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                <title>Voting Rate : गिरता मतदान चिंताजनक</title>
                                    <description><![CDATA[– Voting Rate – मतदान का गिरता दर (Voting Rate) लोकतन्त्र के लिए सही नहीं हैं। राजनीतिक दलों में भी गिरते मतदान से खलबली मची है। जानकारों का मानना है कि कम मतदान सत्ताधारी दल को नुकसान पहुंचाता हैं लेकिन कुछ का मानना है कि बम्पर वोटिंग सत्ता में बदलाव लेकर आती है। अगर पिछले […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/falling-voting-rate/article-56830"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2024-04/vote1.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:center;"><strong>– Voting Rate –</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">मतदान का गिरता दर (Voting Rate) लोकतन्त्र के लिए सही नहीं हैं। राजनीतिक दलों में भी गिरते मतदान से खलबली मची है। जानकारों का मानना है कि कम मतदान सत्ताधारी दल को नुकसान पहुंचाता हैं लेकिन कुछ का मानना है कि बम्पर वोटिंग सत्ता में बदलाव लेकर आती है। अगर पिछले कुछ चुनावों पर गौर करें तो चार बार मतदान की दर कम हुई तो सत्ता परिवर्तन हुआ और सिर्फ एक बार मतदान में गिरावट पर सत्ता में बदलाव नहीं हुआ।सन् 1980 में मतदान प्रतिशत घटा तो जनता पार्टी की सरकार गई। 1989 में मतदान प्रतिशत गिरने पर कांग्रेस की सरकार हटी। 1991 में फिर मतदान की दर में कमी आई तो विश्वनाथ प्रताप सिंह की सरकार गई। लेकिन 1999 में मतदान कम होने पर सरकार रिपिट हुई।</p>
<p style="text-align:justify;">2004 में फिर मतदान में गिरावट से सत्ता परिवर्तन हुआ यह गणित इस बार कितना सही होगा या नहीं यह कहा नहीं जा सकता लेकिन गिरता वोटिंग परसेंटेज का परिणाम देश व प्रदेश में चल रही राजनीतिक हवा के विरूद्ध होता। पक्ष और विपक्ष दोनों ही कम वोटिंग को अपने-अपने पक्ष में होने का दावा कर रहे हैं लेकिन कम वोटिंग लोकतन्त्र के पक्ष में बिल्कुल नहीं। वोटर को चुनाव के दिन अपने मताधिकार का अवश्य प्रयोग करना चाहिए। अगर कोई भी उम्मीदवार पसन्द नहीं तो भी उन्हें न पसन्द करने का वोटर के पास ‘नोटा’ के रूप में विकल्प है। निसन्देह गिरता मतदान लोकतंत्र के लिए चिंताजनक है।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>विचार</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 27 Apr 2024 10:09:59 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>Lok Sabha Election : भजनलाल ने किया अपना मताधिकार का उपयोग</title>
                                    <description><![CDATA[जयपुर (सच कहूँ न्यूज)। राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा (CM Bhajan Lal Sharma) ने लोकसभा चुनाव (Lok Sabha Election) में शुक्रवार को यहां अपने मताधिकार का उपयोग किया। शर्मा ने सुबह जगतपुरा गेटोर रोड़ सिद्धार्थ नगर स्थित नवोदय महिला शिक्षक प्रशिक्षण महाविद्यालय में स्थापित मतदान केन्द्र पर अपना वोट डाला। इस अवसर पर उनकी पत्नी […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/rajasthan/lok-sabha-election-voting-cm-bhajan-lal-sharma/article-56506"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2024-04/lok-sabha-election-2.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>जयपुर (सच कहूँ न्यूज)।</strong> राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा (CM Bhajan Lal Sharma) ने लोकसभा चुनाव (Lok Sabha Election) में शुक्रवार को यहां अपने मताधिकार का उपयोग किया। शर्मा ने सुबह जगतपुरा गेटोर रोड़ सिद्धार्थ नगर स्थित नवोदय महिला शिक्षक प्रशिक्षण महाविद्यालय में स्थापित मतदान केन्द्र पर अपना वोट डाला। इस अवसर पर उनकी पत्नी गीता शर्मा ने भी अपना मत डाला। इस मौके श्री शर्मा ने वहां उनसे मिले कार्यकतार्ओं से बात भी की। मुख्यमंत्री ने जयपुर के आराध्य गोविंद देवजी मंदिर में दर्शन भी किए और प्रदेश की शांति एवं समृद्धि की कामना की।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 19 Apr 2024 10:23:15 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>महिला जिंदा, सूची में मृत दिखा वोट काटी</title>
                                    <description><![CDATA[मोरना (सच कहूँ/राहुल प्रजापति)। नगर पंचायत भोकरहेडी में नगर निकाय के चुनाव (Morna News) में दंपति वोट डालने गए तो मतदाता सूची में पत्नी के नाम के आगे मृतक होने से हैरत में पड़ गए। पीठासीन अधिकारी ने वोट डालने से साफ मना कर दिया। जिसके बाद दंपति ने कड़ी नाराजगी जताई। पति ने कहा […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/vote-cut-off-showing-dead-in-women-alive-list/article-47181"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-05/morna-news.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>मोरना (सच कहूँ/राहुल प्रजापति)।</strong> नगर पंचायत भोकरहेडी में नगर निकाय के चुनाव (Morna News) में दंपति वोट डालने गए तो मतदाता सूची में पत्नी के नाम के आगे मृतक होने से हैरत में पड़ गए। पीठासीन अधिकारी ने वोट डालने से साफ मना कर दिया। जिसके बाद दंपति ने कड़ी नाराजगी जताई। पति ने कहा कि साहब मेरी पत्नी तो जिंदा है और आपके सामने खड़ी है। हंगामे की सूचना र पहुंचे सैक्टर मजिस्ट्रेट ने दंपति को समझा बुझाकर मामले को शांत किया।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="कैराना में मतदाताओं में दिखा जोश, उत्साह से किया मतदान" href="http://10.0.0.122:1245/kairana-polling-concluded-peacefully/">कैराना में मतदाताओं में दिखा जोश, उत्साह से किया मतदान</a></p>
<p style="text-align:justify;">कस्बा भोकरहेडी के मोहल्ला नेहरू चौक निवासी राहुल अपनी पत्नी मोनिका के साथ गुरुवार को इंटर कालेज के बूथ संख्या 12 पर वोट डालने गए तो मतदाता सूची क्रमांक 315 पर मोनिका के नाम के सामने मृतक लिखा होने से पीठासीन अधिकारी ने वोट डालने से साफ मना कर दिया तथा कहा की आपकी वोट कट चुकी है। जिसके बाद दंपति ने कड़ी नाराजगी जताई। (Morna News) पति ने कहा कि साहब मेरी पत्नी तो जिंदा है और आपके सामने खड़ी है।</p>
<p style="text-align:justify;">हंगामे के सूचना सैक्टर मजिस्ट्रेट डा. सुरेंद्र कुमार वर्मा मौके पर पहुंचे तथा मतदाता सूची से मिलान किया तो मृतक लिखा पाया। जिसके बाद सैक्टर मजिस्ट्रेट ने समझा बुझाकर मामले को शांत किया। जिसके बाद पीड़िता ने डीएम से शिकायत करने की बात कही और निराश होकर चले गए।                                                                                                                              <strong>भोकरहेडी कस्बे में दंपति को समझाते सैक्टर मजिस्ट्रेट डा. सुरेंद्र कुमार वर्मा।</strong></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 04 May 2023 21:25:01 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पाकिस्तान की नेशनल असेंबली में नए प्रधानमंत्री के लिए मतदान कल</title>
                                    <description><![CDATA[इस्लामाबाद (एजेंसी)। पाकिस्तान की संसद के निचले सदन नेशनल असेंबली में सोमवार को नए प्रधानमंत्री के लिए मतदान को लेकर बैठक बुलाई गई हैं। अल जजीरा ने यह रिपोर्ट दी हैं। रविवार तड़के तक चले घटनाक्रम में सत्तारूढ़ दल के सदस्यों और अध्यक्ष की अनुपस्थिति के बीच सदन में हुए मत विभाजन में इमरान सरकार […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/news-brief/voting-for-the-new-prime-minister-in-the-national-assembly-of-pakistan-tomorrow/article-32265"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-04/voting-for-new-pm-of.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>इस्लामाबाद (एजेंसी)।</strong> पाकिस्तान की संसद के निचले सदन नेशनल असेंबली में सोमवार को नए प्रधानमंत्री के लिए मतदान को लेकर बैठक बुलाई गई हैं। अल जजीरा ने यह रिपोर्ट दी हैं। रविवार तड़के तक चले घटनाक्रम में सत्तारूढ़ दल के सदस्यों और अध्यक्ष की अनुपस्थिति के बीच सदन में हुए मत विभाजन में इमरान सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव के पक्ष में 174 वोट पड़े। जिसके बाद उन्हें पद से हटा दिया गया। असेंबली के कार्यवाहक अध्यक्ष अयाज सादिक ने कहा कि उम्मीदवार रविवार को स्थानीय समयानुसार सुबह 11 बजे तक नामांकन पत्र दाखिल कर सकते हैं। इमरान खान और गठबंधन सहयोगियों विश्वास मत खो दिया। उन्हें खस्ताहाल अर्थव्यवस्था और अपने वादों को पूरा करने में विफल रहने का दोषी ठहराया गया।</p>
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]]></content:encoded>
                
                                                            <category>विदेश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 10 Apr 2022 11:11:28 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>विस्कॉन्सिन में मतों की दोबारा गिनती, बाइडेन को फिर मिली जीत</title>
                                    <description><![CDATA[वाशिंगटन। अमेरिका के विस्कॉन्सिन राज्य में मतों की दोबारा गिनती में भी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के खिलाफ डेमोक्रेटिक उम्मीदवार जो बाइडेन की जीत की पुष्टि हुई है। वाशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक ट्रंप की टीम ने 18 नवंबर को विस्कॉन्सिन के दो बड़े प्रांतो मिल्वौकी और डेन में मतों की दोबारा गिनती का अनुरोध […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/international/vote-count-again-in-wisconsin-biden-wins-again/article-20235"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-11/biden-leads-in-georgia-but-results-are-likely-to-be-change1.gif" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>वाशिंगटन।</strong> अमेरिका के विस्कॉन्सिन राज्य में मतों की दोबारा गिनती में भी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के खिलाफ डेमोक्रेटिक उम्मीदवार जो बाइडेन की जीत की पुष्टि हुई है। वाशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक ट्रंप की टीम ने 18 नवंबर को विस्कॉन्सिन के दो बड़े प्रांतो मिल्वौकी और डेन में मतों की दोबारा गिनती का अनुरोध किया था। यहां बिडेन को लेकभग 20,000 मतों से जीत मिली थी। रिपोर्ट के अनुसार मतों की दोबारा गिनती में मिल्वौकी और डेन में न केवल बाइडेन की जीत की पुष्टि हुई बल्कि विस्कॉन्सिन में उन्हें 87 मतों की और बढ़त भी मिल गई है। ट्रंप ने अभी भी तीन नवंबर को हुये राष्ट्रपति चुनाव में बाइडेन की जीत को पूरी तरह स्वीकार नहीं किया है। उनकी टीम ने चुनाव में धोखाधड़ी का आरोप लगाते हुये कई राज्यों में मुकदमें भी दायर किये हैं।</p>
<p> </p>
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                                                            <category>विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 30 Nov 2020 11:29:53 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>चिंतन खत्म, वोट बैंक की जंग शुरू</title>
                                    <description><![CDATA[संसद में पारित तीन कृषि बिलों पर राजनीति इस हद तक गर्मा गई है कि पंजाब में तो विधान सभा चुनाव 2020 का मैदान ही बन गया है। पिछले 22 वर्षों से भाजपा के साथ चल रहे गठबंधन को शिरोमणी अकाली दल ने तोड़ दिया है। केंद्र सरकार में अकाली दल की मंत्री हरसिमरत कौर […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/thinking-over-vote-bank-war-begins/article-18773"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-09/parliament3.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">संसद में पारित तीन कृषि बिलों पर राजनीति इस हद तक गर्मा गई है कि पंजाब में तो विधान सभा चुनाव 2020 का मैदान ही बन गया है। पिछले 22 वर्षों से भाजपा के साथ चल रहे गठबंधन को शिरोमणी अकाली दल ने तोड़ दिया है। केंद्र सरकार में अकाली दल की मंत्री हरसिमरत कौर बादल के इस्तीफा देने के बाद एनडीए से नाता तोड़ने के बाद पंजाब की दो अन्य पार्टियां सत्तापक्ष कांग्रेस व आम आदमी पार्टी किसान मुद्दों पर सक्रिय हो गई हैं, अब देखना यह है कि इस जंग में किसानों का क्या लाभ होगा, यह तो भविष्य ही बताएगा। इसके अलावा राजनीतिक पार्टियां कृषि वर्ग को लेकर चिंतित भी हैं। पंजाब कृषि प्रधान राज्य है और किसानों का वोट बैंक सत्ता प्राप्त करने में अहम भूमिका रखता है।</p>
<p style="text-align:justify;">शिरोमणी अकाली दल का मुख्य आधार किसानी रहा है, जो अपने आधार को दोबारा प्राप्त करने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगाने के लिए चल पड़ा है। कांग्रेस द्वारा 2017 में किसानों का कर्ज माफी का वायदा पूरा कर सरकार बनाने में सफल रहना अकाली दल के लिए बड़ी चुनौती है। भाजपा ने 117 सीटों पर चुनाव लड़ने की बात कह दी है। इस माहौल में चिंता वाली बात यह है कि कृषि एक बार फिर से राजनीति का मुद्दा बन गई है। विवेक व चिंतन कहीं नजर नहीं आ रहे। कृषि विशेषज्ञों व अर्थशास्त्रियों के विचारों, दृष्टिकोणों का किसी पार्टी में जिक्र तक नहीं। राजनीतिक पार्टियां कृषि मुद्दों पर एकजुट होने की बजाय अपने पार्टी विंगों को मजबूत करने में जुट गई हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">पंजाब में कोई ऐसा सांझा मंच नहीं बन सका जिसमें सभी पार्टियों के नुमायंदे, किसान नेता, अर्थशास्त्री, समाज शास्त्री शामिल हों लेकिन वह सभी चर्चा कर अपनी राय केंद्र तक पहुंचाएं। पंजाब के किसानों को दुर्दशा से बचाने के साथ-साथ बौद्धिक कंगाली से भी बचाने की जरूरत है। कृषि संबंधी गहराई से होने वाली चर्चा राजनीतिक नारों में खो गई है। किसान को चिंतन, सावधान, तकनीक व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बदलाव लाकर खुशहाल बनाने का कहीं जिक्र तक नहीं। किसान राजनीतिक हितों की लड़ाई से अलग होकर अपने हित के बारे में सोच सकेंगे, यह सवाल अभी चुनौती बना हुआ है। डर इस बात का है कि कहीं किसानों की आवाज राजनीतिक शोर में दबकर न रह जाए।</p>
<p> </p>
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                                                            <category>सम्पादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 28 Sep 2020 09:37:57 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>हरियाणा का सबसे ऊंचा बूथ, वोटरों की सोच भी ऊंची</title>
                                    <description><![CDATA[चकूला जिले के कालका विधानसभा का गांव
 धामण हरियाणा-हिमाचल प्रदेश के बार्डर पर
वादियों मं बसा है। यह प्रदेश का सबसे ऊंचा मतदान केंद्र है।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/haryanas-highest-booth-voters-thinking-is-also-high/article-10915"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2019-10/vote.jpg-9.jpg" alt=""></a><br /><h1 style="text-align:center;">एक-एक वोट के लिए तय किया 10 किलोमीटर का सफर (vote)</h1>
<p style="text-align:justify;">कालका | पहाड़ों पर रहने वाले जितनी मेहनत जीवन गुजर बसर करने में करते हैं, (vote) इससे कहीं अधिक वे मतदान करने में भी करते हैं। कोई पांच तो कोई 10 किलोमीटर का सफर पैदल नापकर मतदान केंद्र तक पहुंचा। पंचकूला जिले के कालका विधानसभा का गांव धामण हरियाणा-हिमाचल प्रदेश के बार्डर पर वादियों मं बसा है। यह प्रदेश का सबसे ऊंचा मतदान केंद्र है। 135 ढाणियों व आठ गांव कैनण, टीपरा, हरसो, सूग, चपलाना, रिवाड़ी, खरणी व धामण को मिलाकर बूथ-141 पर 725 वोटर हैं।</p>
<ul>
<li style="text-align:justify;">बूथ पर 331 महिला और 394 पुरुष वोटर हैं</li>
<li style="text-align:justify;"> ये वे वोटर हैं, जो दोनों प्रदेशों के बार्डर पर रहते हैं,</li>
<li style="text-align:justify;">रोजाना कच्चे रास्तों से आना-जाना पड़ता है।</li>
<li style="text-align:justify;">यहां चुनाव में कच्चे रास्ते पक्का करना ही सबसे बड़ा मुद्दा होता है</li>
<li style="text-align:justify;">यह मुद्दा वर्ष 1994 से लगातार चल रहा है।</li>
</ul>
<h3 style="text-align:justify;">25 मिनट बंद रही वीवीपैट, ग्रामीणों ने किया इंतजार</h3>
<p style="text-align:justify;">धामण मतदान केंद्र की वीवीपैट में तकनीकी खामी आने पर मतदान केंद्र रोकना पड़ा। मतदान अधिकारी संजीव कुमार ने बताया कि कुछ देर के लिए खराबी आई थी। ग्रामीण वोटर खुशीराम के अनुसार तकनीकी गड़बड़ी हो सकती है, हमारे यहां वोटर काफी शांत हैं। सभी ने इंतजार किया। क्योंकि दूर दराज से यहां तक वोट डालने पहुंचे थे। अब बिना वोट डाले क्यों लौटते।</p>
<h3 style="text-align:justify;">35 किलोमीटर पैदल जाते रहे हैं वोटर</h3>
<p style="text-align:justify;">90 वर्षीय तुलाराम ने बताया कि पांच-दस किलोमीटर तो बहुत छोटी बात है। वर्ष 1994 से पहले तो वे दोनों ओर 35 किलोमीटर का सफर तय कर वोट डालने जाया करते थे। न पक्के रास्ते थे और न ही सड़क। आज भी सड़क पक्की नहीं है, लेकिन मतदान केंद्र पांच किलोमीटर की दूरी पर है। फिर भी यहां मतदान में सबकी आस्था है। सरकार उनकी सुने तो गांव तक सड़कें पक्की कर दे। यही सबसे बड़ी डिमांड है।</p>
<p> </p>
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                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 22 Oct 2019 16:17:35 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पेयजल की समस्या का समाधान न होने से पैंतावास खुर्द और दातौली ने नहीं डाले वोट</title>
                                    <description><![CDATA[जितेंद्र सिंह फोर्स के साथ पहुंचे, लेकिन ग्रामीण समझाने पर भी नहीं मानें।
 वहीं दातौली में एसडीएम विरेंद्र सिंह पहुंचे तो ग्रामीणों ने
 मतदान करने से साफ-साफ मना कर दिया।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/due-to-lack-of-solution-to-drinking-water-problem-khurva-and-datouli-did-not-vote/article-10914"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2019-10/vote-3.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:center;">बूथों के बाहर बैठ मतदाताओं के आने का इंतजार करते रहे। (vote)</h2>
<p style="text-align:justify;">चरखी दादरी| जिले की दोनों विधानसभा के 2 गांवों में लंबे समय चल रही (vote) पेयजल की समस्या को लेकर गांव पैंतावास खुर्द व बाढड़ा विधानसभा क्षेत्र के गांव दातौली के ग्रामीणों ने मतदान का बहिष्कार किया। दोनों गांव में एक भी वोट नहीं डाला गया। सिर्फ पोलिंग पार्टियां वहां बने 4 बूथों के बाहर बैठ मतदाताओं के आने का इंतजार करते रहे। दोनों ही गांव पहले से समस्या का समाधान नहीं होने पर मतदान बहिष्कार की चेतावनी दे चुके थे।</p>
<ul>
<li style="text-align:justify;">मतदान न होने की खबर मिलते ही पैंतावास खुर्द में सीटीएम जितेंद्र सिंह फोर्स के साथ पहुंचे,</li>
<li style="text-align:justify;">लेकिन ग्रामीण समझाने पर भी नहीं मानें।</li>
<li style="text-align:justify;">वहीं दातौली में एसडीएम विरेंद्र सिंह पहुंचे तो ग्रामीणों ने मतदान करने से साफ-साफ मना कर दिया।</li>
<li style="text-align:justify;">शाम 6 बजे दोनों ही गांवों के चार बूथों पर मतदान कराने गई टीम बैठी रही।</li>
</ul>
<p> </p>
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                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/haryana/due-to-lack-of-solution-to-drinking-water-problem-khurva-and-datouli-did-not-vote/article-10914</link>
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                <pubDate>Tue, 22 Oct 2019 16:11:24 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>जनता के साथ नेताओं ने भी लाइन में लगकर किया मतदान</title>
                                    <description><![CDATA[बदले मौसम की वजह से सुबह मतदान की गति धीमी थी।
लेकिन, करीब 2 घंटे के बाद लोग जुटना शुरू हो गए।
 मतदान केंद्रों पर लंबी-लंबी लाइनें लग गई।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/leaders-also-voted-in-line-with-the-public/article-10900"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2019-10/vote-2.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:center;">हरियाणा विधानसभा की 90 सीटों के लिए 1169 प्रत्याशी चुनाव मैदान में हैं (vote)</h2>
<h3 style="text-align:justify;">राज्य में कुल मतदाताओं की संख्या 1 करोड़ 83 लाख 90 हजार 525 मतदाता हैं (vote)</h3>
<p style="text-align:justify;"><strong>पानीपत |</strong> सोमवार को हरियाणा की 90 सीटों पर मतदान हो रहे हैं। नेताओं से लेकर (vote)आम जनता तक ने लाइन में लगकर मतदान किया। सुबह से ही मतदान केंद्र के बाहर लोग जुटना शुरू हो गए। हालांकि बदले मौसम की वजह से सुबह मतदान की गति धीमी थी। लेकिन, करीब 2 घंटे के बाद लोग जुटना शुरू हो गए। मतदान केंद्रों पर लंबी-लंबी लाइनें लग गई। राज्य में मुख्य मुकाबला कांग्रेस और भाजपा के बीच माना जा रहा है।</p>
<h3>चुनावी मैदान में 1169 प्रत्याशी</h3>
<p style="text-align:justify;">हरियाणा विधानसभा की 90 सीटों के लिए 1169 प्रत्याशी चुनाव मैदान में हैं। (vote) यह पिछली बार से 182 कम हैं। 2014 में 1351 उम्मीदवारों ने चुनाव लड़ा था। भाजपा, कांग्रेस ने सभी 90 सीटों पर उम्मीदवार उतारे हैं। जननायक जनता पार्टी (जजपा) के 89 उम्मीदवार मैदान में हैं। वहीं इनेलो, अकाली दल के साथ गठबंधन करके चुनाव लड़ रही है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">1.83 करोड़ मतदाता (vote)</h3>
<ul>
<li>हरियाणा में कुल मतदाताओं की संख्या 1 करोड़ 83 लाख 90 हजार 525 मतदाता हैं।</li>
<li>इनमें 98 लाख 78 हजार 42 पुरुष मतदाता और 85 लाख 12 हजार 231 महिला मतदाता हैं।</li>
<li>साथ ही, 1 लाख 7 हजार 955 सर्विस वोटर और 252 थर्ड जेंडर मतदाता हैं।</li>
<li>राज्य में कुल 19578 मतदान केंद्र बनाए गए हैं, जिनमें 19425 नियमित और 153 सहायक मतदान केंद्र हैं।</li>
<li>शहरी क्षेत्र में 5741 और ग्रामीण क्षेत्र में 13837 मतदान केंद्र हैं।</li>
</ul>
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                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/haryana/leaders-also-voted-in-line-with-the-public/article-10900</link>
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                <pubDate>Mon, 21 Oct 2019 16:31:38 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>वोट डालना सभी का अधिकार, फिर महिलाएं भी पीछे क्यों रहे : दीक्षा मैहता</title>
                                    <description><![CDATA[तो आने वाली 21 अक्टूबर को हरियाणा विधानसभा चुनाव में अपने लोकतंत्र
 को मजबूत करने के लिए पढे-लिखे, मेहनती व समाजिक विधायक को
 चुने और 100 प्रतिशत मतदान का हिस्सा बने।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/everyone-has-the-right-to-vote-then-why-should-women-also-remain-behind-deeksha-maihata/article-10891"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2019-10/vote-1.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:center;">सौ प्रतिशत वोट डालकर लोकतंत्र को मजबूत करे</h2>
<ul>
<li style="text-align:justify;">
<h3>आज के समय में महिलाएं मतदान में बहुत कम रुचि लेती है (vote)</h3>
</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>टोहाना (सच कहूँ/सुरेंद्र गिल)।</strong> देश में चुनाव को लोकतंत्र का सबसे मजबूत आधार माना गया है। आज के समय में महिलाओं को लोकतंत्र में अपने वोट का उपयोग करना बहुत जरूरी है। वोट डालने का सभी को अधिकार फिर महिलाएं भी पीछे क्यों रहे। यह बात जरूरतमंदों को आपातकालीन समय मे रक्त मुहैया करवाने वाली अग्रणी सामाजिक संस्था यंग ब्लड महिला विंग की सदस्य दीक्षा मैहता ने कही। उन्होंने कहा की लोकसभा चुनाव में पहली बार मतदान करने के बाद अब विधानसभा में भी पहली बार वोट डालूंगी। शहरों के अंदर पिछले सालों में महिलाओं में मतदान के प्रति जागरूकता आई है।</p>
<h3>समाजिक विधायक को चुने और 100 प्रतिशत मतदान का हिस्सा बने</h3>
<ul>
<li style="text-align:justify;"> महिलाओं का मतदान फीसदी बहुत कम रहता है</li>
<li style="text-align:justify;">महिलाओं को भी अपने अधिकार को समझ के मतदान करना चाहिए।</li>
<li style="text-align:justify;">दीक्षा मैहता ने कहा कि अच्छे नेता का तभी चुनाव होगा जब वोट हमारा अधिकार है</li>
<li style="text-align:justify;">हमे ऐसे लोकतंत्र विधायक को चुनना चाहिए जो विधानसभा में जाकर आमजन की समस्या की आवाज उठा सके।</li>
<li style="text-align:justify;">हर नागरिक को अपनी विवेक का प्रयोग करके धन,लोभ के लालच से बचकर अपने मत का प्रयोग करना चाहिए।</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;">तो आने वाली 21 अक्टूबर को हरियाणा विधानसभा चुनाव में अपने लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए पढे-लिखे, मेहनती व समाजिक विधायक को चुने और 100 प्रतिशत मतदान का हिस्सा बने। लोकतंत्र के इस महापर्व में हम सभी हिस्सा लेकर एक स्वस्छ विधायक बनाना है जो हमारे क्षेत्र की समस्याओं को विधानसभा में उठा सके ।आज के समय हमारी सबसे बड़ी समस्या रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य आदि मूलभूत सुविधा को पूरा कर सके उसे अपना वोट देकर लोकतंत्र को मजबूत करना चाहिए।</p>
<p> </p>
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                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 20 Oct 2019 16:51:39 +0530</pubDate>
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                <title>मतदान लोकतांत्रिक व्यवस्था की नींव है</title>
                                    <description><![CDATA[मतदान न केवल लोकतांत्रिक व्यवस्था की नींव है बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था के लिए भी अनिवार्य है। जब कोई सरकार जनहित के कार्य नहीं करती, नागरिकों को समस्याओं का सामना करना पड़ता है, शासन तंत्र भ्रष्ट हो जाता है तो जनता चुनाव का इंतजार करती है वहीं एक ऐसा अवसर होता है जब जनता के हाथ […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/voting-is-the-foundation-of-a-democratic-system/article-10650"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2019-10/vote.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">मतदान न केवल लोकतांत्रिक व्यवस्था की नींव है बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था के लिए भी अनिवार्य है। जब कोई सरकार जनहित के कार्य नहीं करती, नागरिकों को समस्याओं का सामना करना पड़ता है, शासन तंत्र भ्रष्ट हो जाता है तो जनता चुनाव का इंतजार करती है वहीं एक ऐसा अवसर होता है जब जनता के हाथ में भ्रष्टाचारियों की नकेल होती है। अगर जनता इस अवसर पर सदुपयोग करे तभी शासन की बागडोर सुरक्षित हाथों में सौंपी जा सकती है।</p>
<p style="text-align:justify;">लेकिन 100 प्रतिशत वोटर मतदान की प्रक्रिया में भाग ही नहीं लेते। 2009 में हुए हरियाणा विधानसभा चुनावों में 72.29 प्रतिशत मतदाताओं ने मतदान प्रक्रिया में हिस्सा लिया वर्ष 2014 के विधानसभा चुनावों में 76.14 प्रतिशत मतदान हुआ। लोकसभा चुनावों में यह आंकड़ा और भी कम हो जाता है। लगभग एक चौथाई मतदाता इस चुनावी पर्व के भागीदार बनते ही नहीं जोकि चिंताजनक बात है। गली-मोहल्ले में बैठकर चुने हुए प्रतिनिधि में कमियां निकालना और मतदान के दिन मतदान न करना क्या यह तर्कसंगत है? कुछ लोग यह सोचकर मतदान नहीं करते कि हमारे क्षेत्र के उम्मीदवारों में कोई भी चुने जाने के काबिल ही नहीं तो उनके लिए अब नोटा का विकल्प है। अगर 100 प्रतिशत मतदान होने लग जाए तो हम जीते हुए प्रतिनिधियों की सोच भी बदल सकते हैं उन्हें सोचने पर मजबूर कर सकते हैं कि लोग उदासीन नहीं है।</p>
<p style="text-align:justify;">आने वाले चुनावों में फिर उन्हीं मतदाताओं का सामना करना पड़ेगा। असल में कम मतदान भी भ्रष्टाचार को बढ़ावा देता है। भ्रष्टाचार जो हमारे देश व समाज को खोखला कर रहा है और देश में चुनावी भ्रष्टाचार एवं अपराध द्रौपदी के चीर की भांति बढ़ रहा है। उसके प्रतिकार के स्वर एवं प्रक्रिया जितनी व्यापक होनी चाहिए, उसका दिखाई न देना लोकतंत्र की सुदृढ़ता को कमजोर करने का द्योतक है। बुराई और विकृति को देखकर आंख मूंदना या कानों में अंगुलियां डालना विडम्बनापूर्ण है। इसके विरोध में व्यापक अहिंसक जनचेतना जगाने की अपेक्षा है। आज चुनावी भ्रष्टाचार का रावण लोकतंत्र की सीता का अपहरण करके ले जा रहा है। सब उसे देख रहे हैं पर कोई भी जटायु आगे आकर उसका प्रतिरोध करने की स्थिति में नहीं है।</p>
<p style="text-align:justify;">भ्रष्टाचार के प्रति जनता एवं राजनीतिक दलों का यह मौन, यह उपेक्षाभाव उसे बढ़ाएगा नहीं तो और क्या करेगा? देश की ऐसी नाजुक स्थिति में व्यक्ति-व्यक्ति की जटायुवृत्ति को जगाया जा सके और चुनावी भ्रष्टाचार के विरोध में एक शक्तिशाली समवेत स्वर उठ सके और उस स्वर को स्थायित्व मिल सके तो लोकतंत्र की जड़ों को सिंचन मिल सकता है। दशहरे के इस पर्व पर हमें भ्रष्टाचार रूपी रावण के दहन का संकल्प लेकर चुनाव के दिन लोकतंत्र के इस महापर्व में अपनी 100 प्रतिशत भागीदारी सुनिश्चित करनी चाहिए। इसी में लोकतंत्र व राष्टÑ की भलाई है।</p>
<p> </p>
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                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>सम्पादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 07 Oct 2019 21:19:32 +0530</pubDate>
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                <title>घटता  वोट प्रतिशत चिंता का विषय</title>
                                    <description><![CDATA[चुनाव आयोग की तमाम कोशिशों के बाद घटता वोट प्रतिशत चिंता का कारण है। लोकसभा चुनाव के तीन चरण बीत गये हैं, लेकिन इन तीनों चरणों में वोट प्रतिशत में कमी रिकार्ड की गयी है। गिरता वोट प्रतिशत किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए चिंता की बात है। चुनाव आयोग और सरकार की पिछले कई […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/vote-percentage/article-8740"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2019-04/vote.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">चुनाव आयोग की तमाम कोशिशों के बाद घटता वोट प्रतिशत चिंता का कारण है। लोकसभा चुनाव के तीन चरण बीत गये हैं, लेकिन इन तीनों चरणों में वोट प्रतिशत में कमी रिकार्ड की गयी है। गिरता वोट प्रतिशत किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए चिंता की बात है। चुनाव आयोग और सरकार की पिछले कई वर्षों से ये लगातार कोशिशें जारी हैं कि वोट प्रतिशत को बढ़ाया जाए। लेकिन ये दुख व चिंता का विषय है कि तमाम कोशिशों व प्रचार के बाद भी वोट प्रतिशत बढ़ने की बजाय घट रहा है। असल में लोकतांत्रिक व्यवस्था में प्रत्येक मतदाता का लोकतंत्र में भागीदारी करना बड़ा महत्तवपूर्ण माना जाता है। वोट प्रतिशत में बढ़ोत्तरी किसी स्वस्थ लोकतांत्रिक व्यवस्था की निशानी है।</p>
<p style="text-align:justify;">लोकसभा के तीन चरणों के मतदान का वोटिंग रूझान देखें तो ऐसा लगता है कि देश के बड़े राज्यों और बड़े शहरों में अभी भी एक तबका मतदान में रूचि नहीं रखता। चुनाव आयोग द्वारा प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार 95 सीटों के लिए हुए चुनाव में औसतन 66 फीसदी मतदाताओं ने अपने मताधिकार का उपयोग किया। इसमें से यदि नोटा में पड़े हुए मत घटा दिए जावें तब तो प्रतिशत और घट जाएगा। यह आंकड़ा भी तब आया जब मणिपुर, पुडुचेरी तमिलनाडु और बंगाल में 75 से 80 प्रतिशत तक मतदान हुआ। यदि वहां के मतदाता भी अन्य राज्यों की तरह ही मतदान करते तब औसत आंकड़ा घटकर 60 फीसदी के करीब पहुंच सकता था। इसका चुनाव परिणामों पर क्या असर पड़ेगा ये अलग बात है लेकिन चुनाव आयोग द्वारा किये जाने वाले इंतजाम और राजनीतिक दलों के जोरदार प्रचार के बावजूद यदि देश का लगभग एक तिहाई मतदाता उदासीन है तो इसका संज्ञान लिया जाना जरूरी है। राजनीतिक विशलेषकों के मुताबिक किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में वोटरों की उदासीनता बेहतर लक्षण नहीं है।</p>
<p style="text-align:justify;">अगर वोटर लोकतांत्रिक व्यवस्था के प्रति उदासीनता दिखाएंगे तो लोकतंत्र की गाड़ी का बेपटरी हो जाने का खतरा हमेशाा सिर पर मंडराता रहेगा।<br />
देश के सबसे बड़े राज्य यूपी में जहां भाजपा, सपा-बसपा गठबंधन और कांग्रेस के बीच जबर्दस्त त्रिकोणीय संघर्ष है और जहाँ से नरेंद्र मोदी, सोनिया गांधी, मायावती, राहुल गांधी और अखिलेश यादव जैसे दिग्गज मैदान में हों वहां का औसत मतदान केवल 62 फीसदी के आसपास रहना विचारणीय प्रश्न है क्योंकि ये कहा जाता है कि दिल्ली की सत्ता का रास्ता लखनऊ अर्थात उप्र से होकर ही जाता है। इसी तरह महाराष्ट्र में जहां भाजपा-शिवसेना और कांग्रेस-राकांपा के बीच जोरदार मुकाबला है वहाँ का मतदान प्रतिशत 57 फीसदी रहा जो केवल राजनीति में रूचि रखने वालों के लिए ही नहीं अपितु समाजशास्त्र के अध्ययनकतार्ओं के लिए भी शोध का विषय है। इसमें कोई दो राय नहीं है कि यूपी के वोटरों को काफी जागरूक माना जाता है। यहां के वोटरों की राजनीति में सहभागिता एवं सक्रियता किसी से छिपी नहीं है।</p>
<p style="text-align:justify;">साल 2014 के लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी को मात्र 31 फीसदी मतों के साथ जब 282 लोकसभा सीटें मिल गईं तब विपक्ष सहित राजनीतिक टिप्पणीकार लगातार ये मुद्दा उठाते रहे कि एक तिहाई जनसमर्थन के बल पर प्रधानमन्त्री बने नरेंद्र मोदी ये दावा करते फिरते हैं कि जनादेश उनके पास है। वैसे बात गलत नहीं है लेकिन आजादी के बाद से शायद ही कभी ऐसा हुआ होगा जब केंद्र की सत्ता में रही पार्टी के पास 50 फीसदी से ज्यादा मतदाताओं का समर्थन रहा हो। भारतीय लोकतंत्र जिस वयस्क मताधिकार पर आधारित है उसमें मत देना ऐच्छिक है। बीते कुछ समय से नोटा नामक जो व्यवस्था की गई उससे उन लोगों का भी पता चल जाता है जो चुनाव लड़ रहे किसी भी प्रत्याशी को पसंद नहीं करते हुए तटस्थ रहना पसंद करते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">हर चुनाव में नया मतदाता तो उत्साह के साथ मतदान करता है किन्तु पहले वाले निराश होकर घर बैठ जाते हैं। जिन राज्यों या सीटों पर 75 और 80 फीसदीमतदान हुआ वहां के मतदाताओं की जागरूकता का चुनाव आयोग को प्रचार करना चाहिए। लोकतंत्र जनता के द्वारा संचालित तंत्र है। ऐसे में नेतृत्व की चयन प्रक्रिया में चयनकर्ता की सक्रिय भागीदारी बेहद जरूरी है। देखने में आया है कि मतदान के दिन घर में बैठकर टीवी देखने वाले कथित बुद्धिजीवी ही चुनाव के बाद व्यवस्था नहीं सुधरने को लेकर सबसे ज्यादा मुंह चलाते हैं। पुरानी कहावत थी जैसा राजा तैसी प्रजा। लेकिन आज के जमाने में जैसी प्रजा तैसा राजा होता है। इसलिए राजा या नेता चुनने वाले ही यदि उदासीन हैं तब सत्ता कैसी होगी ये आसानी से समझा जा सकता है। घटते वोट प्रतिशत के पीछे राजनीतिक दलों का रवैया भी कम जिम्मेदार नहीं है।</p>
<p style="text-align:justify;">राजनीतिक उठापटक और अस्थिरता का एक लंबा दौर हमारे देश में रहा है। राजनीति में भ्रष्टाचार के घालमेल के चलते आम आदमी का राजनीति से मोहभंग हो गया। आम आदमी के राजनीति के प्रति बेरूखी के चलते लोकतंत्र के महापर्व के प्रति लगाव भी कम हुआ। लोकतंत्र के महापर्व में मतदाताओं की सहभागिता के लिये चुनाव आयोग की ओर से भी जागरूकता अभियान के अंतर्गत तरह-तरह के आयोजनों पर पैसा फूंका जाता है। लेकिन उसके बाद भी एक तिहाई और कहीं-कहीं तो उससे भी ज्यादा मतदाता यदि अपने और देश के भविष्य के प्रति इतने उदासीन रहते हों तब इसे अच्छा लक्षण नहीं माना जा सकता। विगत 70 सालों में हमारे देश के सामाजिक जीवन पर राजनीति की छाया इतनी व्यापक और घनी हो चुकी है कि गांव में बैठे अनपढ़ से लेकर अभिजात्यवर्गीय क्लब और अन्य उच्चवर्गीय जमावड़ों में भी प्रत्यक्ष या परोक्ष तौर पर अधिकाँश समय राजनीति ही चर्चा का विषय रहती है। नागरिकों को यह समझना होगा कि लोकतंत्र में सहभागिता के बिना न तो उनका भला होगा और न ही लोकतंत्र का भला होगा। नागरिकों को अपनी जिम्मेदारी समझते हुये लोकतंत्र के महापर्व में अपनी सहभागिता को बढ़ाना होगा। असल में जब लोकतंत्र में नागरिकों की सहभागिता बढ़ेगी तभी एक स्वस्थ, सुंदर एवं सुदृढ़ लोकतंत्र की स्थापना कर सकेंगे।</p>
<p style="text-align:right;"><strong>-डॉ. श्रीन्घथ सहाय<br />
</strong></p>
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<p style="text-align:right;"><strong> </strong></p>
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                                                            <category>लेख</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 27 Apr 2019 09:18:43 +0530</pubDate>
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