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                <title>Rising - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>Dearness: सब्जियों के तल्ख तेवर और बढ़ती महंगाई</title>
                                    <description><![CDATA[Dearness: सब्जियों के दाम इन दिनों सुर्खियां बटोर रहे हैं। टमाटर के साथ प्याज, अदरक, धनिया सहित अन्य सब्जियों के दाम आसमान छू रहे हैं। महंगाई की मार ने रसोई के बजट को पूरी तरह से बिगाड़ दिया है। सबसे ज्यादा दाम टमाटर के बढ़े हैं। लेकिन कुछ ही दिन पहले टमाटर के भाव तक […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/strong-attitude-of-vegetables-and-rising-inflation/article-49801"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-07/tomatoes.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Dearness: सब्जियों के दाम इन दिनों सुर्खियां बटोर रहे हैं। टमाटर के साथ प्याज, अदरक, धनिया सहित अन्य सब्जियों के दाम आसमान छू रहे हैं। महंगाई की मार ने रसोई के बजट को पूरी तरह से बिगाड़ दिया है। सबसे ज्यादा दाम टमाटर के बढ़े हैं। लेकिन कुछ ही दिन पहले टमाटर के भाव तक नहीं मिल पा रहे थे। वे टमाटर को फेंकने को मजबूर हो रहे थे। अब हालात उलट हैं, आपूर्ति का संकट हो गया है क्योंकि देश के कई हिस्सों में फसल खराब हो गई है। सामान्य तौर पर टमाटर कोल्ड स्टोरेज में रखने से इस तरह के आपूर्ति के संकट से बचा जा सकता है। लेकिन आखिर क्या टमाटर और अन्य सब्जियों को कोल्ड स्टोरेज में रखा जा सकता है अगर हां तो कितने समय तक?</p>
<p style="text-align:justify;">महंगी सब्जियों ने रसोई के बजट को बिगाड़ दिया है। बारिश के बाद हरी सब्जियों के भाव अचानक बढ़ गए हैं जिससे अब आम लोगों की थाली से हरी सब्जी दूर होती जा रही है। महंगाई का असर वैसे तो हर वर्ग पर पड़ रहा है, लेकिन सबसे अधिक असर गृहणियों पर पड़ रहा है। इस समय रसोई की अनेक वस्तुओं के भाव दोगुने हो गये हैं। ऐसी कोई वस्तु नहीं है जिसके भाव नहीं बढ़े हों। बढ़ती महंगाई पर गृहिणियों ने बताया कि पहले उन्हें रसोई खर्च में से कुछ बचत हो जाती थी, लेकिन अब उनकी बचत राशि भी रसोई पर खर्च हो रही है। बढ़ती महंगाई से रसोई में दूसरा कोई विकल्प भी नजर नहीं आ रहा है। मंहगाई को लेकर राजनीति भी खूब हो रही है। Dearness</p>
<p style="text-align:justify;">देश में हर साल मानसून की पहली बरसात के बाद ऐसा ही हाल होता है। रातों-रात भाव आसमान छूने लगते हैं। ऐसे में गरीब ही नहीं मध्यवर्गीय परिवार के किचन का बजट भी बिगड़ना स्वाभाविक ही है। लेकिन अहम व गंभीर सवाल यह है कि परंपरागत होने वाली इस समस्या का स्थाई निदान न सरकारें ढूंढ़ पायी हैं न मूल्य नियंत्रण समिति रोक पाई है। ऐसी स्थिति का सामना महीने भर तक पूर्व भंडारण से किया जा सकता है जिस पर सरकार को सोचना चाहिए।</p>
<h3>दिल्ली की कई सरकारों की जड़ें हिलाने का काम प्याज ने किया | Dearness</h3>
<p style="text-align:justify;">माना कि हर साल बारिश के मौसम में जल्दी खराब होने वाली सब्जियों के दाम मांग व आपूर्ति के असंतुलन से बढ़ते हैं। लेकिन इस बार टमाटर के दाम सौ रुपये से ज्यादा प्रति किलो तक पहुंचने से सब लोग चौंक उठे हैं। कभी प्याज को ये रुतबा हासिल था, जो न केवल आम लोगों की आंखों में आंसू ला देता था बल्कि सरकार गिराने-बनाने के खेल में शामिल रहता था। दिल्ली की कई सरकारों की जड़ें हिलाने का काम प्याज ने किया। कह सकते हैं कि तब मजबूत विपक्ष ने जनता के दर्द को राजनीतिक हथियार बनाने में कामयाबी पायी थी। अब जनता के लिये जरूरी सब्जियों की महंगाई को मुद्दा बनाने की कूवत व संवेदनशीलता विपक्षी दलों में नजर नहीं आती। कह सकते हैं कि या तो अब ये मुद्दे जनता की प्राथमिकता नहीं बन पा रहे हैं या विपक्षी दल जनता की मुश्किल को राजनीतिक अवसर में बदलने में नाकामयाब रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">हरियाणा-पंजाब आदि इलाकों में टमाटर की महंगाई की वजह यह बताई जा रही है कि स्थानीय टमाटर की फसल खत्म हो चुकी है और अन्य राज्यों से आने वाली नई फसल की आमद नहीं हो पाई है। मानसून में पहले कभी टमाटर के दामों में ऐसी आग कभी नहीं लगी। निस्संदेह, कुछ अन्य कारण भी इस अप्रत्याशित महंगाई के मूल में हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">इसमें कोई दो राय नहीं है कि टमाटर आदि कुछ सब्जियां ऐसी हैं, जिनका भंडारण देर तक संभव नहीं है। जल्दी फसल तैयार होती है और जल्दी खत्म भी हो जाती है। लेकिन अदरक, लहसुन व प्याज का मुनाफाखोरों के गोदामों में भंडारण कुछ समय तक रह सकता है। खरबूजे को देख खरबूजे के रंग बदलने के मुहावरे के अनुरूप टमाटर की महंगाई को देख अन्य सब्जियों व उनमें तड़का लगाने में काम आने वाले लहसुन, प्याज व अदरक के दाम उछलने लगे हैं।</p>
<h3>ज्यादातर सब्जियां गर्मी व बरसात से बर्बाद हो गईं | Dearness</h3>
<p style="text-align:justify;">निस्संदेह, रिटेल माफिया का बड़ा हाथ इस तरह की महंगाई को बढ़ाने में होता है। सब्जी कारोबारियों के अनुसार, सभी सब्जियां मंडी में आती हैं लेकिन पैदावार कम होने से कीमत में इजाफा हुआ है। गर्मी के कारण ज्यादातर सब्जियां झुलस गईं। खेतों में जो सब्जियां बची हैं, अब वे बरसात से बर्बाद हो रही हैं। इसी के चलते सब्जियों के भाव आसमान छू रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">टमाटर की बढ़ती कीमतों का फायदा किसानों को तो नहीं मिल रहा है, बल्कि इसका लाभ बिचौलिए उठा रहे हैं। जिसका कोई उचित कारण नहीं है। सब्जी का उत्पादन या बुआई का प्रबंधन भी समाधान का हिस्सा है। सरकार को किसानों को गर्मी में टमाटर बोने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए। भंडारण यानी कोल्ड स्टोरेज एक समाधान हो सकता है। कई सब्जियां कोल्ड स्टोरेज में रखी जा सकती हैं। वहीं पहले अगर टमाटर की बात करें तो पके टमाटर को 13 डिग्री सेल्सियस से कम तापमान पर कई दिनों तक रखा जा सकता है।</p>
<h3>75 वर्षो से सरकारी दावे खोखले | Dearness</h3>
<p style="text-align:justify;">सब्जियों के भंडारण का कार्य बहुत संवेदनशील है। जहां कुछ सब्जियों को फ्रिज में रखने से उन्हें कई दिनों तक चलाया जा सकता है तो वहीं प्याज जैसी कुछ सब्जियों को ठंडक से दूर सामान्य वातावरण में किंतु हवा और नमी से बचाने की जरूरत होती है, कई सब्जियों के लिए कोल्ड स्टोरेज से बेहतर समाधान फूड प्रोसेसिंग है जैसे टमाटर के भंडारण से बेहतर है उसकी प्यूरी तैयार कर कोल्ड स्टोरेज में रख ली जाए जो अगले सीजन तक चल सकती है।</p>
<p style="text-align:justify;">यह विडंबना ही है कि पिछले 75 वर्षो में सरकारी दावों के बीच हम किसानों को कोल्ड स्टोरेज की सुविधा उपलब्ध नहीं करा पाए हैं। वह खेत से फसल काटकर तुरंत बाजार में बेचने को मजबूर होता है क्योंकि सब्जियां जल्दी खराब हो जाती हैं। जिसका फायदा बिचौलिए और मुनाफाखोर उठाते हैं। किसान ज्यादा फसल उगाता है तो भी नुकसान में रहता है और कम उगाता है तो भी नुकसान में रहता है। अच्छी फसल का लाभ न किसान को मिलता है और न उपभोक्ता को ही। इसमें कोई दो राय नहीं है कि आसमान छूती सब्जियों की कीमतों के कारण रसोई का अर्थशास्त्र गड़बड़ा गया है। ऐसे समय में सरकार को सस्ती सब्जियों की दुकानें खोलकर उपभोक्ताओं को राहत पहुंचानी चाहिए। Dearness</p>
<p style="text-align:right;"><strong>संतोष कुमार भार्गव, वरिष्ठ लेखक एवं स्वतंत्र टिप्पणीकार (यह लेखक के अपने विचार हैं)</strong></p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="Heavy Rains: हरियाणा के 14 जिलों में भी बने बाढ़ जैसे हालात, अंबाला में बुलाई आर्मी व एनडीआरएफ टीम" href="http://10.0.0.122:1245/orange-alert-issued-in-punjab-haryana-chandigarh-heavy-rains/">Heavy Rains: हरियाणा के 14 जिलों में भी बने बाढ़ जैसे हालात, अंबाला में बुलाई आर्मी व एनडीआरएफ टीम</a></p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>लेख</category>
                                            <category>विचार</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 10 Jul 2023 15:19:44 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title> महंगाई : लगातार बढ़ रहे पैट्रोल-डीजल के दाम</title>
                                    <description><![CDATA[बिजनेस डेस्कः देश में पैट्रोल-डीजल की कीमत लगातार बढ़कर आज 2 महीने के ऊपरी स्तर तक पहुंच गई हैं। दिल्ली में आज पैट्रोल की कीमत 10 पैसे बढ़कर 77.23 रुपए प्रति लीटर पर पहुंच गई जो 8 जून के बाद सबसे अधिक भाव है। डीजल भी 14 पैसे महंगा होकर 68.71 रुपए प्रति लीटर बिक रहा […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/petrol-and-diesel-prices-rising/article-5311"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-08/petrol.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>बिजनेस डेस्कः </strong>देश में पैट्रोल-डीजल की कीमत लगातार बढ़कर आज 2 महीने के ऊपरी स्तर तक पहुंच गई हैं। दिल्ली में आज पैट्रोल की कीमत 10 पैसे बढ़कर 77.23 रुपए प्रति लीटर पर पहुंच गई जो 8 जून के बाद सबसे अधिक भाव है। डीजल भी 14 पैसे महंगा होकर 68.71 रुपए प्रति लीटर बिक रहा है। देश की सबसे बड़ी तेल विपणन कंपनी इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन से प्राप्त जानकारी के अनुसार, दिल्ली में पैट्रोल की कीमत 77.23 रुपए प्रति लीटर पर पहुंच गई है। मुंबई में यह 84.67 रुपए प्रति लीटर, कोलकाता में लिए 80.18 रुपए प्रति लीटर और चेन्नई में यह 80.23 रुपए प्रति लीटर मिल रहा है।</p>
<h2 style="text-align:left;">शहर पैट्रोल की कीमतें (रुपए में)</h2>
<ul>
<li style="text-align:left;">दिल्ली             — 77.23</li>
<li style="text-align:left;">मुंबई                —84.67</li>
<li style="text-align:left;">कोलकाता         —80.18</li>
<li style="text-align:left;">चेन्नई             — 80.23</li>
</ul>
<hr />
<h2>डीजल की कीमतें</h2>
<p>वहीं, डीजल की बात करें, तो दिल्ली में यह 68.71 रुपए प्रति लीटर हो गया है। मुंबई में इसकी कीमत 72.94 रुपए, कोलकाता में 71.55 रुपए और चेन्नई में 72.57 रुपए प्रति लीटर डीजल मिल रहा है।</p>
<p><strong>शहर डीजल की कीमतें (रुपए में)</strong></p>
<ul>
<li>दिल्ली           – 68.71</li>
<li>मुंबई              –72.94</li>
<li>कोलकाता      –71.55</li>
<li>चेन्नई            –72.57</li>
</ul>
<h2>पंजाब में पैट्रोल की कीमतें</h2>
<p>वहीं पंजाब की बात करें तो यहां जालंधर में आज पैट्रोल 82.44 रुपए प्रति लीटर बिक रहा है। बाकी शहरों की बात करे तो अमृतसर में पैट्रोल 83 रुपए, लुधियाना में 82.86 रुपए और पटियाला में 82.81 रुपए के दाम पर बिक रहा है।</p>
<p><strong>शहर पैट्रोल की कीमतें (रुपए में)</strong></p>
<ul>
<li>जालंधर            –82.44</li>
<li>अमृतसर           –83.00</li>
<li>लुधियाना         –82.86</li>
<li>पटियाला        –82.81</li>
</ul>
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                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>पंजाब</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/petrol-and-diesel-prices-rising/article-5311</link>
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                <pubDate>Sat, 11 Aug 2018 10:46:54 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>प्रतिदिन बढ़ रहा हादसों का ग्राफ, प्रशासन मौन</title>
                                    <description><![CDATA[समस्या: चौंकों में लगी लाईटें रहती हैं बंद, तेज रफ्तार वाहन चालकों की मनमर्जी जारी तरनतारन(राहुल शर्मा)। अमृतसर-राजस्थान नेशनल हाईवे जहां अक्सर ही तेज दफ्तार वाहन दैंत्य बन कर अनमोल जिंदगीयों को को मौत के मुंह में ले जा रहे है, जिसका सबसे बड़ा कारण वाहन चालकों की लापरवाही व प्रबंधों की कमी के कारण […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/punjab/graph-of-accidents-rising-daily/article-2897"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-08/accident-1.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:justify;">समस्या: चौंकों में लगी लाईटें रहती हैं बंद, तेज रफ्तार वाहन चालकों की मनमर्जी जारी</h2>
<p><strong>तरनतारन(राहुल शर्मा)।</strong> अमृतसर-राजस्थान नेशनल हाईवे जहां अक्सर ही तेज दफ्तार वाहन दैंत्य बन कर अनमोल जिंदगीयों को को मौत के मुंह में ले जा रहे है, जिसका सबसे बड़ा कारण वाहन चालकों की लापरवाही व प्रबंधों की कमी के कारण होता है लेकिन फिर भी प्रशासन इन सड़कीय दुर्घटनाओं पर अंकुश लगाने लिए कोई सार्थक कदम नही उठा रहा है। जिसकी ताजा मिसाल नेशनल हाईवे पर लगी ट्रैफिक सिग्नल लाईटों से मिलती है जो कि पिछले लंबे समय से बंद पड़ी है, जिस कारण वाहन चालक अपनी मनमर्जी से वाहन चलाकर ट्रैफिक नियमों की धज्जियां उड़ा रहे है।</p>
<h1>चौंक चौराहों पर नहीं है कोई ट्रैफिक कर्मचारी तैनात</h1>
<p style="text-align:justify;">तरनतारन को जिले का दर्जा प्राप्त होने के बावजूद भी यहां चौंकों में लगी ट्रैफिक सिग्नल लाईटें हमेशा खराब रहती है, जिस कारण यातायात अधिक होने के कारण कई बार लापरवाही के चलते सड़क हादसे घटित हो चुके है परंतु फिर भी यहां ट्रैफिक लाईटों का सिस्टम डगमगाया हुआ है। तरनतारन के बाठ चौंक बाईपास पर लगी ट्रैफिक लाईटें पिछले लंबे समय से बंद पड़ी है। जबकि जंडियाला गुरू बाईपास चौंक जोकि तरनतारन का प्रमुख्य चौंंक है में भी ट्रैफिक लाईटों ने अपना दम तोड़ दिया है।</p>
<p style="text-align:justify;">हालात यह है कि इन चौंक-चौराहों में ट्रैफिक पुलिस कर्मचारी भी तैनात नही होते, जिस कारण ट्रैफिक नियमों की उल्लंघना के साथ-साथ तेज रफ्तार ओवरलोड वाहन व तेज रफ्तार बसों में चौंक में इतनी रफ्तार से गुजरती है कि हर समय दुर्घटना का अंदेशा बना रहता है।</p>
<h1>लोगों में बना हुआ सहम का माहौल</h1>
<p>यही बस नहीं चार मार्गो को आपस में जोड़ने वाला अमृतसर-झब्बाल बाईपास चौंक में भी ट्रैफिक लाईटों का ना चलना किसी बड़ी दुर्घटना को अंजाम दे सकता है। भले ही इस चौंक में ट्रैफिक पुलिस के कुछ कर्मचारी तैनात होते है जो कि अपनी जान जोखिम में डालकर ट्रैफिक कन्ट्रौल करने का प्रयास करते है परंतु फिर भी लाईटें ना चलने के कारण यहां से गुजरने वाले लोगों में सहम का माहौल बना हुआ है।</p>
<p style="text-align:justify;">ट्रैफिक सिग्नल लाईटें बंद होने का मामला उनके ध्यान में आया है व इस बाबत संबंधित विभाग से रिपोर्ट लेकर ट्रैफिक लाईटें फिर से चालू करवा दी जाएंगी। उन्होंने कहा कि ट्रैफिक को सुचारू ढंग से चलाने के लिए पुलिस प्रशासन पूरी तरह से गंभीर है।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>डिप्टी कमिश्नर प्रदीप कुमार सभ्रवाल </strong></p>
<p style="text-align:justify;">इस संबंधी समाज सेवी डॉ. रमन गुप्ता ने कहा कि तरनतारन में ट्रैफिक व्यवस्था भगवान के आसरे ही चल रही है। क्योंकि चौंकों में लगी लाईटें जहां पिछले लंबे समय से बंद पड़ी है वहीं चौंकों में तैनात पुलिस कर्मचारियों की नफरी भी कम होती है, जिस कारण वाहन चालकों नियमों की धज्जियां उड़ा रहे है। डॉ. गुप्ता ने कहा कि हर रोड सड़की दुर्घटनाओं के कारण मौत के मुंह में जा रही अनमोल जिंदगीया के बावजूद भी प्रशासन कोई सबक नही ले रहा</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>पंजाब</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/punjab/graph-of-accidents-rising-daily/article-2897</link>
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                <pubDate>Fri, 04 Aug 2017 23:22:54 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>भटिंडा पट्टी में धान रोपाई ने की किसानों की जेब हलकी</title>
                                    <description><![CDATA[महंगाई बढ़ने से बढ़े मजदूरों के रेट, धान रोपाई का 22 सौ से 24 सौ तक रेट लेबर की कमी के कारण प्रवासी मजदूरों ने 200 से 300 रुपए तक बढ़ाए धान रोपाई के रेट भटिंडा (अशोक वर्मा)। भटिंडा क्षेत्र में इस बार धान की रोपाई के रेट बढ़ गए हैं और शुरू में ही खेतों […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/punjab/rate-of-workers-rising-by-rising-inflation/article-1349"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-06/dhan.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:justify;">महंगाई बढ़ने से बढ़े मजदूरों के रेट, धान रोपाई का 22 सौ से 24 सौ तक रेट</h2>
<ul>
<li style="text-align:justify;"><strong>लेबर की कमी के कारण प्रवासी मजदूरों ने 200 से 300 रुपए तक बढ़ाए धान रोपाई के रेट</strong></li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>भटिंडा (अशोक वर्मा)।</strong> भटिंडा क्षेत्र में इस बार धान की रोपाई के रेट बढ़ गए हैं और शुरू में ही खेतों में लेबर का संकट गहराने लगा है। 15 जून से एकदम खेतों में धान की रोपाई का काम तेज हो गया है। बहुत से किसानों ने 15 जून से पहले ही धान के लिए खेत तैयार कर लिए थे।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रवासी मजदूरों ने लेबर संकट होने के कारण रोपाई के रेट में 200 से 300 रुपए तक का विस्तार कर दिया है। गांव महराज के किसान सुरजीत सिंह ने बताया कि प्रवासी मजदूर पहले किसानों के खेतों में रहने का इंतजाम देखते हैं और उसके बाद भाव खोलते हैं। उन्होंने बताया कि इस बार लेबर का प्रति एकड़ 200 से 250 रुपए भाव बढ़ा है।</p>
<p style="text-align:justify;">इसी तरह ही गांव लैहरा के किसान गुरलाल सिंह ने बताया कि कम क्षेत्रफल वाले किसानों को लेबर का संकट है। उन्होंने बताया कि दूसरे प्रदेशों से आए मजदूर बड़े क्षेत्रफल को प्राथमिकता देते हंै। मौड़ इलाके के किसान लखवीर सिंह के अनुसार मौसम ठीक होने के कारण 15 जून को बिजली आठ घंटे मिली थी।</p>
<p style="text-align:justify;">उसके बाद में बंद हुई बिजली का किसानों की ओर से इंतजार किया जा रहा है। उन्होंने माना कि किसान पिछड़ने के डर से धान की रोपाई के लिए जल्दबाजी करने लगे हैं। गांव महराज के किसान सतवंत सिंह ने बताया कि लेबर को अधिक कीमत के अलावा राशन भी देना पड़ता है। उन्होंने बताया कि इस बार प्रवासी मजदूरों के नखरे काफी ऊंचे हो गए हैं और वह काफी सुविधाएं मांगने लगे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">गांव कोठा गुरू के किसान जसबीर सिंह का कहना था कि धान की रोपाई में ज्यादा देरी होने के कारण धान की फसल पकने में दिक्कत आती है। उसने बताया कि धान की फसल अक्तूबर तक पकती नहीं जिस कारण नमी की मात्रा भी बढ़ जाती है।</p>
<p style="text-align:justify;">किसान नेता जसबीर सिंह बुर्जसेमा का कहना था कि बिजली की कटौती के कारण कृषि लागत बढ़ेगी, जिसका किसानों को ही नुकसान होना है क्योंकि उनको महंगे भाव का डीजल जलाना पड़ेगा। उन्होंने मांग की कि सरकार 12 घंटे निर्विघ्न बिजली मुहैया करवाए जिससे किसानों को कोई दिक्कत न आए।</p>
<h2 style="text-align:justify;">धान की रोपाई निचला क्षेत्रफल घटा</h2>
<p style="text-align:justify;">जिला कृषि अधिकारी भटिंडा डॉ. गुरांदित्ता सिंह ने बताया कि भटिंडा जिले में इस बार 1लाख 25 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में धान की रोपाई का लक्ष्य माना गया है। उन्होंने बताया कि बते वर्ष 1लाख 45 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में धान की रोपाई की गई थी। उन्होंने बताया कि इस बार 20 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल धान, गवारे और अरहर नीचे से निकल गया है, जिसमें किसानों ने नरमे की बिजाई की है जो कि अच्छा शगुन है।</p>
<h2 style="text-align:justify;">महंगाई बढ़ने के कारण बढ़ी लेबर: सेवेवाला</h2>
<p style="text-align:justify;">पंजाब खेत मजदूर यूनियन के जनरल सचिव लछमण सिंह सेवेवाला ने कहा कि सब तरफ महंगाई बढ़ी है और इसी हिसाब से लेबर में वृद्धि हुई। उन्होंने कहा कि एकदम धान की रोपाई शुरू होने के कारण लेबर का संकट बनता है। उन्होंने कहा कि मांग और उपलब्धता के अंतर कारण भी भाव तेज होते हैं परंतु यह तेजी आरजी होती है। सेवेवाला ने कहा कि वास्तव में लेबर की अपेक्षा किसानी को कृषि वस्तुओं का महंगा होना ज्यादा प्रभावित करता है।</p>
<h2 style="text-align:justify;"> गांवों में 2800 रुपए तक भी प्रति एकड़ का ठेका</h2>
<p style="text-align:justify;">प्राप्त जानकारी के मुताबिक भटिंडा और मानसा जिलों में प्रति एकड़ 2500 से 2700 रुपए तक धान की रोपाई की लेबर ली जा रही है जबकि पिछले साल यह भाव 2200 से 2400 रुपए थे। वर्ष 2015 में भी भाव अधिक से अधिक 2400 और कम से कम 2200 रुपए थे। वर्ष 2014 दौरान धान की रोपाई 1800 से 2000 रुपए तक थी। कई गांवों में 2800 रुपए तक भी प्रति एकड़ का ठेका हुआ है।</p>
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                                                            <category>पंजाब</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 18 Jun 2017 00:09:55 +0530</pubDate>
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