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                <title>Care - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>खबरदार! हो जाएं होशियार !! कहीं जाती रहे आपकी सुनने की शक्ति!</title>
                                    <description><![CDATA[अजी सुनते हो! जल्दी से एक माचिस की तीली देना, कान में खुजली हो रही है, कान साफ करूंगी। शायद कान (Ear) में मैल जमा हो गया है। खबरदार! अगर आप भी कान (Ear) का मैल साफ करने या खुजली करने के लिए ऐसा करते हैं तो ये आपके लिए बहुत ही खतरनाक साबित हो […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/other-news/ear-care-tips/article-48049"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-05/pita-ji-ear-tips.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">अजी सुनते हो! जल्दी से एक माचिस की तीली देना, कान में खुजली हो रही है, कान साफ करूंगी। शायद कान (Ear) में मैल जमा हो गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">खबरदार! अगर आप भी कान (Ear) का मैल साफ करने या खुजली करने के लिए ऐसा करते हैं तो ये आपके लिए बहुत ही खतरनाक साबित हो सकता है। ऐसा करने से आपके कान का पर्दा फट सकता है, आपके कान से खून निकल सकता है, जिससे आपके सुनने की शक्ति भी जा सकती है। इसलिए सावधान हो जाइये, ऐसी लापरवाही से बचिए। आपके लिए क्या बेहतर तरीका हो सकता है कान साफ करने के लिए, या कैसे पता चलेगा कि आपके कान में मैल जमा हो गया है इन सभी के बारे में आपको आज बताने जा रहे हैं जिसके नियमित उपयोग से आप अपने कानों को सुरक्षित तरीके से साफ कर सकेंगे और कोई नुकसान भी नहीं होगा।</p>
<p style="text-align:justify;">कहते हैं साफ-सफाई करना एक अच्छी आदत है जिसे रोज करना चाहिए लेकिन कान की सफाई…इसे रोज नहीं किया जाना चाहिए, क्योंकि कान जो है, यह शरीर का एक बहुत ही संवेदनशील हिस्सा है। इसकी साफ सफाई को लेकर हमें ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है। क्योंकि इसकी समय पर सफाई नहीं की जाए तो इनमें मैल जमा हो सकता है जिसे ‘ईयर वैक्स’ का नाम दिया गया है। जो कभी कभार इतना कठोर हो जाता है कि इसकी सफाई करना असंभव सा हो जाता है जिसके कारण कानों में खुजली शुरू हो जाती है और जिससे हमारे सुनने की क्षमता कम हो जाती है। ऐसे में ये जरूरी नहीं है कि कानों की साफ सफाई करने के लिए गलत तरीके का इस्तेमाल किया जाए। कोई भी माचिस की तीली या हेयरपिन लेकर कान की सफाई करने लग जाएं। ऐसा करने से आपको गलत परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं। इसलिए आज आप जानेंगे कि कान की सफाई करने का आसान और सबसे सुरक्षित तरीका क्या है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">ये जानें:-</h3>
<p style="text-align:justify;">पहले तो आपको ये पता होना चाहिए कि कान में ज्यादा मैल होने के लक्षण क्या हैं-<br />
अगर आपके कान में ज्यादा मैल जमा हो जाता है तो आपको सुनाई कम देने लगेगा। दूसरा आपके कानों में सांय-सांय की आवाज आनी शुरू हो जाएगी या हल्की रिंगिंग होने लगेगी। ज्यादा मैल होने से कानों में खुजली शुरू हो सकती है और इरिटेशन हो सकती है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">अब ये भी जानें, जो हैं बहुत ही जरूरी</h3>
<p style="text-align:justify;">शाह सतनाम जी आश्रम बरनावा यूपी से रूहानी सत्संग के दौरान साध-संगत द्वारा पूछे गए के सवालों के जवाब देते हुए पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां ने स्वास्थ्य संबंधी अनमोल टिप्स दिए।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>सवाल : कान में अगर खाज होती है या कान साफ करना है तो क्या करें?</strong></p>
<p style="text-align:justify;">पूज्य गुरु जी का जवाब : वैसे नेचर है कि जब आप नहाकर हटोगे तो कोई भी रूमाल या कपड़ा लेकर कान पर ऐसे मार कर देखना जितनी भी फालतू की चीज है वो बाहर आ जाएगी।</p>
<p style="text-align:justify;">पर आपको आदत बनी हुई हैं, खासकर बहनों को तो सिर की सुई निकाली और कान में मारने लग जाएंगी। हमने देखा है बेटियों को ऐसे करते हुए और भाई तिनका सा ले लेते हैं, आजकल बने बनाए भी आते हैं, उसका ये नहीं पता कि कहां तक चला गया। कई पर्दे में मार बैठते हैं, क्योंकि वो पतला सा होता है उसका कोई मुंह, सिर तो है नहीं और अंदर कान में खाज मची तो कईयों को मीठी-मीठी भी लगने लगती है और आगे पर्दे पर मार देते हैं और फिर सुनने वाले काम की छुट्टी। कभी भी ऐसा नहीं करना चाहिए।</p>
<h3>कान के बिल्कुल अंदर जो मैल होती है वो फायदेमंद होती है</h3>
<p style="text-align:justify;">ज्यादा ही हो तो खुद साफ रुई लो, जो डॉक्टरों के पास होती है, हल्का सा तिनके पर लगाकर कान की बाहर की तरफ जो मैल होती है वो निकल जाती है। कान के बिल्कुल अंदर जो मैल होती है वो फायदेमंद होती है। आपके कानों में कीट-पतंगा कुछ भी नहीं घुसता, क्योंकि ये जहरीली चीज होती है। वो इसकी बदबू से, आपको बदबू नहीं आती, पड़ोसी को भी नहीं आती, लेकिन सिर्फ उन कीट-पतंगों को आती है, जो कान में घुसने को तैयार रहते हैं। तो अंदर वो अगर थोड़ी सी वैक्स पड़ी है तो फायदेमंद है। उसकी बदबू से और उसको टच करने से वो जीव भाग जाते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">जैसे नाक में हैं वैसे ही कान के अंदर भी छोटे-छोटे बाल होते हैं और वो भी फिल्टर का काम करते हैं ताकि कानों पर पर्दें पर कोई और चीज जाकर जम ना जाए, कलियर सुने। जैसे प्याज की झिल्ली होती है, उससे भी पतला पर्दा होता है कान का और आप सुईयां, पता नहीं क्या-क्या मारते हैं। पहले तो आया करते थे कड़छी सी लेकर कि आजा तेरा कान साफ करूं। तो कई बहरे हुए हैं उस पंगे में, क्योंकि आगे कान का पर्दा फट जाता है। तो आप आराम से कान को साफ करें। कान में पानी न जाए तो ज्यादा अच्छा रहता है। तो कान में ज्यादा कलाकारी मत किया करो।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="शूगर की बीमारी वाले करे ये उपाय | Ram Rahim" href="http://10.0.0.122:1245/sugar-ko-kaise-control-kare/">शूगर की बीमारी वाले करे ये उपाय | Ram Rahim</a></p>
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                                                            <category>अन्य खबरें</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>घर परिवार</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 25 May 2023 15:01:10 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>युवाशक्ति को संभालना होगा</title>
                                    <description><![CDATA[अब अपने ही लूट रहे Youth कोई वक्त था जब अहमद शाह अब्दाली और नादिरशाह की सेनाओं ने देश में लूटपाट करने के मकसद से हमला किया था, उस वक्त आम ग्रामीण भी अपनी पूंजी व देश बचाने के लिए हमलावार सिपाहियों के साथ भिड़ जाते थे। विदेशी आक्रमण का सामना करने के लिए लोग […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/have-to-take-care-of-the-youth/article-11916"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2019-12/have-take-care-of-youth.jpg" alt=""></a><br /><h2>अब अपने ही लूट रहे Youth</h2>
<p>कोई वक्त था जब अहमद शाह अब्दाली और नादिरशाह की सेनाओं ने देश में लूटपाट करने के मकसद से हमला किया था, उस वक्त आम ग्रामीण भी अपनी पूंजी व देश बचाने के लिए हमलावार सिपाहियों के साथ भिड़ जाते थे। विदेशी आक्रमण का सामना करने के लिए लोग घरों में हथियार रखते थे लेकिन आज आजाद देश में अपने ही देश को लूट रहे हैं। दरअसल देश का ढांचा ही ऐसा बन गया है कि नशा, बेरोजगारी और कुछ अन्य कारणों के चलते युवा <strong>(Youth)</strong> चोरी, लूटपाट व हत्याएं करने के रास्ते अपना रहे हैं। उत्तरी भारत इस वक्त डकैतियों, झपटमारों, एटीएम तोड़ने की घटनाओं के कारण चर्चा में है।</p>
<p>गत दिवस पटियाला पुलिस ने बैंकों की 34 एटीएम मशीनें तोड़ने व लूटपाट की वारदातों को अंजाम देने के आरोप में एक गिरोह को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने मामले को सुलझाने में सफलता प्राप्त की है और गिरोह का पर्दाफाश करने वाले अधिकारियों को लाखों रुपये के पुरुस्कार व पदोन्नित दी है। पुलिस ने अपनी ड्यूटी को निभाया है लेकिन सरकार और समाज की जिम्मेदारी अभी भी अधूरी है। ये युवा अपराध की दुनिया में क्यों गए? और इन्हें कैसे रोका जा सकता है? इस बारे में कहीं भी कोई चर्चा नहीं हो रही।</p>
<h3>अपराधों में से करीब 44 प्रतिशत युवा हैं जो 30 वर्ष से कम आयु के हैं Youth</h3>
<p>एक अनुमान है कि भारत में हो रहे अपराधों में से करीब 44 प्रतिशत युवा हैं जो 30 वर्ष से कम आयु के हैं। सवाल यह है कि क्या इन युवाओं की भावी पीढ़ी अपराधियों में शामिल होने से बच सकेगी? भले ही कानून की सख्ती अपराधिक घटनाओं को रोकने के लिए जरूरी है लेकिन ‘चोर नहीं चोरी की आदत को मारा जाना होगा’। रोजगार की कमी के कारण गुमराह हुए युवा, अपराधी बन रहे हैं। आज न्यायिक प्रक्रिया में जटिलता एवं शिथिलता के चलते बड़े से बड़े अपराध में भी आरोपी किसी न किसी कानूनी प्रक्रिया के तहत बच निकलते हैं और दोबारा अपराध करने लगते हैं। क्या उस व्यवस्था को भी सुधारने की कोशिश नहीं की जानी चाहिए, जो सामान्य परिवारों के युवाओं को भी अपराधों की तरफ धकेलती है।</p>
<p>नेताओं के साथ अपराधियों की मित्रता कई बार उजागर हुई है जो युवाओं को यह भरोसा देती है कि मुकदमा होने पर उनके राजनीतिक आका उन्हें सजा से बचा लेंगे, अखबारों में छपने वाली गैंगस्टरों और राजनेताओं की तस्वीरें यही साबित करती है। अपराधिक माहौल की ही देन है कि देश की रक्षा करने वाले युवा अपने ही देश को लूट रहे हैं। देश की युवाशक्ति को सही दिशा देने के लिए कागजी कार्यवाही और घोषणाओं से आगे बढ़ना होगा।</p>
<p> </p>
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                                                            <category>सम्पादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 22 Dec 2019 15:40:30 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अब कौन लेगा किसानों की सुध</title>
                                    <description><![CDATA[देश की अर्थव्यवस्था मजबूत आंकड़ों के साए में भी सहमी सी दिख रही है। निर्यात घटने और व्यापार घाटा बढ़ने की आशंकाएं सामने खड़ी मुंह चिढ़ा रही हैं। पांच साल पहले जो काम 60 महीने यानी 2018 तक किए जाने थे, अब वे 2022 तक किए जाएंगे। इतना ही नहीं, जो काम सबसे पहले होना […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><p style="text-align:justify;">देश की अर्थव्यवस्था मजबूत आंकड़ों के साए में भी सहमी सी दिख रही है। निर्यात घटने और व्यापार घाटा बढ़ने की आशंकाएं सामने खड़ी मुंह चिढ़ा रही हैं। पांच साल पहले जो काम 60 महीने यानी 2018 तक किए जाने थे, अब वे 2022 तक किए जाएंगे। इतना ही नहीं, जो काम सबसे पहले होना चाहिए था, वह कार्यकाल के अंतिम दिनों में बताया जा रहा है कि हम जल्द करेंगे। देश में खेती और किसान की हालत देखकर कृषि नीति ही सबसे पहले आनी चाहिए, उस पर अब केंद्रीय वाणिज्य मंत्री कह रहे हैं कि सरकार जल्द ही नई कृषि निर्यात नीति पेश करेगी। इसके तहत निर्यात बढ़ाने के लिए कई विशेष कृषि क्षेत्र स्थापित किए जाएंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">साथ ही कृषि निर्यात को मौजूदा तीस अरब डॉलर से बढ़ाकर 2022 तक साठ अरब डॉलर तक पहुंचाने और भारत को कृषि निर्यात से संंबंधित दुनिया के दस प्रमुख देशों में शामिल कराने का लक्ष्य रखा जाएगा। यदि यही किसानों को संकट से उबारने का तरीका है और अर्थव्यवस्था की मजबूती का आधार है तो फिर यह काम पहले क्यों नहीं किया गया? देश की यही विडम्बना है कि यहां जो सबसे महत्वपूर्ण है, वही प्राथमिकताओं से गायब है। किसान धरती को चीरकर अनाज उगाता है, उसके उत्पादन पर सरकारें पुरस्कार जीतती हैं, अपनी पीठ ठोकती हैं, फिर भी किसान मामूली से कर्ज के पीछे अपनी जान दे देता है।</p>
<p style="text-align:justify;">वित्तीय वर्ष 2017-18 में देश में रिकॉर्ड कृषि उत्पादन हुआ। इस समय देश में 6.8 करोड़ टन गेहूं-चावल का भंडार है। यह जरूरी बफर स्टॉक से दोगुना है। भारत दुनिया का सबसे बड़ा दुग्ध उत्पादक है। भारत का फलों और सब्जियों के उत्पादन में दुनिया में दूसरा स्थान है। देश में फलों और सब्जियों का उत्पादन मूल्य 3.17 लाख करोड़ रुपए वार्षिक हो गया है। दूध उत्पादन आबादी बढ़ने की दर से चार गुना तेजी से बढ़ रही है। चीनी का उत्पादन चालू वर्ष में 3.2 करोड़ टन होने की उम्मीद है, जबकि खपत 2.5 करोड़ टन है। दावा यह है कि यह सब इसलिए संभव हुआ, क्योंकि सरकार ने उदार कृषि निर्यात प्रोत्साहन को बल दिया।</p>
<p style="text-align:justify;">लेकिन सवाल यह है कि इसका लाभ किसे मिला? यदि किसानों को लाभ मिला होता तो वे सड़कों पर नहीं उतरते, दिन-रात मेहनत करके जो फसल उगाई उसे सड़कों पर नहीं फेंकते, दुग्ध उत्पादक दूध सड़कों पर नहीं बहाते। जाहिर तौर पर इसका लाभ किसानों के बजाय कहीं और गया है। सरकार की मुनाफे वाली नीति के चक्र में किसान कहां गायब हो जाता है, यह बड़ा रहस्य बन चुका है। हर सरकार किसानों के लिए सब कुछ करने का दावा करती है, लेकिन तिजोरियां किसी और की भरती हैं।</p>
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                <link>https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/who-will-now-take-care-of-farmers/article-7171</link>
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                <pubDate>Wed, 02 Jan 2019 13:58:54 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बेसहारा नहीं रहेगा गौवंश, गांव ने खोज निकाला हल</title>
                                    <description><![CDATA[बेजुबानों को मिलेगा सहारा, खेतों में रखवाली का झंझट भी खत्म गौशाला निर्माण को प्रति एकड़ 500 रूपए देने को राजी हुए  ग्रामीण Village Jorkiyan Making a Diffrence In Care of Bovine सच कहूँ/भगतसिंह नाथूसरी चौपटा। बेसहारा गौवंश को लेकर गांवों में आपसी टकराव व इनसे होने वाले हादसों की खबरें हमेशा चर्चा में रहती […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/village-jorkiyan-making-diffrence-in-care-bovine/article-4843"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-07/village-jorkiyan-making-diffrence-.jpg" alt=""></a><br /><h1>बेजुबानों को मिलेगा सहारा, खेतों में रखवाली का झंझट भी खत्म<br />
गौशाला निर्माण को प्रति एकड़ 500 रूपए देने को राजी हुए  ग्रामीण Village Jorkiyan Making a Diffrence In Care of Bovine</h1>
<p><strong>सच कहूँ/भगतसिंह</strong><br />
<strong>नाथूसरी चौपटा।</strong></p>
<p>बेसहारा गौवंश को लेकर गांवों में आपसी टकराव व इनसे होने वाले हादसों की खबरें हमेशा चर्चा में रहती हंै पर इन्हें सहारा देने के नाम पर सभी किनारा करते नजर आते हैं। क्षेत्र के गांव जोड़कियां के ग्रामीणों ने अद्भुत सामाजिक सरोकार का परिचय देते हुए बेसहारा गौवंश के लिए टकराव व अगले गांव की ओर रास्ता दिखाने की जगह गांव में स्थाई बसेरा बना दिया है। ग्रामीणों ने पिछले छह माह से गांव में आने वाले सभी बेसहारा गौवंश को एक नोहरे में एकत्रित किया और उनकी सार संभाल व चारे की व्यवस्था की। बेसहारा गौवंश का गांव में आने का सिलसिला जारी रहा तो ग्रामीणों ने इनके स्थाई बसेरे की पहल करते हुए गांव में गौशाला बनाने का निर्णय लिया। निर्णय लेने के बाद गांव के बड़े बुजुर्गों के साथ युवा निकल पड़े अपने इस सपने को साकार करने। ग्रामीणों ने घर-घर जाकर अपने इस निर्णय के बारे में बताया जिसका सभी ने दिल खोल कर स्वागत किया और हरसंभव मदद करने की बात कहीं। जब सभी ग्रामीण एकमत हो गए तो ग्रामीणों के समर्थन में पंचायत भी आ गई। पंचायत ने 4 एकड़ पंचायती जमीन गौशाला के लिए देने पर रंजामदी जता दी। पंचायत व ग्रामीणों के समर्थन में आने के बाद शनिवार को विधिवत रूप से गौशाला का शुभारम्भ कर दिया गया। इस अवसर पर र्स्व. जगमाल चुरणियां के परिवार के सदस्यों का आर्थिक सहयोग सराहनीय रहा। ग्रामीणों द्वारा बनाई बाबा गोपालपुरी गौशाला कमेटी ने गांव की जमीन के हिसाब से जनसहयोग जुटाने का फैंसला लिया। कमेटी ने प्रति एकड़ 500 रूपये प्रतिवर्ष का सहयोग देने के लिए ग्रामीणों को शपथ दिलवाई जिसका सभी ने समर्थन करते हुए अतिरिक्त सहायता करने की भी बात कहीं।</p>
<h2>रात के अंधेरे में कोई छोड़ गया था गायें Village Jorkiyan Making a Diffrence In Care of Bovine</h2>
<h2>
ग्रामीणों ने शुरू किया गौ-शाला का काम</h2>
<p>ग्रामीणों ने गौशाला कमेटी में गांव के सभी वर्गों के प्रतिनिधि को शामिल करते हुए भाईचारे का भी अनूठा उदाहरण दिया। इस अवसर पर कृष्ण सिंगाठिया, प्रभु राम, वेद प्रकाश, बुधराम चुरनियां, मदन सिंह, मान सिंह, काना राम, मनी राम हुड्डा, देवीलाल फौजी, शंकर मास्टर, रामचन्द्र ठेकेदार, जगदीश हुड्डा, रोहताश चुरनियां, सांवताराम भाखर, गणदेव, खेतपाल, भगतसिंह, प्रेम, जगदीश मास्टर सहित व ग्राम पंचायत जोड़ियां के समस्त सदस्य व बाबा गोपालपुरी शिक्षा समिति के सदस्य व गांव के गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।</p>
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                                                            <category>देश</category>
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                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 15 Jul 2018 09:27:09 +0530</pubDate>
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                <title>कर्मचारियों की सेहत का ख्याल रखेगी सरकार</title>
                                    <description><![CDATA[प्राइवेट अस्पतालों के लिए नई इम्पैनलमैंट नीति जारी कर्मचारियों, पैंशनर्स व उनके आश्रितों को मिलेगी उपचार एवं जांच सुविधा चंडीगढ़(सच कहूँ ब्यूरो)। प्रदेश सरकार ने राज्य के सरकारी कर्मचारियों, पैंशनर्स तथा उनके आश्रितों के उपचार एवं जांच के लिए उत्कृष्ट निजी अस्पतालों व क्लिनिकल लैबोरेट्री के सरकारी पैनल हेतु नई इम्पैनलमैंट पॉलिसी जारी की है, […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/government-will-take-care-of-the-health-of-employees/article-2194"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-07/anil-vij-1.jpg" alt=""></a><br /><h1 style="text-align:center;">प्राइवेट अस्पतालों के लिए नई इम्पैनलमैंट नीति जारी</h1>
<ul>
<li style="text-align:justify;"><strong>कर्मचारियों, पैंशनर्स व उनके आश्रितों को मिलेगी उपचार एवं जांच सुविधा</strong></li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>चंडीगढ़(सच कहूँ ब्यूरो)।</strong> प्रदेश सरकार ने राज्य के सरकारी कर्मचारियों, पैंशनर्स तथा उनके आश्रितों के उपचार एवं जांच के लिए उत्कृष्ट निजी अस्पतालों व क्लिनिकल लैबोरेट्री के सरकारी पैनल हेतु नई इम्पैनलमैंट पॉलिसी जारी की है, जिसके तहत इच्छुक एनएबीएच या जेसीआई मान्यता प्राप्त अस्पताल व लैबोरेट्री आवेदन कर सकते हैैं।</p>
<p style="text-align:justify;">स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज ने बताया कि अस्पतालों को सरकार द्वारा समय-समय पर तय की गई 152 पैकेज की दरों, मरीजों को दाखिल करने और 2 गैर पैकेज दरों पर ही कर्मचारियों का उपचार करना होगा। इसके अलावा, एनएबीएच से मान्यता प्राप्त नये अस्पतालों को उपचार के दौरान आने वाले खर्च की अदायगी पीजीआईएमआर, चंडीगढ के रेट एवं शेष राशि का 75 प्रतिशत दर पर की जाएगी। इन नियमों का उल्लंघन करने वाले अस्पतालों की इम्पैनलमैंट रदद कर दी जाएगी। सरकार के पैनल पर आने वाले अस्पतालों को जन्म एवं मृत्यु संबंधी नियमों का पालन करना होगा तथा सरकार द्वारा लागू किये गये सॉफटवेयर को अपनाना होगा।</p>
<h3 style="text-align:justify;">56 निजी अस्पताल हैं पैनल पर</h3>
<p style="text-align:justify;">स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि इस समय देश व प्रदेश के निजी 56 अस्पताल हरियाणा स्वास्थ्य विभाग के पैनल पर हैं, जिनकी मान्यता पॉलिसी जारी होने से एक वर्ष तक जारी रहेगी। यदि ये अस्पताल इस अवधि के दौरान एनएबीएच का प्रमाण पत्र जमा करवाने में असमर्थ रहते हैं तो इनकी इम्पैनलमैंट स्वत: ही रदद समझी जाएगी तथा यदि वे एनएबीएच प्रमाण पत्र जमा करवा देते है तो उन्हें आगे 2 वर्ष के लिए मान्यता प्रदान कर दी जाएगी।</p>
<h3 style="text-align:justify;">वरना स्वत: रद्द हो जाएगा पैनल</h3>
<p style="text-align:justify;">नई पॉलिसी के तहत निजी अस्पतालों की पैनल अवधि अधिकतम 3 वर्ष या एनएबीएच प्रमाण पत्र समाप्ति तक मान्य होगी। अस्पतालों को एनएबीएच मान्यता प्रमाण पत्र की अवधि समाप्त होने के 3 माह में नया प्रमाण पत्र जमा करवाना होगा अन्यथा उनका सरकारी पैनल स्वत: रद्द माना जाएगा।</p>
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                                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 10 Jul 2017 08:28:33 +0530</pubDate>
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                <title>बेसहारा बुजुर्ग की संभाल कर गांव पहुंचाया</title>
                                    <description><![CDATA[इन्सानियत: डेरा सच्चा सौदा की पावन शिक्षाओं पर बढ़ते कदम पक्का कलां (पुष्पिंद्र सिंह)। डेरा सच्चा सौदा की पवित्र शिक्षाओं पर चलते हुए डेरा श्रद्धालू परिवार ने एक बुजुर्ग की संभाल की और उसको गांववासियों से मिलाया। इस संबंधी जानकारी देते हुए पंद्रह मैंबर गुरप्रीत सिंह इन्सां ने बताया कि गांव गयाना निवासी कुलदीप कौर […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/punjab/dera-sacha-sauda-followers-care-of-the-elderly/article-1352"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-06/dera-followers-2.jpg" alt=""></a><br /><h2>इन्सानियत: डेरा सच्चा सौदा की पावन शिक्षाओं पर बढ़ते कदम</h2>
<p><strong>पक्का कलां (पुष्पिंद्र सिंह)।</strong> डेरा सच्चा सौदा की पवित्र शिक्षाओं पर चलते हुए डेरा श्रद्धालू परिवार ने एक बुजुर्ग की संभाल की और उसको गांववासियों से मिलाया। इस संबंधी जानकारी देते हुए पंद्रह मैंबर गुरप्रीत सिंह इन्सां ने बताया कि गांव गयाना निवासी कुलदीप कौर इन्सां अपने पति मनजीत सिंह के साथ अपने निजी काम के लिए मक्खू गई हुई थी।</p>
<p style="text-align:justify;">वापिसी दौरान फिरोजपुर रेलवे स्टेशन पर एक बुजुर्ग को घायलावस्था में पड़ा देखा। उक्त बुजुर्ग की टांग पोलियो से ग्रस्त थी। उसकी इस हाल को देख दोनों पति पत्नी उसे अपने मुर्शिद पूजनीय संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां के पवित्र वचनों पर अमल करते हुए अपने साथ गांव ले आएं।</p>
<p style="text-align:justify;">गांव में उन्होंने डॉ. गुरदीप सिंह की मदद से बुजुर्ग का ईलाज करवाया और उसके परिजनों को ढूंढने के लिए प्रयास करने शुरू कर दिए। बुजुर्ग की पहचान संगत सिंह निवासी माजरी जिला कैथल हरियाणा के तौर पर हुई। उक्त बुजुर्ग का कोई परिवार नहीं था और वह खुद अपने भतीजों के पास रह रहा था। उन्होंने बताया कि उक्त बुजुर्ग के भतीजों ने उसे घर ले जाने से मना कर दिया जिसके बाद ब्लॉक गुहला-चीका के पंद्रह मैंबर देश राज की उपस्थिति में बुजुर्ग को उसके गांव निवासी देव सिंह और उधम सिंह अपनी जिम्मेदारी पर ले गए।</p>
<h2>डेरा श्रद्धालुओं का किया शुक्राना</h2>
<p>देव सिंह ने बताया कि वह 21 सालों से इसकी तलाश कर रहे हैं। बुजुर्ग संगत सिंह ने बताया कि वह धार्मिक स्थान की यात्रा करके वापिस आ रहा था और पोलियो होने के कारण रेलगाड़ी से उतरा नहीं गया जिस करके उसके चोट लगी, वह काफी दिन स्टेशन पर ही पड़ा रहा परंतु किसी ने उसकी संभाल नहीं की। उन्होंने पूजनीय गुरू जी व डेरा श्रद्धालु कुलदीप कौर के परिवार का धन्यवाद किया जिन्होंने ब्लॉक रामा नसीबपुरा के जिम्मेवार बलकार सिंह इन्सां, पवन सिंह इन्सां की उपस्थिति में बुजुर्ग को उसके गांववासियों से मिला दिया।</p>
<p> </p>
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                <pubDate>Sun, 18 Jun 2017 00:43:44 +0530</pubDate>
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