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                <title>Flight of Spirits - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>IAS Dr. Aparna: आईएएस डॉ. अपर्णा ने बताई अपनी आईएएस बनने की सच्ची कहानी</title>
                                    <description><![CDATA[IAS Dr. Aparna: बीकानेर (सच कहूँ न्यूज)। स्वामी केशवानंद राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय में अलख फाउंडेशन के सहयोग से मेंटल हेल्थ जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। छात्र कल्याण निदेशालय की ओर से विद्या मंडप सभागार में आयोजित हुए कार्यक्रम की मुख्य अतिथि यूआईटी सचिव डॉ अपर्णा गुप्ता थी। विशिष्ट अतिथि अलख फाउंडेशन की सचिव श्रीमती […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/rajasthan/ias-dr-aparna-told-the-true-story-of-her-becoming-an-ias/article-63362"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2024-10/dr-aprna.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">IAS Dr. Aparna: बीकानेर (सच कहूँ न्यूज)। स्वामी केशवानंद राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय में अलख फाउंडेशन के सहयोग से मेंटल हेल्थ जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। छात्र कल्याण निदेशालय की ओर से विद्या मंडप सभागार में आयोजित हुए कार्यक्रम की मुख्य अतिथि यूआईटी सचिव डॉ अपर्णा गुप्ता थी। विशिष्ट अतिथि अलख फाउंडेशन की सचिव श्रीमती रानु पाराशर, डॉ ऋतु जैन और साइकोलॉजिस्ट डॉ खुशबू सुथार थीं। कार्यक्रम की अध्यक्षता कुलपति डॉ अरूण कुमार ने की। IAS Dr. Aparna</p>
<p style="text-align:justify;">मुख्य अतिथि डॉ गुप्ता ने कहा कि जीवन में कभी हताश ना हों। मैं खुद चौथे प्रयास में आईएएस बनी। साथ ही कहा कि अगर आपके परिवार या आसपास लगे कि किसी को मदद की जरूरत है और वो आगे नहीं बढ़ पा रहा है तो आप एक कदम उसकी ओर बढ़ाइए। हो सकता है आप किसी की जान बचा पाएं। श्रीमती गुप्ता ने कहा कि विद्यार्थी अपने इनर सर्कल के चार-पांच लोगों का आपस में ध्यान रखें। हॉस्टल में कभी कोई मैस में खाना खाने नहीं आ रहा तो उनके परिजन को बताएं या खुद बात करें। डेंगू, मलेरिया को लेकर जिस तरह हम डॉक्टर्स के पास जाते हैं। एंजाइटी, डिप्रेशन के मामले में भी हम उसी तरह डॉक्टर से संपर्क करें। इसमें शर्म की कोई बात नहीं है।</p>
<h3>स्वामी केशवानंद राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय में मेंटल हेल्थ पर जागरूकता</h3>
<p style="text-align:justify;">उन्होने कहा कि अलख फाउंडेशन मेंटल हेल्थ को लेकर अच्छा कार्य कर रहा है। अध्यक्षीय उद्बोधन देते हुए कुलपति अरूण कुमार ने कहा कि समस्याएं सबके जीवन में आती हैं लेकिन हमें कभी हार नहीं माननी हैं। अगर कभी हम फेल भी होते हैं तो अगली बार दुगुनी शक्ति और मेहनत से टार्गेट हासिल करें। साथ ही कहा कि हो सकता है कि कई बार माता पिता अपने बच्चों पर ध्यान नहीं दे पाते हों। ऐसे में विद्यार्थी एक दूसरे का सहयोग करें। इससे छोटी छोटी समस्याएं आसानी से हल हो जाती हैं। हम सब मिलकर नए राष्ट्र के निर्माण में अपना योगदान दें। मेंटल हेल्थ कार्यक्रम आयोजन को लेकर कुलपति ने फाउंडेशन का आभार जताया। IAS Dr. Aparna</p>
<p style="text-align:justify;">कुलसचिव डॉ देवाराम सैनी ने कहा कि कोटा में हम बच्चों की सुसाइड की घटनाएं सुनते हैं। इसको रोकने को लेकर प्रयास सरकार स्तर पर भी किए गए। कानून बने, कमेटियां भी बनी। ये प्रयास अपनी जगह है। प्रयास ये भी हों कि बच्चों के दिमाग में ऐसी बातें आए ही नहीं कि वो सुसाइड करने तक की सोच ले। मेंटल हेल्थ को लेकर अलख फाउंडेशन की ओर से जो कार्य किया जा रहा है ये महत्वपूर्ण है। विद्यार्थी अपने जीवन में पोजिटिव सोचें, हर चीज को पोजिटिवली देखें और पॉजिटिव रहकर कार्य करें। इससे पूर्व साइकोलॉजिस्ट डॉ खुशबू सुथार ने मानसिक स्वास्थ्य प्रबंधन को लेकर बताया कि सबसे पहले तो हम खुद से प्यार करें। हमें क्या पसंद है। उसके लिए दिन में कम से कम 15 मिनिट का समय निकालें। साथ ही कहा दिमाग का अच्छे से यूज करें। सोचें जरूर।</p>
<h3>ये सोचें कि हमें भविष्य में क्या बनना है</h3>
<p style="text-align:justify;">ये सोचें कि हमें भविष्य में क्या बनना है। क्या करना है। कैसे करना है। अगर कभी ओवरथिकिंग हो रही हो तो चीजों को कागज पर लिख लें। साथ ही बताया कि जीवन में सफल होने के लिए डिजायर और विचारों को एक ही दिशा में रखें। अलख फाउंडेशन की सचिव श्रीमती रानु पाराशर ने वीडियो के जरिए बताया कि युवा पीढ़ी में मेंटल हैल्थ जागरूकता की कितनी आवश्यकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">डॉ रितु जैन ने अलख फाउंडेशन की गतिविधियों की विस्तृत जानकारी दी। कार्यक्रम की शुरूआत भगवान श्री गणेश की वंदना से हुई। तत्पश्चात अतिथियां का बुके देकर स्वागत किया गया। स्वागत भाषण छात्र कल्याण निदेशक डॉ निर्मल सिंह दहिया ने देते हुए मेंटल हेल्थ जागरूकता को आज की युवा पीढ़ी के लिए अति आवश्यक बताया। मंच संचालन डॉ सुशील कुमार ने किया। कार्यक्रम में कृषि विश्वविद्यालय के सभी डीन, डायरेक्टर्स समेत कृषि महाविद्यालय बीकानेर, आईएबीएम और सामुदायिक विज्ञान महाविद्यालय के विद्यार्थी उपस्थित रहे। IAS Dr. Aparna</p>
<p><a title="Chief Justice Chandrachud: मुख्य न्यायाधीश चंद्रचूड़ ने चुना अपना उत्तराधिकारी, रखा इनका प्रस्ताव : रिपोर्ट" href="http://10.0.0.122:1245/chief-justice-chandrachud-chose-his-successor-proposed-this-report/">Chief Justice Chandrachud: मुख्य न्यायाधीश चंद्रचूड़ ने चुना अपना उत्तराधिकारी, रखा इनका प्रस्ताव : र…</a></p>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>सच कहूँ विशेष स्टोरी</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 17 Oct 2024 11:19:26 +0530</pubDate>
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                <title>Flight of Spirits: सिरसा की इस जांबाज छोरी की बहादुरी भरी दास्ताँ! ऐसे हो रही ब्याँ!</title>
                                    <description><![CDATA[Flight of Spirits: ओढां, राजू। स्टैंड पर खड़े ऑटो रिक्शा में हाथ में किताब लिए सीट पर बैठी एक लड़की। सवारी आते ही वह अपनी किताब बैग में डालती है और फिर से ऑटो का स्टेयरिंग थाम लेती है, उसके लिए अब यह रूटीन बन चुका है। गुरप्रीत कौर ने उन विकट हालातों में स्टेयरिंग […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/the-brave-story-of-this-brave-girl-from-sirsa/article-57281"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2024-05/gurpreet-kaur.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>Flight of Spirits: ओढां, राजू।</strong> स्टैंड पर खड़े ऑटो रिक्शा में हाथ में किताब लिए सीट पर बैठी एक लड़की। सवारी आते ही वह अपनी किताब बैग में डालती है और फिर से ऑटो का स्टेयरिंग थाम लेती है, उसके लिए अब यह रूटीन बन चुका है। गुरप्रीत कौर ने उन विकट हालातों में स्टेयरिंग संभाला जब घर की परिस्थितियां बड़ी खराब थी। लेकिन गुरप्रीत कौर ने ऑटो के साथ-साथ घर की खुशहाली का पहिये को भी नई गति दी। वहीं खुद के सपने को साकार करने के लिए दूसरे हाथ में किताब थामे रहती है। यह बेटी उन लोगों के लिए प्रेरणास्त्रोत साबित हो रही हैं जो बेटियों को बोझ समझते हैं। Sirsa News</p>
<p style="text-align:justify;">दरअसल, सरसा जिला के गांव पक्का शहीदां निवासी 57 वर्षीय हंसराज पेशे से ऑटो चालक थे। परिवार में उनकी पत्नी, 2 बेटियां व एक बेटे सहित कुल 5 सदस्य हैं। ऑटो से ही परिवार की आजीविका चलती थी। करीब 3 वर्ष पूर्व हंसराज ऐसे बीमार हुए कि उसका रोजगार छिन गया। घर खर्च और ऊपर से ऑटो की किश्त। हंसराज को पत्नी ने ऑटो बेचने की सलाह दी, लेकिन ऑटो में उसकी जान बसती थी। अपने पिता के जज्बातों और घर के हालातों को समझते हुए हंसराज की छोटी बेटी 20 वर्षीय गुरप्रीत कौर ने ऑटो का स्टेयरिंग थामने का निश्चय कर लिया।</p>
<h3 style="text-align:justify;">पढ़ाई प्राथमिकता, लेकिन उससे भी जरूरी है आजीविका | Sirsa News</h3>
<p style="text-align:justify;">भले ही परिस्थितियों ने गुरप्रीत को ऑटो की ड्राइविंग सीट पर बिठा दिया लेकिन उसने अपने सपनों को कभी टूटने नहीं दिया। वह पढ़ाई भी बदस्तूर जारी रखे हुए है। मंडी कालांवाली से उसके गांव की दूरी 13 किलोमीटर है। यातायात की सुविधा न होने के चलते लोग अकसर मंडी में आने-जाने के लिए ऑटो पर ही निर्भर हैं। गुरप्रीत सुबह ही ऑटो लेकर गांव के बस स्टैंड पर पहुंच जाती है। जहां से सवारियों को मंडी में छोड़कर गांव तारुआना में स्थित कॉलेज में पढ़ने चली जाती है। कॉलेज से फ्री होकर गुरप्रीत फिर से ऑटो लेकर स्टैंड पर पहुंच जाती है। वह दिनभर में करीब 3 चक्कर लगाती है। जिसके माध्यम से वह 400-500 रुपये प्रति दिन कमा लेती है, जिससे उसकी पढ़ाई व परिवार का खर्च निकलता है। गुरप्रीत वर्तमान में बी.ए फाइनल की छात्रा है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">लोगों के टोंट, सहेलियों की रोक-टोक को किया दरकिनार</h3>
<p style="text-align:justify;">गुरप्रीत ने जब ऑटो चलाने लगी तो लोगों ने हंसराज को टोकते हुए कहा कि ऑटो चलाना कोई मजाक नहीं है। लोगों ने दुर्घटना का डर भी दिखाया, उसकी सहेलियों ने भी टोका, लेकिन एक पिता ने अपनी बेटी पर विश्वास जताया और उधर जब गुरप्रीत पहली बार ऑटो लेकर कालांवाली के लिए निकली तो बड़ी चर्चा हुई।</p>
<h3 style="text-align:justify;">मेरा सपना भी एक दिन अवश्य पूरा होगा: गुरप्रीत कौर</h3>
<p style="text-align:justify;">गुरप्रीत सरकारी नौकरी के लिए खूब मेहनत कर रही है। उसने पंजाब पुलिस में भर्ती के लिए फार्म भरा हुआ है। जिसकी परीक्षा के लिए वह तैयारी कर रही है। उसकी बड़ी बहन भी बी.ए फाइनल में है। बातचीत दौरान गुरप्रीत का दिल भर आया, उसने कहा कि सपने तो सबके होते हैं। मेरे सपना भी एक दिन अवश्य पूरा होगा। मैं अभिभावकों से यह कहना चाहती हूं कि बेटियों को बेटों से कम न आंके। अपनी बेटियों को मजबूत बनाएं और सपनों को पूरा करने की आजादी भी दें।</p>
<h3 style="text-align:justify;">चुका दिया कर्ज व ऑटो की किश्त | Sirsa News</h3>
<p style="text-align:justify;">हंसराज ने ऑटो फाइनेंस पर लिया था, जिसकी किश्त 10 हजार रुपये प्रतिमाह थी। लेकिन उसके बीमार होने के बाद ऑटो का 60 हजार का कर्ज व 30 हजार की उधारी चढ़ गई, जो परिवार के लिए किसी दुश्वारी से कम नहीं था। फाइनेंस कंपनी ऑटो उठाने की बात कहने लगी। ऐसे में गुरप्रीत कौर ने ऑटो चलाकर न केवल अपने परिवार का खर्च चलाया, बल्कि ऑटो की किश्त व उधारी भी उतार दी। गुरप्रीत पिछले 2 वर्ष से ऑटो चला रही है। हलांकि ड्राइविंग क्षेत्र में कई तरह के लोग मिलते हैं। कई बार तो दूर-दराज क्षेत्र में भी जाना पड़ता है, कभी-कभी घर लौटने में देर रात्रि भी हो जाती है। गुरप्रीत का कहना है कि अगर हिम्मत-हौसला हो तो फिर डर कैसा। उसने बताया कि वह मोबाइल लोकेशन लगाकर दूर-दराज क्षेत्रों तक चली जाती है। Sirsa News</p>
<p><a title="Allahabad High Court: 5 वर्षीय बच्चे का कमाल! स्कूल के पास खुला शराब का ठेका बंद करवाया!" href="http://10.0.0.122:1245/5-year-old-child-got-the-liquor-shop-opened-near-the-school-closed/">Allahabad High Court: 5 वर्षीय बच्चे का कमाल! स्कूल के पास खुला शराब का ठेका बंद करवाया!</a></p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>हरियाणा</category>
                                            <category>सच कहूँ विशेष स्टोरी</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 09 May 2024 10:26:57 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>हार हो जाती है, जब मान लिया जाता है, जीत तब होती है, जब ठान लिया जाता है&amp;#8217;</title>
                                    <description><![CDATA[हार हो जाती है, जब मान लिया जाता है, जीत तब होती है, जब ठान लिया जाता है।’ मशहूर शायर शकील आजमी की ये पंक्तियां डॉ. गणेश बरैया पर सटीक बैठती हैं। अपनी लंबाई के कारण वह अपने सपनों को पूरा नहीं कर पा रहे थे, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और आखिरकार अपना सपना […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/although-his-stature-was-small-his-intentions-were-very-big/article-55439"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2024-03/article-hindi.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">हार हो जाती है, जब मान लिया जाता है, जीत तब होती है, जब ठान लिया जाता है।’ मशहूर शायर शकील आजमी की ये पंक्तियां डॉ. गणेश बरैया पर सटीक बैठती हैं। अपनी लंबाई के कारण वह अपने सपनों को पूरा नहीं कर पा रहे थे, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और आखिरकार अपना सपना पूरा कर लिया। गुजरात के रहने वाले 23 साल के डॉ. गणेश बरैया की लंबाई 3 फीट है, जिसके कारण कुछ साल पहले मेडिकल काउंसिल आॅफ इंडिया ने उन्हें एमबीबीएस करने से रोक दिया था। Successful Story</p>
<p style="text-align:justify;">हालांकि, डॉ. बरैया इस निर्णय से विचलित नहीं हुए, बल्कि उन्होंने अपने स्कूल के प्रिंसिपल की मदद ली और पहले जिला कलेक्टर, फिर राज्य के शिक्षा मंत्री और यहां तक कि गुजरात उच्च न्यायालय भी गए। डॉ. बरैया ने एमसीआई के फैसले के खिलाफ गुजरात हाईकोर्ट में याचिका दायर की। यहां उनकी हार हुई, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। वह सुप्रीम कोर्ट पहुंचे, जहां 2018 में उन्हें जीत मिली। सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने एमसीआई के आदेश को पलट दिया। इस तरह डॉ. बरैया ने 2019 में एमबीबीएस में प्रवेश लिया। एमबीबीएस पूरा करने के बाद वह अब भावनगर के सरकारी अस्पताल में प्रशिक्षु के रूप में काम कर रहे हैं।</p>
<h3>सुप्रीम कोर्ट ने फैसला दिया कि मैं एमबीबीएस में एडमिशन ले सकता हूं</h3>
<p style="text-align:justify;">डॉ. बरैया के मुताबिक, 12वीं कक्षा पास करने के बाद उन्होंने नीट की परीक्षा पास की। लेकिन मेडिकल काउंसिल आॅफ इंडिया ने उनका आवेदन खारिज कर दिया, क्योंकि उनकी लंबाई कम थी। मेडिकल काउंसिल आॅफ इंडिया ने कहा कि लंबाई कम होने के कारण वह आपातकालीन मामलों को संभाल नहीं पाएंगे। फिर उन्होंने इस बारे में अपने प्रिंसिपल डॉ. दलपत भाई कटारिया और रेवाशीष सवैर्या से बात की और उनसे पूछा कि हम इसमें क्या कर सकते हैं? प्रिंसिपल की सलाह मानकर उन्होंने भावनगर के कलेक्टर और गुजरात के शिक्षा मंत्री से मुलाकात की। फिर गुजरात हाई कोर्ट पहुंचे।</p>
<p style="text-align:justify;">एमबीबीएस के अपने सफर को लेकर बरैया ने बताया, ‘2018 में सुप्रीम कोर्ट ने फैसला दिया कि मैं एमबीबीएस में एडमिशन ले सकता हूं। चूंकि तब तक 2018 एमबीबीएस कोर्स में एडमिशन पूरा हो चुका था, इसलिए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मुझे 2019 में एमबीबीएस कोर्स में एडमिशन मिलेगा। इसके बाद मैंने भावनगर के सरकारी मेडिकल कॉलेज में एडमिशन लिया और मेरी एमबीबीएस यात्रा शुरू हुई।’</p>
<p style="text-align:justify;">हाइट की वजह से रोजाना की चुनौतियों पर बात करते हुए डॉ. बरैया ने बताया कि शुरूआत में मरीजों ने मेरी हाइट को लेकर संकोच किया, लेकिन वक्त के साथ वे कंफर्टेबल हो गए और उन्होंने मुझे डॉक्टर के तौर पर स्वीकार कर लिया। उन्होंने कहा, जब भी मरीज मुझे देखते हैं तो पहले तो थोड़ा चौंक जाते हैं, लेकिन फिर मेरी बात मान लेते हैं और मैं भी उनके शुरूआती व्यवहार को स्वीकार कर लेता हूं। वे मेरे साथ सौहार्दपूर्ण और सकारात्मकता से पेश आते हैं। Successful Story</p>
<p><a title="Farmers Protest: किसानों ने दो घंटे तक फ्री कराया नगराना टोल" href="http://10.0.0.122:1245/farmers-made-nagarana-toll-free-for-two-hours/">Farmers Protest: किसानों ने दो घंटे तक फ्री कराया नगराना टोल</a></p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>शिक्षा और रोजगार</category>
                                            <category>संस्कृति एवं समाज</category>
                                            <category>सच कहूँ विशेष स्टोरी</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 17 Mar 2024 11:05:14 +0530</pubDate>
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                <title>Flight of Spirits: 5 रुपये की मजदूरी करने वाली आज है अमेरिकी सॉफ्टवेयर कंपनी की सीईओ!</title>
                                    <description><![CDATA[1970 में वारंगल जिले के एक गरीब परिवार में जन्मी ज्योति रेड्डी के परिवार की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी इसलिए उनकी मां ने उन्हें अनाथालय भेज दिया। यहां मेधावी ज्योति ने अपनी मेहनत से अनाथालय अधीक्षक का दिल जीत लिया और अधीक्षक ने उसे अपने घर में बर्तन धोने और साफ-सफाई के काम पर […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/the-person-earning-a-wage-of-rs-5-is-today-the-ceo-of-an-american-software-company/article-55413"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2024-03/software-company-ceo.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">1970 में वारंगल जिले के एक गरीब परिवार में जन्मी ज्योति रेड्डी के परिवार की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी इसलिए उनकी मां ने उन्हें अनाथालय भेज दिया। यहां मेधावी ज्योति ने अपनी मेहनत से अनाथालय अधीक्षक का दिल जीत लिया और अधीक्षक ने उसे अपने घर में बर्तन धोने और साफ-सफाई के काम पर लगा लिया। अनाथालय में काम करने के साथ-साथ ज्योति ने अपनी पढ़ाई भी की। दिन-रात मेहनत करके उन्होंने सरकारी स्कूल से 10वीं पास की और टाइपराइटिंग भी सीखी। Flight of Spirits</p>
<p style="text-align:justify;">कुछ साल बाद जब ज्योति अनाथालय से घर लौटी तो परिवार ने 16 साल की उम्र में उनकी जबरन शादी कर दी। 18 साल की उम्र में वह दो बेटियों की मां बन गई। शादी के बाद अपने परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारने और बच्चों का पेट भरने के लिए उन्होंने खेतों में मजदूरी करना शुरू कर दिया। खेतों में काम करने के बदले में उन्हें 5 रुपये की दैनिक मजदूरी मिलती थी। इतने कम पैसों में घर का खर्च चलाना संभव नहीं था। कई बार ज्योति को भूखा भी रहना पड़ता था इसलिए उन्होंने एक रुपये प्रति पेटीकोट की दर से सिलाई का काम शुरू किया। Key Software Solutions</p>
<h3>कुछ समय उन्हें बाथरूम क्लीनिंग तक का काम करना पड़ा</h3>
<p style="text-align:justify;">इसी दौरान ज्योति को केंद्र सरकार की एक योजना के तहत नेहरू युवा केंद्र से जुड़ने का मौका मिला। इस संस्थान से जुड़कर उन्होंने फिर से अपनी पढ़ाई शुरू की। 1992 में बीए की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्हें एक स्कूल में नौकरी मिल गई। बाद में उन्होंने अन्ना विश्वविद्यालय से बी.एड की डिग्री प्राप्त की और एक सरकारी शिक्षिका बन गई। साल 2000 में अमेरिका में रहने वाली उनकी एक रिश्तेदार गांव आई और उनसे बातचीत के बाद ज्योति ने बच्चियों की बेहतर परवरिश और विदेश में तरक्की की ज्यादा संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए अमेरिका जाने का निश्चय कर लिया।</p>
<p style="text-align:justify;">अमेरिका में उन्होंने शुरू में वीडियो शॉप में सेल्सगर्ल की नौकरी की और फिर सियामेरिका नामक कंपनी में रिक्रूटर की जॉब भी की। अमेरिका में नौकरी करते हुए उन्हें आईसीएसए नामक कंपनी से बेहतर पैकेज पर जॉब आॅफर मिला। लेकिन वर्किंग वीजा न होने के कारण उन्हें यह नौकरी छोड़नी पड़ी, तब कुछ समय उन्हें बाथरूम क्लीनिंग तक का काम करना पड़ा। वर्किंग वीजा पाने के लिए ज्योति मैक्सिको गई। लेकिन वहां भी वीजा पाने में कई तरह के पापड़ बेलने पड़े। इतना संघर्ष करने पर उन्हें वीजा लेने के लिए क्या-क्या पेपर चाहिए इसका ज्ञान हो गया था। तब उन्होंने अपनी कंसल्टेंसी फर्म खोलकर बिजनेस में हाथ आजमाने का सोचा। Flight of Spirits</p>
<p style="text-align:justify;">साल 2001 में उन्होंने 4000 डॉलर की बचत के साथ अमेरिका के फीनिक्स में अपनी खुद की कंसल्टेंसी फर्म खोली, जो उनकी कड़ी मेहनत के कारण अच्छा चलने लगी और फिर उन्होंने Key Software Solutions नाम से एक सॉफ्टवेयर कंपनी शुरू की, जो आज अमेरिका की बड़ी-बड़ी कंपनियों को आईटी सपोर्ट मुहैया कराती है और ज्योति खुद उस कंपनी की सीईओ है। Flight of Spirits</p>
<p><a title="King Cobra Snake Viral Video: देखकर, अचानक चिल्लाने लगे सारे घर के लोग?" href="http://10.0.0.122:1245/seeing-the-king-cobra-all-the-family-members-suddenly-started-screaming/">King Cobra Snake Viral Video: देखकर, अचानक चिल्लाने लगे सारे घर के लोग?</a></p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>विचार</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 16 Mar 2024 13:14:15 +0530</pubDate>
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