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                <title>ISRO News - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>अंतरिक्ष में इसरों ने रचा इतिहास, देखता रह गया विश्व, जानिये इसरों ने ऐसा क्या किया&amp;#8230;</title>
                                    <description><![CDATA[श्रीहरिकोटा (आंध्रप्रदेश) (एजेंसी)। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने वर्ष 2026 के अपने पहले अंतरिक्ष अभियान पीएसएलवी-सी 62 रॉकेट का सोमवार को सफल प्रक्षेपण कर दिया। यह पीएसएलवी रॉकेट अर्थ आॅब्जर्वेशन सैटेलाइट ईओएस-एनवन और 14 अन्य छोटे उपग्रहों को अपने साथ लेकर अंतरिक्ष में गया है। इन उपग्रहों को उनकी निर्धारित कक्षाओं में स्थापित किया […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/isro-has-made-history-in-space-leaving-the-world-in-awe-find-out-what-isro-did/article-80246"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-01/isro-news.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>श्रीहरिकोटा (आंध्रप्रदेश) (एजेंसी)।</strong> भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने वर्ष 2026 के अपने पहले अंतरिक्ष अभियान पीएसएलवी-सी 62 रॉकेट का सोमवार को सफल प्रक्षेपण कर दिया। यह पीएसएलवी रॉकेट अर्थ आॅब्जर्वेशन सैटेलाइट ईओएस-एनवन और 14 अन्य छोटे उपग्रहों को अपने साथ लेकर अंतरिक्ष में गया है। इन उपग्रहों को उनकी निर्धारित कक्षाओं में स्थापित किया जाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;">यह मिशन इसरो की वाणिज्यिक शाखा ‘न्यूस्पेस इंडिया लिमिटेड’ (एनएसआईएल) संचालित कर रही है। अंतरिक्ष गए उपग्रहों में घरेलू और अंतरराष्ट्रीय, दोनों श्रेणियों के पेलोड शामिल हैं। इस 260 टन वजनी पीएसएलवी-सी62 रॉकेट वाले मिशन का मुख्य पेलोड एक अत्याधुनिक अर्थ आॅब्जर्वेशन सैटेलाइट है। उड़ान भरने के कुछ ही मिनटों में मुख्य उपग्रह और उसके साथ जा रहे 13 अन्य उपग्रहों को उनकी कक्षा में स्थापित कर दिया जाएगा।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
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                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 12 Jan 2026 11:09:55 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>ISRO News: अंतरिक्ष में पौधे कैसे और क्यों उगाए जाते हैं, ISRO अब पालक उगाने की है तैयारी</title>
                                    <description><![CDATA[ISRO News:  ISRO ने एक और शानदार उपलब्धि हासिल कर अपनी क्षमता का लोहा मनवाया हैं। यानि इसरों ने एक खास प्रयोग के तहस अंतरिक्ष में पौधे उगाने में सफलता पा ली हैं। इस लेख में आपको विस्तार से बताते हैं कि इस प्रयोग को कैसे अंजाम दिया गया और आखिर अंतरिक्ष में पौधे उगाने […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/isro-grew-cowpea-plant-in-space-now-preparations-are-on-to-grow-spinach-see-how-this-miracle-happened/article-73980"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2025-07/isro-news.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">ISRO News:  ISRO ने एक और शानदार उपलब्धि हासिल कर अपनी क्षमता का लोहा मनवाया हैं। यानि इसरों ने एक खास प्रयोग के तहस अंतरिक्ष में पौधे उगाने में सफलता पा ली हैं। इस लेख में आपको विस्तार से बताते हैं कि इस प्रयोग को कैसे अंजाम दिया गया और आखिर अंतरिक्ष में पौधे उगाने की जरूरत ही क्यों हैं?</p>
<p style="text-align:justify;">दरअसल भारत का अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन ने एक बार फिर भारत में इतिहास रच दिया हैं, इस बार बात अंतरिक्ष में पौधें उगाने की हैं। इसरों ने अपने पीएसएलवीसी-60 के पोएम-4 मिशन के जरिए माइक्रोग्रैवी में लोबिया के बीजों को अंकुरित करने में सफलता पाई हैं। वहीं यह अनोखा प्रयोग न केवल विज्ञान की दुनिया में एक बड़ा कदम हैं, बल्कि भविष्य में अंतरिक्ष में मानव जीवन को स्थायी बनाने की दिशा में एक मजबूत आधार भी हैं। वहीं अब सवाल तो उठता हैं, कि आखिर अंतरिक्ष में पौधे उगाने की इतनी कोशिश क्यों की जा रही हैं, और यह प्रयोग कितने सफल हो सकते हैं? इस बारे में विस्तार जानते हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">कैसे उगाया गया पौधा? ISRO News</h3>
<p style="text-align:justify;">दरअसल पोएम-4 मिशन में कुल 24 उन्नत पेलोड़ शामिल थे, इस ऐतिहासिक उपलब्धि को कंपैक्ट रिसर्च मॉड्यूल फॉर ऑर्बिटल प्लांट स्टडीज के माध्यम से अंजाम दिया गया। इसे इसरो के विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र की तरफ से बनाया गया था। वहीं इस शोध के दौरान 8 लोबिया के बीजों को एक बंद बॉक्स में रखा गया, जहां तापमान और अन्य स्थितियों का खास ध्यान रखा गया है। यह प्रयोग यह समझने के लिए किया गया था कि पौधे माइक्रोगैविटी में कैसे अंकुरित होते हैं और बढ़ते हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">एडवांस तकनीक के साथ की गई ये स्टडी ISRO News</h3>
<p style="text-align:justify;">इस प्रयोग को करने के लिए एडवांस निगरानी तकनीकी उपकरण लगाए गए, मसलन अच्छे गुणवत्ता वाले कैमरे, ऑक्सीजन और कार्बन डाइऑक्साइड मापने वाले सेंसर, हम्यूमिडिटी डिटेक्टर, तापमान मॉनिटर करने और मिट्टी मे नमी का पता लगाने वाले इक्विपमेंट्स शामिल किए है, इन सबके जरिए लगातार पौधे को ट्रैक किया गया, चार दिनो के भीतर ही लोबिया बीजों का सफलतापूर्वक अंकुरण हुआ और अनुमान लगाया जा रहा हैं कि जल्द ही इसमें पत्तियां भी आ सकती हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">अंतरिक्ष में पौधे उगाने की जरूरत क्यों?</h3>
<p style="text-align:justify;">अंतरिक्ष में पौधे उगाने के पीछे मुख्य मकसद लंबे समय तक चलने वाले अंतरिक्ष अभियानों के लिए खाना, ऑक्सीजन और मानसिक स्वास्थ्य का समाधान तलाशना हैं। जब अंतरिक्ष यात्रि महीनों या सालों तक स्पेस में रहेंगे, तो उनके पास ताजा भोजन की कमी हो सकती हैं, ऐसे में पौधे उगाना एक स्थायी समाधान हो सकता हैं।<br />
वहीं इसके अलावा, पौधे कार्बन डाइऑक्साइड को ऑक्सीजन में बदलते हैं, इससे अंतरिक्ष यान के अंदर वायु गुणवत्ता में सुधार होगा। यह प्रयोग भविष्य में मंगल और चंद्रमा जैसे ग्रहों पर बसने के सपनों को साकार करने की दिशा में भी एक बड़ा कदम हैं, पौधों वृद्धि ने अंतरिक्ष कृषि के विकास में एक नई दिशा दी हैं, जो अंतरिक्ष में आत्मनिर्भर मानव निवास स्थापित करने के लिए आवश्यक हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">क्या होगा पूरी तरह से सफल?</h3>
<p style="text-align:justify;">हालांकि शुरुआती नतीजे उत्साहजनक हैं, लेकिन इस तकनीक को पूरी तरह विकसित करने में अभी समय लगेगा, पौधे का विकास स्पेस में धीमा होता हैं और कई बार उन्हं सही पोषण नहीं मिल पाता हैं, फिर भी इसरो का यह कदम अंतरिक्ष में मावन बस्तियां बसाने की दिशा में एक बड़ा बदलाव साबित हो सकता हैं।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>साहित्य</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 28 Jul 2025 12:10:17 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>Axiom Mission 4: अहम साबित होगा शुभांशु शुक्ला का अंतरिक्ष अनुभव : वैज्ञानिक मिला मित्रा</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली। भारत के अंतरिक्ष इतिहास में एक और स्वर्णिम अध्याय जुड़ गया है। भारतीय वायुसेना के ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला आज अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) से सफलतापूर्वक पृथ्वी पर लौट आए। इस अवसर पर नासा की पूर्व वैज्ञानिक डॉ. मिला मित्रा ने इस अंतरिक्ष अभियान की वैज्ञानिक महत्ता और उससे जुड़ी चुनौतियों पर विस्तार […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/shubhanshu-shuklas-space-experience-will-prove-to-be-important-scientist-mila-mitra/article-73447"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2025-07/mission-4.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">नई दिल्ली। भारत के अंतरिक्ष इतिहास में एक और स्वर्णिम अध्याय जुड़ गया है। भारतीय वायुसेना के ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला आज अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) से सफलतापूर्वक पृथ्वी पर लौट आए। इस अवसर पर नासा की पूर्व वैज्ञानिक डॉ. मिला मित्रा ने इस अंतरिक्ष अभियान की वैज्ञानिक महत्ता और उससे जुड़ी चुनौतियों पर विस्तार से प्रकाश डाला। Axiom Mission 4</p>
<p style="text-align:justify;">डॉ. मित्रा ने बताया कि एक्सिओम-4 मिशन भारत के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह पहली बार हुआ है जब किसी भारतीय अंतरिक्ष यात्री ने आईएसएस पर पहुँचकर वैज्ञानिक प्रयोगों में सक्रिय भागीदारी की। इस मिशन के अंतर्गत कुल 60 वैज्ञानिक प्रयोग किए गए, जिनमें से 7 प्रयोग भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) द्वारा विशेष रूप से तैयार किए गए थे। इन प्रयोगों में मूंग व मेथी जैसी फसलों का अंतरिक्ष में अंकुरण, मानव शरीर पर शून्य गुरुत्वाकर्षण के प्रभाव, तथा मानव-कंप्यूटर संवाद जैसे विषयों का गहन अध्ययन किया गया।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा, “यह मिशन न केवल विज्ञान की दृष्टि से, बल्कि अंतरराष्ट्रीय सहयोग के दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण है। जब विभिन्न देश मिलकर शोध करते हैं, तो न केवल खोजों में प्रगति होती है, बल्कि वैश्विक एकता का संदेश भी प्रसारित होता है।”</p>
<h3>शून्य गुरुत्वाकर्षण की स्थिति में शरीर की मांसपेशियां धीरे-धीरे शिथिल होने लगती हैं</h3>
<p style="text-align:justify;">डॉ. मित्रा ने अंतरिक्ष में दीर्घकालीन प्रवास के प्रभावों की चर्चा करते हुए बताया कि शून्य गुरुत्वाकर्षण की स्थिति में शरीर की मांसपेशियां धीरे-धीरे शिथिल होने लगती हैं, हृदय गति में परिवर्तन आता है, रक्त प्रवाह असंतुलित हो जाता है और दृष्टि तथा प्रतिरक्षा प्रणाली पर भी असर पड़ता है। इन प्रभावों से उबरने के लिए शुभांशु शुक्ला और उनके साथियों को पृथ्वी पर लौटने के बाद दो सप्ताह से लेकर एक माह तक पुनर्वास चिकित्सा से गुजरना होगा। इस प्रक्रिया में उनकी मांसपेशियों, दृष्टि और रोग प्रतिरोधक क्षमता को पुनः पृथ्वी के वातावरण के अनुकूल बनाने के लिए विशेष चिकित्सकीय उपाय किए जाएंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">डॉ. मित्रा ने यह भी कहा, “शुभांशु शुक्ला का यह अनुभव भारत के आगामी गगनयान मिशन के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगा। वे अब अंतरिक्ष में रहने, काम करने और पृथ्वी पर लौटने की समस्त प्रक्रियाओं से परिचित हो चुके हैं। उनके अनुभव से भावी अंतरिक्ष यात्रियों को अमूल्य मार्गदर्शन मिलेगा।” उन्होंने इस पूरे मिशन को भारत के लिए गर्व का क्षण बताया और कहा, “शुभांशु न केवल पहले भारतीय हैं जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर कदम रखा, बल्कि वे आने वाली पीढ़ियों के अंतरिक्ष विज्ञानियों के लिए प्रेरणास्रोत भी बनेंगे।” Axiom Mission 4</p>
<p><a title="Mumbai Rains: मुंबई में भारी बारिश हवाई सेवाओं में बनी बाधा, एयरलाइनों की यात्रियों के लिए एडवाइजरी जारी" href="http://10.0.0.122:1245/heavy-rains-in-mumbai-cause-disruption-in-air-services-airlines-issue-advisory-for-passengers/">Mumbai Rains: मुंबई में भारी बारिश हवाई सेवाओं में बनी बाधा, एयरलाइनों की यात्रियों के लिए एडवाइजरी …</a></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>लेख</category>
                                            <category>विचार</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 15 Jul 2025 16:59:28 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Axiom-4 mission postponed: एक्सिओम-4 मिशन एक बार फिर टला, लॉन्चिंग की नई तारीख की गई तय</title>
                                    <description><![CDATA[Axiom-4 mission postponed: नई दिल्ली। भारत के लिए अत्यंत गौरवपूर्ण एक्सिओम-4 अंतरिक्ष मिशन एक बार फिर स्थगित कर दिया गया है। इस मिशन के तहत भारतीय वायुसेना के ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला को अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) भेजा जाना है। पूर्व में निर्धारित तिथि 19 जून थी, जिसे अब आगे बढ़ाकर 22 जून 2025 कर […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/axiom-4-mission-postponed-again-new-launch-date-fixed/article-72272"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2025-06/isro.jpg" alt=""></a><br /><p class="ai-optimize-6 ai-optimize-introduction" style="text-align:justify;">Axiom-4 mission postponed: नई दिल्ली। भारत के लिए अत्यंत गौरवपूर्ण एक्सिओम-4 अंतरिक्ष मिशन एक बार फिर स्थगित कर दिया गया है। इस मिशन के तहत भारतीय वायुसेना के ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला को अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) भेजा जाना है। पूर्व में निर्धारित तिथि 19 जून थी, जिसे अब आगे बढ़ाकर 22 जून 2025 कर दिया गया है। ISRO News</p>
<p class="ai-optimize-7" style="text-align:justify;">इस संबंध में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने पुष्टि करते हुए बताया कि भारत, पोलैंड और हंगरी की टीमें इस मिशन की तैयारियों को लेकर एक्सिओम स्पेस के साथ निरंतर समन्वय कर रही हैं। विस्तृत समीक्षा के उपरांत नासा और स्पेसएक्स के सहयोग से विभिन्न तकनीकी पहलुओं—जैसे कि फाल्कन 9 रॉकेट, ड्रैगन यान, आईएसएस के ज़्वेज़्दा मॉड्यूल में चल रहा मरम्मत कार्य, मौसम की अनुकूलता और मिशन दल की स्वास्थ्य स्थितियों—का मूल्यांकन किया गया।इसके आधार पर एक्सिओम स्पेस ने अब यह संकेत दिया है कि 22 जून को अगली संभावित लॉन्च तिथि हो सकती है।</p>
<h3 class="ai-optimize-9" style="text-align:justify;">केंद्रीय मंत्री ने दी जानकारी | ISRO News</h3>
<p class="ai-optimize-9" style="text-align:justify;">केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने इस स्थगन की जानकारी देते हुए ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा, “मॉड्यूल की उपयुक्तता, मौसम की स्थिति तथा अंतरिक्ष यात्रियों की सेहत के मूल्यांकन के बाद यह निर्णय लिया गया है। जैसे ही कोई नया अपडेट आएगा, उसे समयानुसार साझा किया जाएगा।” ज्ञात हो कि इससे पूर्व भी डॉ. सिंह ने मिशन की 19 जून वाली संभावित लॉन्चिंग की जानकारी दी थी। हालांकि तकनीकी कारणों से अब तक इस मिशन को पाँच बार स्थगित किया जा चुका है।</p>
<h3 class="ai-optimize-12" style="text-align:justify;">भारत के लिए ऐतिहासिक क्षण</h3>
<p class="ai-optimize-12" style="text-align:justify;">एक्सिओम-4 मिशन भारत के लिए अत्यधिक महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इसके अंतर्गत ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला को भारतीय अंतरिक्ष यात्री के रूप में आईएसएस भेजा जाएगा। वहां वे विशेष खाद्य एवं पोषण संबंधी प्रयोग करेंगे, जो भविष्य के दीर्घकालिक अंतरिक्ष अभियानों में अंतरिक्ष यात्रियों के स्वास्थ्य और पोषण व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण आधार तैयार करेंगे। ISRO News</p>
<p class="ai-optimize-14"><a title="Air India flight cancelled: एक बार फिर एयर इंडिया उड़ान को बीच रास्ते से लौटना पड़ा, यात्रियों को दी गई सहायता" href="http://10.0.0.122:1245/once-again-air-india-flight-had-to-return-mid-way/">Air India flight cancelled: एक बार फिर एयर इंडिया उड़ान को बीच रास्ते से लौटना पड़ा, यात्रियों को दी…</a></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/axiom-4-mission-postponed-again-new-launch-date-fixed/article-72272</link>
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                <pubDate>Wed, 18 Jun 2025 13:10:31 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>Isro News: इसरो ने देशवासियों को दी बड़ी खुशखबरी, बताया अंतरिक्ष में कब भेजेगा मानव, दुनिया हैरान</title>
                                    <description><![CDATA[चेन्नई (एजेंसी)। Isro News: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) अब चांद पर मिशन के साथ ही अंतरिक्ष में मानव भेजने की भी तैयारी कर रहा है। गगनयान मिशन के तहत भारतीय अंतरिक्ष यात्री अंतरिक्ष में जाएंगे। इसके अलावा, निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाने और नए लॉन्च व्हीकल्स के विकास पर भी जोर दिया जा रहा […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/indian-space-research-organisation-isro-is-preparing-to-send-humans-into-space-along-with-the-mission-to-the-moon/article-71642"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2025-05/isro-news.jpg" alt=""></a><br /><p class="ai-optimize-6 ai-optimize-introduction" style="text-align:justify;"><strong>चेन्नई (एजेंसी)।</strong> Isro News: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) अब चांद पर मिशन के साथ ही अंतरिक्ष में मानव भेजने की भी तैयारी कर रहा है। गगनयान मिशन के तहत भारतीय अंतरिक्ष यात्री अंतरिक्ष में जाएंगे। इसके अलावा, निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाने और नए लॉन्च व्हीकल्स के विकास पर भी जोर दिया जा रहा है। इसरो चंद्रयान, गगनयान और भारत-अमेरिका निसार मिशन सहित कई सफल प्रक्षेपण के साथ ही एक्सिओम-4 मिशन पर देश के पहले अंतरिक्ष यात्री को अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस)पर भेजने के लिए प्रतिबद्ध है। इसरो ने पिछले वर्ष की उपलब्धियों को गिनाते हुए अपनी वेबसाइट में यह नवीनतम जानकारी साक्षा की। Isro News</p>
<p class="ai-optimize-7" style="text-align:justify;">अंतरिक्ष एजेंसी ने कहा कि श्रीहरिकोटा के अंतरिक्ष केंद्र से पांच प्रक्षेपण सफल रहे हैं जिनमें आठ भारतीय अंतरिक्ष यान, एक विदेशी उपग्रह और पीओईएम 3 और 4 सहित छह रॉकेट निकायों का सटीक प्रक्षेपण शामिल है।इनमें पीएसएलवी-सी58/एक्सपोसैट, पीएसएलवी-सी59/प्रोबा-3, पीएसएलवी-सी60/एसपीएडेक्स डॉकिंग प्रायोगिक मिशन, जीएसएलवी-एफ14/इनसैट-3डीएस और एसएसएलवी-डी3/ईओएस-08 मिशन शामिल थे। इन सभी ने अपनी निर्धारित कक्षा में पेलोड को सफलतापूर्वक प्रक्षेपित किया। Isro News</p>
<p class="ai-optimize-6">वर्ष 2024 की अपनी उपलब्धियों को दशार्ते हुए इसरो ने बताया कि संगठन के जीसैट-20 को स्पेसएक्स के फाल्कन-9 ब्लॉक 5 द्वारा केप कैनावेरल से लॉन्च किया गया। टीएसएटी- 1 ए को भी फाल्कन-9 द्वारा ही लॉन्च किया गया जिसके परिणामस्वरूप कुल आठ भारतीय उपग्रहों, एक विदेशी उपग्रह, और छह रॉकेट निकाय (पोयम -3 और पोयम – 4 सहित) को उनकी इच्छित कक्षाओं में प्रक्षेपित किया गया।</p>
<p class="ai-optimize-8" style="text-align:justify;">वेबसाइट के मुताबिक पिछले साल 31 दिसंबर तक निजी आपरेटरों/शैक्षणिक संस्थानों सहित कुल 36 भारतीय अंतरिक्ष यान पृथ्वी की कक्षा में प्रक्षेपित किये गये। इस दौरान भारत सरकार के स्वामित्व वाले परिचालन उपग्रहों की संख्या लियो (निम्न पृथ्वी कक्षा) में 22 और जियो (भू-समकालिक पृथ्वी कक्षा) में 31 है। इसरो इन उपग्रहों का संचालन और प्रबंधन करता है, जो देश के विकास और सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसके अलावा दो भारतीय अंतरिक्ष मिशन -अर्थात् चंद्रयान-2 आॅर्बिटर (सीएच 2ड) और सूर्य-पृथ्वी लैग्रेंज बिंदु पर आदित्य-एल1 भी सक्रिय थे। चंद्रयान-3 अंतरिक्ष यान के प्रणोदन मॉड्यूल ने नवंबर 2023 से अपनी चंद्र कक्षा से स्थानांतरित होने के बाद उच्च पृथ्वी की कक्षा (1 लाख किमी से अधिक दूर) में काम करना जारी रखा। Isro News</p>
<p class="ai-optimize-9" style="text-align:justify;">इस बीच इसरो के अध्यक्ष डॉ. वी. नारायणन ने वर्ष 2024 के लिए ‘इसरो सिस्टम फॉर सेफ एंड सस्टेनेबल स्पेस आॅपरेशंस मैनेजमेंटह्ण (आईएसफौरओएम) द्वारा संकलित भारतीय अंतरिक्ष स्थिति आकलन रिपोर्ट (आईएसएसएआर) जारी करते हुए कहा कि पीएसएलवी -सी 3 का ऊपरी चरण वर्ष 2001 में आकस्मिक रूप से टूट गया था जिससे 371 टुकड़े हुए थे। इनमें से अधिकांश टुकड़े हालांकि फिर से वायुमंडल में प्रवेश कर गए हैं। वर्ष 2024 के अंत तक 41 पीएसएलवी – सी 3 का मलबा अभी भी कक्षा में ही है। Isro News</p>
<p class="ai-optimize-9" style="text-align:justify;">उन्होंने बताया कि वर्ष 2024 के अंत तक 34 रॉकेट निकायों ने पृथ्वी के वायुमंडल में पुन: प्रवेश किया और उस समय ऐसे पांच पुन:प्रवेश हुए।वायुमंडलीय पुन: प्रवेश में 34 रॉकेट निकायों ने 2024 के अंत तक पृथ्वी के वायुमंडल में पुन: प्रवेश किया। इसरो की वेबसाइट के मुताबिक सभी एलवीएम 3 रॉकेट निकाय क्षय हो चुके हैं और केवल एलवीएम 3 एम 2 वन वेब इंडिया- मिशन से एक ही राकेट कक्षा में बचा हुआ है। जीएसएलवी रॉकेट निकायों में से केवल जीएसएलवी -एफ 12 और जीएसएलवी- एफ 14 रॉकेट निकाय कक्षा में हैं। वर्ष 2024 के अंत तक कुल 31 भारतीय उपग्रह वायुमंडल में पुन: प्रवेश कर चुके हैं। वर्ष 2024 में नौ भारतीय उपग्रह वायुमंडल में पुन: प्रवेश कर चुके हैं। इनमें काटोर्सैट-2 भी शामिल है, जो 14 फरवरी को वायुमंडल में पुन: प्रवेश कर गया।</p>
<p class="ai-optimize-7"><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="विधायक ने छात्रों को बांटी पानी की बोतल व कॉपियां" href="http://10.0.0.122:1245/the-mla-distribute-water-bottles-and-notebooks-to-the-students/">विधायक ने छात्रों को बांटी पानी की बोतल व कॉपियां</a></p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/national/indian-space-research-organisation-isro-is-preparing-to-send-humans-into-space-along-with-the-mission-to-the-moon/article-71642</link>
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                <pubDate>Sat, 31 May 2025 17:35:51 +0530</pubDate>
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                <title>EOS-09 Mission Updates: इसरो के ईओएस-09 मिशन के तीसरे चरण की असफलता को लेकर इसरो प्रमुख का आया ये बड़ा बयान</title>
                                    <description><![CDATA[EOS-09 Mission Updates: श्रीहरिकोटा। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) द्वारा रविवार प्रातः प्रक्षेपित किया गया ईओएस-09 उपग्रह अपने निर्धारित लक्ष्य तक पहुँचने में असफल रहा। इस मिशन को पोलर सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल (पीएसएलवी-सी61) के माध्यम से श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से सुबह 5 बजकर 59 मिनट पर प्रक्षेपित किया गया था। ISRO News […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/isro-chief-gave-this-big-statement-regarding-the-failure-of-isros-eos-09-mission/article-71038"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2025-05/isro-unseccessful.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">EOS-09 Mission Updates: श्रीहरिकोटा। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) द्वारा रविवार प्रातः प्रक्षेपित किया गया ईओएस-09 उपग्रह अपने निर्धारित लक्ष्य तक पहुँचने में असफल रहा। इस मिशन को पोलर सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल (पीएसएलवी-सी61) के माध्यम से श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से सुबह 5 बजकर 59 मिनट पर प्रक्षेपित किया गया था। ISRO News</p>
<p style="text-align:justify;">इसरो प्रमुख डॉ. वी. नारायणन ने जानकारी दी कि रॉकेट के पहले और दूसरे चरणों का कार्य संचालन सामान्य रूप से हुआ, किन्तु तीसरे चरण में तकनीकी गड़बड़ी के कारण मिशन को पूर्ण नहीं किया जा सका। उन्होंने कहा, “हम तकनीकी विश्लेषण के पश्चात फिर से प्रयास करेंगे।” इसरो ने अपने आधिकारिक एक्स (पूर्ववर्ती ट्विटर) खाते पर लिखा, “पीएसएलवी-सी61 का प्रक्षेपण दूसरे चरण तक सामान्य रहा, परन्तु तीसरे चरण में तकनीकी अवलोकन के चलते यह अभियान निर्धारित लक्ष्य तक नहीं पहुँच सका।”</p>
<p style="text-align:justify;">ईओएस-09 एक उन्नत पृथ्वी अवलोकन उपग्रह है, जिसमें सी-बैंड सिंथेटिक एपर्चर रडार (SAR) तकनीक का प्रयोग किया गया है। यह उपग्रह दिन हो या रात, तथा किसी भी मौसम में पृथ्वी की सतह की उच्च गुणवत्ता वाली छवियाँ लेने में सक्षम है। इसका उपयोग कृषि निगरानी, वन प्रबंधन, आपदा मूल्यांकन और सुरक्षा क्षेत्र में किया जा सकता था।</p>
<p style="text-align:justify;">यह पीएसएलवी रॉकेट की कुल 63वीं उड़ान तथा पीएसएलवी-एक्सएल संस्करण की 27वीं उड़ान थी। इसरो के अनुसार, उपग्रह में दीर्घकालिक ईंधन प्रणाली भी थी, जिससे अभियान समाप्ति के पश्चात उपग्रह को सुरक्षित रूप से कक्षा से हटाया जा सकता था। ISRO News</p>
<p><a title="RCB vs KKR IPL 2025: केकेआर के लिए आई ऐसी आफत, कर गई प्लेऑफ की दौड़ से बाहर" href="http://10.0.0.122:1245/such-a-disaster-came-for-kkr-vs-rcb-ipl-2025-it-was-out-of-the-playoff-race/">RCB vs KKR IPL 2025: केकेआर के लिए आई ऐसी आफत, कर गई प्लेऑफ की दौड़ से बाहर</a></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 18 May 2025 10:01:41 +0530</pubDate>
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                <title>ISRO News: वाह क्या बात है! इसरो ने कर दिया कमाल, जानिये कैसे</title>
                                    <description><![CDATA[ISRO News: चेन्नई (एजेंसी)। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने जीएसएलवी के क्रायोजेनिक ऊपरी चरण के साथ स्पार्क टॉर्च इग्नाइटर का उपयोग करके प्रक्षेपण यान चरणों के प्रज्वलन परीक्षण का कई पुन: आरंभ सफलतापूर्वक किया है। एक अपडेट में, इसरो ने कहा कि वह अगले पीढ़ी के प्रक्षेपण यान के लिए लॉक्स-मीथेन इंजन और चरणों […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/wow-isro-has-done-wonders-know-how/article-68113"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2025-03/isro-news.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>ISRO News: चेन्नई (एजेंसी)।</strong> भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने जीएसएलवी के क्रायोजेनिक ऊपरी चरण के साथ स्पार्क टॉर्च इग्नाइटर का उपयोग करके प्रक्षेपण यान चरणों के प्रज्वलन परीक्षण का कई पुन: आरंभ सफलतापूर्वक किया है। एक अपडेट में, इसरो ने कहा कि वह अगले पीढ़ी के प्रक्षेपण यान के लिए लॉक्स-मीथेन इंजन और चरणों का विकास कर रहा है, जो एक पुन: प्रयोज्य बूस्टर चरण और दो नष्ट होने वाले ऊपरी चरणों का उपयोग किया जाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">इस विन्यास में, बूस्टर चरण की पुनर्प्राप्ति के लिए एकाधिक पुन:प्रारंभ आवश्यक होंगे, साथ ही मिशन लचीलेपन के लिए ऊपरी चरण को पुन:प्रारंभ करना भी आवश्यक होगा। तमिलनाडु के महेंद्रगिरि स्थित इसरो का द्रव नोदन प्रणाली केंद्र (एलपीएससी) भविष्य के लॉक्स-मीथेन चरणों के लिए स्पार्क टॉर्च इग्नाइटर विकसित कर रहा है, जिसके निम्नलिखित लाभ होंगे: मल्टी-रीस्टार्ट क्षमता, उच्च प्रज्वलन विश्वसनीयता और स्वच्छ दहन उत्पाद आदि।</p>
<p style="text-align:justify;">तीन मार्च 2025 को, स्पार्क टॉर्च इग्नाइटर का एक प्रदर्शन मॉडल जीएसएलवी क्रायोजेनिक उपरी चरण वर्नियर इंजन का उपयोग करके सफलतापूर्वक परीक्षण किया गया, जिसमें ईंधन के रूप में गैसीय आॅक्सीजन और गैसीय हाइड्रोजन का उपयोग किया गया। यह परीक्षण एलपीएससी के दहन अनुसंधान सुविधा में किया गया और सुचारू प्रज्वलन प्राप्त किया गया। यह परीक्षण कुल तीन सेकंड की अवधि के लिए किया गया और परीक्षण के दौरान प्राप्त सभी इंजन पैरामीटर सामान्य और अपेक्षा के अनुरूप थे। इसरो ने कहा कि प्रदर्शन को बेहतर बनाने के लिए आगामी परीक्षण की भी योजना बनाई गई है।</p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>साहित्य</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 08 Mar 2025 11:57:32 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
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                <title>ISRO News: इसरो का 100वां मिशन इस दिन होगा लॉन्च</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली (एजेंसी)। इसरो 29 जनवरी को श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से अपना 100वां मिशन लॉन्च करेगा। इस ऐतिहासिक मिशन के तहत जीएसएलवी-एफ15 रॉकेट को लॉन्च किया जाएगा, जो एनवीएस-02 उपग्रह को जियोसिंक्रोनस ट्रांसफर ऑर्बिट में स्थापित करेगा। इसरो ने अपने सोशल मीडिया हैंडल पर इसकी जानकारी दी है। जीएसएलवी-एफ15 रॉकेट, जीएसएलवी श्रृंखला […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/isro-will-launch-its-100th-mission-from-sriharikota-on-january-29/article-66792"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2025-01/isro-mission.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">नई दिल्ली (एजेंसी)। इसरो 29 जनवरी को श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से अपना 100वां मिशन लॉन्च करेगा। इस ऐतिहासिक मिशन के तहत जीएसएलवी-एफ15 रॉकेट को लॉन्च किया जाएगा, जो एनवीएस-02 उपग्रह को जियोसिंक्रोनस ट्रांसफर ऑर्बिट में स्थापित करेगा। इसरो ने अपने सोशल मीडिया हैंडल पर इसकी जानकारी दी है। जीएसएलवी-एफ15 रॉकेट, जीएसएलवी श्रृंखला की 17वीं उड़ान होगी और यह स्वदेशी क्रायोजेनिक चरण की 11वीं उड़ान होगी। ISRO News</p>
<p style="text-align:justify;">एनवीएस-02 उपग्रह भारतीय नेविगेशन प्रणाली (एनएवीआईसी) का हिस्सा है जो दूसरी पीढ़ी का उपग्रह है। इसका उद्देश्य भारत और इसके आसपास 1500 किलोमीटर की दूरी तक सटीक स्थिति, वेग और समय सेवाएं प्रदान करना है। एनवीएस-02 उपग्रह तकनीकी रूप से अत्याधुनिक है। इसका वजन 2,250 किलोग्राम है और यह 3 किलोवाट तक की पावर संभाल सकता है। इसमें नेविगेशन के लिए एल1, एल5 और एस बैंड पेलोड शामिल हैं जो इसकी सेवाओं को और बेहतर बनाएंगे। इसके अलावा, यह उपग्रह एल1 फ्रीक्वेंसी बैंड को सपोर्ट करता है जिससे इसकी विश्वसनीयता में भी वृद्धि होगी। ISRO News</p>
<p><a title="Food Security Yojana: अपात्र व्यक्ति इस तारीख तक हटवा लें खाद्य सुरक्षा योजना से अपना नाम! नहीं तो होगी कार्यवाही!" href="http://10.0.0.122:1245/ineligible-persons-should-get-their-names-removed-from-the-food-security-scheme-by-january-31/">Food Security Yojana: अपात्र व्यक्ति इस तारीख तक हटवा लें खाद्य सुरक्षा योजना से अपना नाम! नहीं तो ह…</a></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/national/isro-will-launch-its-100th-mission-from-sriharikota-on-january-29/article-66792</link>
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                <pubDate>Sat, 25 Jan 2025 20:48:09 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ISRO: नारायणन ने इसरो के नए अध्यक्ष का पदभार संभाला</title>
                                    <description><![CDATA[चेन्नई (एजेंसी)। Dr. V Narayanan: प्रतिष्ठित वैज्ञानिक (एपेक्स ग्रेड) डॉ. वी नारायणन ने मंगलवार को अंतरिक्ष विभाग के सचिव, अंतरिक्ष आयोग के अध्यक्ष और भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के अध्यक्ष का पदभार ग्रहण किया। इसरो ने ‘एक्स’ पर लिखा कि यह भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम के लिए एक महत्वपूर्ण नेतृत्व परिवर्तन है। इसरो में […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/narayanan-takes-over-as-new-isro-chairman/article-66414"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2025-01/chennai-news.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>चेन्नई (एजेंसी)।</strong> Dr. V Narayanan: प्रतिष्ठित वैज्ञानिक (एपेक्स ग्रेड) डॉ. वी नारायणन ने मंगलवार को अंतरिक्ष विभाग के सचिव, अंतरिक्ष आयोग के अध्यक्ष और भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के अध्यक्ष का पदभार ग्रहण किया। इसरो ने ‘एक्स’ पर लिखा कि यह भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम के लिए एक महत्वपूर्ण नेतृत्व परिवर्तन है। इसरो में लगभग चार दशकों के अनुभव के साथ, डॉ. नारायणन का नेतृत्व भारत के महत्वाकांक्षी अंतरिक्ष मिशनों का मार्गदर्शन करने के लिए तैयार है। Chennai News</p>
<p style="text-align:justify;">वे डॉ. सोमनाथ का स्थान लेंगे, जिनका कार्यकाल सार्थक और सफल रहा। इससे पहले, अंतरिक्ष एजेंसी ने एक विज्ञप्ति में कहा कि इससे पहले डॉ. नारायणन ने तरल प्रणोदन प्रणाली केंद्र (एलपीएससी) के निदेशक के रूप में कार्य किया था, जो इसरो के प्रमुख केंद्रों में से एक है। इसका मुख्यालय तिरुवनंतपुरम के वलियामाला में है। Chennai News</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="Vivo Company: संगरूर में खुला वीवो कंपनी का शोरूम" href="http://10.0.0.122:1245/vivo-company-showroom-opened-in-sangrur/">Vivo Company: संगरूर में खुला वीवो कंपनी का शोरूम</a></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 14 Jan 2025 15:52:19 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>Isro News: इसरों ने अंतरिक्ष में उगाएं पौधे, जाने क्यों किया जा रहा ये प्रयोग, कितना होगा ये सफल?</title>
                                    <description><![CDATA[Isro News:  नई दिल्ली (एजेंसी)। ISRO ने एक और शानदार उपलब्धि हासिल कर अपनी क्षमता का लोहा मनवाया हैं। यानि इसरों ने एक खास प्रयोग के तहस अंतरिक्ष में पौधे उगाने में सफलता पा ली हैं। इस लेख में आपको विस्तार से बताते हैं कि इस प्रयोग को कैसे अंजाम दिया गया और आखिर अंतरिक्ष […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/isro-grew-plants-in-space-know-why-this-experiment-is-being-done-how-successful-will-it-be/article-66197"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2025-01/isro-news.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>Isro News:  नई दिल्ली (एजेंसी)।</strong> ISRO ने एक और शानदार उपलब्धि हासिल कर अपनी क्षमता का लोहा मनवाया हैं। यानि इसरों ने एक खास प्रयोग के तहस अंतरिक्ष में पौधे उगाने में सफलता पा ली हैं। इस लेख में आपको विस्तार से बताते हैं कि इस प्रयोग को कैसे अंजाम दिया गया और आखिर अंतरिक्ष में पौधे उगाने की जरूरत ही क्यों हैं?</p>
<p style="text-align:justify;">दरअसल भारत का अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन ने एक बार फिर भारत में इतिहास रच दिया हैं, इस बार बात अंतरिक्ष में पौधें उगाने की हैं। इसरों ने अपने पीएसएलवीसी-60 के पोएम-4 मिशन के जरिए माइक्रोग्रैवी में लोबिया के बीजों को अंकुरित करने में सफलता पाई हैं। वहीं यह अनोखा प्रयोग न केवल विज्ञान की दुनिया में एक बड़ा कदम हैं, बल्कि भविष्य में अंतरिक्ष में मानव जीवन को स्थायी बनाने की दिशा में एक मजबूत आधार भी हैं। वहीं अब सवाल तो उठता हैं, कि आखिर अंतरिक्ष में पौधे उगाने की इतनी कोशिश क्यों की जा रही हैं, और यह प्रयोग कितने सफल हो सकते हैं? इस बारे में विस्तार जानते हैं।</p>
<p><a href="http://10.0.0.122:1245/these-leaves-are-full-of-vitamin-b12-fatigue-also-goes-away-after-eating-them/">Vitamin B12: इन पत्तों में कूट-कूट कर भरा है विटामिन बी12, खाते ही थकान भी हो जाती है दूर</a></p>
<h4 style="text-align:justify;">कैसे उगाया गया पौधा? Isro News</h4>
<p style="text-align:justify;">दरअसल पोएम-4 मिशन में कुल 24 उन्नत पेलोड़ शामिल थे, इस ऐतिहासिक उपलब्धि को कंपैक्ट रिसर्च मॉड्यूल फॉर ऑर्बिटल प्लांट स्टडीज के माध्यम से अंजाम दिया गया। इसे इसरो के विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र की तरफ से बनाया गया था। वहीं इस शोध के दौरान 8 लोबिया के बीजों को एक बंद बॉक्स में रखा गया, जहां तापमान और अन्य स्थितियों का खास ध्यान रखा गया है। यह प्रयोग यह समझने के लिए किया गया था कि पौधे माइक्रोगैविटी में कैसे अंकुरित होते हैं और बढ़ते हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">एडवांस तकनीक के साथ की गई ये स्टडी | Isro News</h3>
<p style="text-align:justify;">इस प्रयोग को करने के लिए एडवांस निगरानी तकनीकी उपकरण लगाए गए, मसलन अच्छे गुणवत्ता वाले कैमरे, ऑक्सीजन और कार्बन डाइऑक्साइड मापने वाले सेंसर, हम्यूमिडिटी डिटेक्टर, तापमान मॉनिटर करने और मिट्टी मे नमी का पता लगाने वाले इक्विपमेंट्स शामिल किए है, इन सबके जरिए लगातार पौधे को ट्रैक किया गया, चार दिनो के भीतर ही लोबिया बीजों का सफलतापूर्वक अंकुरण हुआ और अनुमान लगाया जा रहा हैं कि जल्द ही इसमें पत्तियां भी आ सकती हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">अंतरिक्ष में पौधे उगाने की जरूरत क्यों?</h3>
<p style="text-align:justify;">अंतरिक्ष में पौधे उगाने के पीछे मुख्य मकसद लंबे समय तक चलने वाले अंतरिक्ष अभियानों के लिए खाना, ऑक्सीजन और मानसिक स्वास्थ्य का समाधान तलाशना हैं। जब अंतरिक्ष यात्रि महीनों या सालों तक स्पेस में रहेंगे, तो उनके पास ताजा भोजन की कमी हो सकती हैं, ऐसे में पौधे उगाना एक स्थायी समाधान हो सकता हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">वहीं इसके अलावा, पौधे कार्बन डाइऑक्साइड को ऑक्सीजन में बदलते हैं, इससे अंतरिक्ष यान के अंदर वायु गुणवत्ता में सुधार होगा। यह प्रयोग भविष्य में मंगल और चंद्रमा जैसे ग्रहों पर बसने के सपनों को साकार करने की दिशा में भी एक बड़ा कदम हैं, पौधों वृद्धि ने अंतरिक्ष कृषि के विकास में एक नई दिशा दी हैं, जो अंतरिक्ष में आत्मनिर्भर मानव निवास स्थापित करने के लिए आवश्यक हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">क्या होगा पूरी तरह से सफल?</h3>
<p style="text-align:justify;">हालांकि शुरुआती नतीजे उत्साहजनक हैं, लेकिन इस तकनीक को पूरी तरह विकसित करने में अभी समय लगेगा, पौधे का विकास स्पेस में धीमा होता हैं और कई बार उन्हं सही पोषण नहीं मिल पाता हैं, फिर भी इसरो का यह कदम अंतरिक्ष में मावन बस्तियां बसाने की दिशा में एक बड़ा बदलाव साबित हो सकता हैं।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>साहित्य</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 08 Jan 2025 10:57:49 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ISRO News: इसरो रचने जा रहा नया इतिहास, जानकर आप रह जाएंगे दंग&amp;#8230;</title>
                                    <description><![CDATA[ISRO News: चेन्नई (एजेंसी)। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) पीएसएलवी-सी60 अंतरिक्ष डॉकिंग डेमोस्ट्रेशन स्पेडेक्स मिशन के तहत पीएसएलवी आॅर्बिटल एक्सपेरीमेंट मॉड्यूल-4 (पीओईएम-4) पर रिकॉर्ड 24 वैज्ञानिक प्रयोगों को अंतरिक्ष में तैनात करके एक ग्राउंड मेकिंग मिशन की शुरूआत करेगा। इसके 30 दिसंबर को श्रीहरिकोटा के शार रेंज से प्रक्षेपित होने की संभावना है। इसरो ने […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/isro-is-going-to-create-a-new-history-you-will-be-stunned-to-know/article-65619"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2024-12/isro-news.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>ISRO News: चेन्नई (एजेंसी)।</strong> भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) पीएसएलवी-सी60 अंतरिक्ष डॉकिंग डेमोस्ट्रेशन स्पेडेक्स मिशन के तहत पीएसएलवी आॅर्बिटल एक्सपेरीमेंट मॉड्यूल-4 (पीओईएम-4) पर रिकॉर्ड 24 वैज्ञानिक प्रयोगों को अंतरिक्ष में तैनात करके एक ग्राउंड मेकिंग मिशन की शुरूआत करेगा। इसके 30 दिसंबर को श्रीहरिकोटा के शार रेंज से प्रक्षेपित होने की संभावना है। इसरो ने कहा कि पीएसएलवी-सी60 स्पेडेक्स मिशन इस श्रृंखला का चौथा पीओईएम-4 मिशन है। इस मिशन में कुल 24 पेलोड उड़ाए जाएंगे जिनमें से 14 पेलोड इसरो/डीओएस केंद्रों से हैं और 10 पेलोड विभिन्न गैर-सरकारी संस्थाओं (एनजीई) से हैं जिनमें अकादमिक और स्टार्ट-अप शामिल हैं जिन्हें इन स्पेस के माध्यम से प्राप्त किया गया है। यह पिछले पीओईएम-3 प्लेटफॉर्म की तुलना में पीओईएम की क्षमता में तीन गुना महत्वपूर्ण वृद्धि है जिसमें इसने केवल आठ पेलोड होस्ट किए थे। पीएस4-आॅर्बिटल एक्सपेरीमेंट मॉड्यूल जिसे पीओईएम के रूप में नामित किया गया है पीएलएलवी के खर्च किए गए चौथे चरण के उपयोग को संदर्भित करता है।</p>
<p><a href="http://10.0.0.122:1245/eat-this-sweet-to-stay-healthy-in-winter-know-why-everyone-is-going-crazy-about-it/">Best Winter Sweets: सर्दियों में सेहतमंद रहने के लिए करें इस मिठाई का सेवन, जानिए क्यों सब हो रहे हैं दीवाने</a></p>
<p style="text-align:justify;">इसरो ने कहा कि यह वैज्ञानिक समुदाय को पीओईएम प्लेटफॉर्म का उपयोग करके तीन महीने तक की विस्तारित अवधि के लिए कुछ इन-आॅर्बिट माइक्रोग्रैविटी प्रयोगों को करने का अवसर प्रदान करता है जो अन्यथा मिशन के प्राथमिक पेलोड को इंजेक्ट करने के मिशन उद्देश्य के तुरंत बाद अंतरिक्ष मलबे के रूप में समाप्त हो जाते। ऐसे प्रायोगिक पेलोड भविष्य के मिशनों के लिए विभिन्न प्रूफ-आॅफ-कॉन्सेप्ट और सक्षम प्रौद्योगिकियों को मान्य करने के लिए अग्रदूत प्रयोगों के रूप में कार्य करते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">इसरो ने 24 पीओईएम-4 पेलोड की विशेषताओं के बारे में कहा कि विभिन्न इसरो केंद्रों और इकाइयों से 14 इसरो/डीओएस पेलोड में विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र (वीएसएससी, तिरुवनंतपुरम) से पांच पेलोड, अंतरिक्ष भौतिकी प्रयोगशाला (एसपीएल-वीएसएससी) से चार, इसरो जड़त्वीय प्रणाली इकाई (आईआईएसयू-वीएसएससी) से तीन, एसपीएल और आईआईएसयू से एक सहयोगी पेलोड और भारतीय अंतरिक्ष विज्ञान और प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईएसटी, वलियामाला) से एक पेलोड शामिल हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">इसरो/डीओएस केंद्रों से 14 पेलोड मुख्य रूप से भविष्य के इसरो मिशनों के लिए अग्रदूत प्रयोगों के रूप में सक्षम प्रौद्योगिकियों और प्रमाण-अवधारणाओं के सत्यापन पर ध्यान केंद्रित करते हैं। एनजीई के 10 पेलोड में विज्ञान और इंजीनियरिंग के विभिन्न स्पेक्ट्रा का अध्ययन शामिल है।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>साहित्य</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 23 Dec 2024 10:41:16 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>ISRO&amp;#8217;s launches SpaceX GSAT-N2: जीसैट-एन2 ने स्पेसएक्स के प्रक्षेपण यान से उड़ान भरी</title>
                                    <description><![CDATA[ISRO’s launches SpaceX GSAT-N2: चेन्नई (एजेंसी)। भारत के नवीनतम और उन्नत जीसैट-एन 2 (जीसैट-20) ने सोमवार रात को अमेरिका स्थित स्पेसएक्स के फाल्कन-9 प्रक्षेपण यान से उड़ान भरी। लगभग 33 मिनट की उड़ान अवधि के बाद एलन मस्क के स्वामित्व वाले स्पेसएक्स के फाल्कन-9 रॉकेट ने 4,700 किलोग्राम के जीसैट-एन 2 को जियोसिंक्रोनस ट्रांसफर ऑर्बिट […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/gsat-n2-lifts-off-from-spacex-launch-vehicle/article-64465"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2024-11/isro.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">ISRO’s launches SpaceX GSAT-N2: चेन्नई (एजेंसी)। भारत के नवीनतम और उन्नत जीसैट-एन 2 (जीसैट-20) ने सोमवार रात को अमेरिका स्थित स्पेसएक्स के फाल्कन-9 प्रक्षेपण यान से उड़ान भरी। लगभग 33 मिनट की उड़ान अवधि के बाद एलन मस्क के स्वामित्व वाले स्पेसएक्स के फाल्कन-9 रॉकेट ने 4,700 किलोग्राम के जीसैट-एन 2 को जियोसिंक्रोनस ट्रांसफर ऑर्बिट में इंजेक्ट कर दिया। केप कैनावेरल लॉन्च स्थल पर मौजूद स्पेसएक्स और भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के वैज्ञानिकों ने इस विशेष वाणिज्यिक मिशन में उड़ान के प्रक्षेप पथ की निगरानी की। IISRO News</p>
<h3>भूस्थिर पृथ्वी की कक्षा में 14 साल तक चलने के लिए डिजाइन किया गया</h3>
<p style="text-align:justify;">जीएसएटी-एन2 उपग्रह (जिसे जीएसएटी-20 भी कहा जाता है) का वजन प्रक्षेपण के समय 4,700 किलोग्राम (10,362 पाउंड) है और इसे भूस्थिर पृथ्वी की कक्षा में 14 साल तक चलने के लिए डिजाइन किया गया। यह पहली बार है जब स्पेसएक्स ने इसरो के लिए पेलोड का प्रक्षेपण किया। गौरतलब है कि भारत के पास जियोसिंक्रोनस सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल मार्क 3 (एलवीएम3) के साथ अपना स्वयं का लॉन्च वाहन है, लेकिन यह केवल 4,000 किलोग्राम तक का पेलोड ही प्रक्षेपित कर सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">इसलिए इसरो की वाणिज्यिक शाखा एनएसआईएल ने जीएसएटी -20 के प्रक्षेपण के लिए 2 जनवरी, 2024 को स्पेसएक्स के साथ करार किया था। जीएसएटी प्रणाली का पिछला प्रक्षेपण (जिसका नाम जीएसएटी-24 (या जीएसएटी-एन1) है, 22 जून, 2022 को फ्रेंच गुयाना से एरियन 5 रॉकेट पर प्रक्षेपित किया गया था। ISRO News</p>
<p><a title="Gold Price Today: आज फिर सोना हुआ महंगा! जानें आज की कीमतें!" href="http://10.0.0.122:1245/gold-became-expensive-again-today-know-todays-prices/">Gold Price Today: आज फिर सोना हुआ महंगा! जानें आज की कीमतें!</a></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/national/gsat-n2-lifts-off-from-spacex-launch-vehicle/article-64465</link>
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                <pubDate>Tue, 19 Nov 2024 14:50:18 +0530</pubDate>
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