<?xml version="1.0" encoding="utf-8"?>        <rss version="2.0"
            xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
            xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
            xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom">
            <channel>
                <atom:link href="https://www.sachkahoon.com/kanwar-yatra-2024/tag-29382" rel="self" type="application/rss+xml" />
                <generator>Sach Kahoon Hindi RSS Feed Generator</generator>
                <title>kanwar yatra 2024 - Sach Kahoon Hindi</title>
                <link>https://www.sachkahoon.com/tag/29382/rss</link>
                <description>kanwar yatra 2024 RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>Kanwar Yatra 2024 : कांवड़ यात्रा मार्ग पर मस्जिदों-मजारों पर डाली गई ‘बिना आदेश’ चादर! विभिन्न पक्षों ने जताई आपत्ति</title>
                                    <description><![CDATA[Kanwar Yatra 2024 : हरिद्वार (एजेंसी)। गत दिवस उत्तराखंड (Uttarakhand) के हरिद्वार में कांवड़ यात्रा मार्ग पर स्थित दो मस्जिदों एवं एक मजार के सामने अचानक से सफेद चादरें बिछा दी गईं, जिसको लेकर विभिन्न पक्षों में तनातनी बढ़ गई। हालांकि, शाम तक विभिन्न पक्षों द्वारा आपत्ति जताने के बावजूद चादरें उतार ली गईं। एक […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttarakhand/chadar-put-on-mosques-mazaars-on-kanwar-yatra-route-without-orders/article-60390"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2024-07/kawar-yatra.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Kanwar Yatra 2024 : हरिद्वार (एजेंसी)। गत दिवस उत्तराखंड (Uttarakhand) के हरिद्वार में कांवड़ यात्रा मार्ग पर स्थित दो मस्जिदों एवं एक मजार के सामने अचानक से सफेद चादरें बिछा दी गईं, जिसको लेकर विभिन्न पक्षों में तनातनी बढ़ गई। हालांकि, शाम तक विभिन्न पक्षों द्वारा आपत्ति जताने के बावजूद चादरें उतार ली गईं। एक मीडिया रिपोर्ट की मानें तो कावड़ यात्रा के दौरान ज्वालापुर इलाके में स्थित संरचनाओं के सामने बांस के मचानों पर चादरें बिछा दी गई थीं। Uttarakhand News</p>
<p style="text-align:justify;">मीडिया रिपोर्ट के अनुसार मस्जिद के मौलाना और मजार के रखवालों ने कहा कि उन्हें चादरों के संबंध में किसी प्रशासनिक आदेश की जानकारी नहीं है और दावा किया कि यात्रा के दौरान पहले ऐसा कोई कदम नहीं उठाया गया था। हालांकि हरिद्वार के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक और जिला मजिस्ट्रेट इस टिप्पणी के दौरान उपलब्ध नहीं थे, लेकिन कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज ने संवाददाताओं से कहा कि शांति बनाए रखने के लिए ऐसा किया गया था। उन्होंने कहा, ‘‘ऐसी कोई भी चीज केवल परेशानी को रोकने के लिए की जाती है।’’ Uttarakhand News</p>
<h3>प्रशासन द्वारा विशेष पुलिस अधिकारी नियुक्त किए गए | Uttarakhand News</h3>
<p style="text-align:justify;">‘‘यह कोई बड़ी बात नहीं है। उन्होंने कहा कि हम निमार्णाधीन इमारतों को भी ढकते हैं। स्थानीय लोगों और नेताओं की आपत्ति के बाद शाम तक जिला प्रशासन ने कपड़े की चादरें हटा दीं। यात्रा के प्रबंधन के लिए प्रशासन द्वारा विशेष पुलिस अधिकारी (एसपीओ) नियुक्त किए गए।</p>
<p style="text-align:justify;">दानिश अली ने कहा, ‘‘हमें रेलवे पुलिस चौकी से पर्दे हटाने के आदेश मिले थे। इसलिए हम इन्हें हटाने आए हैं।’’ वहीं दूसरी ओर हरिद्वार के पुलिस अधीक्षक (शहर) स्वतंत्र कुमार ने बताया कि ऐसा करने का कोई आदेश जारी नहीं किया गया था… न तो जिला प्रशासन की ओर से और न ही पुलिस की ओर से। कुमार ने कहा, ‘‘हमने संबंधित पक्ष से भी बात की है और पर्दे हटा दिए हैं। हमने स्थानीय लोगों से भी बात की है। यात्रा मार्ग पर बैरिकेड लगाए जा रहे थे और इसमें कोई गलती हुई होगी, जिसके कारण पर्दे लगाए गए। यह जानबूझकर नहीं किया गया।’’</p>
<p style="text-align:justify;">कांग्रेस नेता और पूर्व मंत्री नईम कुरैशी ने कहा कि उन्होंने अपने जीवन में ऐसा कभी नहीं देखा। उन्होंने कहा, ‘‘हम मुसलमान हमेशा कांवड़ मेले में शिवभक्तों का स्वागत करते हैं और जगह-जगह उनके लिए जलपान की व्यवस्था करते हैं। यह हरिद्वार में हिंदुओं और मुसलमानों के बीच सौहार्द की मिसाल है और यहां कभी पर्दे लगाने की परंपरा नहीं रही।’’ कुरैशी ने बताया कि कांवड़ मेला शुरू होने से पहले प्रशासन ने एक बैठक बुलाई थी, जिसमें हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदायों के प्रतिनिधियों को विशेष पुलिस अधिकारी (एसपीओ) नियुक्त किया गया था।</p>
<h3>फैसले के बारे में उनसे सलाह नहीं ली गई : शकील अहमद</h3>
<p style="text-align:justify;">मजारों के संरक्षक शकील अहमद ने कहा कि धार्मिक संरचनाओं को ढकने के फैसले के बारे में उनसे सलाह नहीं ली गई। उन्होंने कहा कि कांवड़िए पारंपरिक रूप से मस्जिदों और मजारों के बाहर पेड़ों की छाया में आराम करते हैं और यह पहली बार है जब ऐसा उपाय लागू किया गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">कांग्रेस नेता और पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष राव अफाक अली ने मस्जिदों और मजारों को ढकने के प्रशासन के फैसले पर आश्चर्य व्यक्त किया। ऐसा पहले कभी नहीं हुआ। कुछ कांवड़िए मस्जिदों में मत्था टेकने भी जाते हैं। भारत एक ऐसा देश है जहां हर कोई हर धर्म और जाति का ख्याल रखता है। आज मस्जिदों को ढका जा रहा है, कल अगर मंदिरों को भी इसी तरह ढका जाएगा तो क्या होगा?’’</p>
<p style="text-align:justify;">उत्तराखंड कांग्रेस के उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना ने दावा किया कि यह ‘सुप्रीम कोर्ट की अवमानना’ है। धस्माना ने कहा, ‘‘हरिद्वार जिले में कांवड़ यात्रा मार्ग पर मस्जिदों और मजारों पर पर्दे लगाने का आदेश, चाहे जिसने भी इसे जारी किया हो, सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश के खिलाफ है, जिसने मार्ग पर होटल और रेस्तरां मालिकों तथा फल विक्रेताओं को अपना नाम, जाति और धार्मिक पहचान प्रदर्शित करने के लिए कहा था।’’ Uttarakhand News</p>
<p><a title="Agnipath Scheme : मुख्यमंत्री ने अग्निवीरों के लिए किया ये बड़ा ऐलान!" href="http://10.0.0.122:1245/chief-minister-made-this-big-announcement-for-agniveers/">Agnipath Scheme : मुख्यमंत्री ने अग्निवीरों के लिए किया ये बड़ा ऐलान!</a></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                            <category>उत्तराखण्ड</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/uttarakhand/chadar-put-on-mosques-mazaars-on-kanwar-yatra-route-without-orders/article-60390</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/state/uttarakhand/chadar-put-on-mosques-mazaars-on-kanwar-yatra-route-without-orders/article-60390</guid>
                <pubDate>Sat, 27 Jul 2024 13:29:50 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2024-07/kawar-yatra.jpg"                         length="47142"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Kanwar yatra 2024: कांवड़ यात्रा-नेमप्लेट पर सुप्रीम कोर्ट ने दिया ये आदेश, जानिये&amp;#8230;</title>
                                    <description><![CDATA[kanwar yatra 2024:  नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)। उच्चतम न्यायालय ने कांवड़ यात्रा मार्गो पर खाद्य पदार्थों के विक्रेता, होटल मालिकों को अपने और अपने यहां काम करने वाले अन्य कर्मचारियों के नाम सार्वजनिक तौर पर प्रदर्शित करने के उत्तर प्रदेश पुलिस समेत अन्य के आदेश पर रोक शुक्रवार को पांच अगस्त तक बढ़ा दी। […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/supreme-court-gave-this-order-on-kanwar-yatra-nameplate-know/article-60368"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2024-07/kanwar-yatra-2024.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>kanwar yatra 2024:  नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)।</strong> उच्चतम न्यायालय ने कांवड़ यात्रा मार्गो पर खाद्य पदार्थों के विक्रेता, होटल मालिकों को अपने और अपने यहां काम करने वाले अन्य कर्मचारियों के नाम सार्वजनिक तौर पर प्रदर्शित करने के उत्तर प्रदेश पुलिस समेत अन्य के आदेश पर रोक शुक्रवार को पांच अगस्त तक बढ़ा दी। न्यायमूर्ति ऋषिकेश रॉय और न्यायमूर्ति एस वी एन भट्टी की पीठ ने ‘नाम’ प्रदर्शित करने के आदेशों की वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर संबंधित पक्षों की दलीलें सुनने के बाद रोक बढ़ाने संबंधी आदेश पारित करते हुए कहा कि यदि कोई स्वैच्छिक रूप नाम प्रदर्शित करना चाहे, तो ऐसा कर सकता है।</p>
<p><a href="http://10.0.0.122:1245/are-you-also-getting-weak-eyesight-if-you-have-to-wear-glasses-24-hours-a-day-then-definitely-try-ayurvedic-treatment-once/">Eyesight Improve: क्या आपकी भी हो रही हैं नजरें कमजोर? 24 घंटे लगाना पड़ता है चश्मा, तो एक बार जरूर अपनाएं आयुर्वेदिक इलाज…</a></p>
<p style="text-align:justify;">पीठ ने स्पष्ट किया कि पिछला आदेश (22 जुलाई) किसी को भी मालिकों और कर्मचारियों के नाम स्वेच्छा से प्रदर्शित करने से नहीं रोकता है। पीठ ने कहा, “अगर कोई स्वेच्छा से ऐसा करना चाहता है तो वह ऐसा कर सकता है, लेकिन कोई जोर नहीं देना चाहिए,” शीर्ष अदालत के समक्ष सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता ए एम सिंघवी ने उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर के एसएसपी द्वारा 17 जुलाई को जारी निर्देश का बचाव करने वाले उत्तर प्रदेश सरकार के जवाबी हलफनामे पर अपना (याचिकाकर्ता का) जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा। सिंघवी ने दलील देते हुए दावा किया कि उत्तर प्रदेश सरकार ने स्वीकार किया है कि भेदभाव हुआ है, लेकिन यह स्थायी प्रकृति का नहीं है। उन्होंने कहा कि पिछले 60 वर्षों में ऐसा कोई आदेश नहीं दिया गया था।</p>
<p><a href="http://10.0.0.122:1245/cm-revanth-reddy-announced-that-thirty-thousand-government-vacancies-will-be-filled-within-the-next-ninety-days/">Government Jobs: 30,000 नौजवानों की हो गई मौज, मिलेगी सरकारी नौकरी, सीएम ने किया ऐलान, समय-सीमा भी बताई…</a></p>
<p style="text-align:justify;">शीर्ष अदालत के समक्ष उतर प्रदेश सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने कहा कि केंद्रीय कानून खाद्य एवं सुरक्षा मानक अधिनियम 2006 के तहत नियमों के अनुसार ढाबों सहित प्रत्येक खाद्य विक्रेता को मालिकों के नाम प्रदर्शित करना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि रोक संबंधी अंतरिम आदेश इस केंद्रीय कानून के अनुरूप नहीं है। उनकी इस दलील पर अदालत ने राज्य सरकार से पूछा कि यदि ऐसा है तो इसे पूरे राज्य में क्यों नहीं लागू किया गया। शीर्ष अदालत ने सोमवार 22 जुलाई को नाम प्रदर्शित करने के आदेश पर रोक लगाते हुए उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और मध्य प्रदेश सरकारों को अगली सुनवाई 26 जुलाई से पहले अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया था।</p>
<p style="text-align:justify;">पीठ ने अपने आदेश में उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और मध्य प्रदेश सरकारों को कांवड़ यात्रियों के मार्ग में पड़ने वाले होटल, दुकानों, भोजनालयों और ढाबों के मालिकों‌ और वहां कार्यरत कर्मचारियों के नाम प्रदर्शित करने के निदेर्शों को लागू करने पर रोक लगा दी थी। पीठ ने नाम प्रदर्शित करने वाले आदेश पर पर रोक लगाते हुए कहा था, “खाद्य पदार्थ विक्रेता मालिकों, नियोजित कर्मचारियों के नाम प्रदर्शित के लिए मजबूर नहीं किया जाना चाहिए।” शीर्ष अदालत के समक्ष याचिकाएं अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस की नेता सांसद महुआ मोइत्रा, गैर सरकारी संगठन- एसोसिएशन फॉर प्रोटेक्शन आॅफ सिविल राइट्स (एपीसीआर) के अलावा शिक्षाविद प्रोफेसर अपूवार्नंद और अन्य द्वारा दायर की गई थीं।</p>
<p style="text-align:justify;">याचिकाओं में मुजफ्फरनगर के एसएसपी द्वारा विक्रेता मालिकों और कर्मचारियों के नाम प्रदर्शित करने के लिए 17 जुलाई को जारी निर्देश को भेदभावपूर्ण और भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14, 15, 17, 19(1)(जी) और 21 का उल्लंघन बताया गया है। शीर्ष अदालत की ओर से 22 जुलाई को जारी नोटिस पर उत्तर प्रदेश सरकार ने अपने जबावी हलफनामे में कहा है कि श्रावण महीने में ‘यात्रा’ करने वाले कांवड़ियों की सार्वजनिक सुरक्षा व्यवस्था, पारदर्शिता और सूचित विकल्प सुनिश्चित करने के लिए सभी खाद्य विक्रेता मालिकों और कर्मचारियों की पहचान प्रदर्शित करने के निर्देश दिए गए थे।</p>
<p style="text-align:justify;">उत्तर प्रदेश सरकार ने अपने जवाब में आगे कहा कि यह निर्देश (नाम प्रदर्शित करने का) सीमित भौगोलिक सीमा के लिए अस्थायी प्रकृति का था। यह आदेश गैर-भेदभावपूर्ण और उन ‘कांवड़ियों’ की धार्मिक भावनाओं को ध्यान में रखते हुए लाया गया, जो केवल ‘सात्विक’ खाद्य पदार्थ पसंद करते हैं और गलती से भी अपनी मान्यताओं के खिलाफ नहीं जाते<br />
उत्तर प्रदेश सरकार ने कहा, “अनजाने में किसी ऐसे स्थान पर अपनी पसंद से अलग भोजन करने की दुर्घटना कांवड़ियों के लिए पूरी यात्रा के साथ ही क्षेत्र में शांति और सौहार्द को बिगाड़ सकती है, जिसे बनाए रखना राज्य का कर्तव्य है।”</p>
<p style="text-align:justify;">हलफनामे में सरकार ने कहा कि यह उपाय एक सक्रिय कदम है, क्योंकि अतीत में बेचे जा रहे भोजन के प्रकार के बारे में गलतफहमियों के कारण तनाव, अशांति और सांप्रदायिक दंगे भड़के थे। शीर्ष अदालत के समक्ष शुक्रवार 26 जुलाई को सुनवाई के दौरान उत्तराखंड सरकार की ओर से उप महाधिवक्ता जतिंदर कुमार सेठी ने कहा कि त्योहार के दौरान पूरे राज्य में कानूनी आदेश लागू किया गया, लेकिन इस बीच शीर्ष अदालत के अंतरिम आदेश ने समस्या पैदा कर दी है। मध्य प्रदेश सरकार ने खाद्य विक्रेताओं द्वारा मालिकों के नाम प्रदर्शित करने के लिए कोई निर्देश जारी करने से इनकार किया। शीर्ष अदालत में सुनवाई के दौरान हस्तक्षेप याचिका दायर करने वाले कुछ ‘कांवड़ यात्रियों’ की ओर से दलील दी गई कि सूचना प्रदर्शित करना विशेषाधिकार नहीं और वे सूचित विकल्प चाहते हैं। उन्होंने कहा कि कुछ भोजनालयों में हिंदू देवताओं के नाम हैं, लेकिन उनके मालिक और कर्मचारी अलग-अलग धर्मों के हैं।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/supreme-court-gave-this-order-on-kanwar-yatra-nameplate-know/article-60368</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/supreme-court-gave-this-order-on-kanwar-yatra-nameplate-know/article-60368</guid>
                <pubDate>Fri, 26 Jul 2024 17:56:57 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2024-07/kanwar-yatra-2024.jpg"                         length="64984"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>

            </channel>
        </rss>
        