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                <title>Vegetable Farming - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <description>Vegetable Farming RSS Feed</description>
                
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                <title>Farming Tips: 30-40 दिन में तैयार होने वाली सब्जियां, कम समय में पाएं ताजी फसल</title>
                                    <description><![CDATA[कम समय में सब्जियों की फसल लेना चाहते हैं? जानिए मूली, पालक, मेथी और धनिया की शुरुआती कटाई कितने दिनों में हो सकती है और खेती के दौरान किन बातों का रखें ध्यान।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/agriculture/vegetables-ready-in-30-40-days-get-fresh-crop-in-less/article-90180"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-08/farming-tips.jpeg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Farming Tips: आप ऐसी सब्जियां उगाने की योजना बना रहे हैं, जिनके लिए लंबा इंतजार न करना पड़े, तो कम अवधि में तैयार होने वाली सब्जियां आपके लिए बेहतर विकल्प हो सकती हैं। सही मौसम, अच्छी गुणवत्ता वाले बीज, उपजाऊ मिट्टी, उचित सिंचाई और नियमित देखभाल के साथ कई सब्जियों की शुरुआती उपज 20 से 40 दिनों के भीतर मिल सकती है।</p>
<h4 style="text-align:justify;">मूली है बेहतरीन विकल्प</h4>
<p style="text-align:justify;">अच्छी किस्म और अनुकूल मौसम में मूली की शुरुआती फसल करीब 25 से 40 दिनों में तैयार हो सकती है। भुरभुरी और अच्छी जल निकासी वाली मिट्टी इसके लिए उपयुक्त रहती है। इसकी पत्तियों का इस्तेमाल भी सब्जी के रूप में किया जा सकता है।</p>
<h4 style="text-align:justify;">पालक की जल्दी मिलती है फसल</h4>
<p style="text-align:justify;">पालक की पहली कटाई कई परिस्थितियों में लगभग 25 से 40 दिनों के आसपास शुरू हो जाती है। पर्याप्त धूप और मिट्टी में उचित नमी इसके अच्छे विकास के लिए जरूरी है। नियमित कटाई से नई पत्तियां आती रहती हैं।</p>
<h4 style="text-align:justify;">20-30 दिन में तैयार हो सकती है मेथी</h4>
<p style="text-align:justify;">बीज बोने के करीब 20 से 30 दिनों बाद मेथी की कोमल पत्तियों की कटाई शुरू की जा सकती है। इसे खेत, क्यारी, गमले या छोटे कंटेनर में भी आसानी से उगाया जा सकता है।</p>
<h4 style="text-align:justify;">धनिया भी है अच्छा विकल्प</h4>
<p style="text-align:justify;">अनुकूल परिस्थितियों में धनिया की पत्तियों की कटाई करीब 25 से 40 दिनों में शुरू हो सकती है। पर्याप्त धूप, उचित नमी और अच्छी जल निकासी वाली मिट्टी इसके लिए जरूरी है।</p>
<h4 style="text-align:justify;">खेती करते समय रखें इन बातों का ध्यान</h4>
<p style="text-align:justify;">अच्छी गुणवत्ता वाले बीज चुनें, मिट्टी को भुरभुरी और उपजाऊ रखें तथा जरूरत के अनुसार सिंचाई करें। खेत या क्यारी में पानी जमा न होने दें। पौधों को पर्याप्त धूप दें और समय-समय पर खरपतवार हटाते रहें। मौसम और स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार फसल की कटाई का समय थोड़ा आगे-पीछे हो सकता है।</p>
<img src="https://www.sachkahoon.com/media/2026-08/farming-tips.jpeg" alt="Farming Tips" width="778" height="440"></img>
Farming Tips: 30-40 दिन में तैयार होने वाली सब्जियां, कम समय में पाएं ताजी फसल
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>कृषि</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 25 Aug 2026 15:30:34 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sarvesh Kumar]]></dc:creator>
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                <title>Agriculture News: ठेके पर जमीन लेकर मौसमी सब्जियां लगाकर कमा रहा है 10 लाख सालाना</title>
                                    <description><![CDATA[नाथूसरी चोपटा (सच कहूँ/भगत सिंह)। Agriculture News: आधुनिक तरीके से खेती की जाए तो कमाई करने के लिए विपरीत परिस्थितियां भी सामने नहीं आती। गांव नाथुसरी कलां के किसान रामस्वरूप चौहान ने चार साल पहले ठेके पर 4 एकड़ जमीन लेकर सब्जियां लगाकर कमाई का जरिया खोजा। चार साल से ठेके पर जमीन लेकर उसमें […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/agriculture/by-taking-land-on-contract-he-is-earning-ten-lakh-rupees-annually-by-planting-seasonal-vegetables/article-64500"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2024-11/vegetable.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नाथूसरी चोपटा (सच कहूँ/भगत सिंह)।</strong> Agriculture News: आधुनिक तरीके से खेती की जाए तो कमाई करने के लिए विपरीत परिस्थितियां भी सामने नहीं आती। गांव नाथुसरी कलां के किसान रामस्वरूप चौहान ने चार साल पहले ठेके पर 4 एकड़ जमीन लेकर सब्जियां लगाकर कमाई का जरिया खोजा। चार साल से ठेके पर जमीन लेकर उसमें मौसमी सब्जी घीया, तोरी, तरकाकड़ी, मूली, खरबूजा, तरबूज, करेला, बैंगन आदि की बिजाई मौसम के अनुसार करते हैं और करीब 10 लाख रुपए सालाना कमाई कर रहे हैं। इस समय मूली, बैंगन की अच्छी पैदावार हुई है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">चार साल पहले शुरू की ठेके पर जमीन लेकर सब्जी की खेती</h3>
<p style="text-align:justify;">रामस्वरूप चौहान ने बताया कि पहले घर के खाली पड़े प्लाट में सब्जियां लगते थे उससे थोड़ी बहुत कमाई हो जाती थी। उन्हें सब्जियों के बारे में अच्छी जानकारी हो गई। फिर बड़े लेवल पर सब्जियां लगाने का विचार किया लेकिन खुद की जमीन नहीं होने के कारण जमीन ठेके पर लेकर सब्जी की खेती करने का मन बनाया। चार साल पहले चार एकड़ जमीन ठेके पर ली और तोरी, तरकाकड़ी, खरबूजा, तरबूज आदि लगाए उससे आमदनी शुरू हो गई। Agriculture News</p>
<p style="text-align:justify;">लीक से हटकर कुछ करने के जज्बे ने अपनों को गांव में एक अलग पहचान दिलाई। उन्होंने बताया कि वह 40 हजार रुपए प्रति एकड़ के हिसाब से जमीन ठेके पर लेता हैं। उसमें पहली छमाही में तोरी, तरकाकड़ी, खरबूजा, तरबूज की बिजाई करते हैं और उसके बाद घीया, तोरी, मूली, बैंगन आदि की बिजाई कर कमाई हो जाती है। जिससे उन्हें पहले साल काफी अच्छा मुनाफा हुआ। अब हर साल करीब 2 लाख रुपए से ज्यादा प्रति एकड़ के हिसाब से कमाई होने लगी। जिससे उसके परिवार का पालन पोषण अच्छी तरह से हो रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने बताया कि नाथूसरी कलां, तरकांवाली, चोपटा तथा निकटवर्ती गांवों के लोग उनके खेत की सब्जियां काफी पसंद करते हैं। आधुनिक तरीके से खेती करके किसान रामस्वरूप चौहान अन्य किसानों का प्रेरणा स्रोत बन गया है। ठेके पर जमीन लेने की कारण नही मिल पाता सरकारी योजनाओं का लाभ। किसान रामस्वरूप चौहान ने बताया कि उसके खुद की जमीन नहीं है और ठेके पर लेकर सब्जियां लगाता है। जिस कारण से उसे सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिल पाता। उसे ना तो डिग्गी की सब्सिडी मिल पाती और ना ही ड्रिप सिस्टम से सिंचाई करने का अनुदान मिल पाता। इसके अलावा सब्जियां खराब होने पर मुआवजा भी नहीं मिलता। लेकिन अपनी मेहनत के बल पर भी वह अच्छी कमाई कर रहा है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">नजदीक विकसित हो सब्जी की मंडी | Agriculture News</h3>
<p style="text-align:justify;">रामस्वरूप चौहान ने बताया कि उसके क्षेत्र के आस पास सब्जी व फ्रूट की मंडी न होने के कारण अन्य स्थानों पर ले जाकर बेचने में यातायात खर्च ज्यादा आता है तथा बचत कम होती है। उन्होंने बताया कि अब तो आस पास के किसानों का रूझान भी सब्जी लगाने की ओर बढने लगा है। जिससे परंपरागत खेती के साथ अतिरिक्त कमाई होने लगी है। उसका कहना है कि अगर सब्जी की मंडी चोपटा या नजदीक में स्थापित हो जाए तो यातायात खर्च कम होने से बचत ज्यादा हो जाएगी।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="Winter Tips: सर्दी में बुखार, खासी व जुकाम ठीक करने के लिए प्रभावी घरेलू तरीके" href="http://10.0.0.122:1245/effective-home-remedies-to-cure-fever-cough-and-cold-in-winter/">Winter Tips: सर्दी में बुखार, खासी व जुकाम ठीक करने के लिए प्रभावी घरेलू तरीके</a></p>
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                                                            <category>कृषि</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 20 Nov 2024 16:55:38 +0530</pubDate>
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