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                <title>Car Loan - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <description>Car Loan RSS Feed</description>
                
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                <title>30 हजार रुपये की सैलरी में होम लोन और कार लोन दोनों ले सकते हैं? समझिए EMI का पूरा गणित</title>
                                    <description><![CDATA[आज के समय में अपना घर और कार खरीदना ज्यादातर लोगों का सपना होता है। लेकिन कई लोगों के मन में सवाल रहता है कि अगर महीने की सैलरी सिर्फ 30,000 रुपये है]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/business/you-can-take-both-home-loan-and-car-loan-with/article-87399"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-06/finance-tips.jpeg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Finance Tips: आज के समय में अपना घर और कार खरीदना ज्यादातर लोगों का सपना होता है। लेकिन कई लोगों के मन में सवाल रहता है कि अगर महीने की सैलरी सिर्फ 30,000 रुपये है, तो क्या होम लोन और कार लोन दोनों की EMI एक साथ चुकाई जा सकती है? इसका जवाब आपकी आय, खर्च, क्रेडिट प्रोफाइल और बैंक की लोन नीति पर निर्भर करता है।</p>
<h5 style="text-align:justify;">बैंक कैसे तय करता है कि लोन मिलेगा या नहीं?</h5>
<p style="text-align:justify;">लोन मंजूर करने से पहले बैंक आपकी आय और पहले से चल रही EMI का आकलन करता है। इसके लिए FOIR (Fixed Obligation to Income Ratio) देखा जाता है। आमतौर पर बैंक चाहते हैं कि आपकी कुल मासिक EMI आपकी आय के 40% से 50% के बीच रहे।</p>
<h4 style="text-align:justify;">अगर आपकी मासिक सैलरी 30,000 रुपये है, तो:</h4>
<p style="text-align:justify;">40% FOIR के अनुसार अधिकतम EMI: 12,000 रुपये<br />50% FOIR के अनुसार अधिकतम EMI: 15,000 रुपये</p>
<p style="text-align:justify;">यानी बैंक आमतौर पर यही मानते हैं कि आपकी कुल EMI 12,000 से 15,000 रुपये के बीच होनी चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">होम लोन और कार लोन का उदाहरण</p>
<h4 style="text-align:justify;">मान लीजिए—</h4>
<p style="text-align:justify;">होम लोन की EMI: 9,000 रुपये प्रति माह<br />कार लोन की EMI: 4,000 रुपये प्रति माह</p>
<p style="text-align:justify;">ऐसे में आपकी कुल मासिक EMI 13,000 रुपये होगी, जो 30,000 रुपये की सैलरी का लगभग 43% है। यह सामान्य बैंकिंग मानकों के भीतर आता है, इसलिए यदि बाकी शर्तें भी पूरी होती हैं तो लोन मिलने की संभावना बन सकती है।</p>
<p style="text-align:justify;">हालांकि, अंतिम फैसला बैंक आपकी पूरी वित्तीय स्थिति देखकर ही करता है।</p>
<h4 style="text-align:justify;">बैंक किन बातों की जांच करता है?</h4>
<p style="text-align:justify;">सिर्फ सैलरी ही नहीं, बल्कि बैंक कई अन्य पहलुओं पर भी ध्यान देता है, जैसे—</p>
<p style="text-align:justify;">क्रेडिट स्कोर (CIBIL Score)<br />पहले से चल रहे लोन<br />समय पर EMI चुकाने का रिकॉर्ड<br />नौकरी की स्थिरता<br />मासिक खर्च और बचत<br />डाउन पेमेंट की राशि<br />EMI के बाद कितनी सैलरी बचेगी?<br />अगर आपकी मासिक आय 30,000 रुपये है और कुल EMI 13,000 रुपये है, तो आपके पास हर महीने करीब 17,000 रुपये बचेंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">इसी रकम से आपको—<br />घर का मासिक खर्च<br />बिजली-पानी और अन्य बिल<br />राशन<br />मेडिकल खर्च<br />पेट्रोल या CNG<br />बच्चों की पढ़ाई (यदि लागू हो)<br />अन्य जरूरी खर्च</p>
<h4 style="text-align:justify;">पूरा करना होगा। ऐसे में बचत और निवेश के लिए बहुत कम रकम बच सकती है।</h4>
<p style="text-align:justify;">लोन लेने से पहले इन बातों का रखें ध्यान<br />कुल EMI आय के 40–50% से अधिक न होने दें।<br />कम से कम 6 महीने के खर्च के बराबर इमरजेंसी फंड बनाएं।<br />अपना क्रेडिट स्कोर अच्छा बनाए रखें।<br />जितना अधिक डाउन पेमेंट करेंगे, EMI उतनी कम होगी।<br />लोन लेने से पहले मासिक बजट जरूर तैयार करें।<br />क्या 30 हजार की सैलरी में दोनों लोन लेना सही है?</p>
<p style="text-align:justify;">यदि आपकी नौकरी स्थिर है, पहले से कोई बड़ा कर्ज नहीं है और आपके मासिक खर्च नियंत्रित हैं, तो सही वित्तीय योजना के साथ होम लोन और कार लोन दोनों की EMI संभाली जा सकती है।<br />लेकिन अगर पहले से किसी अन्य लोन की EMI चल रही है या खर्च ज्यादा हैं, तो दोनों लोन एक साथ लेने से पहले अपनी भुगतान क्षमता का अच्छी तरह आकलन करना जरूरी है। जरूरत पड़ने पर वित्तीय सलाहकार से परामर्श लेना भी बेहतर विकल्प हो सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/2026-06/finance-tips.jpeg" alt="Finance Tips" width="731" height="417"></img></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>कारोबार</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 30 Jun 2026 17:04:18 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sarvesh Kumar]]></dc:creator>
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                <title>Kaam Ki Baat: कार और घर पर लोन लेने वालो के लिए आरबीआई ने दी बड़ी जानकारी, जल्द पढ़ें-</title>
                                    <description><![CDATA[Home Loan, Car Loan: भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के आर्थिक गतिविधियों में जारी तेजी का हवाला देकर महंगाई पर कड़ी नजर रखते हुये नीतिगत दरों को आज लगातार सतावीं बार यथावत रखने के निर्णय से कार और घर की ईएमआई कम होने की उम्मीद लगाये आम लोगों को निराशा हाथ लगी। मई 2022 से 250 […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/business/home-loan-car-loan/article-56047"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2024-04/home-loan-car-loan.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Home Loan, Car Loan: भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के आर्थिक गतिविधियों में जारी तेजी का हवाला देकर महंगाई पर कड़ी नजर रखते हुये नीतिगत दरों को आज लगातार सतावीं बार यथावत रखने के निर्णय से कार और घर की ईएमआई कम होने की उम्मीद लगाये आम लोगों को निराशा हाथ लगी। मई 2022 से 250 आधार अंकों तक लगातार छह बार दर वृद्धि के बाद पिछले वर्ष अप्रैल में दर वृद्धि चक्र को रोक दिया गया था और यह अभी भी इसी स्तर पर है। आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने शुक्रवार को चालू वित्त वर्ष की पहली द्विमासिक मौद्रिक नीति की घोषणा करते हुए कहा कि मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) ने नीतिगत दरों को यथावत बनाए रखने का फैसला किया है। इसके मद्देनजर रेपो दर के साथ ही सभी प्रमुख दरें यथावत हैं। साथ ही समायोजन के रुख को वापस लेने का निर्णय लिया गया है।</p>
<p><a href="http://10.0.0.122:1245/big-announcement-by-rbi-now-no-need-to-keep-atm-card/">आरबीआई का बड़ा ऐलान, अब एटीएम कार्ड रखने की जरूरत नहीं, यूपीआई से भी बैंक खातों में जमा होंगे रुपये</a></p>
<p style="text-align:justify;">समिति के इस निर्णय के बाद फिलहाल नीतिगत दरों में बढोतरी नहीं होगी। रेपो दर 6.5 प्रतिशत, स्टैंडर्ड जमा सुविधा दर (एसडीएफआर) 6.25 प्रतिशत, मार्जिनल स्टैंडिंग सुविधा दर (एमएसएफआर) 6.75 प्रतिशत, बैंक दर 6.75 प्रतिशत, फिक्स्ड रिजर्व रेपो दर 3.35 प्रतिशत, नकद आरक्षित अनुपात 4.50 प्रतिशत, वैधानिक तरलता अनुपात 18 प्रतिशत पर यथावत है।</p>
<p style="text-align:justify;">दास ने कहा कि निश्चित निवेश और वैश्विक माहौल में सुधार से समर्थन मिलने की बदौलत घरेलू आर्थिक गतिविधियों का तेज गति से विस्तार जारी है। दूसरे अग्रिम अनुमान (एसएई) ने 2023-24 के लिए वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि दर 7.6 प्रतिशत रखी। यह लगातार तीसरा वर्ष है जब वृद्धि दर सात प्रतिशत या उससे अधिक रहेगी। दक्षिण-पश्चिम मानसून के सामान्य रहने की उम्मीद, रबी गेहूं की अच्छी फसल और खरीफ फसलों की बेहतर संभावनाओं के साथ कृषि और ग्रामीण गतिविधियों में तेजी रहने की उम्मीद है। ग्रामीण मांग में मजबूती, रोजगार की स्थिति और अनौपचारिक क्षेत्र की गतिविधि में सुधार होने, मुद्रास्फीति के दबाव में कमी आने और विनिर्माण एवं सेवा क्षेत्र में निरंतर मजबूती से निजी खपत को बढ़ावा मिलने का अनुमान है।</p>
<p><a href="http://10.0.0.122:1245/good-news-will-pension-come-to-your-account-on-this-date-government-gave-instructions/#google_vignette">Pension Yojana 2024: खुशखबरी! इस तारीख को आएगी पेंशन आपके खाते में? Modi सरकार ने दिए निर्देश</a></p>
<p style="text-align:justify;">आरबीआई के सर्वेक्षण के अनुसार, एक साल पहले उपभोक्ता विश्वास एक नई ऊंचाई पर पहुंच गया था। वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में हमारे बढ़ते एकीकरण के साथ-साथ वैश्विक विकास और व्यापार संभावनाओं में सुधार से वस्तुओं और सेवाओं की बाहरी मांग बढ़ने की उम्मीद है। हालांकि लंबे समय तक भू-राजनीतिक तनाव और व्यापार मार्गों में बढ़ते व्यवधान से उत्पन्न विपरीत परिस्थितियां दृष्टिकोण के लिए जोखिम पैदा करती हैं। इन सभी कारकों को ध्यान में रखते हुए वित्त वर्ष 2024-25 के लिए वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वृद्धि दर 7.0 प्रतिशत रहने का अनुमान है। साथ ही चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में जीडीपी वृद्धि दर 7.1 प्रतिशत, दूसरी तिमाही में 6.9 प्रतिशत, तीसरी तिमाही में 7.0 प्रतिशत और चौथी तिमाही में भी 7.0 प्रतिशत पर रहने का अनुमान है।</p>
<p style="text-align:justify;">आरबीआई गवर्नर ने कहा कि खाद्य मूल्यों की अनिश्चितताएं आगे चलकर महंगाई पर दबाव डाल रही हैं। हालांकि रबी गेहूं का रिकॉर्ड उत्पादन मूल्य दबाव को कम करने और बफर स्टॉक को फिर से भरने में मदद करेगा। इसके अलावा मानसून के सामान्य रहने की उम्मीद खरीफ सीजन के लिए अच्छे संकेत हैं। अंतर्राष्ट्रीय खाद्य कीमतें भी नरम बनी हुई हैं। आने वाले महीनों में सामान्य से अधिक तापमान के पूवार्नुमान को देखते हुए दालों की कुछ श्रेणियों में मांग के अनुरूप आपूर्ति में कमी की स्थिति और प्रमुख सब्जियों के उत्पादन परिणामों पर कड़ी निगरानी की आवश्यकता है। वहीं, प्रतिकूल जलवायु झटके अंतरराष्ट्रीय और घरेलू खाद्य कीमतों के के लिए महत्वपूर्ण जोखिम पैदा करते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">दास ने कहा कि मार्च में एलपीजी की कीमतों में कटौती के बाद निकट अवधि में ईंधन में अपस्फीति गहराने की संभावना है। मार्च के मध्य में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कटौती के बावजूद कच्चे तेल की कीमतों में हालिया बढ़ोतरी पर बारीकी से नजर रखने की जरूरत है। निरंतर भू-राजनीतिक तनाव भी जिंसों की कीमतों और आपूर्ति श्रृंखलाओं के लिए जोखिम पैदा करते हैं। उन्होंने कहा कि मानसून को सामान्य मानते हुए वित्त वर्ष 2024-25 के लिए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) आधारित खुदरा महंगाई के 4.5 प्रतिशत पर रहने का अनुमान है। साथ ही चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में महंगाई के 4.9 प्रतिशत, दूसरी तिमाही में 3.8 प्रतिशत, तीसरी तिमाही में 4.6 प्रतिशत और चौथी तिमाही में 4.5 प्रतिशत पर रहने की संभावना है।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>कारोबार</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 05 Apr 2024 14:55:47 +0530</pubDate>
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