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                <title>Onion Price - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>Onion Price Inflation History: प्याज की कीमतों का 50 साल का सफर, जब महंगाई ने सरकारों को भी हिला दिया</title>
                                    <description><![CDATA[भारतीय रसोई में प्याज सिर्फ एक सब्जी नहीं, बल्कि रोजमर्रा के खाने का अहम हिस्सा है। सब्जी का स्वाद बढ़ाने से लेकर सलाद और चटनी तक...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/delhi/50-year-journey-of-onion-prices-when-inflation-shook-even/article-90229"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-08/onion-price-inflation-history.jpeg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली। </strong>Onion Price Inflation History: भारतीय रसोई में प्याज सिर्फ एक सब्जी नहीं, बल्कि रोजमर्रा के खाने का अहम हिस्सा है। सब्जी का स्वाद बढ़ाने से लेकर सलाद और चटनी तक, प्याज की मौजूदगी आम है। लेकिन जब इसके दाम अचानक बढ़ते हैं तो इसका असर सीधे आम आदमी की रसोई और घरेलू बजट पर दिखाई देता है। यही वजह है कि प्याज को अक्सर 'राजनीति की सबसे तीखी सब्जी' भी कहा जाता है। आज प्याज की कीमत कई जगहों पर 60 से 70 रुपये प्रति किलो तक पहुंच जाती है, जबकि करीब पांच दशक पहले यही प्याज 1-2 रुपये किलो के आसपास मिलता था। इन वर्षों में प्याज की कीमतों ने कई बार ऐसी करवट ली कि महंगाई का मुद्दा सड़क से लेकर संसद और चुनावी मैदान तक पहुंच गया।</p>
<h4 style="text-align:justify;">1980 में प्याज बना बड़ा चुनावी मुद्दा</h4>
<p style="text-align:justify;">भारत में प्याज की कीमत और राजनीति के रिश्ते की सबसे चर्चित घटनाओं में साल 1980 का नाम आता है। उस दौर में प्याज की कीमतों में तेज उछाल आया था। तत्कालीन विपक्षी नेता इंदिरा गांधी ने प्याज की महंगाई को जनता के बीच बड़ा मुद्दा बनाया। चुनावी प्रचार के दौरान प्याज की कीमतों को लेकर सरकार पर निशाना साधा गया और इसे आम आदमी की परेशानी से जोड़कर पेश किया गया। चुनाव परिणाम में इंदिरा गांधी की सत्ता में वापसी हुई और प्याज को लेकर यह धारणा मजबूत हुई कि इसकी कीमतें राजनीतिक रूप से भी बेहद संवेदनशील हैं।</p>
<h4 style="text-align:justify;">1998 में फिर बढ़े प्याज के दाम</h4>
<p style="text-align:justify;">करीब 18 साल बाद 1998 में प्याज ने एक बार फिर राजनीति में हलचल मचा दी। उस समय दिल्ली समेत कई जगहों पर प्याज की कीमतों में भारी उछाल आया। दिल्ली में इसके दाम करीब 60 रुपये प्रति किलो तक पहुंचने की खबरों ने आम लोगों की परेशानी बढ़ा दी। प्याज की बढ़ती कीमतों को लेकर जनता में नाराजगी देखने को मिली और विपक्ष ने इसे तत्कालीन सरकार के खिलाफ बड़ा मुद्दा बनाया। दिल्ली विधानसभा चुनाव में भी महंगाई और प्याज की कीमतें प्रमुख मुद्दों में शामिल रहीं। इसके बाद दिल्ली की राजनीति में सत्ता परिवर्तन हुआ।</p>
<h4 style="text-align:justify;">2010 और 2013 में भी महंगाई ने बढ़ाई चिंता</h4>
<p style="text-align:justify;">साल 2010 में भी प्याज की कीमतों में अचानक तेजी देखने को मिली। खराब मौसम और फसल को हुए नुकसान ने आपूर्ति को प्रभावित किया, जिससे बाजार में कीमतें बढ़ गईं। इसके बाद 2013 में प्याज के साथ-साथ टमाटर और आलू जैसी जरूरी सब्जियों के दाम भी तेजी से बढ़े। सब्जियों की महंगाई ने आम परिवारों के मासिक बजट पर दबाव बढ़ाया और खाद्य महंगाई देश की आर्थिक चर्चा का बड़ा मुद्दा बन गई।</p>
<h4 style="text-align:justify;">2019 में 100 रुपये किलो के पार पहुंचा प्याज</h4>
<p style="text-align:justify;">साल 2019 के अंत में प्याज की कीमतों ने एक बार फिर लोगों को परेशान कर दिया। भारी बारिश के कारण कई राज्यों में प्याज की फसल प्रभावित हुई। उत्पादन और बाजार में आपूर्ति घटने से कई शहरों में प्याज के दाम 100 रुपये प्रति किलो से भी ऊपर पहुंच गए। हालात को देखते हुए सरकार को आपूर्ति बढ़ाने के लिए कई कदम उठाने पड़े। प्याज के आयात को बढ़ावा देने के साथ-साथ जमाखोरी रोकने और बाजार में उपलब्धता सुधारने के प्रयास किए गए।</p>
<h4 style="text-align:justify;">2024 में भी कीमतों ने दिखाया असर</h4>
<p style="text-align:justify;">प्याज की कीमतों में तेजी का सिलसिला इसके बाद भी पूरी तरह नहीं रुका। 2024 में कई इलाकों में प्याज के दाम 80 से 100 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गए। खराब मौसम, बारिश, फसल उत्पादन में उतार-चढ़ाव और मंडियों तक आपूर्ति में देरी जैसे कारणों ने कीमतों पर असर डाला। प्याज की कीमतों में थोड़ी सी भी तेजी का असर सिर्फ रसोई तक सीमित नहीं रहता। चूंकि यह भारतीय भोजन का एक जरूरी हिस्सा है, इसलिए इसकी कीमत बढ़ने पर घरेलू खर्च के साथ खाद्य महंगाई पर भी असर पड़ता है।</p>
<h4 style="text-align:justify;">आखिर प्याज की कीमत इतनी तेजी से क्यों बढ़ती है?</h4>
<p style="text-align:justify;">प्याज के दाम में अचानक उछाल के पीछे कई कारण होते हैं। इनमें मौसम, बारिश, सूखा, फसल उत्पादन, भंडारण की क्षमता, मंडियों तक परिवहन, मांग और आपूर्ति प्रमुख हैं। प्याज की खेती में मौसम का खास महत्व है। यदि भारी बारिश से फसल खराब हो जाए या उत्पादन प्रभावित हो जाए तो बाजार में उपलब्धता घट जाती है। मांग सामान्य रहने के बावजूद आपूर्ति कम होने पर कीमत तेजी से ऊपर जा सकती है। इसके अलावा प्याज को लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए बेहतर भंडारण व्यवस्था भी जरूरी है। भंडारण में नुकसान होने पर बाजार में उपलब्ध प्याज की मात्रा और कम हो जाती है।</p>
<h4 style="text-align:justify;">50 साल में कई गुना बढ़ी कीमत</h4>
<p style="text-align:justify;">करीब पांच दशक पहले प्याज 1-2 रुपये प्रति किलो के आसपास मिल जाता था। आज सामान्य परिस्थितियों में भी इसकी कीमत कई गुना अधिक है और मौसम या आपूर्ति से जुड़ी समस्या आते ही दाम 60-70 रुपये या उससे भी ऊपर पहुंच सकते हैं। हालांकि पांच दशक में सिर्फ प्याज की कीमत ही नहीं बढ़ी है। महंगाई, खेती की लागत, मजदूरी, खाद-बीज, परिवहन और भंडारण खर्च भी कई गुना बढ़े हैं। इसलिए केवल पुराने और आज के दामों की तुलना करके वास्तविक महंगाई का पूरा असर समझना सही नहीं होगा।</p>
<h4 style="text-align:justify;">प्याज सिर्फ रसोई नहीं, राजनीति का भी तापमान बढ़ाता है</h4>
<p style="text-align:justify;">भारत में प्याज की कीमतों का इतिहास बताता है कि यह सब्जी आम आदमी की जेब पर सीधा असर डालने के साथ राजनीतिक रूप से भी बेहद संवेदनशील रही है। 1980, 1998, 2010, 2013 और 2019 जैसे दौर में प्याज की कीमतों ने देश में महंगाई की बहस को तेज किया। यही कारण है कि सरकारें भी प्याज की कीमतों में अचानक उछाल को लेकर सतर्क रहती हैं और जरूरत पड़ने पर आयात, निर्यात नियंत्रण,</p>
<p style="text-align:justify;">बफर स्टॉक और बाजार में सरकारी बिक्री जैसे कदम उठाती हैं। पांच दशक का प्याज का सफर यही बताता है कि भारतीय रसोई में भले ही यह एक आम सब्जी हो, लेकिन इसकी कीमत बढ़ते ही इसका असर आम आदमी की थाली से लेकर देश की राजनीति तक दिखाई देने लगता है।</p>
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Onion Price Inflation History: प्याज की कीमतों का 50 साल का सफर, जब महंगाई ने सरकारों को भी हिला दिया
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                                            <category>राज्य</category>
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                <pubDate>Wed, 26 Aug 2026 15:06:00 +0530</pubDate>
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