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                <title>Health Tips - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>Health News: 30 की उम्र के बाद इन बीमारियों को पहचानना है अनिवार्य, शरीर देता है समय रहते संकेत</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग अपने करियर, परिवार और जिम्मेदारियों में इतने व्यस्त हो जाते हैं कि अपनी सेहत को अक्सर पीछे छोड़ देते हैं। खासकर 30 की उम्र के बाद शरीर में होने वाले बदलावों को लोग सामान्य समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन मेडिकल रिसर्च यह बताती है कि […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/identifying-these-diseases-after-age-30-is-essential-the-body-gives-timely-warning-signs/article-83275"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-04/health-care.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">नई दिल्ली। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग अपने करियर, परिवार और जिम्मेदारियों में इतने व्यस्त हो जाते हैं कि अपनी सेहत को अक्सर पीछे छोड़ देते हैं। खासकर 30 की उम्र के बाद शरीर में होने वाले बदलावों को लोग सामान्य समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन मेडिकल रिसर्च यह बताती है कि यही वह उम्र होती है, जब शरीर धीरे-धीरे कई बीमारियों की ओर बढ़ने लगता है। अगर समय रहते सावधानी न बरती जाए, तो छोटी-छोटी समस्याएं आगे चलकर बड़ी और गंभीर बीमारी का रूप ले सकती हैं। Health News</p>
<p style="text-align:justify;">हाई ब्लड प्रेशर: 30 की उम्र के बाद तनाव, नींद की कमी और खराब खानपान के कारण ब्लड प्रेशर बढ़ने का खतरा काफी ज्यादा हो जाता है। शुरुआत में इसके लक्षण साफ दिखाई नहीं देते, इसलिए इसे साइलेंट किलर भी कहा जाता है। अगर इसे लंबे समय तक कंट्रोल न किया जाए, तो यह दिल की बीमारी, स्ट्रोक और किडनी डैमेज जैसी गंभीर समस्याओं को जन्म दे सकता है। नियमित ब्लड प्रेशर चेक करना और नमक की मात्रा कम रखना इससे बचाव में मदद करता है।</p>
<p style="text-align:justify;">डायबिटीज: 30 के बाद शरीर का मेटाबोलिज्म धीमा होने लगता है, जिससे शुगर लेवल बढ़ने का खतरा बढ़ जाता है। अगर व्यक्ति ज्यादा मीठा, जंक फूड या प्रोसेस्ड खाना खाता है और शारीरिक गतिविधि कम करता है तो यह खतरा और बढ़ जाता है। डायबिटीज का असर आंखों, किडनी और नर्व्स पर भी पड़ सकता है। इसलिए नियमित ब्लड शुगर टेस्ट और संतुलित डाइट बहुत जरूरी है। Health News</p>
<h3>लिवर और किडनी की सेहत भी इस उम्र में बेहद महत्वपूर्ण होती है</h3>
<p style="text-align:justify;">हाई कोलेस्ट्रॉल: ज्यादा तला-भुना और फैटी फूड, शरीर में खराब कोलेस्ट्रॉल को बढ़ाता है। इससे खून की नलियों में रुकावट बनने लगती है, जो आगे चलकर हार्ट अटैक या स्ट्रोक का कारण बन सकती है। इस उम्र में कोलेस्ट्रॉल का स्तर जांचते रहना और हेल्दी फैट्स जैसे नट्स, बीज और हरी सब्जियों का सेवन करना जरूरी होता है।</p>
<p style="text-align:justify;">ऑस्टियोपोरोसिस: उम्र बढ़ने के साथ-साथ बोन डेंसिटी कम होने लगती है, खासकर महिलाओं में यह समस्या ज्यादा देखी जाती है। कैल्शियम और विटामिन डी की कमी से हड्डियां कमजोर हो जाती हैं, जिससे फ्रैक्चर का खतरा बढ़ जाता है। रोजाना धूप में समय बिताना, दूध और कैल्शियम युक्त आहार लेना इस समस्या से बचाव में मदद करता है।</p>
<p style="text-align:justify;">फैटी लिवर: लिवर और किडनी की सेहत भी इस उम्र में बेहद महत्वपूर्ण होती है। जो न लोग ज्यादा तैलीय खाना खाते हैं या शारीरिक रूप से सक्रिय नहीं है। उनमें किडनी से जुड़ी समस्याएं भी धीरे-धीरे बढ़ सकती हैं, जिनका शुरुआती चरण में पता नहीं चलता। इसलिए डॉक्टर समय-समय पर लिवर फंक्शन और किडनी टेस्ट कराने की सलाह देते हैं, ताकि किसी भी समस्या को शुरुआत में ही रोका जा सके। Health News</p>
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                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
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                <pubDate>Thu, 09 Apr 2026 15:33:40 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>Ayurveda Health Tips: इन दिनों होते हैं सबसे ज्यादा सर्दी-जुकाम? जानें बचने का सही तरीका व हेल्थ टिप्स</title>
                                    <description><![CDATA[Ayurveda Tips in Falgun Month: नई दिल्ली। ऋतु परिवर्तन के साथ केवल तापमान ही नहीं बदलता, बल्कि शरीर की आंतरिक प्रवृत्तियों में भी परिवर्तन होता है। 2 फरवरी से आरंभ हुआ फाल्गुन मास उल्लास, उत्सव और प्रकृति के नवोन्मेष का प्रतीक माना जाता है। चारों ओर पीली सरसों की लहराती फसल और मध्यम तापमान वातावरण […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/home-and-family/are-colds-and-flu-the-most-common-these-days-learn-the-right-way-to-prevent-them-and-health-tips/article-81262"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-02/falgun-month-health-tips.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Ayurveda Tips in Falgun Month: नई दिल्ली। ऋतु परिवर्तन के साथ केवल तापमान ही नहीं बदलता, बल्कि शरीर की आंतरिक प्रवृत्तियों में भी परिवर्तन होता है। 2 फरवरी से आरंभ हुआ फाल्गुन मास उल्लास, उत्सव और प्रकृति के नवोन्मेष का प्रतीक माना जाता है। चारों ओर पीली सरसों की लहराती फसल और मध्यम तापमान वातावरण को सुखद बनाते हैं, किंतु यही समय स्वास्थ्य की दृष्टि से सावधानी का भी है। Ayurveda Health Tips</p>
<p style="text-align:justify;">दिन में हल्की गर्मी और रात्रि में शीतलता रहने से शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता प्रभावित हो सकती है। सर्दी, जुकाम और मौसमी संक्रमण इस अवधि में तीव्र गति से फैलते हैं। आयुर्वेद के अनुसार इस काल में पित्त का प्रभाव बढ़ता है तथा कफ का क्षय होने लगता है, जिससे पाचन शक्ति अपेक्षाकृत मंद पड़ सकती है। अतः आहार में संतुलन अत्यंत आवश्यक हो जाता है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">फाल्गुन मास में किन पदार्थों से परहेज करें? | Ayurveda Health Tips</h3>
<p style="text-align:justify;">चना का सीमित या त्यागयुक्त सेवन – परंपरानुसार होली के समय भुने हुए चने और गेहूं की बालियों का सेवन किया जाता है, किंतु आयुर्वेद में चने को गुरु (भारी) माना गया है। इस ऋतु में पाचन अग्नि मंद होने से चना गैस, कब्ज या अपच उत्पन्न कर सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">बासी एवं तामसिक भोजन – आध्यात्मिक दृष्टि से भी फाल्गुन मास महत्वपूर्ण है, क्योंकि इस अवधि में Maha Shivaratri का पर्व आता है। अतः ताजे, सात्विक और सुपाच्य भोजन को वरीयता देना हितकारी माना गया है। अत्यधिक तले-भुने एवं मसालेदार पदार्थों से बचना चाहिए, क्योंकि वे पित्त वृद्धि को और बढ़ा सकते हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">फाल्गुन में क्या खाएं? Ayurveda Health Tips</h3>
<ul>
<li style="text-align:justify;">बेर – यह फल शरीर को शीतलता प्रदान करता है और पाचन में सहायक है।</li>
<li style="text-align:justify;">अंगूर – अंगूर रक्त शुद्धि और ऊर्जा वृद्धि में उपयोगी माने जाते हैं।</li>
<li style="text-align:justify;">हल्के, सुपाच्य एवं मौसमी फल-सब्जियां।</li>
<li style="text-align:justify;">प्रातःकाल शीघ्र उठकर व्यायाम तथा सूर्यप्रकाश का सेवन शरीर को सुदृढ़ बनाता है।</li>
<li style="text-align:justify;">ऋतु के अनुरूप आहार अपनाने से बिना औषधि के भी स्वास्थ्य संतुलित रखा जा सकता है। जीवनशैली में साधारण परिवर्तन—जैसे समय पर भोजन, पर्याप्त जल सेवन और नियमित व्यायाम—शरीर को आंतरिक शक्ति प्रदान करते हैं।</li>
</ul>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>घर परिवार</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 14 Feb 2026 12:37:23 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Health Tips: सुबह बासी मुंह नीम की पत्तियां खाने से दूर होती हैं कई बीमारियां, बढ़ता है रोग प्रतिरोधक क्षमता</title>
                                    <description><![CDATA[Health Tips:  अनु सैनी। भारत में आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति हजारों वर्षों से लोगों की सेहत का ख्याल रखती आई है। इसी परंपरा में नीम (Azadirachta indica) एक ऐसा औषधीय पेड़ माना जाता है, जिसकी पत्तियों, छाल, फूल और बीज सभी का उपयोग स्वास्थ्य लाभ के लिए किया जाता है। आयुर्वेदाचार्यों और आधुनिक शोध दोनों में […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/eating-neem-leaves-on-an-empty-stomach-in-the-morning-helps-ward-off-many-diseases-and-boosts-immunity/article-77630"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2025-11/health-tips.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>Health Tips:  अनु सैनी।</strong> भारत में आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति हजारों वर्षों से लोगों की सेहत का ख्याल रखती आई है। इसी परंपरा में नीम (Azadirachta indica) एक ऐसा औषधीय पेड़ माना जाता है, जिसकी पत्तियों, छाल, फूल और बीज सभी का उपयोग स्वास्थ्य लाभ के लिए किया जाता है। आयुर्वेदाचार्यों और आधुनिक शोध दोनों में यह प्रमाणित हो चुका है कि सुबह बासी मुंह यानी उठते ही बिना कुछ खाए-पिए नीम की 4-5 ताजी पत्तियां चबाकर खाने से शरीर को कई लाभ मिलते हैं।</p>
<h4 style="text-align:justify;">1. शरीर की प्राकृतिक सफाई और डिटॉक्स | Health Tips</h4>
<p style="text-align:justify;">सुबह बासी मुंह नीम की पत्तियां खाने से शरीर में रातभर जमा हुए विषैले तत्व बाहर निकलने लगते हैं। नीम में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट और एंटीबैक्टीरियल गुण शरीर की आंतरिक सफाई करते हैं। इससे रक्त शुद्ध होता है और चेहरे पर निखार आता है।</p>
<h4 style="text-align:justify;">2. रोग प्रतिरोधक क्षमता में बढ़ोतरी</h4>
<p style="text-align:justify;">नीम की पत्तियों में एंटीसेप्टिक और एंटीवायरल गुण पाए जाते हैं, जो शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली (Immune System) को मजबूत करते हैं। नियमित सेवन से मौसम बदलने पर होने वाले सर्दी-जुकाम और वायरल इंफेक्शन की संभावना कम हो जाती है।</p>
<h4 style="text-align:justify;">3. दांत और मसूड़ों की सेहत के लिए लाभकारी</h4>
<p style="text-align:justify;">पुराने समय में लोग नीम की दातुन का इस्तेमाल करते थे। सुबह बासी मुंह नीम की पत्तियां चबाने से मुंह के हानिकारक बैक्टीरिया खत्म होते हैं, मसूड़े मजबूत होते हैं और सांसों की दुर्गंध दूर होती है। यह पायरिया जैसी दंत समस्याओं को भी रोकने में मदद करता है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">4. त्वचा रोगों में रामबाण</h3>
<p style="text-align:justify;">नीम की पत्तियां त्वचा से जुड़ी बीमारियों में भी कारगर हैं। यह मुंहासे, दाद, खुजली और एक्जिमा जैसी समस्याओं में राहत देती हैं। सुबह इसका सेवन करने से खून साफ होता है, जिससे त्वचा पर चमक आती है और फोड़े-फुंसियां नहीं निकलतीं।</p>
<h4 style="text-align:justify;">5. पाचन तंत्र को दुरुस्त करने में सहायक</h4>
<p style="text-align:justify;">नीम की पत्तियों में मौजूद कड़वे तत्व पाचन रसों के स्राव को बढ़ाते हैं, जिससे भोजन सही तरीके से पचता है। यह कब्ज, गैस और एसिडिटी जैसी समस्याओं को दूर करने में मदद करता है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">6. डायबिटीज नियंत्रण में मददगार</h3>
<p style="text-align:justify;">वैज्ञानिक शोध में पाया गया है कि नीम का सेवन ब्लड शुगर लेवल को नियंत्रित करने में सहायक हो सकता है। सुबह बासी मुंह नीम की पत्तियां खाने से शरीर में शुगर का स्तर संतुलित रहता है, जिससे डायबिटीज के मरीजों को लाभ हो सकता है।</p>
<h4 style="text-align:justify;">7. लिवर और किडनी की सेहत के लिए फायदेमंद</h4>
<p style="text-align:justify;">नीम शरीर के डिटॉक्सिफिकेशन में मदद करता है, जिससे लिवर और किडनी पर दबाव कम होता है। यह अंगों को स्वस्थ रखने में सहायक होता है और लंबे समय तक उनके कार्य को सही बनाए रखता है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">8. मलेरिया और अन्य संक्रमणों से बचाव</h3>
<p style="text-align:justify;">नीम में एंटी-मलेरियल गुण भी पाए जाते हैं। पुराने समय में मलेरिया से बचाव के लिए लोग नीम की पत्तियां या नीम का पानी पीते थे। नियमित सेवन से कई प्रकार के संक्रमणों का खतरा कम हो सकता है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">9. वजन घटाने में मददगार</h3>
<p style="text-align:justify;">नीम की पत्तियां शरीर में मेटाबॉलिज्म को तेज करती हैं, जिससे फैट बर्निंग प्रक्रिया बेहतर होती है। सुबह इसका सेवन करने से भूख नियंत्रित रहती है और वजन घटाने में मदद मिलती है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">10. हार्मोनल बैलेंस में सहायक</h3>
<p style="text-align:justify;">विशेष रूप से महिलाओं के लिए, नीम का सेवन हार्मोनल संतुलन बनाए रखने में सहायक हो सकता है। यह मासिक धर्म बंधी समस्याओं में भी राहत दे सकता है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">कैसे करें सेवन</h3>
<p style="text-align:justify;">सुबह उठते ही बिना ब्रश किए, 4-5 ताजी और साफ नीम की पत्तियां तोड़ लें।<br />
इन्हें अच्छी तरह चबाकर खाएं और फिर एक गिलास गुनगुना पानी पी लें।<br />
स्वाद में कड़वाहट जरूर होगी, लेकिन स्वास्थ्य लाभ इसे अपनाने लायक बनाते हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">सावधानियां</h3>
<p style="text-align:justify;">गर्भवती महिलाएं और छोटे बच्चे नीम की पत्तियों का सेवन करने से पहले डॉक्टर से सलाह लें।<br />
अत्यधिक मात्रा में सेवन करने से उल्टी या पेट में गड़बड़ी हो सकती है, इसलिए सीमित मात्रा में ही खाएं।<br />
विशेषज्ञ की राय<br />
आयुर्वेदाचार्य डॉ. संजय कुमार के अनुसार, “नीम प्रकृति का अनमोल तोहफा है। यह न केवल कई रोगों से बचाता है बल्कि शरीर को अंदर से मजबूत करता है। यदि इसे रोजमर्रा की जिंदगी में सही मात्रा में शामिल किया जाए तो लंबे समय तक दवाइयों की जरूरत नहीं पड़ती।” सुबह बासी मुंह नीम की पत्तियां चबाकर खाने की आदत स्वास्थ्य के लिए बेहद लाभकारी है। यह परंपरा सिर्फ बुजुर्गों की नसीहत नहीं, बल्कि आधुनिक विज्ञान और आयुर्वेद दोनों द्वारा प्रमाणित एक सरल और प्रभावी घरेलू नुस्खा है। थोड़ी कड़वाहट को सहन कर यदि आप इसे अपनाते हैं, तो लंबे समय तक स्वस्थ और रोगमुक्त जीवन जी सकते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>नोट:- </strong>इस आर्टिकल में बताई गई विधि, तरीकों और दावों को केवल सुझाव के रूप में लें, सच कहूं इनकी पुष्टि नहीं करता है। इस तरह की किसी भी उपचार दवा या डाइट और सुझाव पर अमल करने से पहले अपने किसी संबंधी एक्सपर्ट या डॉक्टर से सलाह जरूर लें।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 02 Nov 2025 13:00:14 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>Health Tips: सेहत का राज छिपा है आपके बर्तनों में मिट्टी से लेकर सोने तक, जानिए कौन से बर्तन हैं सबसे फायदेमंद</title>
                                    <description><![CDATA[Health Tips:  अनु सैनी बर्तनों का चयन सिर्फ दिखावे के लिए नहीं, बल्कि हमारी सेहत से भी गहराई से जुड़ा होता है। विशेषज्ञों का मानना है कि किस धातु के बर्तन में खाना पकाया या खाया जा रहा है, इसका सीधा असर शरीर पर पड़ता है। मिट्टी, तांबा, पीतल और कांसे के बर्तन न केवल […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/the-secret-to-health-lies-in-your-utensils-from-clay-to-gold/article-76873"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2025-10/health-tips.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Health Tips:  अनु सैनी बर्तनों का चयन सिर्फ दिखावे के लिए नहीं, बल्कि हमारी सेहत से भी गहराई से जुड़ा होता है। विशेषज्ञों का मानना है कि किस धातु के बर्तन में खाना पकाया या खाया जा रहा है, इसका सीधा असर शरीर पर पड़ता है। मिट्टी, तांबा, पीतल और कांसे के बर्तन न केवल भोजन के स्वाद को बढ़ाते हैं, बल्कि सेहत के लिए भी बेहद लाभकारी होते हैं।</p>
<h4 style="text-align:justify;">मुरादाबाद – पीतल नगरी की पहचान | Health Tips</h4>
<p style="text-align:justify;">उत्तर प्रदेश का मुरादाबाद शहर अपनी पीतल कला के लिए पूरी दुनिया में जाना जाता है। यहां तांबा, कांसा और पीतल के आकर्षक बर्तन बनाए जाते हैं। विशेषज्ञ बताते हैं कि इन धातुओं से बने बर्तन शरीर को आवश्यक मिनरल्स प्रदान करते हैं और भोजन में पोषक तत्वों की कमी नहीं होने देते। हालांकि, खट्टे या अम्लीय खाद्य पदार्थ (जैसे नींबू या टमाटर) इन बर्तनों में नहीं पकाने चाहिए, क्योंकि ये धातुओं के साथ प्रतिक्रिया कर हानिकारक हो सकते हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">तांबा, पीतल और कांसा – शरीर के लिए अमृत समान</h3>
<p style="text-align:justify;">मुरादाबाद के कारोबारी मोहम्मद फरमान के अनुसार, स्टील, एल्यूमिनियम और प्लास्टिक के बर्तनों का उपयोग शरीर को धीरे-धीरे नुकसान पहुंचाता है। इन बर्तनों से निकलने वाले रसायन दिल की बीमारी, ब्लड प्रेशर और खून की अशुद्धि जैसी समस्याएं पैदा कर सकते हैं। वहीं, तांबे, पीतल और कांसे के बर्तनों में खाना खाने से शरीर को प्राकृतिक मिनरल्स मिलते हैं, जो रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में मदद करते हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">मिट्टी के बर्तनों के फायदे</h3>
<p style="text-align:justify;">एक्सपर्ट डॉ. रवि आर्या का कहना है कि मिट्टी के बर्तन सबसे प्राकृतिक और सेहतमंद विकल्प हैं। इनमें पकाया गया खाना न केवल स्वादिष्ट होता है बल्कि पोषक तत्व भी पूरी तरह सुरक्षित रहते हैं। मिट्टी की प्राकृतिक ठंडक भोजन के तापमान को नियंत्रित रखती है और पाचन को बेहतर बनाती है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">सोना, चांदी और लोहा भी हैं लाभकारी</h3>
<p style="text-align:justify;">प्राचीन आयुर्वेद में सोने, चांदी, कांसे और लोहे के बर्तनों का उल्लेख भी मिलता है।<br />
चांदी के बर्तन पाचन को दुरुस्त रखते हैं और रोगों से बचाते हैं।<br />
कांसे के बर्तन शरीर के दोषों को संतुलित करते हैं।<br />
लोहे के बर्तन से बने भोजन में आयरन की मात्रा बढ़ जाती है।<br />
सोने के बर्तन शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में मदद करते हैं।<br />
आज जब बाजार में आधुनिक डिज़ाइन वाले स्टील और प्लास्टिक के बर्तन छा गए हैं, तब भी मिट्टी, तांबा, कांसा और पीतल जैसे पारंपरिक बर्तन स्वास्थ्य की दृष्टि से सर्वोत्तम हैं। यदि आप भी अपनी दिनचर्या में धीरे-धीरे इन धातु या मिट्टी के बर्तनों का इस्तेमाल बढ़ाएं, तो यह आपकी सेहत के लिए एक स्वाभाविक और दीर्घकालिक निवेश साबित होगा।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 14 Oct 2025 11:38:41 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अपनी उम्र से छोटा दिखना है, तो रोज करें ये काम, चेहरे पर आने वाली झुर्रियां हो जाएगी खत्म</title>
                                    <description><![CDATA[Health Tips: कुछ लोग अपनी उम्र बताते हैं तो विश्वास ही नहीं होता। उनका स्वास्थ्य, और चेहरे की चमक उन्हें अपनी उम्र से बहुत कम दिखाती है। जब ऐसे लोगों की जीवन शैली का अध्ययन किया गया तो उनमें कुछ समान बातें पाई गईं। शोधकर्ताओं ने लगभग 10 वर्ष तक ऐसे लोगों की जीवन शैली […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/if-you-want-to-look-younger-than-your-age-do-this-every-day-and-the-wrinkles-on-your-face-will-disappear/article-76030"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2025-09/health-tips.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Health Tips: कुछ लोग अपनी उम्र बताते हैं तो विश्वास ही नहीं होता। उनका स्वास्थ्य, और चेहरे की चमक उन्हें अपनी उम्र से बहुत कम दिखाती है। जब ऐसे लोगों की जीवन शैली का अध्ययन किया गया तो उनमें कुछ समान बातें पाई गईं। शोधकर्ताओं ने लगभग 10 वर्ष तक ऐसे लोगों की जीवन शैली का अध्ययन किया। इन लोगों में लगभग निम्न विशेषताएं थीं-</p>
<p><a href="http://10.0.0.122:1245/vaccines-are-essential-for-protecting-your-childs-health-learn-when-to-administer-each-vaccine-see-the-full-list/">Vaccination Schedule for Baby: बच्चे की सेहत को सुरक्षित रखने के लिए जरूरी हैं टीके, जानें कब कौन सा टीका लगता है, देखिए पूरी लिस्ट</a></p>
<ul style="text-align:justify;">
<li style="text-align:justify;">ऐसे लोग हर आयु वर्ग के लोगों से मित्रता करते हैं।</li>
<li style="text-align:justify;">ऐसे लोग बाहर समय बिताना अधिक पसंद करते हैं और प्राय: शारीरिक व्यायाम के शौकीन होेते हैं।</li>
<li style="text-align:justify;">ऐसे लोग गहरी नींद सोते हैं और सुबह तरोताजÞा उठते हैं।</li>
<li style="text-align:justify;">ऐसे लोग सीधे बैठते और चलते हैं।</li>
<li style="text-align:justify;">उन्हें प्राय: यात्रा करने का काफी शौक होता है।</li>
<li style="text-align:justify;">ऐसे लोगों का रक्तचाप प्राय: सामान्य या उससे कम होता है।</li>
<li style="text-align:justify;">ऐसे लोग टेलीविजÞन देखने जैसे आसान कार्यों की अपेक्षा पढ़ने जैसे कठिन मानसिक कार्य करना पसंद करते हैं। प्राय: ऐसे लोगों के मां बाप की आयु भी लंबी ही होती है।</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>व्यायाम:</strong> युवा दिखने हेतु नियमित व्यायाम सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण गतिविधि है। इससे न केवल आपका शरीर चुस्त व युवा बनता है बल्कि मस्तिष्क के कार्य करने की शक्ति भी बढ़ती है। नियमित व्यायाम करने वाले लोग जीवन के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण रखते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">यदि आप शारीरिक दृष्टि से सक्रि य नहीं हैं तो आप पहले से अधिक मात्रा में और अधिक गति से सैर करना प्रारंभ करें। लगभग 20-30 मिनट की तेज सैर से आपकी शारीरिक क्षमता बढ़ती है। यदि इसके अतिरिक्त अपने घर या कार्य-स्थल के आस-पास कोई शारीरिक गतिविधि चुन सकें तो बेहतर होगा।</p>
<p style="text-align:justify;">नियमित व्यायाम को अपने जीवन का एक अंग बना लें जिसे आपने सम्पूर्ण जीवन निभाना है। आप नृत्य, ऐरोबिक्स, तैरना, चलना या दौड़ना, अपनी क्षमतानुसार कुछ भी चुन सकते हैं और यह सब आप के लिए लाभदायक है। नियमित व्यायाम से न केवल कैलोरी खर्च होती है बल्कि शरीर की पाचन क्रि या भी घंटों तेज बनी रहती है। इसके अतिरिक्त भूख भी दबती है और हमारे शरीर में चर्बी की मात्रा कम होकर मांसपेशियां बढ़ती हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">भोजन: युवा दिखने वालों में एक विशेषता यह भी थी कि वे भोजन में विभिन्नता बनाए रखने की ओर अधिक ध्यान देते थे क्योंकि डाइटिंग करने से जीवन के तनावों में वृद्धि होती है और भोजन में विविधता से कुपोषण की संभावना समाप्त हो जाती है। इनके भोजन की विशेषताओं के आधार पर निम्न निष्कर्ष निकाले गए।</p>
<ul>
<li style="text-align:justify;">अपने भोजन में 60 प्रतिशत भाग दालें व अनाज खाईए।</li>
<li style="text-align:justify;">दिन में कम से कम पांच बार फल व सब्जियां खाइए। 15 से 20 प्रतिशत भाग प्रोटीन होनी चाहिए।</li>
<li style="text-align:justify;">एक बार में केवल इतना ही खाइए जिससे आपकी भूख संतुष्ट हो जाए। अच्छी तरह चबा कर खाएं और ज्यों ही संतुष्टि हो, खाना बंद कर दें।</li>
<li style="text-align:justify;">भोजन में चीनी व नमक की मात्रा कम से कम रखें।</li>
<li style="text-align:justify;">विटामिन सी वाले फल व सब्जियां आदि अधिक खाएं।</li>
<li style="text-align:justify;">सिगरेट, काफी व शराब आदि नशे शरीर को बहुत हानि पहुंचाते हैं। इसलिए इनसे परहेज करें।</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>मानसिक शक्ति:</strong> मानसिक शक्ति के विकास के लिए अपने दिमाग का प्रयोग नियमित रूप से करते रहे। पुस्तकें व समाचार-पत्र नियमित पढ़ें। टेलीविजÞन कम देखें क्योंकि यह एक ऐसा कार्य है जिसमें दिमाग का कम प्रयोग होता है। नियमित संगीत सुनना भी मानसिक शक्ति के विकास में सहायक होता है। यह याद रखें कि आपका युवा दिखना आपकी आयु पर नहीं बल्कि आपकी गतिविधियों पर निर्भर करता है।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 22 Sep 2025 12:26:17 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बारिश के मौसम में दही और छाछ लेना चाहिए या नहीं, जानें एक्सपर्ट की राय</title>
                                    <description><![CDATA[Curd or buttermilk:बरसात के मौसम में दही खाना चाहिए या नहीं, इस बात को लेकर अक्सर लोग कन्फ्यूजन में रहते हैं। दरअसल कुछ लोगों का मानना है कि मानसून में दही नहीं खाना चाहिए, जबकि कुछ लोग इसके पोषण मूल्यों के कारण इसे आहार में शामिल करने की सलाह देते हैं। जानकारी के लिए बता […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/whether-you-should-take-yogurt-and-buttermilk-in-the-rainy-season-know-the-experts-opinion/article-75584"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2025-09/curd-or-buttermilk.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Curd or buttermilk:बरसात के मौसम में दही खाना चाहिए या नहीं, इस बात को लेकर अक्सर लोग कन्फ्यूजन में रहते हैं। दरअसल कुछ लोगों का मानना है कि मानसून में दही नहीं खाना चाहिए, जबकि कुछ लोग इसके पोषण मूल्यों के कारण इसे आहार में शामिल करने की सलाह देते हैं। जानकारी के लिए बता दें कि बारिश के मौसम में संक्रमण या सर्दी खांसी का खतरा ज्यादा रहता है। इसलिए आयुर्वेद का मानना है कि ऐसे मौसम में खानपान पर विषेश ध्यान देना चाहिए और सोच-समझकर खानपान पर विशेष ध्यान देना चाहिए। मगर क्या यह बात दही पर भी लागू होती है। आपने कई लोगों से सुना भी होगा कि बरसात में दही नहीं खाना चाहिए और कुछ कहते हैं खाना चाहिए चलिए जानते हैं आखिर सही क्या है:-</p>
<p style="text-align:justify;">दरअसल मानसून सीजन के आते ही हमें गर्मियों से राहत मिल जाती है मानसून में गरमा गरम पकोड़े, आरामदायक जगह और चाय की ललक हर किसी को उठती है। वहीं मानसून सीजन में दही या छाछ दोनों में से कौन बेहतर है किसे खाने से ज्यादा फायदा मिलता है इस पर भी बहस छिड़ जाती है वैसे तो दही और छाछ दोनों के अपने-अपने गुण हंै, लेकिन इस मौसम में अपने स्वास्थ्य और रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने के लिए आपको किसे चुनना चाहिए। आइए जानते हैं इस बारे में भी……</p>
<p style="text-align:justify;">दही: एक्सपर्ट का मानना है की दही जिसे योगर्ट के नाम से भी जाना जाता है। यह एक तरह का डेयरी उत्पाद है। इसे दूध को जीवित बैक्टीरिया के साथ फॉर्मेट करके बनाया जाता है। इसके कारण यह एक प्रोबायोटिक्स का समृद्ध सोर्स बनाता है, जो आपके इंटेस्टाइन के हेल्थ को काफी फायदा पहुंचाता है। वहीं दही में मौजूद प्रोबायोटिक्स शरीर की प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया को बढ़ाते हैं, जो आमतौर पर बारिश के मौसम से जुड़े संक्रमण को रोकने में मदद करते हैं। दही इंटेस्टाइन में विकास को बढ़ावा देता है, जो डाइजेस्टिव डिसआॅर्डर को ठीक कर के मल त्यागने में आसानी करता है। कब्ज और दस्त जैसे डाइजेस्टिव डिसआॅर्डर को कम कर सकता है इसके अलावा या शरीर के तापमान को एनिमी मदद करता है और गर्मी से संबंधी परेशानी से राहत देता है।</p>
<p style="text-align:justify;"><a href="http://10.0.0.122:1245/good-news-land-rates-in-haryana-will-touch-the-sky-know-the-big-reason/#google_vignette">Haryana Railway News: अच्छी खबर, हरियाणा में जमीनों के रेट छूएंगे आसमान, जानें ये बड़ी वजह</a></p>
<p style="text-align:justify;">छाछ: छाछ एक तरह का ट्रेडिशनल इंडियन पेय है जो दही को पानी के साथ मथ कर बनाया जाता है। इसका टेंगी टेस्ट काफी अच्छा लगता है और यह खाने के साथ पीने में तो और भी ज्यादा स्वादिष्ट लगता है। मानसून में हाइड्रेशन में सहायता करता है, पसीने के जरिए खोए इलेक्ट्रोलाइट्स की भरपाई करता है और डिहाइड्रेशन को रोकने में मदद करता है। छाछ में मौजूद प्रोबायोटिक्स स्वस्थ पाचन को बढ़ावा देते हैं। छाछ अपच को कम करने और एसिडिटी और सूजन से राहत देते हैं। हल्का और आसानी से पचने वाली ड्रिंक है जो संवेदनशील पेट वाले लोगों के लिए काफी उपयुक्त है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">दही और छाछ | Curd or buttermilk</h3>
<p style="text-align:justify;">दरअसल दही और छाछ दोनों के गुण बराबर होते हैं। इन दोनों के गुणों के बारे में जानने के बाद यह बिल्कुल साफ हो जाता है कि मानसून के दौरान अच्छे स्वास्थ्य को बनाए रखने के लिए दही और छाछ दोनों ही फायदेमंद हैं। जहां दही लाभकारी प्रोबायोटिक्स प्रदान करता है प्रतिरक्षा को बढ़ाता है और पाचन में सहायता करता है, तो वहीं छाछ हाइड्रेशन और जरूरी पोषक तत्व प्रदान करता है। आप इसका फायदा पाने के लिए मानसून आहार में दोनों चीजों को शामिल कर सकते हैं।</p>
<h4 style="text-align:justify;">दही के फायदे</h4>
<p style="text-align:justify;">1.दही हमारे पाचन तंत्र को सही बनाए रखने में बहुत ही कारगार सिद्ध होती है। जानकारी के लिए बता दें कि रात को दही नहीं खाना चाहिए।<br />
2.दही में सुपाच्य प्रोटीन लाभकारी जीवाणु होते हैं, जो क्षुधा (भूख) बढ़ाने में सहायता करते हैं।<br />
3.दही का स्वास्थ्य के साथ साथ सौंदर्य निखार में भी महत्वपूर्ण स्थान है। चेहरे की त्वचा और बालों पर दही लगाने से काफी लाभ मिलता है। दही चेहरे, गर्दन व बाजू आदि के सौंदर्य को निखारता है।<br />
4.दही बालों को पोषण देने में भी बहुत सहायक है यह सिर से डैंड्रफ को दूर करता है। चेहरे, गर्दन व बाजू आदि के सौंदर्य को भी निखारता है।<br />
5.​नीद ना आने से परेशान रहने वाले लोगों को दही व छाछ का सेवन करना चाहिए।<br />
6.​दही में बेसन मिलाकर लगाने से त्वचा में निखार आता है और मुंहासे भी दूर होते हैं।<br />
7.​दही में शहद मिलाकर चाटने से छोटे बच्चों के दांत आसानी से निकल आते हैं।</p>
<h4 style="text-align:justify;">छाछ के फायदे</h4>
<p style="text-align:justify;">1.​छाछ से कैल्शियम भरपूर होता है जो हड्डियों के लिए फायदेमंद होता है छाछ का सेवन करने से हड्डियां मजबूत होती है और हड्डियों से जुड़ी परेशानियां भी दूर होती हैं।<br />
2.छाछ श्याम पोटेशियम और मैग्नीशियम से भरपूर होता है, जो हाई ब्लड प्रेशर वाले मरीजों के लिए फायदेमंद होता है। इसका सेवन करने से ब्लड प्रेशर कंट्रोल में रहता है।<br />
3.​अगर आप निमित्त रूप से छाछ का सेवन करते हैं, तो इससे शरीर में जमे विषात्क अर्थ पदार्थ बाहर निकलते हैं, और शरीर डिटॉक्स होता है जिससे आप कई गंभीर बीमारियों से सुरक्षित रहते हैं। शरीर से टॉथ्सिन पदार्थ (वेस्त पदार्थ) प्राकृतिक रूप से बाहर निकलते है।<br />
4.​हाई कोलेस्ट्रॉल की समस्या होने पर छाछ का सेवन फायदेमंद होता है। क्योंकि इसमें मौजूद तत्व कोलेस्ट्रॉल को कंट्रोल करने में मदद करते हैं। जिससे दिल से जुड़ी बीमारियों का खतरा कम रहता है। लेकिन इसका सीमित मात्रा में ही सेवन करना चाहिए।<br />
5.​अगर आप अपने बढ़ते वजन की समस्या से परेशान हैं, तो आप छाछ का सेवन करना चाहिए। क्योंकि इसमें मौजूद पोषक तत्व वजन घटाने में भी सहायक होते हैं।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 10 Sep 2025 12:13:03 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Health Tips: रात में बार-बार प्यास लगना: कहीं किसी गंभीर बीमारी का संकेत तो नहीं?</title>
                                    <description><![CDATA[Health Tips: अनु सैनी। कई बार हम इसे आम आदत मानकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन अगर आपको रात में बार-बार प्यास लगती है और आप नींद से उठकर पानी पीते हैं, तो यह किसी छुपी हुई बीमारी का संकेत हो सकता है। इस समस्या को मेडिकल भाषा में नॉक्टूरिया (Nocturia) या पॉलिडिप्सिया (Polydipsia) कहा […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/feeling-thirsty-frequently-at-night-is-it-a-sign-of-some-serious-illness/article-74460"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2025-08/health-tips.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>Health Tips: अनु सैनी।</strong> कई बार हम इसे आम आदत मानकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन अगर आपको रात में बार-बार प्यास लगती है और आप नींद से उठकर पानी पीते हैं, तो यह किसी छुपी हुई बीमारी का संकेत हो सकता है। इस समस्या को मेडिकल भाषा में नॉक्टूरिया (Nocturia) या पॉलिडिप्सिया (Polydipsia) कहा जाता है। आइए जानते हैं कि आखिर क्यों होता है ऐसा और इसके पीछे क्या कारण हो सकते हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">क्यों लगती है रात में बार-बार प्यास? <strong>Health Tips</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">रात के समय जरूरत से ज़्यादा प्यास लगना और बार-बार पानी पीने की जरूरत महसूस होना आमतौर पर सामान्य आदत नहीं होती। विशेषज्ञों के अनुसार, यह डिहाइड्रेशन, डायबिटीज, किडनी रोग या हार्मोनल असंतुलन का संकेत हो सकता है। अगर ये समस्या लगातार बनी रहती है, तो इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए।</p>
<h3 style="text-align:justify;">इन बीमारियों से हो सकता है कनेक्शन | <strong>Health Tips</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">1. डायबिटीज मेलिटस (Diabetes Mellitus)<br />
जब शरीर में ब्लड शुगर का स्तर बढ़ जाता है तो वह अतिरिक्त शुगर को पेशाब के जरिए बाहर निकालने की कोशिश करता है। इससे बार-बार पेशाब आता है और शरीर डिहाइड्रेट हो जाता है, जिससे बार-बार प्यास लगती है। यह टाइप 2 डायबिटीज का मुख्य लक्षण हो सकता है।<br />
2. डायबिटीज इन्सिपिडस (Diabetes Insipidus)<br />
यह एक दुर्लभ हार्मोनल बीमारी है जो तब होती है जब शरीर पर्याप्त एंटी-डाययूरेटिक हार्मोन (ADH) नहीं बना पाता। इससे किडनी पानी को रोकने में असमर्थ हो जाती है, और परिणामस्वरूप बार-बार पेशाब आता है और प्यास अधिक लगती है।<br />
3. किडनी से जुड़ी समस्याएं<br />
यदि किडनी सही से कार्य नहीं कर रही हो, तो शरीर में पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स का संतुलन बिगड़ जाता है। क्रोनिक किडनी डिजीज के मरीजों को रात में ज्यादा प्यास और बार-बार पेशाब की शिकायत हो सकती है। इस स्थिति में समय रहते जांच करवाना जरूरी होता है।<br />
4. स्लीप एपनिया (Sleep Apnea)<br />
यह एक नींद से जुड़ी बीमारी है जिसमें सोते समय सांस बार-बार रुकती है। इस कारण मुंह सूख जाता है और प्यास लगती है। यह समस्या खर्राटों, थकान और रात में बार-बार नींद खुलने जैसी परेशानियों से जुड़ी होती है।</p>
<h4 style="text-align:justify;">कब सतर्क हो जाएं? <strong>Health Tips</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">अगर रात में दो या उससे ज्यादा बार पानी पीने के लिए उठना पड़ रहा है।<br />
बार-बार पेशाब की जरूरत महसूस हो रही है।<br />
मुंह हमेशा सूखा महसूस होता है।<br />
थकान, चक्कर या अत्यधिक भूख लगने जैसे लक्षण भी साथ में हैं।<br />
क्या करें इस समस्या से बचने के लिए?<br />
1. ब्लड शुगर की जांच कराएं, अगर डायबिटीज का शक हो।<br />
2. किडनी फंक्शन टेस्ट कराएं, खासकर अगर बार-बार पेशाब आ रहा हो।<br />
3. स्लीप स्टडी कराएं, अगर रात में नींद में सांस रुकती है या खर्राटे आते हैं।<br />
4. दिनभर पर्याप्त पानी पिएं, ताकि डिहाइड्रेशन की संभावना कम हो।<br />
5. रात में अधिक नमक या मीठा न लें, यह भी प्यास बढ़ा सकता है।<br />
रात में बार-बार प्यास लगना केवल एक आदत नहीं, बल्कि शरीर की एक चेतावनी हो सकती है। यदि यह समस्या लंबे समय तक बनी रहती है तो डॉक्टर से संपर्क कर जांच कराना जरूरी है। समय रहते बीमारी का पता चल जाने पर इलाज संभव है और स्वास्थ्य पर कोई गंभीर असर नहीं पड़ता। अपनी नींद और स्वास्थ्य को नजरअंदाज न करें – सतर्क रहें, सुरक्षित रहें।</p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/national/feeling-thirsty-frequently-at-night-is-it-a-sign-of-some-serious-illness/article-74460</link>
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                <pubDate>Sun, 10 Aug 2025 12:09:30 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Health Tips: सुबह-सुबह खाली पेट खाएं आसानी से मिलने वाले इस पौधे की 5-6 पत्तियां, आसपास नहीं फटकेंगी बीमारियां</title>
                                    <description><![CDATA[Health Tips: अक्सर सभी लोग तुलसी की चाय पीते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि तुलसी की पत्तियों को चबाना आपकी सेहत के लिए कितना फायदेमंद साबित हो सकता हैं दरअसल एक हेल्थ एक्सपर्ट के मुताबित तुलसी की पत्तियों को चबाने से आपकी ओवरआॅल हेल्थ को काफी हद तक इम्प्रूव किया जा सकता है, […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/health/eat-5-6-leaves-of-this-easily-available-plant-on-an-empty-stomach-in-the-morning-diseases-will-not-come-near-you/article-73478"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2025-07/health-tips.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Health Tips: अक्सर सभी लोग तुलसी की चाय पीते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि तुलसी की पत्तियों को चबाना आपकी सेहत के लिए कितना फायदेमंद साबित हो सकता हैं दरअसल एक हेल्थ एक्सपर्ट के मुताबित तुलसी की पत्तियों को चबाने से आपकी ओवरआॅल हेल्थ को काफी हद तक इम्प्रूव किया जा सकता है, तुलसी की पत्तियों से मिलने वाले गजब के फायदों के बारे में जब आप जानोंगे, तो हैरान हो जाओगे और अपनी डेली डाइट में भी इन्हें शामिल भी कर लोंगे, तो आइए जानते हैं कि तुलसी की पत्तियों को सेहत के लिए वरदान क्यों माना जाता हैं?</p>
<p><a href="http://10.0.0.122:1245/does-a-snake-enter-your-house-again-and-again-so-do-these-things-immediately-snakes-get-irritated-by-these/">Snake: बरसात के दिन चल रहे हैं…बार-बार घर में घुस आता है सांप? तो… झटपट करें ये काम, इनसे चिढ़ते हैं सर्प</a></p>
<h3 style="text-align:justify;">तुलसी को डाइट में शामिल करने का सही तरीका | Health Tips</h3>
<p style="text-align:justify;">हर रोज सुबह-सुबह तुलसी की 4 से 5 पत्तियों को चबाना चाहिए, आपको लगभग एक महीने तक इस नियम को फॉलो करना है और आपको खुद-ब-खुद पॉजिटिव असर महसूस होने लगेगा, तुलसी की पत्तियों का सेवन कर आप सर्दी, जुकाम और फ्लू जैसे इंफेक्शन्स से खुद को बचा सकते हैं, तुलसी की पत्तियां आपके इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाने के साथ-साथ आपको कई गंभीर और जानलेवा बीमारियों से बचाने में भी मददगार साबित हो सकती हैं।</p>
<h4 style="text-align:justify;">तुलसी से मिलेंगे फायदे ही फायदे</h4>
<p style="text-align:justify;">अगर आप अपने ब्लड शुगर लेवल को कंट्रोल करना चाहते हैं तो तुलसी की पत्तियों को चबाना शुरू कर दीजिए, इसके अलावा तुलसी की पत्तियां आपकी हार्ट हेल्थ के लिए भी काफी ज्यादा फायदेमंद साबित हो सकती हैं, तुलसी की पत्तियों को रेगुलरली चबाने से आप दिल से जुड़ी जानलेवा बीमारियों के खतरे को कम कर सकते हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">तुलसी की पत्तियों में पाए जाने वाले तत्व</h3>
<p style="text-align:justify;">आपकी जानकारी के लिए बता दें कि तुलसी की पत्तियों में विटामिन के, पोटैशियम, जिंक, मैग्नीशियम और एंटीआॅक्सीडेंट्स की अच्छी खासी मात्रा पाई जाती है हेल्थ एक्सपर्ट्स के मुताबित तुलसी की पत्तियों में पाए जाने वाले ये सभी तत्व आपकी ओवरआॅल हेल्थ को काफी हद तक इम्प्रूव कर सकते हैं।</p>
<p><strong>सावधानी:</strong> यह लेख सामान्य जानकारी के लिए है, और इसे किसी भी चिकित्सा सलाह के रूप में नहीं लिया जाना चाहिए। किसी भी स्वास्थ्य समस्या के लिए अपने डॉक्टर से संपर्क करें।</p>
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                                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 16 Jul 2025 12:53:12 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Health Tips: एक अनोखा पत्ता, जो भोजन को स्वाद भी देता है और शरीर को आरोग्य भी</title>
                                    <description><![CDATA[Health Tips: हमारी भारतीय रसोई में कुछ ऐसी पारंपरिक चीजें शामिल हैं, जो न सिर्फ स्वाद बढ़ाती हैं, बल्कि शरीर को भी संजीवनी शक्ति देती हैं। ऐसी ही एक खास चीज है- मीठा नीम, जिसे आमतौर पर करी पत्ता के नाम से जाना जाता है। नाम भले ही छोटा हो, पर इसका योगदान भारतीय खानपान […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/curry-leaves-which-give-taste-to-food-and-also-give-health-to-the-body/article-72487"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2025-06/health-tips.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Health Tips: हमारी भारतीय रसोई में कुछ ऐसी पारंपरिक चीजें शामिल हैं, जो न सिर्फ स्वाद बढ़ाती हैं, बल्कि शरीर को भी संजीवनी शक्ति देती हैं। ऐसी ही एक खास चीज है- मीठा नीम, जिसे आमतौर पर करी पत्ता के नाम से जाना जाता है। नाम भले ही छोटा हो, पर इसका योगदान भारतीय खानपान और स्वास्थ्य दोनों में बहुत बड़ा है। यह एक ऐसा पौधा है, जिसकी हर पत्ती औषधीय गुणों से भरपूर है और स्वाद में भी बेहतरीन।</p>
<h3 style="text-align:justify;">स्वाद में कोमल, गुणों में प्रबल</h3>
<p style="text-align:justify;">मीठा नीम का वैज्ञानिक नाम मुराया कोएनिजी है। इसका स्वरूप नीम के पत्तों से मिलता-जुलता है, लेकिन इसका स्वाद नीम की तरह कड़वा नहीं बल्कि सौम्य होता है। यही कारण है कि इसे ‘मीठा नीम’ कहा जाता है। इसके पत्तों को भोजन में तड़का लगाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है, विशेषकर दक्षिण भारतीय व्यंजनों में। इडली, डोसा, सांभर, उपमा- किसी भी डिश में करी पत्ता पड़ते ही उसकी सुगंध और स्वाद दोनों में जादू भर जाता है। यह पौधा भारत और श्रीलंका में विशेष रूप से पाया जाता है और भारत के दक्षिणी राज्यों में तो यह लगभग हर घर में उगाया जाता है। इसकी ऊंचाई लगभग 2 से 4 मीटर तक होती है और इसे बीज या पौधों के जरिए आसानी से बगीचे या गमले में उगाया जा सकता है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">सेहत का प्राकृतिक संरक्षक | Health Tips</h3>
<p style="text-align:justify;">आयुर्वेद में मीठा नीम एक शक्तिशाली औषधि के रूप में जाना जाता है। इसमें मौजूद तत्व जैसे आयरन, कैल्शियम, फास्फोरस, प्रोटीन, विटामिन-बी2, बी6 और बी12 शरीर की पोषण संबंधी जरूरतों को पूरा करते हैं। आयुवेर्दाचार्य डॉ. कुणाल बताते हैं कि करी पत्ते के नियमित सेवन से मधुमेह, उच्च रक्तचाप, अनिद्रा और पाचन संबंधी समस्याओं में राहत मिल सकती है। मीठा नीम पाचन क्रिया को सुचारु बनाता है और इसमें मौजूद फाइबर ब्लड शुगर के स्तर को अचानक बढ़ने से रोकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">एनआईएच (नेशनल इंस्टिट्यूट आॅफ हेल्थ) की रिपोर्ट के मुताबिक, करी पत्ते में एल्कलॉइड, फ्लेवोनोइड और फेनोलिक यौगिक पाए जाते हैं, जो ट्यूमर कोशिकाओं को नष्ट करने की क्षमता रखते हैं। यह हृदय रोगियों के लिए भी बेहद फायदेमंद होता है, क्योंकि यह शरीर में कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड का स्तर कम करता है और दिल की बीमारियों के खतरे को घटाता है। Health Tips</p>
<h3 style="text-align:justify;">कैंसर से लेकर आंखों की सेहत तक</h3>
<p style="text-align:justify;">करी पत्ता सिर्फ आम बीमारियों से ही नहीं, बल्कि गंभीर रोगों जैसे ब्रेस्ट कैंसर और फेफड़ों के कैंसर से भी लड़ने में कारगर माना जाता है। इसके साथ ही यह आंखों की रोशनी के लिए भी लाभदायक है। इसमें मौजूद एंटीआॅक्सीडेंट तत्व आंखों की कोशिकाओं की रक्षा करते हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">भोजन का स्वाद बढ़ाने वाला</h3>
<p style="text-align:justify;">आज जब हम फास्ट फूड और कृत्रिम स्वादों के युग में जी रहे हैं, करी पत्ता जैसे प्राकृतिक और पारंपरिक तत्वों की ओर लौटना बेहद जरूरी हो गया है। यह सिर्फ स्वाद नहीं, बल्कि हमारे पूर्वजों की जीवन शैली और उनके स्वास्थ्य रहस्यों की एक झलक है। मीठा नीम एक ऐसा पत्ता है, जो हमारी थाली को सिर्फ महकाता नहीं, हमारी सेहत को भी मजबूती देता है। मीठा नीम यानी करी पत्ता, भारतीय किचन में छुपा हुआ एक खजाना है, जिसे अगर सही तरीके से अपने भोजन और जीवन में शामिल किया जाए तो यह कई बीमारियों से बचाव के साथ एक बेहतर स्वास्थ्य की ओर कदम बन सकता है। Health Tips</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="Toll Plaza News: इस हाईवे से हटाया जाएगा टोल प्लाजा, फ्री में गुजरेंगे वाहन, सरकार से मिली मंजूरी" href="http://10.0.0.122:1245/approval-has-been-given-to-remove-kherki-daula-toll-plaza-of-gurugram-and-shift-it-to-pachgaon-beyond-manesar/">Toll Plaza News: इस हाईवे से हटाया जाएगा टोल प्लाजा, फ्री में गुजरेंगे वाहन, सरकार से मिली मंजूरी</a></p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 23 Jun 2025 16:12:49 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Health Tips: गर्मी में बच्चों का टिफिन पैक करते हुए न करें ये गलतियां, सेहत पर भारी पड़ सकती है ये भूल</title>
                                    <description><![CDATA[Health Tips: गर्मी के मौसम में बच्चों की सेहत को लेकर माता-पिता को विशेष सतर्कता बरतनी पड़ती है। खासकर जब बात उनके टिफिन बॉक्स की हो, तो थोड़ी-सी लापरवाही भी बच्चों की पाचन क्रिया, ऊर्जा स्तर और संक्रमण के खतरे को बढ़ा सकती है। स्कूल में बच्चे कई घंटे रहते हैं, और यदि टिफिन में […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/do-not-make-mistakes-while-packing-childrens-tiffin-in-summer/article-70029"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2025-04/health-tips-1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Health Tips: गर्मी के मौसम में बच्चों की सेहत को लेकर माता-पिता को विशेष सतर्कता बरतनी पड़ती है। खासकर जब बात उनके टिफिन बॉक्स की हो, तो थोड़ी-सी लापरवाही भी बच्चों की पाचन क्रिया, ऊर्जा स्तर और संक्रमण के खतरे को बढ़ा सकती है। स्कूल में बच्चे कई घंटे रहते हैं, और यदि टिफिन में दिया गया भोजन समय के साथ खराब हो जाए या स्वास्थ्यवर्धक न हो, तो यह उनकी सेहत पर भारी पड़ सकता है। आइए जानते हैं कि गर्मियों में बच्चों का टिफिन पैक करते समय किन गलतियों से बचना चाहिए और क्या-क्या सावधानियां जरूरी हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">भोजन तुरंत पैक न करें | Health Tips</h3>
<p style="text-align:justify;">कई बार ताजा गर्म खाना बनाकर सीधे टिफिन में पैक कर दिया जाता हैं। लेकिन गर्मियों में यह बहुत बड़ी भूल है। गर्म खाना बंद डिब्बे में रखने से भाप अंदर जमा हो जाती है, जिससे बैक्टीरिया पनपने का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। खाना थोड़ा ठंडा होने के बाद ही टिफिन में पैक करें। इससे भोजन की ताजगी बनी रहेगी और बैक्टीरिया का खतरा कम होगा।</p>
<h3 style="text-align:justify;">भारी भोजन से परहेज करें</h3>
<p style="text-align:justify;">गर्मियों में तैलीय, मलाईदार या बहुत भारी भोजन बच्चों की पाचन क्रिया पर बुरा असर डाल सकता है। इनसे पेट में भारीपन, अपच, गैस और दस्त जैसी समस्याएं हो सकती हैं। हल्का, सुपाच्य और पोषक तत्वों से भरपूर खाना जैसे- सादी सब्जी-रोटी, मूंग दाल चीला, पनीर टिक्का या वेज रैप पैक करें। Health Tips</p>
<h3 style="text-align:justify;">कटे फल लंबे समय तक न रखें</h3>
<p style="text-align:justify;">फल सेहत के लिए अच्छे होते हैं, लेकिन गर्मियों में कटे हुए फल जल्दी खराब हो जाते हैं और फूड पॉयजनिंग का कारण बन सकते हैं। यदि फल देने ही हैं, तो उन्हें नींबू या सेंधा नमक लगाकर पैक करें या फल संपूर्ण रूप में दें (जैसे केला या सेब)। बेहतर हो कि बच्चे स्कूल में खुद ही उसे छीलकर खाएं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">प्लास्टिक के डिब्बों से बचें</h3>
<p style="text-align:justify;">गर्मियों में प्लास्टिक के डिब्बों में खाना रखने से टॉक्सिक रसायन निकल सकते हैं, जो भोजन में मिलकर बच्चों की सेहत को नुकसान पहुंचाते हैं। स्टील या बीपीए फ्री डिब्बों का उपयोग करें। ये सुरक्षित होते हैं और भोजन की गुणवत्ता को बनाए रखते हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">हमेशा उबालकर ही ठंडा पानी बोतल में भरें | Health Tips</h3>
<p style="text-align:justify;">गर्मियों में दूषित पानी से संक्रमण का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। स्कूल में टिफिन के साथ दिया गया पानी यदि साफ न हो, तो यह गंभीर बीमारी का कारण बन सकता है। बच्चों को उबालकर ठंडा किया हुआ या फिल्टर्ड पानी बोतल में भरकर दें। चाहें तो उसमें तुलसी या पुदीना डालकर उसे और भी हेल्दी बना सकते हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">फ्रिज की चीजें न दें</h3>
<p style="text-align:justify;">कुछ माताएं रात का बचा हुआ खाना सुबह फ्रिज से निकालकर सीधे टिफिन में रख देती हैं। ऐसा करना बच्चों के स्वास्थ्य के लिए घातक हो सकता है। बचे हुए खाने को अच्छी तरह गर्म करके और फिर ठंडा करके ही टिफिन में रखें।</p>
<h3 style="text-align:justify;">बार-बार एक ही चीज न दें</h3>
<p style="text-align:justify;">अक्सर माता-पिता समय की कमी में रोज-रोज एक जैसी चीजें टिफिन में रखने लगते हैं, जिससे बच्चों को न तो मजा आता है और न ही सभी जरूरी पोषक तत्व मिल पाते हैं। हर दिन कुछ नया और हेल्दी ट्राई करें- जैसे- मिक्स वेज इडली, उपमा, खिचड़ी, ओट्स चिल्ला, स्प्राउट्स सलाद आदि। इससे पोषण भी मिलेगा और रुचि भी बनी रहेगी।</p>
<h3 style="text-align:justify;">डिब्बाबंद जूस से परहेज</h3>
<p style="text-align:justify;">बाजार के मिठाई, चॉकलेट या पैकेज्ड जूस से बच्चे तो खुश हो जाते हैं, लेकिन ये गर्मियों में डिहाइड्रेशन और चीनी से जुड़ी समस्याओं को बढ़ा सकते हैं। इनकी जगह घरेलू नींबू पानी, बेल शरबत या आम पन्ना जैसे हाइड्रेटिंग पेय दें। गर्मी के मौसम में बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर पड़ सकती है, उनके टिफिन को पोषण और सुरक्षा की दृष्टि से भी तैयार करना जरूरी है।                                        –<strong>डॉ. गौरव इन्सांशाह सतनाम जी स्पैशलिटी अस्पताल, सरसा</strong></p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="Haryana: हरियाणा में इन बिजली उपभोक्ताओं पर गिरेगी गाज" href="http://10.0.0.122:1245/these-electricity-consumers-in-haryana-will-be-punished-department-announced/">Haryana: हरियाणा में इन बिजली उपभोक्ताओं पर गिरेगी गाज</a></p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/national/do-not-make-mistakes-while-packing-childrens-tiffin-in-summer/article-70029</link>
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                <pubDate>Wed, 23 Apr 2025 15:33:51 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>Health Tips: बदलते मौसम में बीमारियों से बचने के लिए अपनाएं ये घरेलू उपाय, आप रहोगे स्वस्थ</title>
                                    <description><![CDATA[Health Tips: इम्यूनिटी हमारे शरीर को सभी तरह की बीमारियों से लड़ने के लिए शक्ति प्रदान करती है। इसे रोग प्रतिरोधक क्षमता और प्रतिरक्षा भी कहते हैं। बता दें कि मजबूत इम्यूनिटी न केवल आपको कई शारीरिक समस्याओं से बचाती है, बल्कि संक्रमणों से भी लड़ने में बहुत प्रभावी होती है। बता दें कि अगर […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/follow-these-home-remedies-to-avoid-diseases-in-changing-weather-you-will-remain-healthy/article-69198"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2025-04/health-tips.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Health Tips: इम्यूनिटी हमारे शरीर को सभी तरह की बीमारियों से लड़ने के लिए शक्ति प्रदान करती है। इसे रोग प्रतिरोधक क्षमता और प्रतिरक्षा भी कहते हैं। बता दें कि मजबूत इम्यूनिटी न केवल आपको कई शारीरिक समस्याओं से बचाती है, बल्कि संक्रमणों से भी लड़ने में बहुत प्रभावी होती है। बता दें कि अगर आपकी इम्यूनिटी बहुत अधिक मजबूत है तो आप कैंसर जैसी जानलेवा बीमारियों से भी लड़ सकते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">बदलते मौसम में अगर आप बार बार बीमार पड़ते हैं और अक्सर आपको सर्दी-खांसी या बुखार हो जाता है, तो आपकी इम्यूनिटी बहुत ज्यादा कमजोर है। कमजोर इम्यूनिटी वाले लोगों में संक्रमण और इम्यूनोडेफिशियेंसी विकारों का खतरा बहुत ज्यादा होता है। ऐसे में डॉक्टर भी आपको इम्यूनिटी मजबूत बनाए रखने की सलाह देते हैं। दरअसल अभी जो समय चल रहा है वो बीमारियों का समय चल रहा है। ऐसे में हमारे शरीर को बीमारियों से लड़ने के लिए मजबूत इम्यूनिटी की जरूरत होती है। इम्यूनिटी को स्ट्रांग बनाने के लिए कई तरह की दवाएं मिलतीं हंै, लेकिन कैसा हो जब हम घरेलू उपाय करके प्राकृतिक तरीके से इम्यूनिटी बढ़ा सकते हैं। आइये जानतें हैं इम्यूनिटी बढ़ाने के घरेलू उपाय।<br />
इम्यूनिटी बढ़ाने के उपाय :- Health Tips</p>
<p><a href="http://10.0.0.122:1245/good-news-water-on-the-moon-know-what-else-chandrayaan-mission-discovered/">Chandrayaan News: खुशखबरी, चंद्रमा पर पानी, जानें चंद्रयान मिशन ने और क्या खोजा</a></p>
<p style="text-align:justify;">सबसे पहले इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए हेल्दी लाइफस्टाइल का चुनाव करें। इसके लिए भी इम्यूनिटी बढ़ाने के उपाय निम्नलिखित हैं:- Health Tips<br />
1.स्ट्रेस ना लें<br />
2.प्रोसेस्ड फूड का सेवन कम करें<br />
3.पर्याप्त नींद लें<br />
4.नियमित रूप से एक्सरसाइज करें<br />
5.लो फैट डाइट का सेवन करें<br />
6.वजन को संतुलित करें<br />
7.धूम्रपान और तंबाकू का सेवन ना करें<br />
8.स्वस्थ जीवनशैली अपनाएं<br />
9.विटामिन-सी,डी और आयरन का पर्याप्त मात्रा में सेवन करें</p>
<h4 style="text-align:justify;">इम्यूनिटी बढ़ाने के घरेलू उपाय | Health Tips</h4>
<p style="text-align:justify;">इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए आप घर में मौजूद निम्नलिखित चीजों का इस्तेमाल कर सकते हैं। इससे आपके शरीर की प्रतिरोधक क्षमता मजबूत हो सकती है।</p>
<p style="text-align:justify;">हल्दी: आयुर्वेद में हल्दी का कई तरह के रोगों का इलाज करने के लिए प्रयोग किया जाता है। यह संक्रमण को दूर कर बीमारियों को मिटाने वाली होती है। हल्दी में करक्यूमिन पाया जाता है जो एंटीआॅक्सीडेंट को बढ़ाता है। बता दें कि आप गर्म दूध में हल्दी मिलाकर इसका सेवन करें या भोजन पकाने में हल्दी जरूर डालें।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>स्वस्थ वसा खाएं:</strong> पुरानी सूजन प्रतिरक्षा प्रणाली को कम करती है। जैतून का तेल और ओमेगा -3 में स्वस्थ वसा होती है जो सूजन – रोधी होती है। यह बीमारियों से लड़ने में मदद करते हैं। यह सूजन को कम करके शरीर की प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया को बढ़ाते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>लहसुन:</strong> यह हर घर में पाया जाता है। हर परिवार में खाना बनाने में लहसुन का सबसे अधिक किया जाता है। ठंड के मौसम में लहसुन का सेवन करना बहुत अच्छा माना जाता है। सर्दी जुखाम को ठीक करने के लिए यह सर्वश्रेष्ठ है। यह संक्रमण को शरीर से कोसों दूर रखती है।आप अपने भोजन में लहसुन का प्रयोग कर सकते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>पर्याप्त नींद लें:</strong> अपर्याप्त नींद बीमारी को बढ़ाने वाली होती है। अच्छी नींद लेने से प्राकृतिक प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है। अच्छी नींद के लिए पूरी तरह से अंधेरे कमरे में सोना अच्छा रहता है। और 7 घंटे तक नींद लेकर प्रतिरक्षा प्रणाली बीमारी से बेहतर तरीके से स्वास्थ्य की रक्षा करें।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>खट्टे फल:</strong> खट्टे फलों में विटामिन सी भरपूर मात्रा में पाया जाता है, जो सामान्य सर्दी और फ्लू को ठीक करने में मददगार साबित है। विटामिन सी से भरपूर फलों में शामिल हैं संतरा, नींबू, अंगूर। नियमित रूप से इसका सेवन करें। किसी भी रूप से विटामिन सी का सेवन जरूर करें।</p>
<p style="text-align:justify;">मध्यम व्यायाम करें: ज्यादा समय तक तीव्र व्यायाम करने से प्रतिरक्षा प्रणाली कम हो सकती है। इसमें मध्यम व्यायाम उचित रहता है। नियमित तौर पर मध्यम व्यायाम करना सूजन को कम कर सकता है। इसके साथ ही यह प्रतिरक्षा कोशिकाओं को नियमित रूप से पुन: निर्मित करने में मदद करता है। मध्यम व्यायाम के लिए आप टहलना, तेल चलना, तैराकी करना, साइकिल चलाना इन सबका अभ्यास कर सकते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>पपीता:</strong> पपीते में विटामिन सी की अच्छी मात्रा होती है। यह पाचक एंजाइमों से भरपूर होता है। इससे आंत स्वस्थ रहतीं हैं जो समग्र स्वास्थ्य को बनाए रखने में मदद करती है। पपीते का सेवन इम्यूनिटी बढ़ाने के घरेलू उपायों में से एक है।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>तनाव के स्तर को प्रबंधित करें:</strong> लंबे समय तक तनाव में रहना सूजन का कारण है। तनाव की वजह से प्रतिरक्षा सेल फंक्शन में असंतुलन आ जाता है। तनाव और चिंता से दूर रहना प्रतिरक्षा को मजबूत बनाता है। ध्यान, योग, व्यायाम और अन्य अभ्यासों से तनाव कम किया जा सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>तुलसी:</strong> यह आयुर्वेदिक औषधि के रूप में प्रयोग की जाती है। यह विटामिन सी और जिंक का मुख्य स्रोत है। इसमें एंटी-वायरस, एंटी-फंगल और एंटी-बैक्टीरियल गुण पाए जाते हैं जो विभिन्न संक्रमणों को दूर रखता है। आप कच्ची पत्तियों का भी सेवन कर सकते हैं या अदरक, तुलसी और हल्दी की चाय बना सकते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>अनार:</strong> इम्यूनिटी बढ़ाने के उपाय में अनार भी फायदेमंद है। अनार में विटामिन ए, सी, ई और फोलिक एसिड पाया जाता है। इसमें एंटी-बैक्टीरियल, एंटी-वायरस और एंटी-ट्यूमर गुण होते हैं, जो शरीर को कई बीमारियों से बचाते हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए क्या खाएं | Health Tips</h3>
<p style="text-align:justify;">चटनी: आंवले में विटामिन सी भरपूर मात्रा में पाया जाता है। इसलिए आप सुबह के समय आंवले और नींबू की चटनी का सेवन कर सकते हैं। आप आंवले को कच्चा भी खा सकते हैं। बता दें कि कुछ लोग इसका सेवन शहद के साथ भी करते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">काढ़ा: इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए आप अदरक, तुलसी और दालचीनी का काढ़ा भी पी सकते हैं। इसे और स्वादिष्ट बनाने के लिए आप इसमें नमक या काली मिर्च डालकर भी इसका सेवन कर सकते हैं। यह काढ़ा आपको मौसमी बीमारियों से भी बचाता है।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>मिल्क शेक:</strong> इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए आप ड्राइफ्रूट से बनी मिल्क शेक का भी सेवन कर सकते हैं। बता दें कि छुआरा अपने कई औषधीय गुणों के लिए जाना जाता है। आप छुआरा और बादाम का मिल्क शेक बनाकर भी पी सकते हैं। इसके अलावा आप इन्हें रात भर दूध में भिगोकर रख दें और सुबह खाली पेट इसे खा लें।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>डिस्क्लेमर:</strong> इम्यूनिटी मजबूत करने के लिए किसी भी घरेलू उपाय को अपनाने से पहले उसकी मात्रा के बारे में डॉक्टर से आवश्य सलाह लें। हेल्थ कवरेज के दावों की पूर्ति पॉलिसी के नियमों और शर्तों के आधीन है। प्लान की सुविधाएं, लाभ और कवरेज भिन्न हो सकते हैं। कृपा बताएं गए घरेलू उपाय, नियम और शर्तों को ध्यान से पढ़ें।</p>
<p>नोट: इस लेख में दी गई जानकारी और सूचनाएं केवल सामान्य जानकारी पर आधारित हैं। सच कहूं इनकी पुष्टि नहीं करता है इसलिए इस पर अमल करने से पहले अपने सूचनाएं डॉक्टर से संपर्क जरूर करें।</p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 03 Apr 2025 11:11:43 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>&amp;#8230;बदल गया है मौसम, अपनी सेहत का ऐसे रखें खास ध्यान</title>
                                    <description><![CDATA[बदलते मौसम में अपनी आदतों को बदलकर, खान-पान का रखें ध्यान सर्द मौसम में बढ़ जाती है पाचक अग्रि, संक्रमण से बचाव है जरूरी अपनी दिनचर्या में गिलोय के रस को शामिल करें कुरुक्षेत्र (सच कहूँ/देवीलाल बारना)। Health News: नवंबर के माह में मौसम बदल जाता है। इस समय में गर्मी चली जाती है और […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/change-your-habits-in-the-changing-weather-take-care-of-your-food-and-drink/article-64406"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2024-11/kurukshetra-news.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:justify;">बदलते मौसम में अपनी आदतों को बदलकर, खान-पान का रखें ध्यान</h3>
<ul style="text-align:justify;">
<li>सर्द मौसम में बढ़ जाती है पाचक अग्रि, संक्रमण से बचाव है जरूरी</li>
<li>अपनी दिनचर्या में गिलोय के रस को शामिल करें</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>कुरुक्षेत्र (सच कहूँ/देवीलाल बारना)।</strong> Health News: नवंबर के माह में मौसम बदल जाता है। इस समय में गर्मी चली जाती है और सर्दी शुरू हो जाती है। ऐसे में मौसम में सेहत का ध्यान रखना बहुत जरूरी हो जाता है लेकिन मौसम का प्रभाव कम करने के लिए भी प्रकृति अनेकों चीजें हमें उपहार में दे जाती है। सर्दी के मौसम में क्या करना चाहिए इसके लिए दैनिक सच कहूँ ने बातचीत की आयुर्वेदिक मैडिकल ऑफिसर डॉ. मीनाक्षी ढुल से। डॉ. मीनाक्षी का कहना है कि स्वास्थ्य की दृष्टि से सर्दी का मौसम उचित माना जाता है। इस मौसम में पित्त बनना शुरू हो जाता है और बरसात के मौसम में बढा वात इस मौसम में मध्यम हो जाता है। इसके अलावा पाचन अग्रि भी बढ़ जाती है। लेकिन साथ साथ संक्रमण भी शुरू हो जाता है जिससे कई बीमारियां पनप जाती हैं। लेकिन बढे संक्रमण का ईलाज भी आयुर्वेद में ही है।</p>
<p style="text-align:justify;">डा. मीनाक्षी के अनुसार सर्द ऋतु में सांस व कफ की समस्या बढ़ जाती है। इसके लिए आवश्यक है कि सुबह शाम ज्यादा ठंड में मास्क का प्रयोग करें, क्योंकि कफ का वायरस पानी व मुंह के जरिए जाता है। कम ठंड के दौरान भी गर्म कपड़े पहनें। क्योंकि कई बार हमे ठंड महसूस नही होती और शरीर पर बुरा असर डालती है। गुनगुना पानी ही पिएं। सुबह उठकर गर्म पानी का सेवन करें। ऐसा करने से कफ की दिक्कत कम हो जाती है। कफ के लिए मेथी व अजवायन डालकर उबालना चाहिए जोकि जकड? से बचाएगा व कफ की दिक्कत कम होगी। इस मौसम में खाने में बाजरे का आटा व मेथी का प्रयोग करें, इससे शरीर में फाईबर की मात्रा बढेगी व शरीर एक्टिव रहता है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">हरी सब्जियों का उपहार देती हैं प्रकृति | Health News</h3>
<p style="text-align:justify;">डा. मीनाक्षी ने बताया कि यह मौसम कई नई सब्जियां व फल हमें देती है जोकि स्वास्थ्यवर्धक हैं, जिन्हे शरीर के लिए अमृत माना गया है। इस मौसम में साग, चुलाई, पालक, बथुआ होता है। इन सब्जियों को खाने में शामिल करना चाहिए इससे शरीर में आयरन की मात्रा बढती है व इम्युनिटी बढ़ जाती है। इसके अलावा अमरूद व अन्य फल खाने शुरू कर देने चाहिए। फलों का सेवन करना चाहिए। महंगे फल खाने जरूरी नही है जो भी अपने आस पास फल उपलब्ध हो सकें वे खाने चाहिए। इस मौसम में दूध दही ज्यादा खा सकते हैं क्योंकि पाचन शक्ति बढी होती है। Health News</p>
<h3 style="text-align:justify;">सर्दियों में बढ़ जाता है अर्थराईटिस</h3>
<p style="text-align:justify;">सर्दियों के मौसम में अर्थराईटिस की दिक्कत आम हो जाती है। इस मौसम में सर्दी के कारण शरीर की मुवमेंट कम हो जाती है। ऐसे में खून का सर्कुलेशन कम हो जाता है जिससे सर्कुलेशन हार्ट के आस पास ज्यादा रहता है। ऐसी स्थिति में जहां हार्ट अटैक की समस्या बढ़ जाती है। हाथों व पैरों में खून का सर्कुलेशन कम हो जाता है जिससे सुबह के समय पैरों में जकड़न महसूस होती है। इसलिए आवश्यक है कि इस मौसम में खाली न बैठें बल्कि शरीर को मुव करते रहें। मार्निंग वॉक व एक्सरसाईज जरूर करें। वहीं मच्छरों का प्रकोप बढने से डेंगू भी इस मौसम में बढ जाता है इसलिए आवश्यक है हमें अपनी दिनचर्या में गिलोय के रस को शामिल करें व रोजाना गिलोय का रस पियें।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="Matrushakti Udyamita Yojana: महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए सब्सिडी योजना लागू" href="http://10.0.0.122:1245/subsidy-scheme-implemented-to-make-women-self-reliant/">Matrushakti Udyamita Yojana: महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए सब्सिडी योजना लागू</a></p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>हरियाणा</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>घर परिवार</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 17 Nov 2024 15:46:51 +0530</pubDate>
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