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                <title>Holi 2024 - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>होली पर खूब मचा धमाल, उड़ा रंग, अबीर और गुलाल</title>
                                    <description><![CDATA[हनुमानगढ़ (सच कहूँ न्यूज)। धुलंडी पर्व पर सोमवार को भटनेर नगरी अलग ही रूप में नजर आई। जहां उत्साह का माहौल था तो उल्लास तो खुशियों के रंग भी बिखरे नजर आए। चहुंओर मस्ती थी तो अपनत्व के साथ रिश्तों में मिठास भी। जिले में होली का पर्व उत्साह और उल्लास के साथ मनाया गया। […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/rajasthan/there-was-a-lot-of-fun-on-holi-colors-were-blown-away-abir-and-gulal/article-55655"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2024-03/holi-2024-1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>हनुमानगढ़ (सच कहूँ न्यूज)।</strong> धुलंडी पर्व पर सोमवार को भटनेर नगरी अलग ही रूप में नजर आई। जहां उत्साह का माहौल था तो उल्लास तो खुशियों के रंग भी बिखरे नजर आए। चहुंओर मस्ती थी तो अपनत्व के साथ रिश्तों में मिठास भी। जिले में होली का पर्व उत्साह और उल्लास के साथ मनाया गया। बच्चे, युवा, बुजुर्ग सभी होली के रंगों से रंगे नजर आए। बच्चे बच्चा पार्टी के संग तो युवा अपने साथियों, परिजनों के साथ और बुजुर्ग अपनी मंडली के साथ होली खेलने निकले। महिलाओं की टीम भी होली के रंगों में रंगी नजर आई। Hanumangarh News</p>
<h3>रंगों में हो रही प्यार-स्नेह और अपनत्व की बरसात</h3>
<p style="text-align:justify;">लोगों ने एक-दूसरे के साथ होली खेलते हुए शुभकामनाएं दी। मिठाइयों का दौर भी चलता रहा। इससे पहले सुबह से ही भटनेर नगरी रंगों से सराबोर हो उठी। जैसे-जैसे सूरज चढ़ता रहा, रंगत भी बढ़ती गई। हर तरफ रंग-गुलाल से रंग युवाओं की टोलियां नाचती-गाती चल रही थी। जो भी रास्ते में आता उस पर रंग-गुलाल उड़ेलकर लाल-पीला कर दिया। हर तरफ मस्ती और उल्लासभरा माहौल था। डीजे की धुन पर मस्ती से सराबोर युवा थिरक रहे थे। महिलाएं भी टोलियों में घूम-घूमकर रंग-गुलाल लगा रही थी। रंगों में प्यार-स्नेह और अपनत्व की बरसात हो रही हो।</p>
<p style="text-align:justify;">रंग-गुलाल लगाने के बाद एक-दूसरे का मुंह मीठा कराकर और गले मिलकर होली की एक-दूसरे को बधाइयां दी। दोपहर बाद तक होली के मस्तानों का हुजूम सडक़ों पर उमड़ता रहा और मस्ती छाई रही। शाम को लोग एक-दूसरे से मिलने पहुंचे। विभिन्न समाजों की ओर से होली मिलन समारोह आयोजित किए व उन्होंने सामूहिक रूप से होली खेली। इससे पहले रविवार को देर रात तक होली का दहन कार्यक्रम चलते रहे। लोगों ने शुभ मुहूर्त में होलिका दहन किया। इस मौके पर सांस्कृतिक कार्यक्रम भी हुए। इनमें बड़ी संख्या में लोग शामिल रहे। Hanumangarh News</p>
<p><a title="Viral Video: दर्शकों की भीड़ में घुसे डुप्लीकेट शिखर धवन! पकड़े जाने पर कोहली अपनी हंसी नहीं रोक पाए" href="http://10.0.0.122:1245/duplicate-shikhar-dhawan-enters-the-crowd-of-spectators/">Viral Video: दर्शकों की भीड़ में घुसे डुप्लीकेट शिखर धवन! पकड़े जाने पर कोहली अपनी हंसी नहीं रोक पाए</a></p>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 26 Mar 2024 17:05:06 +0530</pubDate>
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                <title>Police Holi Celebration: जयपुर कमिश्नर को कंधे पर उठाकर नाचे पुलिसकर्मी</title>
                                    <description><![CDATA[Police Holi Celebration: जयपुर। राजस्थान में मंगलवार को पुलिस कर्मियों ने जमकर होली मनाई। राजस्थान पुलिस के डीजीपी के साथ सिपाही भी होली मनाते दिखे। जयपुर के चांदपोल स्थित पुलिस लाइन में जयपुर कमिश्नरेट पुलिस की ओर से विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। पुलिस लाइन में सुबह 9 बजे से होली खेली गई। इस दौरान […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/rajasthan/policemen-dance-carrying-jaipur-commissioner-on-their-shoulders/article-55646"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2024-03/police-holi-celebration.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Police Holi Celebration: <strong>जयपुर।</strong> राजस्थान में मंगलवार को पुलिस कर्मियों ने जमकर होली मनाई। राजस्थान पुलिस के डीजीपी के साथ सिपाही भी होली मनाते दिखे। जयपुर के चांदपोल स्थित पुलिस लाइन में जयपुर कमिश्नरेट पुलिस की ओर से विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। पुलिस लाइन में सुबह 9 बजे से होली खेली गई। इस दौरान डीजीपी यूआर साहू, जयपुर कमिश्नर बीजू जॉर्ज जोसफ, एडिशनल पुलिस कमिश्नर कुंवर राष्ट्रदीप सहित सभी जिलों के डीसीपी मौजूद रहे। बीजू जॉर्ज जोसफ को पुलिस कर्मियों ने कंधे पर उठाकर डांस कराया। Jaipur News</p>
<p style="text-align:justify;">पुलिस कमिश्नर बीजू जॉर्ज जोसफ ने बताया कि धुलंडी के अगले दिन पुलिसकर्मी अपने साथियों और परिवार के साथ होली खेलते हैं। होली और धुलंडी के दिन हार्ड ड्यूटी होने के कारण पुलिसकर्मी अपने साथियों और परिवार के साथ होली नहीं खेलते। अगले दिन पुलिस मुख्यालय के आदेश पर जिले और कमिश्नरेट में होली का त्योहार पुलिसकर्मी अपने पुलिस मुखिया और पुलिस परिवार के साथ मनाते हैं। इसी क्रम में पुलिस लाइन चांदपोल में विशेष कार्यक्रम रखा गया। Jaipur News</p>
<p><a title="IMD Weather Update: इन राज्यों में बादल बरसाएंगे कहर, अलर्ट जारी!" href="http://10.0.0.122:1245/clouds-will-wreak-havoc-in-these-states-alert-issued/">IMD Weather Update: इन राज्यों में बादल बरसाएंगे कहर, अलर्ट जारी!</a></p>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 26 Mar 2024 15:24:53 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>Holi 2024: क्या आने वाली पीढ़ियों को बताना पड़ेगा, फ़ाग ऐसा होता था?</title>
                                    <description><![CDATA[Holi 2024: सामाजिक सद्भावना के त्यौहार पर गायब रहा भाईचारा डॉ. संदीप सिंहमार। सामाजिक सद्भावना और भाईचारे का प्रतीक के होली के त्यौहार के रंग अब फीके नजर आ रहे हैं। ऐसा नहीं है कि आज के दौर में रंगों की कमी है, लेकिन खुद इंसान की फितरत की वजह से रंग- बेरंग हो गए […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/will-we-have-to-tell-future-generations-that-this-is-how-it-used-to-be/article-55641"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2024-03/sandeep-singhmaar.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:justify;">Holi 2024: सामाजिक सद्भावना के त्यौहार पर गायब रहा भाईचारा</h3>
<p style="text-align:justify;"><strong>डॉ. संदीप सिंहमार। </strong>सामाजिक सद्भावना और भाईचारे का प्रतीक के होली के त्यौहार के रंग अब फीके नजर आ रहे हैं। ऐसा नहीं है कि आज के दौर में रंगों की कमी है, लेकिन खुद इंसान की फितरत की वजह से रंग- बेरंग हो गए हैं। होली का त्यौहार पहले भी था, आज भी है, पर अब तो इस पवित्र त्यौहार का नजरिया बदल गया है। होली का त्यौहार भारतवर्ष में ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया भर में मनाया जाता है। इसके मनाने का तरीका बिल्कुल अलग होता जा रहा है। भारतवर्ष में हरियाणा ऐसा राज्य है,जिसमें होली के अगले दिन फाग/दुलहंडी का दिन अपने आप में एक अलग अंदाज में मनाया जाता था। यह अंदाज भी अब द्वेष भावना का शिकार होकर रह गया है। Haryana News</p>
<p style="text-align:justify;">यह एक ऐसा त्यौहार रहा है, जिस दिन रिश्ते में देवर भाभी बड़े ही प्रेम से इस त्यौहार को खेलते थे। सामाजिक रीति-रिवाज के अनुसार बड़े बुजुर्गों की देखरेख में इस त्यौहार को गांव के चौराहे पर आयोजित किया जाता था। आज से एक दशक पहले तक बात करें तो गांव के चौराहे के बीच में एक बड़ा कढाया यानी बर्तन रखा जाता था। उसमें गांव की लड़कियां पानी भरती थी। बड़े बुजुर्ग निगरानी के लिए चारों तरफ बैठते थे और फिर चलता था, भाभी-देवर के प्रेम का प्रतीक मस्ती का त्यौहार। देवर जहां इस बड़े बर्तन से अपनी भाभी पर पानी उड़ेलते थे तो भाभी अपनी चुन्नी या कपड़े से बना कोरड़ा बनाकर देवर पर वार करती थी।</p>
<h3>रस्सी डालकर देवर की पिटाई करती नज़र आती</h3>
<p style="text-align:justify;">इस दौरान कोरडे मारे जाते थे, लेकिन किसी को चोट नहीं आती थी। किसी को चोटिल करना भाभी का उद्देश्य नहीं था, बल्कि एक प्रेम प्रदर्शन का ही उद्देश्य माना जाता था। पर आजकल न पहले वाली भाभी रही और ने ही पहले वाले देवर। यह प्रेम भरा रिश्ता मन मुटाव का शिकार हो गया है। रिश्ते में देवर लगने वाले युवक जहां इस पवित्र त्यौहार के दिन सुबह उठते ही शराब या अन्य नशों में धुत हो जाते हैं तो वहीं देवर ही नहीं भाभी भी अब पहले वाले कोरडे नहीं बल्कि कपड़ों के बीच बिजली के तार या रस्सी डालकर देवर की पिटाई करती नज़र आती है। Haryana News</p>
<p style="text-align:justify;">ऐसा नहीं है की त्यौहार मनाया नहीं जाता। मनाया आज भी जाता है पर अब द्वेष भावना ज्यादा दिखाई देती है। दो दशक पहले तक हरियाणा में एक जमाना ऐसा था, जहां रिश्ते में देवर-भाभी लगने वाले हर किसी इंसान के लिए फाग खेलना अनिवार्य होता था। जो देवर अपनी भाभी के साथ फाग नहीं खेलता था। वह उसके बदले में भाभियों को लड्डू या पेड़े खिलाता था। इसका मतलब यह माना जाता था कि उसने फाग खेलने के बजाय अपनी भाभी को बड़े प्रेम से मीठा खिलाकर मना लिया है। पर अब यह परंपरा भी लुप्त होने की कगार पर है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">लोकगीतों पर झूमती थी महिलाएं | Haryana News</h3>
<p style="text-align:justify;">हरियाणा में होली फाग के दिन विशेष कर महिलाएं मस्ती में झूम कर लोकगीत गाती हुई इस त्यौहार को मानती थी। इस त्यौहार के दिन मौज मस्ती के प्रति फागण माह से संबंधित कुछ लोकगीत गाती थी। जो की एक पुरानी परंपरा माने मानी जाती थी:-इनमें में से कुछ गीत हैं-</p>
<h3 style="text-align:justify;">फागण के दिन चार री सजनी…</h3>
<p style="text-align:justify;">फागण के दिन चार री सजनी<br />
फागण के दिन चार<br />
मध जोबन आया फागण मैं<br />
फागण बी आया जोबन मैं<br />
झाल उठे सैं मेरे मन मैं<br />
जिनका बार न पार री सजनी, फागण के दिन चार।</p>
<h3 style="text-align:justify;">इसी तरह एक अन्य गीत है जो एक दशक पहले तक गुगुनाय जाता था-</h3>
<p style="text-align:justify;">जब साजन ही परदेस गये मस्ताना फागण क्यूँ आया?<br />
जब सारा फागण बीत गया तैं घर में साजन क्यूँ आया?<br />
इस गीत के माध्यम से सुहागिनें अपने साजन के प्रति विरह वेदना व्यक्त करती नजर आती थी-</p>
<p style="text-align:justify;">एक बड़ा ही पुराना गीत है। जिसके माध्यम से बताया गया है कि इस त्यौहार के दिन यौवन भरपूर महिला से लेकर बुजुर्ग महिला में भी मस्ती मानी जाती थी,जिसका उदाहरण है-</p>
<p style="text-align:justify;">बूढी ए लुगाई मस्ताई फागण मैं….</p>
<h3 style="text-align:justify;">कुलेरी गाँव में जारी रही परंपरा | Haryana News</h3>
<p style="text-align:justify;">फाग उत्सव के दौरान एक तरफ जहां हरियाणा प्रदेश में नशे में धुत युवकों की हुल्लड़बाजी दिखाई थी, वहीं दूसरी तरफ गाँव कुलेरी में फाग की वर्षों पुरानी हरियाणवी परंपरा जारी रही। यहाँ गाँव के चौराहे पर बड़ा कढाया रखकर पानी भरा गया। उसके बाद देवर-भाभी ने जमकर फाग खेला। खास बात यह रहेगी इस दौरान गांव के बुजुर्ग खुद नेतृत्व करते नजर आए। यहाँ एक के बाद एक देवर-भाभी ने पुरानी संस्कृति के अनुसार भाग उत्सव मनाया। देवर ने जहां अपनी भाभी पर रंग घुला हुआ पानी उड़ेला</p>
<p style="text-align:justify;">तो भाभियों ने भी अपने देवर पर जमकर कोरडे बरसाए। उससे भी खास बात यह है कि इस विशेष खेल के अंत में विजेता रहने वाली महिलाओं को सम्मानित भी किया गया। कुलेरी लरी के पूर्व सरपंच राजेंद्र ने बताया कि सार्वजनिक रूप से मनाए जाने वाले फाग उत्सव से आपसी भाईचारा बना रहता है। जहां गांव में लोग आपसे गिले-शिकवे में भुलाकर आत्मिक रूप से फाग खेलते है। उनका प्रयास है कि हमारी पुरानी संस्कृति को बचाया जा सके और आने वाली पीढ़ियां भाईचारे के इस पर्व को याद रख सकें। Haryana News</p>
<p><a title="Holi 2024: हरियाणा में होली की खुशी मातम में बदली! 5 की मौत!" href="http://10.0.0.122:1245/the-joy-of-holi-turned-into-mourning-in-haryana-five-dead/">Holi 2024: हरियाणा में होली की खुशी मातम में बदली! 5 की मौत!</a></p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>हरियाणा</category>
                                            <category>संस्कृति एवं समाज</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/haryana/will-we-have-to-tell-future-generations-that-this-is-how-it-used-to-be/article-55641</link>
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                <pubDate>Tue, 26 Mar 2024 12:20:38 +0530</pubDate>
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                <title>Holi Festival: आधुनिकता की चकाचौंध में खो गई फागण की मस्ती</title>
                                    <description><![CDATA[Holi Festival: होली, जिसे रंगों के त्योहार के रूप में भी जाना जाता है, एक जीवंत और आनंदमय उत्सव है,जो भारत और दुनिया भर में गहरा सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व रखता है। यह वसंत के आगमन, बुराई पर अच्छाई की विजय और क्षमा और नवीनीकरण का समय दर्शाता है। पर आजकल यह होली व फागण […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/the-fun-of-phagan-got-lost-in-the-glare-of-modernity/article-55625"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2024-03/holi-festival-3.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Holi Festival: होली, जिसे रंगों के त्योहार के रूप में भी जाना जाता है, एक जीवंत और आनंदमय उत्सव है,जो भारत और दुनिया भर में गहरा सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व रखता है। यह वसंत के आगमन, बुराई पर अच्छाई की विजय और क्षमा और नवीनीकरण का समय दर्शाता है। पर आजकल यह होली व फागण माह की मस्ती भी आधुनिकता की चकाचौंध में खो गई है। होली के दिन व होली के अगले दिन जिसे हरियाणा में फाग नाम के उत्सव के तौर पर मनाया जाता था। वह भी अब शौक नहीं बल्कि द्वेष भावना का शिकार हो गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">अब इस दिन ना तो भाभी के कोरडे देखने को मिलते और ना ही देवर का अपनी भाभी के प्रति पहले वाला सात्विक प्रेम। अब तो होली के दिन लोग जमकर नशा करते हुए हुल्लड़बाजी करते हुए दिखाई देते है। शायद यही कारण है कि इस दिन हरियाणा सरकार ने भी ऐसे हुल्लड़बाजों से निपटने के लिए विशेष आदेश देने पड़े। अब होली व फाग के दिन पुलिस पैदल गश्त कर रही है ताकि सुरक्षा व्यवस्था बनी रहे। हालाँकि, यह समझ में आता है कि कुछ लोगों को कैसा महसूस हो सकता है कि आधुनिक समय में होली का सार और मज़ा फीका पड़ गया है। सोशल मीडिया के आगमन, व्यावसायीकरण और बदलती जीवनशैली के साथ, त्योहार से जुड़ी पारंपरिक प्रथाएं और मूल्य विकसित या कम हो गए हैं। Holi 2024</p>
<h3 style="text-align:justify;">सभी समुदाय में होता था विशेष चाव | Holi Festival</h3>
<p style="text-align:justify;">अतीत में, होली मुख्य रूप से समुदायों के भीतर मनाई जाती थी, जिसमें लोग एक साथ आकर रंगों से खेलते थे।शुभकामनाओं का आदान-प्रदान करते थे और उत्सव के भोजन का आनंद लेते थे। सामूहिक आनंद, सद्भाव और प्रेम और खुशी फैलाने पर जोर दिया जाता था। पर वह जमाना अब बीत गया है। आज, ऐसे अनेक उदाहरण हैं, जहां होली के व्यावसायिक पहलू को इसके सांस्कृतिक और आध्यात्मिक महत्व पर प्राथमिकता दी जाती है। होली की सच्ची भावना को पूरी तरह अपनाने के बजाय त्योहार से संबंधित उत्पादों के विपणन और बिक्री पर ध्यान केंद्रित हो गया है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">सिंथेटिक रंगों का प्रचलन बढ़ा | Holi Festival</h3>
<p style="text-align:justify;">इसके अलावा, होली के दौरान इस्तेमाल किए जाने वाले रंगों की सुरक्षा और स्थिरता को लेकर भी चिंताएं हैं। सिंथेटिक रंग और रसायन प्रचलन में आ गए हैं, जिससे पर्यावरण प्रदूषण और संभावित स्वास्थ्य खतरे पैदा हो गए हैं। यह पौधों और फूलों से प्राप्त प्राकृतिक रंगों के पारंपरिक उपयोग के विपरीत है, जिसका पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य पर कम प्रभाव पड़ता है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">सांस्कृतिक असंवेदनशीलता</h3>
<p style="text-align:justify;">होली के उत्सव पर कभी-कभी पानी की बर्बादी, गुंडागर्दी और सांस्कृतिक असंवेदनशीलता जैसे अनुचित व्यवहार का साया पड़ जाता है। ये गतिविधियां त्योहार के सार और इसकी एकता, सम्मान और समावेशिता के संदेश को ख़राब कर सकती हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">सार्थक तरीकों से मनाया जाना चाहिए त्योहार | Holi Festival</h3>
<p style="text-align:justify;">इन चुनौतियों के बावजूद यह पहचानना आवश्यक है कि होली की भावना को अभी भी सार्थक तरीकों से मनाया और संजोया जा सकता है। प्रेम, एकजुटता और करुणा के मूल मूल्यों पर जोर देकर, व्यक्ति उन परंपराओं और रीति-रिवाजों को बनाए रखने का प्रयास कर सकते हैं जो होली को वास्तव में विशेष और समृद्ध अनुभव बनाते हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">त्योहार की कहानी और मिथकों को समझना होगा</h3>
<p style="text-align:justify;">होली की प्रामाणिकता को बनाए रखने का एक तरीका इसकी जड़ों से दोबारा जुड़ना और त्योहार के पीछे की कहानियों और मिथकों को समझना है। होलिका और प्रह्लाद की किंवदंतियों, रंगों के प्रतीकात्मक महत्व और होली से जुड़े अनुष्ठानों के बारे में जानने से त्योहार के प्रति किसी की सराहना और गहरी हो सकती है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">प्राकृतिक रंगों का करें प्रयोग</h3>
<p style="text-align:justify;">इसके अतिरिक्त, प्राकृतिक रंगों का उपयोग, जल संरक्षण और पर्यावरण का सम्मान करने जैसी पर्यावरण-अनुकूल प्रथाओं को बढ़ावा देने से होली पर आधुनिकता के नकारात्मक प्रभाव को कम करने में मदद मिल सकती है। सचेत विकल्प चुनकर और स्थायी व्यवहार अपनाकर, व्यक्ति आने वाली पीढ़ियों के लिए त्योहार के आनंद और सार को संरक्षित करने में योगदान दे सकते हैं।होली के दौरान दया, क्षमा और मेल-मिलाप के कार्यों में शामिल होने से भी त्योहार की सच्ची भावना फिर से जागृत हो सकती है।</p>
<p style="text-align:justify;">चाहे पड़ोसियों के साथ मिठाइयाँ बाँटना हो, बिछड़े दोस्तों तक पहुँचना हो, या सामुदायिक सेवा पहल में भाग लेना हो, ये भाव होली के लोकाचार का प्रतीक हैं और एकता और सद्भाव की भावना को बढ़ावा देते हैं।भले ही होली का मज़ा आधुनिकता के सामने विकसित हुआ हो, प्रेम, आनंद और नवीनीकरण के इसके मूल मूल्य कालातीत और सार्वभौमिक बने हुए हैं। त्योहार के सार को अपनाकर और इसकी परंपराओं और सिद्धांतों के प्रति प्रतिबद्ध होकर, व्यक्ति यह सुनिश्चित कर सकते हैं कि होली सभी के लिए एक सार्थक और पोषित उत्सव बनी रहे। Holi Festival                                                                                                                                          <strong>डॉ. संदीप सिंहमार।</strong></p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे होली की शुभकामनाओं के साथ मतदान संदेश" href="http://10.0.0.122:1245/voting-messages-with-holi-wishes-going-viral-on-social-media/">सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे होली की शुभकामनाओं के साथ मतदान संदेश</a></p>
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                                                            <category>हरियाणा</category>
                                            <category>विचार</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/haryana/the-fun-of-phagan-got-lost-in-the-glare-of-modernity/article-55625</link>
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                <pubDate>Sun, 24 Mar 2024 19:56:11 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Holi 2024: फागोत्सव कमाल, खूब उड़ाया फूल-गुलाल! देखा न होगा ऐसा उत्सव!</title>
                                    <description><![CDATA[Holi 2024 : हनुमानगढ़। टाउन के श्री रघुनाथ मंदिर में श्री रघुनाथ मंदिर महिला भजन मण्डली की ओर से शनिवार को फाग महोत्सव (Phag Mahotsav) मनाया गया। फाग महोत्सव के अंतर्गत मण्डली सदस्य महिलाओं ने फाग गीत गाते हुए गुलाल व फूलों से होली खेलकर एक-दूसरे को रंगों के त्योहार की अग्रिम शुभकामनाएं दी। कार्यक्रम […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/rajasthan/phagotsav-kamaal-a-lot-of-flowers-and-gulal-were-blown/article-55577"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2024-03/gagotsav-hanumangarh.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>Holi 2024 : हनुमानगढ़।</strong> टाउन के श्री रघुनाथ मंदिर में श्री रघुनाथ मंदिर महिला भजन मण्डली की ओर से शनिवार को फाग महोत्सव (Phag Mahotsav) मनाया गया। फाग महोत्सव के अंतर्गत मण्डली सदस्य महिलाओं ने फाग गीत गाते हुए गुलाल व फूलों से होली खेलकर एक-दूसरे को रंगों के त्योहार की अग्रिम शुभकामनाएं दी। कार्यक्रम की शुरुआत में महिला मण्डली सदस्यों ने सामूहिक रूप से फाग गीत गए। तत्पश्चात महिलाओं ने भगवान को गुलाल लगाया। इसके बाद आपस में फूल तथा गुलाल से होली खेल एक-दूसरे को शुभकामनाएं दी। Hanumangarh News</p>
<p style="text-align:justify;">राधाकृष्ण की झांकी के साथ महिलाओं ने कार्यक्रम में रंग मल डारो रे, कानूड़ो रंग डाल गयो रे आदि भजन गाए। पुजारी गणेश शर्मा ने बताया कि मंदिर समिति प्रधान रमेश छाबड़ा व रोशनलाल प्रभाकर के निर्देशानुसार हर वर्ष पारम्परिक त्योहारों को जिंदा रखने के लिए इस तरह के कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। इसके जरिए युवा पीढ़ी को भी उनकी संस्कृति से जोड़े रखने का प्रयास है। इस मौके पर रितिका, पूनम, रचना, शिल्पा, सीमा सेठी, विमला, रिया, अंजू, अंशु, अर्चना, हिना, सीमा, भूमि, वर्षा, गुंजल सहित मण्डली की अन्य सदस्य मौजूद रहीं। Hanumangarh News</p>
<p><a title="स्लीपर बस और ट्रक में भयानक भिड़ंत, दोनों के एक तरफ के परखच्चे उड़े!" href="http://10.0.0.122:1245/terrible-collision-between-sleeper-bus-and-truck-one-side-of-both-blown-up/">स्लीपर बस और ट्रक में भयानक भिड़ंत, दोनों के एक तरफ के परखच्चे उड़े!</a></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 23 Mar 2024 15:47:09 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Holi Skin Care Tips: होली खेलने के बाद कैसे करें अपनी त्वचा की देखभाल? जानें जरूरी टिप्स!</title>
                                    <description><![CDATA[Holi Skin Care Tips: नई दिल्ली। आपसी भाईचारा बढ़ाने वाले रंगों के त्यौहार ‘होली’ में अक्सर लोग हर्बल रंगों और पिचकारियों के साथ खेलना ज्यादा पसंद करते हैं। यदि आप एक विशेष भारतीय पड़ोस में पले-बढ़े हैं, तो आपने ऐसे लोगों को देखा होगा जो इस विशेष अवसर के दौरान कुछ अन्य रसायनिक पदार्थ एवं कृत्रिम […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/holi-skin-care-tips/article-55562"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2024-03/holi-skin-care-tips.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Holi Skin Care Tips: <strong>नई दिल्ली।</strong> आपसी भाईचारा बढ़ाने वाले रंगों के त्यौहार ‘होली’ में अक्सर लोग हर्बल रंगों और पिचकारियों के साथ खेलना ज्यादा पसंद करते हैं। यदि आप एक विशेष भारतीय पड़ोस में पले-बढ़े हैं, तो आपने ऐसे लोगों को देखा होगा जो इस विशेष अवसर के दौरान कुछ अन्य रसायनिक पदार्थ एवं कृत्रिम रंगों में पाए जाने वाले हानिकारक रसायन का इस्तेमाल करते हैं जो हमारी त्वचा को काफी नुकसान पहुंचा सकते हैं। इस त्यौहार पर बहुत से लोग तो अपनी स्किन खराब होने के डर से अपने घरों पर ही रहना पसंद करते हैं, ऐसे लोगों के लिए इस लेख के माध्यम से हम ऐसे टिप्स लेकर आए हैं जिनकी वजह से आपको चिंता करने की जरूरत नहीं है। जी हां, इन टिप्स को अपनाकर आप ‘त्वचा-सुरक्षित’ होली खेलकर अपने सौंदर्य और त्वचा की देखभाल कर सकते हैं। आइये जानते हैं कैसे?</p>
<p><a href="http://10.0.0.122:1245/cooking-roti-on-direct-flame/#google_vignette">Roti on Gas: रोटी सेंकने का ये तरीका आपकी सेहत को पहुंचा सकता है नुकसान, जानें आंच और तवा के बीच का अंतर</a></p>
<ul>
<li style="text-align:justify;">आम धारणा के विपरीत, सूखे रंग, जिन्हें आमतौर पर गुलाल के रूप में जाना जाता है, को अक्सर पारा, तांबा या निकल जैसी धातुओं के साथ मिलाया जा सकता है, इसके अतिरिक्त, कृत्रिम रंगों को धोना मुश्किल होता है, वे हमारे बालों और त्वचा पर चिपक जाते हैं और परिणामस्वरूप त्वचा की एलर्जी, चकत्ते, मुँहासे और खोपड़ी की समस्याओं सहित कई अन्य समस्याएं होती हैं।</li>
<li style="text-align:justify;">इसके अलावा, होली आमतौर पर जो बाहर मनाई जाती है, जो कठोर यूवी किरणों के संपर्क में आने से आपकी त्वचा और बालों को नुकसान पहुंचा सकती है, जिससे निर्जलीकरण, सनटैन और अन्य यूवी क्षति हो सकती है – जिससे होली से पहले और बाद में देखभाल प्रासंगिक हो जाती है।</li>
<li style="text-align:justify;">एक त्वचा विशेषज्ञ की मानें तो उनके अनुसार कृत्रिम रंग त्वचा में छिद्रों को बंद कर सकते हैं, जिससे संवेदनशील त्वचा वाले लोगों में मुँहासे निकल सकते हैं। इसलिए होली खेलने से पहले कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए।</li>
<li style="text-align:justify;">बटर या एलोवेरा जैसे शक्तिशाली तत्वों के साथ मॉइस्चराइजर की एक मोटी परत लगाकर अपनी त्वचा को सूखने से बचाएं।</li>
<li style="text-align:justify;">मुँहासे-प्रवण त्वचा के लिए, अपनी त्वचा को चमकदार बनाए रखने के लिए चाय के पेड़ के अर्क और एडलवाइस अर्क जैसे अवयवों वाले चेहरे के तेल का चयन करना सबसे अच्छा है।</li>
<li style="text-align:justify;">कम से कम एसपीएफ 30-50 और व्यापक स्पेक्ट्रम वाला वॉटरप्रूफ सनस्क्रीन लगाएं, जो आपकी त्वचा को सूरज की क्षति से बचाने के लिए जरूरी है।</li>
<li style="text-align:justify;">इसी तरह, बालों की देखभाल के लिए, सुनिश्चित करें कि आप बालों पर रंगों को चिपकने से रोकने के लिए नारियल के तेल की धीरे से मालिश करें, जिससे वे शुष्क और भंगुर हो जाएं।</li>
<li style="text-align:justify;">सुरक्षात्मक कपड़े पहनना सुनिश्चित करें क्योंकि इससे रंगों के साथ सीधे संपर्क को कम करने में मदद मिलेगी।</li>
</ul>
<h4 style="text-align:justify;">होली खेलने के बाद कैसे करें त्वचा की देखभाल | Holi Skin Care Tips</h4>
<p style="text-align:justify;">होली के बाद डॉ. की राय में एक हल्के क्लींजर का उपयोग करना चाहिए, जो जलन पैदा किए बिना जिद्दी रंगों को हटाने में मदद कर सकता है। इसके बाद भरपूर मात्रा में मॉइस्चराइजर लगाएं, जो खोई हुई नमी को फिर से भरने में मदद करेगा और किसी भी संभावित जलन को शांत करेगा। यदि किसी भी तरह की सूजन या लालिमा है, तो ठंडे सेक का इस्तेमाल करना चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">दूसरी ओर, आपके बालों के लिए, अदरक, शिया बटर, मोरिंगा आॅयल या केले जैसे तत्वों वाले हल्के शैम्पू से दो बार शैम्पू करना सबसे अच्छा है। इष्टतम जलयोजन और स्वस्थ, पोषित बालों के लिए मास्क या कंडीशनर लगाएं।<br />
विशेषज्ञों की इस संबंध में राय है कि विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने और त्वचा में नमी बनाए रखने के लिए खूब सारा पानी पीकर हाइड्रेटेड रहना चाहिए। होली खेलने के बाद यदि लगातार जलन या एलर्जी हो, तो किसी विशेषज्ञ से संपर्क करना अनिवार्य है।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/national/holi-skin-care-tips/article-55562</link>
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                <pubDate>Sat, 23 Mar 2024 11:34:18 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Holi 2024: यहाँ की फूलों की होली रही विशेष आकर्षण का केन्द्र!</title>
                                    <description><![CDATA[Holi 2024: श्री फाग महोत्सव समिति की ओर से चतुर्थ फाग महोत्सव आयोजित नोहर (सच कहूँ न्यूज/रोहिताश सैनी)। श्री फाग महोत्सव समिति की ओर से चतुर्थ फाग महोत्सव का आयोजन यहां श्रीराम वाटिका में किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ वीणा म्यूजिक के प्रसिद्ध कलाकारों द्वारा साज वंदना से हुआ। उसके बाद सोहनलाल तंवर एंड पार्टी […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/rajasthan/holi-of-flowers-here-was-the-center-of-special-attraction/article-55526"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2024-03/phoolo-ki-holi.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:justify;">Holi 2024: श्री फाग महोत्सव समिति की ओर से चतुर्थ फाग महोत्सव आयोजित</h3>
<p style="text-align:justify;"><strong>नोहर (सच कहूँ न्यूज/रोहिताश सैनी)।</strong> श्री फाग महोत्सव समिति की ओर से चतुर्थ फाग महोत्सव का आयोजन यहां श्रीराम वाटिका में किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ वीणा म्यूजिक के प्रसिद्ध कलाकारों द्वारा साज वंदना से हुआ। उसके बाद सोहनलाल तंवर एंड पार्टी की ओर से प्रसिद्ध धमाल घूंघट खोल दे…गौरी म्हारी…., चिरमी, घूघरी, मेहंदी, बटुआ, गींदड़ नृत्य, भवई नृत्य, मयूर नृत्य, घूमर, अग्नि नृत्य सहित एक से बढ़कर एक रंगारंग राजस्थानी लोक संस्कृति से जुड़ी प्रस्तुतियां देकर उपस्थित दर्शकों को खूब तालियां बटोरी। इसके अलावा राधा कृष्ण की झांकी व फूलों की होली विशेष आकर्षण का केंद्र रही। Rajasthan News</p>
<p style="text-align:justify;">हजारों दर्शकों से भरे पंडाल में विधायक अमित चाचाण ने अपने संबोधन में श्रीफाग महोत्सव समिति की सराहना करते हुये कहा कि ऐसे आयोजनों की बदौलत ही हमारी लोक संस्कृति जिंदा है। उन्होंने समय समय पर इस प्रकार के आयोजन की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इससे हमारी युवा पीढ़ी अपने तीज त्योहरों से जुड़ी रहती है। आयोजन समिति के एडवोकेट बाबूलाल चाचाण व नवरत्न चाचाण ने सभी का आभार प्रकट करते हुए कहा कि राजस्थानी लोक संस्कृति को बढ़ावा देने के उद्देश्य के साथ गत चार वर्षों से इस प्रकार के आयोजन करवाए जा रहे हैं। उन्होंने भरोसा दिलाया कि जनभावनाओं के अनुरूप भविष्य में भी ऐसे कार्यक्रम करवाए जाते रहेंगे।</p>
<h3>तीज त्यौहारों और परंपराओं को जीवंत रखने का उद्देश्य</h3>
<p style="text-align:justify;">कार्यक्रम संयोजक रोहताश सैनी ने बताया कि श्रीफाग महोत्सव समिति की ओर से अपने तीज त्यौहारों और परंपराओं को जीवंत रखने के उद्देश्य से सांस्कृतिक कार्यक्रम करवाए जा रहे हैं। उन्होंने उपस्थित दर्शकों और मातृशक्ति का आभार जताते हुए। भविष्य में भी इस तरह के आयोजन करवाने का भरोसा दिलाया। मंच संचालन किशन चाचाण ने किया।</p>
<p style="text-align:justify;">कार्यक्रम में नगर पालिकाध्यक्ष मोनिका खटोतिया, कृषि उपज मंडी समिति के निवर्तमान अध्यक्ष बलवीर सुथार, श्रवण तंवर, आयोजन समिति के विकास चाचाण, हरि मित्रुका, जेपी चाचाण, अमित थिरानी, बिहारीलाल चोमवाल, संजय कलानी, सन्नी चाचाण, पवन हिसारिया, अनिल सरिया, प्रदीप सेवग, बालकृष्ण व्यास, प्रदीप वर्मा, अमित भूकरके वाला, संतोष कंकर, मोनू चाचाण, दीपक सरावगी, मुरली अग्रवाल, शशि मोदी, बसंत तोषनीवाल, दयाराम शीलू सहित अनेक गणमान्य नागरिक मौजूद रहे। Rajasthan News</p>
<p><a title="ना धूप का डर, ना भूख की फिक्र! करते हैं बस अपने सतगुरु की रहमत का जिक्र!" href="http://10.0.0.122:1245/the-spirit-of-the-sewadaaron-of-budharwali-is-praiseworthy/">ना धूप का डर, ना भूख की फिक्र! करते हैं बस अपने सतगुरु की रहमत का जिक्र!</a></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/rajasthan/holi-of-flowers-here-was-the-center-of-special-attraction/article-55526</link>
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                <pubDate>Fri, 22 Mar 2024 12:49:06 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Holi 2024: अपने घर को होली के रंगों से बचाने के महत्वपूर्ण टिप्स!</title>
                                    <description><![CDATA[Holi 2024: नई दिल्ली। वसंत आया, अपने साथ रंगों का त्योहार होली लाया हर इंसान इस त्यौहार को मनाने के लिए शामिल बड़ा ही उत्सुक है। लेकिन ये उत्सुकता आपके घर को खराब कर सकती है। यदि आपके साथ भी ऐसा होता है कि होली के समय में आपका घर खराब हो जाता है तो अपने […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/home-and-family/important-tips-to-protect-your-home-from-holi-colors/article-55478"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2024-03/holi-2024.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Holi 2024:<strong> नई दिल्ली।</strong> वसंत आया, अपने साथ रंगों का त्योहार होली लाया हर इंसान इस त्यौहार को मनाने के लिए शामिल बड़ा ही उत्सुक है। लेकिन ये उत्सुकता आपके घर को खराब कर सकती है। यदि आपके साथ भी ऐसा होता है कि होली के समय में आपका घर खराब हो जाता है तो अपने घर को होली के रंगों से बचाने के लिए कुछ टिप्स यहां शेयर किए जा रहे हैं, जिन्हें याद रखना बड़ा ही जरूरी है।</p>
<p style="text-align:justify;">आपकी जानकारीके लिए बता दें कि होली के रंग, यदि जैविक नहीं हैं, तो आपके घर के अंदरूनी और बाहरी हिस्से को गंभीर नुकसान पहुंचा सकते हैं और स्थायी दाग छोड़ सकते हैं। आइए कुछ बुनियादी तरीकों पर गौर करें जिनसे आप अपने घर के विभिन्न हिस्सों की सुरक्षा कर सकते हैं और बिना किसी परेशानी के त्योहार मना सकते हैं:</p>
<h4 style="text-align:justify;">होली के रंगों से ऐसे बचा सकते हैं अपना घर | Holi 2024</h4>
<p style="text-align:justify;">आप चाहे होली बाहर खेल रहे हो या अंदर, जब बात होली के दाग की आती है तो दीवारें सबसे ज्यादा असुरक्षित होती हैं। इनसे बचने के लिए आप उत्सव से पहले एंटी-स्टेन वार्निश लगवा सकते हैं। जश्न मनाते समय अपने फर्नीचर को दीवारों से सटाएं क्योंकि इससे यह सुनिश्चित होता है कि लोग गलती से भी दीवारों को न छूएं। यदि रंग फिर भी निकल जाते हैं, तो तुरंत कार्रवाई करें और उन्हें ब्लीच और पानी के हल्के संयोजन से पोंछ लें।</p>
<p style="text-align:justify;">बाहरी दीवारों के लिए, आप उत्सव स्थल के संपर्क में आने वाले हिस्से को प्लास्टिक से ढक सकते हैं। हालाँकि यह प्रक्रिया समय लेने वाली है, लेकिन यह दीवारों को होली के दागों से बचाने का एक अचूक तरीका है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">घर को फर्नीचर को होली के रंगों से बचाएं | Holi 2024</h3>
<p style="text-align:justify;">होली के दिन अपने फर्नीचर को या तो प्लास्टिक शीट से या पुरानी इस्तेमाल की गई चादरों से ढककर रखें जिन्हें आप बाद में फेंक देंगे। यदि आपके पास हल्के रंग का सामान है, तो होली के दाग की संभावना से हर कीमत पर बचना सबसे अच्छा है। यदि आपके फर्नीचर पर दाग लग जाता है, तो आप होली के बाद स्पंज या कपड़े की मदद से दागों पर हाइड्रोजन पेरोक्साइड लगाकर साफ कर सकते हैं। इसके अलावा, यदि आपके पास नाजुक और मूल्यवान चीजें हैं जो उत्सव के रास्ते में आ सकती हैं, तो उन्हें घर के एक कमरे में सुरक्षित रूप से रख दें।</p>
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<h3 style="text-align:justify;">बाथरूम को कैसे बचाएं रंगों से</h3>
<p style="text-align:justify;">होली खेलने के दौरान बाथरूम में होली के रंगों की बाढ़ देखी जाती है। नहाते समय फिक्स्चर को सीधे छूने से बचें और इसके बजाय प्लास्टिक का दस्ताना पहनें। वैकल्पिक रूप से, आप नहाने से पहले फिक्स्चर पर पेट्रोलियम जेली या तेल लगा सकते हैं ताकि रंग आसानी से निकल जाएं। इसके अलावा, अपने आप को टब में धोना बेहतर है ताकि फर्श पर दाग न लगे और आपको होली के बाद सफाई करने में समय और मेहनत बर्बाद न करनी पड़े।</p>
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<h3 style="text-align:justify;">फर्श को होली के रंगों से कैसे बचाएं?</h3>
<p style="text-align:justify;">अगर आपके घर में संगमरमर या हल्के रंग का फर्श है, तो अंदर खेलने से बचना सबसे अच्छा है। कुछ रंग फर्श पर स्थायी निशान छोड़ सकते हैं, जो आंखों के लिए हानिकारक हो सकते हैं और बाद में इन्हें साफ करने में काफी खर्च करना पड़ सकता है। समारोह के बाद आते समय बाथरूम तक रास्ता बनाने के लिए अखबार या प्लास्टिक शीट का उपयोग करें।</p>
<h3 style="text-align:justify;">घर के दरवाजे होली के रंगों से कैसे बचाएं ?</h3>
<p style="text-align:justify;">अक्सर देखा जाता है कि घर के मुख्य दरवाजे पर होली के दाग लग जाते हैं, खासकर दरवाजे के हैंडल के आसपास। उत्सव से लौटने पर लोग बिना सोचे-समझे इसे छू लेते हैं। इससे बचने के लिए, निकलने से पहले तारपीन तेल या पेट्रोलियम जेली का एक कोट लगाएं ताकि नॉब अवांछित दाग से मुक्त रहे। इन युक्तियों के साथ, आप आसानी से अपने घर को होली के रंगों से बचा सकते हैं और उत्सव में ऐसे डूब सकते हैं जैसे कल हो ही नहीं!</p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>घर परिवार</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 21 Mar 2024 11:01:54 +0530</pubDate>
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