-wide pipeline through the rubble of the collapsed tunnel allowing supply of larger quantities of food and live visuals of the 41 workers… <a href="https://t.co/mAFYO1oZwv">pic.twitter.com/mAFYO1oZwv</a></p>
<p>— Press Trust of India (@PTI_News) <a href="https://twitter.com/PTI_News/status/1726787226200121767?ref_src=twsrc%5Etfw">November 21, 2023</a></p></blockquote>
<p style="text-align:justify;"> सुरंग में फंसे श्रमिकों के जीवन को बचाने के लिए दुनिया भर के विशेषज्ञों और मशीनों के प्रयोग कर युद्धस्तर पर चल रहे राहत एवं बचाव कार्य में अब सफलता मिलने की उम्मीद जाग गयी है। सोमवार को सुरंग में छह इंच चौड़ाई वाली एक अतिरिक्त पाइप लाइन सफलता पूर्वक डाल दी गई। इसके अलावा, सुरंग के ऊपर सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) द्वारा बनाई जा रही वैकल्पिक सड़क भी लगभग पूरे होने की स्थिति में है। इससे सुरंग के ऊपर से मशीनों द्वारा ड्रिलिंग कर अन्दर फंसे श्रमिकों को निकालने की कोशिश हो सकेगी। साथ ही सुरंग के बराबर से भी अंदर रास्ता बनाने के प्रयास लगातार चल रहे हैं।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="भारतीय अर्थव्यवस्था ने रच दिया इतिहास, पूरी दुनिया हैरान!" href="http://10.0.0.122:1245/india-gdp-crosses-four-trillion-dollars/">भारतीय अर्थव्यवस्था ने रच दिया इतिहास, पूरी दुनिया हैरान!</a></p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                            <category>उत्तराखण्ड</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 21 Nov 2023 10:22:08 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>प्रकृति से खिलवाड़, परिणामस्वरूप सुरंग हादसा!</title>
                                    <description><![CDATA[उत्तराखण्ड के जनपद उत्तरकाशी के यमुनोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग पर धरासू और बड़कोट के बीच सिल्क्यारा के नजदीक निमार्णाधीन करीब 4531 मीटर लम्बी सुरंग है जिसमें सिल्क्यारा की तरफ से 2340 मीटर और बड़कोट की तरफ से 1600 मीटर निर्माण हो चुका है। यहां बीती 12 नवम्बर, सुबह करीब पांच बजे सिल्क्यारा की तरफ से करीब […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/playing-with-nature-resulting-in-tunnel-accident/article-55039"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-11/tunner-accident-pic.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">उत्तराखण्ड के जनपद उत्तरकाशी के यमुनोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग पर धरासू और बड़कोट के बीच सिल्क्यारा के नजदीक निमार्णाधीन करीब 4531 मीटर लम्बी सुरंग है जिसमें सिल्क्यारा की तरफ से 2340 मीटर और बड़कोट की तरफ से 1600 मीटर निर्माण हो चुका है। यहां बीती 12 नवम्बर, सुबह करीब पांच बजे सिल्क्यारा की तरफ से करीब 270 मीटर अन्दर, करीब 30 मीटर क्षेत्र में ऊपर से मलबा सुरंग में गिरने की वजह से 41 लोग फंस गये थे। Uttarkashi Tunnel Collapse</p>
<p style="text-align:justify;">यह टनल चार धाम रोड प्रोजेक्ट के तहत बनाई जा रही है, जो हर मौसम में खुली रहेगी। टनल कटिंग का करीब 90 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। हाल ही में अधिकारियों ने दावा किया था कि टनल के अंदर दिसंबर तक वाहनों की आवाजाही शुरू हो जाएगी. मजदूरों के फंस जाने की खबर से देशवासी चिंतित हैं। मजदूरों को बाहर निकालने के लिए बचाव कार्य जारी हैं। इस दुर्घटना का सबसे दुखद पक्ष यह है कि इस सुरंग का एक हिस्सा 2019 में भी धंसा था। संयोग है कि उस वक्त कोई मजदूर उसमें नहीं फंसा था। Uttarkashi Tunnel Collapse</p>
<p style="text-align:justify;">इस हादसे ने एक बार फिर दुर्गम और पहाड़ी क्षेत्रों में विकास कार्यों के स्याह पक्ष को रेखांकित किया है। यह स्याह पक्ष है विकास परियोजनाओं के चलते कुछ ही देर की तेज बरसात से पहाड़ों के भरभरा कर गिरने और भूस्खलन की बढ़ती घटनाओं का। कमजोर होते पहाड़ों की वजह से जब-तब आने वाली आपदा का। उत्तरकाशी की मिट्टी बहुत नर्म है। इसके चलते ऊपर से चट्टानें, मिट्टी आदि लगातार नीचे गिर रही है। इसके कारण भी बचाव कार्य में बड़ी दिक्कतें आ रही हैं।</p>
<h3>संतुलन कायम करना वक्त की सबसे बड़ी जरूरत | Uttarkashi Tunnel Collapse</h3>
<p style="text-align:justify;">दूसरी तरफ सडकों और पनबिजली योजनाओं के जरिए उत्तराखंड जैसे राज्य के दुर्गम और विकास से अछूते क्षेत्रों की आर्थिक विकास को संभव बनाने का उजला पक्ष भी है। जाहिर है कि इस उजले और स्याह पक्ष के बीच संतुलन कायम करना वक्त की सबसे बड़ी जरूरत है। यह जरूरत इसलिए भी है क्योंकि पहाड़ ही नहीं बचेंगे तो सडकों के बिछते जाल और दूसरी बुनियादी सुविधाएं जुटाने का कोई अर्थ नहीं रह जाएगा। Uttarakhand News</p>
<p style="text-align:justify;">संतुलन भी तभी संभव है जबकि किसी भी तरह की परियोजनाओं को धरातल पर उतारने से पहले उनसे जुड़े नफा-नुकसान का पूर्व आकलन ठीक से कर लिया जाए। जान जोखिम में डालकर निर्माण कार्यों में जुटे श्रमिकों की सुरक्षा भी हर मोर्चे पर सुनिश्चित करनी होगी। ऐसा तब ही संभव होगा जब तमाम एहतियाती कदम भी उठा लिए जाएं। सवाल यही है कि आखिर निर्माण प्रक्रिया में गुणवत्ता प्रबंधन की ‘शून्य दोष’ अवधारणा सिर्फ किताबों तक ही सीमित क्यों रहे? यह सही है कि आपदा कभी कह कर नहीं आती और न ही ऐसे हादसों का पूवार्नुमान संभव है। लेकिन इस हादसे में तो आपदा प्रबंधन में जुटे अधिकारियों ने भी माना है कि यदि बेहतर सुरक्षा उपाय और अलार्म सिस्टम होता तो मजदूर इस तरह से सुरंग में नहीं फंसते।</p>
<h3>पूरी हिमालयीन पर्वत श्रृंखला अपेक्षाकृत पृथ्वी पर होने वाला नया प्राकृतिक निर्माण</h3>
<p style="text-align:justify;">अक्सर हादसे होने के बाद ही तकनीकी खामियां उजागर होती हैं, पहले इनकी तरफ किसी का ध्यान नहीं जाता। बाद में लकीर पीटने का काम जरूर होता है। ऐसे हादसों की वजह संबंधित एजेंसी का कमजोर तकनीकी पक्ष तो है ही, भू-वैज्ञानिकों की चेतावनियों की अनदेखी भी इसके लिए जिम्मेदार है।</p>
<p style="text-align:justify;">उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश समेत पूरी हिमालयीन पर्वत श्रृंखला अपेक्षाकृत पृथ्वी पर होने वाला नया प्राकृतिक निर्माण है। कुछ ही स्थलों को छोड़ दें तो कम आयु की यह पर्वतमाला ज्यादातर स्थलों पर कच्ची है। भूवैज्ञानिकों के अनुसार इसका निर्माण अब भी जारी है। उसमें भी उत्तराखंड की मिट्टी तो और भी भुरभुरी होने के कारण पृथ्वी की परतों के नीचे होने वाली हलचलों का असर हिमाचल प्रदेश के साथ इसी क्षेत्र में सर्वाधिक पड़ता है। नेपाल में बार-बार आने वाले भूकम्पों का कारण भी यही भूगर्भीय हलचलें हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">पहाड़ों के साथ जैसा बर्ताव मानव जाति की ओर से हो रहा है उसका एक और उदाहरण इस हादसे के रूप में सबके सामने है। अब यह सोचने का वक्त आ गया है कि किस तरीके से पहाड़ों में विकास कार्य किये जायें कि प्रकृति को न्यूनतम नुकसान हो और कम से कम ऐसे दर्दनाक हादसे तो न ही घटें। उल्लेखनीय है कि इसी साल की जनवरी में जोशीमठ में कई जगहों पर जमीनों पर बड़ी-बड़ी दरारें पड़ गईं। अनेक घरों में भी दरारें आई हैं जिसके कारण सैकड़ों लोगों ने जोशीमठ ही छोड़ दिया है। उन्हें अस्थायी शिविरों में शरण लेनी पड़ी थी। आज भी यहां के लगभग 700 मकानों में दरारें देखी जा सकती हैं। यह कस्बा एक तरह से खाली हो गया है।</p>
<h3>पिछले साल 34 पर्वतारोहियों की मौत हो गई थी | Uttarkashi Tunnel Collapse</h3>
<p style="text-align:justify;">पिछले साल अक्टूबर में उत्तरकाशी के ही भटवाड़ी इलाके में द्रौपदी के डांडा-2 पर्वत शिखर पर जोरदार बर्फीला तूफान आया था। इससे 34 पर्वतारोहियों की मौत हो गई थी। इनमें 25 प्रशिक्षु थे जबकि 2 प्रशिक्षक थे। अक्टूबर 1991 में जोरदार भूकंप आया था जिससे करीब एक हजार लोग मारे गये थे। हजारों मकान भी पूरी तरह से बर्बाद हो गये थे। तब यह अविभाजित उत्तर प्रदेश का हिस्सा था। ऐसे ही, काफी पहले पिथौरागढ़ जिले का माल्पा गांव भूस्खलन के चलते पूरी तरह से उजड़ गया था। इस हादसे में 255 लोगों की मौत हुई थी जिनमें कैलाश मानसरोवर जाने वाले 55 से ज्यादा श्रद्धालु थे। चमोली जिले में रिएक्टर स्केल पर 6.8 की तीव्रता वाले भूकंप के चलते 100 से अधिक लोगों को जान गंवानी पड़ी थी। इससे सटे हुए जिले रुद्रप्रयाग में भी भारी नुकसान हुआ था और अनेक घरों, सड़कों तथा जमीनों में दरारें आई थीं। Uttarkashi Tunnel Collapse</p>
<p style="text-align:justify;">सुरंग में फंसे श्रमिकों को सकुशल बाहर निकालने के लिए युद्धस्तर पर प्रयास जारी हैं। और उम्मीद है कि सभी श्रमिक सकुशल बाहर निकलेंगे। बता दें कि इस तरह की घटना कहीं भी घटती है तो बचाव कार्य में समय लगता है। इससे पहले 2018 में थाईलैंड में इस तरह की एक घटना हुई थी। इस दौरान थाईलैंड में फुटबॉल टीम के 12 बच्चे और एक कोच था। इसके बाद सभी को 18 दिन बाद जाकर लोगों को टनल से निकाला गया था।</p>
<h3>परिणाम ऐसी ही त्रासदियों एवं हादसों के रूप में सामने आ रहे हैं</h3>
<p style="text-align:justify;">बीते कई सालों में सरकारों द्वारा नयी सड़कें या उनका चौड़ीकरण, पुल, सुरंग आदि का निर्माण बड़े पैमाने पर हो रहा है। इसके लिये होने वाले विस्फोटों व मशीनों के कारण भी पहाड़ों को भारी नुकसान होता है। इससे जलवायु में भी परिवर्तन हो रहा है। अब तो पहाड़ों के ऋ तु चक्र में तक बदलाव दर्ज हो रहे हैं। ऊपरी इलाकों में स्थित ग्लेशियरों के पिघलने के कारण इन पहाड़ों से निकलने वाली नदियों का जल स्तर बढ़ने तथा भूगर्भीय जल के कारण सतह के ऊपर बड़ी टूट-फूट हो रही है। नये-नये निर्माण कार्यों के परिणाम ऐसी ही त्रासदियों एवं हादसों के रूप में सामने आ रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">न केवल उत्तराखंड बल्कि दूसरे पहाड़ी राज्यों में बीते वर्षों में सडक निर्माण या जलविद्युत परियोजना से जुड़ी सुरंगों के धंसने के कई हादसे हुए हैं। 2013 की केदारनाथ त्रासदी की भयावहता की कल्पना करते ही सिहरन हो उठती है। यह हाल के वर्षों में उत्तराखंड की सर्वाधिक बड़ी त्रासदी मानी जाती है जिसमें पता नहीं कितने लोगों की मौत हो गई थी। आज तक यह ठीक-ठीक नहीं बताया जा सका है कि कितने लोग मारे गये।</p>
<p style="text-align:justify;">विकास की आवश्यकता से कोई इंकार नहीं कर सकता लेकिन इन त्रासदियों एवं हादसों को देखते हुए नियंत्रित व वैज्ञानिक तरीके से निर्माण किये जाने चाहिये। दोनों पहाड़ी राज्यों हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में तबाही के मंजर को हम प्राकृतिक आपदा का नाम भले ही देते हों लेकिन प्रकृति के मूल स्वरूप से छेड़छाड़ करने की मानवीय प्रवृत्ति ही ऐसे हादसों को न्योता देती है, यह सबको समझना होगा। Uttarkashi Tunnel Collapse</p>
<p style="text-align:right;"><strong>आशीष वशिष्ठ, वरिष्ठ लेखक एवं स्वतंत्र टिप्पणीकार</strong></p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="FD Scheme: बैंक ग्राहकों के लिए खुशखबरी, भारतीय स्टेट बैंक की इस स्कीम में डबल हो जाएंगे आपके पैसे" href="http://10.0.0.122:1245/good-news-for-bank-customers-your-money-will-be-doubled-in-this-scheme-of-state-bank-of-india/">FD Scheme: बैंक ग्राहकों के लिए खुशखबरी, भारतीय स्टेट बैंक की इस स्कीम में डबल हो जाएंगे आपके पैसे</a></p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>लेख</category>
                                            <category>विचार</category>
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                <pubDate>Mon, 20 Nov 2023 13:15:07 +0530</pubDate>
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                <title>Uttarakhand Tunnel Rescue: मुसीबत में मजदूर, बचावकर्मी मजबूर! सुरंग हादसे में 7वें दिन भी नई ड्रिलिंग मशीन का इंतजार!</title>
                                    <description><![CDATA[Uttarakhand Tunnel Rescue : देहरादून। उत्तराखंड सुरंग हादसे में दर्जनों मजदूर करीब 7वें दिन भी फंसे हुए हैं और उन्हें बचाने के भरसक प्रयास नाकामी लग रहे हंै। कल शाम अचानक ‘खटखटाने की आवाज’ सुनने के बाद बचाव अभियान अचानक रोकना पड़ा क्योंकि ड्रिलिंग मशीन में खराबी आ गई थी। अधिकारियों ने कहा है कि […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttarakhand/workers-in-trouble-rescue-workers-forced/article-54952"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-11/uttarkashi-tunnel.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Uttarakhand Tunnel Rescue : <strong>देहरादून।</strong> उत्तराखंड सुरंग हादसे में दर्जनों मजदूर करीब 7वें दिन भी फंसे हुए हैं और उन्हें बचाने के भरसक प्रयास नाकामी लग रहे हंै। कल शाम अचानक ‘खटखटाने की आवाज’ सुनने के बाद बचाव अभियान अचानक रोकना पड़ा क्योंकि ड्रिलिंग मशीन में खराबी आ गई थी। अधिकारियों ने कहा है कि दुर्घटनास्थल पर दूसरा भारी ड्रिल विमान से भेजा जाएगा और सुबह 10 बजे तक परिचालन फिर से शुरू होने की संभावना जताई। Uttarkashi Tunnel Collapse</p>
<p style="text-align:justify;">उल्लेखनीय है कि सुरंग का एक हिस्सा धंसने के बाद रविवार सुबह से ही 40 मजदूर उसमें फंसे हुए हैं। अधिकारियों ने कहा कि सभी मजदूर सुरक्षित हैं और उन्हें छेद में ड्रिल किए गए स्टील पाइप के माध्यम से भोजन और पानी की आपूर्ति की जा रही है। फंसे हुए श्रमिकों के परिवार दुर्घटनास्थल पर पहुंचे हुए हैं और बचाव राहत कार्य को देखते हुए उम्मीद खोते जा रहे हैं। एक मजदूर के भाई ने अपील की है कि मजदूरों की तबीयत खराब होने से पहले उन्हें जल्दी से बचाया जाना चाहिए। Uttarakhand</p>
<h3>हादसा 12 नवंबर को निमार्णाधीन सुरंग का एक हिस्सा ढह जाने से हुआ था</h3>
<p style="text-align:justify;">वहीं डॉक्टरों की टीम ने फंसे हुए श्रमिकों के लिए व्यापक पुनर्वास की आवश्यकता पर भी जोर दिया है, उन्हें डर है कि लंबे समय तक सुरंग में फंसा होने से मानसिक और शारीरिक दोनों तरह की पुनर्प्राप्ति प्रक्रियाओं की आवश्यकता हो सकती है। हादसा 12 नवंबर को निमार्णाधीन सिल्क्यारा सुरंग का एक हिस्सा ढह जाने से हुआ था, जिससे 40 श्रमिक मलबे में फंस गए। ड्रिलिंग के दौरान मलबा गिरने से उन तक पहुंचने के प्रयास धीमे हो गए क्योंकि बचाव दल लोगों को सुरक्षित रूप से रेंगने के लिए पाइप के माध्यम से धक्का देने के लिए जगह बनाने की कोशिश कर रहे थे। Uttarkashi Tunnel Collapse</p>
<blockquote class="twitter-tweet">
<p lang="en" dir="ltr" xml:lang="en"><a href="https://twitter.com/hashtag/WATCH?src=hash&amp;ref_src=twsrc%5Etfw">#WATCH</a> | Uttarakhand: Uttarkashi tunnel rescue | Morning visuals from the spot; relief and rescue work halted at Silkyara Tunnel</p>
<p>Speaking to ANI Anshu Manish Khulko, Director of the tunnel-making company NHIDCL, said that at present the drilling work in the tunnel has stopped.… <a href="https://t.co/ZhNAsdAtRX">pic.twitter.com/ZhNAsdAtRX</a></p>
<p>— ANI (@ANI) <a href="https://twitter.com/ANI/status/1725703970193392109?ref_src=twsrc%5Etfw">November 18, 2023</a></p></blockquote>
<p></p>
<p style="text-align:justify;">शुक्रवार शाम को बचाव राहत कार्य के दौरान बड़े पैमाने पर दरार की आवाज सुनाई देने के बाद ड्रिलिंग कार्य रोक दिया गया। बाद में पता चला कि जो ड्रिल मशीन मंगाई गई थी वो भी खराब हो गई है। वायु सेना ने सी-130 हरक्यूलिस सैन्य विमान द्वारा इंदौर से दूसरी ड्रिलिंग मशीन भेजी है और वो जल्द ही बचाव कार्य स्थल पर पहुंच जाएगा और राहत कार्य फिर से शुरू होने की संभावना जताई गई है। Uttarkashi Tunnel Collapse</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="India vs Australia Final: मैच में ट्विस्ट, बारिश डाल सकती है खलल? तो कौन बनेगा विश्व विजेता? जानें ये रोमांचक समीकरण!" href="http://10.0.0.122:1245/twist-in-the-match-can-rain-cause-disruption-so-who-will-become-the-world-champion-know-this-exciting-equation/">India vs Australia Final: मैच में ट्विस्ट, बारिश डाल सकती है खलल? तो कौन बनेगा विश्व विजेता? जानें य…</a></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>उत्तराखण्ड</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 18 Nov 2023 12:24:21 +0530</pubDate>
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                <title>Uttarkashi Tunnel Collapse: क्या होगा टनल में फंसे 40 मजदूरों का? बचाव कार्य में तेजी!</title>
                                    <description><![CDATA[Uttarkashi Tunnel Collapse : उत्तरकाशी। जिले में ब्रह्मखाल-यमुनोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग पर सिल्क्यारा और डंडालगांव के बीच एक निमार्णाधीन सुरंग का एक हिस्सा ढहने से 40 मजदूरों के फंस जाने के बाद सुरक्षा बलों के जवानों ने बचाव कार्य में तेजी ला दी है। आज बचाव कार्य का पांचवा दिन है। Uttarakhand News एक रिपोर्ट के […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttarakhand/what-will-happen-to-the-40-laborers-trapped-in-the-tunnel-rescue-efforts-speed-up/article-54868"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-11/uttarkashi-tanal.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>Uttarkashi Tunnel Collapse : उत्तरकाशी।</strong> जिले में ब्रह्मखाल-यमुनोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग पर सिल्क्यारा और डंडालगांव के बीच एक निमार्णाधीन सुरंग का एक हिस्सा ढहने से 40 मजदूरों के फंस जाने के बाद सुरक्षा बलों के जवानों ने बचाव कार्य में तेजी ला दी है। आज बचाव कार्य का पांचवा दिन है। Uttarakhand News</p>
<p style="text-align:justify;">एक रिपोर्ट के अनुसार, उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले की सिल्कयारा सुरंग में फंसे 40 मजदूरों को बचाने के प्रयास गुरुवार को तेज कर दिए गए, जिसके लिए दिल्ली से मंगाई गई एक नई भारी ड्रिलिंग मशीन लगाई गई है। एक अन्य रिपोर्ट के मुताबिक, राहत एवं बचाव अभियान की देखरेख कर रहे कर्नल दीपक पाटिल ने कहा कि अमेरिका में बनी ‘जैक एंड पुश अर्थ ऑगर’ मशीन काफी उन्नत किस्म की मशीन है। इस अमेरिकी ‘बरमा’ मशीन की प्रवेश दर 4-5 मीटर प्रति घंटा है।</p>
<h3>फंसे हुए लोग स्वस्थ और ठीक हैं, उन्हें जल्द ही बचा लिया जाएगा</h3>
<p style="text-align:justify;">उल्लेखनीय है कि महत्वाकांक्षी चार धाम ऑल वेदर रोड परियोजना की सुरंग का एक हिस्सा रविवार को ढह गया। नवयुग इंजीनियरिंग कंपनी लिमिटेड के जनसंपर्क अधिकारी (पीआरओ) जीएल नाथ ने कहा कि अंदर फंसे मजदूरों को जल्द ही बचा लिया जाएगा। कंपनी राष्ट्रीय राजमार्ग और बुनियादी ढांचा विकास निगम लिमिटेड (एनएचआईडीसीएल) की देखरेख में सिल्कयारा से बरकोट तक सुरंग के निर्माण के लिए जिम्मेदार है। जीएल नाथ ने कहा कि भारी ड्रिलिंग मशीन मंगाई गई है जिससे बचाव अभियान फिर से तेजी से शुरू होगा। फंसे हुए लोग स्वस्थ और ठीक हैं, और उन्हें जल्द ही बचा लिया जाएगा। उन्होंने आगे कहा कि हर आधे घंटे में उन्हें खाना मुहैया कराने के लिए पाइप का इस्तेमाल किया जा रहा है। Uttarakhand News</p>
<h3>भारी ड्रिलिंग मशीन को तीन आईएएफ विमानों द्वारा दिल्ली से एयरलिफ्ट किया गया</h3>
<p style="text-align:justify;">पहले इस्तेमाल किए जा रहे ‘‘असफल’’ उपकरण को बदलने के लिए भारी ड्रिलिंग मशीन को बुधवार को तीन आईएएफ परिवहन विमानों द्वारा दिल्ली से एयरलिफ्ट किया गया था। एक रिपोर्ट के मुताबिक, सुरंग के अंदर मलबे के माध्यम से छेद करने के लिए ‘अमेरिकन ऑगर’ मशीन का उपयोग करने और स्टील पाइप के 800 मिमी और 900 मिमी व्यास वाले खंड डालने की योजना है, जिसके माध्यम से फंसे हुए श्रमिक बाहर निकल सकें। यह भी कहा गया कि पहली मशीन बहुत धीमी थी, जिससे तकनीकी समस्याएँ विकसित हुई। इसके अलावा, मंगलवार को सुरंग के अंदर मलबा गिरने से मशीन भी क्षतिग्रस्त हो गई और दो बचावकर्मी घायल हो गए। नई मशीन फंसे हुए मजदूरों के लिए बाहर निकलने का रास्ता तैयार करने की प्रक्रिया को तेज कर देगी। Uttarakhand News</p>
<blockquote class="twitter-tweet">
<p lang="en" dir="ltr" xml:lang="en">VIDEO | Uttarkarshi tunnel collapse: Efforts underway to rescue 40 workers trapped in an under-construction tunnel that collapsed four days back. <a href="https://t.co/w7PspPysjz">pic.twitter.com/w7PspPysjz</a></p>
<p>— Press Trust of India (@PTI_News) <a href="https://twitter.com/PTI_News/status/1724980610542841920?ref_src=twsrc%5Etfw">November 16, 2023</a></p></blockquote>
<p></p>
<p style="text-align:justify;">अधिकारियों ने बताया कि मजदूर सुरक्षित हैं और उन्हें पाइप के जरिए आॅक्सीजन, दवाएं, खाद्य सामग्री और पानी की आपूर्ति की जा रही है। आपातकालीन परिचालन केंद्र द्वारा जारी फंसे हुए श्रमिकों की सूची के अनुसार, 15 झारखंड से, 8 उत्तर प्रदेश, 5 ओडिशा, 4 बिहार, 3 पश्चिम बंगाल से, 2-2 उत्तराखंड और असम से तथा एक हिमाचल प्रदेश से है। Uttarakhand News</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="Cricket World Cup: साजिश? आखिरी मिनट में बदली गई थी पिच! आईसीसी ने किया ये बड़ा खुलासा!" href="http://10.0.0.122:1245/conspiracy-the-pitch-was-changed-at-the-last-minute-icc-made-this-big-disclosure/">Cricket World Cup: साजिश? आखिरी मिनट में बदली गई थी पिच! आईसीसी ने किया ये बड़ा खुलासा!</a></p>
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                                                            <category>राज्य</category>
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                <pubDate>Thu, 16 Nov 2023 15:16:06 +0530</pubDate>
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