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                <title>कब हुआ सिनेमा का आविष्कार</title>
                                    <description><![CDATA[चलचित्र यानी सिनेमा के आविष्कार का श्रेय किसी एक व्यक्ति को नहीं जाता। इसके विकास मे कई आविष्कारकों का योगदान रहा है। लेकिन इतना अवश्य है कि चलचित्र के जन्म का श्रेय किसी हद तक लुमिये बधुओं (फ्रांस) को दिया जा सकता है। हालाकि लुमिये बधुओं से पहले एडीसन, माइब्रिज तथा फ्रीज ग्रीन आदि अनेक […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/when-was-the-invention-of-cinema/article-37372"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-09/history-of-cinema.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">चलचित्र यानी सिनेमा के आविष्कार का श्रेय किसी एक व्यक्ति को नहीं जाता। इसके विकास मे कई आविष्कारकों का योगदान रहा है। लेकिन इतना अवश्य है कि चलचित्र के जन्म का श्रेय किसी हद तक लुमिये बधुओं (फ्रांस) को दिया जा सकता है। हालाकि लुमिये बधुओं से पहले एडीसन, माइब्रिज तथा फ्रीज ग्रीन आदि अनेक वैज्ञानिको ने सिनेमा क्षेत्र मे कार्य किया। चलचित्र या सिनेमा की कहानी 1830 से आरंभ होती है। अनेक व्यक्तियों ने ऐसे घूमने वाले चक्र बनाए जिनके ऊपर चित्र बने होते थे और जब उन्हे घुमाया जाता था तो ये चित्र चलते-फिरते प्रतीत होते थे। सिनेमा का यह आरम्भिक रूप था।</p>
<p style="text-align:justify;">इसके बाद अमेरिका के प्रसिद्ध वैज्ञानिक एडीसन ने काइनेटो स्कोप नामक एक यंत्र बनाया। इसमे लगाने के लिए उसने 158 प्लेटो पर विभिन्न क्रमबद्ध मुद्राओ के फोटो खींचे, जो एक प्रणय-दृष्य से सबंधित थे। गत्ते पर छपे इन चित्रों की एक रील बनाकर इस यंत्र मे फिट की गयी। एक गोल छेद में से जब ये चित्र तेजी से एक-एक कर दर्शक की दृष्टि से गुजरते, तो इनमे गति के कारण सजीवता आ जाती और स्त्री-पुरुष चलते-फिरते नजर आते।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>किसने किया सिनेमा का आविष्कार</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">1880-90 में ब्रिस्टल के रहने वाले विलियम फ्रीज ग्रीन नामक अंग्रेज फोटोग्राफर ने चलते फिरते चित्रों पर अनेक प्रयोग किए। उन्होंने चित्रों के लिए प्रकाशग्राही इमल्सन के लेप वाले सेलुलाइड फिल्मों का इस्तेमालकिया। उन्होंने एक फर्म से अपना कैमरा और प्रोजेक्टर बनवाया और एक पार्क में जाकर कैमरे से कुछ फुट लम्बी एक फिल्म तैयार की। उसे अपनी प्रयोगशाला में धोकर उन्होने जब फिल्म से प्रोजेक्टर पर चढ़ाकर पर्दे पर देखा, तो वे खुशी से उछल पडे।</p>
<p style="text-align:justify;">पर्दे पर बच्चे स्त्री-पुरुष, घोड़े आदि दौडतें भागते नजर आ रहे थे जैसे वे सचमुच के हो। परन्तु विलियम फ्रीज ग्रीन को अपने आविष्कार का विकास करने और पेटेंट कराने के लिए तत्काल धन न मिल सका। आर्थिक दबाव बढने से उन्होंने अपना ध्यान इस सिनेमा प्रोजेक्टर से हटा लिया ओर दूसरे कार्यो में लग गये।</p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>रंगमंच</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 03 Sep 2022 12:21:29 +0530</pubDate>
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                <title>21 जून के बाद धीरे-धीरे होंगे दिन छोटे</title>
                                    <description><![CDATA[उज्जैन (एजेंसी)। खगोलीय घटना के तहत प्रतिवर्ष 21 जून के बाद दिन जीरे धीरे छोटे होने लगेंगे और आगामी 23 सितंबर को दिन एवं रात बराबर होंगे। शासकीय जीवाजी वेधशाला के अधीक्षक डॉ. राजेंद्र प्रसाद गुप्त ने बताया कि पृथ्वी के सूर्य के चारों ओर परिभ्रमण के कारण सूर्य 21 जून को उत्तरी गोलार्ध में […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/other-news/days-will-gradually-shorten-after-june-21/article-34702"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-06/day.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>उज्जैन (एजेंसी)।</strong> खगोलीय घटना के तहत प्रतिवर्ष 21 जून के बाद दिन जीरे धीरे छोटे होने लगेंगे और आगामी 23 सितंबर को दिन एवं रात बराबर होंगे। शासकीय जीवाजी वेधशाला के अधीक्षक डॉ. राजेंद्र प्रसाद गुप्त ने बताया कि पृथ्वी के सूर्य के चारों ओर परिभ्रमण के कारण सूर्य 21 जून को उत्तरी गोलार्ध में कर्क रेखा पर लंबवत स्थिति में होता है। कर्क रेखा की स्थिति 23 डिग्री 26 मिनट उत्तरी अक्षांश पर है और 21 जून को सूर्य की क्रांति 23 डिग्री 26 मिनट 14 सेकंड उत्तर होगी। उन्होंने बताया कि 21 जून को सूर्य अपने अधिकतम उत्तरी बिंदु कर्क रेखा पर होने के कारण उत्तरी गोलार्ध में दिन सबसे बड़ा तथा रात्रि सबसे छोटी होती है और 21 जून के बाद सूर्य की दक्षिण की ओर गति दृष्टिगोचर होगी।</p>
<p style="text-align:justify;">इसे दक्षिणायन प्रारंभ कहते हैं। इस प्रकार दिन सबसे बड़ा 13 घंटे 34 मिनिट तथा रात्रि 10 घंटे 26 मिनट की होगी। उन्होंने बताया कि उज्जैन कर्क रेखा के नजदीक स्थित है और 21 जून को दोपहर 12 बजकर 28 मिनट पर सूर्य की किरणें लंबवत होने के कारण परछाई शुरू हो जाएगी। उन्होंने बताया कि वेधशाला में इस खगोलीय घटना को दिखाने की व्यवस्था की गई है। धूप होने पर दोपहर 12 बजकर 28 मिनट पर शंकु यंत्र के माध्यम से परछाई को गायब (शुन्य) होते प्रत्यक्ष देख सकेंगे।</p>
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                                                            <category>अन्य खबरें</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 20 Jun 2022 18:35:52 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>कभी अंग्रेजों की शान रहा ‘डाक बंगला’ अब खंडहर</title>
                                    <description><![CDATA[सन् 1880 में दौरान ‘कर’ वसूलने व अंग्रेज गवर्नर के ठहरने के लिए किया गया था निर्माण बंगले के निर्माण में मसूरी इंटों और सागौन की लकड़ी का किया गया था प्रयोग जाखल(सच कहूँ/तरसेम सिंह)। किसी दौर में अंग्रेजों की शान रहा ‘डाक बंगला’ आज बदहाली के दौर से गुजर रहा है। सन् 1880 के […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/sach-kahoon-special-story/this-dak-bungalow-once-the-pride-of-the-british-is-now-in-ruins/article-26366"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-08/dak-bungalow.jpg" alt=""></a><br /><h4 style="text-align:center;"><strong>सन् 1880 में दौरान ‘कर’ वसूलने व अंग्रेज गवर्नर के ठहरने के लिए किया गया था निर्माण </strong></h4>
<ul>
<li style="text-align:justify;"><strong>बंगले के निर्माण में मसूरी इंटों और सागौन की लकड़ी का किया गया था प्रयोग</strong></li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>जाखल(सच कहूँ/तरसेम सिंह)।</strong> किसी दौर में अंग्रेजों की शान रहा ‘डाक बंगला’ आज बदहाली के दौर से गुजर रहा है। सन् 1880 के दौरान ‘कर’ वसूलने व अंग्रेज गवर्नर के ठहरने के लिए भव्य तरीके से इस बंगले का निर्माण कराया गया था। बंगले का निर्माण मसूरी इंटो थे करवाया गया है, जिसकी दीवारें लगभग 2 फुट चौड़ी हैं। बंगले में अधिकतर सागौन की लकड़ी का प्रयोग किया गया था। हर तरफ हरियाली व फुलवारी थी। आजादी के बाद जब वक्त बदला तो बंगले की हालत भी बदलने लगे। आज यह डाक बंगला पूरी तरह से जर्जर व बदहाल हो चुका है। आलम यह है कि जर्जर हो चुके बंगले के चारों ओर प्रशासन ने दीवार तक का भी निर्माण नहीं करवाया ताकि अतिक्रमण न हो सके।</p>
<h4 style="text-align:justify;">धारसूल में स्थित है यह बंगला</h4>
<p style="text-align:justify;">हम बात कर रहे हैं जिला फतेहाबाद की तहसील टोहाना में पड़ते गांव धारसूल के पास बने डाक बंगले की। इस बंगले की कहानी करीब 120 साल पुरानी है। उस दौर में भारत में अंग्रेजी हुकूमत थी। उस वक्त अंग्रेज गवर्नर यहां पर कर वसूली करने के लिए आते थे। टोहाना, जाखल, रतिया, फतेहाबाद, कुलां समेत तमाम गांवों से उनको कर वसूलने में दिक्कत आती थी, क्योंकि गवर्नर का यहां पर ठहरने का कोई स्थान नहीं था। जिस कारण अंग्रेज शासन काल में गवर्नर के ठहरने के लिए इस बंगले का निर्माण कराया गया था। बंगला इतना खूबसूरत था कि लोग इसे देखने आते थे। हर तरफ हरियारी व फुलवारी थी सागौन की लकड़ी से पूरी नक्काशी की गई थी। आजादी के बाद जब अंग्रेज भारत से चले गए तो पीडब्ल्यूडी विभाग के अधीन कर दिया गया था।</p>
<h4 style="text-align:justify;">रख-रखाव के अभाव में हुआ जर्जर</h4>
<p style="text-align:justify;">अंग्रेजों के शासन काल में बना यह डाक बंगला आज नव निर्माण को तरस रहा है। न तो सांसद ने कभी ध्यान दिया न ही विधायक ने। अनदेखी के कारण भवन की छत, खिड़की, दरवाजे, कुर्सी, मेज, सोफे, शीशे से लेकर हर चीज रियासतकालीन चीजें टूट कर खंडहर में तब्दील हो चुकी हैं। लोगों की मांग है कि हरियाणा सरकार की ओर से इसके रख-रखाव के लिए अलग से बजट जारी कर इस डाक बंगला को एक धरोहर के रूप में बनाया जाना चाहिए।</p>
<h4 style="text-align:justify;">क्या कहते है सरपंच हरपाल सिंह</h4>
<p style="text-align:justify;">इस बारे में ग्राम सरपंच हरपाल सिंह ने बताया कि यह डाक बंगला पंचायत के अधीन है। पंचायत की ओर से यहां संग्रहालय बनाने की योजना है। इसके लिए सांसद और विधायक की ओर से ग्रांट की मांग है। ताकि यह संग्रहालय बनाने की योजना को अमलीजामा पहनाया जा सके। उन्होंने बताया कि यहां पर संग्रहालय बनाने के बाद आसपास क्षेत्र भर से ग्रामीण इलाकों में पड़ी प्राचीन चीजों को संग्रहालय किया जाएगा वही इसमें स्विमिंग के लिए खुदाई करवाई गई है। ताकि यह नहर किनारे बने बंगले की देखरेख भी रह सके और क्षेत्रीय ग्रामीण बच्चे भी यहां स्विमिंग पुल में तैराकी सीख सके। उन्होंने बताया कि इसके रख-रखाव के लिए कभी सरकार की तरफ से कोई योजना नहीं बनाई और ना ही ग्रांट उपलब्ध हुई।</p>
<p style="text-align:justify;"><span style="color:#0000ff;">इस डाक बंगले के बारे में उन्हें जानकारी नहीं है। यह कहां पर है स्थित है इसकी जिला अधिकारियों से पूरी लोकेशन की जानकारी मंगवाई जाएगी। उसके बाद ऐसी धरोहर को संभालने के लिए जो भी प्रावधान होगा जरूर अमल में लाया जाएगा।</span><br />
<span style="color:#0000ff;">                                                                                                <em><strong>-सुनीता दुग्गल, सांसद, सरसा।</strong></em></span></p>
<p> </p>
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                                                            <category>सच कहूँ विशेष स्टोरी</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 29 Aug 2021 16:45:39 +0530</pubDate>
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                <title>रानी रुदाबाई जिसने सुल्तान बेघारा के सीने को फाड़ा</title>
                                    <description><![CDATA[गुजरात से कर्णावती के राजा थे, राणा वीर सिंह वाघेला (सोलंकी), इस राज्य ने कई तुर्क हमले झेले थे पर कामयाबी किसी को नहीं मिली, सुल्तान बेघारा ने सन् 1497 पाटण राज्य पर हमला किया राणा वीर सिंह वाघेला के पराक्रम के सामने सुल्तान बेघारा की 40000 से अधिक संख्या की फौज 2 घंटे से […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/inspiration/rani-rudabai-who-killed-sultan-beghara/article-18577"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-09/rani-rudabai.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">गुजरात से कर्णावती के राजा थे, राणा वीर सिंह वाघेला (सोलंकी), इस राज्य ने कई तुर्क हमले झेले थे पर कामयाबी किसी को नहीं मिली, सुल्तान बेघारा ने सन् 1497 पाटण राज्य पर हमला किया राणा वीर सिंह वाघेला के पराक्रम के सामने सुल्तान बेघारा की 40000 से अधिक संख्या की फौज 2 घंटे से ज्यादा टिक नहीं पाई, सुल्तान बेघारा जान बचाकर भागा। असल में कहते हंै सुलतान बेघारा की नजर रानी रुदाबाई पर थी, वो रानी को युद्ध में जीतकर अपने हरम में रखना चाहता था। सुलतान ने कुछ वक्त बाद फिर हमला किया। राज्य का एक साहूकार इस बार सुलतान बेघारा से जा मिला, और राज्य की सारी गुप्त सूचनाएं सुलतान को दे दी, इस बार युद्ध में राणा वीर सिंह वाघेला को सुलतान ने छल से हरा दिया।</p>
<p style="text-align:justify;">जिससे राणा वीर सिंह उस युद्ध में वीरगति को प्राप्त हुए। सुलतान बेघारा रानी रुदाबाई को लाने हेतु राणा जी के महल की ओर 10000 से अधिक लश्कर लेकर पंहुचा, रानी रूदा बाई के पास शाह ने अपने दूत के जरिये निकाह प्रस्ताव रखा। रानी रुदाबाई ने महल के ऊपर छावणी बनाई थी जिसमें 2500 धनुर्धारी वीरांगनाये थी, जो रानी रूदा बाई का इशारा पाते ही लश्कर पर हमला करने को तैयार थी, सुलतान बेघारा को महल द्वार के अन्दर आने का न्यौता दिया गया। सुल्तान बेघारा जैसे ही वो दुर्ग के अंदर आया राणी ने समय न गंवाते हुए सुल्तान बेघारा के सीने में खंजर उतार दिया और उधर छावनी से तीरों की वर्षा होने लगी, जिससे शाह का लश्कर बचकर वापस नहीं जा पाया।</p>
<p style="text-align:justify;">सुलतान बेघारा का सीना फाड़कर रानी रुदाबाई ने कलेजा निकाल कर कर्णावती शहर के बीचोबीच लटकवा दिया। और उसके सर को धड से अलग करके पाटण राज्य के बीच टंगवा दिया साथ ही यह चेतावनी भी दी की कोई भी आक्रांता भारतवर्ष पर या हिन्दू नारी पर बुरी नजर डालेगा तो उसका यही हाल होगा। इस युद्ध के बाद रानी रुदाबाई ने राजपाठ सुरक्षित हाथों में सौंपकर कर जल समाधि ले ली, ताकि कोई भी तुर्क आक्रांता उन्हें अपवित्र न कर पाए। ये देश नमन करता है रानी रुदाबाई को ऐसे ही कोई क्षत्रिय और क्षत्राणी नहीं होता, हमारे पूर्वज और विरांगानाये ऐसा कर्म कर क्षत्रिय वंश का मान रखा है और धर्म बचाया है।</p>
<p> </p>
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                                                            <category>प्रेरणास्रोत</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 20 Sep 2020 09:57:04 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Supreme Court : उम्मीदवारों के खिलाफ लंबित आपराधिक मामलों की जानकारी दे राजनीतिक दल</title>
                                    <description><![CDATA[सुप्रीम कोर्ट ने राजनीति के अपराधीकरण पर चिंता जताते हुए कहा कि पिछले 4 आम चुनावों में दागी उम्मीदवारों की संख्या बढ़ी है।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/detail-candidates-criminal-history-on-sites-social-media-supreme-court/article-13011"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-02/nirbhaya-case-supreme-court-dismisses-akshays-curative-petition.jpg" alt=""></a><br /><h3>प्रत्याशियों के खिलाफ दायर मामलों की जानकारी अगले 72 घंटे में जाए |<strong>Supreme Court</strong></h3>
<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली(एजेंसी)।</strong> सुप्रीम कोर्ट <strong>(Supreme Court)</strong> ने राजनीति के अपराधीकरण पर चिंता जताते हुए कहा कि पिछले 4 आम चुनावों में दागी उम्मीदवारों की संख्या बढ़ी है। कोर्ट ने गुरुवार को चुनाव सुधारों को लेकर अहम फैसले में कहा- सभी राजनीतिक दल अपनी वेबसाइट पर आपराधिक छवि वाले उम्मीदवारों के चयन की वजह बताएं और उनके खिलाफ लंबित मामलों की जानकारी अपलोड करें। साथ ही प्रत्याशियों के खिलाफ दायर मामलों की जानकारी अगले 72 घंटे में चुनाव आयोग को दी जाए।</p>
<h2>राष्ट्रीय अखबारों में प्रकाशित कराएं और फेसबुक-ट्विटर पर भी करें साझा</h2>
<p style="text-align:justify;">जस्टिस एफ नरीमन की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि आदेश का पालन न होने पर चुनाव आयोग अपने अधिकार के मुताबिक राजनीतिक दलों के खिलाफ कार्रवाई करे। साथ ही पार्टियां प्रत्याशियों के आपराधिक मामलों की जानकारी क्षेत्रीय-राष्ट्रीय अखबारों में प्रकाशित कराएं और फेसबुक-ट्विटर पर भी साझा करें। भाजपा नेता और वकील अश्वनी उपाध्याय ने राजनीति में अपराधीकरण रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी।</p>
<h2 style="text-align:justify;">सुप्रीम कोर्ट ने 2 माह पहले भी आदेश दिया था</h2>
<p style="text-align:justify;">सुप्रीम कोर्ट ने 25 नवंबर को चुनाव आयोग को निर्देश दिया था कि वह आपराधिक रिकॉर्ड वाले लोगों को चुनाव लड़ने से रोकने के लिए आदेश पारित करे। ताकि तीन महीने के अंदर राजनीतिक दलों को आपराधिक पृष्ठभूमि वाले नेताओं को टिकट देने से रोका जा सके। तब सीजेआई एसए बोबडे और जस्टिस बीआर गवई की बेंच ने अश्विनी उपाध्याय की जनहित याचिका पर विचार करने से इनकार करते हुए यह आदेश दिया था। उपाध्याय की मांग थी कि पार्टियों को अपराधिक छवि वाले लोगों को चुनाव के टिकट देने से रोका जाए। साथ ही उम्मीदवार का आपराधिक रिकॉर्ड अखबारों में प्रकाशित कराने का आदेश दिया जाए।</p>
<h2 style="text-align:justify;">जनहित याचिका में क्या था ?</h2>
<ul>
<li style="text-align:justify;"><strong>प्रकाशित आंकड़ों के अनुसार भारत में राजनीति के अपराधीकरण में बढ़ोतरी हुई है।</strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>और 24% सांसदों के खिलाफ आपराधिक मामले लंबित हैं। </strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>2009 के लोकसभा चुनाव में 15% प्रत्याशियों  ने आपराधिक मामलों की जानकारी दी थी। </strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>इन प्रत्याशियों में से 610 या 8% के खिलाफ गंभीर अपराध के मामले दर्ज थे।</strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong> इसी तरह, 2014 में 8,163 प्रत्याशियों में से 1398 ने आपराधिक मामलों की जानकारी दी थी ।</strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>और इसमें से 889 के खिलाफ गंभीर अपराध के मामले लंबित थे।</strong></li>
</ul>
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<p>Detail, Candidates, Criminal, History, Sites, Social, Media, Supreme Court</p>
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                                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 13 Feb 2020 12:11:38 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>केजरीवाल के सामने पिछली जीत का इतिहास दोहराने की चुनौती</title>
                                    <description><![CDATA[पिछले आम चुनाव में पंजाब में चार सीटें जीतने वाली आप इस बार एक पर ही सिमट गई। केजरीवाल की पार्टी में उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया को छोड़ दिया जाए तो संभवत: ऐसा कोई नेता नहीं है जिसकी पूरी दिल्ली पर मजबूत पकड़ नजर आती हो ।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/kejriwal-has-a-challenge-to-repeat-the-history-of-previous-victories/article-12429"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-01/delhi-assembly-elections.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:center;">दिल्ली विधानसभा चुनाव: केजरीवाल का जादू इस बार चलेगा या नहीं इस पर पूरे देश की निगाहें</h2>
<h2 style="text-align:center;">(Delhi Assembly Elections 2020)</h2>
<ul>
<li style="text-align:justify;">
<h3>राजनीतिक पंडितों का मानना- पिछला करिश्मा दोहराना मुश्किल</h3>
<h3></h3>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h3>दिल्ली में आठ फरवरी को मतदान और 11 फरवरी को मतगणना होगी</h3>
</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)।</strong> अगले माह होने वाले (Delhi Assembly Elections 2020) दिल्ली विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी(आप) के राष्ट्रीय संयोजक एवं मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के समक्ष अपना सबसे मजबूत किला बचाने की प्रबल चुनौती है। पिछले विधानसभा चुनाव में दिल्ली विधानसभा की 70 में से 67 सीटें जीतने वाले केजरीवाल का जादू इस बार चलेगा या नहीं इस पर पूरे देश की निगाहें हैं। केजरीवाल अपने पांच वर्ष के कार्यकाल के दौरान विशेषकर स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में किए गए कार्यों को गिनाते हुए इस बार भी पूरे आत्मविश्वास में हैं जबकि राजनीतिक पंडितों का मानना है कि पिछला करिश्मा दोहराना मुश्किल नजर आ रहा है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">जब भाजपा तीन पर सिमटी थी</h3>
<p style="text-align:justify;">वर्ष 2013 के दिल्ली विधानसभा चुनाव से कुछ समय पहले ही ‘आप’ का गठन हुआ था और उस चुनाव में दिल्ली में पहली बार त्रिकोणीय संघर्ष हुआ जिसमें 15 वर्ष से सत्ता पर काबिज कांग्रेस 70 में से केवल आठ सीटें जीत पाई जबकि भारतीय जनता पार्टी(भाजपा) सरकार बनाने से केवल चार कदम दूर अर्थात 32 सीटों पर अटक गयी। ‘आप’ को 28 सीटें मिली और शेष दो अन्य के खाते में रहीं। भाजपा को सत्ता से दूर रखने के प्रयास में कांग्रेस ने ‘आप’ को समर्थन दिया और केजरीवाल ने सरकार बनाई।</p>
<ul>
<li style="text-align:justify;">लोकपाल को लेकर दोनों पार्टियों के बीच ठन गई और केजरीवाल ने 49 दिन पुरानी सरकार से इस्तीफा दे दिया ।</li>
<li style="text-align:justify;">इसके बाद दिल्ली में राष्ट्रपति शासन लगा ।</li>
<li style="text-align:justify;"> फरवरी 2015 में ‘आप’ने सभी राजनीतिक पंडितों के अनुमानों को झुठलाते हुए 70 में से 67 सीटें जीतीं।</li>
<li style="text-align:justify;">भाजपा तीन पर सिमट गई जबकि कांग्रेस की झोली पूरी तरह खाली रह गई ।</li>
</ul>
<h3 style="text-align:justify;">यह चुनाव का दारोमदार पूरी तरह से केजरीवाल के कंधों पर</h3>
<ul>
<li style="text-align:justify;">दिल्ली में 2015 ‘आप’ को मिली भारी जीत के समय केजरीवाल के साथ कई दिग्गज नेता थे</li>
<li style="text-align:justify;">किंतु सत्ता में आने के बाद वे एक एक करके किनारे कर दिए गए ।</li>
<li style="text-align:justify;">इनमें योगेंद्र यादव , प्रशांत भूषण और आनंद कुमार प्रमुख थे।</li>
<li style="text-align:justify;">पार्टी के एक अन्य प्रमुख चेहरा कुमार विश्वास पार्टी में तो हैं किंतु एक तरह से बनवास ही भुगत रहे हैं ।</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;">‘आप’ ने दिल्ली विधान सभा चुनाव और 2014-2019 के आम चुनावों के अलावा इस दौरान विभिन्न राज्य विधानसभा चुनावों में भी हिस्सा लिया। पंजाब विधानसभा को छोड़ दिया जाए तो उसकी झोली खाली ही रही बल्कि उसके बड़ी संख्या में उम्मीदवारों की जमानत भी जब्त हुई । पिछले आम चुनाव में पंजाब में चार सीटें जीतने वाली आप इस बार एक पर ही सिमट गई। केजरीवाल की पार्टी में उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया को छोड़ दिया जाए तो संभवत: ऐसा कोई नेता नहीं है जिसकी पूरी दिल्ली पर मजबूत पकड़ नजर आती हो ।</p>
<ul>
<li style="text-align:justify;">इस विधानसभा चुनाव में अपनी पार्टी को जीत दिलाने का दारोमदार पूरी तरह से केजरीवाल के कंधों पर ही है ।</li>
</ul>
<h3 style="text-align:justify;">21 वर्ष से भाजपा सत्ता से बाहर (Delhi Assembly Elections 2020)</h3>
<p style="text-align:justify;">भाजपा 21 वर्ष से दिल्ली की सत्ता से बाहर है और वह इस बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की छवि तथाहाल ही में 1731 कच्ची कालोनियों को नियमित करने के केंद्र सरकार के फैसले को लेकर अपना मजबूत दावा ठोंकने की बात कर रही है। पार्टी का कहना है कि पिछले विधानसभा चुनाव के बाद दिल्ली में तीनों नगर निगमों के चुनाव में राजधानी की जनता ने ‘आप’ को नकार दिया ।</p>
<ul>
<li style="text-align:justify;"> इस बार लोकसभा चुनाव में उसकी स्थिति पिछले आम चुनाव से भी बदतर हुई।</li>
<li style="text-align:justify;">पार्टी कांग्रेस की सक्रियता का लाभ मिलने की उम्मीद कर रही है ।</li>
</ul>
<h3 style="text-align:justify;">कांग्रेस को उम्मीद इस बार बनेगी उसकी सरकार</h3>
<p style="text-align:justify;">कांग्रेस ने हाल ही में अपने पुराने नेता सुभाष चोपड़ा को कमान सौंपी है और वह सभी पुराने नेताओं को एकजुट कर पूरी सक्रियता से जुटे हैं और पार्टी का घोषणापत्र आने से पहले ही सत्ता में आने पर लोक लुभावने वादे करने से गुरेज नहीं कर रहे हैं। राजनीतिक पंडितों का मानना है कि यदि कांग्रेस के वोट प्रतिशत में अच्छा इजाफा होता है तो केजरीवाल के लिए मुश्किलें बढ़ सकती हैं।  पिछले साल मई में हुए आम चुनाव भाजपा ने दिल्ली की सातों सीटें जीतीं थी  और कांग्रेस पांच में दूसरे नंबर पर रही थी ।</p>
<ul>
<li style="text-align:justify;">वर्ष 2014 के आम चुनाव में सभी सातों सीटों पर दूसरे नंबर पर रहने वाली ‘आप’ इस बार केवल दो पर ही दूसरे स्थान पर रही ।</li>
<li style="text-align:justify;">पिछले साल हुए आम चुनाव में कुल पड़े वोटों में से आधे से अधिक 56.50 प्रतिशत भाजपा की झोली में पड़े</li>
<li style="text-align:justify;">जबकि ‘आप’ को केवल 18.10 प्रतिशत ही मत मिले।</li>
<li style="text-align:justify;">आम चुनाव में भाजपा 70 में से 65 विधानसभा सीटों पर आगे रही थी, शेष पांच पर कांग्रेस आगे रही थी।</li>
</ul>
<p> </p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 12 Jan 2020 16:36:23 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>इतिहास से वर्तमान व भविष्य की ओर बढ़ते संबंध</title>
                                    <description><![CDATA[भारत के बेहद खास रिश्ते वाले देशों में ‘बांग्लादेश’ का नाम अग्रणी है, वह भी बांग्लादेश के जन्म के समय से ही। रिश्ते की मजबूती का यह क्रम अनवरत बढ़ा है और यह इस बात से ही समझा जा सकता है कि किस तरह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रोटोकॉल तोड़कर बांग्लादेशी समकक्ष की आगवानी की […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/moving-from-history-to-present-and-future/article-6089"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-10/moving-from-history-to-present-and-future-copy.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">भारत के बेहद खास रिश्ते वाले देशों में ‘बांग्लादेश’ का नाम अग्रणी है, वह भी बांग्लादेश के जन्म के समय से ही। रिश्ते की मजबूती का यह क्रम अनवरत बढ़ा है और यह इस बात से ही समझा जा सकता है कि किस तरह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रोटोकॉल तोड़कर बांग्लादेशी समकक्ष की आगवानी की है। वस्तुत: इंदिरा गांधी ने जिस प्रकार बांग्लादेश को तत्कालीन पश्चिमी पाकिस्तान के अत्याचारों से मुक्त कराया तो एक तरह से यह रिश्ता स्वाभाविक ही था। चूंकि चीन, पाकिस्तान जैसे देश भारत के साथ दूसरे पड़ोसियों के रिश्तों को नुक्सान पहुंचाने की कोशिश करते रहे हैं, ऐसे में बांग्लादेश के साथ भारत का कूटनीतिक संबंध और भी खास हो जाता है। इसी को ध्यान में रखते हुए भारत लगातार बांग्लादेश से अपना संबंध मजबूत करने में दो कदम आगे बढ़कर पहल करता रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">1947 में हुए भारत बंटवारे की कटु यादें भला किसे याद नहीं होंगी। दुनिया में उतना भीषण कत्ल-ए-आम संभवत: दूसरी जगह न हुआ होगा। पर उसका नतीजा क्या निकला, जिस धर्म के नाम पर मोहम्मद अली जिन्ना ने पाकिस्तान मांगा था, वह तीन दशक भी संयुक्त रूप में पूरा न कर सका और बिखर गया। आखिर, वह जुड़ा रहता भी तो किस प्रकार? चूंकि, पूर्वी पाकिस्तान (वर्तमान में बांग्लादेश) कहे जाने वाले देश की संस्कृति, भाषा पश्चिमी पाकिस्तान से सर्वथा भिन्न थी। ऊपर से वहां के लोगों के साथ पश्चिमी पाकिस्तान द्वारा किया जाने वाला भेदभाव ताबूत में आखिरी कील साबित हुआ। बांग्लादेशियों के अधिकारों को कुचलने में पाकिस्तान की सेना ने जो जुल्म ढाये, उससे समस्त विश्व की आँखें नम हो उठी थीं। आज के समय में हम सीरिया में गृहयुद्ध की जो हालत देख रहे हैं, उससे कम दुरूह हालात न थे उस समय! अंतत: उस अत्याचार से जब भारत पर दुष्प्रभाव पडऩे लगा तब इंदिरा गाँधी के रूप में भारतीय राजनीतिक नेतृत्व ने कठोरतम निर्णय लिया और फिर उदय हुआ बांग्लादेश का। जाहिर तौर पर बांग्लादेश के जन्म के समय से ही भारत का रिश्ता बेहद करीबी रहा है, जो लगातार आगे बढ़ता जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">बहुत कम लोगों को पता होगा कि शेख हसीना से भारत का बेहद करीबी जुड़ाव रहा है। 15 अगस्त 1975 को जब बांग्लादेश में सेना के गुट ने शेख मुजीबुर रहमान के घर पर हमला किया, तो शेख हसीना के परिवार के अधिकांश सदस्य मौत के घाट उतार दिए गए थे। उनके पिता और बांग्लादेश की आजादी के नायक शेख मुजीबुर रहमान का शरीर गोलियों से छलनी कर दिया गया था। किसी तरह शेख हसीना और उनकी बहन बच गयी थीं, पर उन्हें कहीं और राजनीतिक शरण नहीं मिल सकी। फिर इंदिरा गाँधी ने कई सालों तक शेख हसीना और उनके पति डॉक्टर वाजेद को सुरक्षा और शरण प्रदान की। बाद में स्थिति में सुधार होने के बाद शेख हसीना 17 मई, 1981 को अपने वतन लौट सकी थीं, जहाँ लाखों बांग्लादेशियों ने उनका स्वागत किया और फिर वह अपने पिता का रूतबा हासिल करने में सफल भी रहीं। पिछले दिनों भारत और बांग्लादेश के बीच हुए ‘परमाणु समझौतेझ् को दक्षिण एशिया की राजनीति में बड़े बदलाव के तौर पर देखा गया था।</p>
<p style="text-align:justify;">सच कहा जाए तो भारत और दूसरे दक्षिण एशियाई देश ड्रैगन की दोहरी चाल को बखूबी समझते हैं। वह जानते हैं सच्चे मित्र भारत जैसी स्वाभाविक दोस्ती चीन से कभी हो ही नहीं सकती, इसलिए भारत को कूटनीति की बिसात पर सधी चाल से चलना होगा और संतुलन बनाकर चीन की दोस्ती के दांव को दक्षिण एशियाई क्षेत्र में मजबूती से उजागर करना होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि दोनों देशों के बीच लैंड बाउंड्री एग्रीमेंट के सफल होने के बाद समुद्री मामलों के सुलझने की उम्मीद बढ़ गई है। हालांकि, ये तो एक छोटी सी झलक है, क्योंकि भारत और बांग्लादेश के बीच कई सारे समझौते हो रहे हैं, जिनका प्रारूप और प्रभाव आने वाले समय में और भी बेहतर ढंग से नजऱ आएगा। वैश्विक परिदृश्य में दो देशों के संबंधों की अहमियत बार बार प्रमाणित हुई है। वहीं बात जब बांग्लादेश जैसे महत्वपूर्ण पड़ोसी की हो तो फिर यह अहमियत और भी बढ़ जाती है। निश्चित रूप से दोनों देशों की आने वाली पीढिय़ां पीएम नरेंद्र मोदी और बांग्लादेशी पीएम शेख हसीना का धन्यवाद करेंगी, जिनके सकारात्मक दृष्टिकोण से दक्षिण एशियाई देशों के विकास का नया और चौड़ा मार्ग प्रशस्त हुआ है। <em><strong>जगजीत शर्मा</strong></em></p>
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                                                            <category>लेख</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/moving-from-history-to-present-and-future/article-6089</link>
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                <pubDate>Mon, 01 Oct 2018 12:42:14 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>इतिहास: आज के दिन यात्री विमान को आतंकियों ने बनाया था निशाना</title>
                                    <description><![CDATA[नयी दिल्ली()। इतिहास(History) में 23 सितम्बर की तारीख आतंक की एक दुखद घटना के साथ जुड़ी है। दरअसल 1983 में आज ही के दिन पाकिस्तान के कराची हवाई अड्डे से अबु धाबी के लिए निकला गल्फ एयर का एक यात्री विमान आतंकवादियों ने उड़ा दिया। विमान में 105 यात्रियों के अलावा चालक दल के सात […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/history-today-passenger-plane-targeted-terrorists/article-6030"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-09/history.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>नयी दिल्ली()।</strong> इतिहास(<strong>History</strong>) में 23 सितम्बर की तारीख आतंक की एक दुखद घटना के साथ जुड़ी है। दरअसल 1983 में आज ही के दिन पाकिस्तान के कराची हवाई अड्डे से अबु धाबी के लिए निकला गल्फ एयर का एक यात्री विमान आतंकवादियों ने उड़ा दिया। विमान में 105 यात्रियों के अलावा चालक दल के सात सदस्य सवार थे। हादसे में सभी लोगों की मौत हो गई। यात्रियों में ज्यादातर पाकिस्तानी थे।</p>
<p>वह भी 23 सितंबर का ही दिन था, जब 1976 में ब्रितानी नौसेना के एक जहाज में आग लगने से आठ लोगों की मौत हो गई। एचएमएस ग्लासगो नाम के इस जहाज पर मरम्मत का काम चल रहा था और एक आक्सीजन टैंक में रिसाव होने से आग लग गई।</p>
<p>23 सितंबर की तारीख में इतिहास में दर्ज अन्य महत्वपूर्ण घटनाओं का सिलसिलेवार ब्यौरा इस प्रकार है:-</p>
<p>1739 : रूस और तुर्की ने बेलग्राद शांति संधि पर हस्ताक्षर किए।<br />
1857 : रूस का जंगी जहाज लेफोर्ट फिनलैंड की खाड़ी में तूफान में घिरकर लापता, 826 लोगों की मौत।<br />
1879 : रिचर्ड रोड्स ने सुनने में मदद करने वाली शुरूआती मशीन बनाई, इसे<br />
आडियोफोन नाम दिया गया।<br />
1955 : पाकिस्तान ने बगदाद की संधि पर दस्तख्त किए।<br />
1961 : पहली फिल्म जो टेलीविजन श्रृंखला बनी- ह्यह्यहाउ टू मैरी ए मिलियनर।ह्णह्ण 1976 : ब्रिटेन की नौसेना के जहाज में आग लगने से आठ लोगों की मौत।<br />
1976 : सोयूज-22 पृथ्वी पर वापस लौटा।<br />
1983 : कराची से अबु धाबी के लिए उड़ा गल्फ एयर का विमान आतंकियों ने उड़ाया।<br />
1986 : अमेरिकी कांग्रेस ने गुलाब को अमेरिका का राष्ट्रीय फूल चुना।</p>
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                                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 23 Sep 2018 17:20:12 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अंतरिक्ष में एक और इतिहास रचने को तैयार ISRO</title>
                                    <description><![CDATA[16 सितम्बर को भारतीय राकेट श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केन्द्र से भरेगा  उड़ान नई दिल्ली (सच कहूँ)। अंतरिक्ष विज्ञान में लगातार नए आयाम गढ़ता भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) जल्द ही अंतरिक्ष के क्षेत्र में एक और इतिहास रचने को तैयार है। इसरो की यह पूर्ण रूप से व्यावसायिक उड़ान होगी। इसके साथ कोई […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/international/isro-ready-to-create-another-history-in-space/article-5913"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-09/isro.jpg" alt=""></a><br /><h2>16 सितम्बर को भारतीय राकेट श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केन्द्र से भरेगा  उड़ान</h2>
<p><strong>नई दिल्ली (सच कहूँ)।</strong> अंतरिक्ष विज्ञान में लगातार नए आयाम गढ़ता भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) जल्द ही अंतरिक्ष के क्षेत्र में एक और इतिहास रचने को तैयार है। इसरो की यह पूर्ण रूप से व्यावसायिक उड़ान होगी। इसके साथ कोई भी भारतीय उपग्रह नहीं भेजा जाएगा। इसकी शुरूआत 16 सितम्बर 2018 को होगी जब भारतीय राकेट श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केन्द्र से 2 ब्रिटिश उपग्रहों के साथ उड़ान भरेगा। इस कामयाबी के साथ ही भारत उन देशों की श्रेणी में शामिल हो जाएगा जिसके पास विदेशी उपग्रहों को अंतरिक्ष में स्थापित करने या भेजने की अपनी तकनीक मौजूद है। इसरो अपने ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान पी.एस.एल.वी. सी.-42 से दो ब्रिटिश उपग्रह नोवासार और एस 1.4 को धरती की कक्षा में स्थापित करेगा।</p>
<ul>
<li>16 सितंबर, 2018 को इसरो अपने ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान PSLV C-42 दो ब्रिट्रिश उपग्रह- नोवासार और एस 1- 4 को धरती की कक्षा में स्‍थापित करेगा।</li>
<li> 450 किलोग्राम वजन के इन उपग्रहों का निर्माण ब्रिट्रिश कंपनी सर्रे सैटेलाइट टेक्नोलॉजी लिमिटेड (एसएसटीएल) ने किया है।</li>
<li>
इस बाबत भारतीय अंतरिक्ष अनुसन्धान संगठन की वाणिज्यिक इकाई एन्ट्रिक्‍स कोर्पोरेशन लिमिटेड से इसके प्रक्षेपण का करार हुआ था।</li>
<li>उपग्रह नावासार एक तकनीक प्रदर्शन उपग्रह मिशन है। इसमें कम लागत वाला एस बैंड सिंथेटिक रडार भेजा जाएगा। इसे धरती से 580 किलोमीटर ऊपर सूर्य की समकालीन कक्षा (एसएसओ) में स्‍थापति किया जाएगा।</li>
<li> उपग्रह एसन 1-4 एक भू-अवलाकेन उपग्रह है, जो एक मीटर से भी छोटी वस्‍तु को अंतरिक्ष से देख सकता है। ये उपग्रह एसएसटीएल के अंतरिक्ष से भू अवलोकन की क्षमता को बढ़ाएगा।</li>
<li>– इसरो की यह पूर्ण रूप से व्यावसायिक उड़ान होगी। खास बात यह है कि इसके साथ कोई भी भारतीय उपग्रह नहीं भेजा जाएगा।</li>
</ul>
<h2>11 वर्ष पूर्व छोटे उपग्रहों के लिए इसरो की उड़ान</h2>
<p>इससे पहले 23 अप्रैल, 2007 को इसरो ने पहली बार व्‍यावसायिक उद्देश्‍य के लिए राकेट लांच किया था। लेकिन PSLV C-A ने इटली के खगोलिय उपग्रह AGILE को प्रक्षेपित किया था। इसके बाद 10 जुलाई 2015 को इसरो ने एक और उपलब्धि हासिल की जब उसने PSLV C-28 से पांच ब्रिट्रिश उपग्रहों को एक साथ प्रक्षेपित किया, जिसका कुल वजन एक हजार 439 किलोग्राम था। इसरो अब तक 28 देशों के 237 विदेशी उपग्रहों को प्रक्षेपण कर चुका है। इसके साथ इसरो लगातार अपनी क्षमता और तकनीक को बढ़ाने में जुटा है, ताकि इसके जरिए ज्‍यादा से ज्‍यादा वाणिज्यिक उपग्रहों को लांच कर सके और उसे बड़ी मात्रा में विदेशी मुद्रा कमाई हो सके।</p>
<h2>क्‍या है एन्ट्रिक्‍स कॉरपोरेशन लिमिटेड</h2>
<p>एन्ट्रिक्‍स कोर्पोरेशन लिमिटेड को सितंबर 1992 में अंतिरक्ष उत्‍पादों, तकनीकी परामर्श सेवाओं और इसरो की ओर से विकसित वाणिज्यिक एवं औद्योगिक संभावनाओं और प्रचार-प्रसार के लिए सरकार के स्‍वामित्‍व वाली एक प्राइवेट कंपनी लिमिटड के रूप में स्‍थापित किया गया था। इसका एक और प्रमुख उद्देश्‍य भारत में अंतरिक्ष से जुड़ी औद्योगिक क्षमताओं के विकास को आगे बढ़ाना भी है। इसमें कोई दो राय नहीं कि एन्ट्रिक्‍स अपने काम को बखूबी अंजाम भी दे रही है, लेकिन वैश्विक बाजार में जारी प्रतिस्पर्धा के बाजार के लिहाज से इसे अभी बहुत जोर लगाना होगा।</p>
<p>दरअसल, इसरो ने आने वा‍ले करीब एक साल के लिए कुछ बड़े कदमों पर काम करना शुरू कर दिया है। इस कड़ी में पहला बड़ा दिन 16 सितंबर होने जा रहा है, जब इसरो PSLV C42 की लांचिंग करेगा। इस लांच के साथ ही इसरो के उस मिशन की शुरुआत हो जाएगी, जिसमें वह अगले सात महीनों में 19 मिशन लांच करेगा। फ‍िलहाल 16 सिंतबर का यह लांच पूरी तरह से वाणिज्यिक होगा।</p>
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<p> </p>
<p> </p>
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                                                            <category>अंतरराष्ट्रीय ख़बरें</category>
                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 13 Sep 2018 10:41:32 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>जापान ने रचा इतिहास, कोलंबिया को दी शिकस्त</title>
                                    <description><![CDATA[दक्षिण अमेरिकी टीम पर जीत दर्ज करने का इतिहास रचा सारांस्क (एजेंसी)। विश्व रैंकिंग में 61वें नंबर की टीम जापान ने एशियाई झंडा बुलंद रखते हुए 16वीं रैंकिंग के और स्टार खिलाड़ियों से सुसज्जित कोलंबिया को मंगलवार को मोरडोविया एरेना में ग्रुप एच में 2-1 से हराकर तहलका मचा दिया और पहली बार फीफा विश्व […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/sports/japan-created-history/article-4324"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-06/19june33r.jpg" alt=""></a><br /><h1>दक्षिण अमेरिकी टीम पर जीत दर्ज करने का इतिहास रचा</h1>
<p><strong>सारांस्क (एजेंसी)।</strong></p>
<p style="text-align:justify;">विश्व रैंकिंग में 61वें नंबर की टीम जापान ने एशियाई झंडा बुलंद रखते हुए 16वीं रैंकिंग के और स्टार खिलाड़ियों से सुसज्जित कोलंबिया को मंगलवार को मोरडोविया एरेना में ग्रुप एच में 2-1 से हराकर तहलका मचा दिया और पहली बार फीफा विश्व कप फुटबॉल टूनार्मेंट में किसी दक्षिण अमेरिकी टीम पर जीत दर्ज करने का इतिहास रच दिया। जापान इस तरह पहली एशियाई टीम बन गयी है जिसने किसी दक्षिण अमेरिकी टीम को हराया है।</p>
<p style="text-align:justify;">जापान ने इसके साथ ही कोलंबिया से 2014 विश्वकप में ग्रुप चरण में 1-4 से मिली हार का बदला भी चुका लिया। विश्व कप में एशियाई टीमों ने दक्षिण अमेरिकी टीमों के खिलाफ 17 मैचों में सिर्फ तीन ड्रा खेले थे। लेकिन चार बार की एशियाई चैंपियन जापान ने इतिहास रच डाला।</p>
<p style="text-align:justify;">वर्ष 2014 के गोल्डन बूट विजेता जेम्स रोड्रिग्ज और शीर्ष स्कोरर राडामेल फाल्काओ जैसे खिलाड़ियों से सुसज्जित कोलंबियाई टीम को इस हार से गहरा झटका लगा। जापानी टीम ने इस जीत के बाद पूरे स्टेडियम का चक्कर लगाकर दर्शकों का धन्यवाद किया। कोलंबिया तीसरे मिनट में अपने एक खिलाड़ी को बाहर भेजे जाने के बाद से शेष समय में 10 खिलाड़ियों के साथ खेली जिसका परिणाम उसे हार के रूप में भुगतना पड़ा।</p>
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<p> </p>
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                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>खेल</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/sports/japan-created-history/article-4324</link>
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                <pubDate>Tue, 19 Jun 2018 20:48:36 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>भारतीय आर्यों के रक्ष पर सवार इतिहास</title>
                                    <description><![CDATA[इतिहास तथ्य और घटना के सत्य पर आधारित होता है। इसलिए इसकी साहित्य की तरह व्याख्या संभव, नहीं है। विचारधारा के चश्मे से इतिहास को देखना उसके मूल से खिलवाड़ है। गोया, अब उत्तर-प्रदेश के बागपत जिले के सिनौली गांव में भारतीय पुरातत्व विभाग ने जो उत्खनन किया है और इस उत्खनन में जो रामायण […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/riding-history-on-the-defense-of-indian-aryans/article-4173"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-06/ayrns.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">इतिहास तथ्य और घटना के सत्य पर आधारित होता है। इसलिए इसकी साहित्य की तरह व्याख्या संभव, नहीं है। विचारधारा के चश्मे से इतिहास को देखना उसके मूल से खिलवाड़ है। गोया, अब उत्तर-प्रदेश के बागपत जिले के सिनौली गांव में भारतीय पुरातत्व विभाग ने जो उत्खनन किया है और इस उत्खनन में जो रामायण और महाभारत में वर्णित रथों जैसे तीन रथ निकले हैं, इसके मूल से यदि पूर्वग्रही मानसिकता से छेड़छाड़ की गई तो यह इतिहास और भारतीय धरोहर की गरिमा को झुठलाना होगा।</p>
<p style="text-align:justify;">क्योंकि ये नए तथ्य अंग्रेजों और भारतीय वामपंथियों द्वारा लिखी उस अवधारणा को सर्वथा नकार रहे हैं, जिसमें बार-बार दावा किया जाता रहा है कि कथित आर्य घोड़ों से जूते रथों पर सवार होकर पश्चिम से भारत आए थे। इन आर्यों ने भारत पर आक्रमण कर यहां की पुरातन सभ्यता और संस्कृति को बुरी तरह रौंदा और भरतखंड के मालिक बन बैठे।</p>
<p style="text-align:justify;">किंतु अब सिनौली के मिट्टी के नीचे दबे जो प्रमाण सामने आए है, उनसे निश्चित हुआ है कि आर्यों के आक्रमण की कथित अवधारणा से भी करीब तीन हजार ईसा पूर्व हमारे पूर्वज रथ बना चुके थे। उस समय के राज-परिवार के लोग इनका आवागमन के लिए उपयोग करते थे। इस उत्खनन से हमारी वे प्राचीन मान्यताएं पुष्ट हो रही हैं, जो ऋृग्वेद, उपनिषद, रामायण और महाभारत में दर्ज होने के बावजूद नकारी जाती रही हैं। गोया, अब अंग्रेजों के लिखे इतिहास को बदलने का समय आ गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">एससआई का जो दल डॉ संजय मंजुल के नेतृत्व में खुदाई में लगा है, उनका दावा है कि इन साक्ष्यों से महाभारत काल निर्धारण और हड़प्पा-युग में घोड़ों के अस्तित्व को स्वीकारने की उम्मीद बढ़ गई है। इस उत्खनन से पहले तक मेसोपोटामिया, जॉर्जिया और ग्रीक सभ्यता में रथ के प्रमाण मिले हैं, लेकिन अब हम कह सकते हैं कि इन सभ्ताओं की तरह भारत के लोग भी रथों का निर्माण व प्रयोग करते थे। दरअसल अंग्रेजों ने अभी तक यह धारणा गढ़ी हुई है कि आर्यों ने 1500-2000 वर्ष ईसा पूर्व भारत पर हमला किया। वे रथों से आए और यहां की सभ्यता को नेस्तनाबूद करते हुए नई सभ्यता की नींव रखी।</p>
<p style="text-align:justify;">इनका दावा था कि इस समय तक भारत में बैलगाड़ी तो थी, किंतु घोड़ा-गाड़ी नहीं थी। अलबत्ता अब इस खुदाई में मिले प्रमाणों ने यह सिद्ध कर दिया है कि भारत में ईसा पूर्व 5000 साल पहले से ही रथ उपयोग में लाए जाते रहे थे। इस खोज के पूर्व पुरातत्वविद् बी लाल पुरातत्वीय-अनुवांशिक की आधार पर यह स्पष्ट कर चुके हैं कि हमारे डीएनए के गुण-सूत्रों में पिछले 12 हजार वर्ष से कोई परिवर्तन नहीं हुआ है। दिसंबर 2007 में भी सिनौली में एक साथ 160 नरकंकाल मिले थे।</p>
<p style="text-align:justify;">इनकी कॉर्बन डेटिंग से यह खुलासा हुआ था कि ये चार से पांच हजार वर्ष प्राचीन हैं। ऐसे में रथ के साथ कंकाल और ताबूतों का मिलना, अंग्रेजों की आर्य संबंधी अवधारणा को पलटने के ठोस प्रमाण हैं। गोया, अब भारतीय इतिहास लेखन में जो भूलें बरतीं गई हैं, उन्हें सुधारा जाना आवश्यक हो गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">सिनौली ऐसा महत्वपूर्ण स्थल है, जहां शुरू से ही घर की बुनियाद कुआं या अन्य कोई गड्ढा खोदने पर शिव, महिशासुर-मर्दिनी, शाकुंभरी और चामुंडा देवी की मिट्टी की मूर्तियां मिलती रही हैं। इसीलिए इस पूरे क्षेत्र को टेराकोटा क्षेत्र का दर्जा दिया हुआ है। इनके अलावा यहां सिंधु घाटी की सभ्यता से मेल खाते मिट्टी के बर्तन, कंकाल, आभूषण, मूठ वाली तलवार, तांबे की कीलें और कंघियां मिले हैं। यहां जो ताबूत मिले हैं, उन ताबूतों के ऊपर तांबे से बने पशुपतिनाथ के मुहर जैसे चिन्ह भी मिले हैं, जो भगवान शिव की मान्यता के प्रतीक हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">कुरु जनपद की राजधानी हस्तिनापुर गंगा के किनारे थी और महाभारत का युद्धस्थल कुरुक्षेत्र यमुना नदी के किनारे था। कुरूक्षेत्र के निकट ही करनाल, पानीपत और सोनीपत हैं। इनके निकट ही सिनौली का वह क्षेत्र है, जो जहां उत्खनन में रथ मिले हैं। इससे यह उम्मीद है कि मिले रथ व कंकाल महाभारतकालीन हो सकते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">बागपत का प्राचीन नाम वयाग्रप्रस्थ, सोनीपत का स्वर्णप्रस्थ, पानीपत का पर्णप्रस्थ और बरनावा का वाणार्वृत है। पांच में से ये ही वे चार गांव हैं, जो पांडवों ने दुर्योधन से मांगे थे, लेकिन दुर्योधन ने सुई की नोक के बराबर भी भूमि पांण्डवों को देने से मना कर दिया था। अंतत: इसकी परिणति महाभारत युद्ध के रूप में सामने आई।</p>
<p style="text-align:justify;">ऋृग्वेद के पहले मंडल के दूसरे अध्याय में स्पष्ट उल्लेख है कि अग्नि और जल के वेग से युक्त किया हुआ रथ बहुत दूर स्थित स्थानों पर भी तुरंत पहुंचता है। यानी वैदिक काल में ऐसे भी रथ थे, जो घोड़ों के अलावा अग्नि और जल की ऊर्जा से संचालित होते थे। इसे ही अश्व-शक्ति कहा गया, जो इंजन के आविष्कार के बाद होर्स पावर के नाम से जानी गई।</p>
<p style="text-align:justify;">इसी आध्याय के एक अन्य मंत्र में कहा गया है कि जैसे मनुष्य पहले कुंए को खोदकर उसके जल के उपयोग से संतुष्ट होता है, उसी तरह विद्वान लोग कलायंत्रों में अग्नि को जोड़कर उसकी सहायता से यंत्रों में जल को प्रवेश कराकर, उनको गतिमान कर अनेक कार्यों को सिद्ध करते हैं। वेदों में वर्णित इस वैज्ञानिकता को जब अंग्रेज मैकाले और जर्मन मैक्समूलर ने समझा तो वे हतप्रभ रह गए।</p>
<p style="text-align:justify;">वे जान गए कि भारत में यदि संस्कृत की महत्ता बनी रहती है और इसका प्रचार व विस्तार वैश्विक स्तर पर होता है तो ईसाई, धर्म और बाइबिल को खतरा उत्पन्न हो सकता है ? यूरोपियन ईसाई भी श्रेष्ठ धर्म के रूप में सनातन हिंदू धर्म और श्रेष्ठ भाषा के रूप में संस्कृत को अपना सकते हैं?</p>
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                                                            <category>लेख</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 15 Jun 2018 08:17:43 +0530</pubDate>
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                <title>जर्मनी के रास्ते की बाधा रहेगा इतिहास</title>
                                    <description><![CDATA[मॉस्को (एजेंसी)। गत चैंपियन जर्मनी को 14 जून से शुरु हो रहे फीफा फुटबाल विश्वकप में यदि अपना खिताब बरकरार रखना है तो उसे इतिहास की बाधा को पार करना होगा। विश्वकप का 1930 से अब तक का इतिहास गवाह है कि अब तक सिर्फ दो ही देश इटली और ब्राजील चैंपियन बनने के बाद अगले […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/sports/history-of-germany-will-be-obstructed/article-4123"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-06/germany.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>मॉस्को (एजेंसी)। </strong>गत चैंपियन जर्मनी को 14 जून से शुरु हो रहे फीफा फुटबाल विश्वकप में यदि अपना खिताब बरकरार रखना है तो उसे इतिहास की बाधा को पार करना होगा। विश्वकप का 1930 से अब तक का इतिहास गवाह है कि अब तक सिर्फ दो ही देश इटली और ब्राजील चैंपियन बनने के बाद अगले विश्वकप में अपना खिताब बरकरार रखने में कामयाब रहे हैं। इटली ने 1934 में खिताब जीता और इसे 1938 के विश्वकप में बरकरार रखा। ब्राजील 1958 में चैंपियन बना और फिर 1962 में उसने खिताब पर अपना कब्जा कायम रखा।</p>
<p style="text-align:justify;">जर्मनी ने पहली बार 1954 में खिताब जीता लेकिन 1958 के विश्वकप में उसे चौथा स्थान मिला। जर्मनी ने 1974 में दूसरी बार विश्वकप जीता लेकिन 1978 के विश्वकप में जर्मन टीम राउंड-8 में बाहर हो गई। जर्मनी ने 1990 में खिताब हासिल किया लेकिन 1994 में उसे क्वार्टर फाइनल में बाहर हो जाना पड़ा।</p>
<p style="text-align:justify;">जर्मनी ने 2014 में खिताब जीता और अब अपना खिताब बरकरार रखने के लिए उसे इतिहास को बदलना होगा। विश्वकप में पहली बार चैंपियन बनने का गौरव उरुग्वे ने 1930 में हासिल किया था जो पहला विश्वकप था, लेकिन 1934 में टीम ने विश्वकप में हिस्सा नहीं लिया। इटली 1934 और 1938 में चैंपियन बनी लेकिन 1950 में वह अपने खिताब का बचाव नहीं कर सकी और ग्रुप चरण में बाहर हो गई। वर्ष 1938 के बाद द्वितीय विश्वकप युद्ध के कारण 1942 और 1946 में विश्वकप का आयोजन नहीं हुआ था।</p>
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                                                            <category>खेल</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 12 Jun 2018 17:05:25 +0530</pubDate>
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