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                <title>Manipur - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>Monsoon Session: आरोप-प्रत्यारोप से तर-बतर रहा मानसून सत्र</title>
                                    <description><![CDATA[20 जुलाई से 11 अगस्त तक चलने वाला यह मानसून सत्र मणिपुर और अविश्वास प्रस्ताव के लिए ही जाना जाएगा इसमें सकारात्मक दृष्टि से कोई बड़ी पहल शायद ही संभव हुई हो। लोकतंत्र में यह रहा है कि देश की सबसे बड़ी पंचायत से जनहित को सुनिश्चित करने वाले कानून और कार्यक्रम की उपादेयता सुनिश्चित […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/monsoon-session-drenched-in-allegations-and-counter-allegations/article-51156"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-08/monsoon-session.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">20 जुलाई से 11 अगस्त तक चलने वाला यह मानसून सत्र मणिपुर और अविश्वास प्रस्ताव के लिए ही जाना जाएगा इसमें सकारात्मक दृष्टि से कोई बड़ी पहल शायद ही संभव हुई हो। लोकतंत्र में यह रहा है कि देश की सबसे बड़ी पंचायत से जनहित को सुनिश्चित करने वाले कानून और कार्यक्रम की उपादेयता सुनिश्चित होती है पर संसद अगर शोर-शराबे की ही शिकार होती रहेगी तो ऐसा सोचना बेमानी होगा। पूरे मानसून सत्र में हुए शोर-शराबे से तो यही लगता है कि गैर मर्यादित भाषा और तनी हुई भंवों के बीच पक्ष और विपक्ष दोनों पानी-पानी तो हुए मगर देश की प्यास बुझाना मुश्किल बना रहा। Monsoon Session</p>
<p style="text-align:justify;">गौरतलब है कि मणिपुर हिंसा का मुद्दा लोकसभा में अविश्वास प्रस्ताव तक पहुंचने के बाद सरकार और विरोधी पक्ष के बीच संसद के बाहर और भीतर घमासान जारी रहा। विदित हो कि बीते मई की शुरूआत से ही मणिपुर वर्ग संघर्ष में कहीं अधिक हिंसा से लिप्त रहा जिसे लेकर विपक्ष मुखर था। यह रार तब और पेचीदा हुआ जब विपक्षी गठबंधन ने अविश्वास प्रस्ताव को बहस से पहले संसद में बिना चर्चा किए विधेयक सत्र के शुरू में ही पारित करा लिया। जाहिर है विपक्ष ने ऐतराज करते हुए सरकार पर संसदीय नियमों और परम्पराओं को तोड़ने का आरोप लगाया। 303 सीट वाली अकेले बीजेपी और गठबंधन सहित 350 का आंकड़ा रखने वाली बीजेपी के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा क्यों हुई यह नए सिरे से चिंतन का विषय है। Monsoon Session</p>
<p style="text-align:justify;">हालांकि अविश्वास प्रस्ताव विपक्ष का एक औजार है और कई मौकों पर इसका उपयोग होता रहा है। वजह जो भी हो फिलहाल विरोधियों को इस अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता था। देखा जाए तो मणिपुर से मानसून सत्र सराबोर था। विपक्षी नेता राहुल गांधी की लगभग साढ़े चार महीने बाद एक बार सदन में एंट्री हुई। गौरतलब है देश की शीर्ष अदालत ने उनकी सजा पर रोक लगाते हुए राहुल गांधी को सदन तक पहुंचाया। सत्ता को अपनी छवि बचाने का पूरा ध्यान था। मानसून सत्र तमाम आरोप-प्रत्यारोप की बाढ़ लिए हुए था। इसमें जनता को क्या फायदा है यह विचारणीय जरूर है कि सत्र आते हैं और बिना खास प्रदर्शन के अगले की बाट जोहने को मजबूर कर देते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">अविश्वास का प्रस्ताव एक संसदीय प्रस्ताव है जिसे पारम्परिक रूप से विपक्ष द्वारा संसद में एक सरकार को हराने या कमजोर करने की उम्मीद से रखा जाता है। आमतौर पर जब संसद अविश्वास प्रस्ताव में वोट करती है या सरकार विश्वास मत में विफल रहती है तो उसे त्यागपत्र देना पड़ता है या संसद को भंग करने और आम चुनाव की बात शामिल रहती है। फिलहाल इसके आसार दूर-दूर तक नहीं थे क्योंकि 543 सदस्यों वाली लोकसभा में अकेले भाजपा 300 के पार हैं और गठबंधन के साथ यह आंकड़ा कहीं अधिक बढ़त लिए हुए है ऐसे में अविश्वास को लेकर बहस बड़ी हो सकती थी पर सरकार को हिलाया नहीं जा सकता था और हुआ भी यही।</p>
<p style="text-align:justify;">अविश्वास तथा निंदा जैसे प्रस्ताव विपक्षियों के औजार हैं पर इसे कब प्रयोग करना है इसे भी समझना बेहद जरूरी है। इसके पहले साल 2018 के बजट सत्र में भी मोदी सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव की मांग तेज हुई थी। देखा जाए तो यह दूसरा मौका है जब विरोधी अविश्वास प्रस्ताव को लेकर सजग दिखाई दिए मगर दोनों स्थितियों से उनका दूर-दूर तक नाता नहीं था। पड़ताल बताती है लोकतंत्र के संसदीय इतिहास में सबसे पहले जवाहरलाल नेहरू सरकार के खिलाफ यह प्रस्ताव अगस्त 1963 में जेबी कृपलानी ने रखा था लेकिन इसके पक्ष में केवल 52 वोट पड़े थे जबकि प्रस्ताव के विरोध में 347 वोट थे।</p>
<p style="text-align:justify;">गौरतलब है कि मोदी सरकार के विरूद्ध पिछले नौ सालों में दूसरी बार अविश्वास प्रस्ताव लाए जाने की बात हो रही है जबकि इन्दिरा गांधी सरकार के खिलाफ सर्वाधिक 15 बार तथा लाल बहादुर शास्त्री और नरसिम्हाराव राव सरकार को तीन-तीन बार ऐसे प्रस्तावों का सामना करना पड़ा है। नेहरू शासनकाल से अब तक 25 बार अवश्विास प्रस्ताव सदन में लाए जा चुके हैं जिसमें 24 बार ये असफल रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">1978 में ऐसे ही एक प्रस्ताव से सरकार गिरी थी। वैसे मोरारजी देसाई सरकार के खिलाफ दो अविश्वास प्रस्ताव रखे गए थे पहले में तो उन्हें कोई परेशानी नहीं हुई परन्तु दूसरे प्रस्ताव के समय उनकी सरकार के घटक दलों में आपसी मतभेद थे। हालांकि उन्हें अपनी हार का अंदाजा था और मत विभाजन से पहले इस्तीफा दे दिया था। देखा जाय तो विपक्ष में रहते हुए अटल बिहारी वाजपेयी भी एक बार इन्दिरा गांधी के खिलाफ और दूसरी बार नरसिंह राव के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव रख चुके हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">गौरतलब है कि लोकसभा में अविश्वास प्रस्ताव लाने के लिए नोटिस तभी स्वीकार किया जाता है जब उसके समर्थन में 50 सदस्य हों। मुख्य विपक्षी कांग्रेस के पास कुल 52 का आंकड़ा तो है। हालांकि जिस प्रकार विरोधी इन दिनों इण्डिया के बैनर तले एकजुटता दिखाई गई उससे मनोबल तो बढ़ सकता है मगर बहुमत से भरी सरकार को रौंदा नहीं जा सकता था। मुद्दा यह है कि अविश्वास प्रस्ताव लाने वाले के पास जब चंद आंकड़े जुटाना भी मुश्किल था तो बड़ी कूबत वाली सरकार की कुर्सी कैसे हिला पाते। खीज के चलते कांग्रेस समेत वामपंथ या अन्य सरकार के विरोधी हो सकते हैं पर इनकी स्थिति भी बहुत दयनीय है। वैसे भाजपा तथा उनके सहयोगियों में सब कुछ अच्छा ही चल रहा है पूरी तरह कहना कठिन है पर सरकार बचाने में उनका मत सरकार के साथ न हो यह भी नहीं हो सकता था।</p>
<p style="text-align:justify;">फिलहाल अविश्वास प्रस्ताव एक विरोधी संकल्पना है जिसका उपयोग किया जाना कोई हैरत वाली बात नहीं। संदर्भित बात यह है कि सदन का कीमती वक्त रोज हंगामे की भेंट चढ़ता रहा भारी-भरकम पूर्ण बहुमत वाली सरकार का बीते नौ सालों में कोई भी ऐसा सत्र नहीं रहा जिसमें विरोधियों ने सरकार को न घेरा हो। सत्र से पहले सर्वदलीय बैठक भी यहां काम नहीं आ रही है। एक-दूसरे की लानत-मलानत और छींटाकशी में वक्त बीतता गया। जबकि 2024 मुहाने पर है जहां 18वीं लोकसभा का एक बार फिर गठन होना है। देश के राजनेता जो राजनीति करें वही जनता को देखना होता है चाहे अच्छा करें या अच्छा न करे।</p>
<p style="text-align:justify;">फिलहाल विपक्ष सत्ता की परछाई होती है। विरोधियों की आपत्ति भी जनहित में काम आती है और सरकार की नीतियां भी हित सुनिश्चित ही करती हैं। ऐसे में भाषा की मर्यादा, जन भावनाओं का सम्मान के साथ ही संसद के भीतर शोर करने की बजाय शान्ति और खुशहाली से जुड़े नियोजन पर काम किया जाए तो सरकार और विपक्ष दोनों के लिए अच्छा रहेगा। आगे यह ध्यान देना कहीं अधिक जरूरी है कि सत्ता और विपक्ष दोनों संयम का भी पालन करें और सरकार के मंत्री विरोधियों के मामले में दुश्मन की तरह पेश न आएं। यह लोकतंत्र है यहां जनता की ताकत से नेताओं को कूबत मिलती है। सदन कोई जंग का मैदान नहीं है। Monsoon Session</p>
<p style="text-align:right;"><strong>डॉ. सुशील कुमार सिंह, वरिष्ठ स्तम्भकार एवं प्रशासनिक चिंतक (यह लेखक के अपने विचार हैं)</strong></p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="India Wins Asian Champions Trophy Hockey: भारतीय टीम ने रचा इतिहास, मलेशिया को हरा चौथी बार जीती एशियन हॉकी चैम्पियंस ट्रॉफी" href="http://10.0.0.122:1245/india-wins-asian-champions-trophy-hockey/">India Wins Asian Champions Trophy Hockey: भारतीय टीम ने रचा इतिहास, मलेशिया को हरा चौथी बार जीती एशि…</a></p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>विचार</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 13 Aug 2023 15:21:45 +0530</pubDate>
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                <title>Rahul Gandhi Speech: राहुल गांधी ने लोकसभा में दिया भाषण, केन्द्र सरकार पर जमकर बरसे</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली। Rahul Gandhi Speech Highlights: कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने आज लोकसभा में मणिपुर मामले पर भाषया दिया। राहुल गांधी ने कहा कि मणिपुर में इन लोगों ने पूरे हिंदुस्तान की हत्या की है। उन्होंने अपने भाषण में उन महिलाओं की कहानी भी सुनाई जिनसे वो अपने मणिपुर दौरे में मिले थे। राहुल गांधी […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/rahul-gandhi-speech/article-50995"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-08/rahul-gandhi-speech.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली। </strong>Rahul Gandhi Speech Highlights: कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने आज लोकसभा में मणिपुर मामले पर भाषया दिया। राहुल गांधी ने कहा कि मणिपुर में इन लोगों ने पूरे हिंदुस्तान की हत्या की है। उन्होंने अपने भाषण में उन महिलाओं की कहानी भी सुनाई जिनसे वो अपने मणिपुर दौरे में मिले थे। राहुल गांधी ने लोकसभा में हरियाणा के नूंह में हुई हिंसा का भी जिक्र किया। आइये जानते हैं राहुल गांधी ने लोकसभा में क्या-क्या कहा</p>
<h4 style="text-align:justify;">मणिपुर मामले पर राहुल गांधी ने सरकार पर साधा निशाना | Rahul Gandhi Speech</h4>
<p style="text-align:justify;">मणिपुर केस में राहुल गांधी ने केन्द्र सरकार को घेरते हुए कहा कि भारत इस देश के लोगों की आवाज है, अगर हम इस आवाज को सुनना चाहते हैं तो हमें अहंकार को मिटाना होगा। राहुल गांधी ने अपने मणिपुर दौरे का जिक्र करते हुए कहा कि कुछ दिन पहले मैं मणिपुर गया था। हमारे पीएम आज तक नहीं गए क्योंकि उनके लिए मणिपुर हिंदुस्तान नहीं। उन्होंने कहा कि आज की सच्चाई ये है कि मणिपुर को अपने दो हिस्सों में तोड़ दिया है। उन्होंने कहा कि इनकी राजनीति ने सिर्फ मणिपुर को नहीं मारा है, इनकी राजनीति ने हिंदुस्तान को मणिपुर में मारा है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">टमाटर पर राजनीति शुरू</h3>
<p style="text-align:justify;">आम आदमी पार्टी (आप) के राज्यसभा सदस्य सुशील कुमार गुप्ता ने बुधवार को कहा कि महंगाई के प्रति सरकार का ध्यान आकर्षित करने के लिए वह सदन में टमाटर की माला पहन कर आए थे। गुप्ता ने सदन की कार्यवाही को स्थगित किए जाने के बाद बाहर आने पर संसद भवन परिसर में संवाददाताओं से कहा कि महंगाई के प्रति सरकार का ध्यान आकर्षित करने के लिए वह सदन में टमाटर की माला पहनकर आए थे। उन्होंने कहा कि आम आदमी के खान-पान का बजट महंगाई के कारण बिगड़ रहा है। सरकार को इस पर ध्यान देना चाहिए। सरकार देखे कि लोग किस हालत में हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा, ‘सदन में आभूषण पहनकर सदस्यों के आने के बारे में उन्हें नियम की जानकारी नहीं है। महंगाई के कारण चीजें आभूषण के सामान हो जाती हैं। टमाटर और अदरक आम आदमी की पहुंच से बाहर है। इसका मूल्य जगह-जगह ढाई सौ से तीन सौ रुपये प्रति किलो पहुंच गया है। गुप्ता ने कहा कि टमाटर की माला पहनकर सदन में आने से सभापति जगदीप धनखड़ नाराज हुए हैं, तो वह माला उतार देंगे। उन्होंने कहा कि वह सभापति का बेहद सम्मान करते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">गुप्ता ने कहा कि उन्होंने पत्नी से कहकर कुछ टमाटकर और अदरक मंगवाया था। पत्नी ने इसका उदेश्य भी पूछा था, तो उन्होंने कहा कि वह इसका माला पहनकर राज्यसभा में जाएंगे। उन्होंने कहा कि पत्नी ने इस पर नाराजगी भी व्यक्त की कि इतनी महंगी वस्तु की माला पहनने की क्या जरूरत है। उल्लेखनीय है कि गुप्ता आज सदन में टमाटर की माला पहनकर पहुंच गए थे, जिससे सभापति बेहद नाराज हुए और उन्होंने सदन की कार्यवाही अपराह्न दो बजे तक के लिए स्थगित कर दी थी। उन्होंने कहा कि सदस्यों के सदन में आचरण की एक सीमा है।</p>
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                                                            <category>देश</category>
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                <pubDate>Wed, 09 Aug 2023 15:06:19 +0530</pubDate>
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                <title>मणिपुर में शांति व्यवस्था हेतु गुरिल्लों के प्रयोग का सुझाव</title>
                                    <description><![CDATA[देहरादून (सच कहूँ न्यूज)। आल इंडिया एसएसबी वालिंटियर एसोसियेशन के अध्यक्ष ब्रह्मा नन्द डालाकोटी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) व गृहमंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर, मणिपुर में शांति स्थापना हेतु गुरिल्लों का उपयोग किये जाने की मांग की है। शुक्रवार को उत्तराखंड के अल्मोड़ा से भेजे गए इस पत्र में श्री डालाकोटी ने […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttarakhand/brahma-nand-dalakoti-wrote-a-letter-to-prime-minister-narendra-modi-and-home-minister-amit-shah/article-48364"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-06/star-campaigner-narendra-modi.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>देहरादून (सच कहूँ न्यूज)।</strong> आल इंडिया एसएसबी वालिंटियर एसोसियेशन के अध्यक्ष ब्रह्मा नन्द डालाकोटी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) व गृहमंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर, मणिपुर में शांति स्थापना हेतु गुरिल्लों का उपयोग किये जाने की मांग की है। शुक्रवार को उत्तराखंड के अल्मोड़ा से भेजे गए इस पत्र में श्री डालाकोटी ने लिखा है कि वर्ष 1962 मे भारत-चीन युद्ध के बाद सीमावर्ती क्षेत्रों में सेवा-सुरक्षा-बंधुत्व के नारे के साथ शांति स्थापना हेतु एसएसबी का गठन किया गया था।</p>
<p style="text-align:justify;">शांति व्यवस्था के नारे को साकार करते हुए एसएसबी स्वयं सेवकों ने सुरक्षा सेनाओं के साथ मिलकर अनेक अशांत सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति स्थापना में सहायता प्रदान की। इन स्वयंसेवकों ने उग्रवादी-अलगाववादी ताकतों की पहचान कर उन्हें समाप्त करने में अपना योगदान दिया परिणाम स्वरूप सरकार और सेना ने उक्त ताकतों सफलता पूर्वक समाप्त किया। पत्र में लिखा गया है कि मणिपुर राज्य के उनके संगठन से जुड़े 3000 एसएसबी स्वयं सेवक वहां शांति स्थापना में सरकार और सेनाओं का सहयोग करना चाहते हैं। अनेक युद्व अस्त्र चलाने, प्राथमिक चिकित्सा, खुफिया कार्यों में दक्ष, राष्ट्रीय भावना से ओत-प्रोत यह स्वयं सेवक स्थानीय परिस्थितियों से परिचित होने के कारण स्थानीय जनता सरकार और सुरक्षा बलों का आपसी तालमेल बनाने में उपयोगी हो सकते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">डालाकोटी ने पत्र में प्रधानमंत्री और केंद्रीय गृह मंत्री (Amit Shah) को यह भी अवगत कराया है कि मणिपुर से दूरभाष में अनेक एसएसबी स्वयं सेवकों ने सेनाओं और उपद्रवियों के दोहरे उत्पीड़न की शिकायत भी की है तथा आत्मरक्षा हेतु हथियार अथवा अन्य सामाग्री उपलब्ध कराने की भी मांग की है। इसलिए मणिपुर में शांति स्थापना हेतु गुरिल्लों का उपयोग करने तथा उन्हें आवश्यक सुरक्षा दिये जाने की मांग संगठन की ओर से जिलाधिकारी अल्मोड़ा के कार्यालय व डाक से पत्र भेजा गया है।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="राजस्थान सरकार के महंगाई राहत शिविरों की देशभर में होने लगी चर्चा" href="http://10.0.0.122:1245/rajasthan-government-dearness-relief-camps-are-being-discussed-across-the-country/">राजस्थान सरकार के महंगाई राहत शिविरों की देशभर में होने लगी चर्चा</a></p>
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                                                            <category>उत्तराखण्ड</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 02 Jun 2023 17:24:42 +0530</pubDate>
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                <title>अशांत मणिपुर चिंता का सबब</title>
                                    <description><![CDATA[पूर्वोत्तर के छोटे से सुंदर राज्य मणिपुर (Manipur) के इस वक्त हालात बिगड़े हुए हैं। मैतेई समुदाय को अनुसूचित जनजाति का दर्जा देने के विरोध में राज्य में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुए, जिसके बाद हिंसा भी भड़क उठी। करीब एक माह से पूर्वोत्तर राज्य मणिपुर आग की लपटों में है। टकराव के बाद अब […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/unsettled-manipur-cause-for-concern/article-48249"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-05/manipur-protest.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">पूर्वोत्तर के छोटे से सुंदर राज्य मणिपुर (Manipur) के इस वक्त हालात बिगड़े हुए हैं। मैतेई समुदाय को अनुसूचित जनजाति का दर्जा देने के विरोध में राज्य में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुए, जिसके बाद हिंसा भी भड़क उठी। करीब एक माह से पूर्वोत्तर राज्य मणिपुर आग की लपटों में है। टकराव के बाद अब हत्याओं का दौर जारी है। मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह कुकी आदिवासियों को ‘उग्रवादी’ करार दे रहे हैं और सुरक्षा बल 40 उग्रवादियों को ढेर कर चुके हैं। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह 29 मई से मणिपुर के प्रवास पर हैं, लेकिन उनके आगमन की पूर्व संध्या पर 10 मौतें की जा चुकी हैं। मृतकों में एक महिला और असम पुलिस के दो कमांडो भी शामिल हैं।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="तंबाकू रोकथाम के लिए प्रचार की कमी" href="http://10.0.0.122:1245/lack-of-publicity-for-tobacco-prevention/">तंबाकू रोकथाम के लिए प्रचार की कमी</a></p>
<p style="text-align:justify;">मणिपुर (Manipur) के विभिन्न जिलों में करीब 400 घर जला दिए गए हैं। अकेले कक्चिंग जिले में ही 200 और विष्णुपुर में 150 घर आग की लपटों के शिकार हो गए हैं। गुस्साई और उत्तेजित भीड़ ने 4 विधायकों के घरों पर भी हमले किए हैं। मौत और आगजनी का यह सिलसिला तब है, जब थलसेना अध्यक्ष जनरल मनोज पांडे मणिपुर में ही डेरा डाले हुए हैं। केंद्रीय गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय भी वहां के हालात का जायजा लेने गए थे। इनके अलावा, सुरक्षा बलों और सेना के 36,000 से ज्यादा जवान भी मणिपुर में तैनात किए गए हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">मणिपुर (Manipur) में मैतेई, नागा और कुकी, ये तीन प्रमुख समुदाय है। इनमें नागा और कुकी आदिवासी हैं, जिन्हें अनुसूचित जनजाति का दर्जा मिला हुआ है, इन दोनों समुदायों के ज्यादातर लोग ईसाई धर्म को मानने वाले हैं। जबकि मैतई हिंदुओं की आबादी वाला समुदाय है, जो अब तक गैरआदिवासी माना जाता था, लेकिन बीते मार्च महीने में मणिपुर हाईकोर्ट ने मैतई समुदाय को भी अनुसूचित जनजाति का दर्जा देने का आदेश दिया। यह आदेश 19 अप्रैल को हाईकोर्ट की वेबसाइट पर अपलोड हुआ। इसके बाद से यहां असंतोष की चिंगारी सुलगने लगी जो अब आग का रूप ले चुकी है। क्योंकि अब इस राज्य में आदिवासी और गैरआदिवासियों के बीच जमीन और अन्य सुविधाओं के अधिकार का सवाल खड़ा हो गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">लगभग साढ़े 22 हजार वर्ग किमी में फैले मणिपुर (Manipur) में लगभग 10 प्रतिशत इलाका घाटी का है और शेष 90 प्रतिशत पहाड़ी इलाका है। राज्य के कानून के मुताबिक पहाड़ी इलाके में केवल आदिवासी ही बस सकते हैं, जबकि घाटी गैरआदिवासियों के लिए है और आदिवासी चाहें तो यहां भी रह सकते हैं। इस तरह 53 प्रतिशत आबादी वाले मैतेई समुदाय के लिए अब तक घाटी का ही इलाका था, लेकिन अब अजजा दर्जे के बाद वे पहाड़ी इलाके में भी जा सकेंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">इतना ही नहीं आदिवासियों के लिए आरक्षित नौकरियों और शैक्षणिक संस्थानों में भी अब मैतेई समुदाय का हिस्सा होगा, जिसे लेकर राज्य के आदिवासी सशंकित है। मैतेई लोन या मणिपुरी भाषा को केन्द्रीय सशस्त्र पुलिस बल की परीक्षा में स्वीकृति मिली हुई है, संविधान की आठवीं अनुसूची में भी मैतेई भाषा को शामिल किया गया है। इन सब वजहों से यह धारणा बनी हुई है कि मैतेई समुदाय के लोग नागा और कुकी समुदाय की अपेक्षा अधिक प्रभावशाली हैं और अब उन्हें आदिवासियों के अधिकारों में भी हिस्सा मिल जाएगा। इसी वजह से आदिवासी छात्र संगठनों ने इस फैसले का व्यापक विरोध किया।</p>
<p style="text-align:justify;">यह बेहद गंभीर और संवेदनशील मामला है, क्योंकि पूर्वोत्तर के एक राज्य में उग्रवाद इस तरह पनपता और बढ़ता रहा, तो वह दूसरे राज्यों में भी जा सकता है। पूर्वोत्तर ने लंबे समय तक उग्रवाद को झेला है और भारत की मुख्य धारा से वह कटा रहा है। ये टकराव, मारकाट और मुठभेड़ राज्य के उच्च न्यायालय के निर्देश के बाद भड़के हैं, जिसमें न्यायाधीश ने मैतेई समुदाय को ‘अनुसूचित जनजाति’ का दर्जा देने की बात कही थी। हालांकि सर्वोच्च अदालत ने एकल न्यायाधीश की पीठ के ऐसे निर्देश को ‘बिल्कुल गलत’ करार दिया है, लिहाजा उसके बाद हालात शांत और सामान्य होने चाहिए थे, लेकिन केंद्रीय गृह मंत्रालय के हस्तक्षेप और भाजपा नेतृत्व के निदेर्शों के बावजूद मणिपुर की आग मद्धिम भी नहीं हुई है।</p>
<p style="text-align:justify;">मैतेई मणिपुर का बहुसंख्यक, हिंदूवादी और वर्चस्ववादी समुदाय है, जो अधिकतर इम्फाल घाटी में बसा है। जो आदिवासी पहाड़ी जिलों के भू-भाग में बसे हैं, उनके साथ मैतेई के संबंधों का इतिहास कड़वा रहा है। कमोबेश मुख्यमंत्री और सरकार को यह आकलन कर लेना चाहिए था कि उच्च न्यायालय के निर्देश के बाद अशांति, बेचैनी, तनाव और आंतरिक अराजकता के हालात बन सकते हैं। प्रशासन और सरकार चलाना बुनियादी तौर पर राजनीतिक कर्म है, लिहाजा कानून-व्यवस्था को बरकरार रखना सरकार का ही दायित्व है।</p>
<p style="text-align:justify;">मैतेई समुदाय भाजपा-समर्थक है और सम्पन्न, समृद्ध समाज है। उसी के विधायक सबसे ज्यादा हैं। फिर भी उसे ‘आदिवासी’ का दर्जा चाहिए, ताकि आरक्षण के फायदे बटोरे जा सकें। यह खौफ और डर कुकी, नगा, जूमी आदिवासियों में है, लिहाजा अब वे अपनी नई मांग पर अड़े हैं कि उन्हें पहाड़ी जिलों के लिए ‘पृथक प्रशासनिक तंत्र’ चाहिए। दरअसल मणिपुर के जलते हालात के लिए सिर्फ उच्च न्यायालय का फैसला ही एकमात्र कारण नहीं है। राज्य सरकार अपनी जिम्मेदारी से भागती रही है। वहां भाजपा की सरकार है। अदालत के फैसले के बाद आदिवासियों की एक सहानुभूति जनसभा ने आग में घी का काम किया।</p>
<p style="text-align:justify;">राज्य सरकार विभिन्न आदिवासी समूहों के साथ बातचीत कर स्थिति को शांत करने का प्रयास कर रही है, लेकिन ये प्रयास अब तक कोई ठोस परिणाम देने में विफल रहे हैं। जैसे-जैसे हिंसा बढ़ी, सरकार ने स्थिति को नियंत्रण में लाने के प्रयास में चरम मामलों में दंगाइयों को देखते ही गोली मारने का आदेश जारी किया। सरकार ने भारतीय सेना को भी प्रभावित क्षेत्रों में तैनात किया, यह एक दुर्लभ कदम है जो स्थिति की गंभीरता को उजागर करता है। सेना को कानून और व्यवस्था बनाए रखने और आगे की हिंसा को रोकने में पुलिस की सहायता करने का काम सौंपा गया है। इससे प्रभावित क्षेत्रों में शांति का आभास हुआ है, लेकिन तनाव अधिक बना हुआ है, मैतेई समुदाय अनुसूचित जनजाति सूची में शामिल करने की अपनी मांग के लिए लगातार दबाव बना रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">मणिपुर में यह अनावश्यक टकराव टाला जा सकता था, बशर्ते ऐसा कोई भी कदम उठाने से पहले सभी संबंधित पक्षों को विश्वास में लेकर चर्चा की जाती। किसी समुदाय को अनुसूचित जनजाति का दर्जा दिया जाना चाहिए या नहीं, यह सवाल इतना सरल नहीं है बल्कि यह एक गंभीर मसला है, खासकर ऐसे राज्य के लिए जहां पहले से आदिवासियों और गैरआदिवासियों के बीच हितों के टकराव चलते रहे हों। लेकिन इतने गंभीर मसले को सीधे अदालती कार्रवाई के लिए भेज दिया गया। क्या इस पर राज्य सरकार ने या जनजातीय मामले और पहाड़ी विभाग ने विभिन्न पक्षों को लेकर कोई चर्चा की या केंद्र और राज्य सरकारों ने इस पर विमर्श किया।</p>
<p style="text-align:justify;">‘जनजाति’ का दर्जा राज्य सरकार के विशेषाधिकार में नहीं है। केंद्रीय आयोग और गृह मंत्रालय ही कोई निर्णय ले सकते हैं। यह दायित्व केंद्र और राज्य सरकारों का है कि जलते हुए मणिपुर को शांत किया जाए। सरकार को बुनियादी ढांचे, स्वास्थ्य देखभाल, शिक्षा और अन्य बुनियादी सुविधाओं में निवेश करके पहाड़ी क्षेत्रों के विकास को प्राथमिकता देनी चाहिए। घाटी और पहाड़ियों के बीच असमानताओं को कम करने के लिए आदिवासी समुदायों के सामाजिक-आर्थिक उत्थान पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए। मणिपुर को आखिरकार जख्मों पर मरहम लगाने के लिए हाथों की जरूरत है, न कि आग में घी डालने वाली राजनीति की।</p>
<p style="text-align:right;"><strong>राजेश माहेश्वरी,वरिष्ठ लेखक एवं स्वतंत्र टिप्पणीकार (यह लेखक के अपने विचार हैं)</strong></p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>विचार</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 31 May 2023 10:30:22 +0530</pubDate>
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                <title>मणिपुर में फंसे हरियाणा के 16 छात्रों को सुरक्षित निकालने के लिए सीएम मनोहर लाल ने खुद संभाली कमान</title>
                                    <description><![CDATA[घर वापसी के लिए तैयार की रूपरेखा, रात 11.00 बजे पहुंचेगा छात्रों का पहला बैच चंडीगढ़(सच कहूँ न्यूज)। मणिपुर हिंसा में हरियाणा के 16 छात्रों के फंसे होने का समाचार है। मिली जानकारी के अनुसार राज्य सरकार द्वारा फाइनल लिस्ट तैयार कर ली गई है। (Manohar Lal) मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने सभी छात्रों को […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/cm-manohar-lal-himself-has-taken-command-to-evacuate-the-students-of-haryana-trapped-in-manipur/article-47362"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-05/manohar-lal-1.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:justify;">घर वापसी के लिए तैयार की रूपरेखा, रात 11.00 बजे पहुंचेगा छात्रों का पहला बैच</h3>
<p style="text-align:justify;"><strong>चंडीगढ़(सच कहूँ न्यूज)।</strong> मणिपुर हिंसा में हरियाणा के 16 छात्रों के फंसे होने का समाचार है। मिली जानकारी के अनुसार राज्य सरकार द्वारा फाइनल लिस्ट तैयार कर ली गई है। (Manohar Lal) मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने सभी छात्रों को सुरक्षित मणिपुर से निकालने के लिए अब खुद कमान संभाल ली है। छात्रों की घर वापसी के लिए मुख्यमंत्री ने सारी रूपरेखा तैयार कर ली है। छात्रों को मणिपुर से कोलकाता, कोलकाता से फिर दिल्ली लाया जाएगा। इसके बाद छात्र देर रात घर पहुंचाए जाएंगे।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="लुधियाना में गैंगस्टर सुक्खा बाड़ेवालिया को गोलियों से भूना" href="http://10.0.0.122:1245/gangster-sukha-badewalia-gunned-down-in-ludhiana/">लुधियाना में गैंगस्टर सुक्खा बाड़ेवालिया को गोलियों से भूना</a></p>
<p style="text-align:justify;">राज्य के मुख्यमंत्री मनोहर लाल मणिपुर की हर स्थिति पर नजर रखे हुए हैं और पल-पल की जानकारी ले रहे हैं। उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि छात्रों को जल्द से जल्द लाने के लिए पूरी व्यवस्था करें। (Manohar Lal) जानकारी के अनुसार हरियाणा सीएम कार्यालय अधिकारी, मणिपुर में मुख्यमंत्री कार्यालय के अधिकारियों तथा मुख्य सचिव के साथ निरंतर संपर्क में हैं। हर स्थिति की ताजा अपडेट ली जा रही है। इस संबंध में मणिपुर के मुख्य सचिव ने जानकारी देते हुए बताया है कि हरियाणा के सभी छात्र सुरक्षित हैं और उन्हें हर सुविधा प्रदान की जा रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">किसी भी प्रकार से घबराने की आवश्यकता नहीं है। (Manohar Lal) मणिपुर में फंसे छात्रों को सुरक्षित वापस हरियाणा लाने के लिए हर प्रकार की व्यवस्था पर ध्यान दिया जा रहा है। जहां, अन्य राज्य भी अपने राज्यों के छात्रों को मणिपुर से निकालने में लगे हैं वहीं फ्लाइट्स की व्यस्तता व एयर ट्रैफिक के अनुसार हरियाणा सरकार कोलकाता से दिल्ली रूट पर भी विचार कर रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">वर्णनीय है कि राज्य सरकार की ओर से जानकारी दी गई है कि पहले बैच की फ्लाइट 11:10 पर दिल्ली पहुंच जाएगी। मणिपुर में फंसे छात्रों का पहला बैच रात 11:10 तक दिल्ली पहुंच जाएगा। वहीं जींद के नरवाला की रहने वाली ऋतु भी पहले बैच में ही पहुंचेगी। दोपहर 2:45 पर इंफाल से रितु की फ्लाइट रवाना हो चुकी है। हरियाणा मुख्यमंत्री ने जानकारी देते हुए बताया कि सभी मणिपुर में रह रहे बच्चों को हरियाणा सरकार की तरफ से घर वापसी की एयर टिकट दिलाई गई है।</p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>हरियाणा</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 08 May 2023 19:02:05 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>Manipur Landslide : मृतकों की संख्या हुई 42, तलाशी अभियान तेज करने के लिए खोजी कुत्तों को लगाया</title>
                                    <description><![CDATA[इंफाल (एजेंसी)। मणिपुर के नोनी जिले में विनाशकारी भूस्खलन में मरने वालों की संख्या रविवार को 41 हो गई। वहीं राहत एवं बचाव दल खराब मौसम के बावजूद जीवित बचे लोगों की तलाश कर रहा है। मणिपुर के तुपुल में 29 और 30 जून की दरम्यानी रात को भूस्खलन हुआ था। उधर, मुख्यमंत्री एन. बीरेन […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/manipur-landslide-death-toll-rises-to-42/article-35180"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-07/landslide.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>इंफाल (एजेंसी)।</strong> मणिपुर के नोनी जिले में विनाशकारी भूस्खलन में मरने वालों की संख्या रविवार को 41 हो गई। वहीं राहत एवं बचाव दल खराब मौसम के बावजूद जीवित बचे लोगों की तलाश कर रहा है। मणिपुर के तुपुल में 29 और 30 जून की दरम्यानी रात को भूस्खलन हुआ था। उधर, मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह ने दक्षिणी इंफाल के आईजीएआर में स्थित असम राइफल्स सैन्य अस्पताल पहुंचे और यहां उपचार करवा रहे सुरक्षाकर्मियों का हाल जाना।</p>
<p style="text-align:justify;">इस दौरान उन्होंने सभी घायलों, हवलदार मरजिशन सिंह और नीमा ओंचू शेरपा, लांस नायक हिरद्या लमंग, राइफलमैन सिद्धांत छेत्री, सारंगथेम श्यामचंद्र सिंह, प्रोकश नेवार और शेफ किंकर परुआ को 50-50 हजार रुपये चेक सौंपा। रक्षा विभाग के एक अधिकारी ने यहां बताया कि राज्य बलों, सेना, असम राइफल्स, प्रादेशिक सेना, राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (एसडीआरएफ) और राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ) द्वारा तुपुल में घटना स्थल पर तलाशी अभियान भारी बारिश के कारण प्रतिकूल मौसम की स्थिति और ताजा भूस्खलन के बावजूद जारी है।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>शेष सात लापता जवानों और 21 नागरिकों की तलाश जारी</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने बताया कि तलाशी अभियान को तेज करने के लिए थ्रू वॉल रडार और खोजी कुत्तों को भी लगाया जा रहा है। अधिकारियों ने बताया कि भूस्खलन के मुख्य स्थल के आसपास के नुंगडोलन, नुंगकाओ और सिबिलोंग इलाके भी प्रभावित हुए हैं और सरकार ने इन क्षेत्रों में वाहनों के प्रवेश को प्रतिबंधित कर दिया है। उन्होंने बताया कि प्रादेशिक सेना के सात जवानों के पार्थिव शरीर को भारतीय वायुसेना के विमान और भारतीय सेना के एक हेलीकॉप्टर द्वारा कोलकाता, बागडोगरा और अगरतला भेजा गया।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने इंफाल में जीओसी रेड शील्ड डिवीजन और आईजी आईजीएआर (दक्षिण) द्वारा उन्हें पूर्ण सैन्य सम्मान दिया गया। रक्षा विभाग के अधिकारी ने कहा, ‘प्रादेशिक सेना के शेष सात लापता जवानों और 21 नागरिकों की तलाश के लिए अथक प्रयास जारी रहेगा। यह प्रयास तब तक जारी रहेगा जब तक अंतिम व्यक्ति नहीं मिल जाता।</p>
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                <pubDate>Mon, 04 Jul 2022 12:22:56 +0530</pubDate>
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                <title>मणिपुर में चार किलो ड्रग के साथ तीन महिलाएं गिरफ्तार</title>
                                    <description><![CDATA[इंफाल (एजेंसी)। मणिपुर पुलिस ने दो अलग-अलग घटनाओं में चार किलो मादक पदार्थ के तीन महिलाओं को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने शनिवार को बताया कि तेंगनौपाल जिला के मोरेह मिशन वेंग वार्ड नंबर 2 निवासी निखोनेंग खोंगसाई के आवास से 2.700 किलोग्राम वजन के 65 साबुन के डिब्बे जब्त किए, जिसमें मादक पदार्थ थे। […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/three-women-arrested-with-four-kg-of-drugs-in-manipur/article-32648"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-04/bjp-demands-international-nia-drug-smuggling-investigation-e1667470127344.gif" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>इंफाल (एजेंसी)।</strong> मणिपुर पुलिस ने दो अलग-अलग घटनाओं में चार किलो मादक पदार्थ के तीन महिलाओं को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने शनिवार को बताया कि तेंगनौपाल जिला के मोरेह मिशन वेंग वार्ड नंबर 2 निवासी निखोनेंग खोंगसाई के आवास से 2.700 किलोग्राम वजन के 65 साबुन के डिब्बे जब्त किए, जिसमें मादक पदार्थ थे। पुलिस ने बताया कि सीमावर्ती इलाके में गश्त कर रही मोरेह की नारकोटिक सेल की टीम ‘बी’ ने एक महिला को संदिग्ध रूप से घूमते हुए देखा।</p>
<p style="text-align:justify;">इसके बाद वह महिला पुलिस को देखकर एक घर के अंदर भागी। इसके बाद घेराबंदी कर तलाशी अभियान चलाया गया और आरोपियों ने साबुन के डिब्बे जब्त कर लिए। वहीं, एक अन्य घटना में पुलिस ने चुराचांदपुर के खेंजंग गांव में सैकुल निवासी नेमगनेहोई हाओकिप और तुइबोंग निवासी नेम हाओकिप नामक दो महिलाओं को गिरफ्तार किया और उनके पास से साबुन के 100 डिब्बों में 1.26 किलोग्राम वजन के संदिग्ध हेरोइन नंबर 4 जब्त किया।इस सिलसिले में मामला दर्ज कर लिया गया है और आगे की जांच की जा रही है।</p>
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                <pubDate>Sat, 23 Apr 2022 12:40:30 +0530</pubDate>
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                <title>मणिपुर के सीएम बीरेन ने छह नए मंत्रियों के साथ मंत्रिमंडल का किया विस्तार</title>
                                    <description><![CDATA[इम्फाल (सच कहूँ न्यूज)। मणिपुर के मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह ने शनिवार को छह नये मंत्रियों को शामिल करके अपने मंत्रिमंडल का विस्तार किया। राज्यपाल ला गणेशन ने राजभवन में आयोजित एक समारोह में मंत्रियों को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। इनमें से पांच भारतीय जनता पार्टी और एक नागा पीपुल्स फ्रंट के हैं। […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/manipur-cm-biren-expands-cabinet-with-six-new-ministers/article-32446"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-04/manipur-cabinet.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>इम्फाल (सच कहूँ न्यूज)।</strong> मणिपुर के मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह ने शनिवार को छह नये मंत्रियों को शामिल करके अपने मंत्रिमंडल का विस्तार किया। राज्यपाल ला गणेशन ने राजभवन में आयोजित एक समारोह में मंत्रियों को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। इनमें से पांच भारतीय जनता पार्टी और एक नागा पीपुल्स फ्रंट के हैं। मंत्रियों में लेतपाओ हाओकिप, डॉ. एस रंजन, एल सुसिंद्रो, के रोबिंद्रो, थ बसंता और खाशिम रुइवा (एनपीएफ) शामिल हैं। इनमें से लेतपाओ हाओकिप ही एकमात्र ऐसे व्यक्ति हैं, जो सिंह की पिछली सरकार में भी सेवारत थे। अन्य पांच पहली बार मंत्री बने हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">लेतपाओ ने पिछली विधानसभा में नेशनल पीपुल्स पार्टी (एनपीपी) के सदस्य के रूप में जीत हासिल की थी और युवा मामलों और खेल मंत्री के रूप में कार्य किया था। उन्होंने इस बार तेंगनौपाल से भाजपा के उम्मीदवार के रूप में जीत हासिल की। उन्होंने वर्ष 1999 में इम्फाल के महाराज बोधचंद्र कॉलेज से राजनीतिशास्त्र से स्नातक की डिग्री हासिल की है। खुरई से ताल्लुक रखने वाले लीशंगथेम सुसिंद्रो मेइतेइ ( 38) दूसरी बार भाजपा के उम्मीदवार के तौर पर जीत हासिल की है। उन्होंने वर्ष 2001 में एनजी मणि कॉलेज से उच्च माध्यमिक की पढ़ाई पूरी की है। डॉ. सपम रंजन (49) ने कोंथौजाम से जीते दर्ज की है। उन्होंने वर्ष 1999 में जयपुर के एसएमएस कॉलेज से एमबीबीएस की डिग्री हासिल की और 2005 में एमडी किया। उन्होंने पहले कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में जीत हासिल की थी और फिर 2017 और 2022 में भाजपा उम्मीदवार के रूप में अपना परचम लहराया था। कोंकम रोबिंद्रो (34) ने मयंग इंफाल से जीत हासिल की है।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने 2012 में ब्रिटेन के एंग्लिया रस्किन विश्वविद्यालय से बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन किया है। थौनाओजम बसंतकुमार सिंह ने (57) पहली बार नंबोल से जीत हासिल की है। वह एक आईपीएस अधिकारी के रूप में अपनी सेवा दे चुके हैं। उन्होंने बाद में स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ले ली थी। वह पूर्व केंद्रीय मंत्री थ चाओबा के बेटे हैं। उन्होंने 1987 में दिल्ली विश्वविद्यालय के सेंट स्टीफंस कॉलेज से इतिहास से स्नातोकोत्तर और 2002 में एमयू से एलएलबी की पढ़ाई पूरी की। एनपीएफ के उम्मीदवार के रूप में चिंगई से खशिम वासुम (58) जीते हैं। वह दिल्ली विश्वविद्यालय के जाकिर हुसैन कॉलेज 1985 बैच के स्नातक हैं। सिंह ने 21 मार्च को पांच अन्य मंत्रियों थ विश्वजीत, वाई खेमचंद, के गोविंदास, नेमचा किपगेन और अवांगबो निवमई (एनपीएफ) के साथ लगातार दूसरी बार मणिपुर के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली।भाजपा के 32 और एनपीएफ के पांच सदस्य हैं।</p>
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                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 16 Apr 2022 15:35:26 +0530</pubDate>
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                <title>बीरेन सिंह ने दूसरी बार ली मणिपुर के मुख्यमंत्री पद की शपथ</title>
                                    <description><![CDATA[इंफाल (एजेंसी)। नोंगथोम्बम बीरेन सिंह (Biren Singh) ने सोमवार को मणिपुर के मुख्यमंत्री के तौर पर दूसरी बार शपथ ग्रहण की। राज्यपाल ला गणेशन ने यहां राजभवन में समारोहपूर्वक सिंह को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। सिंह के साथ ही पांच कैबिनेट मंत्रियों ने शपथ ली। इनमें एक महिला हैं। बीरेन सिंह सरकार में […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/biren-singh-takes-oath-as-chief-minister-of-manipur-for-the-second-time/article-31657"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-03/biren-singh.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>इंफाल (एजेंसी)।</strong> नोंगथोम्बम बीरेन सिंह (Biren Singh) ने सोमवार को मणिपुर के मुख्यमंत्री के तौर पर दूसरी बार शपथ ग्रहण की। राज्यपाल ला गणेशन ने यहां राजभवन में समारोहपूर्वक सिंह को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। सिंह के साथ ही पांच कैबिनेट मंत्रियों ने शपथ ली। इनमें एक महिला हैं। बीरेन सिंह सरकार में नागा पीपुल्स्रंट (एनपीएफ) के एक सदस्य भी हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">आज शपथ लेने वाले में मुख्यमंत्री के अलावा टी एच विश्वजीत, वाई खेमचंद, के गोविंदास, नीमचा किपगेन और अवंगबो न्यूमाई (एनपीएफ) शामिल हैं। गोविंदास को छोड़कर सभी मंत्री पिछली सरकार में भी थे। उल्लेखनीय है कि हाल में संपन्न विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी पूर्ण बहुमत के साथ पुन: सत्ता में आयी है। भाजपा विधायक दल ने श्री बीरेन सिंह (Biren Singh) को केन्द्रीय पर्यवेक्षक एवं वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की मौजूदगी में अपना नेता चुना था।</p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 21 Mar 2022 18:08:17 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>मणिपुर में दूसरे और अंतिम चरण में 22 सीटों पर मतदान शुरू</title>
                                    <description><![CDATA[इंफाल। मणिपुर में दूसरे और अंतिम चरण में 22 विधानसभा सीटों के लिए शनिवार की सुबह मतदान शुरू हो गया। मतदान सुबह 07.00 शुरू हुआ और शाम 16.00 बजे तक चलेगा। मणिपुर की 60 सीटों वाले विधानसभा के पहले चरण में 38 सीटों पर 28 फरवरी को मतदान कराये गये थे। दूसरे और अंतिम चरण […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/polling-begins-for-22-seats-in-manipur-in-second-and-final-phase/article-31285"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-03/assembly-election.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>इंफाल।</strong> मणिपुर में दूसरे और अंतिम चरण में 22 विधानसभा सीटों के लिए शनिवार की सुबह मतदान शुरू हो गया। मतदान सुबह 07.00 शुरू हुआ और शाम 16.00 बजे तक चलेगा। मणिपुर की 60 सीटों वाले विधानसभा के पहले चरण में 38 सीटों पर 28 फरवरी को मतदान कराये गये थे। दूसरे और अंतिम चरण में दो महिलाओं समेत 92 उम्मीदवारों के भाग्य का फैसला होना है। राज्य के छह जिलों सेनापति, जिरीबाम, उख्रुल, तमेंगलोंग, चंदेल और थौबल में चुनाव हो रहा है। पूर्वाेत्तर का गेटवे ऑफ इंडिया कहे जाने वाला सीमावर्ती शहर मोरेह और आस पास के गांव में भी चुनाव होने के कारण उत्सव सा माहौल है।</p>
<p style="text-align:justify;">दूसरे चरण का चुनाव एक ऐसे भौगोलिक क्षेत्र में हो रहा है, जिसे विपक्षी कांग्रेस पार्टी का गढ़ माना जाता है। कांग्रेस ने पांच साल पहले यहां से 12 सीटें जीती थीं। वहीं नगा पीपुल्स फ्रंट (एनपीएफ) ने चार , भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने तीन और नेशनल पीपुल्स पार्टी ने दो सीटें जीती थी , जबकि एक निर्दलीय ने भी जीत हासिल की थी। मणिपुर की पहाड़ियां, जिनमें ज्यादातर ईसाई धर्म का पालन करने वाले नागा, कुकी और अन्य जनजातियां निवास करती हैं, कभी भी राज्य में सत्तारूढ़ भाजपा की मजबूत गढ़ नहीं रही , लेकिन इस बार सभी 22 सीटों पर उसके उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">आज के मतदान के लिए 1,238 मतदान केंद्र बनाये गये हैं। इस चरण के चुनाव में 428,958 महिलाओं, 4,18,401 पुरुषों और 31 ट्रांसजेंडरों सहित कुल 8,47,400 मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करने के पात्र हैं। मणिपुर में लगातार तीन बार शासन करने वाले तथा राज्य के सबसे लंबे समय तक कांग्रेस के मुख्यमंत्री रहे ओकराम इबोबी सिंह थौबल सीट पर लगातार चौथी बार अपना कब्जा बरकरार रखने के आकांक्षी हैं। उनके खिलाफ भाजपा के लीतानथेम बसंत सिंह उम्मीदवार हैं , जो 2017 में श्री इबोबी से चुनाव हार गए थे। इनके अलावा पूर्व उप मुख्यमंत्री गैखंगम गंगमेई शामिल हैं। जिनके भाग्य को फैसला मतदाता आज ईवीएम में बंद करेंगे।</p>
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                <pubDate>Sat, 05 Mar 2022 10:04:20 +0530</pubDate>
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                            </item>
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                <title>मणिपुर में 28 फरवरी, पांच मार्च को होगा मतदान</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)। चुनाव आयोग ने मणिपुर विधानसभा चुनाव(Manipur Assembly Elections) की तिथियों में संशोधन करते हुए राज्य में पहले चरण का मतदान 27 फरवरी के स्थान पर 28 फरवरी और दूसरे चरण के लिए तीन मार्च के स्थान पर पांच मार्च को मतदान कराने का निर्णय लिया है। निर्वाचन आयोग ने आठ […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/manipur-will-vote-on-february-28-march-5/article-30701"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-02/manipur-assembly-elections.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)।</strong> चुनाव आयोग ने मणिपुर विधानसभा चुनाव(Manipur Assembly Elections) की तिथियों में संशोधन करते हुए राज्य में पहले चरण का मतदान 27 फरवरी के स्थान पर 28 फरवरी और दूसरे चरण के लिए तीन मार्च के स्थान पर पांच मार्च को मतदान कराने का निर्णय लिया है।</p>
<p style="text-align:justify;">निर्वाचन आयोग ने आठ जनवरी को मणिपुर विधानसभा(Manipur Assembly Elections) के चुनाव के कार्यक्रम की घोषणा की थी। आयोग के अनुसार पहले चरण के लिए एक फरवरी को और दूसरे चरण के लिए चार फरवरी को चुनाव की अधिसूचना जारी की गई थी और राज्य में पहले चरण का मतदान 27 फरवरी को होना था और दूसरे चरण का मतदान तीन मार्च को निश्चित किया गया था।<br />
आयोग ने हाल ही में चुनाव तैयारियों की समीक्षा के लिए सात-आठ फरवरी को मणिपुर का दौरा किया और राजनीतिक दलों, मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक और राज्य स्तर के अन्य अधिकारियों, मुख्य चुनाव अधिकारी, जिला चुनाव अधिकारियों और पुलिस अधीक्षकों और महानिदेशक के साथ बातचीत की जिसमें असम राइफल्स और अन्य कानूनी एजेंसियां ​​और अन्य संबंधित लोग शामिल हुए थे।</p>
<p style="text-align:justify;">आयोग ने विधान सभा चुनाव के मतदान की तारीखों को संशोधित करने के लिए लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 153 के तहत प्रदत्त अधिकार का उपयोग किया है। राज्य में अब पहले चरण का मतदान 27 फरवरी के स्थान पर 28 फरवरी को होगा और दूसरे चरण का मतदान तीन मार्च के स्थान पर पांच मार्च को होगा।</p>
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                <pubDate>Thu, 10 Feb 2022 20:02:25 +0530</pubDate>
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                <title>मणिपुर में बम विस्फोट, दुकानें क्षतिग्रस्त</title>
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/bomb-blast-in-manipur-shops-damaged/article-29148"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-12/bomb-blast-in-manipur.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>इम्फाल।</strong> मणिपुर के लामलोंग कीथेल में बुधवार को शक्तिशाली बम विस्फोट होने की सूचना है। विस्फोट की वजह से क्षेत्र की एक फामेर्सी और अन्य दुकानों का दरवाजे क्षतिग्रस्त हो गए। पुलिस ने बताया कि यह घटना आज तड़के 02.45 बजे घटित हुई और विस्फोट के कारण इलाके की ज्यादातर दुकानें क्षतिग्रस्त हो गयीं। पुलिस के मुताबिक विस्फोट वाले स्थल के पास स्थित एक फामेर्सी की दुकान पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गई और उसमें रखी अधिकांश दवाइयां नष्ट हो गयीं। इस घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस और दमकल की गाड़ियां मौके पर पहुंची और पूरे इलाके की घेराबंदी कर दी गई।<br />
पुलिस ने इस घटना की जांच शुरू कर दी है। अभी तक किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है।</p>
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                <pubDate>Wed, 15 Dec 2021 11:47:26 +0530</pubDate>
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