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                <title>Chandrayaan-4 - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <description>Chandrayaan-4 RSS Feed</description>
                
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                <title>Chandrayaan-4: चंद्रयान-3 के बाद चंद्रयान-4 भी रचेगा इतिहास, ISRO ने दिया बड़ा अपडेट</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली (एजेंसी)। Chandrayaan-4 जैसे भारत नें चंद्रयान 3 को लेकर भारत में इतिहास रचा हैं, इसी के साथ अगली उपलब्धि चंद्रयान 4 की हैं, जो तेजी से रफ्तार भी पकड़ रही हैं। वहीं अब इसके आकार को लेकर एक बड़ा अपडेट सामने आया हैं, कहा जा रहा हैं कि चंद्रयान 3 की तुलना में […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/after-chandrayaan-3-chandrayaan-4-will-also-create-history-isro-gave-a-big-update/article-64876"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2024-12/chandrayaan-4.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (एजेंसी)।</strong> Chandrayaan-4 जैसे भारत नें चंद्रयान 3 को लेकर भारत में इतिहास रचा हैं, इसी के साथ अगली उपलब्धि चंद्रयान 4 की हैं, जो तेजी से रफ्तार भी पकड़ रही हैं। वहीं अब इसके आकार को लेकर एक बड़ा अपडेट सामने आया हैं, कहा जा रहा हैं कि चंद्रयान 3 की तुलना में चौथा चंद्रयान काफी भारी होने वाला हैं, चंद्रयान 3 ने अगस्त 2023 को चांद के दक्षिणी ध्रुव पर सफलतापूर्वक सॉफ्ट लैंडिंग कर ली थी।</p>
<p><a href="http://10.0.0.122:1245/after-grap-the-construction-department-should-expedite-the-development-work-vikramaditya-singh-malik/">UP News: यूपी के इस शहर की बदलेगी सूरत, 40 करोड़ से कराए जा रहे विकास कार्य, बढ़ेंगे प्रॉपर्टी के दाम</a></p>
<p style="text-align:justify;">दरअसल भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन से बता चला हैं कि चंद्रयान 4 पिछले चंद्रयान की तुलना में 12 गुणा ज्यादा भारी होने वाला हैं, एक रिपोर्ट के अनुसार ISRO में SAC यानी स्पेस एप्लिकेशन्स सेंटर के निदेशक नीलेश देसाई ने जानकारी देते हुए कहां कि नए रोवर का वजन 350 किलोग्राम होने वाला हैं, जबकि चंद्रयान 3 का वजन 30 किलो था।<br />
उन्होंने बताया कि इस मिशन का रोवर 350 किलोग्राम का होगा, जो पिछले रोवर से 12 गुना ज्यादा भारी हैं, जानकारी मिली हैं कि रोवर के आकार में हुआ यह इजाफा ISRO के व्यापक प्लान का हिस्सा हैं, जिसके तहत चांद की सतह पर खोज और नमूने वापस लाना शामिल हैं, इसकी खास बात ये हैं कि चंद्रयान 4 मिशन का मकसद सिर्फ चांद पर लैंडिग ही नहीं, बल्कि धरती पर सैंपल वापस लाना भी हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">आखिर क्यों बढ़ाया गया वजन? Chandrayaan-4</h3>
<p style="text-align:justify;">जानकारी के मुताबित नया भारी रोवर ज्यादा साइंटिफ पेलोड और खोज के लिए बड़े इलाकों में मददगार होगा, इससे पहले प्रज्ञान रोवर 500×500 मीटर का एरिया कवर करता हैं, वहीं नया रोवर 1 किमी x1 किमी का हो सकता हैं, कहा जा रहा है कि इससे चांद पर रिसर्च का दायरा बढ़ जाएगा, देसाई ने संभावनाएं जताई हैं कि इस मिशन को 2030 तक शुरू किया जा सकता हैं।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>साहित्य</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 01 Dec 2024 11:25:20 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>Chandrayaan-4: चंद्रयान-3 के बाद अब चंद्रयान-4 की तैयारी, इसरो ने दी बड़ी खुशखबरी</title>
                                    <description><![CDATA[मुज्जफरनगर (सच कहूं/अनु सैनी)। Chandrayaan-4: 2023 में चंद्रयान-3 ने इतिहास रचते हुए चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर सफलतापूर्वक लैड किया था, इसके बाद 14 दिनों तक वह चंद्रमा पर एक्टिव रहा और उसके भेजे गए इनपुट्स के आधार पर कई जांच हुई, जो अब भी कभी-कभी हमारे सामने आ जाती हैं। वहीं अब चंद्रयान-4 मिशन […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/after-chandrayaan-3-now-preparations-for-chandrayaan-4/article-63073"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2024-10/muzaffarnagar-news.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>मुज्जफरनगर (सच कहूं/अनु सैनी)।</strong> Chandrayaan-4: 2023 में चंद्रयान-3 ने इतिहास रचते हुए चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर सफलतापूर्वक लैड किया था, इसके बाद 14 दिनों तक वह चंद्रमा पर एक्टिव रहा और उसके भेजे गए इनपुट्स के आधार पर कई जांच हुई, जो अब भी कभी-कभी हमारे सामने आ जाती हैं। वहीं अब चंद्रयान-4 मिशन पर सबकी नजरें गढ़ी हुई हैं। इसे 2029 में लॉन्च किया जाएगा और इसकी संभावित लागत 2104 करोड़ रुपये हैं, पिछले दिनों इसरो ने खुशखबरी दी थी कि चंद्रयान-4 (Chandrayaan-4) चांद से 2 से 3 किलो मिट्टी का सैंपल लेकर आएगा।</p>
<p style="text-align:justify;">बता दें कि चंद्रयान-4 में 5 तरह के मॉडयूल काम करेंगे, एसेंडर मॉडयूल, डिसेंडर मॉडयूल, री एंट्री मॉडयूल, ट्रांसफर मॉडयूल और प्रपल्शन मॉड्यूल। इन्हें दो अलग-अलग एमवीएम 3 लॉन्च व्हीकल्स में लॉन्च किया जाएगा। इसरो ने बताया है कि चंद्रमा पर लैंड करने के बाद रोबोटिक आर्म जिसे सरफेस सैंपलिंग रोबोट भी कहा जाता हैं, वह लैंडिंग साइट के आसपास से दो से तीन किलो की मिट्टी को निकालेगा और फिर एएम पर लगे हुए कंटेनर में भरेगी।</p>
<p style="text-align:justify;">वहीं सैंपल्स वाले कंटेनरों को पृथ्वी की यात्रा के दौरान रिसाव को रोकने के लिए सील कर दिया जाएगा, इसरो ने एक बयान में बताया कि मिट्टी को इकट्ठा करने के लिए विभिन्न चरणों की निगरानी वीडियों कैमरों के माध्यम से की जाएगी, इससे पहले इसरो चीफ एस सोमनाथ ने कहा था कि चंद्रयान-3 ने यह करके दिखाया हैं कि हमारे लिए चंद्रमा के किसी भी स्थान पर लैंड करना संभव है और फिर वैज्ञानिक प्रयोग बहुत अच्छे रहे हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">दूसरा कदम है जाना और सुरक्षित वापस आना | Chandrayaan-4</h3>
<p style="text-align:justify;">बता दें कि चंद्रयान-4 का दूसरा कदम वहां जाना और सुरक्षित वापस आना हैं, और ऐसा करने के लिए हमें कई तकनीके विकसित करने की जरूरत हैं। यह सब चंद्रयान-4 का ही हिस्सा हैं। नमूना संग्रह जैसे वैज्ञानिक मिशन भी होंगे, उन्होंने कहा कि अगर भारत चांद पर जाता हैं, तो वे कुछ नया लेकर आएगे। चांद से कुछ वापस लाने मे कई दिक्कतें हैं आपको अलग-अलग जगहों से ड्रिल करके उसे इकट्ठा करना होगा, फिर नमूना लेने और उसे कंटेनर में इकट्ठा करने की रोबोटिक गतिविधि होती हैं, फिर कंटेनर को उस स्थान से लैंडर पर शिफ्ट करने की भी जरूरत होती हैं,जो चंद्रमा से उड़ान भरेगा।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="हाफ मैराथन में जिन्द्र पाल काका इन्सां बने चैम्पियन" href="http://10.0.0.122:1245/jinder-pal-kala-insan-became-champion-in-half-marathon/">हाफ मैराथन में जिन्द्र पाल काका इन्सां बने चैम्पियन</a></p>
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                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>साहित्य</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 09 Oct 2024 12:19:15 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ISRO News: चंद्रयान-4 को लेकर इसरो चीफ ने देशवासियों को दी बड़ी खुशखबरी, जल्द पढ़ें&amp;#8230;</title>
                                    <description><![CDATA[ISRO News:  नई दिल्ली (एजेंसी)। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के चेयरमैन एस. सोमनाथ ने भारत के महत्वाकांक्षी मून मिशन चंद्रयान-4 को लेकर बड़ी बात बताई है। उन्होंने बुधवार को बताया कि चंद्रयान-4 को चांद से मिट्टी के नमूने वापस लाने के लिए बनाया गया है। इसे एक बार में नहीं, बल्कि दो अलग-अलग रॉकेट […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/isro-chief-gave-great-news-to-the-countrymen-regarding-chandrayaan-4-read-soon/article-59137"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2024-06/isro-news.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>ISRO News:  नई दिल्ली (एजेंसी)।</strong> भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के चेयरमैन एस. सोमनाथ ने भारत के महत्वाकांक्षी मून मिशन चंद्रयान-4 को लेकर बड़ी बात बताई है। उन्होंने बुधवार को बताया कि चंद्रयान-4 को चांद से मिट्टी के नमूने वापस लाने के लिए बनाया गया है। इसे एक बार में नहीं, बल्कि दो अलग-अलग रॉकेट लॉन्च करके अंतरिक्ष की कक्षा में भेजा जाएगा। फिर अंतरिक्ष में ही इन दोनों भागों को जोड़कर चंद्रयान-4 को पूरा बनाया जाएगा और उसके बाद ही चांद की तरफ भेजा जाएगा। इतना ही नहीं, देश के अपने अंतरिक्ष स्टेशन को बनाने में भी इसी तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा यानी उसके हिस्सों को एक बार में नहीं, बल्कि कई बार में भेजा जाएगा। उन हिस्सों को अंतरिक्ष में ही जोड़कर अंतरिक्ष स्टेशन बनाया जाएगा। देश के अपने अंतरिक्ष स्टेशन का नाम भारत अंतरिक्ष स्टेशन होगा।</p>
<p><a href="http://10.0.0.122:1245/the-humidity-in-the-room-increases-as-soon-as-the-cooler-is-turned-on-in-the-scorching-heat/">Cooler Moisture Tips: भीषण गर्मी में कूलर चलाते ही कमरे में बढ़ जाती है उमस, शरीर हो जाता हैं चिपचिपा, तो अपनाएं ये कुछ टिप्स, महसूस होगी जबरदस्त ठंडक</a></p>
<h4 style="text-align:justify;">इस वजह से दो हिस्सों में होगा लांच | ISRO News</h4>
<p style="text-align:justify;">चंद्रयान-4 को दो हिस्सों में इसलिए लॉन्च किया जाएगा क्योंकि यह इतना भारी है कि इसे अभी इसरो के पास मौजूद किसी भी रॉकेट में एक साथ नहीं ले जाया जा सकता है। अंतरिक्ष स्टेशन और इसी तरह की दूसरी चीजों को पहले भी अंतरिक्ष में ही अलग-अलग भागों को जोड़कर बनाया गया है। लेकिन ऐसा माना जा रहा है कि चंद्रयान-4 दुनिया का पहला ऐसा यान होगा जिसे कई भागों में लॉन्च करके अंतरिक्ष में ही जोड़ा जाएगा। भारत का चौथा मून मिशन 2028 के आस-पास लॉन्च हो सकता है।</p>
<h4 style="text-align:justify;">रूप रेखा तैयार, चांद से मिट्टी के नमूने लाए जाएंगे | ISRO News</h4>
<p style="text-align:justify;">एक रिपोर्ट के मुताबिक, इसरो चीफ ने दिल्ली में एक कार्यक्रम के दौरान कहा, ‘हमने चंद्रयान-4 की रूपरेखा तैयार कर ली है… यानी चांद से मिट्टी के नमूने वापस पृथ्वी पर कैसे लाए जाएं। चूंकि अभी हमारे पास इतने ताकतवर रॉकेट नहीं है कि सब कुछ एक साथ ले जा सके, इसलिए हम इसे कई बार में लॉन्च करने की योजना बना रहे हैं।’ उन्होंने आगे कहा, ‘इसलिए, हमें अंतरिक्ष में ही यान के अलग-अलग हिस्सों को जोड़ने की क्षमता (डॉकिंग) विकसित करनी होगी – ये जोड़ने की क्षमता पृथ्वी की कक्षा में भी और चांद की कक्षा में भी काम करेगी। हम इसी क्षमता को विकसित कर रहे हैं। इस साल के अंत में स्पेडेक्स नाम का एक मिशन है जिसका मकसद यही डॉकिंग क्षमता को प्रदर्शित करना है।’</p>
<p style="text-align:justify;">एस. सोमनाथ ने डॉकिंग के बारे में बताते हुए कहा, ‘चांद से वापसी के दौरान अंतरिक्ष यान के विभिन्न भागों को जोड़ना एक सामान्य सी प्रक्रिया है। यान का एक हिस्सा मुख्य यान से अलग होकर चांद पर उतरता है, जबकि दूसरा हिस्सा चांद की कक्षा में ही रहता है। जब उतरने वाला हिस्सा चांद की सतह से वापस आता है, तो ये दोनों हिस्से फिर से जुड़ जाते हैं और एक हो जाते हैं। हालांकि, चंद्रमा की यात्रा के लिए पृथ्वी की कक्षा में यान के अलग-अलग हिस्सों को जोड़ना अब तक नहीं किया गया है।’ इसरो चीफ ने कहा, ‘हम यह दावा नहीं कर रहे हैं कि हम ऐसा करने वाले पहले हैं, लेकिन हां, मुझे अब तक ऐसा करने वाले किसी और के बारे में जानकारी नहीं है।’</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>प्रेरणास्रोत</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 28 Jun 2024 10:40:46 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>Chandrayaan-4: अब की बार चाँद पर कहां उतरेगा चंद्रयान-4, जानें इसरो के नए मिशन की डिटेल</title>
                                    <description><![CDATA[Chandrayaan-4: नई दिल्ली (एजेंसी)। चंद्रयान-3 की सफलता के बाद अब अंतरिक्ष अनुप्रयोग केंद्र के निदेशक नीलेश देसाई के अनुसार, भारत का महत्वाकांक्षी चंद्रयान -4 मिशन, जिसका उद्देश्य चंद्रमा की चट्टानों और मिट्टी को भारत वापस लाना है, चंद्रमा की सतह पर शिव शक्ति बिंदु के करीब उतरने का प्रयास करेगा। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) की […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/this-time-where-will-chandrayaan-4-land-on-the-moon-know-the-details-of-isros-new-mission/article-57490"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2024-05/chandrayaan-4.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>Chandrayaan-4: नई दिल्ली (एजेंसी)।</strong> चंद्रयान-3 की सफलता के बाद अब अंतरिक्ष अनुप्रयोग केंद्र के निदेशक नीलेश देसाई के अनुसार, भारत का महत्वाकांक्षी चंद्रयान -4 मिशन, जिसका उद्देश्य चंद्रमा की चट्टानों और मिट्टी को भारत वापस लाना है, चंद्रमा की सतह पर शिव शक्ति बिंदु के करीब उतरने का प्रयास करेगा। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) की भविष्य की चंद्र अन्वेषण योजनाओं पर देसाई की हालिया प्रस्तुति के दौरान यह जानकारी सामने आई। चंद्रयान-3 के विक्रम लैंडर के उतरने का स्थान, शिव शक्ति पॉइंट, चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के निकट होने और स्थायी रूप से छाया वाले क्षेत्रों की उपस्थिति के कारण महत्वपूर्ण वैज्ञानिक रुचि का स्थल है, जो जल बर्फ जमा कर सकते हैं।</p>
<p><a href="http://10.0.0.122:1245/if-your-golgappas-do-not-rise-and-become-soft-suddenly-then-follow-this-trick/#google_vignette">Golgappa Recipe: अब आप नहीं कहोगे गोलगप्पे फूलते नहीं, सूजी हो या आटा इस तरीके से हर एक पानीपुरी एक दम परफेक्ट बनेगी</a></p>
<p style="text-align:justify;">इस क्षेत्र के पास उतरने से, चंद्रयान -4 को इन वैज्ञानिक रूप से मूल्यवान क्षेत्रों का अध्ययन करने और संभावित रूप से नमूने प्राप्त करने का अवसर मिलेगा। देसाई ने कहा कि मिशन का परिचालन जीवन एक चंद्र दिवस का होगा, जो लगभग 14 पृथ्वी दिवस के बराबर है। यह सीमित समय-सीमा चंद्रमा की सतह पर कठोर परिस्थितियों के कारण है, जहां चंद्र रात के दौरान अत्यधिक तापमान परिवर्तन और सूरज की रोशनी की कमी दीर्घकालिक संचालन के लिए महत्वपूर्ण चुनौतियां पैदा करती है।</p>
<p style="text-align:justify;">चंद्रयान-4 एक जटिल मिशन होगा जिसमें कई प्रक्षेपण और अंतरिक्ष यान मॉड्यूल शामिल होंगे। इसरो ने मिशन के लिए अलग-अलग पेलोड ले जाने के लिए दो अलग-अलग रॉकेट – हेवी-लिफ्ट एलवीएम -3 और वर्कहॉर्स पीएसएलवी – लॉन्च करने की योजना बनाई है। यह दृष्टिकोण इसरो के लिए पहला है और मिशन की महत्वाकांक्षी प्रकृति को उजागर करता है। मिशन का प्राथमिक उद्देश्य चंद्र नमूने एकत्र करना और विस्तृत वैज्ञानिक विश्लेषण के लिए उन्हें पृथ्वी पर वापस लाना है। सफल होने पर, संयुक्त राज्य अमेरिका, रूस और चीन के बाद भारत यह उपलब्धि हासिल करने वाला चौथा देश बन जाएगा।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>साहित्य</category>
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                <pubDate>Tue, 14 May 2024 14:26:47 +0530</pubDate>
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