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                <title>डिस्पोजेबल पेपर कप में चाय और काफी पीना क्यों स्वास्थ्य के लिए खतरनाक है?</title>
                                    <description><![CDATA[आईआईटी शोधकर्ताओं ने दी जानकारी नई दिल्ली। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आई आई टी) खड़गपुर के शोधकर्ताओं ने हाल में किए गए एक शोध में इस बात की पुष्टि की है कि डिस्पोजेबल पेपर कप में चाय और काफी पीना स्वास्थ्य के लिए बहुत ही खतरनाक है क्योंकि पेपर के भीतर प्रयुक्त सामग्री में सूक्ष्म-प्लास्टिक और […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/why-drinking-tea-and-coffee-in-disposable-paper-cups-is-dangerous-for-health/article-19743"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-11/why-drinking-tea-and-coffee-in-disposable-paper-cups-is-dangerous-for-health.gif" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:center;">आईआईटी शोधकर्ताओं ने दी जानकारी</h3>
<h6 style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली</strong>। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आई आई टी) खड़गपुर के शोधकर्ताओं ने हाल में किए गए एक शोध में इस बात की पुष्टि की है कि डिस्पोजेबल पेपर कप में चाय और काफी पीना स्वास्थ्य के लिए बहुत ही खतरनाक है क्योंकि पेपर के भीतर प्रयुक्त सामग्री में सूक्ष्म-प्लास्टिक और अन्य खतरनाक घटकों की उपस्थिति होती है। देश में पहली बार किये गये अपनी तरह के इस शोध में सिविल इंजीनियरिंग विभाग की शोधकर्ता और एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. सुधा गोयल तथा पर्यावरण इंजीनियरिंग एवं प्रबंधन में अध्‍ययन कर रहे शोधकर्ता वेद प्रकाश रंजन और अनुजा जोसेफ ने बताया कि 15 मिनट के भीतर यह सूक्ष्म प्लास्टिक की परत गर्म पानी या अन्य पेय की प्रतिक्रिया में पिघल जाती है।</h6>
<h6 style="text-align:justify;">प्रोफेसर सुधा गोयल ने कहा, ‘हमारे अध्ययन के अनुसार एक पेपर कप में रखा 100 मिलीलीटर गर्म तरल पदार्थ 25,000 माइक्रोन-आकार (10 माइक्रोन से 1000 माइक्रोन) के सूक्ष्म प्लास्टिक के कण छोड़ता है और यह प्रक्रिया कुल 15 मिनट में पूरी हो जाती है। इस प्रकार यदि एक औसत व्यक्ति प्रतिदिन तीन कप चाय या कॉफी पीता है, तो वह मानव आंखों के लिए अदृश्य 75,000 छोटे सूक्ष्म प्लास्टिक के कणों को निगलता है।</h6>
<h4 style="text-align:justify;">स्वास्थ्य पर गंभीर असर</h4>
<h6 style="text-align:justify;">प्रो. गोयल ने 15 मिनट का समय तय किये जाने के बारे में बताते हुए कहा कि एक सर्वेक्षण में उत्तरदाताओं ने बताया कि चाय या कॉफी को कप में डाले जाने के 15 मिनट के भीतर उन्‍होंने इसे पी लिया था। इसी बात को आधार बनाकर यह शोध समय तय किया गया। सर्वेक्षण के परिणाम के अलावा, यह भी देखा गया कि इस अवधि में पेय अपने परिवेश के तापमान के अनुरूप हो गया। ये सूक्ष्म प्लास्टिक आयन जहरीली भारी धातुओं जैसे पैलेडियम, क्रोमियम और कैडमियम जैसे कार्बनिक यौगिकों और ऐसे कार्बनिक यौगिकों, जो प्राकृतिक रूप से जल में घुलनशील नहीं हैं में, समान रूप से, वाहक के रूप में कार्य कर सकते हैं। जब यह मानव शरीर में पहुंच जाते हैं, तो स्वास्थ्य पर गंभीर असर डाल सकते हैं।</h6>
<h4 style="text-align:justify;">प्लास्टिक उत्‍पादों को डिस्पोजेबल उत्‍पादों से बदलने में जल्‍दबाजी की थी</h4>
<h6 style="text-align:justify;">आईआईटी खड़गपुर के निदेशक प्रो. वीरेंद्र के तिवारी ने कहा, ‘इस शोध से यह साबित होता है कि किसी भी अन्‍य उत्‍पाद के इस्‍तेमाल को बढ़ावा देने से पहले यह देखना जरूरी है कि वह उत्‍पाद पर्यावरण के लिए प्रदूषक और जैविक दृष्टि से खतरनाक न हों। हमने प्लास्टिक और शीशे से बने उत्‍पादों को डिस्पोजेबल पेपर उत्‍पादों से बदलने में जल्‍दबाजी की थी, जबकि जरूरत इस बात की थी कि हम पर्यावरण अनुकूल उत्पादों की तलाश करते। भारत पारंपरिक रूप से एक स्थायी जीवन शैली को बढ़ावा देने वाला देश रहा है और शायद अब समय आ गया है, जब हमें स्थिति में सुधार लाने के लिए अपने पिछले अनुभवों से सीखना होगा।</h6>
<p> </p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 06 Nov 2020 16:45:43 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>सीरिया से भी खतरनाक पाकिस्तान</title>
                                    <description><![CDATA[आॅक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी आफ लंदन की रिपोर्ट में पाकिस्तान को सीरिया से तीन गुणा अधिक खतरनाक घोषित किया गया है। यह रिपोर्ट वास्तविकता को ही बयान कर रही है। जम्मू-कश्मीर में रोजाना हो रहे आतंकवादी हमलों को देखा जाए तब रिपोर्ट शत-प्रतिशत सही साबित हो रही है। पिछले सात दिनों में जम्मू -कश्मीर में हुए हमलों […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/pakistan-is-also-dangerous-from-syria/article-6503"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-10/pak-1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">आॅक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी आफ लंदन की रिपोर्ट में पाकिस्तान को सीरिया से तीन गुणा अधिक खतरनाक घोषित किया गया है। यह रिपोर्ट वास्तविकता को ही बयान कर रही है। जम्मू-कश्मीर में रोजाना हो रहे आतंकवादी हमलों को देखा जाए तब रिपोर्ट शत-प्रतिशत सही साबित हो रही है। पिछले सात दिनों में जम्मू -कश्मीर में हुए हमलों में तीन जवान शहीद हो चुके हैं। पठानकोट व दीनानगर में हुए हमलों के बाद यह उम्मीद बंधी थी कि पाकिस्तान की करतूतों का पदार्फाश होने के बाद ऐसी घटनाएं दोबारा नहीं घटेंगी।</p>
<p style="text-align:justify;">पाक ने भारत को जांच में सहयोग का नाटक खेल उल्टा अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान इस मामले से हटाने का प्रयास किया। इन हमलों के बाद भी जम्मू-कश्मीर में हमले ज्यों के त्यों जारी हैं। जालंधर से तीन आतंकियों की हथियारों सहित गिरफ्तारी भी एक बड़ी घटना है। यदि यह आतंकवादी न पकड़े जाते तब शिक्षण संस्थाओं में किसी बड़ी घटना को अंजाम दे दिया जानाथा। इन षड़यंत्रों के संबंध में आॅक्सफोर्ड की रिपोर्ट 100 प्रतिशत सच है। भारत सहित अंतरराष्ट्रीय समुदाय को उक्त रिपोर्ट को गंभीरता से लेना चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">अभी हाल यह है कि सुरक्षा को गंभीरता से नहीं लिया जाता। सुरक्षा व खुफिया एजेंसियों का पूरा जोर राजनीतिक रैलियों व मंत्रियों के दौरों को सफल करने में लगा रहता है। यदि जम्मू-कश्मीर पुलिस आतंकवादियों का जालंधर तक पीछा न करती तब पंजाब पुलिस तो कुंभकर्णी नींद सोई पड़ी थी। आतंकवादी केवल कश्मीर तक सीमित नहीं वह पंजाब, दिल्ली सहित अन्य राज्यों में भी अपनी, गतिविधियां सक्रिय करने के प्रयास में हैं। पाकिस्तान आतंकवाद की नर्सरी बन चुका है, जहां प्रधानमंत्री व सरकार के अन्य अधिकारी आतंकवादियों का समर्थन कर रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">अमेरिका ने आतंकवादी घोषित किए हाफिज मौहम्मद सैय्यद के संगठन को पाकिस्तान में पाबंदी मुक्त कर दिया। पाक सेना प्रमुख सरेआम भारत को धमकियां दे रहा है। ऐसे में भारत सरकार को विदेशी ताकतों का मुकाबला करने के लिए सुरक्षा प्रबंधों को चाक-चौबंद करने में कोई कसर नहीं छोड़नी चाहिए। देश की सुरक्षा के लिए केवल ऊंचे-ऊंचे नारे लगाने ही गनीमत नहीं, बल्कि आतंकियों के इरादों को भांपने व समय पर कार्रवाई करने की सख्त आवश्यकता है।</p>
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<p> </p>
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                                                            <category>सम्पादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 29 Oct 2018 08:57:40 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पीडीपी को तोड़ा तो हालात और बदतर होंगे : महबूबा</title>
                                    <description><![CDATA[महबूबा मुफ्ती ने केंद्र सरकार पर पीडीपी (पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी) में तोड़फोड़ करने का लगाया आरोप श्रीनगर(एजेंसी) जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने शुक्रवार को केंद्र सरकार को पीडीपी (पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी) में तोड़फोड़ करने का आरोप लगाया। महबूबा ने कहा कि अगर केंद्र सरकार ने ऐसा किया तो राज्य के हालात 1987 जैसे बदतर […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/mehbooba-mufti-says-if-delhi-tries-to-break-pdp-like-that-then-outcomes-will-be-dangerous/article-4817"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-07/mahbooba-mufti.jpg" alt=""></a><br /><h1 style="text-align:center;">महबूबा मुफ्ती ने केंद्र सरकार पर पीडीपी (पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी) में तोड़फोड़ करने का लगाया आरोप</h1>
<p style="text-align:justify;"><strong>श्रीनगर(एजेंसी) </strong>जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने शुक्रवार को केंद्र सरकार को पीडीपी (पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी) में तोड़फोड़ करने का आरोप लगाया। महबूबा ने कहा कि अगर केंद्र सरकार ने ऐसा किया तो राज्य के हालात 1987 जैसे बदतर हो जाएंगे। कई सलाहुद्दीन और यासीन मलिक पैदा होंगे। पिछले दिनों भाजपा ने महबूबा सरकार से समर्थन वापस ले लिया था।</p>
<p style="text-align:justify;">इसके बाद पीडीपी में पांच विधायक बागी हो गए। उनका कहना है कि पार्टी अपने विधायकों का सम्मान नहीं कर रही। हारने वाले लोग पीडीपी को चला रहे हैं। 1 जुलाई को पीडीपी के चार विधायकों ने पार्टी नेतृत्व पर सवाल उठाए थे। इनमें विधायक आबिद हुसैन अंसारी, उनके भतीजे इमरान हुसैन अंसारी, तंगमार्ग से विधायक मोहम्मद अब्बास वानी और पट्‌टन से विधायक इमरान अंसारी थे।</p>
<h2 style="text-align:center;">वानी ने पार्टी को बताया  ‘परिवार डेमोक्रेटिक पार्टी’</h2>
<p style="text-align:justify;">इसके बाद बारामूला के विधायक जावेद हसन बेग ने भी पार्टी आलाकमान के खिलाफ खड़े हो गए थे। वानी ने पार्टी को ‘परिवार डेमोक्रेटिक पार्टी’ बताया था। बेग ने कहा था कि पार्टी अपने विधायकों का सम्मान नहीं कर रही है। हारने वाले लोग पीडीपी को चला रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक उन्होंने कहा कि लीडरशिप विधायकों को तवज्जो ही नहीं देती और पार्टी के लिए मैंने अपने 20 साल बर्बाद कर दिए।</p>
<p><a href="http://10.0.0.122:1245/">Hindi News </a>से जुडे अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें <a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a> और <a href="https://x.com/SACHKAHOON">Twitter</a> पर फॉलो करें।</p>
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                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 13 Jul 2018 04:38:57 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Smoking: खतरनाक है धूम्रपान की प्रवृत्ति</title>
                                    <description><![CDATA[Smoking: इस वैधानिक चेतावनी के बावजूद कि धूम्रपान अथवा तंबाकू सेवन स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है, विश्व में तंबाकू पीने व सेवन करने वालों की संख्या दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार दुनिया में हर वर्ष तकरीबन 6 खरब से ज्यादा सिगरेट फूंक दी जाती है। सिगरेट पीना […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/dangerous-is-the-tendency-of-smoking/article-3474"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-11/smoking.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Smoking: इस वैधानिक चेतावनी के बावजूद कि धूम्रपान अथवा तंबाकू सेवन स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है, विश्व में तंबाकू पीने व सेवन करने वालों की संख्या दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार दुनिया में हर वर्ष तकरीबन 6 खरब से ज्यादा सिगरेट फूंक दी जाती है। सिगरेट पीना महज शौक नहीं, बल्कि ऐसा न करना शान के खिलाफ समझा जाने लगा है। Smoking</p>
<p style="text-align:justify;">यही कारण है कि विश्व में तंबाकू की 65 से 85 प्रतिशत तक खपत केवल सिगरेट के रूप में होती है। एक चौंकाने वाला आकलन यह भी है कि पिछले कुछ वर्षों में सिगरेट पीने वाली महिलाओं की संख्या में आश्चर्यजनक रूप से वृद्धि देखी गयी है। गौरतलब है कि पुरुषों की तुलना में खासकर महिलाएं अपनी शारीरिक संरचना के कारण धूम्रपान के प्रभाव से सबसे अधिक प्रभावित होती हैं। आज स्थिति यह है कि विश्व में हर दस सैकण्ड में एक धूम्रपान करने वाला व्यक्ति तंबाकू से संबंधित किसी न किसी बीमारी से मारा जाता है। यदि यह रफ्तार जारी रही तो असमय मौत की दस सैकण्ड की सीमा घटकर चार या पांच सैकण्ड तक आ सकती है। निश्चय ही यह तथ्य एक भयावह भविष्य की ओर संकेत कर रहा है।</p>
<h3>धूम्रपान की लत फेफड़ों के कैंसर के साथ-साथ स्तन कैंसर को भी जन्म देती है</h3>
<p style="text-align:justify;">चिकित्सकों की राय में महिलाओं में धूम्रपान की लत फेफड़ों के कैंसर के साथ-साथ स्तन कैंसर को भी जन्म देती है। जो महिला स्तनपान कराती है, उसके रक्त में पाए जाने वाला निकोटिन दूध के जरिये शिशु के शरीर में पहुंच जाता है। फलस्वरूप धूम्रपान करने वाली महिलाओं के बच्चे बुखार व श्वांस संबंधी विकारों से ग्रस्त रहने लगते हैं। कम उम्र में तंबाकू का सेवन करने वाली स्त्रियों में प्रजनन क्षमता का ह्रास तथा डायबिटीज जैसे रोगों के पनपने की संभावना काफी हद तक बढ़ जाती है। अगर आंकड़ों पर एक नजर डालें तो पिछले 40 सालों में विकासशील देशों में तंबाकू ग्रसित महिलाओं के मरने का प्रतिशत 2 से बढ़कर 93  तक पहुंच गया। ऐसे में इसकी भयावहता का अनुमान सहज ही लगाया जा सकता है। Smoking</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="धर्मकांटा की दुकान में घुसे चोरों ने चुराई नकदी" href="http://10.0.0.122:1245/thieves-broke-into-the-weighing-machine-shop-and-stole-cash/">धर्मकांटा की दुकान में घुसे चोरों ने चुराई नकदी</a></p>
<p style="text-align:justify;">विकासशील देशों में सबसे अधिक धूम्रपान करने वालों की संख्या भारत में है। भारत तंबाकू उत्पादन में विश्व के अग्रणी देशों में है। भारतीय उपमहाद्वीप में सर्वाधिक  बीड़ी है। शहरी महिलाओं को छोड़ दें तो हमारे देश में विशेषकर बिहार व उत्तरप्रदेश की ग्रामीण महिलाओं में बीड़ी पीना प्रचलित है। सस्ती व सर्वसुलभ होने के कारण महिलाओं ने बीड़ी को अपना लिया है। शुरुआती दौर में भारतीय ग्रामीण महिलाएं हुक्के में भरकर तंबाकू का सेवन करती थी। धीरे-धीरे इसमें बदलाव आया। संभ्रांत घर की महिलाएं पान अधिक खाती थीं। आज के अति आधुनिक युग में जब सिगरेट के साथ-साथ अनगिनत पान-मसालों का प्रचलन हो गया है। इसके अतिरिक्त शिक्षा के प्रसार व तंबाकू सेवन से उत्पन्न बीमारियों के जान लेने के कारण भी ग्रामीण महिलाओं में तंबाकू सेवन में कमी आयी है, जबकि कुछ महिलाओं ने इसे एक तरह का पुराना फैशन मानकर नकार दिया है।</p>
<h3>प्रतिवर्ष पांच लाख के करीब महिलाएं धूम्रपान के कारण मौत हो रही हैं Smoking</h3>
<p style="text-align:justify;">दूसरा कारण आर्थिक अक्षमता व सीमित जीवन का भी है। ग्रामीण महिलाएं आज भी लोक लाज के दायरे में कैद हैं, इसलिए वे ऐसा नहीं कर सकती जैसा कि पुरुष करते हैं। एक अन्य अनुसंधान से पता चला है कि विश्व में चालीस प्रतिशत महिलाएं जहां प्रत्यक्ष धूम्रपान की शिकार होती हैं, वहीं शेष साठ प्रतिशत परोक्ष रूप से इसकी शिकार होती हैं, क्योंकि उन औरतों में जिनके पति धूम्रपान करते हैं, फेफड़े का कैंसर होने की संभावना उन औरतों से तीन गुणा अधिक होती है, जिनके पति धूम्रपान नहीं करते।</p>
<p style="text-align:justify;">विकसित देशों में पुरुषों और महिलाओं के सेवन में पचास प्रतिशत और आठ प्रतिशत का फासला अवश्य है, लेकिन फिर भी प्रतिवर्ष पांच लाख के करीब महिलाएं धूम्रपान के कारण मौत के आगोश में समा रही हैं। विकसित एवं विकासशील देशों में महिलाओं के स्वास्थ्य में निरंतर गिरावट का मुख्य कारण धूम्रपान व नशे की अन्य वस्तुओं का सेवन ही है। बढ़ती धूम्रपान की आदत बेहद चिंताजनक है। Smoking                                                                                                                                                                                       –<strong>कुलविंद्र कौर</strong></p>
<p> </p>
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                                                            <category>लेख</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 01 Nov 2017 06:21:22 +0530</pubDate>
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                <title>प्रदूषण की खतरनाक अनदेखी क्यों?</title>
                                    <description><![CDATA[पिछले कुछ सालों के दौरान दिवाली में पटाखों की वजह से होने वाले भयावह प्रदूषण के चलते इस बार सर्वोच्च न्यायालय ने एनसीआर यानी राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में पटाखों की खरीद-बिक्री पर पाबंदी लगा दी थी। भले ही पटाखों का धुआं कम हुआ हो, लेकिन न्यायालय के आदेश का धुआं खूब जमकर उड़ा। पिछले साल की […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/why-the-pollution-is-dangerous-to-ignore/article-3431"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-10/india-gate-1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">पिछले कुछ सालों के दौरान दिवाली में पटाखों की वजह से होने वाले भयावह प्रदूषण के चलते इस बार सर्वोच्च न्यायालय ने एनसीआर यानी राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में पटाखों की खरीद-बिक्री पर पाबंदी लगा दी थी। भले ही पटाखों का धुआं कम हुआ हो, लेकिन न्यायालय के आदेश का धुआं खूब जमकर उड़ा। पिछले साल की तुलना में इस बार प्रदूषण का स्तर कम दर्ज किया गया। दिल्ली में पटाखे बेचने पर बैन की वजह से दिल्ली की जनता को थोड़ी राहत सी जरूर मिली, लेकिन दिल्ली, नोएडा, गुरुग्राम, गाजियाबाद, फरीदाबाद के लोगों ने जुगाड़ करके खूब पटाखे जलाए।</p>
<p style="text-align:justify;">सर्वोच्च न्यायालय ने जो फैसला दिया है, उसके पीछे भावना काफी अच्छी है, क्योंकि पिछले साल दीवाली के दिनों में दिल्ली का प्रदूषण सामान्य स्तर से 29 गुना बढ़ गया था। कई बीमारियां फैल गई थीं, लेकिन यह खतरा तो साल में तीन-चार दिन ही कायम रहता है, जबकि फसलों के जलने का धुआं, कारों का धुआं, उड़ती हुई धूल का प्रदूषण तथा अन्य छोटे-मोटे कारणों से फैलने वाले सतत् प्रदूषण पर हमारी नजर क्यों नहीं जाती। दिल्ली के लिये प्रदूषण एक नए खलनायक की तरह है, जिसकी अनदेखी जानलेवा साबित हो रही है। न्यायालय का निर्णय हो या दिल्ली सरकार के प्रयास, प्रदूषण के मामले में जिस तरह की सख्ती चाहिए, वैसी दिखाई नहीं दे रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">ऐसा होता तो पुराने वाहनों पर नियंत्रण होता, कल-कारखानों के उत्पन्न प्रदूषण पर कार्रवाही होती, नदियों की सफाई की जाती, कचरे के ढेरों में लगने वाली आग का कोई समाधान निकाला जाता, कचरे के निष्कासन की समुचित व्यवस्था की जाती, प्रदूषण नियंत्रण कार्यालय की सक्रियता दिखाई देती, ऐसा कुछ न होना जनता के स्वास्थ्य के प्रति सरकार की उदासीनता को ही दर्शाता है। साथ ही आम लोगों की पर्यावरण के प्रति लापरवाही एवं उदासीनता भी परेशान करने वाली है। लोग जानते हैं कि पटाखों के धमाकों और धुएं की वजह से कैसे सांस लेना तक मुश्किल हो जाता है। आंखों में जलन की वजह से कुछ भी देखना सहज नहीं रहता। इसके बावजूद पटाखे बेचने और खरीदने पर पाबंदी के अदालत के आदेश का आशय समझने की जरूरत नहीं समझी गई।</p>
<p style="text-align:justify;">विश्व स्वास्थ्य संगठन डब्ल्यूएचओ की एक ताजा रिपोर्ट में कहा गया है कि प्रदूषण के कारण दिल्ली में सालाना 10,000 से 30,000 जानें जा रही हैं। प्रदूषण हर दिन भारत की राजधानी में औसतन 80 लोगों की जान ले रहा है। इस नई रिपोर्ट के अनुसार दुनिया के 20 सबसे प्रदूषित शहरों की सूची में 13 भारत के शहर हैं। इनमें राजधानी दिल्ली सबसे ऊपर है। इसके बाद पटना, रायपुर और ग्वालियर का नंबर आता है। बाकी बचे शहरों में तीन पाकिस्तान के, दो बांग्लादेश के, एक कतर और एक ईरान का शहर है। इस ताजा रिपोर्ट ने एक बार फिर दिल्ली में प्रदूषण की समस्या की ओर ध्यान खींचा है। एनवायरनमेंटल साइंस एंड टेक्नोलॉजी पत्रिका में छपी इस रिपोर्ट के अनुसार दिल्ली में अधिकतर मौतें दिल की बीमारी और स्ट्रोक के कारण होती हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">दिल्ली की हवा में पार्टिकुलेट मैटर पीएम 2.5 की मात्रा प्रति घन मीटर 150 माइक्रोग्राम है। यह देश में निर्धारित सीमा का चार गुना और डब्ल्यूएचओ की तय सीमा का 15 गुना है। रिपोर्ट के अनुसार पीएम 2.5 पर काबू पा कर दिल्ली में प्रदूषण के कारण होने वाली मौतों को 45 से 85 फीसदी तक कम किया जा सकता है। दुनियाभर में वायु प्रदूषण का ब्योरा लेती इस रिपोर्ट में चीन और भारत पर खास ध्यान दिया गया है। रिपोर्ट में चेतावनी भरे स्वर में कहा गया है कि अगर ये दोनों देश प्रदूषण पर नियंत्रण कर पाएं, तो बड़ी संख्या में लोगों की जान बचाई जा सकती है। रिपोर्ट के अनुसार दोनों ही देश संयुक्त राष्ट्र द्वारा निर्धारित नियमों का पालन नहीं करते और इस कारण प्रदूषण की समस्या बढ़ती जा रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">साथ ही यह भी कहा गया है कि वाहनों की बढ़ती संख्या, बिजली के लिए कोयले से चलने वाले संयंत्रों पर निर्भरता और सड़कों पर लकड़ी और कूड़ा जलाने जैसी आदतों के कारण हालात में सुधार की कोई उम्मीद भी नहीं है, लेकिन अगर स्थिति को और बिगड़ने ना दिया जाए, तो कम-से-कम भविष्य में प्रदूषण से होने वाली बीमारियों के कारण मरने वाले लोगों की संख्या को और बढ़ने से रोका जा सकता है। ऐसा किया जाना जरूरी भी है।</p>
<p style="text-align:justify;">लोगों को मरने भी तो नहीं दिया जा सकता। हाल के वर्षों में अनगिनत वाहनों सहित दूसरे तमाम कारणों से हवा में जहरीले तत्त्वों में इजाफा दर्ज किया गया है। इसमें दिवाली के दौरान पटाखों की वजह से और बढ़ोतरी हो जाती है। यह बेहद अफसोस की बात है कि पिछले साल दिवाली के दिन और उसके बाद भी कई दिनों तक दिल्ली का वातावरण दमघोंटू जैसा बना रहा उसे जानते हुए भी कुछ लोगों ने सर्वोच्च अदालत के आदेश के औचित्य पर सवाल उठाए और उसे नाहक धार्मिक चश्मे से देखने की कोशिश की। पर्यावरण की फिक्र वक्त का तकाजा है।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रदूषण से मरने वालों की संख्या मलेरिया से होने वाली मौतों से 3 गुणा और एचआईवी एड्स के कारण होने वाली मौतों से करीब 14 गुणा अधिक है। हालांकि प्रदूषण को वैश्विक समुदाय से थोड़ा ही महत्व मिलता है। प्योर अर्थ ब्लैकस्मिथ इंस्टीट्यूट ने इस विश्लेषण को तैयार किया है। यह स्वास्थ्य और प्रदूषण (जीएएचपी) पर विश्वव्यापी गठबंधन का हिस्सा है।जीएएचपी द्विपक्षीय, बहुपक्षीय और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों, राष्ट्रीय सरकारों, शिक्षाविदों और समाज की सहयोगी संस्था है। इंस्टीट्यूट के अध्यक्ष रिचर्ड फुलर के मुताबिक, ‘वायु और जल प्रदूषण के साथ टॉक्सिक साइटें विकासशील देशों की स्वास्थ्य प्रणाली पर भारी बोझ थोपती हैं।’</p>
<p style="text-align:justify;">जीएएचपी के विश्लेषण में विश्व स्वास्थ्य संगठन और दूसरे अन्य डाटा को एकीकृत कर यह निर्धारित किया गया है कि 74 लाख लोगों की मौत की वजह वायु और जल से होने वाले प्रदूषण स्रोत हैं। गरीब देशों में दस लाख अतिरिक्त और मौतें छोटे और मध्यम आकार के उत्पादकों के औद्योगिक कचरे और जहरीले रसायन, वायु, जल, मिट्टी और भोजन में मिलने के कारण हुई। ब्लैकस्मिथ इंस्टीट्यूट के तकनीकी सलाहकार और न्यूयॉर्क विश्वविद्यालय में पर्यावरणीय स्वास्थ्य के प्रोफेसर जैक कैरावानोस के मुताबिक इन देशों में संक्रामक रोग और धूम्रपान के मुकाबले, पर्यावरण प्रदूषण का स्वास्थ्य पर ज्यादा बुरा प्रभाव है। एक तरह से स्वास्थ्य के प्रश्न पर पूरी दुनिया में सन्नाटा है, हर कोई विकास की बात कर रहा है। इस तथाकथित विकास ने स्वास्थ्य एवं इंसान के जीवन को गौण कर दिया है।</p>
<p style="text-align:justify;">करीब 20 करोड़ लोग सीधे तौर पर प्रदूषित पर्यावरण में जीने को मजबूर हैं। भारी धातुओं से दूषित मिट्टी, हवा में घुलने वाले रासायनिक कचरे या फिर नदी के पानी में इलेक्ट्रॉनिक कबाड़ को बहाना, त्यौहारों के नाम पर आतिशबाजी-खतरे की घंटी बजाने वाले ये कुछ खतरनाक उदाहरण हैं एवं ऐसी विनाशकारी स्थितियां हैं, जिनका आम लोगों के स्वास्थ्य पर घातक प्रभाव पड़ता है, जिस पर ध्यान देना देना जरूरी है, अन्यथा तब तक भयानक परिणाम सामने आते रहेंगे। भविष्य धुंधला होता रहेगा। दिल्ली और देश में ऐसा कोई बड़ा जन-आन्दोलन भी नहीं है, जो पर्यावरण के लिये ही जनता में जागृति लाता है, जो हर नागरिक को प्रेरणा दें कि वह दो-चार पेड़-पौधे लगाए। राजनीतिक दल और नेता लोगों को वोट और नोट चक्कर से फुर्सत मिले, तब तो मनुष्य जीवन से जुड़े बुनियादी प्रश्नों पर कोई ठोस काम हो सके।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>-ललित गर्ग</strong></p>
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                                                            <category>लेख</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 22 Oct 2017 04:11:43 +0530</pubDate>
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                <title>आतंकवाद का नया व खतरनाक रूप</title>
                                    <description><![CDATA[स्पेन की राजधानी बार्सीलोना में एक वैन ड्राईवर ने 13 व्यक्तियों को कुचल कर मार दिया। स्पेन के प्रधानमंत्री ने इसे आतंकवादी हमला करार दिया। इसके अलावा मौके पर मौजूद लोगों ने बताया कि यह कोई अचानक या गलतीवश घटित दुर्घटना नहीं। यदि विगत वर्षों में घटित घटनाओं से इसकी तुलना की जाए तो फ्रांस […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/new-and-dangerous-form-of-terrorism/article-3228"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-08/van-attack.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">स्पेन की राजधानी बार्सीलोना में एक वैन ड्राईवर ने 13 व्यक्तियों को कुचल कर मार दिया। स्पेन के प्रधानमंत्री ने इसे आतंकवादी हमला करार दिया। इसके अलावा मौके पर मौजूद लोगों ने बताया कि यह कोई अचानक या गलतीवश घटित दुर्घटना नहीं। यदि विगत वर्षों में घटित घटनाओं से इसकी तुलना की जाए तो फ्रांस के नीस शहर में ट्रक द्वारा किए गए आतंकी हमले की हुबहू नकल है। इसी तरह जर्मनी की राजधानी बर्लिन में क्रिसमस के अवसर पर एक बाजार में भीड़ पर भारी वाहन चढ़ा दिया गया था।</p>
<p style="text-align:justify;">इस साल भी वर्जीनिया, पैरिस, लन्दन में भी ऐसीं घटनाएं हुई है। कारण स्पष्ट ही है कि सुरक्षा बलों की चौकसी के चलते हथियारबंद आतंकवादी अब जल्द पकड़ लिए जाते हैं। दूसरी ओर आतंकवादी संगठन बड़े शातिर हो रहे हैं, जिन्होंने हमले करने के तौर तरीके बदल लिए हैं। अब उन्होंने कार, जीप और ट्रक को हथियार बना लिया है किंतु निराशाजनक बात यह है कि तकनीक में माहिर यूरोपीय देश आतंकवाद की नई रणनीति को समझने में चूक कर रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">आतंकवादी अपने मिशन में सफल हो रहे हैं जबकि यूरोपीय देश केवल हथियार बनाने में जुटे हुए हंै। आतंकवाद से निपटने के लिए केवल हथियारों की जरूरत नहीं अपितु होशियारी व समझदारी की भी जरूरत है। भारत सहित अन्य एशियाई देशों को इस मामले में गंभीर और जागरूक होने की आवश्यकता है। बड़ी आबादी वाले देशों में यूरोप जैसे हमले तो और भी खतरनाक हो सकते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">आतंकवाद के खतरनाक रूप के मद्देनजर भारत सरकार को रेलवे, बांध, नहरों व भीड़ वाले सार्वजनिक स्थानों की सुरक्षा के लिए पुख्ता प्रबंध कर लेने चाहिए। यदि एक बांध या नहर किसी भी साजिश के अंतर्गत तोड़ी गई तब यह हथियारों से किए गए हमले से कहीं ज्यादा खतरनाक साबित होगी। आतंकवाद का मुकाबला करने के लिए आतंकवादियों की अपेक्षा तेज व मजबूत रणनीति बनानी होगी। यह रुझान बंद होना चाहिए कि जब कोई घटना हो फिर तैयारी की जाए। आतंकवाद प्रभावित देशों को नई रणनीति तैयार करने के लिए वैश्विक संयुक्त टीम बना लेनी चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">
</p><p style="text-align:justify;">
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                                                            <category>सम्पादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 18 Aug 2017 23:06:29 +0530</pubDate>
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                <title>हादसों का कारण बन सकते हैं ओवरलोड ट्राले</title>
                                    <description><![CDATA[नियमों का उल्लंधन करने वालों के विरुद्ध प्रशासन को दिखानी चाहिए सख्ती फिरोजपुर(सतपाल थिंद)। नियमों की धज्जियां उड़ा कर चलाए जाते रेत के खड्ढों के बाद अब नियमों की धज्जियां उड़ा कर रेत की हो रही ढुलाई की हर तरफ चर्चा हो रही है। रेत के साथ भरी ओवरलोड ट्रालियों के साथ कई सड़क हादसे […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/punjab/overload-trolley-can-be-the-cause-of-dangerous-hazards/article-2040"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-07/over-load.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:justify;">नियमों का उल्लंधन करने वालों के विरुद्ध प्रशासन को दिखानी चाहिए सख्ती</h2>
<p style="text-align:justify;"><strong>फिरोजपुर(सतपाल थिंद)।</strong> नियमों की धज्जियां उड़ा कर चलाए जाते रेत के खड्ढों के बाद अब नियमों की धज्जियां उड़ा कर रेत की हो रही ढुलाई की हर तरफ चर्चा हो रही है। रेत के साथ भरी ओवरलोड ट्रालियों के साथ कई सड़क हादसे घट रहे हैं और ओवरलोड ट्रालियों में से उड़ती रेत पीछे आ रहे दो पहिया वाहन चालकों के लिए बड़ी मुश्किलें पैदा करती है।</p>
<h2>ड्राईवर की ओर से ब्रेक के सहारे की जाती है ट्रैक्टर-ट्राली की कटाई</h2>
<p style="text-align:justify;">ज्यादा पैसे कमाने के लालच में एक ही ट्राले में 500 क्विंटल से अधिक रेत की की जा रही ढुलाई सड़क हादसों को निमंत्रण दे रही है क्योंकि रेत के साथ ट्राले ज्यादा भरे होने के कारण ट्रैक्टरों के अगले टायर आगे से उठ जाते हैं जबकि अगले टायरों से ट्रैक्टरों की कटाई होती है पर अगले टायर उठ जाने के कारण चालकों को ब्रेक के सहारे ट्रैक्टर की कटाई करनी पड़ती है</p>
<p style="text-align:justify;">जो किसी भी समय किसी भी साईड अधिक मुड़ जाने के कारण बड़े सड़क हादसे का कारण बन सकता है। शाम के समय फिरोजपुर शहर में से गुजरते रेत के ओवर-लोड ट्रैक्टर-ट्रालियों के कारण किसी भी समय हादसा घटित हो सकता है</p>
<p style="text-align:justify;">क्योंकि शाम के समय शहर में यातायात बढ़ जाता है और इसी समय ही रेत के साथ भरे ओवरलोड ट्रैक्टर -ट्राले शहर में से गुजरते हैं जो अगले टायरों के उठे होने के कारण कंट्रोल से बाहर होते हैं। शहर निवासियों सुरिन्दर सिंह, अशोक वर्मा, हरजिन्दर सिंह आदि ने पुलिस प्रशासन से ऐसी ओवरलोड ट्रालियों पर लगाम लगाने की मांग की है।</p>
<h2 style="text-align:justify;">अधिक भार होने के कारण उठ जाते हैं ट्रैक्टर के अगले टायर</h2>
<p style="text-align:justify;">गौरतलब है कि जिलेभर में 35 के करीब रेत के खड्ढे मंनजूरशुदा हैं परंतु ज्यादातर खड्ढ़े माइनिंग विभाग की शर्तों पर पूरे नहीं उतर रहे। इन रेत के खड्ढ़ों में से ट्रालियों में 500 से 700 क्विंटल ओवरलोड रेत भर कर रेत के खड्ढ़ों में से जेसी बी मशीनों के द्वारा बाहर निकाला जाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">राजनैतिक नेताओं की शह प्राप्त रेत के खड्ढ़े चलाते ठेकेदारों के अलावा राजनैतिक लोगों के दबाव के कारण पुलिस भी बहुत कम इनको हाथ डालती है क्योंकि जब भी कोई कर्मचारी इन ट्रालियों को रोकता है तो उनके कान के साथ फोन लगा दिया जाता है, जिस कारण फिरोजपुर से लेकर फाजिल्का-अबोहर तक इन ओवरलोड ट्रालियों का सड़कों पर तमाशा सरेआम देखा जा रहा है। प्रशासन को इस ओर ध्यान देने की जरूरत है ताकि इस नकेल कसी जा सके।</p>
<h2 style="text-align:justify;">पुलिस प्रशासन भी दिखता है मजबूर</h2>
<p style="text-align:justify;">सड़क पर जाते ओवरलोड रेत के ट्रालों से अवगत पुलिस कर्मचारी भी चाहते हुए भी रोकने में नाकाम हैं क्योंकि ज्यादातर उन लोगों ने ही रेत की ढुलाई के लिए ट्राले लगाए हैं जिनके सिर पर किसी राजनैतिक नेता का हाथ हो। इन राजनैतिक नेताओं की शह पर ओवरलोड ट्राले सड़कों पर मौत का साया बन कर दौड़ रहे हैं।</p>
<h2 style="text-align:justify;">माइनिंग इंस्पेक्टर के पास नहीं काटे गए चालानों का रिकार्ड</h2>
<p style="text-align:justify;">जब इस बारे में माईनिंग इंस्पेक्टर संजीव सेतिया के साथ बातचीत की तो उन्होंने दावा किया कि उनकी ओर से ओवरलोड ट्रालियों के चालान काटे गए हैं जब उनसे गिनती के बारे में पूछा गया तो उन्होंने आधे घंटे में जानकारी देने के लिए कहा परंतु शाम के 4से 7बजे तक लगातार पांच बार फोन पर बात होने दौरान वह काटे गए चालानों की जानकारी न दे सके।</p>
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                <pubDate>Thu, 06 Jul 2017 23:17:09 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>भीष्ण सड़क हादसे में चार बारातियों की मौत के बाद कई परिवारों पर टूटा दु:खों का पहाड़</title>
                                    <description><![CDATA[चित्कार मेें बदली शहनाई की खुशियां, पसरा मातमी सन्नाटा परिजन व ग्रामीण करते रहे डोली का इंतजार पहुंची दुल्हे की लाश तो चिख उठा जर्रा-जर्रा रानियां/खारियां(दीपक/सुनील)। चंद घड़ी पहले जहां ढोल-नगाड़े और शहनाइयां गूंज रही थी, कुदरत ने ऐसा कहर ढ़हाया कि अब वहां मातम पसरा है। राजस्थान के रावतसर- नोहर रोड पर गांव चाइया […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/four-killed-in-dangerous-road-accident/article-1406"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-06/accident3.jpg" alt=""></a><br /><h1 style="text-align:center;">चित्कार मेें बदली शहनाई की खुशियां, पसरा मातमी सन्नाटा</h1>
<ul>
<li style="text-align:justify;"><strong>परिजन व ग्रामीण करते रहे डोली का इंतजार</strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>पहुंची दुल्हे की लाश तो चिख उठा जर्रा-जर्रा</strong></li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>रानियां/खारियां(दीपक/सुनील)।</strong> चंद घड़ी पहले जहां ढोल-नगाड़े और शहनाइयां गूंज रही थी, कुदरत ने ऐसा कहर ढ़हाया कि अब वहां मातम पसरा है। राजस्थान के रावतसर- नोहर रोड पर गांव चाइया के पास रविवार शाम हुए भीषण हादसे में दूल्हे सहित चार बारातियों की मौत से कई परिवारों की खुशियां मात्तम में बदल गई। हादसे के शिकार हुए बाराती तीन अलग अलग गांव के रहने वाले हैं, जिसमें से दो रिसालियाखेड़ा और एक चौटाला का रहने वाला था। जबकि दूल्हा पंजाब के गांव मौजगढ़ का रहने वाला था। इस हादसे की वजह से गांव खारियां, रिसालियाखेड़ा और चौटाला सहित मौजगढ़ में मात्तम छा गया है। सोमवार को चारों मृतक के शव पुलिस ने पोस्टमार्टम के बाद परिजनों को सौंप दिए हैं।</p>
<h2 style="text-align:justify;">शादी के लिए सात दिन पहले ही मामा के घर आ गया था जगतपाल</h2>
<p style="text-align:justify;">गांव खारिया निवासी शीशपाल भादू ने एक माह पहले ही अपने बेटे उमेद और भतीजे संदीप की सगाई राजस्थान के गांव किकराला में तय की थी। इधर शीशपाल की मौजगढ़ पंजाब में विवाहित बहन भी अपने बेटे जगतपाल के लिए रिश्ता तालाश रही थी। शीशपाल का पता लगा कि किकराला गांव के रिश्तेदारों के यहां तीन लड़कियां कुंवारी हैं। इसलिए उसने अपने भांजे जगतपाल का भी रिश्ता उनके यहां तीसरी लड़की से तय कर दिया। 18 जून रविवार को तीनों की शादी का दिन तय हो गया।</p>
<p style="text-align:justify;">शीशपाल ने अपनी रिश्तेदारों के हिसाब से भांजे की बारात भी अपने घर से ही ले जाने की बात फाइनल कर ली। उसके बाद अगले दिन सोमवार को जगतपाल ने अपने गांव में पार्टी सुनिश्चित कर दी। शादी के लिए अपनी मां के साथ जगतपाल सात दिन पहले ही मामा के यहां खारिया गांव आ गया। घर में शादी की खुशियां थी। उधर मौजगढ़ में जगतपाल के बाकी परिजन पार्टी की तैयारी कर रहे थे। रविवार को तीनों लड़कों की बारात गई। शादी करके जब वे अलग-अलग गाड़ियों में दुल्हन लेकर आ रहे थे।</p>
<p style="text-align:justify;">उसी समय दूल्हे जगतपाल की गाड़ी सड़क हादसे का शिकार हो गई। जिसमें जगतपाल और उसका जीजा संदीप निवासी चौटाला की मौके पर ही मौत हो गई। जबकि संदीप का बेटा अजय घायल हो गया। उनकी गाड़ी को गांव चाइया के पास बोलेरो कैंपर ने आकर टक्कर मार दी। गनीमत यह रही कि गाड़ी में बैठी दुल्हन और दो अन्य लेडिज सहित चालक को चोट नहीं आई। वहीं विवाह की सारी खुशियां मातम में बदल गई।</p>
<h2 style="text-align:justify;">पीछे रह गई थी दूल्हे जगतपाल की गाड़ी</h2>
<p style="text-align:justify;">मृतक जगतपाल के मामा विनोद ने बताया कि शादी के बाद तीनों दूल्हों की गाड़ी साथ ही गांव किकराला से शाम को चली थी। चाइया गांव से पहले जगतपाल की गाड़ी में दुल्हन के साथ आई महिला रिश्तेदार को उल्टी आने लगी। इसलिए वह गाड़ी रोक दी। बाकी दो गाड़ियां आगे निकल गई। उसके बाद जब गाड़ी कुछ देर बाद वापस चली तो आगे गांव रिसालियाखेड़ा की बारात जा रही थी। चाइया गांव से निकलने के बाद सामने से एक तेज रफ्तार में बोलेरो कैंपर आई।</p>
<p style="text-align:justify;">उसने सीधी रिसालियाखेड़ा से आई आॅल्टो गाड़ी में टक्कर मार दी। उसके बाद अनियंत्रित होती हुई। जगतपाल की गाड़ी के बीच में टकरा गई। जिससे जगतपाल, संदीप और अजय खिड़की से बाहर आ पड़े। टक्कर इतनी भीषण थी की बीच की दोनों खिड़की एक हो गई, जिसमें जगतपाल और संदीप की मौत हो गई।</p>
<h2 style="text-align:justify;">रिसालियाखेड़ा के पंच व उसके साथी की भी मौत</h2>
<p style="text-align:justify;">बोलेरो कैंपर की दो गाड़ियों से हुई भिड़ंत में दूसरी बारात के आॅल्टो गाड़ी में सवार रिसालियाखेड़ा निवासी वार्ड पंच 30 वर्षीय रघुबीर और 25 वर्षीय सुभाष की मौके पर ही मौत हो गई। जबकि उनके साथ बैठा मोहनलाल निवासी रिसालियाखेड़ा भी गंभीर रूप से घायल हो गया। ये लोग गांव रिसालियाखेड़ा निवासी मैनपाल मेघवाल के बेटे की बारात में जाकर गांव फोर डीडब्लयूएम चक से वापस लौट रहे थे।</p>
<p style="text-align:justify;">
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                                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/haryana/four-killed-in-dangerous-road-accident/article-1406</link>
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                <pubDate>Mon, 19 Jun 2017 09:17:26 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>पुर्तगाल में जंगलों में लगी भीषण आग, 43 लोगों की मौत, कई घायल</title>
                                    <description><![CDATA[हताहतों की संख्या बढ़ सकती है पेनेला (पुर्तगाल)। मध्य पुर्तगाल के जंगल में भयानक आग लगने से 43 लोगों की मौत हो गई और कई अन्य जख्मी हो गए। सरकार ने कहा कि सभी की मौत कार में जलकर हुई है। कोइंब्रा से करीब 50 किलोमीटर दूर पेड्रोगन ग्रैंड नगर पालिका के जंगल में शनिवार […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/other-news/dangerous-fire-in-the-forests-in-portugal/article-1358"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-06/fire-11.jpg" alt=""></a><br /><h1 style="text-align:center;">हताहतों की संख्या बढ़ सकती है</h1>
<p style="text-align:justify;"><strong>पेनेला (पुर्तगाल)।</strong> मध्य पुर्तगाल के जंगल में भयानक आग लगने से 43 लोगों की मौत हो गई और कई अन्य जख्मी हो गए। सरकार ने कहा कि सभी की मौत कार में जलकर हुई है। कोइंब्रा से करीब 50 किलोमीटर दूर पेड्रोगन ग्रैंड नगर पालिका के जंगल में शनिवार दोपहर आग भड़क उठी थी। अग्निशमन दल के 600 कर्मचारी और 160 वाहनों को आग पर काबू पाने के लिए भेजा गया है। आग बेहद तेजी से कई जगहों पर फैल गई।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री एंटोनियो कोस्टा ने कहा, कि दुर्भाग्य से जंगलों में लगी आग के संदर्भ में हाल के वर्षों में हमारे द्वारा देखी गई सबसे बड़ी दुर्घटनाओं में से यह एक लगती है। उन्होंने कहा कि हताहतों की संख्या बढ़ सकती है। प्राथमिकता उन लोगों को बचाने की है जो अब भी खतरे में हो सकते हैं। पुर्तगाल में कई इलाकों में शनिवार को तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से ज्यादा चला गया था और यहां लू चल रही है। गृह मंत्री जॉर्ज गोम्स ने कहा कि लीरिया क्षेत्र में आग से झुलसकर 43 लोगों की मौत हुई है, इनमें से अधिकतर लपटों में घिरी अपनी कारों में फंस गए थे।</p>
<p style="text-align:justify;">
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                                            <category>अन्य खबरें</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 18 Jun 2017 07:10:03 +0530</pubDate>
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