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                <title>First Rain On Earth - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>First Rain On Earth: भरोसा नहीं होगा, डायनासोरों की बादशाहत से पहले, 20 लाख साल तक लगातार हुई थी बारिश!</title>
                                    <description><![CDATA[First Rain On Earth: डॉ. संदीप सिंहमार। पृथ्वी पर इंसान ही नहीं डायनासोर की बादशाहत से पहले एक ऐसा दौर रहा है कि यहां लाखों वर्षों तक लगातार बारिश होती रही। हाल ही में हुए एक रिसर्च में ऐसा दावा किया गया है की करोड़ों वर्ष पहले पृथ्वी पर ऐसी घटना घटी थी। इस रिसर्च […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/you-will-not-believe-it-before-the-reign-of-dinosaurs-there-was-continuous-rain-for-20-lakh-years/article-55477"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2024-03/first-rain-on-earth.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">First Rain On Earth:<strong> डॉ. संदीप सिंहमार।</strong> पृथ्वी पर इंसान ही नहीं डायनासोर की बादशाहत से पहले एक ऐसा दौर रहा है कि यहां लाखों वर्षों तक लगातार बारिश होती रही। हाल ही में हुए एक रिसर्च में ऐसा दावा किया गया है की करोड़ों वर्ष पहले पृथ्वी पर ऐसी घटना घटी थी। इस रिसर्च में भी समय को लेकर कोई निश्चितता नहीं बताई गई है। पर इतना जरूर कहा गया है कि 10 से 20 लाख वर्षों तक पृथ्वी पर लगातार बारिश हुई। इतना ही नहीं तब पृथ्वी पर उत्तर-पुथल का दौर जारी था। ऐसा माना गया है कि पृथ्वी पर जीवन के लिए यह प्राकृतिक घटना जरूरी थी।</p>
<p style="text-align:justify;">आज हम इस लेख में बारिश के इस दूर पृथ्वी पर हुई बेहद उथल-पुथल व उसके बाद डायनासोर की बादशाहत तक की कहानी का बयां करने वाले हैं। आज हम जिस पृथ्वी पर जीवनयापन कर रहे हैं,उसका रहस्य कम नहीं है। इस रहस्यों को लेकर लगातार शोध चल रहे हैं,पर नतीजे पर आज तक ना तो शोधकर्ता ही पहुँच पाए हैं और ना ही वैज्ञानिक। परंतु इतना जरूर है कि जब-जब इस विषय पर शोध हुआ है उतनी ही आश्चर्यजनक बातें सामने आते जा रही है। बातें व जानकारी भी ऐसी कि हर किसी को सोचने के लिए मजबूर कर देती है।</p>
<p><a href="http://10.0.0.122:1245/do-not-ignore-joint-pain-that-increases-with-age/">उम्र के साथ बढ़ता जोड़ों में दर्द, ना करें अनदेखा</a></p>
<p style="text-align:justify;">एक रिसर्च में ऐसा माना गया है कि हमारे ग्रह पर लाखों वर्षों तक लगातार बारिश होती रही। लाखों सालों की इसी बारिश ने हमारे नीले ग्रह पर जीवन को पनपने में मदद की। वैज्ञानिक वर्तमान दौर में भी इसे समझने की कोशिश कर रहे हैं कि आखिर इतने वर्षों तक लगातार बारिश क्यों हुई? आखिर इसका कारण क्या था? इसके बाद डायनासोर का जीवन पृथ्वी पर कैसे संभव हुआ? डायनासोर के जीवन के बाद उनका जीवन समाप्त कैसे हुआ? इसके बाद पृथ्वी पर इंसानों की बादशाहत कैसे कायम हुई?,जो आज तक भी जारी है। यह सभी प्रश्न अभी तक अनसुलझे ही हैं। पर आए दोनों शोधकर्ता अपने शोध जरूर करते रहते हैं जो दुनिया भर के सामने आते हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">महाद्वीपों में नहीं, एक ही जगह थी पृथ्वी | First Rain On Earth</h3>
<p style="text-align:justify;">जियोलॉजिकल सोसाइटी के रिसर्च जर्नल में प्रकाशित एक शोध में वैज्ञानिकों के अनुसार आज से 20 से 30 करोड़ वर्ष पहले हमारी धरती अलग-अलग महाद्वीपों में नहीं बल्कि एक ही जगह थी। वैज्ञानिकों का मानना है कि उस समय एक दौर ऐसा था, जब करीब 10 से 20 लाख साल तक लगातार बारिश होती रही थी। साल 1970 और 80 के दशक में भूवैज्ञानिकों ने कुछ प्राचीन चट्टानों में जमा असामान्य परतों की खोज भी की थी, जो करीब 23 करोड़ साल पहले की थी। शोधकर्ताओं की एक टीम ने पूर्वी ऑल्प्स में कार्बोनेट संरचनाओं के भीतर जमा सिलिक्लास्टिक अवसादन की एक परत का अध्ययन किया था। जबकि एक अन्य टीम ने ब्रिटेन में मशहूर लाल पत्थर के भीतर एंबेडेट ग्रे चट्टान की एक परत का विश्लेषण किया। इन्हीं विश्लेषकों के आधार पर पृथ्वी के संबंध में अलग-अलग जानकारियां हम तक पहुंचती रही, जो अब भी लगातार जारी है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">तब क्यों हुई थी इतनी लंबे समय तक बारिश? First Rain On Earth</h3>
<p style="text-align:justify;">इन्हीं खोज और विश्लेषकों और दुनिया के विभिन्न हिस्सों के अन्य अध्ययनों ने एक समान अवधारणा की ओर इशारा किया कि धरती के इतिहास में एक समय ऐसा आया जब काफी लंबे समय तक पहले सूखा पड़ा और फिर बारिश शुरू हो गई। बारिश 10 से 20 लाख वर्षों तक चली थी। भूविज्ञानी यह निष्कर्ष निकालने में सक्षम थे कि डायनासोर के युग की शुरुआत में असामान्य रूप से आर्द्रता थी। इस अवधि को कार्नियन प्लवियल इवेंट या कार्नियन प्लवियल एपिसोड के रूप में जाना जाता है। धरती पर हुई इस दिलचस्प घटना ने इस बात को समझने की जरूरत पर जोर दिया कि आखिर इतने लंबे समय तक बारिश क्यों होने लगी? पर इस निष्कर्ष पर अभी तक भी पहुँचा नहीं जा सका है। अब वैज्ञानिकों का मानना है कि आर्द्रता में वृद्धि का कारण नमी के स्तर में उल्लेखनीय वृद्धि है, जो संभवतः रैंगेलिया लार्ज इग्नियस प्रांत में बड़े पैमाने पर ज्वालामुखी विस्फोट के कारण हुई। ऐसी वजह से लाखों वर्षों तक बारिश होती रही। इस घटना के कारण संभवतः धरती के तापमान में वृद्धि हुई। जिसके परिणामस्वरूप महासागर गर्म हो गए और वायुमंडल में नमी की मात्रा बढ़ गई। जियोलॉजिकल सोसायटी के जर्नल में प्रकाशित एक अध्ययन से पता चला है कि आर्द्रता अवधि डायनासोर के लिए फायदेमंद थी। लगातार ज्वालामुखी विस्फोटों वाले उथल-पुथल भरे युग के बाद बढ़ी हुई नमी की इस अवधि ने उन्हें विविधता लाने में मदद की।</p>
<h3 style="text-align:justify;">165 मिलियन वर्षों तक चला था डायनासोर का शासन | First Rain On Earth</h3>
<p style="text-align:justify;">डायनासोर का शासनकाल मनुष्य के अस्तित्व से बहुत पहले शुरू हुआ था। मेसोज़ोइक युग के नाम से जाने जाने वाली समयावधि के दौरान डायनासोरों ने 165 मिलियन वर्षों से अधिक समय तक पृथ्वी पर शासन किया। इस युग को तीन अलग-अलग अवधियों में विभाजित किया गया है: ट्राइसिक, जुरासिक और क्रेटेशियस अवधि। डायनासोर का उदय लगभग 230 मिलियन वर्ष पूर्व ट्रायेसिक काल के अंत में हुआ। पृथ्वी की जलवायु आम तौर पर गर्म और आर्द्र थी, जिसमें विशाल क्षेत्र हरे-भरे वनस्पतियों से आच्छादित थे। इस अवधि में सुपरकॉन्टिनेंट पैंजिया का विघटन भी देखा गया। जिससे ऐसे वातावरण का निर्माण हुआ जो विभिन्न प्रजातियों के विविधीकरण और प्रसार के लिए अधिक अनुकूल था। डायनासोर के प्रभुत्व को संभवतः उनके आकार,भौतिक अनुकूलन और पारिस्थितिक विशेषताओं सहित विकासवादी लाभों के संयोजन द्वारा सुगम बनाया गया था। उनकी सफलता में योगदान देने वाले कुछ प्रमुख कारक थे।</p>
<p style="text-align:justify;">डायनासोरों ने शारीरिक लक्षणों की एक विस्तृत श्रृंखला विकसित की। जिसने उन्हें विभिन्न वातावरणों में पनपने की अनुमति दी। इन अनुकूलन में विविध आहार रणनीतियाँ, गतिशीलता, विशेष दांत और कवच और सींग जैसी सुरक्षात्मक विशेषताएं शामिल थी। डायनासोर ने पारिस्थितिक क्षेत्रों की एक विस्तृत श्रृंखला पर कब्जा कर लिया, छोटे, फुर्तीले शिकारियों से लेकर विशाल, शाकाहारी सॉरोपॉड तक। इस विविधता ने उन्हें विभिन्न खाद्य स्रोतों और आवासों का दोहन करने की अनुमति दी, जिससे उन्हें बदलती पर्यावरणीय परिस्थितियों में जीवित रहने में बढ़त मिली। कई डायनासोर विपुल प्रजनक थे। उन्होंने कई अंडे दिए और माता-पिता की देखभाल प्रदर्शित की। जिससे संभवतः उन्हें अपनी आबादी बनाए रखने और बदलते पर्यावरणीय दबावों के अनुकूल होने में मदद मिली। मेसोज़ोइक युग लाखों वर्षों तक चला, जिससे डायनासोर को प्रतिष्ठित टायरानोसॉरस रेक्स से लेकर पंख वाले रैप्टर तक प्रजातियों की एक विस्तृत श्रृंखला में विकसित होने और विविधता लाने का अवसर मिला।</p>
<h3 style="text-align:justify;">जुरासिक और क्रेटेशियस काल तक बना रहा प्रभुत्व</h3>
<p style="text-align:justify;">डायनासोरों का प्रभुत्व जुरासिक और क्रेटेशियस काल तक बना रहा, जिसमें विभिन्न समूह विकसित हुए और नए पारिस्थितिक स्थानों को भरने के लिए विस्तार किया। हालाँकि, उनका शासन अंततः लगभग 65 मिलियन वर्ष पहले क्रेटेशियस काल के अंत में समाप्त हो गया। ऐसा माना जाता है कि इस समय के दौरान एक विनाशकारी घटना, संभवतः एक विशाल क्षुद्रग्रह या धूमकेतु के प्रभाव के कारण व्यापक पर्यावरणीय तबाही हुई, जिसमें जंगल की आग, वैश्विक शीतलन और पौधों की उत्पादकता में तेजी से गिरावट शामिल थी। इस घटना को क्रेटेशियस-पैलियोजीन विलुप्त होने की घटना के रूप में जाना जाता है, जिसका पृथ्वी पर जीवन पर गहरा प्रभाव पड़ा, जिससे डायनासोर सहित 75 फीसदी से अधिक प्रजातियां विलुप्त हो गईं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">फिर हुआ स्तनधारी जीवों का उदय</h3>
<p style="text-align:justify;">इस सामूहिक विलुप्ति की घटना के बाद स्तनधारियों के उदय का मार्ग प्रशस्त हुआ, जो पहले प्रमुख डायनासोर की छाया में मौजूद थे। डायनासोरों से प्रतिस्पर्धा के लुप्त होने के साथ, स्तनधारी पारिस्थितिक भूमिकाओं में विविधता लाने और उन पर कब्जा करने में सक्षम हो गए, जो पहले उनके सरीसृप समकक्षों द्वारा कब्जा कर लिया गया था। डायनासोर का शासन विकासवादी अनुकूलन, पारिस्थितिक विविधीकरण और विभिन्न वातावरणों में पनपने की क्षमता के संयोजन के माध्यम से स्थापित किया गया था। हालाँकि, एक विनाशकारी विलुप्ति की घटना के साथ उनका प्रभुत्व अचानक समाप्त हो गया, जिससे स्तनधारियों का प्रमुख स्थलीय कशेरुकियों के रूप में उदय हुआ।</p>
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                <pubDate>Thu, 21 Mar 2024 10:50:07 +0530</pubDate>
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