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                <title>Vegetable Prices - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>Onion Price Inflation History: प्याज की कीमतों का 50 साल का सफर, जब महंगाई ने सरकारों को भी हिला दिया</title>
                                    <description><![CDATA[भारतीय रसोई में प्याज सिर्फ एक सब्जी नहीं, बल्कि रोजमर्रा के खाने का अहम हिस्सा है। सब्जी का स्वाद बढ़ाने से लेकर सलाद और चटनी तक...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/delhi/50-year-journey-of-onion-prices-when-inflation-shook-even/article-90229"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-08/onion-price-inflation-history.jpeg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली। </strong>Onion Price Inflation History: भारतीय रसोई में प्याज सिर्फ एक सब्जी नहीं, बल्कि रोजमर्रा के खाने का अहम हिस्सा है। सब्जी का स्वाद बढ़ाने से लेकर सलाद और चटनी तक, प्याज की मौजूदगी आम है। लेकिन जब इसके दाम अचानक बढ़ते हैं तो इसका असर सीधे आम आदमी की रसोई और घरेलू बजट पर दिखाई देता है। यही वजह है कि प्याज को अक्सर 'राजनीति की सबसे तीखी सब्जी' भी कहा जाता है। आज प्याज की कीमत कई जगहों पर 60 से 70 रुपये प्रति किलो तक पहुंच जाती है, जबकि करीब पांच दशक पहले यही प्याज 1-2 रुपये किलो के आसपास मिलता था। इन वर्षों में प्याज की कीमतों ने कई बार ऐसी करवट ली कि महंगाई का मुद्दा सड़क से लेकर संसद और चुनावी मैदान तक पहुंच गया।</p>
<h4 style="text-align:justify;">1980 में प्याज बना बड़ा चुनावी मुद्दा</h4>
<p style="text-align:justify;">भारत में प्याज की कीमत और राजनीति के रिश्ते की सबसे चर्चित घटनाओं में साल 1980 का नाम आता है। उस दौर में प्याज की कीमतों में तेज उछाल आया था। तत्कालीन विपक्षी नेता इंदिरा गांधी ने प्याज की महंगाई को जनता के बीच बड़ा मुद्दा बनाया। चुनावी प्रचार के दौरान प्याज की कीमतों को लेकर सरकार पर निशाना साधा गया और इसे आम आदमी की परेशानी से जोड़कर पेश किया गया। चुनाव परिणाम में इंदिरा गांधी की सत्ता में वापसी हुई और प्याज को लेकर यह धारणा मजबूत हुई कि इसकी कीमतें राजनीतिक रूप से भी बेहद संवेदनशील हैं।</p>
<h4 style="text-align:justify;">1998 में फिर बढ़े प्याज के दाम</h4>
<p style="text-align:justify;">करीब 18 साल बाद 1998 में प्याज ने एक बार फिर राजनीति में हलचल मचा दी। उस समय दिल्ली समेत कई जगहों पर प्याज की कीमतों में भारी उछाल आया। दिल्ली में इसके दाम करीब 60 रुपये प्रति किलो तक पहुंचने की खबरों ने आम लोगों की परेशानी बढ़ा दी। प्याज की बढ़ती कीमतों को लेकर जनता में नाराजगी देखने को मिली और विपक्ष ने इसे तत्कालीन सरकार के खिलाफ बड़ा मुद्दा बनाया। दिल्ली विधानसभा चुनाव में भी महंगाई और प्याज की कीमतें प्रमुख मुद्दों में शामिल रहीं। इसके बाद दिल्ली की राजनीति में सत्ता परिवर्तन हुआ।</p>
<h4 style="text-align:justify;">2010 और 2013 में भी महंगाई ने बढ़ाई चिंता</h4>
<p style="text-align:justify;">साल 2010 में भी प्याज की कीमतों में अचानक तेजी देखने को मिली। खराब मौसम और फसल को हुए नुकसान ने आपूर्ति को प्रभावित किया, जिससे बाजार में कीमतें बढ़ गईं। इसके बाद 2013 में प्याज के साथ-साथ टमाटर और आलू जैसी जरूरी सब्जियों के दाम भी तेजी से बढ़े। सब्जियों की महंगाई ने आम परिवारों के मासिक बजट पर दबाव बढ़ाया और खाद्य महंगाई देश की आर्थिक चर्चा का बड़ा मुद्दा बन गई।</p>
<h4 style="text-align:justify;">2019 में 100 रुपये किलो के पार पहुंचा प्याज</h4>
<p style="text-align:justify;">साल 2019 के अंत में प्याज की कीमतों ने एक बार फिर लोगों को परेशान कर दिया। भारी बारिश के कारण कई राज्यों में प्याज की फसल प्रभावित हुई। उत्पादन और बाजार में आपूर्ति घटने से कई शहरों में प्याज के दाम 100 रुपये प्रति किलो से भी ऊपर पहुंच गए। हालात को देखते हुए सरकार को आपूर्ति बढ़ाने के लिए कई कदम उठाने पड़े। प्याज के आयात को बढ़ावा देने के साथ-साथ जमाखोरी रोकने और बाजार में उपलब्धता सुधारने के प्रयास किए गए।</p>
<h4 style="text-align:justify;">2024 में भी कीमतों ने दिखाया असर</h4>
<p style="text-align:justify;">प्याज की कीमतों में तेजी का सिलसिला इसके बाद भी पूरी तरह नहीं रुका। 2024 में कई इलाकों में प्याज के दाम 80 से 100 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गए। खराब मौसम, बारिश, फसल उत्पादन में उतार-चढ़ाव और मंडियों तक आपूर्ति में देरी जैसे कारणों ने कीमतों पर असर डाला। प्याज की कीमतों में थोड़ी सी भी तेजी का असर सिर्फ रसोई तक सीमित नहीं रहता। चूंकि यह भारतीय भोजन का एक जरूरी हिस्सा है, इसलिए इसकी कीमत बढ़ने पर घरेलू खर्च के साथ खाद्य महंगाई पर भी असर पड़ता है।</p>
<h4 style="text-align:justify;">आखिर प्याज की कीमत इतनी तेजी से क्यों बढ़ती है?</h4>
<p style="text-align:justify;">प्याज के दाम में अचानक उछाल के पीछे कई कारण होते हैं। इनमें मौसम, बारिश, सूखा, फसल उत्पादन, भंडारण की क्षमता, मंडियों तक परिवहन, मांग और आपूर्ति प्रमुख हैं। प्याज की खेती में मौसम का खास महत्व है। यदि भारी बारिश से फसल खराब हो जाए या उत्पादन प्रभावित हो जाए तो बाजार में उपलब्धता घट जाती है। मांग सामान्य रहने के बावजूद आपूर्ति कम होने पर कीमत तेजी से ऊपर जा सकती है। इसके अलावा प्याज को लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए बेहतर भंडारण व्यवस्था भी जरूरी है। भंडारण में नुकसान होने पर बाजार में उपलब्ध प्याज की मात्रा और कम हो जाती है।</p>
<h4 style="text-align:justify;">50 साल में कई गुना बढ़ी कीमत</h4>
<p style="text-align:justify;">करीब पांच दशक पहले प्याज 1-2 रुपये प्रति किलो के आसपास मिल जाता था। आज सामान्य परिस्थितियों में भी इसकी कीमत कई गुना अधिक है और मौसम या आपूर्ति से जुड़ी समस्या आते ही दाम 60-70 रुपये या उससे भी ऊपर पहुंच सकते हैं। हालांकि पांच दशक में सिर्फ प्याज की कीमत ही नहीं बढ़ी है। महंगाई, खेती की लागत, मजदूरी, खाद-बीज, परिवहन और भंडारण खर्च भी कई गुना बढ़े हैं। इसलिए केवल पुराने और आज के दामों की तुलना करके वास्तविक महंगाई का पूरा असर समझना सही नहीं होगा।</p>
<h4 style="text-align:justify;">प्याज सिर्फ रसोई नहीं, राजनीति का भी तापमान बढ़ाता है</h4>
<p style="text-align:justify;">भारत में प्याज की कीमतों का इतिहास बताता है कि यह सब्जी आम आदमी की जेब पर सीधा असर डालने के साथ राजनीतिक रूप से भी बेहद संवेदनशील रही है। 1980, 1998, 2010, 2013 और 2019 जैसे दौर में प्याज की कीमतों ने देश में महंगाई की बहस को तेज किया। यही कारण है कि सरकारें भी प्याज की कीमतों में अचानक उछाल को लेकर सतर्क रहती हैं और जरूरत पड़ने पर आयात, निर्यात नियंत्रण,</p>
<p style="text-align:justify;">बफर स्टॉक और बाजार में सरकारी बिक्री जैसे कदम उठाती हैं। पांच दशक का प्याज का सफर यही बताता है कि भारतीय रसोई में भले ही यह एक आम सब्जी हो, लेकिन इसकी कीमत बढ़ते ही इसका असर आम आदमी की थाली से लेकर देश की राजनीति तक दिखाई देने लगता है।</p>
<img src="https://www.sachkahoon.com/media/2026-08/onion-price-inflation-history.jpeg" alt="Onion Price Inflation History" width="633" height="359"></img>
Onion Price Inflation History: प्याज की कीमतों का 50 साल का सफर, जब महंगाई ने सरकारों को भी हिला दिया
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>कारोबार</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>कृषि</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                            <category>दिल्ली</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 26 Aug 2026 15:06:00 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sarvesh Kumar]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>Vegetable Prices: आसमान छूने लगे सब्जियों के दाम, सब्जी मंडी में कम हुई रौनक</title>
                                    <description><![CDATA[आगामी दिनों में आमजन की पॉकेट पर दिखाई देगा महंगाई का असर हरा मटर, नींबू, अदरक ने 100 रुपए किलो का आंकड़ा किया पार, प्याज व आलू 120 रुपए 5 किलो पटियाला (सच कहूँ/नरेन्द्र सिंह बठोई)। Patiala News: आने वाले दिनों में गरीब की थाली का बजट हिलने वाला है। अब आम आदमी को दो […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/punjab/vegetable-prices-skyrocketed-leaving-the-vegetable-market-in-a-state-of-disrepair/article-78113"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2025-11/vegetable.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:justify;">आगामी दिनों में आमजन की पॉकेट पर दिखाई देगा महंगाई का असर</h3>
<ul style="text-align:justify;">
<li>हरा मटर, नींबू, अदरक ने 100 रुपए किलो का आंकड़ा किया पार, प्याज व आलू 120 रुपए 5 किलो</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>पटियाला (सच कहूँ/नरेन्द्र सिंह बठोई)।</strong> Patiala News: आने वाले दिनों में गरीब की थाली का बजट हिलने वाला है। अब आम आदमी को दो वक्त की रोटी के लिए जेब थोड़ी और ढीली करनी पड़ सकती है। जी हाँ, बात हो रही है रोजमर्रा के जीवन में इस्तेमाल होने वाली सब्जियों के बढ़ते दामों की। कुछ दिनों तक सब्जियों के दाम सामान्य रहने के बाद अब धीरे-धीरे उनमें बढ़ोतरी देखी जा रही है, जिससे आम आदमी को सब्जी खरीदते समय सोच-विचार कर खर्च करना पड़ सकता है। वीरवार को जब पटियाला की सब्जी मंडी का दौरा किया गया तो यह देखने को मिला कि बढ़ते दामों के कारण मंडी में ग्राहकों की संख्या पहले से काफी कम थी।</p>
<p style="text-align:justify;">इक्का-दुक्का दुकानों पर ही कुछ ग्राहक नजर आए। सब्जी विक्रेताओं में इस बात की निराशा साफ झलक रही थी। जब उनसे दामों के बारे में बात की गई तो उन्होंने बताया कि प्याज 120 रुपए के 5 किलो, आलू भी 120 रुपए के 5 किलो, नया आलू 40 रुपए किलो के हिसाब से बिक रहा है। इसके अलावा हरा मटर 140 रुपए किलो, गाजर 60 रुपए किलो, गोभी 40 रुपए किलो, शिमला मिर्च 60 रुपए किलो, नींबू 100 रुपए किलो, अदरक 110 रुपए किलो, हरी मिर्च 60 रुपए किलो, टमाटर 60 रुपए किलो, खीरा 40 रुपए किलो बिक रहा है। बाकी सब्जियां भी 30 से 40 रुपए किलो के बीच बिक रही हैं। इन विके्रताओं ने बताया कि जब तक नई फसलें मंडी में नहीं आ जातीं, तब तक दाम और भी बढ़ सकते हैं। Patiala News</p>
<p style="text-align:justify;">हालांकि प्याज का दाम इस बार स्थिर रहा है, नहीं तो दीपावली के आसपास प्याज 100 रुपए किलो तक पहुंच जाता था। टमाटर के दाम भी कुछ दिन पहले तक सामान्य थे, लेकिन अब यह 60 रुपए किलो तक पहुंच चुका है और आगे और बढ़ने की संभावना है।</p>
<p style="text-align:justify;">वहीं सब्जी खरीदने आए दरबारा सिंह, भगवंत सिंह, हाकम सिंह, परगट सिंह आदि ने बताया कि पहले दाम ठीक थे, लेकिन अब लगातार बढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि पहले हम ज्यादा मात्रा में सब्जी ले जाते थे, अब केवल जरूरत के हिसाब से ही खरीदते हैं। उन्होंने सरकार से मांग की कि आम जनता को ध्यान में रखते हुए रोजमर्रा की आवश्यक वस्तुओं के दामों को स्थिर रखा जाए ताकि आम व्यक्ति की रसोई का बजट न बिगड़े और हर कोई अपने परिवार का पालन-पोषण ठीक से कर सके।</p>
<h3 style="text-align:justify;">सब्जी मंडी में न दिखा कूड़ा और न ही बेसहारा पशु</h3>
<p style="text-align:justify;">जब सब्जी मंडी के उस हिस्से का दौरा किया गया जहाँ पहले हमेशा कूड़े के ढेर लगे रहते थे और बेसहारा पशु मुंह मारते दिखाई देते थे, तो देखा गया कि इस बार नगर निगम के कर्मचारियों ने उस जगह को पूरी तरह साफ रखा था। मंडी में न तो कहीं कूड़ा था और न ही कोई बेसहारा पशु नजर आया। इस सफाई व्यवस्था की सराहना ग्राहकों और सब्जी विके्रताओं ने की। Patiala News</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="एसडीएम काहलों ने सफाई व ट्रैफिक व्यवस्था का किया औचक निरीक्षण" href="http://10.0.0.122:1245/sdm-kahlon-conducted-a-surprise-inspection-of-cleanliness-and-traffic-arrangements/">एसडीएम काहलों ने सफाई व ट्रैफिक व्यवस्था का किया औचक निरीक्षण</a></p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>पंजाब</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 13 Nov 2025 20:57:15 +0530</pubDate>
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                <title>Agricultural News: बारिश से हरी मिर्च और सब्जियों का भारी नुकसान</title>
                                    <description><![CDATA[मौसम में ठंडक, लेकिन किसानों की चिंता बढ़ी पक्का कलां (सच कहूँ/पुष्पिन्द्र सिंह)। Pakka Kalan News: लगातार बारिश ने जहां तापमान में कमी लाकर मौसम को सुहावना बना दिया है, वहीं इसने वैकल्पिक खेती करने वाले किसानों के लिए मुश्किलें खड़ी कर दी हैं। बारिश ने लोगों के चेहरों पर रौनक तो लाई, लेकिन सब्जियों […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/punjab/heavy-loss-of-green-chillies-and-vegetables-due-to-rain/article-73304"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2025-07/pakka-kalan-news.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:justify;">मौसम में ठंडक, लेकिन किसानों की चिंता बढ़ी</h3>
<p style="text-align:justify;"><strong>पक्का कलां (सच कहूँ/पुष्पिन्द्र सिंह)।</strong> Pakka Kalan News: लगातार बारिश ने जहां तापमान में कमी लाकर मौसम को सुहावना बना दिया है, वहीं इसने वैकल्पिक खेती करने वाले किसानों के लिए मुश्किलें खड़ी कर दी हैं। बारिश ने लोगों के चेहरों पर रौनक तो लाई, लेकिन सब्जियों की फसलों को भारी नुकसान पहुंचाया। खेतों में पानी भरने से सब्जियों की फसलें लगभग नष्ट हो चुकी हैं, जिसके चलते सब्जियों के दाम आसमान छू रहे हैं। Agricultural News</p>
<h3 style="text-align:justify;">सब्जियों के दाम बढ़े</h3>
<p style="text-align:justify;">किसान इकबाल सिंह ने बताया कि उन्होंने गेहूं-धान के फसली चक्र से हटकर वैकल्पिक खेती को अपनाया था। इसके तहत उन्होंने हरी मिर्च, कद्दू, चौले और ग्वार जैसी सब्जियों की बिजाई की थीं। लेकिन बारिश के कारण खेतों में पानी जमा होने से उनकी फसलें बर्बाद हो गईं, जिससे उन्हें भारी आर्थिक नुकसान हुआ। इसी तरह, बलवीर सिंह ने बताया कि उन्होंने तीन कनाल खेत में हरी मिर्च की खेती की थी, जो बारिश की मार से पूरी तरह नष्ट हो गई। सब्जियों की पैदावार कम होने से बाजार में उनके दाम बढ़ गए हैं, जिसके चलते आम लोगों को महंगी सब्जियां खरीदनी पड़ रही हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">सरकार से मुआवजे की मांग | Agricultural News</h3>
<p style="text-align:justify;">भारतीय किसान यूनियन सिद्धूपुर इकाई के अध्यक्ष जब्बरजंग सिंह ने सरकार से मांग की है कि वैकल्पिक खेती करने वाले किसानों को बारिश के कारण हुए फसली नुकसान के लिए उचित मुआवजा दिया जाए। उन्होंने कहा कि किसानों ने मेहनत और पूंजी लगाकर फसलें उगाई थीं, लेकिन प्राकृतिक आपदा के कारण उनकी मेहनत पर पानी फिर गया।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="बठिंडा में टूटा नाला, रातोंरात घरों में घुसा पानी, लोगों में मचा हड़कंप" href="http://10.0.0.122:1245/drain-broke-in-bathinda-water-entered-the-house-creating-panic-among-people/">बठिंडा में टूटा नाला, रातोंरात घरों में घुसा पानी, लोगों में मचा हड़कंप</a></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>पंजाब</category>
                                            <category>कृषि</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 12 Jul 2025 11:26:25 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>Vegetable Prices: बारिश से आसमान छूने लगे सब्जियों के दाम, पपीते से महंगा हुआ खीरा</title>
                                    <description><![CDATA[पिछले एक सप्ताह से लगभग दुगुने हुए दाम बरनाला/संगरूर (सच कहूँ/गुरप्रीत सिंह)। Vegetable Prices: बीते दिनों हुई बारिश के कारण सब्जियों के भाव बेहद बढ़ गए हैं, जिस कारण मध्यवर्गीय परिवारों की रसोई में सब्जियां कुछ दिन से गायब हो गई हैं। सब्जियों के भाव पिछले एक सप्ताह से लगभग दुगुने हो गए हैं।  Vegetable […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/punjab/vegetable-prices-have-increased-due-to-rain/article-72918"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2025-07/vegetable.jpg" alt=""></a><br /><h3>पिछले एक सप्ताह से लगभग दुगुने हुए दाम</h3>
<p style="text-align:justify;"><strong>बरनाला/संगरूर (सच कहूँ/गुरप्रीत सिंह)।</strong> Vegetable Prices: बीते दिनों हुई बारिश के कारण सब्जियों के भाव बेहद बढ़ गए हैं, जिस कारण मध्यवर्गीय परिवारों की रसोई में सब्जियां कुछ दिन से गायब हो गई हैं। सब्जियों के भाव पिछले एक सप्ताह से लगभग दुगुने हो गए हैं।  Vegetable Prices Increased</p>
<p style="text-align:justify;">हासिल की जानकारी के अनुसार लगभग सभी शहरोंं में सब्जियो के भाव आसमान को छूने लगे हैं। संगरूर व बरनाला की मंडियों में भाव बढ़ने के कारण लोगों में इस संबंधी चर्चा जोरों पर हैं। सब्जी विक्रेताओं के अनुसार पहले तो गर्मी के कारण कुछ सब्जियां झुलस गई और इसके बाद किसानों ने धान की रोपाई के लिए पहले बीजी गई सब्जियों को नष्ट कर दिया और अब जो थोड़ा-बहुत सब्जी उत्पादक हैं, वह इसका फायदा लेने में लगे हुए हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">ऊपर से अब रहती कसर बारिश ने निकाल दी है, जिस कारण सब्जियों की भारी कमी आ गई है। करीब दस दिन पहले सभी सब्जियों के भाव काफी कम होने से लोगों को राहत मिली हुई थी परंतु अब मंडी में सब्जी का भाव सुनकर लोगों को अपनी जेब की तरफ देखना पड़ रहा है। सब्जियां महंगी होने से महिलाओं को अपनी रसोई का बजट बनाना मुश्किल हो गया है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">बरनाला मंडी में सब्जियों के मौजूदा भाव | Vegetable Prices Increased</h3>
<p style="text-align:justify;">वहीं अगर सब्जियों के मौजूदा भाव की बात की जाए तो बरनाला में कद्दू 80 रुपये किला बिक रहा है, तोरी का भाव 100 रुपए किलो तक पहुंच गया है। भिंडी 80 रुपये किलो, प्याज 25 रुपये किलो, खीरा (जपानी) 80 रुपये किलो, पपीता 50 रुपये किलो, आलू 25 रुपये किलो, फलियां 100 रुपये किलो व टमाटर का भाव 40 रुपये किलो बिक रहा है। इसके अलावा संगरूर मंडी में भी लगभग इसी तरह के भाव हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">वहीं संगरूर के सब्जी विक्रेता ने बताया कि पहले खेत खाली होने के कारण बड़ी संख्या में किसानों ने सब्जियां बीजी हुई थीं, जिस कारण सब्जियों के भाव कम थे। अब ज्यादातर किसानों ने खेतों में धान की रोपाई कर दी है। वहीं ऊपर बारिश होने से सब्जियों के भाव पर भी बुरा असर पड़ा है। मंडी में प्याज, आलू, टमाटर, यूपी, गुजरात, राजस्थान व महाराष्टÑ से आते हैं, जिनके भाव तेज ही होते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">बरनाला की ग्रहणियां कमलजीत कौर, गुरमीत कौर व हरजिन्दर कौर ने बताया कि पिछले दो तीन दिन से सब्जियों के भाव बहुत ज्यादा बढ़ गए हैं, जिससे उन्होंने फिलहाल सब्जियों से किनारा कर लिया है। उन्होंने बताया कि सब्जियों के भाव ने तो फलों को भी पीछे छोड़ दिया है। उन्होंने मांग की कि सरकार को चाहिए कि एकदम बढ़े भाव को कंट्रोल करने के लिए कोई प्रयास किए जाएं व सब्जियों की ब्लैक मार्केटिंग करने वालों के खिलाफ सख्ती की जाए, ताकि मध्यवर्गीय परिवारोंं को कुछ राहत मिल सके।Vegetable Prices Increased</p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>पंजाब</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 02 Jul 2025 20:15:22 +0530</pubDate>
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                <title>Vegetable Prices: लाल हुआ टमाटर, बिक रहा है इतने रुपए प्रति किलो, प्याज ने भी रुलाया, जाने सब्जियों के भाव</title>
                                    <description><![CDATA[बारिश ने बिगाड़ा जायका, थाली से कम हुई तरकारी.. रेवाड़ी (सच कहूँ/महेंद्र भारती)। Vegetable Prices Increased: रेवाड़ी में बारिश के बाद सब्जियों के दाम बढ़ गए हैं। एक सप्ताह पहले तक 20 रुपये किलो बिक रहे टमाटर के दाम अब 80-90 रुपये प्रति किलो हो गए हैं। इतना ही नहीं, प्याज, आलू, भिंडी, गोभी और […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/business/vegetable-prices-have-increased-after-the-rain/article-59653"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2024-07/vegetables.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:justify;">बारिश ने बिगाड़ा जायका, थाली से कम हुई तरकारी..</h3>
<p style="text-align:justify;"><strong>रेवाड़ी (सच कहूँ/महेंद्र भारती)।</strong> Vegetable Prices Increased: रेवाड़ी में बारिश के बाद सब्जियों के दाम बढ़ गए हैं। एक सप्ताह पहले तक 20 रुपये किलो बिक रहे टमाटर के दाम अब 80-90 रुपये प्रति किलो हो गए हैं। इतना ही नहीं, प्याज, आलू, भिंडी, गोभी और अन्य सब्जियों के दामों में भी 50 फीसदी तक का इजाफा हुआ है। इसके अलावा फलों के दामों में भी भारी उछाल आया है। अगर बात टमाटर की करें तो टमाटर व प्याज तरकारी के साथ-साथ सलाद से गायब होने लगा है। टमाटर इस समय 70 से 80 रुपए प्रति किलो के हिसाब से बिक रहा है। Vegetable Prices</p>
<p style="text-align:justify;">वही प्याज की बात करें तो एक सप्ताह पूर्व 20 रुपए प्रति किलो के हिसाब से बिकने वाली प्याज अब 50 से 60 रुपए प्रति किलो के हिसाब से बिक रही है। तरकारी में खुशबू के लिए डालने वाला धनिया भी 200 रुपए प्रति किलो के हिसाब से बिक रहा है। सब्जियों के बढ़ते दाम के कारण थाली से तरकारी की कटोरिया कम होने लगी हैं। रेवाड़ी में प्याज व टमाटर की आवक महाराष्ट्र से होती है, लेकिन बरसात के कारण आवक अब कम हो रही है। हर वर्ष बरसात के मौसम में सब्जियों के दाम बढ़ना अब आम बात हो गई है। Vegetable Prices</p>
<p style="text-align:justify;">मांग व आपूर्ति के बढ़ते अंतर के कारण सब्जियों के दामों में उछाल देखने को मिल रहा है। सब्जियों का राजा आलू भी आंखें तरेर रहा है। एक सप्ताह पूर्व 10 रुपए प्रति किलो के हिसाब से बिकने वाला आलू अब 35 से 40 रुपए के हिसाब से बिक रहा है। इसी तरह गोभी, भिंडी, लौकी, तुरई, मटर, बीन्स जैसी अन्य सब्जियों के दामों में भी काफी इजाफा हुआ है। एक सप्ताह में सब्जियों के दाम 50 फीसदी तक बढ़े हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">सब्जी        पहले          अब   | Vegetable Prices</h3>
<ul>
<li style="text-align:justify;">टमाटर         30             80-90</li>
<li style="text-align:justify;">प्याज          30             60-70</li>
<li style="text-align:justify;">आलू           15             30-35</li>
<li style="text-align:justify;">तौरी           20             50-55</li>
<li style="text-align:justify;">भिंडी          40              70-80</li>
<li style="text-align:justify;">टिंडा          40              50-60</li>
<li style="text-align:justify;">पेठा( सीताफल )20-         40-50</li>
<li style="text-align:justify;">खीरा         20              40-50</li>
<li style="text-align:justify;">मिर्च         60              80-100</li>
<li style="text-align:justify;">धनिया     120            150-200</li>
<li style="text-align:justify;">करेला       30               40-45</li>
<li style="text-align:justify;">बैंगन       20-30           40-45</li>
<li style="text-align:justify;">शिमला मिर्च 50              60-80</li>
</ul>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="पर्यावरण संरक्षण की दिशा में गुजरात की साध-संगत का कदम" href="http://10.0.0.122:1245/dera-devotees-of-bhuj-planted-trees/">पर्यावरण संरक्षण की दिशा में गुजरात की साध-संगत का कदम</a></p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>कारोबार</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 10 Jul 2024 16:25:11 +0530</pubDate>
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