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                <title>सस्ते लोन की उम्मीद टूटी</title>
                                    <description><![CDATA[रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति ने यथावत रखीं दरें | Cheap Loan नई दिल्ली (एजेंसी)। रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) ने महंगाई बढ़ने की आशंका जता दी है। वीरवार को समिति ने नीतिगत दरों को यथावत बनाये रखने का निर्णय लिया। जिससे घर, कार और व्यक्तिगत ऋण पर ब्याज दरों में तत्काल […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/hope-of-cheap-loan-broken/article-12940"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-02/cheap-loan.jpg" alt=""></a><br /><h2>रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति ने यथावत रखीं दरें | Cheap Loan</h2>
<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (एजेंसी)।</strong> रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) ने महंगाई बढ़ने की आशंका जता दी है। वीरवार को समिति ने नीतिगत दरों को यथावत बनाये रखने का निर्णय लिया। जिससे घर, कार और व्यक्तिगत ऋण पर ब्याज दरों में तत्काल कमी (Cheap Loan) आने की उम्मीद खत्म हो गई। इससे लोगों को निराशा हाथ लगी है। समिति की चालू वित्त वर्ष की ऋण एवं मौद्रिक नीति की छठी द्विमासिक समीक्षा की तीन दिवसीय बैठक हुई। जिसमें समिति ने नीतिगत दरों को यथावत रखा है। जबकि चालू वित्त वर्ष की चौथी तिमाही में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक पर आधारित खुदरा महंगाई के बढ़कर 6.5 प्रतिशत पर पहुंचने का अनुमान है।</p>
<p style="text-align:justify;">वहीं समिति ने अगले वित्त वर्ष के पहले के विकास अनुमान 5.9 प्रतिशत से 6.3 प्रतिशत को कम कर 6.0 प्रतिशत कर दिया है। और कहा है कि अगले वित्त वर्ष की पहली छमाही के यह 5.5 प्रतिशत से 6.0 प्रतिशत के बीच रह सकता है। समिति ने चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही में 6.2 प्रतिशत विकास दर रहने की संभावना जतायी है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">समिति ने ये लिए निर्णय</h3>
<ul>
<li style="text-align:justify;"><strong>रेपो दर को 5.15 प्रतिशत </strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>रिवर्स रेपो दर को 4.90 प्रतिशत </strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>मार्जिनल स्टैंडिंग फैसेलिटी दर (एमएसएफआर) 5.40 प्रतिशत </strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>बैंक दर 5.40 प्रतिशत </strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>नकद आरक्षित अनुपात (सीआरआर) को 4.0 प्रतिशत </strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>वैधानिक तरलता अनुपात (एसएलआर) को 18.50 प्रतिशत पर यथावत बनाए रखने का निर्णय लिया।</strong></li>
</ul>
<h3 style="text-align:justify;">क्या है रेपो दर</h3>
<p style="text-align:justify;"><strong>रेपो दर वह दर है जिस पर रिजर्व बैंक वाणिज्यिक बैंकों को ऋण देता है।</strong></p>
<h3 style="text-align:justify;">पहले उठाए गए कदम</h3>
<ul>
<li style="text-align:justify;"><strong>रिजर्व बैंक ने लगातार पांच बार में रेपो दर में 1.35 प्रतिशत की कटौती की थी। </strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>पांचवी और छठवीं बैठक में इसमें कोई कमी नहीं की गई है और दरों को यथावत रखा गया है।</strong></li>
</ul>
<p> </p>
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                <pubDate>Thu, 06 Feb 2020 14:55:10 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>भिवानी में इस बार कपास की बम्पर पैदावार के आसार</title>
                                    <description><![CDATA[पहले के मुकाबले दस प्रतिशत ज्यादा फसल की उम्मीद, किसानों की बल्ले-बल्ले भिवानी(सच कहूँ/इंद्रवेश)। इस बार अगर सब कुछ ठीक रहा तो भिवानी के किसानों की बल्ले बल्ले होने वाली है। किसानों की इस बार कपास की फसल बम्पर होगी तथा किसान भी इस फसल को लेकर काफी खुश हं।  इस बार भिवानी जिले में […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/ten-percent-more-hope-than-the-first-crop/article-4917"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-07/crop-news-1.jpg" alt=""></a><br /><h1 style="text-align:center;">पहले के मुकाबले दस प्रतिशत ज्यादा फसल की उम्मीद,<br />
किसानों की बल्ले-बल्ले</h1>
<p style="text-align:justify;"><strong>भिवानी(सच कहूँ/इंद्रवेश)।</strong> इस बार अगर सब कुछ ठीक रहा तो भिवानी के किसानों की बल्ले बल्ले होने वाली है। किसानों की इस बार कपास की फसल बम्पर होगी तथा किसान भी इस फसल को लेकर काफी खुश हं।  इस बार भिवानी जिले में किसानों ने एक लाख तीन हजार हेक्टेयर भूमि पर कपास की फसल की बिजाई की है, जबकि पिछले वर्ष किसानों ने 90 हजार हेक्टेयर पर ही किसानो ने कपास की फसल की बिजाई की थी। इस बार दस प्रतिशत ज्यादा कपास की फसल की बिजाई की गई है। किसानों का कहना है कि इस बार अगर सब कुछ ठीक ठाक रहा तो यह फसल उनके लिए काफी फायदे मद साबित होगी।</p>
<h1 style="text-align:center;">13 हजार हेक्टेयर अधिक रकबे में हुई कपास की बिजाई</h1>
<p style="text-align:justify;">भिवानी के किसान इस बार काफी खुश हैं ओर हो भी क्यों ना उनकी मेहनत रंग लाने वाली है। इस बार किसानों ने बाजरा की फसल पर ज्यादा मेहनत ना करके कपास की फसल की बिजाई की है, क्योंकि कपास की फसल कम मेहनत मे ज्यादा फायदा देती है। खास बात तो यह है कि इस बार सूखे क्षेत्र में भी ड्रिप सिस्टम से कपास की फसल की बिजाई की है जो कि सूखे क्षेत्र में भी किसानों ने दस हजार हेक्टेयर भूमि में ड्रिप सिस्टम से फसल की बिजाई की है। कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि सही समय पर फसल पर स्प्रे करके फसल को बचाया जा सकता है तथा अच्छी फसल ली जा सकती है।</p>
<h1 style="text-align:center;">ड्रिप सिस्टम से ली किसानों ने ज्यादा फसल</h1>
<p style="text-align:justify;">किसान राजकुमार का कहना है कि इस बार उन्होंने पहले के मुकाबले ज्यादा बोई गई है। किसान का कहना है कि बाजरा ज्यादा बोने का फायदा नही है, क्योंकि मंहगी बिजाई करने के बाद आमदनी नही होती इसलिए बाजरा इस बार नही बोया गया है। किसानों का कहना है कि कपास ज्यादा आमदनी देती है इसलिए इस फसल की बिजाई ज्यादा की गई है। यह फसल किसानों के लिए फायदे का सौद होगी।</p>
<h1 style="text-align:center;">एहतिहात बरतने की जरूरत</h1>
<p style="text-align:justify;">कपास की फसल पर किसानों को एहतिहात बरतने की जरूरत है। समय पर पानी व दवाई की इस्तेमाल करने से किसान अच्छा फायदा उठा सकते हं। ड्रिप सिस्टम से किसान अच्छी पैदावार ले रहे हैं, जो कि काफी अच्छा है।</p>
<p style="text-align:right;"><strong>डॉ. विनोद कृषि वैज्ञानिक</strong></p>
<h1 style="text-align:center;">किसानों ने की बाजरे से ज्यादा कपास की बिजाई</h1>
<p>इस बार किसानों ने एक लाख तीन हजार हेक्टेयर में कपास की फसल की बिजाई की है। यह फसल पिछले बार के मुकाबले ज्यादा है। पिछले वर्ष 90 हजार हेक्टेयर भूमि पर किसानो ने कपास की फसल की बिजाई की गई थी पहले के मुकाबले दस प्रतिशत ज्यादा है। कई जगह जहां पानी की कमी है, वहां ड्रिप सिस्टम से बिजाई की गई है। इस बार बाजरा कम बिजाई की गई है तथा कपास की फसल की बिजाई ज्यादा की गई है।</p>
<p style="text-align:right;"><strong>डॉ. प्रताप सभंरवाल</strong><br />
<strong>उपनिदेशक, कृषि विभाग</strong></p>
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                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 20 Jul 2018 05:54:26 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>आरएसएस के कार्यक्रम में आज भाषण देंगे प्रणब, उनसे ऐसी उम्मीद नहीं थी— अहमद पटेल</title>
                                    <description><![CDATA[नागपुर। पूर्व राष्ट्रपति और 43 साल से कांग्रेस नेता प्रणब मुखर्जी नागपुर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के दीक्षांत समारोह में गुरुवार को शामिल होंगे। दीक्षांत समारोह में शामिल होने के​ लिए प्रणाब मुखर्जी बुधवार शाम को यहां पहुंच गए है। संघ से जुड़े कार्यकर्ताओं ने उनका स्वागत किया लेकिन एयरपोर्ट पर उनसे मिलने के लिए […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/fatafat-news/pranab-will-give-speeches-rss-program-such-hope/article-4009"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-06/sang-copy.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नागपुर। </strong>पूर्व राष्ट्रपति और 43 साल से कांग्रेस नेता प्रणब मुखर्जी नागपुर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के दीक्षांत समारोह में गुरुवार को शामिल होंगे। दीक्षांत समारोह में शामिल होने के​ लिए प्रणाब मुखर्जी बुधवार शाम को यहां पहुंच गए है। संघ से जुड़े कार्यकर्ताओं ने उनका स्वागत किया लेकिन एयरपोर्ट पर उनसे मिलने के लिए एक भी कांग्रेसी नहीं पहुंचा। उधर, अहमद पटेल ने बुधवार देर रात कहा कि मुझे उनसे (प्रणब मुखर्जी) से ऐसे उम्मीद नहीं थी। ऐसा कहा जा रहा है कि वे समारोह में करीब 20 मिनट तक भाषण दे सकते हैं। प्रणब दा यहांं 3 दिन तक संघ के मेहमान बनकर रहेंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रणब के आरएसएस के कार्यक्रम में शामिल होने के फैसले से कांग्रेस के नेता खुश नहीं हैं। सोनिया गांधी के करीबी और कांग्रेस नेता अहमद पटेल ने बुधवार देर रात ट्वीट कर कहा कि मुझे उनसे ऐसी उम्मीद नहीं थी। इससे पहले भी पूर्व केंद्रीय मंत्री पी चिदंबरम, जयराम रमेश, सीके जाफर शरीफ समेत 30 से ज्यादा कांग्रेस नेताओं ने प्रणब से संघ कार्यक्रम में नहीं जाने की अपील की थी। इन नेताओं ने पत्र और मीडिया के जरिए मुखर्जी से इस कार्यक्रम से दूर रहने को कहा। नेताओं का कहना है प्रणब के कार्यक्रम में जाने से संघ विचारधारा को मजबूती मिल सकती है। इस कार्यक्रम में शामिल होने पर प्रणब दा ने 2 जून को कहा था कि इस बारे में कई लोगों ने पूछा, लेकिन जवाब नागपुर में दूंगा। उन्होंने कहा कि वे संघ के कार्यक्रम में जाने पर अभी कुछ भी नहीं कहना चाहते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">इस पर कांग्रेस ने कहा- कांग्रेस प्रवक्ता अतुल लोंढे के मुताबिक, पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रहे हैं। फिलहाल वे निजी दौरे पर नागपुर आए हैं। उनके दौरे की सूचना नगर कांग्रेस को भी अधिकृत तौर पर नहीं मिली है। लिहाजा कांग्रेस नेता उनसे मिलने नहीं पहुंचे। मुखर्जी से मिलने से किनारा करने की कोई ठोस वजह नहीं है।<br />
ये ऐसा है संघ का कार्यक्रम- शाम 5.30 बजे नागपुर के रेशिमबाग संघ मुख्यालय पहुंचेंगे। यहां आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत स्वागत करेंगे। इसके बाद संघ के प्रमुख पदाधिकारियों का प्रणब मुखर्जी से परिचय कराया जाएगा। शाम 6.15 बजे कार्यक्रम स्थल पर पहुंचेंगे। करीब 6.35 बजे प्रणब भाषण देंगे। यह भाषण करीब 20 मिनट चल सकता है। आखिर में आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत स्वयंसेवकों को संबोधित करेंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">किस प्रोग्राम में जा रहे हैं प्रणब मुखर्जी— नागपुर में आरएसएस का तृतीय शिक्षा वर्ग कार्यक्रम का समापन है। तृतीया शिक्षा वर्ग संघ के प्रचारक बनाने की प्रक्रिया का सबसे ऊंचे दर्जे का ट्रेनिंग प्रोग्राम है। मोदी भी तृतीय शिक्षा वर्ग में हिस्सा ले चुके हैं। इस बार नागरपुर में आरएसएस के देशभर से चुन कर आए हुए 914 स्वंयसेवकों को ट्रेनिंग दी गई है। 25 दिन तक चले इस प्रशिक्षण शिविर में देशभर से डॉक्टर, आईटी एक्सपर्ट, इंजीनियर, पत्रकार, किसान और विभिन्न वर्गों के युवा शामिल हुए। इनकी उम्र 25 से 30 साल के बीच है। सुभाषचंद्र बोस के पोते अर्धेंदु बोस और लाल लालबहादुर शास्त्री के बेटे भी सुनील शास्त्री भी नागपुर पहुंच गए हैं।</p>
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                                                            <category>विदेश</category>
                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 07 Jun 2018 12:26:26 +0530</pubDate>
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                            </item>
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                <title>नोटबंदी पर जायज है, अदालत का सख्त रुख</title>
                                    <description><![CDATA[500और 1000 रुपये के बंद हो चुके नोट जमा कराने से रह गए लोगों के दिल में एक उम्मीद की किरण जगी है। सर्वोच्च न्यायालय ने हाल ही में नोटबंदी से जुड़े एक मामले की सुनवाई करते हुए नोटबंदी के दौरान किसी मजबूरीवश 500 और 1000 के पुराने नोट जमा न करा पाए लोगों को […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/demonetization-court-justified-correct/article-2075"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-07/court.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">500और 1000 रुपये के बंद हो चुके नोट जमा कराने से रह गए लोगों के दिल में एक उम्मीद की किरण जगी है। सर्वोच्च न्यायालय ने हाल ही में नोटबंदी से जुड़े एक मामले की सुनवाई करते हुए नोटबंदी के दौरान किसी मजबूरीवश 500 और 1000 के पुराने नोट जमा न करा पाए लोगों को एक और मौका दिए जाने पर केंद्र सरकार और रिजर्व बैंक आॅफ इंडिया दोनों से जवाब मांगा है।</p>
<p style="text-align:justify;">संविधान का अनुच्छेद-21 देश के सभी नागरिकों को जीवन का अधिकार देता है। यह अनुच्छेद उसे सम्मान से जीवन जीने का अधिकार भी देता है। यही वजह है कि शीर्ष अदालत ने भी इस बात को माना कि जिनके पास तार्किक आधार है, उनकी बात सुनी जानी चाहिए। उन्हें सरकार नोट जमा करने का एक और मौका दे।</p>
<p style="text-align:justify;">गौरतलब है कि सुधा मिश्र और कुछ अन्य याचिकाकर्ताओं ने सर्वोच्च न्यायालय में याचिकाएं दाखिल कर निश्चित अवधि में पैसा जमा न करा पाने की अपनी मजबूरी बताते हुए अदालत से पुराने नोट जमा कराने का निर्देश मांगा था। मामले की सुनवाई के बाद अदालत को भी याचिकाकर्ताओं की दलील में दम दिखाई दिया।</p>
<p style="text-align:justify;">लिहाजा उसने सरकार से इस मसले पर संजीदगी से विचार करने को कहा। अब इस मामले की अगली सुनवाई 18 जुलाई को होगी, जिसमें सरकार अपना पक्ष अदालत के सामने रखेगी। हालांकि सरकार, अदालत में पहले ही एक हलफनामा दाखिल कर यह कह चुकी है कि वह पुराने नोट जमा कराने के लिए अब कोई विंडो नहीं खोलने जा रही।</p>
<p style="text-align:justify;">सरकार के इस हलफनामे के बावजूद शीर्ष अदालत को अब भी यह लगता है कि जो लोग किसी मजबूरी से अपनी गाढ़ी कमाई का पैसा बैंक में जमा नहीं कर पाए, उन्हें रियायत मिले।</p>
<p style="text-align:justify;">नोटबंदी से पीड़ित लोगों के किस्से यदि जानें, तो वह ऐसे हैं कि उन्हें सुनकर पत्थर दिलवालों का भी दिल पसीज जाए। उन्हें उनसे सहानुभूति पैदा हो जाए। मसलन एक याचिकाकर्ता की यह शिकायत है कि वह अपने 66 लाख, 80 हजार रुपये महज इसलिए बैंक में नहीं जमा करा सका, क्योंकि बैंक में उसकी केवाईसी अपडेट नहीं थी और बैंक ने उस वक्त केवाईसी अपडेट करना स्वीकार नहीं किया।</p>
<p style="text-align:justify;">वहीं दूसरी याचिकाकर्ता सुनीता गुप्ता जो कि राजस्थान के अलवर जिले की रहने वाली हैं, उन्हें लंबे समय से लंग्स कैंसर हैं। उनका एम्स में इलाज चल रहा है। जब पुराने नोट बंद किए गए, तब वह कोमा में थीं।</p>
<p style="text-align:justify;">तीन महीने बाद वह कोमा से बाहर आईं, तो उन्हें यह मालूम चला कि इलाज के लिए जो उनके पुराने नोट घर में रखे हैं, उनका कोई मोल ही नहीं है। फिर भी आखिरी उम्मीद लेकर सुनीता और उनके पति रिजर्व बैंक पहुंचे, लेकिन गार्ड ने उन्हें अंदर ही नहीं जाने दिया। उन्हें बाहर से ही भगा दिया गया।</p>
<p style="text-align:justify;">तीसरी याचिकाकर्ता सुधा मिश्र नोटबंदी के दरमियान अस्पताल में भर्ती थीं। बच्चे को जन्म देने की वजह से वह बंद कर दिए गए नोट जमा नहीं कर सकीं। अब जब वे ठीक होकर रिजर्व बैंक पहुंची, तो उन्हें भी निराशा हाथ आई। वहीं एक दीगर याचिकाकर्ता 71 साल की सरला श्रीवास्तव का कहना था कि उनके पति की मौत बीते साल अप्रैल में हुई।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्हें जनवरी में यह बात मालूम हुई कि पति के बक्से में 1.79 लाख के पुराने नोट हैं। इसके अलावा देश में तमाम लोग ऐसे मिल जाएंगे, जो नोटबंदी के दरमियान जेल में बंद थे, लिहाजा वे अपने नोट बैंक में जमा नहीं कर पाए।</p>
<p style="text-align:justify;">सरकार के वादे के मुताबिक पहले तो पुराने नोट 31 मार्च तक हर हाल में जमा होने चाहिए थे, पर सरकार ने देशवासियों से किया अपना वादा नहीं निभाया। वह अपने वादे से मुकर गई।</p>
<p style="text-align:justify;">अब जबकि कुछ लोग उचित कारणों के साथ अपना पैसा आरबीआई में जमा कराने आ रहे हैं, तो बैंक को उनका पैसा जमा करना चाहिए। सरकार और आरबीआइ को भी ऐसी राह निकालना चाहिए, जिससे नोटबंदी से पीड़ित लोगों को राहत मिले। वह अपना बाकी का जीवन सम्मान के साथ बिता सकें।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>-जाहिद खान</strong></p>
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</p><p style="text-align:justify;">
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                                                            <category>लेख</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 08 Jul 2017 00:04:54 +0530</pubDate>
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                <title>आशा की जोत जलाते ये कश्मीरी युवा</title>
                                    <description><![CDATA[कुछ राह से भटके युवाओं के कारण बेशक आज घाटी अपनी बेबशी पर आंसू बहा रही हो, पर उजला पक्ष यह भी है कि इसी कश्मीर के युवा पढ़ाई-लिखाई और खेलकूद में देश और प्रदेश का गौरव बढ़ाने में पीछे नहीं हैं। इसी माह आए जेईई के परिणामों में कश्मीर के 9 युवाओं ने सफलता […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/hindi-article-on-kashmiri-youth/article-1412"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-06/youth-1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">कुछ राह से भटके युवाओं के कारण बेशक आज घाटी अपनी बेबशी पर आंसू बहा रही हो, पर उजला पक्ष यह भी है कि इसी कश्मीर के युवा पढ़ाई-लिखाई और खेलकूद में देश और प्रदेश का गौरव बढ़ाने में पीछे नहीं हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">इसी माह आए जेईई के परिणामों में कश्मीर के 9 युवाओं ने सफलता के झण्डे गाड़े हैं, वहीं पिछले दिनों ही देश की सर्वोच्च सम्मानजनक सेवा भारतीय प्रशासनिक सेवा परीक्षा में कश्मीर के 14 युवाओं का चयन इस बात का प्रमाण है कि वहां के युवा शांति चाहते हैं, देश के प्रति उनकी निष्ठा है। पत्थरबाजी उनकी पहचान नहीं होकर संजीदा और जिम्मेदार युवा की अपनी पहचान बनाने में जुटे हुए हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">2016 की परीक्षा में शीर्ष 10 में अपना नाम शामिल कराना कश्मीर की कश्मीरीयत की पहचान है। अपने निहित स्वार्थों को पूरा करने के लिए घाटी के युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ कर रहे अलगाववादियों, राजनीतिक रोटियां सेंकने में लगे राजनेताओें, सेना को हतोत्साहित करने में जुटे बरसाती मेंढकों, विरोध के लिए राष्टÑधर्म से भी परहेज करने वाले प्रतिक्रियावादियों के गाल पर इससे बड़ा तमाचा क्या होगा कि शिक्षा का क्षेत्र हो या खेल का मैदान कश्मीर के युवा पीछे नहीं हैं। केवल अशांत चार जिलों का कश्मीर नहीं है, यह नहीं भूलना चाहिए ब्यानवाजी करने वालों को।</p>
<p style="text-align:justify;">मजे की बात यह है कि इसमें बहुत अधिक श्रेय उसी सेना को जाता है, जो पत्थर की मार भी झेल रही हैं, फिदायिनी हमलों को विफल करने मेंं भी जुटी है, देश की सरहद की रक्षा में अपनी जान भी हथेली पर रखकर चल रही है, नेताआें की फिसलती गैरजिम्मेदाराना ब्यानों के बावजूद अपना संयम बनाते हुए कश्मीर में कहा जाए, तो एक-साथ कई मोर्चों पर संघर्ष करते हुए कश्मीरियों का जीवन संवारने में भी लगे हैं। सेना द्वारा संचालित अध्ययन केन्द्रों का ही यह कमाल है कि कश्मीर के युवा प्रतियोगी परीक्षाओं में न केवल अव्वल आ रहे हैं, बल्कि सफलता का परचम लहरा रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">अलगाववादी नेताओं, पाकिस्तान की जी-हजूरी में ब्यानबाजों से पूछा जाए कि देश की गौरव कश्मीर घाटी को अशांत कर वहां के युवाओं और आम नागरिकों के परिवार को सिवाय बर्बादी के उनकी देन क्या है? पाकिस्तान से पैसा लेकर कश्मीर की भावी पीढ़ी को बर्बाद करने वाले इन नेताआेंं के कितने बच्चे घाटी में रह रहे हैं, वहां के स्कूलों में पढ़ रहे हैं,</p>
<p style="text-align:justify;">पाकिस्तान के रोज सीजफायर कर आग उगलते गोलों-मोर्टारों से दो चार हो रहे हैं। आपके बच्चें, आपको परिवार के सदस्यों, आपके रिश्ते नातेदारों को आगे करके खिलाफत के नारें लगाओ तब कोई बात हो। निहीत स्वार्थों के चलते घाटी के केवल चार जिलों के कारण देश के मुकुट कश्मीर के हालातों को बेकाबू करने में लगे देशद्रोहियों को इन युवाओं से सबक लेना चाहिए कि विपरीत परिस्थितियों के बावजूद सेना के सहयोग से अपना भविष्य को संवारने का प्रयास कर रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">सांप्रदायिक असहिष्णुता का हो हल्ला मचाकर देश में नकारात्मक वातावरण बनाने वाले तथाकथित बुद्धिजीवियों को समझ जाना चाहिए कि देश की युवा धड़कन अब उनके बहकावे में नहीं आने वाली। युवाओं की परिपक्वता बढ़ती जा रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">पिछले सालों से देश में ही देश-विरोधी नारे लगाने, देश की सरहद की रक्षा करते अलगाववादियों और घुसपैठियों से संघर्ष करते सैनिकों की जगह पत्थरबाजों से सहानुभूति रखने, आत्महत्या तक को शहीद का दर्जा देने, कभी धर्म, कभी बीफ, कभी अन्य तरह से डर दिखाने, सरकार के सार्वजनिक हित के निर्णयों को भी प्रश्नों के घेरे में खड़े करने, संसद में गतिरोध, हत्या-आत्महत्या या साधारण बातों को भी अतिवादी बताकर गाल बजाने वालों से देश आजिज आ चुका है। पिछले दिनों के चुनाव परिणामों से यह साफ हो जाता है कि सरकार के कठोर निर्णयों को आम आदमी पसंद करता है।</p>
<p style="text-align:justify;">देश के लिए इससे अधिक दुर्भाग्यजनक बात क्या होगी कि देश के सेनाध्यक्ष को गली का गुंडा उस दल के नेता द्वारा कहा जा रहा है, जिस दल ने वर्षों शासन किया। क्या सत्ता ही सबकुछ है? सबसे बड़ी चिंता और निराशा अपने आपको बुद्धिजीवी कहलाने वाले ब्यानवाजों को लेकर है। क्या बुद्धिजीवी होना देश से भी ऊपर हो जाता है? दुर्भाग्य है कि देशहित या देश का सम्मान या देश की मर्यादाओं की रक्षा बुद्धिजीवियों के लिए कोई मायने नहीं रखती। कश्मीर आज कठिन संघर्ष के दौर से गुजर रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">ऐसे में देश के राजनेताओं, बुद्धिजीवियों का देश के प्रति अधिक दायित्व हो जाता है। सेना के मनोबल को बनाए रखना सबका दायित्व हो जाता है। विरोध के नाम पर विवेक को धकेला जा रहा है। कश्मीरियों के दु:ख-दर्द की साथी सेना पर पत्थरबाजी करने वालों को प्रोत्साहित किया जाना, सेना के खिलाफ आए दिन ब्यान देना कहां कि समझ कही जा सकती है?</p>
<p style="text-align:justify;">खैर जो भी हो, यह शुभ संकेत है कि भारतीय प्रशासनिक सेवा परीक्षा में 10वां स्थान प्राप्त करने वाले बिलाल मोहिउद्दीन हो या जम्मू-कश्मीर क्रिकेट टीम के परवेज रसूल, शुभम खजूरिया, मेहराद्दीन वाडू, निशानेबाज चैन सिंह, सब जूनियर यूथ कराटे चैंपियनशीप के स्वर्ण पदक विजेता हासिन मंशूर या सब जूनियर किक बॉक्सिंग वर्ल्ड चैंपियनशीप की स्वर्ण पदक विजेता तजामुल इस्लाम और इन जैसे अन्य कश्मीरी युवा देश का गौरव बढ़ा रहे हैं। घाटी के युवाओं में यह जज्बा पैदा करके ही वहां के युवाआें के भविष्य को संवारा जा सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">पिछले दिनों प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने घाटी के युवाओं से पत्थर की जगह हुनर को अपनाने का आहवान किया था। आज देश को इसी की आवश्यकता है। वादियों में धरती के साक्षात स्वर्ग के दर्शन करने आने वाले पर्यटकों, पश्मिना शॉल की बेहतरीन कारीगरी, कश्मीर की सेब की मिठास, सूखे मेवों के स्वाद से कश्मीर की कश्मीरियत को बनाए रखा जा सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">देश में ही देश-विरोधी नारे लगाने, सेना पर पत्थर फैंकने, विदेशी धन के भरोसे युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ कर अपनी रोटियां सेंकने, दूसरों के बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ कर अधिक कुछ प्राप्त होने वाला नहीं है, यह सभी को समझ लेना चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>-डॉ़ राजेन्द्र प्रसाद शर्मा</strong></p>
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                                                            <category>लेख</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 19 Jun 2017 23:13:37 +0530</pubDate>
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