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                <title>Rabbit Story - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>राजा और खरगोश</title>
                                    <description><![CDATA[Story: बहुत पुरानी बात है। मॉरिशस में एक राजा रहता था। दुनिया के तमाम आलसी राजाओं की तरह वह राजा भी आलसी था और नहाता नहीं था। न नहाने के कारण उसके शरीर पर मैल की मोटी परत जम गयी। एक बार उसका शरीर खुजलाने लगा। इससे शरीर पर दाने निकल आए। राजा खुजली, दर्द […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/children-corner/the-king-and-the-rabbit-story/article-60477"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2024-07/rabbit-story.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Story: बहुत पुरानी बात है। मॉरिशस में एक राजा रहता था। दुनिया के तमाम आलसी राजाओं की तरह वह राजा भी आलसी था और नहाता नहीं था। न नहाने के कारण उसके शरीर पर मैल की मोटी परत जम गयी। एक बार उसका शरीर खुजलाने लगा। इससे शरीर पर दाने निकल आए। राजा खुजली, दर्द और दुर्गंध से परेशान हो उठा। तब राजवैद्य को बुलाया गया। राजवैद्य ने जांचकर बताया, ‘आपको नगर से बाहर किसी स्वच्छ पानी के तालाब में स्नान करना चाहिए।’</p>
<p style="text-align:justify;">नगर से बाहर एक अच्छा सा तालाब खोजा गया। राजा को तालाब दिखाया गया। राजा ने तालाब देखने के बाद उसमें नहाने की सहमति व्यक्त की। तय हुआ कि कल प्रात:काल राजा तालाब में स्नान करेंगे। दूसरे दिन राजा अपने सहायकों व सेवकों के साथ नहाने को तालाब पहुंचे तो उन्हें यह देखकर बड़ी निराशा हुई कि तालाब का पानी गंदला था। इसका मतलब है कोई जानवर उसमें नहाकर गया है क्योंकि कल शाम तक तो तालाब का पानी एकदम साफ था। Story</p>
<p style="text-align:justify;">तय हुआ कि कल सुबह स्नान किया जाएगा। कोई तालाब के पानी को गंदा न करे, इसके लिए तीर-धनुषधारी एक पहरेदार की तालाब पर नियुक्ति कर दी गई। रात भर पहरेदार तालाब के चारों ओर घूम-घूमकर पहरा देता रहा पर रात भर कोई जानवर या मनुष्य नहाने को तो क्या पानी पीने तक को नहीं आया।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रात: होने वाली थी। थकाहारा पहरेदार एक जगह बैठा ऊंघ रहा था। तभी एक बड़ा-सा खरगोश उसके पास आया। उसने नमस्ते की। फिर उसने कहा, ‘आप काफी थक गये होंगे। मेरे पास ऊंची पहाड़ियों से लाया गया बड़ा शानदार शहद है। इसके गुण और स्वाद तो दुनिया के सभी शहदों से श्रेष्ठ हैं। अगर आप खाना पसंद करें तो मैं थोड़ा-सा आपको दे सकता हूं। खाते ही आपके शरीर में शक्ति-फुर्ती का संचार होगा।’</p>
<p style="text-align:justify;">शहद की बात सुनकर पहरेदार के मुंह में पानी आ गया। उसने खरगोश से शहद लिया और चाट गया। कुछ ही देर में उसे गहरी नींद आ गयी। खरगोश बड़ा चालाक और शैतान था। वह नित्य तालाब में मस्ती से स्नान करता था। वह नहीं चाहता था कि राजा तालाब को गंदा करे। उसने पहरेदार को नशीला रस शहद में मिलाकर दिया था ताकि पहरेदार बेसुध हो जाए। इसके बाद खरगोश ने तालाब में जी भरकर स्नान किया और दिन से ज्यादा उछल कूद मचाई कि पानी अधिक गंदा दिखे। Story</p>
<p style="text-align:justify;">जब राजा स्नान करने पहुंचा तो पानी गंदा दिखा और पहरेदार सोता हुआ। उसे जगाकर डांट-फटकार लगाई तो पहरेदार ने अपने साथ घटी घटना का ब्यौरा कह सुनाया। राजा ने अपने कर्मचारियों को आदेश दिया कि उस शैतान खरगोश को पकड़ कर लाया जाए। आसपास के क्षेत्र और जंगल सैनिकों ने छान मारे मगर खरगोश कहीं न मिला।</p>
<p style="text-align:justify;">खरगोश कैसे पकड़ा जाए, इस के लिए सब लोग राजा के समक्ष बैठे विचार विमर्श कर रहे थे। न तो बैठक में कोई ठीक-सा सुझाव आया, न किसी ने खरगोश को पकड़ने की जिम्मेदारी ली। राजा बड़ा खिन्न था। तभी वहां एक कछुआ आया। कछुए ने राजा से कहा, महाराज, अगर आप मुझे आज्ञा दें तो मैं खरगोश को पकड़वा सकता हूं।</p>
<p style="text-align:justify;">सभी हैरत से कछुए को देखने लगे। राजा आश्चर्य से बोला, ‘तू….! तू खरगोश को पकड़वाएगा।’<br />
कछुआ बोला, ‘हां महाराज, अगर आप चाहते हैं कि खरगोश पकड़ा जाए तो आप पहरा हटा लें। पहरेदार की कुर्सी यहीं रहने दें। आज पहरा मैं दूंगा।’</p>
<p style="text-align:justify;">राजा बोला, ‘ठीक है, भाई, तुझे भी आजमा लेते हैं।’ यह कहने के बाद राजा ने बैठक समाप्त कर दी। सभी अपने घर चले गये।</p>
<p style="text-align:justify;">रात को कछुए ने मजबूती से चिपकाने वाला गोंद कुर्सी के ऊपर और नीचे पायों पर लगा दिया। फिर वह कुर्सी के पायों के नीचे घुसा। कुर्सी के पाए उसकी पीठ पर मजबूती से चिपक गये। कछुआ फिर चैन की नींद सो गया।<br />
सुबह होने से पहले ही खरगोश आया। इधर-उधर दूर तक उसने देखा। चौकीदार कहीं नजर न आया। खाली कुर्सी देखकर वह और खुश हुआ। वह उछलकर कुर्सी पर चढ़ बैठा। वह ठीक से चिपक गया पर इस बात का उसे पता न चला। उसके कुर्सी पर बैठने से कछुए की नींद खुल गयी। उसने कुर्सी की ओर देखा। खरगोश को बैठा पाकर वह चल दिया। अब कुर्सी साथ जा रही थी। Story</p>
<p style="text-align:justify;">खरगोश कुर्सी के चलने से घबरा गया। उसने उतरना चाहा तो हाथ-पैर कुर्सी से अलग न हुए। उसने नीचे की ओर झुककर देखा। कछुए ने कहा, ‘आराम से बैठे रहो। तुम्हें मैं राजा के पास ले जा रहा हूं।’ खरगोश ने बहुतेरा जोर लगाया लेकिन कुर्सी से खुद को छुड़ा न पाया। उसने कछुए को डराया, धमकाया और ललचाया भी पर कछुआ उसे छोड़ने को तैयार न हुआ। उसने अपने चलने की गति तेज कर दी।</p>
<p style="text-align:justify;">जब कछुआ राजा के पास पहुंचा तो वे तालाब पर जाने के लिए चलने वाले थे। राजा और सभी कर्मचारी कछुए, खरगोश और कुर्सी को देखकर दंग रह गये। राजा ने खरगोश को मारने का आदेश दिया लेकिन कछुए की अनुनय-विनय पर उसे चेतावनी देकर रिहा कर दिया गया। कछुए व खरगोश की बातें सुनकर राजा ने कछुए को इनाम दिया। फिर रोजाना नहाने का संकल्प लिया। Story</p>
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                                                            <category>बच्चों का कोना</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 29 Jul 2024 17:47:54 +0530</pubDate>
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