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                <title>Global Warming - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>Earth Heatwave: भारत में इस बार अधिक भयानक होगा गर्मी का रूप! तपेगी धरती, जलेंगे लोग</title>
                                    <description><![CDATA[विश्व मौसम संगठन का अलर्ट जारी हिसार (सच कहूँ/संदीप सिंहमार)। ग्लोबल वार्मिंग, अर्थात वैश्विक तापमान में लगातार बढ़ोतरी, एक गंभीर समस्या है। जिसका असर सम्पूर्ण विश्व में देखने को मिल रहा है। भारत गर्मी के दर्द से अछूता नहीं है। विश्व मौसम संगठन के मौसम बुलेटिन के अनुसार पूरे विश्व में गर्मी के दिनों की […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/this-time-the-heat-in-india-will-be-more-terrible/article-68701"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2025-03/heatwave-alert.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:justify;">विश्व मौसम संगठन का अलर्ट जारी</h3>
<p style="text-align:justify;">हिसार (सच कहूँ/संदीप सिंहमार)। ग्लोबल वार्मिंग, अर्थात वैश्विक तापमान में लगातार बढ़ोतरी, एक गंभीर समस्या है। जिसका असर सम्पूर्ण विश्व में देखने को मिल रहा है। भारत गर्मी के दर्द से अछूता नहीं है। विश्व मौसम संगठन के मौसम बुलेटिन के अनुसार पूरे विश्व में गर्मी के दिनों की संख्या में इजाफा हुआ है। Earth Heatwave News</p>
<p style="text-align:justify;">डब्ल्यूएमओ की रिपोर्ट के अनुसार मौसम का संतुलन इस कदर बढ़ चुका है की गर्मी के दोनों में 41 दिनों की बढ़ोतरी हो चुकी है,जो पूर्व विश्व के लिए चिंतन का विषय है। जलवायु परिवर्तन के चलते पृथ्वी का औसत तापमान निरंतर बढ़ रहा है, और इसका प्रभाव विभिन्न मौसमों में स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है। भारत मौसम विभाग के रिकॉर्ड के अनुसार भी राजस्थान के फलौदी में पिछले वर्ष गर्मियों में अधिकतम तापमान 50 डिग्री सेल्सियस से भी अधिक पहुंच गया था। इस बार भी कुछ ऐसा ही होने वाला है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">बिगड़ते मौसम के लिए मानव जनित गतिविधियां जिम्मेदार | Earth Heatwave News</h3>
<p style="text-align:justify;">ग्लोबल वार्मिंग के कई कारण हैं, जिनमें मानव जनित गतिविधियाँ प्रमुख हैं। जीवाश्म ईंधनों का अत्यधिक उपयोग, औद्योगिक गतिविधियाँ, और वनों की कटाई जैसे कारण वायुमंडल में ग्रीनहाउस गैसों की मात्रा को बढ़ाते हैं। ये गैसें सूर्य की गर्मी को धरती की सतह पर फँसा देती हैं, जिससे तापमान में वृद्धि होती है। भारत में, गर्मी के मौसम में वृद्धि के स्पष्ट संकेत देखने को मिल रहे हैं। पिछले कुछ वर्षों में, भारत के विभिन्न हिस्सों में भयावह तापमान रिकार्ड किए गए हैं। यह स्थिति न केवल लोगों के स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव डाल रही है, बल्कि कृषि, जल संसाधनों और पारिस्थितिकी पर भी असर डाल रही है। किसानों को अपने फसलों की उगाई में कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है, और जल संकट भी गहराता जा रहा है। Earth Heatwave News</p>
<p><a title="Bengaluru Weather: बेंगलुरु में भारी बारिश, यात्रा से पहले जान लें अपने रूट और फ्लाइट्स का हाल" href="http://10.0.0.122:1245/heavy-rain-in-bangalore-know-the-status-of-your-routes-and-flights-before-traveling/">Bengaluru Weather: बेंगलुरु में भारी बारिश, यात्रा से पहले जान लें अपने रूट और फ्लाइट्स का हाल</a></p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>हरियाणा</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 23 Mar 2025 09:59:18 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>Global warming: वैज्ञानिकों का दावा-भारत में इस वजह से बढ़ रही घरेलू हिंसा</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली। Global warming: हमारे देश में यानी भारत में तापमान बढ़ने (heat protection) से घरेलू हिंसा (Domestic violence) में बढ़ोत्तरी हुई है। एक इंटरनेशनल अध्ययन में यह खुलासा हुआ है कि भारत ही नहीं बल्कि उसके पड़ोसी देश नेपाल, पाकिस्तान में भी यही हाल है। ग्लोबल वॉर्मिंग का असर अब निजी संबंधों पर पड़ने […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/literature/scientists-claim-because-of-this-increasing-domestic-violence-in-india/article-49454"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-06/global-warming-1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली। </strong>Global warming: हमारे देश में यानी भारत में तापमान बढ़ने (heat protection) से घरेलू हिंसा (Domestic violence) में बढ़ोत्तरी हुई है। एक इंटरनेशनल अध्ययन में यह खुलासा हुआ है कि भारत ही नहीं बल्कि उसके पड़ोसी देश नेपाल, पाकिस्तान में भी यही हाल है। ग्लोबल वॉर्मिंग का असर अब निजी संबंधों पर पड़ने लगा है। यह आने वाले समय के लिए बहुत खतरनाक हो सकता है।Climate change</p>
<p style="text-align:justify;">ग्लोबल वॉर्मिंग की वजह से भारत में यौन हिंसाओं की घटनाएं तेजी से बढ़ रही है। भारत, पाकिस्तान, नेपाल की 15 से 49 वर्ष की 1.94 लाख से ज्यादा महिलाओं ने यह शिकायत की है कि साथ याौन हिंसा की घटनाएं बढ़ी हैं। आपको बता दें कि यह डेटा एक अक्तूबर 2010 से 30 अप्रैल 2018 के बीच की है। यह अध्ययन हाल ही में JAMA Psychiatry में प्रकाशित हुई है। Global warming</p>
<blockquote class="twitter-tweet">
<p dir="ltr" lang="en" xml:lang="en">A study published in JAMA Psychiatry found an increase in average annual temperature was connected to a rise of more than 6.3% in incidents of physical and sexual <a href="https://twitter.com/hashtag/domesticviolence?src=hash&amp;ref_src=twsrc%5Etfw">#domesticviolence</a> across three south Asian countries. <a href="https://t.co/mQZVCZRj07">https://t.co/mQZVCZRj07</a></p>
<p>— UNSW Gendered Violence Research Network (@UNSW_GVRN) <a href="https://twitter.com/UNSW_GVRN/status/1674175885799469056?ref_src=twsrc%5Etfw">June 28, 2023</a></p></blockquote>
<h3>बढ़ते तापमान से बढ़ता है तनाव | Heat</h3>
<p style="text-align:justify;">अध्ययन में पाया कि ज्यादा तापमान की वजह से किसान की फसलें खबरा होती है। जिससे आर्थिक व्यवस्था कमजोर होती है। लोग घरों में कैद हो जाते हैं। परिवार चलाने का दबाव बढ़ता है जिससे तनाव बढ़ सकता है। ये कारण है कि घरेलू हिंसा के केसों में बढ़ने का खतरा रहता है। Global warming</p>
<p style="text-align:justify;">ये केस सबसे ज्यादा कम कमाई वाले परिवारों व ग्रामीणों में बढ़ रहे हैं। इससे पहले ऐसा अध्ययन मैड्रिड के वैज्ञानिकों ने की थी। उन्होंने केन्या की महिलाओं पर अध्ययन किया था। तब वहां पर बढ़ते तापमान की वजह से इंटिमेंट पाटर्नर फेमिसाइड 40 प्रतिशत बढ़ गया था। यानि 2 लोगों के बीच हिंसा की दर 2.3 फीसदी हो गई थी। जबकि समूहों के बीच 13.2 प्रतिशत हो गई थी।</p>
<h3 style="text-align:justify;">कई देश जूझ रहे हैं हीटवेव से | Global warming</h3>
<p style="text-align:justify;">आपको बता दें कि इस बार पूरे विश्व में कई देश अत्यधिक तापमान व हीटवेव की चपेट में है। इस माह में भारत में कईं स्थानों पर पारा 45 डिग्री सेल्सियस के पार जाने की वजह से दर्जनों मौते हुई थीं। वहीं चीन ने अपने उत्तरी इलाकों में रहने वाले लोगों से घरों में रहने की अपील की, क्योंकि पारा 40 डिग्री सेल्सियस के पार चला गया है। चीन के वैज्ञानिकों ने कहा कि इस बार बढ़ती गर्मी के कारण घरेलू हिंसा बढ़ी है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">भविष्य में और ज्यादा पड़ेगी गर्मी…Global warming</h3>
<p style="text-align:justify;">वैज्ञानिकों के अनुसार सलाना तापमान में जब एक डिग्री सेल्सियस बढ़ता है, तब आईपीवी की मात्रा 4.9 प्रतिशत बढ़ जाती है। इस कारण सबसे ज्यादा हिंसा दर्ज होती है। शारीरिक हिंसा 23 फीसदी, 12.5 फीसदी भावनात्मक हिंसा, 9.5 फीसदी यौन हिंसा औसत सालाना तापमान 20 डिग्री से तीस डिग्री सेल्सिय था।</p>
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                                                            <category>साहित्य</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 30 Jun 2023 17:25:02 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ग्लोबल वार्मिंग के बढ़ते प्रकोप से वैज्ञानिक चिंतित</title>
                                    <description><![CDATA[हरिद्वार (सच कहूँ न्यूज)। उत्तराखंड के रुड़की में सोमवार को विश्व जलवायु परिवर्तन (क्लाइमेट चेंज) को लेकर अंतर्राष्ट्रीय स्तर का सेमिनार हुआ इसमें मौसम में हो रहे बदलाव एवं इसके मानव जीवन पर पड़ रहे प्रभाव को लेकर चर्चा की गई। सेमिनार में बताया गया कि जिस तरह से ग्लोबल वार्मिंग के चलते मौसम में […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/scientists-worried-about-rising-outbreak-of-global-warming/article-37968"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-09/global-warming.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>हरिद्वार (सच कहूँ न्यूज)।</strong> उत्तराखंड के रुड़की में सोमवार को विश्व जलवायु परिवर्तन (क्लाइमेट चेंज) को लेकर अंतर्राष्ट्रीय स्तर का सेमिनार हुआ इसमें मौसम में हो रहे बदलाव एवं इसके मानव जीवन पर पड़ रहे प्रभाव को लेकर चर्चा की गई। सेमिनार में बताया गया कि जिस तरह से ग्लोबल वार्मिंग के चलते मौसम में बदलाव हो रहा है और ऋतु के क्रम में भी बड़े बदलाव देखे गए हैं जिसके कारण कई जगह बारिश की अधिकता देखी गई है तो कहीं सूखा पड़ रहा है इसी प्रकार ओड़िशा, कर्नाटक जैसे राज्यों में अधिक बारिश और तूफान के कारण जानमाल की हानि हो रही है वहीं उत्तर भारत में कहीं बाढ़ तो कहीं सूखे की स्थिति देखी गई है। वैज्ञानिकों का मानना है कि हमें सटीक भविष्यवाणी के लिए आधुनिकतम उपकरणों से लैस होना पड़ेगा वही ऐसा इन्फ्रास्ट्रक्चर डिवेलप करना पड़ेगा जिससे कम से कम नुकसान हो और जनहानि को रोका जा सके।</p>
<p><span style="color:#ff0000;"><strong>यह भी पढ़ें:–</strong></span> <strong><a href="http://10.0.0.122:1245/woman-who-came-begging-kidnapped-the-child/">भीख मांगने आई महिला ने बच्चे को किया अगवा</a></strong></p>
<h3 style="text-align:justify;">नए उपाय खोजने होंगे</h3>
<p style="text-align:justify;">ओडिशा से आए स्टेट डिजास्टर मैनेजमेंट कमिटी के चेयरमैन प्रदीप कुमार जीना का कहना है कि जिस तरीके से ग्लोबल वार्मिंग बढ़ रही है उससे मौसम मैं लगातार उतार-चढ़ाव देखे गए हैं कहीं वर्षा अधिक हो रही है तो कहीं समुद्री तूफान आ रहे हैं और कहीं सूखे की स्थिति बनी हुई है इन सब से जान माल की हानि का नुकसान कम हो इसके लिए नई तकनीक और नए उपाय खोजने होंगे ताकि समय रहते सटीक भविष्यवाणी की जा सके और बुनियादी सुविधाओं का विकास करके नुकसान को कम किया जा सके। उत्तराखंड प्रदेश आपदा प्रबंधन संस्थान के महानिदेशक दुर्गेश पंथ का कहना है कि राज्य में प्राय: आपदाएं आती रहती हैं जिस प्रकार ग्लोबल वार्मिंग हो रही है उससे मौसम तेजी से बदल रहा है किसी स्थान पर अधिक बारिश होने से काफी नुकसान झेलना पड़ता है।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>अत:</strong> मौसम में आ रहे बदलाव और ग्लोबल वार्मिंग के बड़े सवाल के समाधान ढूंढने के लिए इस प्रकार के सम्मेलन मील का पत्थर साबित होगी और आपदा के कारण और उसके बचाव को लेकर वैज्ञानिकों द्वारा मंथन किया जा रहा है जिसको लेकर यहां देश-विदेश के वैज्ञानिक इकट्ठा हुए हैं।</p>
<p><b>अन्य </b><strong><a href="http://10.0.0.122:1245/">अपडेट</a></strong><b> हासिल करने के लिए हमें </b><strong><a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a></strong><b> और </b><strong><a href="https://twitter.com/SACHKAHOON">Twitter</a></strong><b>, <a href="https://www.instagram.com/sachkahoon/">Instagram</a>, <a href="https://www.linkedin.com/company/sachkahoon">LinkedIn</a> , <a href="https://www.youtube.com/channel/UCOcEoUWkETVpZIzmQPVlpfg">YouTube</a>  पर फॉलो करें।</b></p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 19 Sep 2022 17:31:30 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>पेड़-पौधे ही ग्लोबल वार्मिंग से दिला सकते हैं छुटकारा: डॉ. दिलावर</title>
                                    <description><![CDATA[सेल्फी विद प्लांट के तहत किया पौधारोपण, पेड़ बनने तक संभाल का लिया संकल्प सरसा (सच कहूँ न्यूज)। शाह सतनाम जी छात्र महाविद्यालय में एनसीसी और एनएसएस यूनिट के संयुक्त तत्वावधान में महाविद्यालय के सौंदर्यकरण हेतू एक पौधरोपण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जिसमें एनसीसी व एनएसएस के 40 कैडेट्स और 40 वॉलिंटर्स ने अपनी […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/only-trees-and-plants-can-get-rid-of-global-warming-dr-dilawar/article-33915"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-05/global-warming.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:center;">सेल्फी विद प्लांट के तहत किया पौधारोपण, पेड़ बनने तक संभाल का लिया संकल्प</h3>
<p style="text-align:justify;"><strong>सरसा (सच कहूँ न्यूज)।</strong> शाह सतनाम जी छात्र महाविद्यालय में एनसीसी और एनएसएस यूनिट के संयुक्त तत्वावधान में महाविद्यालय के सौंदर्यकरण हेतू एक पौधरोपण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जिसमें एनसीसी व एनएसएस के 40 कैडेट्स और 40 वॉलिंटर्स ने अपनी जेबखर्ची से पैसे बचाकर पौधे (Global Warming) और गमलों पर खर्च किये।</p>
<p style="text-align:justify;">इस कार्यक्रम को सेल्फी विद प्लांट नाम दिया गया। जिसमें छात्रों ने पौधारोपण के पश्चात पौधों के साथ सेल्फी ली तथा पौधों की देखभाल का संकल्प लिया। इस मौके पर कॉलेज प्रिंसिपल डॉ. दिलावर इन्सां ने छात्रों को ग्लोबल वार्मिंग (Global Warming) के बारे में जागरूक करते हुए कहा कि सिर्फ पेड़ पौधे ही हमें इस समस्या से छुटकारा दिला सकते है और पृथ्वी के तापमान को कम किया जा सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">इसलिए हमें ज्यादा से ज्यादा पौधे लगाने चाहिए। इस अवसर पर एनसीसी प्रभारी लेफ्टिनेंट डॉ. कमलजीत ने सभी छात्रों को एक एक पेड़ को जीवन भर संभालने और पालने की शपथ दिलाई। एनएसएस प्रभारी सतविंदर सिंह ने भी बच्चों को पेड़ों का महत्व समझाया।</p>
<p><b>अन्य </b><strong><a href="http://10.0.0.122:1245/">अपडेट</a></strong><b> हासिल करने के लिए हमें </b><strong><a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a></strong><b> और </b><strong><a href="https://twitter.com/SACHKAHOON">Twitter</a></strong><b>, <a href="https://www.instagram.com/sachkahoon/">Instagram</a>, <a href="https://www.linkedin.com/company/sachkahoon">LinkedIn</a> , <a href="https://www.youtube.com/channel/UCOcEoUWkETVpZIzmQPVlpfg">YouTube</a>  पर फॉलो करें।</b></p>
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                <pubDate>Fri, 27 May 2022 20:46:55 +0530</pubDate>
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                <title>&amp;#8216;इंसान सतर्क हो जाएं&amp;#8217;, भारत के लिए चिंताजनक खबर, गर्मी के चलते बेहोश होकर गिर रहे उड़ते पक्षी</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली। ग्लोबल वार्मिंग को लेकर कई दशकों से वैज्ञानिक चिंता जाहिर कर रहे थे, लेकिन सरकार और आम जनता दोनों ने इस पर ध्यान नहीं दिया। जिस वजह से अब मौसम में भयानक बदलाव हो रहा है। इस साल मार्च से ही भीषण गर्मी शुरू हो गई थी। अब तो भारत के ही कई […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/humans-should-be-alert-the-outbreak-of-heat/article-33534"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-05/heatwave.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली।</strong> ग्लोबल वार्मिंग को लेकर कई दशकों से वैज्ञानिक चिंता जाहिर कर रहे थे, लेकिन सरकार और आम जनता दोनों ने इस पर ध्यान नहीं दिया। जिस वजह से अब मौसम में भयानक बदलाव हो रहा है। इस साल मार्च से ही भीषण गर्मी शुरू हो गई थी। अब तो भारत के ही कई शहरों में पारा 50 डिग्री के आसपास है। इस बीच एक और चिंताजनक खबर सामने आई है।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>पक्षियों के लिए काल बनी गर्मी </strong></h4>
<p style="text-align:justify;">गुजरात में भी इन दिनों गर्मी का कहर जारी है। इंसान तो एसी, पंखे और कूलर का सहारा लेकर खुद को किसी तरह बचा ले रहे, लेकिन बेजुबानों के लिए ये गर्मी काल बन गई है। पिछले कुछ दिनों से पश्चिमी गुजरात में बड़ी संख्या में पक्षी आसमान से बेहोश होकर गिर रहे, इसके पीछे की वजह भीषण गर्मी है। पक्षी विशेषज्ञों के मुताबिक अब तापमान इतना ज्यादा हो गया है कि पक्षी उसे बर्दाश्त नहीं कर पा रहे।इस दिशा में काम कर रहे अहमदाबाद के एक एनजीओ ने बताया कि पिछले कुछ हफ्तों में उन्होंने हजारों पक्षियों का इलाज किया है।</p>
<p style="text-align:justify;">हाल ही के दिनों में उन पक्षियों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है, जिन्हें बचाने की जरूरत है। एनजीओ के सदस्य गर्मी से बीमार पक्षियों को एक विशेष अस्पताल ला रहे और उनको सीरिंज के जरिए मल्टी विटामिन की गोलियां दी जा रही हैं। वहीं इंसानों पर भी गर्मी का कहर टूट रहा, जिस वजह से उनके लिए भी अस्पतालों में खास वार्ड बनाए गए हैं।</p>
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                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 18 May 2022 10:36:15 +0530</pubDate>
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                <title>ग्लोबल वार्मिंग के कारण चक्रवाती तूफानों का आना बढ़ा</title>
                                    <description><![CDATA[नयी दिल्ली l ग्लोबल वार्मिंग के कारण हिंद महासागर के तेजी से गर्म होने की वजह से भारत में अधिक तीव्रता वाले चक्रवाती तूफानों का आना बढ़ गया है। इस बीच, विश्व मौसम विज्ञान संगठन (डब्ल्यूएमओ) ने चेतावनी दी है कि अगले पांच वर्षों के दौरान ग्लोबल वार्मिंग के और बढ़ने की आशंका है। डब्ल्यूएमओ […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/cyclone-storms-increase-due-to-global-warming/article-23988"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-05/cyclone-1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नयी दिल्ली l</strong> ग्लोबल वार्मिंग के कारण हिंद महासागर के तेजी से गर्म होने की वजह से भारत में अधिक तीव्रता वाले चक्रवाती तूफानों का आना बढ़ गया है। इस बीच, विश्व मौसम विज्ञान संगठन (डब्ल्यूएमओ) ने चेतावनी दी है कि अगले पांच वर्षों के दौरान ग्लोबल वार्मिंग के और बढ़ने की आशंका है। डब्ल्यूएमओ ने जानकारी दी कि 40 फीसदी आशंका है कि अगले पांच वर्षों में वार्षिक औसत वैश्विक तापमान अस्थायी रूप से पूर्व-औद्योगिक समय से 1.5 डिग्री सेल्सियस ऊपर पहुंच सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">डब्ल्यूएमओ ने कहा कि अभी भी पूरे अनुमान के साथ यह नहीं कह सकते कि कि अगले पांच वर्षों का वार्षिक तापमान पूर्व-औद्योगिक समय से 1.5 डिग्री सेल्सियस अधिक हो जाएगा लेकिन अब ऐसा होने की आशंका दोगुनी हो गई है। डब्ल्यूएमओ के वार्षिक अपडेट में कहा गया है कि वैश्विक तापमान को पूर्व-औद्योगिक स्तर से अधिक 1.5 डिग्री सेल्सियस तक सीमित कर देने के पेरिस समझौते के लक्ष्य को अब पाने की संभावना नहीं लग रही है, क्योंकि 19वीं सदी की तुलना में 2020 में वैश्चिक तापमान में 1.2 सेल्सियस की वृद्धि देखी गई।</p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 29 May 2021 09:48:07 +0530</pubDate>
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                <title>ग्लोबल वार्मिंग बन रही खतरे की घंटी</title>
                                    <description><![CDATA[Global Warming Ke Khatre: यूरोप के दक्षिणी भाग में इन दिनों पारा 40 डिग्री से ऊपर दर्ज हो रहा है। इटली, रोमानिया जैसे देशों में आबादी को भंयकर गर्मी की मार पड़ रही है। पिछले वर्ष यूरोप में गर्मी से करीब एक लाख 40 हजार लोग प्रभावित हुए थे। परिस्थितियां आने वाले वक्त में और […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/global-warming-become-danger-for-peoples/article-2997"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-08/earth.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><em><strong>Global Warming Ke Khatre:</strong></em> यूरोप के दक्षिणी भाग में इन दिनों पारा 40 डिग्री से ऊपर दर्ज हो रहा है। इटली, रोमानिया जैसे देशों में आबादी को भंयकर गर्मी की मार पड़ रही है। पिछले वर्ष यूरोप में गर्मी से करीब एक लाख 40 हजार लोग प्रभावित हुए थे। परिस्थितियां आने वाले वक्त में और भी ज्यादा बुरी होंगी क्योंकि अमेरिका अब पर्यावरण नियंत्रण संधि से पीछे हट गया है। जबकि ग्लोबल वार्मिंग भविष्य के लिए गंभीर मुद्दा बन रही है। ग्रीन हाउस गैसों का उत्सर्जन बढ़ रहा है। इसके विपरीत वनों का कटाव एवं कंक्रीट के जंगल बढ़ रहे हैं। ऐसा आकलन किया गया है कि अगले 50 या 100 वर्षों में धरती का तापमान इतना बढ़ जायेगा कि जीवन के लिये इस धरती पर कई सारी मुश्किलें खड़ी हो जाएँगी।</p>
<p style="text-align:justify;">धरती पर तापमान के बढ़ने का जो सबसे मुख्य और जाना हुआ कारण है, वो है वायुमंडल में बढ़ती कॉर्बनडाई आक्साइड की मात्रा का स्तर। धरती पर इस विनाशक गैस के बढ़ने की मुख्य वजह जीवाश्म ईंधनों जैसे-कोयला और तेल का अत्यधिक इस्तेमाल और जंगलों की कटाई है। धरती पर घटती पेड़ों की संख्या की वजह से कॉर्बनडाई आक्साइड का स्तर बढ़ता है, इस हानिकारक गैसों को इस्तेमाल करने के लिये पेड़-पौधें ही मुख्य श्रोत होते तथा इंसानों द्वारा इसे कई रुपों (साँस लेने की क्रिया द्वारा आदि) में छोड़ा जाता है। बढ़ते तापमान की वजह से समुद्र जल स्तर बढ़ना, बाढ़, तूफान, खाद्य पदार्थों की कमी, तमाम तरह की बीमारियां आदि का खतरा बढ़ जाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">1895 के बाद से साल 2012 को सबसे गर्म साल के रुप में दर्ज किया गया है और साल 2003 के साथ 2013 को 1880 के बाद से सबसे गर्म साल के रुप में दर्ज किया गया। ग्लोबल वार्मिंग की वजह से बहुत सारे जलवायु परिवर्तन हुए है जैसे गर्मी के मौसम में बढ़ौतरी, ठंडी के मौसम में कमी,तापमान में वृद्धि, वायु-चक्रण के रुप में बदलाव, जेट स्ट्रीम, बिन मौसम बरसात, बर्फ की चोटियों का पिघलना, ओजोन परत में क्षरण, भयंकर तूफान, चक्रवात, बाढ़, सूखा आदि। जलवायु परिवर्तन का सबसे ज्यादा असर मनुष्य पर ही पड़ेगा और कई लोगों को अपनी जान से हाथ धोना पडेगा। गर्मी बढ़ने से मलेरिया, डेंगू और यलो फीवर (एक प्रकार की बीमारी है जिसका नाम ही यलो फीवर है) जैसे संक्रामक रोग (एक से दूसरे को होने वाला रोग) बढ़ेंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">वह समय भी जल्दी ही आ सकता है जब हममें से अधिकाशं को पीने के लिए स्वच्छ जल, खाने के लिए ताजा भोजन और श्वास (नाक से ली जाने वाली सांस की प्रोसेस) लेने के लिए शुध्द हवा भी नसीब नहीं हो। ग्लोबल वार्मिंग का पशु-पक्षियों और वनस्पतियों पर भी गहरा असर पड़ेगा। माना जा रहा है कि गर्मी बढ़ने के साथ ही पशु-पक्षी और वनस्पतियां धीरे-धीरे उत्तरी और पहाड़ी इलाकों की ओर प्रस्थान (रवाना होना) करेंगे, लेकिन इस प्रक्रिया में कुछ अपना अस्तित्व ही खो देंगे। ग्लोबल वार्मिंग को कम करने के लिए अब प्रयास तेज करने होंगे। वनों में वृद्धि करनी होगी जोकि प्रतिवर्ष पौधारोपण से ही संभव है। प्रदूषण फैलाने वाली ईकाइयां बंद करनी होंगी। जैव र्इंधन का विकल्प विकसित करना होगा, जो जहरीली गैसे नहीं फैलाए। अन्यथा सागरों, पर्वतों, वनों, जीव-जंतुओं व मनुष्य सबका जीवन खतरे में पड़ चुका है।</p>
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                                                            <category>सम्पादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 09 Aug 2017 03:52:36 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
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                <title>ग्लोबल वार्मिंग की चपेट में पुर्तगाली जंगल</title>
                                    <description><![CDATA[बीते शनिवार से मध्य पुर्तगाल के जंगल भीषण दावानल के चपेट में है। अग्नि काफी तेजी से जंगलो को खाक करने में लगी है, हालांकि जंगल के आग को बुझाने के क्रम में भी कई लोग मारे गए हैं। जंगलों में लगी आग से 62 से अधिक लोगों की मृत्यु हो चुकी है और 60 […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/portuguese-forest-in-the-grip-of-global-warming/article-1447"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-06/galobal.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">बीते शनिवार से मध्य पुर्तगाल के जंगल भीषण दावानल के चपेट में है। अग्नि काफी तेजी से जंगलो को खाक करने में लगी है, हालांकि जंगल के आग को बुझाने के क्रम में भी कई लोग मारे गए हैं। जंगलों में लगी आग से 62 से अधिक लोगों की मृत्यु हो चुकी है और 60 से ज्यादा घायल है। हो सकता है ये आकड़े और ज्यादा बढ़ें।</p>
<p style="text-align:justify;">अधिकांश लोग अपनी कारों से सुरक्षित क्षेत्रों की ओर जाने के क्रम में मारे गए हैं। यह अग्नि जंगलों से होती हुई रिहायशी इलाकों में पहुंचकर भी तांडव मचा रही है। अग्नि की वजह से बड़ी तादाद में ग्रामीण भी प्रभावित हुए है।</p>
<p style="text-align:justify;">एक तरफ बड़ी तादाद में उनके आशियाने जलकर खाक हो गए हैं, दूसरी तरफ आग की लपटों ने उनके खेतों में खड़ी फसलों को भी नहीं बख्शा। धधकती हुई ज्वाला के कारण वातावरण में कार्बन डाईआक्साइड की मात्रा काफी बढ़ चुकी है, जिसके कारण दम घुटने से भी काफी लोगों की मृत्यु हुई है।</p>
<p style="text-align:justify;">यह अग्निकांड कितना भीषण है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पुर्तगाल के प्रधानमंत्री एंटोनियो कोस्टा ने तीन दिन का राष्ट्रीय शोक घोषित किया है और जंगलों में लगी आग को अब तक की सबसे बड़ी त्रासदी बताया है। भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ट्वीट कर इस त्रासदी के प्रति संवेदना प्रकट की।</p>
<p style="text-align:justify;">दरअसल जंगलों में आग लगने के दो कारण होते हैं। एक मानवीय कारण, तो दूसरा प्राकृतिक। पुर्तगाल के जंगलों में आग लगने का कारण प्राकृतिक बताया जा रहा है, जो सम्पूर्ण विश्व समुदाय हेतु बेहद चिंता का विषय है।</p>
<p style="text-align:justify;">यह सर्वज्ञात है कि ग्लोबल वार्मिंग के कारण पृथ्वी के तापमान में वृद्धि वर्तमान का यथार्थ है और गर्मी के मौसम में तापमान तो 44 डिग्री से लेकर 50 डिग्री सेल्सियस पहुंच जाता है। चूंकि पुर्तगाल दक्षिण यूरोपीय देश है, जो आइबेरियन प्रायद्वीप पर स्थित है और इस समय आइबेरियन प्रायद्वीप के कई क्षेत्रों का तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से भी अधिक है। साथ ही यह प्रायद्वीप इस वक्त भयंकर गर्म हवाओं के चपेट में है। ऐसे में तापमान अत्यधिक होने के कारण जंगलों में आग लगने की घटनाएं बढ़ जाती है।</p>
<p style="text-align:justify;">पुर्तगाल में आग लगने की वजहों में आकाशीय बिजली का गिरना माना जा रहा है। चूंकि आइबेरियन प्रायद्वीप का तापमान ग्रीष्म काल में अधिक होता है, जिसके कारण वर्षा की बूंदे जमीन पर गिरने से पहले ही भाप में परिवर्तित हो जाता है। ऐसे में बिजली गिरने व गर्म हवाएं चलने से आग लगना स्वाभाविक है। ऐसा ही पुर्तगाल में हुआ है। बिजली गिरने से जंगलों में आग लगने के पश्चात तेज गर्म हवाओं ने आग को एक क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र में तेजी से प्रसार करने में मदद की। पिछले साल अगस्त में पुर्तगाल के मदेरा द्वीप पर आग लगने से कई लोगों की मृत्यु हुई थी।</p>
<p style="text-align:justify;">भारत के संदर्भ में देखें तो पिछले साल उत्तराखंड के जंगलों में भीषण आग लगी थी, जिसमें 1900 हेक्टेयर से ज्यादा वन क्षेत्र तबाह हो गया। दरअसल शीत कालीन बारिश नहीं होने के कारण जंगलों की जमीन में नमी नहीं बची थी। वहीं अप्रैल और मई के महीने में तापमान की अत्यधिक वृद्धि के कारण उष्णकटिबंध क्षेत्रों में वृक्षों से पत्ते गिरना स्वाभाविक है। जंगल के जमीन में नमी नहीं होने के कारण आग लगी और विकराल रुप धारण कर लिया।</p>
<p style="text-align:justify;">उत्तराखंड के जंगलों में चीड़ के वृक्षों की बहुलता है। चीड़ के पत्तों में एक ज्वलनशील पदार्थ पाया जाता है, जिसके कारण आग तेजी से पकड़ती है और हवा के माध्यम से आग का प्रसार काफी तेज होता है। ऐसा नहीं है कि उत्तराखंड के जंगलों में 2016 में पहली बार आग लगी थी। इसके पूर्व 1992,1997,2004 और 2012 के भी उत्तराखंड के जंगलों में आग लगी थी।</p>
<p style="text-align:justify;">जनवरी 2017 में दक्षिणी अमेरिकी देश चिली के जंगलों में दशक की सबसे भीषण आग लगी और राष्ट्रपति मिशेल जंगलों में लगी आग पर काबू पाने हेतु महारत हासिल किए हुए देशों से मदद मांगी। इस समय दक्षिण अमेरिकी देशों में गर्मी का मौसम चल रहा होता है। हालत इतने गंभीर हो गए थे कि चिली की राजधानी सेंटियोगो के दक्षिणी इलाके में आपातकाल की घोषणा करनी पड़ी थी।</p>
<p style="text-align:justify;">इसके अलावा फरवरी 2014 में गर्मी के कारण दक्षिण पूर्वी आॅस्ट्रेलिया के जंगलों में भयंकर आग लगी। इस प्रकार दावानल की समस्या वैश्विक है। अत: इसका समाधान भी वैश्विक होना चाहिए। भारत को इन घटनाओं से सबक लेते हुए ऐसी परिस्थितियों से निपटने हेतु मास्टर प्लान तैयार करना चाहिए, ताकि जंगलों को जलने से बचाया जा सके।</p>
<p style="text-align:justify;">यह प्लान पहले से ही तैयार होना चाहिए, न कि आग लगने के पश्चात आनन-फानन में। सरकारों और वन विभागों को जंगल को दावानल से बचाने हेतु ईमानदार प्रयास करना होगा, ताकि वन संसाधन को सुरक्षित रखा जा सके। कुछ प्रयासों के माध्यम से जंगलों में दावानल की घटना को नियंत्रित किया जा सकता है, जैसे जंगलों में वृक्षों की जो पत्तियां गिरती हैं, उन्हें इकट्ठा कर खाद बनाने हेतु रोजगार तैयार कर सकते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">यदि शीतकालीन बारिश नहीं होती, तो जंगलों की जमीन में नमी समाप्त हो जाती है, तो ऐसी स्थिति में जंगलों की जमीन में कृत्रिम बारिश कराकर जमीन की नमी को बरकरार रखा जा सकता है। यदि किसी प्रकार आग लग जाए, तो तत्काल फायर फाइटर्स को मुस्तैद रहना चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">जंगल में आग लगने से सिर्फ जंगल ही खाक नहीं होता, बल्कि जैव विविधता के अस्तित्व पर भी संकट उत्पन्न होता है, जो हमारे जीवन का आधार है। भारत तो प्राचीन काल से ही प्रकृति प्रेमी रहा है। सिंधु घाटी सभ्यता में इसे देखा जा सकता है। दावानल की घटनाओं से निपटने हेतु हमें पुन: प्राचीन भारत के मूल्यों को अपने में समाहित करना होगा, न कि प्रकृति के ऊपर बाजार वाद और उपभोक्तावाद को महत्व देना होगा। महात्मा गांधी के अनुसार, ‘प्रकृति में इतनी क्षमता है कि हमारी आवश्यकता को तो पूरी कर सकती है, लेकिन हमारे लालच को नहीं।’</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>-अनिता वर्मा</strong></p>
<p style="text-align:justify;">
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                <pubDate>Tue, 20 Jun 2017 21:07:51 +0530</pubDate>
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