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                <title>Health Tips - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>Tea Side Effects: चाय के साथ ये चीजें खाने की गलती कभी ना करें नहीं तो बढ़ सकती हैं गैस और एसिडिटी की समस्या</title>
                                    <description><![CDATA[चाय के साथ गलत फूड जैसे मसालेदार भोजन, नींबू, चॉकलेट और कुछ अन्य खाद्य पदार्थों का सेवन करना बढ़ा सकता है पाचन संबंधी समस्याएं। जानिए विशेषज्ञों की सलाह।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/never-make-the-mistake-of-eating-these-things-with-tea/article-86219"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-06/tea-side-effect.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">नई दिल्ली। भारत में चाय रोजमर्रा की जिंदगी का अहम हिस्सा है। सुबह की शुरुआत से लेकर शाम की थकान तक, एक कप चाय लोगों को आराम देने का काम करती है। लेकिन अक्सर चाय के साथ लोग ऐसी चीजें खा लेते हैं जो शरीर और पाचन तंत्र पर बुरा असर डालती हैं।  मेडिकल साइंस के अनुसार, चाय में मौजूद कैफीन, टैनिन और अन्य सक्रिय तत्व कुछ खाद्य पदार्थों के साथ मिलकर पाचन को प्रभावित करते हैं। यही वजह है कि कुछ कॉम्बिनेशन पेट में गैस, एसिडिटी, पोषक तत्वों के अवशोषण में कमी और दांतों की संवेदनशीलता जैसी समस्याएं पैदा कर सकते हैं। Tea Side Effects</p>
<p style="text-align:justify;">चाय में मुख्य रूप से कैफीन, टैनिन, पॉलीफेनॉल्स और थोड़ी मात्रा में फ्लोराइड पाया जाता है। कैफीन शरीर को तुरंत ऊर्जा देता है, लेकिन टैनिन कई बार आयरन और कुछ मिनरल्स के अवशोषण को कम कर देता है। यही कारण है कि चाय के साथ कुछ खाद्य पदार्थों का मेल शरीर के लिए सही नहीं माना जाता। सबसे पहले बात करते हैं तीखे और मसालेदार खाने की। लहसुन, प्याज, हरी मिर्च, तीखी चटनी और भारी मसालों में मौजूद तत्व जैसे एलिसिन, कैप्साइसिन और सल्फर कंपाउंड पाचन को तेज कर देते हैं और पेट में एसिड का उत्पादन बढ़ा सकते हैं। जब इन्हें चाय के साथ लिया जाता है, जिसमें कैफीन पहले से ही गैस्ट्रिक एसिड को प्रभावित करता है, तो यह कॉम्बिनेशन पेट में जलन, एसिडिटी और भारीपन बढ़ा सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">नींबू और चाय का संयोजन भी हर व्यक्ति के लिए सही नहीं माना जाता। नींबू में साइट्रिक एसिड और विटामिन सी भरपूर मात्रा में होता है, जबकि चाय में टैनिन होता है। जब दोनों एक साथ या तुरंत बाद लिए जाते हैं, तो कुछ लोगों में पेट का पीएच स्तर असंतुलित हो सकता है। इससे एसिडिटी, पेट फूलना या हल्की गैस की समस्या हो सकती है। विशेषज्ञों की मानें तो, चाय और नींबू के सेवन के बीच कम से कम 20–30 मिनट का अंतर रखा जाए। Tea Side Effects</p>
<p style="text-align:justify;">चॉकलेट और चाय का कॉम्बिनेशन भी पाचन और स्वाद दोनों के लिए संतुलित नहीं माना जाता। चॉकलेट में थियोब्रोमाइन, कैफीन, फैट और शुगर होती है। ये सभी तत्व चाय के साथ मिलकर कैलोरी लोड बढ़ा सकते हैं और कुछ लोगों में पाचन धीमा कर सकते हैं। खासकर दूध वाली चाय के साथ चॉकलेट खाने से पेट में भारीपन महसूस हो सकता है। हालांकि ब्लैक टी के साथ डार्क चॉकलेट कभी-कभी बेहतर मेल माना जाता है, लेकिन यह भी सीमित मात्रा में ही उपयुक्त है।</p>
<p style="text-align:justify;">हल्दी वाले खाद्य पदार्थ के तुरंत बाद चाय पीना भी उचित नहीं माना जाता। हल्दी में मौजूद करक्यूमिन एक शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट और एंटी-इंफ्लेमेटरी तत्व है, जो शरीर में सूजन कम करने में मदद करता है। लेकिन चाय में मौजूद टैनिन और कैफीन इसके अवशोषण को प्रभावित कर सकते हैं। इससे कुछ लोगों को पेट में भारीपन, गैस या हल्की असहजता महसूस हो सकती है। इसलिए हल्दी और चाय के बीच भी अंतर रखना बेहतर होता है।</p>
<p style="text-align:justify;">इसके अलावा, गर्म चाय के तुरंत बाद ठंडा पानी पीना या कोई बहुत ठंडी चीज लेना दांतों और पाचन दोनों के लिए हानिकारक हो सकता है। दांतों के इनेमल पर अचानक तापमान बदलाव से माइक्रोक्रैक आ सकते हैं, जिससे संवेदनशीलता बढ़ सकती है। साथ ही, पाचन तंत्र पर भी अचानक तापमान बदलाव का असर पड़ता है, जिससे गैस या पेट में ऐंठन की समस्या हो सकती है। Tea Side Effects</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 12 Jun 2026 09:38:35 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Manmohan]]></dc:creator>
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                <title>Benefits of Stair Climbing: बेहतर फिटनेस चाहिए तो बनाएं रोज सीढ़ियां चढ़ने की आदत</title>
                                    <description><![CDATA[आज के दौर को देखते हुए नेशनल हेल्थ मिशन ने लिफ्ट की बजाय सीढ़ियों के इस्तेमाल की सलाह दी है। नियमित रूप से सीढ़ियां चढ़ने से हृदय स्वस्थ रहता है, वजन नियंत्रित होता है और शरीर में ऊर्जा बनी रहती है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/delhi/benefits-of-stair-climbing-if-you-want-better-fitness-then/article-85416"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-05/stair-climbing.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Benefits of Stair Climbing: नई दिल्ली। आज के दौर में इंसानों की निर्भरता मशीनों पर बढ़ती जा रही है। ये सुविधा भले देते हों मगर शारीरिक गतिविधियों को धीरे-धीरे खत्म भी करते जा रहे हैं। लिफ्ट या एस्केलेटर को ही ले लें तो इनकी वजह से लोग सीढ़ियां चढ़ने से कतराने लगे हैं। हालांकि, एक्सपर्ट इसे सेहत के लिए सही नहीं मानते हैं। नेशनल हेल्थ मिशन (एनएचएम) ने सीढ़ियों को बेहतर फिटनेस और एनर्जी का जरिया बताते हुए बताया कि छोटी-छोटी आदतें ही बड़े बदलाव लाती हैं। Health News</p>
<p style="text-align:justify;">स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए रोजमर्रा की छोटी गतिविधियों को सकारात्मक तरीके से बदलना बेहद जरूरी है। इसी क्रम में एनएचएम ने सलाह दी है कि दिन की शुरुआत स्वस्थ तरीके से करने के लिए लिफ्ट की बजाय सीढ़ियां चुनें। हर कदम आपको बेहतर फिटनेस, नई ऊर्जा और स्वस्थ जीवन की ओर ले जाता है। एनएचएम के अनुसार, आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में ज्यादातर लोग लिफ्ट का इस्तेमाल करते हैं। अगर हम थोड़ा प्रयास करें और सीढ़ियां चढ़ने की आदत डालें तो इससे कई स्वास्थ्य लाभ मिल सकते हैं। यह छोटी आदत न सिर्फ शरीर को सक्रिय बनाती है बल्कि लंबे समय में गंभीर बीमारियों से भी बचाव करती है।</p>
<p style="text-align:justify;">सीढ़ियां चढ़ने के एक नहीं कई फायदे हैं। सीढ़ियां चढ़ना एक बेहतरीन व्यायाम है, जो बिना किसी उपकरण के किया जा सकता है। इससे पैरों की मांसपेशियां मजबूत होती हैं, वजन नियंत्रण में रहता है और शरीर की सहनशक्ति बढ़ती है। नियमित रूप से सीढ़ियां चढ़ने से हृदय स्वस्थ रहता है, ब्लड प्रेशर कंट्रोल में रहता है और कोलेस्ट्रॉल का स्तर भी संतुलित रहता है। इसके अलावा यह आदत पूरे दिन ऊर्जा से भर देती है। सुबह ऑफिस या घर में सीढ़ियां चढ़कर शुरू किया गया दिन ज्यादा सक्रिय और तरोताजा रहता है।</p>
<p style="text-align:justify;">विशेषज्ञों का कहना है कि “एक्टिव बॉडी” बनाए रखने के लिए ऐसी छोटी आदतें बहुत महत्वपूर्ण हैं। इस छोटी सी आदत से बेहतर हार्ट हेल्थ होती है, ज्यादा एनर्जी और स्फूर्ति मिलती है, पैर और हड्डियां मजबूत होती हैं। वजन नियंत्रण में रहता है, सांस संंबंधित समस्याएं दूर होती हैं और तनाव कम व मूड बेहतर होता है। एनएचएम ने लोगों से अपील की है कि जहां भी संभव हो, लिफ्ट की जगह सीढ़ियों का इस्तेमाल करें। अगर ऑफिस की मंजिल ज्यादा ऊंची है तो कम से कम कुछ मंजिलें सीढ़ियों से चढ़कर शुरू करें। धीरे-धीरे इस आदत को बढ़ाया जा सकता है। Health News</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>राज्य</category>
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                                            <category>दिल्ली</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 25 May 2026 12:55:18 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Manmohan]]></dc:creator>
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                <title>Neem Leaf Water Benefits: पानी में उबालकर खाली पेट पी लें ये हरे पत्ते फिर देखें कमाल... </title>
                                    <description><![CDATA[Neem Leaf Water Benefits: नीम की पत्तियों का पानी पीने से डायबिटीज, स्किन प्रॉब्लम्स, पाचन और इम्युनिटी में मिल सकते हैं फायदे। जानिए सेवन का सही तरीका और जरूरी सावधानियां।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/news-brief/neem-leaf-water-benefits/article-85017"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-05/neem-leaf-water-benefits1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">Neem Leaf Water Benefits: Neem</span></span> को आयुर्वेद में औषधीय गुणों का खजाना माना जाता है। इसकी पत्तियां, छाल और फल वर्षों से घरेलू उपचार में इस्तेमाल किए जाते रहे हैं। खासतौर पर नीम की पत्तियों का पानी शरीर को अंदर से साफ करने और कई स्वास्थ्य समस्याओं में राहत देने के लिए जाना जाता है। नीम में एंटीबैक्टीरियल, एंटीफंगल, एंटीवायरल और एंटीऑक्सीडेंट गुण पाए जाते हैं। जब इसकी पत्तियों को पानी में उबालकर पिया जाता है, तो यह शरीर को डिटॉक्स करने में मदद कर सकता है। आइए जानते हैं इसके संभावित फायदे और सेवन का सही तरीका।</p><h4 style="text-align:justify;">1. ब्लड शुगर कंट्रोल करने में मदद | Neem Leaf Water Benefits</h4><p style="text-align:justify;">नीम की पत्तियों में ऐसे गुण पाए जाते हैं जो ब्लड शुगर लेवल को संतुलित रखने में मदद कर सकते हैं। नियमित रूप से सीमित मात्रा में नीम का पानी पीने से शरीर में इंसुलिन की कार्यक्षमता बेहतर हो सकती है। हालांकि, डायबिटीज के मरीज बिना डॉक्टर की सलाह दवाओं में बदलाव न करें।</p><h4 style="text-align:justify;">2. त्वचा की समस्याओं में राहत</h4><p style="text-align:justify;">अगर आपको मुंहासे, दाग-धब्बे, खुजली या एलर्जी जैसी समस्याएं रहती हैं, तो नीम का पानी फायदेमंद माना जाता है। यह शरीर से टॉक्सिन्स बाहर निकालने में मदद करता है, जिससे त्वचा साफ और हेल्दी दिख सकती है।</p><h4 style="text-align:justify;">3. इम्युनिटी मजबूत करने में सहायक</h4><p style="text-align:justify;">नीम में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाने में मदद कर सकते हैं। बदलते मौसम में वायरल संक्रमण, सर्दी-खांसी और थकान से बचाव में यह उपयोगी माना जाता है।</p><h4 style="text-align:justify;">4. पाचन तंत्र को बेहतर बनाए</h4><p style="text-align:justify;">नीम का पानी पेट की गर्मी को शांत करने और गैस, कब्ज व एसिडिटी जैसी समस्याओं में राहत देने में मदद कर सकता है। यह लिवर की सफाई में भी सहायक माना जाता है, जिससे पाचन बेहतर होता है।</p><h4 style="text-align:justify;">5. मुंह की बदबू और मसूड़ों की समस्या में राहत</h4><p style="text-align:justify;">नीम का पानी एंटीबैक्टीरियल गुणों से भरपूर होता है। यह मुंह में मौजूद बैक्टीरिया को कम करने में मदद कर सकता है, जिससे सांसों की दुर्गंध, मसूड़ों की सूजन और पायरिया जैसी समस्याओं में राहत मिल सकती है।</p><h4 style="text-align:justify;">नीम का पानी बनाने का सही तरीका</h4><ul style="text-align:justify;"><li>10-12 ताजी नीम की पत्तियां लें</li><li>इन्हें अच्छी तरह धो लें</li><li>2 कप पानी में उबालें</li><li>जब पानी आधा रह जाए तो छान लें</li><li>सुबह खाली पेट गुनगुना करके पिएं</li><li>हफ्ते में 3-4 बार सेवन पर्याप्त माना जाता है</li></ul><h4 style="text-align:justify;">इन बातों का रखें ध्यान</h4><ul><li style="text-align:justify;">ज्यादा मात्रा में नीम का सेवन नुकसान पहुंचा सकता है</li><li style="text-align:justify;">गर्भवती महिलाएं और छोटे बच्चे बिना डॉक्टर की सलाह इसका सेवन न करें</li><li style="text-align:justify;">अगर कोई पुरानी बीमारी या दवा चल रही हो, तो विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें</li></ul><p>यह जानकारी सामान्य घरेलू और आयुर्वेदिक मान्यताओं पर आधारित है। इसे किसी चिकित्सीय सलाह का विकल्प न मानें। किसी भी स्वास्थ्य समस्या या उपचार के लिए डॉक्टर या विशेषज्ञ से परामर्श जरूर करें।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 18 May 2026 11:53:54 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon]]></dc:creator>
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                <title>High Cholesterol Symptoms: पैरों में दिखें ये 7 संकेत तो तुरंत हो जाएं सावधान, बढ़ सकता है हार्ट अटैक का खतरा</title>
                                    <description><![CDATA[High Cholesterol Symptoms: पैरों में दिखें ये 7 संकेत तो तुरंत हो जाएं सावधान, बढ़ सकता है हार्ट अटैक का खतरा]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/health/high-cholesterol-symptoms-if-these-7-signs-are-seen-in/article-84960"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-05/high-cholesterol-symptoms.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">High Cholesterol Symptoms: आज के समय में हाई कोलेस्ट्रॉल की समस्या तेजी से बढ़ रही है। खराब खानपान, तली-भुनी चीजों का अधिक सेवन और बिगड़ती जीवनशैली के कारण शरीर में कोलेस्ट्रॉल का स्तर बढ़ने लगता है। हालांकि शरीर को सही तरीके से काम करने के लिए कोलेस्ट्रॉल की जरूरत होती है, लेकिन इसका अधिक स्तर दिल की बीमारी, स्ट्रोक और हार्ट अटैक का खतरा बढ़ा सकता है। हाई कोलेस्ट्रॉल को “साइलेंट किलर” भी कहा जाता है क्योंकि इसके शुरुआती लक्षण आसानी से दिखाई नहीं देते। लेकिन जब यह खतरनाक स्तर तक पहुंचता है, तो शरीर खासकर पैरों में कुछ संकेत देना शुरू कर देता है। ऐसे संकेतों को नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है।</p><h3 style="text-align:justify;">क्या होता है कोलेस्ट्रॉल? High Cholesterol Symptoms</h3><p style="text-align:justify;">कोलेस्ट्रॉल एक मोम जैसा चिपचिपा पदार्थ होता है, जो लीवर बनाता है। इसके अलावा घी, मक्खन, तेल, फास्ट फूड और अनहेल्दी फैट वाली चीजों से भी यह बढ़ता है। जब इसकी मात्रा ज्यादा हो जाती है, तो यह नसों में जमा होकर ब्लॉकेज पैदा कर सकता है, जिससे ब्लड फ्लो प्रभावित होता है।</p><h2 style="text-align:justify;">पैरों में दिखने वाले हाई कोलेस्ट्रॉल के 7 लक्षण</h2><h4 style="text-align:justify;">1. पैरों में भारीपन महसूस होना</h4><p style="text-align:justify;">अगर चलने-फिरने के दौरान पैरों, जांघों या पिंडलियों में भारीपन और दर्द महसूस हो, तो यह हाई कोलेस्ट्रॉल का संकेत हो सकता है।</p><h4 style="text-align:justify;">2. बार-बार ऐंठन आना</h4><p style="text-align:justify;">एड़ी, पैर की उंगलियों और पैरों की मांसपेशियों में बार-बार ऐंठन होना भी खराब ब्लड सर्कुलेशन की ओर इशारा करता है। यह समस्या रात में ज्यादा बढ़ सकती है।</p><h4 style="text-align:justify;">3. पैरों का ठंडा रहना</h4><p style="text-align:justify;">अगर बिना मौसम ठंडा हुए भी आपके पैर लगातार ठंडे रहते हैं, तो यह धमनियों में ब्लॉकेज और हाई कोलेस्ट्रॉल का संकेत हो सकता है।</p><h4 style="text-align:justify;">4. त्वचा के रंग में बदलाव</h4><p style="text-align:justify;">ब्लड फ्लो कम होने की वजह से पैरों की त्वचा का रंग बदल सकता है। त्वचा पीली, नीली या असामान्य दिखने लगे तो तुरंत जांच करानी चाहिए।</p><h4 style="text-align:justify;">5. घाव भरने में ज्यादा समय लगना</h4><p style="text-align:justify;">अगर पैरों में चोट या घाव जल्दी ठीक नहीं हो रहा है, तो यह खराब रक्त संचार का संकेत हो सकता है। हाई कोलेस्ट्रॉल के कारण ऐसा होना संभव है।</p><h4 style="text-align:justify;">6. लगातार पैरों में दर्द</h4><p style="text-align:justify;">पैरों में लगातार दर्द, जलन या थकान महसूस होना भी हाई कोलेस्ट्रॉल का संकेत हो सकता है। यह दर्द चलने, दौड़ने या सीढ़ियां चढ़ने पर बढ़ सकता है।</p><h4 style="text-align:justify;">7. रात में पैरों में क्रैम्प</h4><p style="text-align:justify;">रात में सोते समय पैरों में बार-बार क्रैम्प पड़ना भी हाई कोलेस्ट्रॉल के कारण हो सकता है। खासकर एड़ी, तलवों और उंगलियों में यह समस्या अधिक महसूस होती है।</p><h4 style="text-align:justify;">कब कराएं जांच?</h4><p style="text-align:justify;">अगर आपको इनमें से कोई भी लक्षण लगातार दिखाई दे रहे हैं, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें और लिपिड प्रोफाइल टेस्ट कराएं। समय रहते जांच और सही इलाज से गंभीर बीमारियों के खतरे को कम किया जा सकता है। यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है। किसी भी स्वास्थ्य समस्या में डॉक्टर की सलाह जरूर लें।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 17 May 2026 12:59:44 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Eye Care Home Remedies: नजर कम हो रही है, नहीं दिखता बिना चश्मे के साफ, तो इस आयुर्वेदिक चीज को आजमाएं, महीनेभर में दिखने लगेगा फर्क</title>
                                    <description><![CDATA[Eye Care Home Remedies:  त्रिफला आयुर्वेद का एक लोकप्रिय उपाय है, जिसे आंखों की रोशनी बढ़ाने और आंखों को स्वस्थ रखने में फायदेमंद माना जाता है। जानें त्रिफला के फायदे और इस्तेमाल का सही तरीका।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/news-brief/vision-is-deteriorating-and-cannot-be-seen-clearly-without-glasses/article-84435"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-05/eye-care-home-remedies.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Eye Care Home Remedies: लैपटॉप और टीवी स्क्रीन देखने की वजह से बच्चों से लेकर युवाओं तक को चश्मा लग रहा है। ऐसे में लोग आंखों की रोशनी बढ़ाने के प्राकृतिक और असरदार उपाय तलाशते हैं। आयुर्वेद में <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">Triphala</span></span> को आंखों की सेहत के लिए बेहद फायदेमंद माना गया है। यह तीन आयुर्वेदिक फलों — आंवला, बिभीतक और हरड़ — का मिश्रण होता है।</p>
<h4>त्रिफला में मौजूद तीन चीजें और उनके फायदे | Eye Care Home Remedies</h4>
<h4 style="text-align:justify;">आंवला</h4>
<p style="text-align:justify;">आंवला विटामिन-C का बेहतरीन स्रोत माना जाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">इसके फायदे:</p>
<ul style="text-align:justify;">
<li>आंखों की थकान कम करने में मदद</li>
<li>आंखों की रोशनी सुधारने में सहायक</li>
<li>आंखों को पोषण देने में लाभकारी</li>
</ul>
<h4 style="text-align:justify;"> बिभीतक</h4>
<p style="text-align:justify;">बिभीतक आंखों को स्वस्थ रखने में मदद करता है।</p>
<p style="text-align:justify;">इसके फायदे:</p>
<ul style="text-align:justify;">
<li>आंखों की सूजन कम करने में सहायक</li>
<li>संक्रमण से बचाव</li>
<li>दृष्टि सुधारने में मददगार</li>
</ul>
<h4> हरड़</h4>
<p style="text-align:justify;">हरड़ को आयुर्वेद में आंखों की मजबूती के लिए उपयोग किया जाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">इसके फायदे:</p>
<ul style="text-align:justify;">
<li>आंखों की मांसपेशियों को मजबूत बनाना</li>
<li>नजर तेज करने में मदद</li>
<li>आंखों को स्वस्थ बनाए रखना</li>
</ul>
<h4 style="text-align:justify;">आंखों के लिए त्रिफला के बड़े फायदे</h4>
<h4>आंखों की थकान कम करता है</h4>
<p style="text-align:justify;">नियमित सेवन से आंखों को आराम मिलता है और स्क्रीन टाइम से होने वाली थकान कम हो सकती है।</p>
<h4>नजर सुधारने में मदद</h4>
<p style="text-align:justify;">त्रिफला आंखों की मांसपेशियों को मजबूत बनाने और दृष्टि बेहतर करने में सहायक माना जाता है।</p>
<h4>संक्रमण से बचाव</h4>
<p style="text-align:justify;">इसमें एंटीऑक्सिडेंट और एंटीबैक्टीरियल गुण पाए जाते हैं, जो आंखों को संक्रमण से बचाने में मदद कर सकते हैं।</p>
<h4 style="text-align:justify;">त्रिफला का उपयोग कैसे करें?</h4>
<h4>त्रिफला चूर्ण</h4>
<p style="text-align:justify;">रात को सोते समय:</p>
<ul style="text-align:justify;">
<li>1 चम्मच त्रिफला चूर्ण</li>
<li>गुनगुने पानी के साथ लें</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;">यह पाचन और आंखों दोनों के लिए लाभकारी माना जाता है।</p>
<h4>त्रिफला काढ़ा</h4>
<ul style="text-align:justify;">
<li>1 चम्मच त्रिफला चूर्ण को पानी में रातभर भिगो दें</li>
<li>सुबह छानकर पी लें</li>
</ul>
<h4>त्रिफला आई वॉश</h4>
<p style="text-align:justify;">त्रिफला के छाने हुए काढ़े से आंखें धोने से जलन और सूजन में राहत मिल सकती है।</p>
<p style="text-align:justify;">⚠️ आंखों में कुछ भी इस्तेमाल करने से पहले डॉक्टर या आयुर्वेद विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।</p>
<h4 style="text-align:justify;">जरूरी सावधानी</h4>
<p style="text-align:justify;">हालांकि त्रिफला आयुर्वेद में लाभकारी माना जाता है, लेकिन कमजोर नजर, आंखों में दर्द या लगातार धुंधला दिखने जैसी समस्याओं में विशेषज्ञ से जांच कराना जरूरी है। घरेलू उपाय इलाज का विकल्प नहीं होते।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 08 May 2026 12:49:34 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Acidity treatment: पेट में तेजाब से हैं परेशान? तो तुरंत राहत देंगे पूज्य गुरु जी के ये टिप्स</title>
                                    <description><![CDATA[Acidity treatment पेट में तेजाब से हैं परेशान? पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां ने बताए आसान उपाय]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/news-brief/acidity-treatment/article-84378"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-05/acidity-treatment.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/2026-05/acidity-treatment.jpg" alt="Acidity-treatment" width="777" height="428"></img>Acidity treatment आजकल बदलती खानपान की आदतों और अनियमित दिनचर्या के कारण पेट में तेजाब बनना एक आम समस्या बन गई है। कई लोग सुबह उठते ही सीने में जलन, खट्टी डकार और पेट की परेशानी से परेशान रहते हैं। ऐसे में पूज्य गुरु संत डॉ. <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">Gurmeet Ram Rahim Singh</span></span> जी इन्सां द्वारा बताए गए एक आसान उपाय को लोग लाभकारी मानते हैं।</p>
<h4 style="text-align:justify;">सुबह खाली पेट पानी पीने की सलाह | Acidity treatment</h4>
<p style="text-align:justify;">बताया जाता है कि सुबह खाली पेट 2 से 3 गिलास सामान्य पानी पीना चाहिए। इसके बाद गले में अंगुली डालकर या किसी अन्य तरीके से पानी बाहर निकालने की क्रिया करनी चाहिए। मान्यता है कि इससे पेट में जमा अतिरिक्त तेजाब भी पानी के साथ बाहर निकल जाता है। कई लोगों का अनुभव है कि कुछ दिन लगातार यह उपाय करने से तेजाब बनने की समस्या में राहत मिल सकती है।</p>
<p><a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/haryana-metro-news/article-84373">Haryana Metro News: खुशखबरी, हरियाणा के इस रूट पर बिछाई जाएगी नई मेट्रो लाइन, प्रोपर्टी में आएगा उछाल</a></p>
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</div>
</div>
<h4 style="text-align:justify;">खानपान और दिनचर्या का भी रखें ध्यान</h4>
<p style="text-align:justify;">विशेषज्ञों के अनुसार तेजाब की समस्या से बचने के लिए खानपान और लाइफस्टाइल का सही होना भी बेहद जरूरी है। ज्यादा मसालेदार, तला-भुना और देर रात का भोजन पेट की परेशानी बढ़ा सकता है। वहीं पर्याप्त पानी पीना, समय पर भोजन करना और तनाव कम रखना भी फायदेमंद माना जाता है।</p>
<h4 style="text-align:justify;">सावधानी भी है जरूरी</h4>
<p style="text-align:justify;">अगर किसी व्यक्ति को लगातार तेजाब, पेट दर्द या सीने में जलन जैसी समस्या बनी रहती है, तो डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है। किसी भी घरेलू उपाय को अपनाने से पहले अपनी शारीरिक स्थिति और स्वास्थ्य का ध्यान जरूर रखें।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 07 May 2026 12:51:56 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Benefits of Guava: कब्ज, शुगर और दिल की बीमारी से राहत—अमरूद के पत्तों का असर जानकर चौंक जाएंगे</title>
                                    <description><![CDATA[नेचुरल इलाज का सुपरहीरो: अमरूद के पत्तों से 7 रोगों में आराम]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/news-brief/relief-from-constipation-sugar-and-heart-disease-%E2%80%93-you-will/article-84028"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-04/benefits-of-guava.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Benefits of Guava: अमरूद सिर्फ एक स्वादिष्ट फल ही नहीं, बल्कि इसके पत्ते भी सेहत के लिए किसी औषधि से कम नहीं हैं। भारतीय घरों में जहां अमरूद का फल खूब खाया जाता है, वहीं इसके पत्तों को अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है। लेकिन आयुर्वेद में अमरूद के पत्तों को खास महत्व दिया गया है। इनमें मौजूद एंटीऑक्सिडेंट, एंटीबैक्टीरियल और एंटी-इन्फ्लेमेटरी गुण शरीर को कई बीमारियों से बचाने में मदद करते हैं।</p>
<h4 style="text-align:justify;">आइए जानते हैं अमरूद के पत्तों के 7 जबरदस्त फायदे—Benefits of Guava</h4>
<img src="https://www.sachkahoon.com/media/2026-04/benefits-of-guava.jpg" alt="Benefits-of-Guava" width="632" height="353"></img>
Benefits of Guava: कब्ज, शुगर और दिल की बीमारी से राहत—अमरूद के पत्तों का असर जानकर चौंक जाएंगे

<p style="text-align:justify;"><strong>1. कब्ज से राहत दिलाए: </strong>आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी और गलत खानपान के कारण कब्ज आम समस्या बन गई है। अमरूद के पत्तों का काढ़ा पाचन तंत्र को दुरुस्त करता है और आंतों को साफ रखने में मदद करता है। इससे मलत्याग आसान होता है और पेट हल्का महसूस होता है।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>2. ब्लड शुगर कंट्रोल करे: </strong>डायबिटीज के मरीजों के लिए अमरूद के पत्ते काफी फायदेमंद हो सकते हैं। ये शरीर में शुगर के अवशोषण को कम करते हैं और इंसुलिन की कार्यक्षमता को बेहतर बनाते हैं। रोजाना इसका काढ़ा पीने से ब्लड शुगर स्तर नियंत्रित रह सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>3. कोलेस्ट्रॉल कम करे: </strong>अमरूद के पत्तों में मौजूद पोषक तत्व खराब कोलेस्ट्रॉल (LDL) को कम करने में मदद करते हैं। इससे दिल स्वस्थ रहता है और हृदय रोगों का खतरा घटता है।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>4. फेफड़ों को बनाए मजबूत: </strong>अगर आपको अस्थमा, खांसी या सर्दी-जुकाम की समस्या रहती है, तो अमरूद के पत्ते फायदेमंद साबित हो सकते हैं। इनके एंटीबैक्टीरियल गुण फेफड़ों को संक्रमण से बचाते हैं और सांस लेने में राहत देते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>5. पेट के अल्सर में आराम: </strong>अमरूद के पत्ते पेट की सूजन को कम करते हैं और गैस्ट्रिक जूस को संतुलित रखते हैं। इससे पेट के अल्सर और जलन जैसी समस्याओं में राहत मिलती है।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>6. त्वचा को बनाए चमकदार: </strong>मुहांसे, दाग-धब्बे या रैशेज से परेशान हैं? अमरूद के पत्तों का पेस्ट या रस त्वचा पर लगाने से त्वचा साफ और ग्लोइंग बनती है। साथ ही, इसका सेवन अंदर से भी त्वचा को निखारता है।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>7. दांत और मसूड़ों की देखभाल: </strong>अमरूद के पत्तों में एंटीबैक्टीरियल गुण होते हैं, जो मसूड़ों की सूजन, खून आना और मुंह की बदबू को दूर करने में मदद करते हैं। पत्तों को चबाना या काढ़ा से कुल्ला करना फायदेमंद होता है।</p>
<h4 style="text-align:justify;">अमरूद के पत्तों का सेवन कैसे करें?</h4>
<p style="text-align:justify;">✔️ काढ़ा – पत्तों को उबालकर दिन में 1–2 बार पिएं<br />✔️ चाय – पत्तों की हर्बल चाय बनाकर सेवन करें<br />✔️ रस – ताजे पत्तों का जूस निकालकर पिएं<br />✔️ पेस्ट – त्वचा पर लगाने के लिए पत्तों का लेप बनाएं</p>
<h4 style="text-align:justify;">ध्यान रखें</h4>
<p style="text-align:justify;">हालांकि अमरूद के पत्ते फायदेमंद हैं, लेकिन जरूरत से ज्यादा सेवन करने से नुकसान भी हो सकता है। अगर आप किसी बीमारी की दवा ले रहे हैं, तो सेवन से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 30 Apr 2026 11:49:09 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Health News: 30 की उम्र के बाद इन बीमारियों को पहचानना है अनिवार्य, शरीर देता है समय रहते संकेत</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग अपने करियर, परिवार और जिम्मेदारियों में इतने व्यस्त हो जाते हैं कि अपनी सेहत को अक्सर पीछे छोड़ देते हैं। खासकर 30 की उम्र के बाद शरीर में होने वाले बदलावों को लोग सामान्य समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन मेडिकल रिसर्च यह बताती है कि […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/identifying-these-diseases-after-age-30-is-essential-the-body-gives-timely-warning-signs/article-83275"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-04/health-care.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">नई दिल्ली। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग अपने करियर, परिवार और जिम्मेदारियों में इतने व्यस्त हो जाते हैं कि अपनी सेहत को अक्सर पीछे छोड़ देते हैं। खासकर 30 की उम्र के बाद शरीर में होने वाले बदलावों को लोग सामान्य समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन मेडिकल रिसर्च यह बताती है कि यही वह उम्र होती है, जब शरीर धीरे-धीरे कई बीमारियों की ओर बढ़ने लगता है। अगर समय रहते सावधानी न बरती जाए, तो छोटी-छोटी समस्याएं आगे चलकर बड़ी और गंभीर बीमारी का रूप ले सकती हैं। Health News</p>
<p style="text-align:justify;">हाई ब्लड प्रेशर: 30 की उम्र के बाद तनाव, नींद की कमी और खराब खानपान के कारण ब्लड प्रेशर बढ़ने का खतरा काफी ज्यादा हो जाता है। शुरुआत में इसके लक्षण साफ दिखाई नहीं देते, इसलिए इसे साइलेंट किलर भी कहा जाता है। अगर इसे लंबे समय तक कंट्रोल न किया जाए, तो यह दिल की बीमारी, स्ट्रोक और किडनी डैमेज जैसी गंभीर समस्याओं को जन्म दे सकता है। नियमित ब्लड प्रेशर चेक करना और नमक की मात्रा कम रखना इससे बचाव में मदद करता है।</p>
<p style="text-align:justify;">डायबिटीज: 30 के बाद शरीर का मेटाबोलिज्म धीमा होने लगता है, जिससे शुगर लेवल बढ़ने का खतरा बढ़ जाता है। अगर व्यक्ति ज्यादा मीठा, जंक फूड या प्रोसेस्ड खाना खाता है और शारीरिक गतिविधि कम करता है तो यह खतरा और बढ़ जाता है। डायबिटीज का असर आंखों, किडनी और नर्व्स पर भी पड़ सकता है। इसलिए नियमित ब्लड शुगर टेस्ट और संतुलित डाइट बहुत जरूरी है। Health News</p>
<h3>लिवर और किडनी की सेहत भी इस उम्र में बेहद महत्वपूर्ण होती है</h3>
<p style="text-align:justify;">हाई कोलेस्ट्रॉल: ज्यादा तला-भुना और फैटी फूड, शरीर में खराब कोलेस्ट्रॉल को बढ़ाता है। इससे खून की नलियों में रुकावट बनने लगती है, जो आगे चलकर हार्ट अटैक या स्ट्रोक का कारण बन सकती है। इस उम्र में कोलेस्ट्रॉल का स्तर जांचते रहना और हेल्दी फैट्स जैसे नट्स, बीज और हरी सब्जियों का सेवन करना जरूरी होता है।</p>
<p style="text-align:justify;">ऑस्टियोपोरोसिस: उम्र बढ़ने के साथ-साथ बोन डेंसिटी कम होने लगती है, खासकर महिलाओं में यह समस्या ज्यादा देखी जाती है। कैल्शियम और विटामिन डी की कमी से हड्डियां कमजोर हो जाती हैं, जिससे फ्रैक्चर का खतरा बढ़ जाता है। रोजाना धूप में समय बिताना, दूध और कैल्शियम युक्त आहार लेना इस समस्या से बचाव में मदद करता है।</p>
<p style="text-align:justify;">फैटी लिवर: लिवर और किडनी की सेहत भी इस उम्र में बेहद महत्वपूर्ण होती है। जो न लोग ज्यादा तैलीय खाना खाते हैं या शारीरिक रूप से सक्रिय नहीं है। उनमें किडनी से जुड़ी समस्याएं भी धीरे-धीरे बढ़ सकती हैं, जिनका शुरुआती चरण में पता नहीं चलता। इसलिए डॉक्टर समय-समय पर लिवर फंक्शन और किडनी टेस्ट कराने की सलाह देते हैं, ताकि किसी भी समस्या को शुरुआत में ही रोका जा सके। Health News</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 09 Apr 2026 15:33:40 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>Ayurveda Health Tips: इन दिनों होते हैं सबसे ज्यादा सर्दी-जुकाम? जानें बचने का सही तरीका व हेल्थ टिप्स</title>
                                    <description><![CDATA[Ayurveda Tips in Falgun Month: नई दिल्ली। ऋतु परिवर्तन के साथ केवल तापमान ही नहीं बदलता, बल्कि शरीर की आंतरिक प्रवृत्तियों में भी परिवर्तन होता है। 2 फरवरी से आरंभ हुआ फाल्गुन मास उल्लास, उत्सव और प्रकृति के नवोन्मेष का प्रतीक माना जाता है। चारों ओर पीली सरसों की लहराती फसल और मध्यम तापमान वातावरण […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/home-and-family/are-colds-and-flu-the-most-common-these-days-learn-the-right-way-to-prevent-them-and-health-tips/article-81262"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-02/falgun-month-health-tips.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Ayurveda Tips in Falgun Month: नई दिल्ली। ऋतु परिवर्तन के साथ केवल तापमान ही नहीं बदलता, बल्कि शरीर की आंतरिक प्रवृत्तियों में भी परिवर्तन होता है। 2 फरवरी से आरंभ हुआ फाल्गुन मास उल्लास, उत्सव और प्रकृति के नवोन्मेष का प्रतीक माना जाता है। चारों ओर पीली सरसों की लहराती फसल और मध्यम तापमान वातावरण को सुखद बनाते हैं, किंतु यही समय स्वास्थ्य की दृष्टि से सावधानी का भी है। Ayurveda Health Tips</p>
<p style="text-align:justify;">दिन में हल्की गर्मी और रात्रि में शीतलता रहने से शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता प्रभावित हो सकती है। सर्दी, जुकाम और मौसमी संक्रमण इस अवधि में तीव्र गति से फैलते हैं। आयुर्वेद के अनुसार इस काल में पित्त का प्रभाव बढ़ता है तथा कफ का क्षय होने लगता है, जिससे पाचन शक्ति अपेक्षाकृत मंद पड़ सकती है। अतः आहार में संतुलन अत्यंत आवश्यक हो जाता है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">फाल्गुन मास में किन पदार्थों से परहेज करें? | Ayurveda Health Tips</h3>
<p style="text-align:justify;">चना का सीमित या त्यागयुक्त सेवन – परंपरानुसार होली के समय भुने हुए चने और गेहूं की बालियों का सेवन किया जाता है, किंतु आयुर्वेद में चने को गुरु (भारी) माना गया है। इस ऋतु में पाचन अग्नि मंद होने से चना गैस, कब्ज या अपच उत्पन्न कर सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">बासी एवं तामसिक भोजन – आध्यात्मिक दृष्टि से भी फाल्गुन मास महत्वपूर्ण है, क्योंकि इस अवधि में Maha Shivaratri का पर्व आता है। अतः ताजे, सात्विक और सुपाच्य भोजन को वरीयता देना हितकारी माना गया है। अत्यधिक तले-भुने एवं मसालेदार पदार्थों से बचना चाहिए, क्योंकि वे पित्त वृद्धि को और बढ़ा सकते हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">फाल्गुन में क्या खाएं? Ayurveda Health Tips</h3>
<ul>
<li style="text-align:justify;">बेर – यह फल शरीर को शीतलता प्रदान करता है और पाचन में सहायक है।</li>
<li style="text-align:justify;">अंगूर – अंगूर रक्त शुद्धि और ऊर्जा वृद्धि में उपयोगी माने जाते हैं।</li>
<li style="text-align:justify;">हल्के, सुपाच्य एवं मौसमी फल-सब्जियां।</li>
<li style="text-align:justify;">प्रातःकाल शीघ्र उठकर व्यायाम तथा सूर्यप्रकाश का सेवन शरीर को सुदृढ़ बनाता है।</li>
<li style="text-align:justify;">ऋतु के अनुरूप आहार अपनाने से बिना औषधि के भी स्वास्थ्य संतुलित रखा जा सकता है। जीवनशैली में साधारण परिवर्तन—जैसे समय पर भोजन, पर्याप्त जल सेवन और नियमित व्यायाम—शरीर को आंतरिक शक्ति प्रदान करते हैं।</li>
</ul>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>घर परिवार</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 14 Feb 2026 12:37:23 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Health Tips: सुबह बासी मुंह नीम की पत्तियां खाने से दूर होती हैं कई बीमारियां, बढ़ता है रोग प्रतिरोधक क्षमता</title>
                                    <description><![CDATA[Health Tips:  अनु सैनी। भारत में आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति हजारों वर्षों से लोगों की सेहत का ख्याल रखती आई है। इसी परंपरा में नीम (Azadirachta indica) एक ऐसा औषधीय पेड़ माना जाता है, जिसकी पत्तियों, छाल, फूल और बीज सभी का उपयोग स्वास्थ्य लाभ के लिए किया जाता है। आयुर्वेदाचार्यों और आधुनिक शोध दोनों में […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/eating-neem-leaves-on-an-empty-stomach-in-the-morning-helps-ward-off-many-diseases-and-boosts-immunity/article-77630"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2025-11/health-tips.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>Health Tips:  अनु सैनी।</strong> भारत में आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति हजारों वर्षों से लोगों की सेहत का ख्याल रखती आई है। इसी परंपरा में नीम (Azadirachta indica) एक ऐसा औषधीय पेड़ माना जाता है, जिसकी पत्तियों, छाल, फूल और बीज सभी का उपयोग स्वास्थ्य लाभ के लिए किया जाता है। आयुर्वेदाचार्यों और आधुनिक शोध दोनों में यह प्रमाणित हो चुका है कि सुबह बासी मुंह यानी उठते ही बिना कुछ खाए-पिए नीम की 4-5 ताजी पत्तियां चबाकर खाने से शरीर को कई लाभ मिलते हैं।</p>
<h4 style="text-align:justify;">1. शरीर की प्राकृतिक सफाई और डिटॉक्स | Health Tips</h4>
<p style="text-align:justify;">सुबह बासी मुंह नीम की पत्तियां खाने से शरीर में रातभर जमा हुए विषैले तत्व बाहर निकलने लगते हैं। नीम में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट और एंटीबैक्टीरियल गुण शरीर की आंतरिक सफाई करते हैं। इससे रक्त शुद्ध होता है और चेहरे पर निखार आता है।</p>
<h4 style="text-align:justify;">2. रोग प्रतिरोधक क्षमता में बढ़ोतरी</h4>
<p style="text-align:justify;">नीम की पत्तियों में एंटीसेप्टिक और एंटीवायरल गुण पाए जाते हैं, जो शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली (Immune System) को मजबूत करते हैं। नियमित सेवन से मौसम बदलने पर होने वाले सर्दी-जुकाम और वायरल इंफेक्शन की संभावना कम हो जाती है।</p>
<h4 style="text-align:justify;">3. दांत और मसूड़ों की सेहत के लिए लाभकारी</h4>
<p style="text-align:justify;">पुराने समय में लोग नीम की दातुन का इस्तेमाल करते थे। सुबह बासी मुंह नीम की पत्तियां चबाने से मुंह के हानिकारक बैक्टीरिया खत्म होते हैं, मसूड़े मजबूत होते हैं और सांसों की दुर्गंध दूर होती है। यह पायरिया जैसी दंत समस्याओं को भी रोकने में मदद करता है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">4. त्वचा रोगों में रामबाण</h3>
<p style="text-align:justify;">नीम की पत्तियां त्वचा से जुड़ी बीमारियों में भी कारगर हैं। यह मुंहासे, दाद, खुजली और एक्जिमा जैसी समस्याओं में राहत देती हैं। सुबह इसका सेवन करने से खून साफ होता है, जिससे त्वचा पर चमक आती है और फोड़े-फुंसियां नहीं निकलतीं।</p>
<h4 style="text-align:justify;">5. पाचन तंत्र को दुरुस्त करने में सहायक</h4>
<p style="text-align:justify;">नीम की पत्तियों में मौजूद कड़वे तत्व पाचन रसों के स्राव को बढ़ाते हैं, जिससे भोजन सही तरीके से पचता है। यह कब्ज, गैस और एसिडिटी जैसी समस्याओं को दूर करने में मदद करता है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">6. डायबिटीज नियंत्रण में मददगार</h3>
<p style="text-align:justify;">वैज्ञानिक शोध में पाया गया है कि नीम का सेवन ब्लड शुगर लेवल को नियंत्रित करने में सहायक हो सकता है। सुबह बासी मुंह नीम की पत्तियां खाने से शरीर में शुगर का स्तर संतुलित रहता है, जिससे डायबिटीज के मरीजों को लाभ हो सकता है।</p>
<h4 style="text-align:justify;">7. लिवर और किडनी की सेहत के लिए फायदेमंद</h4>
<p style="text-align:justify;">नीम शरीर के डिटॉक्सिफिकेशन में मदद करता है, जिससे लिवर और किडनी पर दबाव कम होता है। यह अंगों को स्वस्थ रखने में सहायक होता है और लंबे समय तक उनके कार्य को सही बनाए रखता है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">8. मलेरिया और अन्य संक्रमणों से बचाव</h3>
<p style="text-align:justify;">नीम में एंटी-मलेरियल गुण भी पाए जाते हैं। पुराने समय में मलेरिया से बचाव के लिए लोग नीम की पत्तियां या नीम का पानी पीते थे। नियमित सेवन से कई प्रकार के संक्रमणों का खतरा कम हो सकता है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">9. वजन घटाने में मददगार</h3>
<p style="text-align:justify;">नीम की पत्तियां शरीर में मेटाबॉलिज्म को तेज करती हैं, जिससे फैट बर्निंग प्रक्रिया बेहतर होती है। सुबह इसका सेवन करने से भूख नियंत्रित रहती है और वजन घटाने में मदद मिलती है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">10. हार्मोनल बैलेंस में सहायक</h3>
<p style="text-align:justify;">विशेष रूप से महिलाओं के लिए, नीम का सेवन हार्मोनल संतुलन बनाए रखने में सहायक हो सकता है। यह मासिक धर्म बंधी समस्याओं में भी राहत दे सकता है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">कैसे करें सेवन</h3>
<p style="text-align:justify;">सुबह उठते ही बिना ब्रश किए, 4-5 ताजी और साफ नीम की पत्तियां तोड़ लें।<br />
इन्हें अच्छी तरह चबाकर खाएं और फिर एक गिलास गुनगुना पानी पी लें।<br />
स्वाद में कड़वाहट जरूर होगी, लेकिन स्वास्थ्य लाभ इसे अपनाने लायक बनाते हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">सावधानियां</h3>
<p style="text-align:justify;">गर्भवती महिलाएं और छोटे बच्चे नीम की पत्तियों का सेवन करने से पहले डॉक्टर से सलाह लें।<br />
अत्यधिक मात्रा में सेवन करने से उल्टी या पेट में गड़बड़ी हो सकती है, इसलिए सीमित मात्रा में ही खाएं।<br />
विशेषज्ञ की राय<br />
आयुर्वेदाचार्य डॉ. संजय कुमार के अनुसार, “नीम प्रकृति का अनमोल तोहफा है। यह न केवल कई रोगों से बचाता है बल्कि शरीर को अंदर से मजबूत करता है। यदि इसे रोजमर्रा की जिंदगी में सही मात्रा में शामिल किया जाए तो लंबे समय तक दवाइयों की जरूरत नहीं पड़ती।” सुबह बासी मुंह नीम की पत्तियां चबाकर खाने की आदत स्वास्थ्य के लिए बेहद लाभकारी है। यह परंपरा सिर्फ बुजुर्गों की नसीहत नहीं, बल्कि आधुनिक विज्ञान और आयुर्वेद दोनों द्वारा प्रमाणित एक सरल और प्रभावी घरेलू नुस्खा है। थोड़ी कड़वाहट को सहन कर यदि आप इसे अपनाते हैं, तो लंबे समय तक स्वस्थ और रोगमुक्त जीवन जी सकते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>नोट:- </strong>इस आर्टिकल में बताई गई विधि, तरीकों और दावों को केवल सुझाव के रूप में लें, सच कहूं इनकी पुष्टि नहीं करता है। इस तरह की किसी भी उपचार दवा या डाइट और सुझाव पर अमल करने से पहले अपने किसी संबंधी एक्सपर्ट या डॉक्टर से सलाह जरूर लें।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 02 Nov 2025 13:00:14 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Health Tips: सेहत का राज छिपा है आपके बर्तनों में मिट्टी से लेकर सोने तक, जानिए कौन से बर्तन हैं सबसे फायदेमंद</title>
                                    <description><![CDATA[Health Tips:  अनु सैनी बर्तनों का चयन सिर्फ दिखावे के लिए नहीं, बल्कि हमारी सेहत से भी गहराई से जुड़ा होता है। विशेषज्ञों का मानना है कि किस धातु के बर्तन में खाना पकाया या खाया जा रहा है, इसका सीधा असर शरीर पर पड़ता है। मिट्टी, तांबा, पीतल और कांसे के बर्तन न केवल […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/the-secret-to-health-lies-in-your-utensils-from-clay-to-gold/article-76873"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2025-10/health-tips.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Health Tips:  अनु सैनी बर्तनों का चयन सिर्फ दिखावे के लिए नहीं, बल्कि हमारी सेहत से भी गहराई से जुड़ा होता है। विशेषज्ञों का मानना है कि किस धातु के बर्तन में खाना पकाया या खाया जा रहा है, इसका सीधा असर शरीर पर पड़ता है। मिट्टी, तांबा, पीतल और कांसे के बर्तन न केवल भोजन के स्वाद को बढ़ाते हैं, बल्कि सेहत के लिए भी बेहद लाभकारी होते हैं।</p>
<h4 style="text-align:justify;">मुरादाबाद – पीतल नगरी की पहचान | Health Tips</h4>
<p style="text-align:justify;">उत्तर प्रदेश का मुरादाबाद शहर अपनी पीतल कला के लिए पूरी दुनिया में जाना जाता है। यहां तांबा, कांसा और पीतल के आकर्षक बर्तन बनाए जाते हैं। विशेषज्ञ बताते हैं कि इन धातुओं से बने बर्तन शरीर को आवश्यक मिनरल्स प्रदान करते हैं और भोजन में पोषक तत्वों की कमी नहीं होने देते। हालांकि, खट्टे या अम्लीय खाद्य पदार्थ (जैसे नींबू या टमाटर) इन बर्तनों में नहीं पकाने चाहिए, क्योंकि ये धातुओं के साथ प्रतिक्रिया कर हानिकारक हो सकते हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">तांबा, पीतल और कांसा – शरीर के लिए अमृत समान</h3>
<p style="text-align:justify;">मुरादाबाद के कारोबारी मोहम्मद फरमान के अनुसार, स्टील, एल्यूमिनियम और प्लास्टिक के बर्तनों का उपयोग शरीर को धीरे-धीरे नुकसान पहुंचाता है। इन बर्तनों से निकलने वाले रसायन दिल की बीमारी, ब्लड प्रेशर और खून की अशुद्धि जैसी समस्याएं पैदा कर सकते हैं। वहीं, तांबे, पीतल और कांसे के बर्तनों में खाना खाने से शरीर को प्राकृतिक मिनरल्स मिलते हैं, जो रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में मदद करते हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">मिट्टी के बर्तनों के फायदे</h3>
<p style="text-align:justify;">एक्सपर्ट डॉ. रवि आर्या का कहना है कि मिट्टी के बर्तन सबसे प्राकृतिक और सेहतमंद विकल्प हैं। इनमें पकाया गया खाना न केवल स्वादिष्ट होता है बल्कि पोषक तत्व भी पूरी तरह सुरक्षित रहते हैं। मिट्टी की प्राकृतिक ठंडक भोजन के तापमान को नियंत्रित रखती है और पाचन को बेहतर बनाती है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">सोना, चांदी और लोहा भी हैं लाभकारी</h3>
<p style="text-align:justify;">प्राचीन आयुर्वेद में सोने, चांदी, कांसे और लोहे के बर्तनों का उल्लेख भी मिलता है।<br />
चांदी के बर्तन पाचन को दुरुस्त रखते हैं और रोगों से बचाते हैं।<br />
कांसे के बर्तन शरीर के दोषों को संतुलित करते हैं।<br />
लोहे के बर्तन से बने भोजन में आयरन की मात्रा बढ़ जाती है।<br />
सोने के बर्तन शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में मदद करते हैं।<br />
आज जब बाजार में आधुनिक डिज़ाइन वाले स्टील और प्लास्टिक के बर्तन छा गए हैं, तब भी मिट्टी, तांबा, कांसा और पीतल जैसे पारंपरिक बर्तन स्वास्थ्य की दृष्टि से सर्वोत्तम हैं। यदि आप भी अपनी दिनचर्या में धीरे-धीरे इन धातु या मिट्टी के बर्तनों का इस्तेमाल बढ़ाएं, तो यह आपकी सेहत के लिए एक स्वाभाविक और दीर्घकालिक निवेश साबित होगा।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 14 Oct 2025 11:38:41 +0530</pubDate>
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                            </item>
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                <title>अपनी उम्र से छोटा दिखना है, तो रोज करें ये काम, चेहरे पर आने वाली झुर्रियां हो जाएगी खत्म</title>
                                    <description><![CDATA[Health Tips: कुछ लोग अपनी उम्र बताते हैं तो विश्वास ही नहीं होता। उनका स्वास्थ्य, और चेहरे की चमक उन्हें अपनी उम्र से बहुत कम दिखाती है। जब ऐसे लोगों की जीवन शैली का अध्ययन किया गया तो उनमें कुछ समान बातें पाई गईं। शोधकर्ताओं ने लगभग 10 वर्ष तक ऐसे लोगों की जीवन शैली […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/if-you-want-to-look-younger-than-your-age-do-this-every-day-and-the-wrinkles-on-your-face-will-disappear/article-76030"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2025-09/health-tips.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Health Tips: कुछ लोग अपनी उम्र बताते हैं तो विश्वास ही नहीं होता। उनका स्वास्थ्य, और चेहरे की चमक उन्हें अपनी उम्र से बहुत कम दिखाती है। जब ऐसे लोगों की जीवन शैली का अध्ययन किया गया तो उनमें कुछ समान बातें पाई गईं। शोधकर्ताओं ने लगभग 10 वर्ष तक ऐसे लोगों की जीवन शैली का अध्ययन किया। इन लोगों में लगभग निम्न विशेषताएं थीं-</p>
<p><a href="http://10.0.0.122:1245/vaccines-are-essential-for-protecting-your-childs-health-learn-when-to-administer-each-vaccine-see-the-full-list/">Vaccination Schedule for Baby: बच्चे की सेहत को सुरक्षित रखने के लिए जरूरी हैं टीके, जानें कब कौन सा टीका लगता है, देखिए पूरी लिस्ट</a></p>
<ul style="text-align:justify;">
<li style="text-align:justify;">ऐसे लोग हर आयु वर्ग के लोगों से मित्रता करते हैं।</li>
<li style="text-align:justify;">ऐसे लोग बाहर समय बिताना अधिक पसंद करते हैं और प्राय: शारीरिक व्यायाम के शौकीन होेते हैं।</li>
<li style="text-align:justify;">ऐसे लोग गहरी नींद सोते हैं और सुबह तरोताजÞा उठते हैं।</li>
<li style="text-align:justify;">ऐसे लोग सीधे बैठते और चलते हैं।</li>
<li style="text-align:justify;">उन्हें प्राय: यात्रा करने का काफी शौक होता है।</li>
<li style="text-align:justify;">ऐसे लोगों का रक्तचाप प्राय: सामान्य या उससे कम होता है।</li>
<li style="text-align:justify;">ऐसे लोग टेलीविजÞन देखने जैसे आसान कार्यों की अपेक्षा पढ़ने जैसे कठिन मानसिक कार्य करना पसंद करते हैं। प्राय: ऐसे लोगों के मां बाप की आयु भी लंबी ही होती है।</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>व्यायाम:</strong> युवा दिखने हेतु नियमित व्यायाम सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण गतिविधि है। इससे न केवल आपका शरीर चुस्त व युवा बनता है बल्कि मस्तिष्क के कार्य करने की शक्ति भी बढ़ती है। नियमित व्यायाम करने वाले लोग जीवन के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण रखते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">यदि आप शारीरिक दृष्टि से सक्रि य नहीं हैं तो आप पहले से अधिक मात्रा में और अधिक गति से सैर करना प्रारंभ करें। लगभग 20-30 मिनट की तेज सैर से आपकी शारीरिक क्षमता बढ़ती है। यदि इसके अतिरिक्त अपने घर या कार्य-स्थल के आस-पास कोई शारीरिक गतिविधि चुन सकें तो बेहतर होगा।</p>
<p style="text-align:justify;">नियमित व्यायाम को अपने जीवन का एक अंग बना लें जिसे आपने सम्पूर्ण जीवन निभाना है। आप नृत्य, ऐरोबिक्स, तैरना, चलना या दौड़ना, अपनी क्षमतानुसार कुछ भी चुन सकते हैं और यह सब आप के लिए लाभदायक है। नियमित व्यायाम से न केवल कैलोरी खर्च होती है बल्कि शरीर की पाचन क्रि या भी घंटों तेज बनी रहती है। इसके अतिरिक्त भूख भी दबती है और हमारे शरीर में चर्बी की मात्रा कम होकर मांसपेशियां बढ़ती हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">भोजन: युवा दिखने वालों में एक विशेषता यह भी थी कि वे भोजन में विभिन्नता बनाए रखने की ओर अधिक ध्यान देते थे क्योंकि डाइटिंग करने से जीवन के तनावों में वृद्धि होती है और भोजन में विविधता से कुपोषण की संभावना समाप्त हो जाती है। इनके भोजन की विशेषताओं के आधार पर निम्न निष्कर्ष निकाले गए।</p>
<ul>
<li style="text-align:justify;">अपने भोजन में 60 प्रतिशत भाग दालें व अनाज खाईए।</li>
<li style="text-align:justify;">दिन में कम से कम पांच बार फल व सब्जियां खाइए। 15 से 20 प्रतिशत भाग प्रोटीन होनी चाहिए।</li>
<li style="text-align:justify;">एक बार में केवल इतना ही खाइए जिससे आपकी भूख संतुष्ट हो जाए। अच्छी तरह चबा कर खाएं और ज्यों ही संतुष्टि हो, खाना बंद कर दें।</li>
<li style="text-align:justify;">भोजन में चीनी व नमक की मात्रा कम से कम रखें।</li>
<li style="text-align:justify;">विटामिन सी वाले फल व सब्जियां आदि अधिक खाएं।</li>
<li style="text-align:justify;">सिगरेट, काफी व शराब आदि नशे शरीर को बहुत हानि पहुंचाते हैं। इसलिए इनसे परहेज करें।</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>मानसिक शक्ति:</strong> मानसिक शक्ति के विकास के लिए अपने दिमाग का प्रयोग नियमित रूप से करते रहे। पुस्तकें व समाचार-पत्र नियमित पढ़ें। टेलीविजÞन कम देखें क्योंकि यह एक ऐसा कार्य है जिसमें दिमाग का कम प्रयोग होता है। नियमित संगीत सुनना भी मानसिक शक्ति के विकास में सहायक होता है। यह याद रखें कि आपका युवा दिखना आपकी आयु पर नहीं बल्कि आपकी गतिविधियों पर निर्भर करता है।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 22 Sep 2025 12:26:17 +0530</pubDate>
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