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                <title>Trees - Sach Kahoon Hindi</title>
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                            <item>
                <title>सीएम फ्लाइंग की जांच में खुलासा, रोडवेज वर्कशॉप में काटे 86 पेड़</title>
                                    <description><![CDATA[पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के प्रतिबंध के बावजूद हरियाणा रोडवेज की हिसार वर्कशॉप में बड़े पैमाने पर पेड़ों की अवैध कटाई का मामला सामने आया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/cm-flyings-investigation-revealed-that-86-trees-were-cut-in/article-86956"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-06/hisar-news1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>हिसार (सच कहूँ/मुकेश)। </strong>Hisar News: पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के प्रतिबंध के बावजूद हरियाणा रोडवेज की हिसार वर्कशॉप में बड़े पैमाने पर पेड़ों की अवैध कटाई का मामला सामने आया है। मुख्यमंत्री उड़न दस्ता (सीएम फ्लाइंग) की छापेमारी में 86 पेड़ों के कटे हुए ठूंठ और 141 उखड़े हुए पौधे पाए गए। प्रारंभिक जांच में काटी गई लकड़ी का कोई रिकॉर्ड नहीं मिलने से सरकारी संपत्ति के दुरुपयोग और राजस्व हानि की आशंका जताई गई है।</p>
<p style="text-align:justify;">सीएम फ्लाइंग हिसार रेंज की प्रभारी सुनैना ने बताया कि गुप्त सूचना के आधार पर संयुक्त टीम ने रोडवेज वर्कशॉप में जांच की। निरीक्षण के दौरान 86 पेड़ों की कटाई और 141 नए पौधों को उखाड़े जाने की पुष्टि हुई। जांच में यह भी पाया गया कि काटे गए पेड़ों की लकड़ी का कोई आधिकारिक रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं था और न ही उसकी कीमत सरकारी खाते में जमा कराई गई थी। जांच के दौरान रोडवेज महाप्रबंधक ने बताया कि पेड़ों की कटाई के लिए वन विभाग और चंडीगढ़ स्थित मुख्यालय से अनुमति मांगी गई थी, लेकिन स्वीकृति नहीं मिली। इसके बावजूद निर्माण कार्य कर रही ठेका एजेंसी द्वारा पेड़ों की कटाई कर दी गई।</p>
<h4 style="text-align:justify;">हाईकोर्ट के आदेश की अनदेखी</h4>
<p style="text-align:justify;">सीएम फ्लाइंग प्रभारी ने बताया कि पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के आदेश के अनुसार बिना सक्षम अनुमति के पेड़ों की कटाई पूरी तरह प्रतिबंधित है। मामले की विस्तृत जांच रिपोर्ट तैयार कर उच्च अधिकारियों को भेजी जा रही है। कार्रवाई के दौरान वन विभाग, सीएम फ्लाइंग और पुलिस विभाग की संयुक्त टीम मौजूद रही।</p>
<img src="https://www.sachkahoon.com/media/2026-06/hisar-news1.jpg" alt="Hisar News" width="1280" height="720"></img>
Hisar News: काटे गए पेड़ों की जांच करते हुए मुख्यमंत्री उड़न दस्ता टीम।
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                                                            <category>हरियाणा</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 27 Jun 2026 19:53:43 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sarvesh Kumar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>LONDON में डेरा सच्चा सौदा के अनुयायियों ने लगाए पौधे</title>
                                    <description><![CDATA[समाज भलाई के लिए हर वक्त रहते हैं तैयार Trees लंदन (सच कहूँ न्यूज)। डेरा सच्चा सौदा (DERA SACHA SAUDA) की साध-संगत समाज भलाई कार्यों के लिए हर वक्त तैयार रहती है। चाहे बात किसी की मदद की हो या फिर पर्यावरण स्वच्छता जैसी मुहिम की। शाह सतनाम जी ग्रीन एस वेल्फेयर फोर्स विंग के […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/dera-sacha-sauda-followers-planted-trees-in-london/article-11865"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2019-12/london-dera-sacha-sauda-followers.jpg" alt=""></a><br /><h2>समाज भलाई के लिए हर वक्त रहते हैं तैयार Trees</h2>
<p><strong>लंदन (सच कहूँ न्यूज)।</strong> डेरा सच्चा सौदा <strong>(DERA SACHA SAUDA)</strong> की साध-संगत समाज भलाई कार्यों के लिए हर वक्त तैयार रहती है। चाहे बात किसी की मदद की हो या फिर पर्यावरण स्वच्छता जैसी मुहिम की। शाह सतनाम जी ग्रीन एस वेल्फेयर फोर्स विंग के जांबाज हमेशा आगे रहते हैं। इसी क्रम को आगे बढ़ाते हुए इंगलैंड की साध-संगत ने वॉल स्ट्रीट कॉमन पार्क हैक्ने, लंदन में पौधारोपण <strong>(Trees Plant)</strong> किया। वहीं तीन बड़े पेड़ों को एक जगह से दूसरी जगह स्थानांतरित किया।</p>
<h3>पर्यावण को स्वच्छ वायु की सौगात</h3>
<p>स्थानीय जिम्मेवारों के अनुसार पौधारोपण अभियान का शुभारंभ ‘धन-धन सतगुरु तेरा ही आसरा’ के पवित्र नारे के साथ किया गया। इसके पश्चात साध-संगत ने अलग-अलग स्थानों पर सैकड़ों पौधे रोपित किए। अब ये पौधे स्वच्छ हवा की सौगात देकर पर्यावरण को महकाएंगे। बता दें कि जब तक ये पौधे पेड़ नहीं बन जाते सेवादार इनकी सार संभाल भी स्वयं करते हैं। जब इन सेवादारों से बात की गई तो इन्होंने अपने अनुभव साझा किए। सेवादारों ने बताया कि पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां की पावन प्रेरणा से यह संभव हुआ है। पूज्य गुरु जी ने हमेशा समाज के भले की सीख दी है। इसी के चलते डेरा सच्चा सौदा का हर अनुयायी जरूरतमंदों की मदद के लिए तैयार रहता है। चाहे बात किसी गरीब जरूरतमंद को राशन देने की हो या फिर रक्तदान की। पता चलते ही हम मदद के लिए पहुंचते हैं।</p>
<ul>
<li><strong>सैकड़ों पौधे लगाकर दी धरा को सौगात</strong></li>
<li><strong>पर्यावरण को स्वच्छ कर देंगे जीवनदायिनी ऑक्सीजन<br />
</strong></li>
<li><strong>पूज्य गुरु जी की प्रेरणा से जगा रहे इन्सानियत की अलख</strong></li>
<li><strong>जरूरतमंदों की मदद के लिए हर वक्त रहते हैं तैयार</strong></li>
<li><strong>डेरा सच्चा सौदा चला रहा 134 मानवता भलाई कार्य</strong></li>
</ul>
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<p> </p>
<p> </p>
<p> </p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>विदेश</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 18 Dec 2019 20:56:30 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>वृक्षों को बचाने की सैद्धांतिक जीत, व्यवहारिक हार</title>
                                    <description><![CDATA[मुंबई के आरे में वृक्षों की कटाई रोकने के लिए पहले विद्यार्थियों को हाईकोर्ट जाना पड़ा
युवा पीढ़ी वातावरण को लेकर चिंतित है और उन्होंने साहस भी दिखाया
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/theoretical-victory-of-saving-trees-practical-defeat/article-10690"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2019-10/trees1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">अमेरिका के समुद्र में एक कछुए की मौत पर वहां के वातावरण वैज्ञानिकों में चिंता का माहौल है। कछुए की मौत लोगों द्वारा समुद्र में फैंके गए माईक्रो प्लास्टिक कूड़े को निगलने के कारण हुुई है। एक कछुए ने अमेरिका को हिलाकर रख दिया है लेकिन दूसरी तरफ हमारे देश में वातावरण से सरेआम खिलवाड़ की तरफ कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा। मुंबई के आरे में वृक्षों की कटाई रोकने के लिए पहले विद्यार्थियों को हाईकोर्ट जाना पड़ा, जब वहां बात नहीं बनी तो सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ा। आखिर सुप्रीम कोर्ट ने पेड़ काटने पर रोक लगाकर यथास्थिति बनाए रखने के आदेश दिए।</p>
<p style="text-align:justify;">नि:संदेह सुप्रीम कोर्ट में विद्यार्थियों की जीत तो हुई है लेकिन यह सैद्धांतिक और सांकेतिक जीत है। व्यवहारिक तौर पर विद्यार्थी वृक्ष काटने वाले कुलहाड़े के सामने हार गए हैं। सुप्रीम कोर्ट के आदेश जारी होने तक पेड़ काटे जा चुके थे। सरकार के वकील ने अदालत में कहा कि जितने पेड़ काटने की जरूरत थी उतने काट लिए गए हैं। अगर विकास के लिए पेड़ काटने जरूरी थे तब इस मामले में विद्यार्थियों और अन्य वातावरण प्रेमियों को भरोसे में लिया जा सकता था और काटे जाने वाले वृक्षों की संख्या घटाई जा सकती थी, लेकिन प्रशासन इस बात पर खुश था कि न्यायिक प्रक्रिया के दौरान पेड़ काट लिए जाएंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">विद्यार्थियों की भावना का सम्मान करने की बजाय रात के समय भी पेड़ काटे गए ताकि सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने से पहले-पहले आरे के जंगलों में आरी चला दी जाए। विद्यार्थियों ने वृक्षों को काटकर कोई अपनी जायदाद तो नहीं बनानी थी बल्कि वे मुंबई के लोगों की बेहतरी के लिए अपने खर्च पर संघर्ष करते रहे। भले ही विद्यार्थी व्यवहारिक तौर पर हार गए हैं लेकिन उनकी सोच व बहादुरी की दाद देनी बनती है जिन्होंने वृक्षों के लिए इतना प्यार दिखाया है।</p>
<p style="text-align:justify;">स्वीडन की युवती ग्रेटा थनबर्ग ने संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका को हिलाकर रख दिया था और डोनाल्ड ट्रम्प की की तरफ उसकी घुड़की को पूरे विश्व ने देखा था। यह पहल बेहतर है कि हमारे देश में भी युवा पीढ़ी वातावरण को लेकर चिंतित है और उन्होंने साहस भी दिखाया। सरकारें, राजनेताओं की वातावरण प्रति चुप्पी भयानक नजर आ रहा है। फ्लोरिडा के कछुए की मौत का मातम अभी हमारे देश के नेताओं के जहन को झकझौरने में समर्थ नहीं हुआ तभी तो यहां जंगल समेटे जा रहे हैं।</p>
<p> </p>
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                                            <category>सम्पादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 09 Oct 2019 20:52:36 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>विकास का कुल्हाड़ा और बलि के बकरे ‘पेड़’</title>
                                    <description><![CDATA[विकास के नाम पर या उसकी आड़ में पहली गाज पेड़ों पर गिरती है। ये कोई नयी बात नहीं है। आजादी के बाद से ही देश में विकास का पहला शिकार पेड़ ही बनें। लेकिन ताज्जुब इस बात का है कि आजादी के सात दशक बाद भी हम पर्यावरण अनुकूल विकास माडल विकसित नहीं कर […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/development-ax/article-10660"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2019-10/trees.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">विकास के नाम पर या उसकी आड़ में पहली गाज पेड़ों पर गिरती है। ये कोई नयी बात नहीं है। आजादी के बाद से ही देश में विकास का पहला शिकार पेड़ ही बनें। लेकिन ताज्जुब इस बात का है कि आजादी के सात दशक बाद भी हम पर्यावरण अनुकूल विकास माडल विकसित नहीं कर पाये हैं। इसमें कोई एक सरकार या राजनीतिक दल की बजाए सारा सिस्टम ही दोषी है। पर्यावरण किसी के एजेंडे में नहीं है। चूंकि दुनिया भर में पर्यावरण से जुड़े तमाम मुद्दों की चर्चा होती है, इसलिए पिछले कुछ सालों से हमारे देश में भी राजनीतिक दलों के घोषणा पत्रों में पर्यावरण को दबी-कुचली ही सही जगह मिलने लगी है। देशभर में प्रतिवर्ष विकास के लिए नाम पर, सड़कों के चौड़ीकरण प्रक्रिया में लाखों हरे पेड़ों की बलि दी जा रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">ताजा मामला मुंबई मेट्रो रेल प्रोजेक्ट के लिए ‘आरे’ में पेड़ कटाई का है। बढ़ती आबादी की यातायात की जरूरतें पूरी करने के लिए मेट्रो विस्तार को जरूरी बताया जा रहा है। मान भी लिया कि आबादी के हिसाब से यातायात साधनों का विस्तार होना चाहिए। लेकिन अहम सवाल यह है कि प्रोजेक्ट की शुरूआत में भविष्य में आने वाली दिक्कतों और पर्यावरण संबंधी परेशानियों के बारे में सोचा क्यों नहीं गया। ऐसा भी नहीं है कि ‘आरे’ में पेड़ कटाई कोई पहला मामला हो। देश में आये दिन कहीं न कहीं विकास के नाम पर पेड़ों की हत्या की जाती है। स्थानीय अदालत से मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच जाता है, लेकिन अंत में विकास की भारी भरकम दुहाई देकर पेड़ों की हत्या हो ही जाती है। पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावेडकर ने तो कहा ही है कि दिल्ली मेट्रो रेल प्रोजेक्ट के दौरान पेड़ काटे गये थे। मंत्री का यह भी तर्क है कि काटे के पेड़ों के बदले पांच गुना पेड़ लगाये गये जिससे दिल्ली में हरियाली बढ़ी है। वो अलग बात है कि नये पौधों को बड़ा वृक्ष बनने में दो तीन दशक का वक्त लगेगा।</p>
<p style="text-align:justify;">मायाावती जब पहली बार उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री बनीं तो उन्होंने हजरतगंज क्षेत्र में 13 एकड़ क्षेत्र में हरियाली को उजाड़कर पत्थरों के निर्माण कराए। इसमें 280 पेड़ भी काटे गए जिनमें 200 से ज्यादा पेड़ 30 वर्ष से अधिक पुराने थे। अपने दूसरे और तीसरे कार्यकाल में मायावती सरकार ने गोमतीनगर इलाके में 97 एकड़ क्षेत्र में अम्बेडकर स्मारक, अम्बेडकर स्टेडियम और जेल रोड में 46 एकड़ वाला अन्य स्मारक बनाया जिसके बड़े हिस्से में हरियाली और जंगल था।</p>
<p style="text-align:justify;">इस दौर में 1700 से ज्यादा वृक्ष तथा 50 एकड़ से ज्यादा ग्रीन कवर यानी हरियाली नष्ट की गई। अपने चौथे कार्यकाल में 2007 के बाद तो मायावती ने लखनऊ के पत्थरीकरण की सारी हदें ही पार कर दीं। इस दौर में उन्होंने अपने ही बनाए अम्बेडकर स्टेडियम आदि को डाइनामाइट से ध्वस्त कर उस सारे इलाके में पत्थरों के स्मारक बना दिए। इस प्रक्रिया में 600 से ज्यादा पेड़ कटे और हरियाली को खत्म करके हर ओर पत्थर बिछा दिए। मायावती ने एनजीटी और अदालतों के अनेक प्रतिबंधों के बाद भी लखनऊ में जेल रोड के जंगल वाले जिस 185 एकड़ इलाके में 1075 करोड़ के जिस कांशीराम ईको गार्डन का निर्माण कराया था उसमें वृक्ष भी कांसे और धातुओं के थे।</p>
<p style="text-align:justify;">वर्ष 2003 में सत्ता में आये मुलायम सिंह यादव ने जरूर लखनऊ में 80 एकड़ में लोहिया पार्क के नाम पर एक हरा भरा पार्क बना कर लखनऊ को एक राहत दी, लेकिन उनके पुत्र अखिलेश यादव ने भी मायावती की राह पर चलते हुए लखनऊ की हरियाली को खत्म करने में भरपूर योगदान दिया। अखिलेश ने पहले तो गोमतीनगर में जेपी इंटरनेशनल सेंटर के नाम पर एक स्मारक बनाने के लिए लोहिया पार्क और ताज होटल द्वारा संरक्षित हरियाली के एक बड़े हिस्से को पत्थरों में बदल दिया। इसके बाद आईटी सिटी और बड़े निर्माणों के लिए उन्होने चक गंजरिया क्षेत्र में 800 एकड़ क्षेत्र में हरियाली को पूरी तरह साफ करवा दिया।</p>
<p style="text-align:justify;">एनजीटी की ओर से अनेक बाधाओं के बाद भी अखिलेश सरकार ने इस हरे भरे इलाके में इमारतों का संसार बसा दिया। अखिलेश यादव का गोमती रिवर फ्रंट भी हरियाली और पर्यावरण को हानि पहुंचाने का प्रोजेक्ट बना तो 138 करोड़ के साइकिल ट्रैक के नाम पर भी बड़े पैमाने पर पेड़ों का सफाया हुआ। अखिलेश सरकार ने साइकिल ट्रैक के नाम पर हजारों पेड़ काट डाले। नोएडा-गाजियाबाद में एनजीटी का डंडा चला तो जीडीए को साढ़े तीन किलोमीटर के साइकिल ट्रैक में 12 यूकेलिप्टस के पेड़ काटने पर अगस्त 2015 में नौ लाख रुपया जुर्माना भरना पड़ा था। जनेश्वर मिश्र पार्क बनवाकर अखिलेश ने पर्यावरण संरक्षण का संदेश तो दिया, लेकिन चक गंजरिया क्षेत्र को नष्ट करके उन्होंने पर्यावरण और जैव विविधता को काफी नुकसान पहुंचाया। लखनऊ-सीतापुर राष्ट्रीय राजमार्ग को चौड़ा करने के लिए 8166 पेड़ काटे गए और 1450 पेड़ लखनऊ-बाराबंकी मार्ग के लिए। लखनऊ में सांसद राजनाथ सिंह के ड्रीम प्रोजेक्ट यानी आउटर रिंग रोड के निर्माण में भी बड़ी संख्या में पेड़ कटेंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">यूपी ही नहीं देश भर में विकास का पहला शिकार पेड़ ही बनते हैं। उत्तराखण्ड में तीर्थस्थली हरिद्वार में सड़क चौड़ीकरण के नाम पर सैकड़ों पेड़ों की बलि पिछले दो-तीन सालों में ली गई। टिहरी बांध के विस्थापितों को हरिद्वार जिले में बसाने के लिये ऐथल, एक्कड़ और पथरी क्षेत्र में रेल लाइन के दोनों तरफ की घनी हरियाली और जंगल को काट डाला गया। तीन साल पहले छत्तीसगढ़ में सूरजपुर-मनेन्द्रगढ़ हाइवे-43 के निर्माण हेतु विशालकाय 702 वृक्ष काटने की अनुमति दी गई थी।</p>
<p style="text-align:justify;">छत्तीसगढ़ के ही कोरिया जिले पिछले साल फोरलेन सड़क के लिए लगभग साढ़े 4 हजार पुराने हरे भरे पेड़ों को काटा गया। देशभर में राजमार्ग के नाम पर सड़क को चौड़ा करने के लिए सौ-सौ साल पुराने पीपल, बरगद, आम, जामुन सहित तमाम जातियों के हरे-भरे पेड़ों का नामोनिशान मिटा दिया गया। हद तो यह है कि दस गुने पेड़ लगाने का दावा करने वालों ने इन राष्ट्रीय राजमार्गों पर ‘ग्रीन बेल्ट’ के लिए जगह तक नहीं छोड़ी है। लगातार बढ़ रहे प्रदूषण को दूर करने में पेड़ बड़ी अहम भूमिका निभाते हैं। इसलिए पेड़ों को बचाना सबसे अधिक जरूरी है। यदि हम एक पेड़ काटते हैं तो हम अपने लिए आॅक्सीजन का भंडार कम कर रहे होते हैं। एक बड़ा पेड़ काटकर दूसरा पौधा लगाने पर भी हमें आॅक्सीजन की उतनी मात्रा कई वर्षों तक नहीं मिल पाती है जितनी काटा गया पेड़ दे रहा था। लगाया गया पौधा कई वर्ष बाद पेड़ बनता है। तब जाकर हमें उतनी मात्रा में आॅक्सीजन मिल पाती है।</p>
<p style="text-align:justify;">लखनऊ मेट्रो प्रॉजेक्ट के दौरान ट्रांसपोर्ट नगर डिपो और हजरतगंज तक के रूट में 981 पेड़ काम के आड़े आ रहे थे, लेकिन अनुमति होने के बाद भी इन्हें काटा नहीं गया। मेट्रो अधिकारियों ने इनमें 270 पेड़ जड़ सहित निकालकर दूसरी जगह लगा दिए, जबकि बाकी 711 पेड़ों के लिए जगह-जगह डिजाइन भी बदल दी। मुंबई मेट्रो प्रोजेक्ट में भी ऐसी कार्ययोजना बनानी चाहिए थी जिससे पर्यावरण को कम से कम नुकसान पहुंचता। अगर ये मान भी लिया जाए कि विकास जरूरी है तो भी पर्यावरण की अनदेखी करना कहां की समझदारी है। आज विकास के नाम पर जो विनाश के बीज हम बो रहे हैं वो आने वाले समय में पूरी मानव जाति के लिए विषदायी साबित होंगे।<br />
<strong><em>आशीष वशिष्ठ</em></strong></p>
<p> </p>
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                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>लेख</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 08 Oct 2019 21:00:44 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पेड़ों को बचाने में दिल्ली का उदाहरण</title>
                                    <description><![CDATA[इंफा। ज ब पानी सर से ऊपर निकलने लग जाता है तो दिल्ली की जनता लोक हित के मुद्दों पर एकजुट होकर विरोध प्रदर्शन करने लग जाती है। वर्ष 2011 में मनमोहन सिंह सरकार में व्याप्त भ्रष्टाचार के कारण दिल्ली ने गांधीवादी अन्ना हजारे का साथ दिया जो वर्षों तक स्थानीय भ्रष्टाचार के विरुद्ध महाराष्ट्र में […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/example-of-saving-trees-in-delhi/article-4807"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-07/save-tree.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>इंफा। </strong>ज ब पानी सर से ऊपर निकलने लग जाता है तो दिल्ली की जनता लोक हित के मुद्दों पर एकजुट होकर विरोध प्रदर्शन करने लग जाती है। वर्ष 2011 में मनमोहन सिंह सरकार में व्याप्त भ्रष्टाचार के कारण दिल्ली ने गांधीवादी अन्ना हजारे का साथ दिया जो वर्षों तक स्थानीय भ्रष्टाचार के विरुद्ध महाराष्ट्र में विरोध प्रदर्शन कर रहे थे और वे दिल्ली आए तो उन्हें दिल्ली की जनता का भरपूर समर्थन मिला। उन्होंने दिल्ली में अन्ना आंदोलन किया। वे यहां आमरण-अनशन पर भी बैठे। उन्हें दिल्ली की जनता का भरपूर समर्थन मिला जिसके चलते सरकार को उन्हें यह आश्वासन देने के लिए बाध्य होना पड़ा कि लोकपाल की स्थापना के लिए शीघ्र कानून बनाया जाएगा। किंतु आज भी लोकपाल की स्थापना नहीं हो पायी है और उस आंदोलन से आम आदमी पार्टी का जन्म हुआ जिसकी दिल्ली में सरकार है।</p>
<p style="text-align:justify;">
वर्ष 2012 में जब फिजियोथेरेपी की छात्रा निर्भया के साथ एक बस के कर्मचारियों ने जघन्य दुष्कर्म किया तो दिल्ली की जनता महिला सुरक्षा के लिए एक बार फिर एकजुट हुई और इसके चलते सरकार को दुष्कर्म के विरुद्ध कठोर कानून बनाने के लिए बाध्य होना पड़ा। इस कानून से दुष्कर्म की घटनाओं में कमी नहीं हुई हो किंतु नागरिक समाज के एकजुट होने से संपूर्ण देश में प्रशासन महिलाओं के विरुद्ध अपराधों के मामले में संवेदनशील बना और जनता के दबाव के बाद निर्भया मामले में दोषियों को मृत्यु दंड की सजा सुनाई गयी। अब पुन: दिल्ली की जनता के हित खतरे में हैं क्योंकि दक्षिण दिल्ली की कुछ कालोनी सरोजनी नगर, नेताजी नगर और नौरोजी नगर के तथाकथित पुनर्विकास के नाम पर 14 हजार पेड़ों की कटाई का प्रस्ताव है। किंतु दिल्ली की जनता ने एकजुट होकर इसका भी विरोध किया। दिल्ली के बढ़ते प्रदूषण और तापमान के चलते यह विरोध प्रदर्शन इतना भारी था कि सरकार को अपने प्रस्ताव को वापस लेना पड़ा। न्यायालय और राष्ट्रीय हरित अधिकरण ने पेड़ों की कटाई पर रोक लगा दी। आवास और शहरी विकास मंत्री ने आदेश दिया कि किसी भी पेड़ की कटाई नहीं होगी और इन कालोनियों के पुनर्विकास की योजना इस तरह बनाने के लिए कहा गया कि पेड़ों की कटाई न हो। जब नागरिक समाज एकजुट होता है तो वह शक्तिशाली बन जाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">
हैरानी इस बात पर होती है कि योजनाकार यह कैसे भूल गए कि दिल्ली में प्रदूषण का स्तर बहुत ऊंचा है और उन्होंने 14 हजार पेड़ों की कटाई का सुझाव दे दिया। उसके बाद दिल्ली के वन विभाग ने इन पेड़ों को काटने की अनुमति दे दी। प्राप्त रिपोर्टो के अनुसार पिछले सात वर्षों में दिल्ली के वन विभाग ने 44 हजार से अधिक पेड़ों की कटाई की अनुमति दी और अब फिर इसने 14 हजार पेड़ों की कटाई की अनुमति दे दी थी। वन विभाग के कर्मचारियों का लगता है कि विवेक खो गया है। वन विभाग ने दिल्ली के नागरिकों के स्वास्थ्य और कल्याण तथा दिल्ली के वातवरण के प्रति उदासीनता दर्शायी। यदि वन विभाग को इसी तरह कार्य करने दिया जाए तो वे निकट भविष्य में दिल्ली को रेगिस्तान बना देंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">
दिल्ली में पहले ही प्रदूषण का स्तर बहुत ऊंचा है और यहां पर प्रदूषण का स्तर पीएम 10 है जबकि पीएम 2.5 से अधिक हो सामान्य से अधिक माना जाता है और इतने बडेÞ पैमाने पर पेड़ों की कटाई से प्रदूषण का बढ़ना लाजिमी है। दिल्ली के नागरिक पहले ही इस प्रदूषण की समस्या से जूझ रहे हैं और यदि इतने पेड़ों की कटाई की गयी तो उनके समक्ष स्वास्थ्य संबंधी अनेक समस्याएं पैदा हो जाएंगी। ऐसा लगता है कि न तो सरकारी पर्यावरण संरक्षण एजेंसियां, न ही नौकरशाह और न ही शहरी योजनाकारों को दिल्ली की जनता के कल्याण से कोई लेना-देना है। वे हरियाली के स्थान पर कंक्रीट का जंगल बनाना चाहते हैं। उनका कहना यह है कि पेड़ों की कटाई के स्थान पर क्षतिपूर्ति वनारोपण किया जाएगा। किंतु बडे पेड़ों की भरपाई पौधों से नहीं की जा सकती है। बडेÞ पेड़ ही प्रदूषण रोकने में सहायक होते हैं। इसके अलावा ये गर्मियों में पैदल चलने वालों को छाया भी प्रदान करते हैं। नियमों के अनुसार एक पेड़ की कटाई के बदले 10 पौधे लगाने होते हैं और अक्सर इसके लिए इतनी भूमि नहीं मिल पाती है।</p>
<p style="text-align:justify;">
इसलिए पेड़ पौधे वहीं लगाए जाते हैं जहां भूमि उपलब्ध होती है और इससे उन क्षेत्रों को कोई लाभ नहीं मिल पाता है जहां से पेड़ों की कटाई होती है। प्राधिकारी अक्सर स्थानीय पौधों को नहीं लगाते हैं वे अक्सर सजावटी पौधों को लगाते हैं जिससे पर्यावरण संरक्षण में सहायता नहीं मिलती। क्षतिपूर्ति पौधारोपण वास्तव में जनता के साथ धोखा है। क्षतिपूर्ति पौधारोपण में पौधों की जीवित रहने की दर यदि 30 प्रतिशत रहे तो उसे अच्छा माना जाता है। किन्तु सामान्यतया केवल 10 प्रतिशत पेड़ ही जीवित रह पाते हैं। ट्रीज आॅफ डेल्ही के लेखक प्रदीप किशन के अनुसार क्षतिपूर्ति पौधारोपण की धारणा दोषपूर्ण है। जिन स्थानों पर ऐसा पौधारोपण किया जाता है वहां पर मिट्टी की गुणवत्ता अच्छी नहीं होती है। इसीलिए वे स्थान पेड़ों से खाली होते हैं और एजेंसियों का उद्देश्य केवल लक्ष्य पूरा करना होता है।</p>
<p style="text-align:justify;">
वन विभागों का कार्य वनों और पेड़ों को बचाना है और वे क्षतिपूर्ति पौधारोपण सावधानी से नहीं करते हैं फिर भी वे बडेÞ पैमाने पर पेड़ों की कटाई करते हैं। पेड़ को एक स्थान से उठाकर दूसरे स्थान पर रोपित करने की विधि भी सफल नहीं है और नए स्थान पर अक्सर ऐसे पेड़ जीवित नहीं रह पाते हैं। दक्षिण दिल्ली की कालोनियों में पहले ही कुछ हजार पेडों की कटाई की जा चुकी है फिर भी दिल्ली की जनता की जागरूकता के चलते दिल्ली के पर्यावरण को कुछ हद तक बचा दिया गया है। अब संबंधित मंत्री ने इस मामले को अपने हाथ में ले लिया है और इन कालोनियों की पुनर्विकास परियोजना में व्यापक बदलाव किया जाएगा। इसका श्रेय दिल्ली के नागरिक समाज को जाता है जिसने एकजुट होकर विरोध प्रदर्शन किया और प्राधिकारियों को अपने निर्णय पर पुनर्विचार करने के लिए बाध्य किया।</p>
<p style="text-align:justify;">
देश के अन्य शहरों में यह स्थिति नहीं है क्योंकि वहां का नागरिक समाज स्थानीय प्राधिकारियों के निर्णयों के विरुद्ध एकजुट नहीं हो पाता है। किंतु भोपाल जैसे शहरों में नागरिक समाज के विरोध के कारण सरकार को बिल्डर आधारित शहर विकास योजना 2005 को बदलना पड़ा। इसी तरह 2015 में व्यापक विरोध प्रदर्शनों के बाद सरकार को स्मार्ट सिटी के स्थान को बदलना पड़ा क्योंकि इसके विकास में हजारों पेड़ काटे जाने थे। देश के शहरी क्षेत्रों को दिल्ली से सबक लेना चाहिए और उन्हें विकास के बजाय अपने स्वास्थ्य और कल्याण को प्राथमिकता देनी चाहिए। इसलिए जब कभी विकास और स्वास्थ्य में टकराव हो तो जनता को अपने हितों के लिए खड़ा होना चाहिए। विकास और पर्यावरण के बीच कोई समझौता नहीं होना चाहिए।</p>
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                                                            <category>लेख</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 13 Jul 2018 02:20:28 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>नजदीकी क्षेत्रों में बड़े स्तर पर हो रही वृक्षों की कटाई</title>
                                    <description><![CDATA[रोड पर वृक्षों की कटाई बिना किसी रोक टोक के जारी संगरूर/चीमा मंडी। सुनाम से चीमा रोड पर पहले ही सड़क बनाते समय पर हजारों की संख्या में वृक्षों की कटाई हो चुकी है परंतु अब सड़क बन कर तैयार भी हो गई है व कटे वृक्षों की भरपाई के लिए नये पेड़ लगाने का […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/punjab/deforestation-of-large-trees-in-nearby-areas/article-4711"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-07/trees-cutting.jpg" alt=""></a><br /><h1 style="text-align:center;">रोड पर वृक्षों की कटाई बिना किसी रोक टोक के जारी</h1>
<p style="text-align:justify;"><strong>संगरूर/चीमा मंडी।</strong> सुनाम से चीमा रोड पर पहले ही सड़क बनाते समय पर हजारों की संख्या में वृक्षों की कटाई हो चुकी है परंतु अब सड़क बन कर तैयार भी हो गई है व कटे वृक्षों की भरपाई के लिए नये पेड़ लगाने का समय था परन्तु नये पेड़ लगाने की बजाय आज भी इस रोड पर वृक्षों की कटाई बिना किसी रोक टोक के जारी है जो कि सरकार के तंदरुस्त पंजाब और वातावरण दिवस के कार्यक्रमों की खिल्ली उड़ा रहे हैं।</p>
<h2 style="text-align:center;">तंदरुस्त इन्सान व पंजाब के लिए पानी और वृक्ष ही मुख्य स्रोत</h2>
<p style="text-align:justify;">इस संबंधी बुद्धिजीवियों का कहना है कि एक तंदरुस्त इन्सान व पंजाब के लिए पानी और वृक्ष ही मुख्य स्रोत हैं इनको लालची मानव ने खत्म करने की कसम खाई हुई है। पानी व वृक्ष जीवन की रेखा हैं परंतु यह दुख की बात है कि मानवीय समाज दोनों प्रति ही गैर जिम्मेदार रवैया अपना रहा है। पंजाब में तो वृक्षों को दुश्मनों की तरह काटा जा रहा है। वृक्षों की अंधाधुन्ध कटाई के कारण वातावरण पर बहुत ही बुरा प्रभाव डाल रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">एक अनुमान मुताबिक पंजाब में पिछले पांच वर्षाें दौरान सिर्फ सरकारी विभागों द्वारा 9 लाख पेड़ काटे जा चुके हैं, निजी स्तर पर लोगों द्वारा वृक्षों की कटाई इस से अलग है। चिंता वाली बात तो यह है कि इतनी बड़ी संख्या में वृक्षों के काटे जाने के बावजूद इस संख्या में नये पेड़ नहीं लगाए गए।</p>
<h2 style="text-align:center;">वृक्षों की कटाई का नहीं लिया जा रहा कोई नोटिस</h2>
<p style="text-align:justify;">कथित विकास कामों की भेंट चढ़ रहे इन वृक्षों की कटाई का कोई नोटिस भी नहीं लिया जा रहा। विकास कार्यों के नाम पर इतनी बड़ी संख्या में वृक्षों का काटा जाना मानवीय अस्तित्व के लिए ही खतरा पैदा करने के तुल है जो कि पंजाबियों के लिए चिंता का विषय होना चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">इस संबंधी सर्व सांझा विचार मंच के अध्यक्ष मक्खण सिंह शाहपुर ने कहा कि समय की सरकारें वृक्षों की कटाई की तरफ बिल्कुल नहीं ध्यान दे रही व न ही वन विभाग कोई कार्रवाई कर रहा है, बड़े राज मार्गों के पेड़ विकास की भेंट चढ़ गए और गांवों की लिंक सड़कों पर अब पेड़ कम दिखाई देते हैं व बिजली वाले पोल अधिक परंतु सरकार व संबंधित विभाग कुंभकरनी नींद में डूबा पड़ा है। जब इस संबंधी जिला वन अधिकारी के साथ संपर्क करने की कोशिश की परन्तु उनके साथ संपर्क नहीं हो पाया।</p>
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                <pubDate>Sat, 07 Jul 2018 03:37:31 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>तीन गांवों में हिरण के शिकार, पेड़ पर लटकाए शव</title>
                                    <description><![CDATA[घटना के विरोध में बिश्नोई समाज का प्रदर्शन जयपुर (सच कहूँ न्यूज)। नागौर के सदर थाना इलाके के बासनी, भवाद व इंद्राश गांव में देर रात हथियारबंद शिकारियों ने जंगली क्षेत्र में हिरणों का शिकार करने के बाद उनके अंग व चमड़ी निकाल कर शव पेड़ से लटका गए। सोमवार अलसुबह जंगल में जानवरों का […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/rajasthan/deer-hunting-dead-body-hanging-on-trees/article-1401"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-06/deer-1.jpg" alt=""></a><br /><h1 style="text-align:center;">घटना के विरोध में बिश्नोई समाज का प्रदर्शन</h1>
<p style="text-align:justify;"><strong>जयपुर (सच कहूँ न्यूज)।</strong> नागौर के सदर थाना इलाके के बासनी, भवाद व इंद्राश गांव में देर रात हथियारबंद शिकारियों ने जंगली क्षेत्र में हिरणों का शिकार करने के बाद उनके अंग व चमड़ी निकाल कर शव पेड़ से लटका गए। सोमवार अलसुबह जंगल में जानवरों का यह हाल देख कर स्थानीय बिश्नोई समाज के लोग परेशान हो गए। समाचार लिखे जाने तक पुलिस ने शिकारियों की दो बाइक बरामद कर ली है। शिकारियों की तलाश में बड़े स्तर पर धरपकड़ अभियान चलाया जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">जानकारी के मुताबिक नागौर के सदर इलाके के बासनी, भवाद व इंद्राश गांव से सटे जंगल में देर रात शिकारियों ने देशी बंदुक से हिरणों का शिकार कर डाला। चार-पांच हिरणों का शिकार करने के बाद उनकी चमड़ी, सिंग व अन्य अंग निकालने के बाद शवों को पेड़ों पर लटका कर फरार हो गए। अलसुबह लोगों ने पेड़ों पर हिरणों के शव लटके देखे तो पुलिस को सूचना दी। देखते ही देखते हिरण के शिकार की घटना आस-पास के क्षेत्र में आग की तरह फैल गई।</p>
<p style="text-align:justify;">हिरणों से विशेष लगाव रखने वाले बिश्नोई समाज के लोगों ने घटना की भर्त्सना करते हुए प्रदर्शन करने लगे। फोन आने के बाद सदर थाना पुलिस मौके पर पहुंची और हिरण के शव बरामद किए। पुलिस ने बताया कि शिकारियों की तलाश में छापे मारे जा रहे है। बड़ी तादात में हिरणों के शिकार की घटना के बाद नागौर में तनावपूर्ण माहौल बना हुआ है। कुछ लड़कों को हिरासत में लिया गया है। घटना के कारणों का पुलिस ने भी पूरी तरह से खुलासा नहीं किया है।</p>
<p style="text-align:justify;">
</p><p style="text-align:justify;"><a href="http://10.0.0.122:1245/">Hindi News </a>से जुडे अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें <a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a> और <a href="https://x.com/SACHKAHOON">Twitter</a> पर फॉलो करें।</p>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 19 Jun 2017 07:53:47 +0530</pubDate>
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