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                <title>Nepal Floods - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <description>Nepal Floods RSS Feed</description>
                
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                <title>Nepal Floods: नेपाल में बाढ़ की तबाही दुनिया के सामने, तिब्बत में तस्वीर अब भी धुंधली; मौतों के आंकड़ों में बड़ा अंतर</title>
                                    <description><![CDATA[नेपाल में बाढ़ की तबाही दुनिया के सामने, तिब्बत में तस्वीर अब भी धुंधली; मौतों के आंकड़ों में बड़ा अंतर]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/nepals-flood-devastation-in-front-of-the-world-picture-in/article-90328"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-08/nepal-floods.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;"><strong>Nepal Floods:  नेपाल और तिब्बत में आई विनाशकारी बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है।</strong> नदियों के उफान और अचानक आई बाढ़ ने सीमावर्ती इलाकों में घरों, सड़कों, पुलों और बुनियादी ढांचे को बुरी तरह प्रभावित किया है। लेकिन इस प्राकृतिक आपदा के बीच एक और बड़ा सवाल खड़ा हो गया है—<strong>आखिर तिब्बत में हुई तबाही की वास्तविक तस्वीर दुनिया के सामने कितनी आ पा रही है?</strong></p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">नेपाल की राजधानी काठमांडू से लगातार सामने आ रही रिपोर्टों, प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों और राहत-बचाव दलों की जानकारी ने वहां हुए नुकसान की तस्वीर काफी हद तक स्पष्ट कर दी है। इसके उलट, चीन के संवेदनशील क्षेत्र तिब्बत से सूचनाओं का प्रवाह बेहद सीमित दिखाई दे रहा है। यही वजह है कि दोनों देशों में सामने आए मृतकों के आंकड़ों में भी बड़ा अंतर नजर आ रहा है।</p>
<h4 style="text-align:justify;">नेपाल में मृतकों का आंकड़ा 579, चीन में सिर्फ पांच | Nepal Floods</h4>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">द गार्जियन की रिपोर्ट के मुताबिक, शुक्रवार तक नेपाल में बाढ़ से मरने वालों की आधिकारिक संख्या बढ़कर <strong>579</strong> हो गई थी। वहीं, चीन की ओर से तिब्बत में इस आपदा से <strong>पांच लोगों की मौत</strong> की जानकारी सामने आई।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मृतकों के आंकड़ों में यह अंतर इसलिए भी चर्चा का विषय बना हुआ है क्योंकि तिब्बत की ओर ग्यिरोंग सीमा चौकी के आसपास कई गांव बसे हुए हैं, जहां बड़ी संख्या में लोग रहते हैं। इन इलाकों में बाढ़ से व्यापक नुकसान की खबरें सामने आई हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">ऐसे में सवाल उठता है कि जब सीमावर्ती इलाकों में तबाही का पैमाना इतना बड़ा बताया जा रहा है, तो तिब्बत में मृतकों और प्रभावित लोगों की संख्या इतनी कम कैसे है? हालांकि, उपलब्ध सीमित सूचनाओं के आधार पर किसी निष्कर्ष पर पहुंचना मुश्किल है।</p>
<h4 style="text-align:justify;">नेपाल में प्रत्यक्षदर्शियों ने बताई तबाही की कहानी</h4>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">नेपाल में पत्रकारों और राहतकर्मियों ने प्रभावित इलाकों तक पहुंचकर स्थानीय लोगों और बचे हुए लोगों से बातचीत की। इन प्रत्यक्षदर्शी बयानों से बाढ़ के दौरान हुए घटनाक्रम की विस्तृत तस्वीर सामने आई। स्थानीय लोगों ने बताया कि किस तरह अचानक पानी का स्तर बढ़ा, देखते ही देखते पानी घरों और बाजारों में घुस गया और लोगों को सुरक्षित स्थानों की ओर भागने तक का समय नहीं मिल पाया।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इन बयानों के जरिए आपदा के दौरान हुई घटनाओं की कड़ियों को जोड़ने में मदद मिली है। हालांकि, बाढ़ इतनी अचानक और भयावह क्यों आई, इसके पीछे की सटीक वजह अभी भी वैज्ञानिक जांच का विषय बनी हुई है।</p>
<h4 style="text-align:justify;">तिब्बत में सरकारी रिपोर्टिंग, लेकिन तबाही की तस्वीर सीमित</h4>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">चीन के सरकारी मीडिया ने बाढ़ के बाद राहत और बचाव अभियानों को प्रमुखता से दिखाया। प्रभावित इलाकों में पत्रकारों को भेजे जाने की जानकारी भी सामने आई। लेकिन रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस <strong>बचाव अभियान, राहत सामग्री और प्रशासन की तैयारियों</strong> पर रहा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">द गार्जियन की रिपोर्ट के मुताबिक, तिब्बत के एक राहत केंद्र से रिपोर्टिंग कर रहे एक पत्रकार के पीछे कई लोग मौजूद थे, लेकिन रिपोर्ट के दौरान उनसे बातचीत नहीं की गई। यही अंतर नेपाल और तिब्बत की आपदा रिपोर्टिंग को अलग करता है। नेपाल में जहां पत्रकारों को स्थानीय लोगों से सीधे बात करने और घटनाओं के बारे में जानकारी जुटाने का अवसर मिला, वहीं तिब्बत में ऐसी स्वतंत्र रिपोर्टिंग बेहद सीमित दिखाई देती है।</p>
<h4 style="text-align:justify;">तिब्बत में सूचनाओं पर नियंत्रण पुराना मुद्दा</h4>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">तिब्बत लंबे समय से चीन के सबसे संवेदनशील क्षेत्रों में शामिल रहा है। यहां राजनीतिक, धार्मिक और सामाजिक गतिविधियों पर कड़े सरकारी नियंत्रण की खबरें आती रही हैं। तिब्बती लोगों की अधिक स्वायत्तता और धार्मिक स्वतंत्रता से जुड़ी मांगों को लेकर अतीत में विरोध प्रदर्शन भी हुए हैं। इन घटनाओं के बाद चीन की ओर से सुरक्षा व्यवस्था और सूचनाओं पर नियंत्रण और सख्त किए जाने की रिपोर्टें सामने आती रही हैं। इसी पृष्ठभूमि में प्राकृतिक आपदा के दौरान स्वतंत्र सूचनाओं का सीमित प्रवाह एक गंभीर चुनौती बन जाता है।</p>
<h4 style="text-align:justify;">विदेशी पत्रकारों के लिए भी आसान नहीं है तिब्बत</h4>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">तिब्बत में अंतरराष्ट्रीय पत्रकारों के लिए स्वतंत्र रूप से रिपोर्टिंग करना आम तौर पर आसान नहीं माना जाता। विदेशी मीडिया प्रतिनिधियों को कई बार सरकार की ओर से आयोजित और नियंत्रित दौरों के माध्यम से ही प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचने की अनुमति मिलती है। ऐसी परिस्थितियों में पत्रकारों के लिए स्थानीय लोगों से स्वतंत्र रूप से बातचीत करना और घटनाओं की अलग-अलग स्रोतों से पुष्टि करना मुश्किल हो सकता है। रिपोर्ट के अनुसार, कुछ तिब्बतियों को पासपोर्ट रखने में भी प्रतिबंधों का सामना करना पड़ता है और पत्रकारों से बातचीत करने को लेकर भी उन्हें जोखिम उठाना पड़ सकता है।</p>
<h2 style="text-align:justify;">'राष्ट्रीय सुरक्षा' के नजरिए से देखा जाता है तिब्बत</h2>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">लंदन स्थित SOAS यूनिवर्सिटी ऑफ लंदन के चाइना इंस्टीट्यूट के निदेशक <strong>स्टीव त्सांग</strong> ने द गार्जियन से बातचीत में कहा कि तिब्बत से जुड़ी हर चीज को चीन में राष्ट्रीय सुरक्षा के नजरिए से देखा जाता है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">उनके मुताबिक, इस माहौल में ऐसी जानकारी के सामने आने की संभावना कम रहती है जिसे शीर्ष स्तर पर मंजूरी प्राप्त न हो।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">यही वजह है कि तिब्बत में आई बाढ़ जैसी बड़ी प्राकृतिक आपदा के बावजूद वहां से स्वतंत्र और विस्तृत जमीनी रिपोर्टिंग सीमित नजर आती है।</p>
<h4 style="text-align:justify;">सवाल सिर्फ आंकड़ों का नहीं, पारदर्शिता का भी</h4>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">नेपाल और तिब्बत में सामने आए आंकड़ों का अंतर अपने आप में किसी गड़बड़ी का प्रमाण नहीं है। दोनों क्षेत्रों में बाढ़ का प्रभाव अलग-अलग हो सकता है और शुरुआती आंकड़े समय के साथ बदल भी सकते हैं। लेकिन इतनी बड़ी आपदा के बीच <strong>स्वतंत्र जानकारी, प्रत्यक्षदर्शियों की आवाज और पारदर्शी आंकड़ों का उपलब्ध होना बेहद महत्वपूर्ण है। </strong>नेपाल में पत्रकारों की जमीनी रिपोर्टिंग ने जहां आपदा की भयावहता को दुनिया के सामने रखने में मदद की, वहीं तिब्बत में सीमित सूचना प्रवाह के कारण वहां हुए वास्तविक नुकसान का आकलन करना अभी भी कठिन बना हुआ है। <strong>बाढ़ ने दोनों तरफ तबाही मचाई, लेकिन दुनिया के सामने आई तस्वीर एक जैसी नहीं है। नेपाल से त्रासदी की आवाजें साफ सुनाई दे रही हैं, जबकि तिब्बत की वास्तविक स्थिति अब भी कई सवालों के पीछे छिपी हुई है।</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>विदेश</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 29 Aug 2026 10:49:13 +0530</pubDate>
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                <title>Nepal landslide: नेपाल में भूस्खलन व बाढ़ से 14 की मौत, चार पर्वतारोही भी हुए लापता</title>
                                    <description><![CDATA[बीजिंग। नेपाल में लगातार हो रही भारी बारिश के चलते भूस्खलन और बाढ़ की घटनाओं में 14 लोगों की जान चली गई और कई अन्य लापता हो गए हैं। नेपाली पुलिस ने 5 अक्टूबर को इसकी जानकारी दी। पुलिस प्रवक्ता ने बताया कि इलम जिले में हुई भूस्खलन की कई घटनाओं में 14 लोग मारे गए […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/landslides-and-floods-in-nepal-kill-14-with-four-climbers-missing/article-76553"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2025-10/nepal-landslide.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">बीजिंग। नेपाल में लगातार हो रही भारी बारिश के चलते भूस्खलन और बाढ़ की घटनाओं में 14 लोगों की जान चली गई और कई अन्य लापता हो गए हैं। नेपाली पुलिस ने 5 अक्टूबर को इसकी जानकारी दी। पुलिस प्रवक्ता ने बताया कि इलम जिले में हुई भूस्खलन की कई घटनाओं में 14 लोग मारे गए और चार लोग अभी भी लापता हैं। वहीं, बाढ़ के कारण रसुवा जिले में चार पर्वतारोही भी अज्ञात अवस्था में हैं। Nepal landslide news</p>
<p style="text-align:justify;">नेपाल के अधिकांश हिस्सों में 3 अक्टूबर से लगातार बारिश जारी है, जिससे भूस्खलन और जलप्रलय जैसी स्थितियां उत्पन्न हो गई हैं। आपदा से निपटने के लिए नेपाल सरकार ने काठमांडू घाटी में 4 से 6 अक्टूबर तक वाहनों के आवागमन पर रोक लगा दी है।</p>
<p style="text-align:justify;">स्थानीय प्रशासन और राहत संगठन प्रभावित क्षेत्रों में बचाव और राहत कार्य में जुटे हुए हैं। अधिकारियों ने जनता से अपील की है कि वह सुरक्षित स्थानों पर रहें और आवश्यक होने पर ही बाहर निकलें। यह लगातार हो रही प्राकृतिक आपदा नेपाल में जनजीवन और सड़क एवं आवागमन के साधनों पर गंभीर प्रभाव डाल रही है। Nepal landslide news</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>विदेश</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
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                <pubDate>Sun, 05 Oct 2025 18:18:18 +0530</pubDate>
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                <title>Nepal Floods and Landslide: नेपाल में प्राकृतिक आपदा से मचा कोहराम, 100 की मौत, 67 लापता</title>
                                    <description><![CDATA[Nepal Floods and Landslide: काठमांडू (एजेंसी)। नेपाल में लगातार मानसून की बारिश के कारण हुए भूस्खलन और बाढ़ के कारण 100 लोगों की मौत हो गई और 67 अन्य लापता हैं। मीडिया रिपोर्टों से यह जानकारी मिली। मीडिया आउटलेट ‘हिमालयन’ ने बताया कि देश भर में देर से मानसून के कारण आई बाढ़ और भूस्खलन […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/natural-disaster-wreaks-havoc-in-nepal-100-dead-67-missing/article-62760"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2024-09/nepal-flood.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Nepal Floods and Landslide: काठमांडू (एजेंसी)। नेपाल में लगातार मानसून की बारिश के कारण हुए भूस्खलन और बाढ़ के कारण 100 लोगों की मौत हो गई और 67 अन्य लापता हैं। मीडिया रिपोर्टों से यह जानकारी मिली। मीडिया आउटलेट ‘हिमालयन’ ने बताया कि देश भर में देर से मानसून के कारण आई बाढ़ और भूस्खलन में 100 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 67 लापता बताए जा रहे हैं। इसके अलावा इस आपदा में 100 अन्य लोग घायल हुए हैं। गृह मंत्रालय के अनुसार, ललितपुर में 20, धाडिंग में 15, काठमांडू में 12, कावरे में 10, मकवानपुर में सात, सिंधुपालचोक में 6, सोलुखुम्बु में पांच, पंचथर में 5 और भक्तपुर में 5 लोगों की मौत हुई है।</p>
<h3>हजारों सुरक्षाकर्मियों ने 3 हजार 39 लोगों को सुरक्षित बचाया</h3>
<p style="text-align:justify;">इसके अलावा, रिपोर्ट में कहा गया है कि दोलखा में तीन, सिंधुली में दो, धनकुटा में दो, महोत्तरी में दो और रामेछाप, झापा, उदयपुर, इलम, सप्तरी और नुवाकोट में एक-एक व्यक्ति की मौत हुई है। नेपाल पुलिस के प्रवक्ता दान बहादुर कार्की ने बताया कि शुक्रवार शाम से लगातार हो रही बारिश के कारण आई आपदाओं में 74 लोग घायल हुए हैं। कार्की ने बताया कि काठमांडू घाटी में 48 लोगों की मौत और 15 के घायल होने की पुष्टि हुई है और 21 लोग अभी भी लापता हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रवक्ता ने कहा, ‘‘बचाव कार्य जारी है और हताहतों की संख्या और बढ़ सकती है।’’ गृह मंत्रालय के प्रवक्ता ऋषिराम तिवारी के अनुसार बाढ़ और भूस्खलन प्रभावित क्षेत्रों में खोज और बचाव के लिए कुल 9 हजार 983 सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया गया है और अब तक 3 हजार 39 लोगों को सफलतापूर्वक बचाया गया है। उन्होंने कहा कि बाढ़ और भूस्खलन के कारण लगभग सभी प्रमुख राजमार्ग अवरुद्ध हो गए हैं, इसलिए उन्हें सुचारू करने में कम से कम तीन से चार दिन लगेंगे। Nepal Floods and Landslide</p>
<p><a title="Indian Railways: रेलवे चला रहा त्यौहारों पर 56 स्पेशल ट्रेन! अब यात्रियों को नहीं करना पड़ेगा भीड़ में सफर, इन शहरों से होकर जाएगी ट्रेन" href="http://10.0.0.122:1245/railways-is-running-56-special-trains-during-festivals/">Indian Railways: रेलवे चला रहा त्यौहारों पर 56 स्पेशल ट्रेन! अब यात्रियों को नहीं करना पड़ेगा भीड़ में…</a></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>विदेश</category>
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                <pubDate>Sun, 29 Sep 2024 17:36:38 +0530</pubDate>
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