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                <title>Tourist - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>मनाली में पटरी से उतरी जिदंगी</title>
                                    <description><![CDATA[-7.8 डिग्री तक पहुंचा पारा  | Manali मनाली (सच कहूँ डेस्क)। भारी बर्फबारी के चलते हिमाचल प्रदेश (Himachal Pradesh) के मनाली में जिदंगी (Life) पटरी से उतर गई है। एक ओर जहां बर्फबारी (Snowfall)के चलते यातायात व्यवस्था ठप पड़ गई है। वहीं बिजली की आपूर्ति बाधित होने से लोगों को भारी परेशानी झेलनी पड़ रही […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/lives-derailed-in-manali/article-12370"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-01/manali-snowfall.jpg" alt=""></a><br /><h2>-7.8 डिग्री तक पहुंचा पारा  | Manali</h2>
<p style="text-align:justify;"><strong>मनाली (सच कहूँ डेस्क)।</strong> भारी बर्फबारी के चलते हिमाचल प्रदेश (Himachal Pradesh) के मनाली में जिदंगी (Life) पटरी से उतर गई है। एक ओर जहां बर्फबारी (Snowfall)के चलते यातायात व्यवस्था ठप पड़ गई है। वहीं बिजली की आपूर्ति बाधित होने से लोगों को भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है। भीषण ठंड के चलते स्थानीय लोगों को जीना मुहाल हो गया है। मनाली (Manali) में न्यूनतम तापमान -7.8 डिग्री सेल्सियस तक गिर चुका है। नलों की पाइपलाइनें जम गई हैं। इस कारण पीने के पानी तक की किल्लत हो गई है। वहीं होटलों और घरों में खाने के सामान तक की किल्लत हो गई है। वहीं बर्फबारी को लेकर पर्यटकों में भारी उत्साह है। मौसम विभाग के अनुसार 11 से 14 जनवरी के बीच मूसलाधार बारिश, मध्य और ऊंची पहाड़ियों में बर्फबारी का पूर्वानुमान लगाया।</p>
<p><strong> </strong></p>
<ul>
<li><strong>शिमला, मनाली और कुफरी समेत हिमाचल के ऊंचाई वाले स्थानों पर भारी बर्फबारी </strong></li>
<li><strong>पाइप लाइनों में पानी जमा, पेयजल तक की किल्लत बढ़ी</strong></li>
<li><strong>होटलों और घरों में खाने के सामान के लिए जूझ रहे लोग</strong></li>
<li><strong>बर्फबारी से पर्यटकों के चेहरों पर रौनक आई</strong></li>
<li><strong>11 से 14 जनवरी के बीच मूसलाधार बारिश, मध्य और ऊंची पहाड़ियों में बर्फबारी का पूर्वानुमान</strong></li>
</ul>
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                                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 10 Jan 2020 12:06:32 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>UP: मैनपुरी में टूरिस्ट बस पलटने से 17 की मौत, 30 घायल</title>
                                    <description><![CDATA[मैनपुरी (एजेंसी)। उत्तरप्रदेश के मैनपुरी में बुधवार सुबह एक बड़ा सड़क हादसा हुआ है।  यहां एक टूरिस्ट बस अनियंत्रित होकर पलट गई. हादसे में 17 लोगों की मौत हो गई है, जबकि 30 से अधिक लोग घायल हुए हैं। बताया जा रहा है कि बस राजस्थान के जयपुर से गुरसहायगंज के लिए जा रही थी।  […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/up-17-killed-30-injured-in-tourist-bus-reversal-in-mainpuri/article-4130"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-06/up1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>मैनपुरी (एजेंसी)। </strong>उत्तरप्रदेश के मैनपुरी में बुधवार सुबह एक बड़ा सड़क हादसा हुआ है।  यहां एक टूरिस्ट बस अनियंत्रित होकर पलट गई. हादसे में 17 लोगों की मौत हो गई है, जबकि 30 से अधिक लोग घायल हुए हैं। बताया जा रहा है कि बस राजस्थान के जयपुर से गुरसहायगंज के लिए जा रही थी।  ये हादसा मैनपुरी के थाना दन्नाहार की कीरतपुर चौकी के पास हुआ है।</p>
<p style="text-align:justify;">आपको बता दें कि अभी दो दिन पहले ही यूपी में ही आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे पर बड़ा हादसा हुआ था। सोमवार सुबह एक्सप्रेस-वे पर कन्नौज के पास रोडवेज़ की बस ने 7 लोगों को कुचल दिया था।  इनमें से 6 छात्र थे जबकि एक टीचर था।इनकी मौके पर ही मौत हो थी। बताया जा रहा है कि ये सभी गाड़ी खराब होने के बाद एक्सप्रेस-वे पर खड़े थे, तभी तेज रफ्तार बस ने पीछे से इन्हें कुचल दिया। सभी लोग संत कबीर नगर के बताए जा रहे हैं। हादसे के बाद सरकार ने मृतकों के परिजनों के लिए 2-2 लाख रुपए और घायलों के लिए 50-50 हज़ार रुपए की मदद देने का ऐलान किया था।</p>
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                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 13 Jun 2018 08:52:33 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>जयपुर से बैंकॉक के बीच हवाई सेवा जल्द</title>
                                    <description><![CDATA[आठ हजार में अप-डाउन का आॅफर जयपुर (सच कहूँ न्यूज)। पर्यटन की दृष्टि से विश्वविख्यात बैंकॉक और राजस्थान के बीच पर्यटन सेवाओं में और अधिक मजबूत के लिए जल्द ही एयर एशिया कंपनी जयपुर-बैंकॉक के बीच अपनी विमान सेवा शुरू करने जा रही है। इस संबंध में एयर एशिया ने ग्राहकों के लिए बेहद लुभावना […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/rajasthan/air-service-between-jaipur-and-bangkok-soon/article-2747"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-07/air-service.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:center;">आठ हजार में अप-डाउन का आॅफर</h2>
<p style="text-align:justify;"><strong>जयपुर (सच कहूँ न्यूज)।</strong> पर्यटन की दृष्टि से विश्वविख्यात बैंकॉक और राजस्थान के बीच पर्यटन सेवाओं में और अधिक मजबूत के लिए जल्द ही एयर एशिया कंपनी जयपुर-बैंकॉक के बीच अपनी विमान सेवा शुरू करने जा रही है। इस संबंध में एयर एशिया ने ग्राहकों के लिए बेहद लुभावना आॅफर पेश किया है। एयर एशिया 29 सितंबर-2017 से 28 अगस्त-2018 के बीच यात्रा करने के लिए 31 जुलाई से 13 अगस्त-2017 के बीच सीट बुक कराने वाले ग्राहकों को आॅफर की पेशकश की है।</p>
<p style="text-align:justify;">थाई एयर एशिया के सीईओ टैसापॉन बिजलेवेल्ड ने इस आॅफर की घोषणा की। उन्होंने बताया कि सप्ताह में चार दिन-मंगलवार, बुधवार, शुक्रवार व रविवार को जयपुर से बैंकॉक के बीच हवाई सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। उन्होंने बताया कि प्रत्येक ट्रिप के लिए प्रमोशनल किराया महज 3999 रुपए है। इस आॅफर का लाभ 29 सितंबर-2017 से 28 अगस्त-2018 के बीच यात्रा करने वाले यात्रियों को ही मिलेगा।</p>
<p style="text-align:justify;">इसके लिए उन्हें 31 जुलाई से 13 अगस्त-2017 के बीच सीट बुक करानी होगी। इसके अलावा एयर एशिया ने 29 सितंबर-2017 से ही सप्ताह में चार बार तिरूचापल्ली-बैंकॉक की उड़ान शुरू करने की भी घोषणा की है। इस मौके पर राजस्थान के पर्यटन विभाग के संयुक्त निदेशक आनंद त्रिपाठी ने बताया कि इस विमान सेवा से न केवल थाईलैंड बल्कि राजस्थान में भी पर्यटकों की संख्या बढ़ेगी।</p>
<p style="text-align:justify;">
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                                            <category>राजस्थान</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 31 Jul 2017 05:42:56 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अहमदाबाद, अब विश्व धरोहर</title>
                                    <description><![CDATA[किसी भी देश की पहचान उसकी संस्कृति और सांस्कृतिक, प्राकृतिक व ऐतिहासिक धरोहरों से होती है। ये धरोहर न सिर्फ उसे विशिष्टता प्रदान करती हैं बल्कि दूसरे देशों से उसे अलग भी दिखलाती हैं। हमारे देश में उत्तर से लेकर दक्षिण और पूर्व से लेकर पश्चिम तक यानी चारों दिशाओं में ऐसी सांस्कृतिक, प्राकृतिक और […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/article/now-ahmedabad-is-a-world-heritage/article-2329"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-07/ahmedabad.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">
</p><p style="text-align:justify;">किसी भी देश की पहचान उसकी संस्कृति और सांस्कृतिक, प्राकृतिक व ऐतिहासिक धरोहरों से होती है। ये धरोहर न सिर्फ उसे विशिष्टता प्रदान करती हैं बल्कि दूसरे देशों से उसे अलग भी दिखलाती हैं। हमारे देश में उत्तर से लेकर दक्षिण और पूर्व से लेकर पश्चिम तक यानी चारों दिशाओं में ऐसी सांस्कृतिक, प्राकृतिक और ऐतिहासिक छटाएं बिखरी पड़ी हैं कि विदेशी पर्यटक उन्हें देखकर मंत्रमुग्ध हो जाएं। प्राचीन स्मारक, मूर्ति शिल्प, पेंटिंग, शिलालेख, प्राचीन गुफाएं, वास्तुशिल्प, ऐतिहासिक इमारतें, राष्ट्रीय पार्क, प्राचीन मंदिर, अटूते वन, पहाड़, विशालकाय रेगिस्थान, खूबसूरत समुद्रीय तट, शांत द्वीप समूह और भव्य व आलीशान किले। इन धरोहरों में से कुछ धरोहर ऐसी हैं, जिनका दुनिया में कोई मुकाबला नहीं। ये धरोहर सचमुच बेमिसाल हैं। ऐसी ही एक बेमिसाल धरोहर गुजरात का छह सौ साल पुराना शहर अहमदाबाद, अब विश्व धरोहर शहर बन गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक और सांस्कृतिक संगठन यानी यूनेस्को की विश्व विरासत समिति ने हाल ही में पोलेंड के क्रेको शहर में हुई अपनी 41वीं बैठक में अहमदाबाद शहर को अपनी विश्व धरोहर सूची में शामिल कर लिया है। तुर्की, लेबनान, ट्यूनीशिया, पुर्तगाल, पेरू, कजाकिस्तान, वियतनाम, फिनलैंड, अजरबैजान, जमैका, क्रोएशिया, जिम्बाब्वे, तंजानिया, दक्षिण कोरिया, अंगोलम और क्यूबा समेत करीब 20 देशों ने इस बैठक में सांस्कृतिक शहरों की श्रेणी में अहमदाबाद का समर्थन किया।</p>
<p style="text-align:justify;">इन देशों ने अहमदाबाद को नक्काशीदार लकड़ी की हवेली की वास्तुकला के अलावा सैकड़ों वर्षों से इस्लामिक, हिंदू और जैन समुदायों के एक धर्मनिरपेक्ष सह-अस्तित्व वाला शहर मानते हुए सर्वसम्मति से चुना। इन देशों के प्रतिनिधियों के लिए अहमदाबाद का महत्व इसलिए भी था कि यही वह शहर है जहां से महात्मा गांधी के नेतृत्व में भारत के अहिंसक स्वतंत्रता संग्राम का संघर्ष शुरू हुआ और वह 1947 में अंजाम तक पहुंचा।</p>
<p style="text-align:justify;">अहमदाबाद शहर को विश्व धरोहरों की फेहरिश्त में शामिल करने के लिए केन्द्र और राज्य सरकार दोनों बीते सात साल से लगातार कोशिशें कर रहे थे। गुजरात सरकार ने अहमदाबाद को सांस्कृतिक शहरों की श्रेणी में वर्ल्ड हैरिटेज सिटी का दर्जा प्रदान करने के लिए 31 मार्च, 2011 में इस शहर का विस्तृत विवरण तैयार कर एक प्रस्ताव विश्व विरासत केन्द्र को भेजा था। प्रस्ताव में अहमदाबाद के अभूतपूर्व सार्वभौम मूल्यों का उल्लेख करते हुए पिछली कई सदियों से इस शहर की अनोखी बसाहट, आर्थिक, वाणिज्यिक और सांस्तिक क्षेत्र में आत्मनिर्भरता के साथ विभिन्न समुदाय के लोगों के बीच सहअस्तित्व की भावना का खास तौर से उल्लेख था।</p>
<p style="text-align:justify;">यूनेस्को द्वारा विश्व विरासत में शामिल कर लिए जाने के बाद, वह जगह या स्मारक पूरी दुनिया की धरोहर बन जाता है। इन विश्व स्मारकों का संरक्षण यूनेस्को के इंटरनेशनल वर्ल्ड हेरिटेज प्रोग्राम के तहत किया जाता है। यूनेस्को हर साल दुनिया भर के ऐसे ही बेहतरीन सांस्कृतिक और प्राकृतिक स्मारकों को सूचीबद्घ कर, उन्हें उचित देखभाल प्रदान करती है। इन विश्व धरोहरों का वह प्रचार-प्रसार करती है, जिससे ज्यादा से ज्यादा पर्यटक इन स्मारकों के इतिहास, स्थापत्य कला, वास्तु कला और प्राकृतिक खूबसूरती से वाकिफ होते हैं। विश्व विरासत की सूची में शामिल होने का एक फायदा यह भी होता है कि उससे दुनिया भर के पर्यटक उस तरफ आकर्षित होते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">अब जबकि अहमदाबाद को विश्व धरोहर का दर्जा मिल गया है, तो केन्द्र सरकार और गुजरात सरकार दोनों की ये सामूहिक जिम्मेदारी बनती है कि वह इस शहर के ऐतिहासिक स्मारकों और पर्यटक स्थलों को और भी ज्यादा बेहतर तरीके से सहेजने और संवारने के लिए, एक व्यापक कार्ययोजना बनाए। ताकि ये अनमोल धरोहर हमारी आने वाली पीढ़ियों के लिए भी सुरक्षित रहे। विश्व विरासत की सूची में शामिल होने के बाद, निश्चित तौर पर जिम्मेदारियों में भी इजाफा होता है। जिम्मेदारियां न सिर्फ सरकार की बढ़ी हैं, बल्कि हर भारतीय नागरिक की यह जिम्मेदारी बनती है कि वह अपनी इन अनमोल ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहरों को सहेज कर रखें।</p>
<p style="text-align:justify;">
<em>तुर्की, लेबनान, ट्यूनीशिया, पुर्तगाल, पेरू, कजाकिस्तान, वियतनाम, फिनलैंड, अजरबैजान, जमैका, क्रोएशिया, जिम्बाब्वे, तंजानिया, दक्षिण कोरिया, अंगोलम और क्यूबा समेत करीब 20 देशों ने एक बैठक में सांस्कृतिक शहरों की श्रेणी में अहमदाबाद का समर्थन किया।</em></p>
<p><em><strong>जाहिद खान</strong></em></p>
<p> </p>
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                <link>https://www.sachkahoon.com/article/now-ahmedabad-is-a-world-heritage/article-2329</link>
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                <pubDate>Sun, 16 Jul 2017 04:22:28 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>गोरखालैंड मांग की धधकती आग</title>
                                    <description><![CDATA[लो दुनिया भर में प्राकृतिक सुंदरता के लिए विख्यात और पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र दार्जिलिंग आज अराजकता और हिंसा की चपेट में है। आंदोलन से जनजीवन अस्त-व्यस्त है और शहर से रौनक गायब है। आगजनी और हिंसा के कारण यहां आए पर्यटक खौफ और दहशत में हैं। इस बदतर हालात के लिए जितना […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/article/gorkhaland-andolan-in-darjeeling/article-1413"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-06/gorkhaland-andolan.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">लो दुनिया भर में प्राकृतिक सुंदरता के लिए विख्यात और पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र दार्जिलिंग आज अराजकता और हिंसा की चपेट में है। आंदोलन से जनजीवन अस्त-व्यस्त है और शहर से रौनक गायब है।</p>
<p style="text-align:justify;">आगजनी और हिंसा के कारण यहां आए पर्यटक खौफ और दहशत में हैं। इस बदतर हालात के लिए जितना दोषी पश्चिम बंगाल की सरकार है ,उतना ही गोरखालैंड राज्य की मांग कर रहे गोरखा जनमुक्ति मोर्चा (जीजेएम) दल भी। बहरहाल पश्चिम बंगाल की ममता सरकार राज्य के पहाड़ी इलाकों दार्जिलिंग के स्कूलों में बांग्ला भाषा थोपने की जल्दबाजी नहीं दिखायी होती, तो गोरखा जनमुक्ति मोर्चा को भी विरोध की चिंगारी को दावानल में बदलने का मौका हाथ नहीं लगता।</p>
<p style="text-align:justify;">बेशक राज्य सरकार को अधिकार है कि वह शिक्षा का पाठ्यक्रम सुनिश्चित करे, लेकिन इसका तात्पर्य यह नहीं कि वह क्षेत्रीय भावनाओं के साथ खिलवाड़ करे। वह भी तब, जब पहाड़ी इलाकों में भाषा और क्षेत्रीय अस्मिता को लेकर पहले से ही भावनाएं उफान पर हों। ऐसे संवेदनशील मसले पर निर्णय लेने से पहले उसे सहमतिपूर्ण वातावरण निर्मित करना चाहिए था।</p>
<p style="text-align:justify;">अगर बात रायशुमारी की होती, तो दार्जिलिंग अराजकता और आग की लपटों की भेंट नहीं चढ़ता। गोरखा जनमुक्ति मोर्चा के आंदोलनकारियों के प्रति राज्य सरकार की सख्ती का नतीजा है कि 35 साल पुराने गोरखालैंड राज्य की मांग पुन: धधक उठी है।</p>
<p style="text-align:justify;">राज्य सरकार द्वारा गोरखा टेरिटोरियल एडमिनिस्टेÑशन और गोरखा जनमुक्ति मोर्चा के अधीन रहे नगर निगमों में आर्थिक अनियमितताओं के आरोपों की जांच ने भी आंदोलन की आग में घी का काम किया है। इन परिस्थितियों के बीच गोरखा जनमुक्ति मोर्चा के लिए अपना जनाधार बढ़ाने के लिए एक संवेदनशील मुद्दे की जरुरत थी, जिसे पश्चिम बंगाल की सरकार ने सहजता से उपलब्ध करा दिया। गोरखा जनमुक्ति मोर्चा इसे हथियार बनाकर गोरखालैंड राज्य की मांग को धार दे रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">जहां तक गोरखालैंड राज्य के मांग का मसला है, तो दार्जिलिंग प्रारंभ में पश्चिम बंगाल का हिस्सा नहीं था। इतिहास में जाएं तो 1865 में जब अंग्रेजों ने चाय का बागान शुरु किया, तो यहां बड़ी संख्या में मजदूर काम करने आए। उस वक्त कोई अंतर्राष्ट्रीय सीमा रेखा नहीं थी, लिहाजा ये लोग खुद को गोरखा किंग के अधीन और इस इलाके को अपनी जमीन मानते थे।</p>
<p style="text-align:justify;">लेकिन आजादी के बाद भारत ने नेपाल के साथ शांति व दोस्ती के लिए 1950 का समझौता किया और सीमा विभाजन के बाद यह हिस्सा भारत में आ गया। उसके बाद से ही यहां के लोग अलग राज्य के निर्माण की मांग कर रहे हैं। इसकी प्रमुख वजह यह है कि बंगाली और गोरखा मूल के लोग सांस्कृतिक व ऐतिहासिक तौर पर एक-दूसरे से अलग मानते हैं और यही कारण है कि गोरखालैंड राज्य की मांग को बल मिल रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">तथ्य यह भी कि ब्रिटिशकाल में दार्जिलिंग सिक्किम का हिस्सा हुआ करता था। बाद में उसका विलय बंगाल में कर दिया गया। लेकिन इसके बावजूद भी यहां के लोगों की संस्कृति, खान-पान व पहनावा बंगाल से भिन्न है।</p>
<p style="text-align:justify;">भाषा से इतर अन्य मामलों में भी यहां के लोग स्वयं को बंगालियों से अलग मानते हैं। यह भिन्नता ही यहां के लोगों को अलग गोरखालैंड राज्य के लिए प्रेरित कर रही है। यहां के लोगों का तर्क है कि जब भाषा और क्षेत्रीय अस्मिता के आधार पर देश में राज्यों का बंटवारा हुआ और मराठी बोलने वालों के लिए महाराष्ट्र और गुजराती बोलने वालों के लिए गुजरात राज्य का गठन हुआ, तो उसी आधार पर गोरखालैंड राज्य का गठन क्यों नहीं होना चाहिए?</p>
<p style="text-align:justify;">गोरखालैंड राज्य की मांग की शुरुआत गोरखा नेशनल लिबरेशन फ्रंट के नेता सुभाष घीसिंग ने की थी। उन्होंने 5 अप्रैल 1980 को गोरखालैंड नाम दिया। इसके बाद पश्चिम बंगाल की राज्य सरकार दार्जिलिंग गोरखा हिल काउंसिल बनाने पर राजी हुई। बेहतर होगा कि केंद्र, राज्य व गोरखा जनमुक्ति मोर्चा सभी मिलकर इस मसले पर गंभीरता से विचार कर समाधान का रास्ता तलाशें।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>-रीता सिंह</strong></p>
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                <pubDate>Mon, 19 Jun 2017 23:18:45 +0530</pubDate>
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