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                <title>Allahabad High Court - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <description>Allahabad High Court RSS Feed</description>
                
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                <title>Lucknow Bulldozer Action: लखनऊ कोर्ट परिसर में चला बुलडोजर, वकीलों के 240 चैंबर और दुकानें ध्वस्त</title>
                                    <description><![CDATA[ उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में रविवार को उस समय तनाव की स्थिति पैदा हो गई, जब लखनऊ नगर निगम ने भारी पुलिस बल की मौजूदगी में जिला अदालत परिसर के बाहर बने कथित अवैध वकीलों के चैंबर और दुकानों पर बुलडोजर कार्रवाई शुरू की। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/bulldozer-destroyed-240-lawyers-chambers-and-shops-in-lucknow-court/article-84988"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-05/lucknow-news.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ (एजेंसी)। </strong>Lucknow Bulldozer Action: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में रविवार को उस समय तनाव की स्थिति पैदा हो गई, जब लखनऊ नगर निगम ने भारी पुलिस बल की मौजूदगी में जिला अदालत परिसर के बाहर बने कथित अवैध वकीलों के चैंबर और दुकानों पर बुलडोजर कार्रवाई शुरू की। यह कार्रवाई इलाहाबाद उच्च न्यायालय के निर्देश पर की गई।</p>
<p style="text-align:justify;">अधिकारियों के मुताबिक, सिविल कोर्ट और जिलाधिकारी कार्यालय के पास बने करीब 240 अवैध चैंबर और दुकानों को अतिक्रमण हटाओ अभियान के तहत ध्वस्त किया गया। कार्रवाई के दौरान बुलडोजर तैनात किए गए और सुरक्षा के लिए पीएसी समेत भारी पुलिस बल मौके पर मौजूद रहा।</p>
<p style="text-align:justify;">बुलडोजर कार्रवाई का वकीलों ने जोरदार विरोध किया। इस दौरान प्रदर्शनकारी अधिवक्ताओं और पुलिसकर्मियों के बीच धक्का-मुक्की और तीखी नोकझोंक भी हुई। मौके पर मौजूद वकील प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए कार्रवाई रोकने की कोशिश करते नजर आए।</p>
<p style="text-align:justify;">इसी बीच एक नाटकीय घटना में एक अधिवक्ता ने विरोध स्वरूप कथित तौर पर आत्महत्या का प्रयास किया। हालांकि, पुलिसकर्मियों ने समय रहते हस्तक्षेप कर उन्हें सुरक्षित बाहर निकाल लिया। इस घटना के बाद मौके पर तनाव और बढ़ गया तथा प्रशासन को अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात करना पड़ा।</p>
<p style="text-align:justify;">कई वकीलों ने आरोप लगाया कि प्रशासन ने बिना उचित सूचना और पुनर्वास व्यवस्था के कार्रवाई की है। प्रदर्शन कर रहे अधिवक्ता एस.पी. सिंह ने कहा कि न तो सही तरीके से नोटिस दिया गया और न ही चैंबरों की पहचान की गई।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा, “मैं ठाकुर हूं, योगी की बिरादरी से हूं। जीवनभर भाजपा को वोट दिया है, लेकिन आज के बाद भाजपा को वोट नहीं देंगे। हमें कोई नोटिस नहीं दिया गया और न ही हमारे चैंबर को चिह्नित किया गया।”</p>
<p style="text-align:justify;">एक अन्य अधिवक्ता ने अनोखे अंदाज में विरोध जताते हुए बुलडोजर कार्रवाई के बीच देशभक्ति गीत गाए और प्रशासन के खिलाफ नाराजगी जाहिर की।</p>
<p style="text-align:justify;">हालांकि पुलिस अधिकारियों का कहना है कि पूरी कार्रवाई अदालत के आदेश और कानूनी प्रक्रिया के तहत की गई। डीसीपी क्राइम कमलेश दीक्षित ने कहा कि अतिक्रमण हटाने के आदेश पहले से थे और नोटिस भी जारी किए जा चुके थे।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा, “हमारे पास अतिक्रमण हटाने के आदेश थे। उसी के तहत कार्रवाई की जा रही है। पहले ही नोटिस दिया जा चुका था और नियमों के अनुसार कार्रवाई हो रही है।”</p>
<p style="text-align:justify;">अधिकारियों के अनुसार, अदालत परिसर के बाहर सार्वजनिक भूमि पर अवैध रूप से बनाए गए इन ढांचों की वजह से इलाके में जाम और अव्यवस्था की स्थिति बन रही थी।</p>
<p style="text-align:justify;">कई घंटों तक क्षेत्र में तनाव बना रहा, हालांकि किसी बड़े घायल होने की सूचना नहीं है। वरिष्ठ प्रशासनिक और पुलिस अधिकारी लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं, जबकि प्रदर्शनकारी वकील कार्रवाई रोकने और प्रशासन के साथ बातचीत की मांग कर रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/2026-05/lucknow-news.jpg" alt="Lucknow News" width="1280" height="720"></img></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 17 May 2026 17:30:57 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sarvesh Kumar]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>Allahabad High Court: श्रीकृष्ण जन्मभूमि केस को लेकर हाईकोर्ट आज करेगा सुनवाई</title>
                                    <description><![CDATA[Shri Krishna Janmabhoomi Case: प्रयागराज। श्रीकृष्ण जन्मभूमि–शाही ईदगाह प्रकरण में शुक्रवार दोपहर 2 बजे से Allahabad High Court में महत्वपूर्ण सुनवाई निर्धारित है। इस दौरान Archaeological Survey of India (एएसआई) द्वारा अपना प्रत्युत्तर प्रस्तुत किए जाने की संभावना है। इसके उपरांत दोनों पक्षों के अधिवक्ता रिपोर्ट के विभिन्न बिंदुओं पर तर्क रख सकते हैं। Allahabad […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/the-high-court-will-hear-the-shri-krishna-janmabhoomi-case-today/article-81504"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-02/allahabad-highcourt.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Shri Krishna Janmabhoomi Case: प्रयागराज। श्रीकृष्ण जन्मभूमि–शाही ईदगाह प्रकरण में शुक्रवार दोपहर 2 बजे से Allahabad High Court में महत्वपूर्ण सुनवाई निर्धारित है। इस दौरान Archaeological Survey of India (एएसआई) द्वारा अपना प्रत्युत्तर प्रस्तुत किए जाने की संभावना है। इसके उपरांत दोनों पक्षों के अधिवक्ता रिपोर्ट के विभिन्न बिंदुओं पर तर्क रख सकते हैं। Allahabad High Court</p>
<p style="text-align:justify;">उच्च न्यायालय में वर्तमान में हिंदू पक्ष की अनेक याचिकाएँ विचाराधीन हैं, जिनमें विवादित स्थल के संबंध में स्वामित्व, संरचना और अधिकारों को लेकर दावे किए गए हैं। दूसरी ओर, मस्जिद पक्ष ने दीवानी प्रक्रिया संहिता की धारा 151 के अंतर्गत आवेदन प्रस्तुत कर समेकित वादों की कार्यवाही पर रोक लगाने का आग्रह किया है।</p>
<p style="text-align:justify;">इससे पूर्व हुई सुनवाई में न्यायालय ने एएसआई को उत्तर दाखिल करने हेतु समय प्रदान किया था। पक्षकारों की दलीलें सुनने के बाद न्यायालय ने अगली तिथि निर्धारित की थी, ताकि अभिलेखों और तथ्यों के आधार पर आगे की प्रक्रिया स्पष्ट की जा सके।</p>
<p style="text-align:justify;">मथुरा स्थित यह स्थल लंबे समय से ऐतिहासिक और धार्मिक दृष्टि से चर्चा का विषय रहा है। हिंदू पक्ष का मत है कि वर्तमान संरचना से पूर्व यहाँ प्राचीन मंदिर विद्यमान था। वहीं मुस्लिम पक्ष मस्जिद की वैधानिक स्थिति और ऐतिहासिक निरंतरता का पक्ष प्रस्तुत करता है। Allahabad High Court</p>
<p style="text-align:justify;">प्रकरण में भूमि स्वामित्व, पूजा-अधिकार, ऐतिहासिक साक्ष्य तथा पुरातात्विक परीक्षण जैसे अनेक प्रश्न शामिल हैं। न्यायालय में लंबित याचिकाओं के माध्यम से दोनों पक्ष अपने-अपने दावों के समर्थन में प्रमाण प्रस्तुत कर रहे हैं। आगामी सुनवाई में एएसआई की रिपोर्ट और उस पर होने वाली बहस से मामले की दिशा पर विशेष प्रभाव पड़ सकता है।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 20 Feb 2026 12:05:16 +0530</pubDate>
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                <title>Allahabad High Court: इलाहाबाद उच्च न्यायालय के फैसले का दीनी रहनुमाओं ने किया स्वागत</title>
                                    <description><![CDATA[कैराना (सच कहूँ न्यूज़)। Allahabad High Court: इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने धार्मिक स्वतंत्रता से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि धार्मिक सभाओं के आयोजन के लिए पूर्व सरकारी अनुमति को अनिवार्य नहीं ठहराया जा सकता। न्यायालय ने कहा कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद-25 के तहत प्रत्येक नागरिक को […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/religious-leaders-welcomed-the-decision-of-the-allahabad-high-court/article-80943"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-02/kairana-news-1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>कैराना (सच कहूँ न्यूज़)।</strong> Allahabad High Court: इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने धार्मिक स्वतंत्रता से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि धार्मिक सभाओं के आयोजन के लिए पूर्व सरकारी अनुमति को अनिवार्य नहीं ठहराया जा सकता। न्यायालय ने कहा कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद-25 के तहत प्रत्येक नागरिक को अपने धर्म का पालन करने और धार्मिक आयोजन करने की पूर्ण स्वतंत्रता प्राप्त है। न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि धार्मिक पूजा-पाठ और सभाएं तब तक पूरी तरह वैध हैं, जब तक वे शांति, सार्वजनिक व्यवस्था और कानून की सीमाओं के भीतर आयोजित की जाएं। Kairana News</p>
<p style="text-align:justify;">केवल आशंकाओं या संदेह के आधार पर धार्मिक गतिविधियों पर रोक लगाना न तो संवैधानिक है और न ही लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप। हालांकि, संवेदनशील परिस्थितियों में प्रशासन को कानून के दायरे में रहते हुए आवश्यक कदम उठाने का अधिकार रहेगा। इस फैसले का दीन एवं सामाजिक संगठनों द्वारा स्वागत किया जा रहा है। कारी मुबीन शाह और कारी मेहरबान ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय को इस साहसिक और दूरदर्शी निर्णय के लिए बधाई देते हुए कहा कि यह फैसला धार्मिक स्वतंत्रता और संवैधानिक मूल्यों की मजबूती का प्रतीक है। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस निर्णय से धार्मिक सौहार्द को बढ़ावा मिलेगा और नागरिकों के मौलिक अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित होगी। Kairana News</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="Delhi Weather Today: दिल्ली-एनसीआर में घने कोहरे से यातायात प्रभावित, एक्यूआई ‘खराब’ श्रेणी में" href="http://10.0.0.122:1245/dense-fog-affect-traffic-in-delhi-ncr/">Delhi Weather Today: दिल्ली-एनसीआर में घने कोहरे से यातायात प्रभावित, एक्यूआई ‘खराब’ श्रेणी में</a></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 03 Feb 2026 18:30:14 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>Allahabad High Court: संभल मस्जिद ध्वस्तीकरण मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट की बड़ी अपडेट</title>
                                    <description><![CDATA[Sambhal Mosque Dispute: प्रयागराज। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने शनिवार को संभल जिले की एक मस्जिद समिति द्वारा दायर तत्काल याचिका को खारिज कर दिया। समिति ने अपनी याचिका में सरकारी भूमि पर निर्मित एक मस्जिद, विवाह भवन और अस्पताल के ध्वस्तीकरण पर रोक लगाने की मांग की थी। Allahabad High Court News न्यायमूर्ति दिनेश पाठक […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/major-update-from-allahabad-high-court-on-sambhal-mosque-demolition-case/article-76515"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2025-10/allahabad-highcourt.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Sambhal Mosque Dispute: प्रयागराज। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने शनिवार को संभल जिले की एक मस्जिद समिति द्वारा दायर तत्काल याचिका को खारिज कर दिया। समिति ने अपनी याचिका में सरकारी भूमि पर निर्मित एक मस्जिद, विवाह भवन और अस्पताल के ध्वस्तीकरण पर रोक लगाने की मांग की थी। Allahabad High Court News</p>
<p style="text-align:justify;">न्यायमूर्ति दिनेश पाठक की एकलपीठ ने इस मामले की सुनवाई करते हुए मस्जिद शरीफ गौसुल वारा रवा बुजुर्ग और उसके मुतवल्ली मिंजर द्वारा दायर याचिका को अस्वीकार कर दिया। अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता स्थगन की मांग लेकर संबंधित निचली अदालत का रुख कर सकते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">याचिकाकर्ताओं ने उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता, 2006 की धारा 67 के अंतर्गत 2 सितंबर को पारित उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसके आधार पर प्रशासन ने संबंधित निर्माणों को अवैध घोषित किया था। उनका कहना था कि जिस भूमि पर विवाह भवन बना था, वह तालाब की भूमि है, लेकिन 2 अक्टूबर यानी गांधी जयंती और दशहरा के दिन ध्वस्तीकरण की कार्यवाही से कानून-व्यवस्था प्रभावित होने की संभावना थी।</p>
<h3>प्रशासन ने पहले ही मस्जिद प्रबंधन को नोटिस जारी करते हुए स्पष्ट किया था</h3>
<p style="text-align:justify;">प्रशासन ने पहले ही मस्जिद प्रबंधन को नोटिस जारी करते हुए यह स्पष्ट किया था कि मस्जिद का एक हिस्सा सरकारी भूमि पर निर्मित है और इसे हटाने के लिए चार दिन की अवधि दी गई थी। समयसीमा पूरी होने से पहले समिति के सदस्यों ने कुछ अतिक्रमित दीवारें स्वयं ही ढहा दी थीं। Allahabad High Court News</p>
<p style="text-align:justify;">बावजूद इसके, दशहरे के दिन संभल प्रशासन ने व्यापक सुरक्षा व्यवस्था के बीच अवैध निर्माणों को हटाने की कार्रवाई की। रवा बुजुर्ग गांव में स्थित मैरिज हॉल को गिराने के दौरान लगभग 200 पुलिसकर्मी और पीएसी के जवान तैनात थे। पूरी प्रक्रिया की निगरानी के लिए ड्रोन कैमरों का भी उपयोग किया गया।</p>
<p style="text-align:justify;">पिछली सुनवाई में उच्च न्यायालय ने मस्जिद समिति को भूमि अभिलेख और स्वामित्व से संबंधित दस्तावेज प्रस्तुत करने का निर्देश दिया था। याचिका में राज्य सरकार, जिलाधिकारी संभल, पुलिस अधीक्षक, अतिरिक्त जिलाधिकारी, तहसीलदार और ग्राम सभा को पक्षकार बनाया गया था। इस मामले में मस्जिद समिति की ओर से अधिवक्ता अरविंद कुमार त्रिपाठी और शशांक श्री त्रिपाठी ने पक्ष रखा, जबकि राज्य सरकार की ओर से मुख्य स्थायी अधिवक्ता जे.एन. मौर्य और अधिवक्ता आशीष मोहन श्रीवास्तव उपस्थित हुए। Allahabad High Court News</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 04 Oct 2025 16:03:48 +0530</pubDate>
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                <title>Rahul Gandhi Citizenship Case: राहुल गांधी है ब्रिटिश नागरिकता? नागरिकता को लेकर हाईकोर्ट आज करेगा सुनवाई!</title>
                                    <description><![CDATA[Rahul Gandhi Citizenship Case: नई दिल्ली, (एजेंसी)। कांग्रेस नेता राहुल गांधी की नागरिकता को लेकर डाली गई जनहित याचिका से राहुल की नागरिकता पर सवाल खड़े हो रहे हैं, जिसको लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) आज गुरुवार को इस पर सुनवाई करेगा। उच्च न्यायालय ने केंद्रीय गृह मंत्रालय के जवाब दाखिल करने के बाद […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/allahabad-high-court-will-hear-rahul-gandhis-citizenship-case-today/article-65477"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2024-12/rahul-gandhi-citizanship.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Rahul Gandhi Citizenship Case: नई दिल्ली, (एजेंसी)। कांग्रेस नेता राहुल गांधी की नागरिकता को लेकर डाली गई जनहित याचिका से राहुल की नागरिकता पर सवाल खड़े हो रहे हैं, जिसको लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) आज गुरुवार को इस पर सुनवाई करेगा। उच्च न्यायालय ने केंद्रीय गृह मंत्रालय के जवाब दाखिल करने के बाद इस मामले को लेकर दायर याचिका पर 19 दिसंबर तक निर्णय लेने को कहा था। Rahul Gandhi Citizenship</p>
<p style="text-align:justify;">न्यायमूर्ति अत्ताउ रहमान मसूदी और न्यायमूर्ति सुभाष विद्यार्थी की पीठ ने एस विग्नेश शिशिर द्वारा दायर याचिका पर यह अंतरिम आदेश पारित किया था, जिन्होंने गांधी की नागरिकता पर सवाल उठाए थे और इस मामले की केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) से जांच की मांग की थी। दावा किया गया कि लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के पास यूनाइटेड किंगडम (यूके) की नागरिकता है। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया है कि ऐसे साक्ष्य मौजूद हैं, जो दर्शाते हैं कि गांधी ब्रिटिश नागरिकता रखते हैं।</p>
<h3>कोई भी व्यक्ति एक साथ दो देशों की नागरिकता नहीं रख सकता</h3>
<p style="text-align:justify;">याचिकाकर्ता ने यह भी दावा किया कि गांधी की दोहरी नागरिकता के बारे में उन्होंने दो बार सक्षम प्राधिकारी को शिकायत भेजी थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं होने पर यह मौजूदा याचिका दाखिल की गई है। इस पर कोर्ट ने याचिकाकर्ता के अभ्यावेदन पर की गई कार्रवाई का ब्यौरा तलब किया था। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 9 के अनुसार, कोई भी व्यक्ति एक साथ भारतीय और किसी अन्य देश की नागरिकता नहीं रख सकता।</p>
<p style="text-align:justify;">भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने भी दिल्ली उच्च न्यायालय में गांधी की नागरिकता को लेकर ऐसी ही याचिका दायर की थी। हालांकि, न्यायालय ने कहा था कि इलाहाबाद उच्च न्यायालय की पीठ के समक्ष दायर याचिकाओं पर स्पष्टता मिलने के बाद वह मामले की सुनवाई करेगा।</p>
<p style="text-align:justify;">याचिका में राहुल गांधी के निर्वाचन को रद्द करने के साथ ही उनके खिलाफ सीबीआई जांच की मांग उठाई गई है। याचिकाकर्ता ने केरल की वायनाड लोकसभा सीट पर हो रहे उपचुनाव को रोकने का भी आग्रह किया था, लेकिन कोर्ट ने अभी इस पर कोई फैसला नहीं दिया है। Rahul Gandhi Citizenship</p>
<p><a title="Delhi Sanjeevani Scheme: ‘‘अब ये बुजुर्ग दिल्ली के किसी भी अस्पताल में करा सकेंगे फ्री इलाज’’" href="http://10.0.0.122:1245/now-these-elderly-people-will-be-able-to-get-free-treatment-in-any-hospital-in-delhi/">Delhi Sanjeevani Scheme: ‘‘अब ये बुजुर्ग दिल्ली के किसी भी अस्पताल में करा सकेंगे फ्री इलाज’’</a></p>
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                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 19 Dec 2024 10:31:40 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>Allahabad High Court : धर्म परिवर्तन ‘तुरंत’ रोका जाए नहीं तो&amp;#8230;, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कही ये बड़ी बात!</title>
                                    <description><![CDATA[इलाहाबाद (एजेंसी)। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कई ग्रामीणों के धर्म परिवर्तन (Religious Conversion) कराने के आरोपी पर टिप्पणी करते हुए कहा कि भारत में धर्म परिवर्तन की बढ़ती संख्या चिंता का विषय है, यदि इसे नहीं रोका गया तो ‘बहुसंख्यक आबादी खुद को अल्पसंख्यक पाएगी’। 2011 में की गई पिछली जनगणना के अनुसार, हिंदू आबादी का […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/allahabad-high-court-said-majority-population-will-be-minority-if/article-59310"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2024-07/allahabad-highcourt.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>इलाहाबाद (एजेंसी)।</strong> इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कई ग्रामीणों के धर्म परिवर्तन (Religious Conversion) कराने के आरोपी पर टिप्पणी करते हुए कहा कि भारत में धर्म परिवर्तन की बढ़ती संख्या चिंता का विषय है, यदि इसे नहीं रोका गया तो ‘बहुसंख्यक आबादी खुद को अल्पसंख्यक पाएगी’। 2011 में की गई पिछली जनगणना के अनुसार, हिंदू आबादी का 79.8 प्रतिशत हिस्सा हैं। Allahabad High Court</p>
<p style="text-align:justify;">इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) ने यह भी कहा कि जिन सभाओं में धर्म परिवर्तन होता है, उन्हें ‘तुरंत’ रोका जाना चाहिए। न्यायमूर्ति रोहित रंजन अग्रवाल ने कई ग्रामीणों के धर्म परिवर्तन में भाग लेने के आरोपी कैलाश को जमानत देने से इनकार करते हुए यह टिप्पणी की। न्यायमूर्ति अग्रवाल ने कहा, ‘‘प्रचार’ शब्द का अर्थ है प्रचार करना, लेकिन इसका मतलब किसी व्यक्ति को उसके धर्म से दूसरे धर्म में परिवर्तित करना नहीं है। इस मामले में, आवेदक के खिलाफ सूचनाकर्ता द्वारा गंभीर आरोप लगाए गए हैं कि उसके भाई को कई अन्य लोगों के साथ नई दिल्ली में एक सभा में भाग लेने के लिए उनके गांव से ले जाया गया और ईसाई धर्म में परिवर्तित कर दिया गया। सूचनाकर्ता का भाई कभी वापस नहीं लौटा।’’</p>
<h3>कैलाश कल्याण की आड़ में धर्म परिवर्तित करता था | Allahabad High Court</h3>
<p style="text-align:justify;">कैलाश पर आरोप है कि वह कल्याण की आड़ में ग्रामीणों को समारोहों में ले जाता था और उन्हें ईसाई धर्म में परिवर्तित करता था। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने चेतावनी दी, ‘‘यदि धार्मिक सभाओं में धर्मांतरण की वर्तमान प्रवृत्ति को नहीं रोका गया तो बहुसंख्यक आबादी खुद को अल्पसंख्यक पाएगी।’’</p>
<p style="text-align:justify;">न्यायालय ने अपने आदेश में कहा कि जांच अधिकारी द्वारा दर्ज किए गए बयानों से पता चला है कि कैलाश लोगों को नई दिल्ली में धार्मिक सभाओं में शामिल होने के लिए ले जा रहा था, जहाँ उन्हें ईसाई धर्म में परिवर्तित किया जा रहा था। न्यायालय ने कहा, ‘‘यह कई मामलों में इस न्यायालय के संज्ञान में आया है कि अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति जातियों और आर्थिक रूप से गरीब व्यक्तियों सहित अन्य जातियों के लोगों को ईसाई धर्म में परिवर्तित करने की गैरकानूनी गतिविधि पूरे उत्तर प्रदेश में बड़े पैमाने पर की जा रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">‘‘2011 की जनगणना के आंकड़ों से पता चलता है कि हिंदू आबादी का 79.8 प्रतिशत, मुस्लिम 14.2 प्रतिशत, ईसाई 2.3 प्रतिशत और सिख 1.7 प्रतिशत हैं। प्रथम सूचना रिपोर्ट (एफआईआर) के अनुसार, कैलाश कथित तौर पर मुखबिर रामकली प्रजापति के भाई रामफल को एक सामाजिक समारोह में भाग लेने के बहाने दिल्ली ले गया। उनके गांव के कई अन्य लोगों को भी ऐसे आयोजनों में लाया गया, जहाँ उन्हें कथित तौर पर ईसाई धर्म में परिवर्तित कर दिया गया।</p>
<p style="text-align:justify;">कैलाश ने रामकली को आश्वासन दिया था कि उसके मानसिक रूप से बीमार भाई का इलाज किया जाएगा और एक सप्ताह के भीतर वह वापस आ जाएगा। जब ऐसा नहीं हुआ, तो रामकली ने कैलाश से पूछताछ की, लेकिन उसे असंतोषजनक जवाब मिला। नतीजतन, उसने सहायता के लिए पुलिस से संपर्क किया। Allahabad High Court</p>
<p><a title="Who is tha next T20 captain? यह बड़ा खिलाड़ी होगा भारत का अगला टी20 कप्तान!" href="http://10.0.0.122:1245/indias-next-t20-captain-hardik-pandya/">Who is tha next T20 captain? यह बड़ा खिलाड़ी होगा भारत का अगला टी20 कप्तान!</a></p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 02 Jul 2024 15:34:19 +0530</pubDate>
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