<?xml version="1.0" encoding="utf-8"?>        <rss version="2.0"
            xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
            xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
            xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom">
            <channel>
                <atom:link href="https://www.sachkahoon.com/current/tag-3011" rel="self" type="application/rss+xml" />
                <generator>Sach Kahoon Hindi RSS Feed Generator</generator>
                <title>Current - Sach Kahoon Hindi</title>
                <link>https://www.sachkahoon.com/tag/3011/rss</link>
                <description>Current RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>विशेष : रेडियो की स्वर्णिम यात्रा और वर्तमान सन्दर्भ</title>
                                    <description><![CDATA[भारत में रेडियो प्रसारण के शुरूआती प्रयास बहुत सफल नहीं रहे। कुछ उत्साही आपरेटरों ने 20 अगस्त 1921 को अनधिकृत रूप से बम्बई, कलकत्ता, मद्रास और लाहौर से प्रसारण किया पर वे उसे आगे न ले जा सके। निजी ट्रासमीटरों के द्वारा 1924 में मद्रास प्रेसीडेंसी क्लब ने प्रसारण आरम्भ किया गया पर उसने तीन […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/radios-golden-journey-and-current-references/article-13015"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-02/radio.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:center;">भारत में रेडियो प्रसारण के शुरूआती प्रयास बहुत सफल नहीं रहे। कुछ उत्साही आपरेटरों ने 20 अगस्त 1921 को अनधिकृत रूप से बम्बई, कलकत्ता, मद्रास और लाहौर से प्रसारण किया पर वे उसे आगे न ले जा सके। निजी ट्रासमीटरों के द्वारा 1924 में मद्रास प्रेसीडेंसी क्लब ने प्रसारण आरम्भ किया गया पर उसने तीन वर्ष में ही दम तोड़ दिया। 1927 में स्थापित रेडियो क्लब बाम्बे भी 1930 में आखिरी सांस ले कर मौन हो गया। 1936 में ‘इम्पीरियल रेडियो आफ इंडिया’ की शुरूआत हुई जो आजादी के बाद आल इंडिया रेडियो के नाम से विख्यात हुआ। 1957 को आल इंडिया रेडियो का नाम बदलकर आकाशवाणी कर दिया गया।</h3>
<h3></h3>
<h3 style="text-align:justify;">प्रमोद दीक्षित ‘मलय’</h3>
<h3>रेडियो ने भी कभी निराश नहीं किया</h3>
<h4 style="text-align:justify;">सुनहरी और खट्टी-मिट्ठी स्मृतियों को सहेजे रेडियो अपनी जीवन यात्रा का शतक पूरा करने को है। पूरी दुनिया में रेडियो ने श्रोता वर्ग से जो सम्मान और प्यार हासिल किया वह अन्य किसी माध्यम को न मिला और न कभी मिल सकेगा। विविध इंद्रधनुषी कार्यक्रमों के द्वारा रेडियो ने न केवल मनोरंजन जागरूकता और शिक्षा संस्कार के वितान को समुज्ज्वल किया, बल्कि राष्ट्रीय एकता-अखण्डता के ध्वज को भी थामे रखा। सुदूर दक्षिण के तमिल, कन्नड, मलयालम भाषी जन हों या उत्तर का कश्मीरी, डोंगरी, हिमाचली समुदाय। हरियाणवी, राजस्थानी भाषा के चित्ताकर्षक रंग हों या ब्रज, बुंदेली, बघेली और अवधी बोलियों की मधुमय मृदुल रसधार। पूर्वोत्तर की मिजो, नागा, त्रिपुरा, असम की क्षेत्रीय भाषायी समुद्धि हो या मराठी, गुजराती, पंजाबी की मधुर वाणी। सभी को रेडियो ने स्वर दिए और विस्तार एवं संरक्षण का रेशमी फलक भी। हिन्दी के राष्ट्रीय प्रसारणों को सम्पूर्ण देश ने सुना और गुना तथा सृजन के सुवासित सुमन पल्लवित-पुष्पित किए। रेडियो ने जन-जन का बाहें फैलाकर स्वागत किया। भारत में तो रेडियो परिवार के सदस्य की तरह रहा और है। आज की पीढ़ी के पास भले ही इलेक्ट्रनिक गैजैट के रूप में मनोरंजन, ज्ञान-विज्ञान और शिक्षा के तमाम संसाधन एवं विकल्प मौजूद हों पर वह संतुष्ट नहीं है। लेकिन पूर्व पीढ़ी के पास केवल रेडियो था और आत्मीय संतुष्टि भी। रेडियो ने भी कभी निराश नहीं किया।</h4>
<h3>कला, साहित्य, संगीत का प्रसारक</h3>
<h4 style="text-align:justify;">खेत की मेड़ पर विराजे रेडियो अपने कृषि कार्यक्रमों से खेत जोतते और फसल काटते किसान को निरन्तर खेती के नवीन तौर-तरीके सिखाते रहे। पनघट पर गगरियों में जल भरतीं युवतियां और कुएं की जगत पर मधुर गीत बिखेरता रेडियो अपना-सा ही जान पड़ता। विरह की अग्नि में जलती कामिनी को रेडियो के गीत मिलन की आस बंधाते। नीम तले चबूतरे पर बैठी पंचायतों के बीच भी वह रस बरसाता रहा। विद्यार्थियों का तो संगी ऐसा कि मेज पर रेडियो बजता रहता और उधर कागज पर कलम चलती रहती। बूढ़े बुजुर्ग के समाचार सुनते समय किसी की क्या हिम्मत की स्टेशन बदल दें। रेडियो एकाकीपन का साथी था तो ज्ञान का खजाना भी। कला, साहित्य, संगीत का प्रसारक था तो कृषि, ज्ञान, विज्ञान के नित नवीन शोधों का संचारक भी। रेडियो पर संकट के बादल छाये पर उसने अपनी प्रकृति और जिम्मेदारी से मुंह नहीं मोड़ा। श्रोता कभी बहका पर कहीं टिक न सका, संतुष्टि ना पा सका और लौट कर रेडियो की शरण ली ज्यों जहाज को पंछी उड़ि जहाज पर आयो।</h4>
<h3>1936 में ‘इम्पीरियल रेडियो आफ इंडिया’ की शुरूआत हुई</h3>
<h4 style="text-align:justify;">भारत में रेडियो प्रसारण के शुरूआती प्रयास बहुत सफल नहीं रहे। कुछ उत्साही आपरेटरों ने 20 अगस्त 1921 को अनधिकृत रूप से बम्बई, कलकत्ता, मद्रास और लाहौर से प्रसारण किया पर वे उसे आगे न ले जा सके। निजी ट्रासमीटरों के द्वारा 1924 में मद्रास प्रेसीडेंसी क्लब ने प्रसारण आरम्भ किया गया पर उसने तीन वर्ष में ही दम तोड़ दिया। 1927 में स्थापित रेडियो क्लब बाम्बे भी 1930 में आखिरी सांस ले कर मौन हो गया। 1936 में ‘इम्पीरियल रेडियो आफ इंडिया’ की शुरूआत हुई जो आजादी के बाद आल इंडिया रेडियो के नाम से विख्यात हुआ। 1957 को आल इंडिया रेडियो का नाम बदलकर आकाशवाणी कर दिया गया। बहुजन हिताय, बहुजन सुखाय के अपने ध्येय वाक्य के साथ आकाशवाणी 27 भाषाओं में शैक्षिक, सांस्कृतिक, साहित्यिक, सामाजिक, खेलकूद, युवा, बाल एवं महिला तथा कृषि एवं पर्यावरण सम्बंधी प्रस्तुतियों से सम्पूर्ण देश को एकता के सूत्र में पिरोते हुए सुवासित परिवेश निर्मित कर रही है। साथ ही शेष विश्व को भारतीय संस्कृति और साहित्य से परिचित भी करा रही है। 2 अक्टूबर 1957 को स्थापित विविध भारती ने 1967 से व्यावसायिक रेडियो प्रसारण शुरू कर नये युग में प्रवेश किया। आजादी के समय भारत में केवल 6 रेडियो स्टेशन थे जिनके कार्यक्रमों की पहुंच केवल 11 प्रतिशत आबादी तक ही थी। पर आज भारत में 250 से अधिक रेडियो स्टेशन 99 प्रतिशत आबादी से आत्मीय रिश्ता जोड़े हुए हैं। रेडियो ने विभिन्न तरंग आवृत्तियों पर प्रसारण किया, जिसे श्रोता मीडियम वेब, शार्ट वेब के रूप में जानते हैं। बड़ी इमारतों, पहाड़ों के अवरोधों से मुक्त मीडियम वेव देशी प्रसारण है, जो पूरे भारत के अलावा पड़ोसी देशों में भी सुना जा सकता है। पर शार्ट वेब अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर व्यापक क्षेत्रफल पर ध्वनि की उच्च गुणवत्ता के साथ भारतीय प्रस्तुतियों को सुन आनन्द लिया जा सकता है।</h4>
<h3>सार्वजनिक बहस को अपने सोच के केंद्र में रखा</h3>
<h4 style="text-align:justify;">सत्तर के दशक में टेलीविजन के आने से लगा कि रेडियो की असमय मौत हो जायेगी पर सभी आशंकाएं निर्मूल सिद्ध हुई और रेडियो कहीं अधिक प्रखर एवं प्रभावी होकर प्रकट हुआ। रेडियो का श्रोता वर्ग बजाय छिटकने के और अधिक जुड़ा। इसी बीच एएम चैनल आया पर प्रभावित नहीं कर पाया और काल के गाल में समा गया। लेकिन 23 जुलाई 1977 को चेन्नै में एफएम चैनल ने आते ही ध्वनि की उच्च गुणवत्ता एवं कार्यक्रमों की विविधता के बल पर धूम मचा दी और देश भर में छा गया। 1993 में निजी एफएम चैनल आने से श्रोताओं की पौ बारह हो गई। और अब तो जमाना है डिजिटल रेडियो का। मोबाइल पर सवार होकर रेडियो श्रोताओं की जेब में समा गया। बड़े आकार और नाब घुमाने वाले रेडियो तो अतीत के चित्र हो गये। रेडियो ने उद्घोषकों एवं समाचार वाचकों मैल्वेल डिमैला, देवकीनंदन पांड, अमीन सयानी, सुरेश सरैया और जसदेव सिंह को नायक बना दिया। उनकी आवाज ही पहचान बन गई। रेडियो ने अपनी यात्रा के प्रारम्भ से ही समाज में शिक्षा के प्रचार प्रसार, जन-जागरूकता, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सार्वजनिक बहस को अपने सोच के केंद्र में रखा था। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की ‘मन की बात’ ने रेडियो के फलक को विस्तार दिया है। पूर्व महासचिव वान की मून का कथन आज भी प्रासंगिक है, ‘रेडियो हमारा मनोरंजन करता है। हमें शिक्षित करता है। हमें सूचनाओं और जानकारियों से लैस करता है और सारी दुनिया में लोकतांत्रिक बदलावों को प्रोत्साहित करता है।’ रेडियो और आदमी का यह प्रेम पगा रिश्ता नित नवल आयाम स्थापित करते हुए सरस यात्रा पर सतत् गतिमान रहेगा ऐसा ही विश्वास है।</h4>
<h4 style="text-align:justify;">वैश्विक स्तर पर जन जागरूकता के लिए दिवस मनाने की परम्परा रही है, जिस पर लक्ष्य और विषय निर्धारित कर आयोजन किये जाते हैं। पर रेडियो के पास अपना कोई दिवस न था। तो इस कमी को पूरा करने की दृष्टि से 20 अक्टूबर 2010 को स्पेनिश रेडियो अकादमी के अनुरोध पर स्पेन ने संयुक्त राष्ट्र संघ में रेडियो को समर्पित विश्व दिवस मनाने हेतु सदस्य देशों का ध्यानाकर्षण किया। जिसे स्वीकार कर संयुक्त राष्ट्र संध के शैक्षणिक वैज्ञानिक और सांस्कृतिक संगठन यूनेस्को ने पेरिस में आयोजित 36वीं आम सभा में 3 नवम्बर 2011 को घोषित किया कि प्रत्येक वर्ष 13 फरवरी को विश्व रेडियो दिवस मनाया जायेगा। उल्लेखनीय है कि 13 फरवरी को ही संयुक्त राष्ट्र की रेडियो यूएनओ की वर्षगांठ भी होती है, क्योंकि 1946 को इसी दिन वहां रेडियो स्टेशन स्थापित हुआ था। और तब पहली बार 13 फरवरी 2012 को यह विश्व रेडियो दिवस उमंग-उत्साह पूर्वक पूरी दुनिया में मनाते हुए रेडियो के सफरनामे को याद किया गया। इस आयोजन में विश्व की प्रमुख प्रसारक कंपनियों को बुलाया गया था। जिसमें 44 भाषाओं में कार्यक्रम प्रसारित करने वाली दुनिया की सबसे बड़ी एवं पुरानी कंपनी रेडियो रूस भी शामिल हुई। वर्ष 2012 और 13 में कार्यक्रम की कोई थीम नहीं रही पर उसके बाद प्रत्येक वर्ष कोई एक मुख्य विषय तय कर उसी थीम पर विश्व में कार्यक्रम सम्पन्न किए जाते रहे हैं। लैंगिक समानता और महिला सशक्तिकरण (2014), युवा और रेडियो (2015), संघर्ष और आपातकाल के समय रेडियो (2016), रेडियो इज यू (2017), रेडियो और खेल (2018), संवाद, सहिष्णुता और शांति (2019) के वैश्विक आयोजन के चर्चा विषय निश्चित थे। विश्व के सभी देशों के रेडियो प्रसारकों और श्रोताओं को एक मंच पर लाने के उद्देश्य से शुरू की गई यह पहल अपने उद्देश्यों में सफल रही है।</h4>
<h4 style="text-align:justify;">सबसे पहले अमेरिका में चुनावी सर्वे कराया गया था, जब अमेरिकी सरकार के कामकाज पर लोगों की राय जानने के लिए जॉर्ज गैलप और क्लॉड रोबिंसन ने इस विधा को अपनाया था, जिन्हें ओपिनियन पोल सर्वे का जनक माना जाता है। चुनाव उपरांत उन्होंने पाया कि उनके द्वारा एकत्रित किए गए सैंपल तथा चुनाव परिणामों में ज्यादा अंतर नहीं था। उनका यह तरीका काफी विख्यात हुआ और इससे प्रभावित होकर ब्रिटेन तथा फ्रांस ने भी इसे अपनाया और बहुत बड़े स्तर पर ब्रिटेन में 1937 जबकि फ्रांस में 1938 में ओपिनियन पोल सर्वे कराए गए। इन देशों में भी ओपिनियन पोल के नतीजे बिल्कुल सटीक साबित हुए थे। जर्मनी, डेनमार्क, बेल्जियम तथा आयरलैंड में जहां चुनाव पूर्व सर्वे करने की पूरी छूट दी गई है, वहीं चीन, दक्षिण कोरिया, मैक्सिको इत्यादि कुछ देशों में इसकी छूट तो दी गई है किन्तु कुछ शर्तों के साथ।</h4>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>अन्य <a href="http://10.0.0.122:1245">अपडेट</a> हासिल करने के लिए हमें <a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a> और <a href="https://x.com/SACHKAHOON">Twitter</a> पर फॉलो करें।</strong></h4>
<div class="oSioSc">
<div>
<div class="g9WsWb">
<div class="tw-ta-container tw-nfl">
<pre class="tw-data-text tw-text-large tw-ta" dir="ltr"><span lang="en" xml:lang="en"> </span></pre>
</div>
</div>
</div>
</div>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>लेख</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/radios-golden-journey-and-current-references/article-13015</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/radios-golden-journey-and-current-references/article-13015</guid>
                <pubDate>Thu, 13 Feb 2020 12:59:46 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2020-02/radio.jpg"                         length="15688"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>करंट से महिला की मौत</title>
                                    <description><![CDATA[शिवपुरी (एजेंसी)। मध्यप्रदेश के शिवपुरी के फिजिकल कॉलेज थाना क्षेत्र के कलारबाग बस्ती में रहने वाली एक महिला की करंट लगने से मृत्यु हो गयी है। पुलिस सूत्रों के अनुसार आशा जाटव (30) कल अपने घर में टिल्लू पंप से पानी भरते समय भीग गई थी। वह गीले हाथों से पंप का प्लग निकालने गयी और […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/woman-dies-due-to-current/article-10848"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2019-10/current.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>शिवपुरी (एजेंसी)। </strong>मध्यप्रदेश के शिवपुरी के फिजिकल कॉलेज थाना क्षेत्र के कलारबाग बस्ती में रहने वाली एक महिला की करंट लगने से मृत्यु हो गयी है। पुलिस सूत्रों के अनुसार आशा जाटव (30) कल अपने घर में टिल्लू पंप से पानी भरते समय भीग गई थी। वह गीले हाथों से पंप का प्लग निकालने गयी और करंट की चपेट में आ गयी। उसे जिला अस्पताल शिवपुरी ले जाया गया, जहां उसे मृत घोषित कर दिया गया। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।</p>
<p> </p>
<p><strong><a href="http://10.0.0.122:1245/">Hindi News </a>से जुडे अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें <a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a> और <a href="https://x.com/SACHKAHOON">Twitter</a> पर फॉलो करें।</strong></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/national/woman-dies-due-to-current/article-10848</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/national/woman-dies-due-to-current/article-10848</guid>
                <pubDate>Fri, 18 Oct 2019 10:25:47 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2019-10/current.jpg"                         length="17763"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>हुड्डा ने दागे मौजूदा खट्टर सरकार पर सवाल!</title>
                                    <description><![CDATA[सरकार ने 1.60 लाख करोड़ का कर्ज उठाया वो कहां खर्च किया हजारों किसानों के पास टोकन होने के बावजूद एमएसपी पर खरीद नहीं हुई! चण्डीगढ़ (सच कहूँ/अनिल कक्कड़)। हरियाणा के पूर्व मुख्य मन्त्री भूपेन्द्र सिह हुड्डा ने आज प्रदेश की भाजपा सरकार के फैसलों और नीतियों को लेकर कड़ा प्रहार किया और सवाल पर […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/hooda-questions-the-current-khattar-government/article-4135"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-06/hudaa.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:justify;">सरकार ने 1.60 लाख करोड़ का कर्ज उठाया वो कहां खर्च किया</h2>
<ul style="text-align:justify;">
<li>हजारों किसानों के पास टोकन होने के बावजूद एमएसपी पर खरीद नहीं हुई!</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>चण्डीगढ़ (सच कहूँ/अनिल कक्कड़)</strong><strong>।</strong> हरियाणा के पूर्व मुख्य मन्त्री भूपेन्द्र सिह हुड्डा ने आज प्रदेश की भाजपा सरकार के फैसलों और नीतियों को लेकर कड़ा प्रहार किया और सवाल पर सवाल दागे। उन्होंने कहा कि हम एक जिम्मेवार विपक्ष की भूमिका में हैं। हमें अपने प्रदेश व जनता के व्यापक हितों की चिन्ता है, इसलिए हम केवल ऐसे सवाल उठाते हैं, जो सरकार को जगाने का काम करें और हरियाणा के लोग भी सच्चाई से रूबरू हो सकें।</p>
<p style="text-align:justify;">हुड्डा ने कहा कि मेरा सरकार से सवाल है कि प्रदेश सरकार ने 1 लाख 60 हजार करोड़ रुपए का जो कर्ज उठाया है, वो कहां खर्च किया? क्या सरकार ने अपने बलबूते पर हरियाणा में किसी बड़े प्रोजैक्ट पर काम शुरू किया है? क्या सरकार केन्द्र से कोई बड़ा प्रोजैक्ट लाई, जिसमें हरियाणा ने भी वित्तीय योगदान दिया है? उन्होंने कहा कि ने कहा कि विभिन्न खरीद एजेंसियों ने मार्किट कमेटियों की मार्फत सरसों खरीद के टोकन जारी किये। उन्होंने सरकार से पूछा है कि क्या कारण है कि हजारों किसानों के पास टोकन होने के बावजूद भी एमएसपी पर सरसों की खरीद नहीं हुई? सरसों की नहीं हर फसल की खरीद के वक्त किसानों को एमएसपी क्यों नहीं मिल रहा? किसानों को परेशान करने के लिए हर सीजन में क्यों अनावश्यक शर्तें थोपी जाती है? किसानों को गन्ने का बकाया देने में देरी के क्या कारण हैं?</p>
<h3 style="text-align:justify;">खिलाड़ियों का अपमान कर रही सरकार</h3>
<p style="text-align:justify;">हुड्डा ने कहा कि हरियाणा के खिलाड़ियों ने देश और प्रदेश का नाम रोशन किया है। सरकार नित नये फैसले लेकर प्रदेश के खिलाड़ियों का क्यूं अपमान करा रही है? सरकार की खेल और खिलाड़ियों के बारे में स्पष्ट नीति क्या है? क्या यह बात सरकार के नोटिस में है कि अनेक बड़ी उम्र के लोगों की पैंशन काट दी गई है या रोक दी गई है?</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/haryana/hooda-questions-the-current-khattar-government/article-4135</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/state/haryana/hooda-questions-the-current-khattar-government/article-4135</guid>
                <pubDate>Wed, 13 Jun 2018 09:50:51 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2018-06/hudaa.jpg"                         length="68436"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>गांव भगवतीपुर में करंट से महिला की मौत</title>
                                    <description><![CDATA[रोहतक। रोहतक के गांव भगवतीपुर में करंट लगने से एक महिला और एक नील गाय की मौत हो गई। इसके बाद ग्रामीणों ने रोड जाम कर नारेबाजी शुरू कर दी। सूचना पाकर पुलिस मौके पर पहुंची, जिसके बाद ग्रामीणों को समझाए जाने की कोशिशें जारी हैं। लोगों का कहना है कि बार-बार शिकायत के बाद […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/woman-death-due-to-current-in-bhagwatipur-village/article-1563"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-06/woman-death-.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>रोहतक।</strong> रोहतक के गांव भगवतीपुर में करंट लगने से एक महिला और एक नील गाय की मौत हो गई। इसके बाद ग्रामीणों ने रोड जाम कर नारेबाजी शुरू कर दी। सूचना पाकर पुलिस मौके पर पहुंची, जिसके बाद ग्रामीणों को समझाए जाने की कोशिशें जारी हैं।</p>
<p>लोगों का कहना है कि बार-बार शिकायत के बाद उनकी बात को सुना नहीं गया। अगर वक्त रहते बिजली निगम ने कार्रवाई की होती तो यह हादसा नहीं हुआ होता।</p>
<h2 style="text-align:justify;">एक नील गाय भी खेतों में मृत पाई गई है</h2>
<p style="text-align:justify;">बिजली निगम को कई बार इस बारे में शिकायत की गई, लेकिन एक बार भी उनकी बात को नहीं सुना गया। न तो बिजली की लाइन को ठी किया गया और न ही बिजली की सप्लाई रोकी गई।आज सुबह जब एक महिला खेतों में गई तो वहां जमीन पर पड़ी पावर लाइन में सप्लाई चल रही होने के कारण करंट से उसकी मौत हो गई। इसके अलावा एक नील गाय भी खेतों में मृत पाई गई है।</p>
<p style="text-align:justify;">
</p><p><a href="http://10.0.0.122:1245/">Hindi News </a>से जुडे अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें <a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a> और <a href="https://x.com/SACHKAHOON">Twitter</a> पर फॉलो करें।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/haryana/woman-death-due-to-current-in-bhagwatipur-village/article-1563</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/state/haryana/woman-death-due-to-current-in-bhagwatipur-village/article-1563</guid>
                <pubDate>Sat, 24 Jun 2017 02:37:19 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2017-06/woman-death-.jpg"                         length="58875"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>साथी की जान बचाते खुद भी गंवाई जान</title>
                                    <description><![CDATA[नरवाना में करंट से दो दोस्तों की दर्दनाक मौत के बाद पसरा मातम परिवार की आर्थिक मदद के लिए बांटता था अखबार गुरजीत की मौत के बाद चार बहनों का छीना सहारा नरवाना(सच कहूँ न्यूज)। मंगलवार अल सुबह नरवाना के मॉडल टाऊन के पास बरसात के मौसम में दो दोस्तों की करंट लगने से मौत हो […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/painful-death-of-two-friends-from-current/article-1463"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-06/current-1.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:justify;">नरवाना में करंट से दो दोस्तों की दर्दनाक मौत के बाद पसरा मातम</h2>
<ul style="text-align:justify;">
<li><strong>परिवार की आर्थिक मदद के लिए बांटता था अखबार</strong></li>
<li><strong>गुरजीत की मौत के बाद चार बहनों का छीना सहारा</strong></li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>नरवाना(सच कहूँ न्यूज)। </strong>मंगलवार अल सुबह नरवाना के मॉडल टाऊन के पास बरसात के मौसम में दो दोस्तों की करंट लगने से मौत हो गई। जिससे पूरे शहर में शौक छाया हुआ है। सूचना मिलते ही एसएचओ नरवाना मौके पर पहुंचे और घटना स्थल का जायजा लिया। दोनों दोस्तों की मौके पर ही मौत हो गई। पुलिस के अनुसार सचिन शहर के टैक्सी स्टैंड के पास अपनी फूल सजावट की दुकान चलाता था।</p>
<p style="text-align:justify;">मंगलवार सुबह जब 21 वर्षीय सचिन पुत्र मंगतराम निवासी नरवाना अपनी दुकान खोलने पहुंचा तो बरसात का पानी उसकी दुकान के बाहर भरा हुआ था। पानी को पार करते हुए जब वह अपनी दुकान के बाहर लगे छप्पर के पोल को हाथ लगाया तो पोल में करंट होने के कारण वह करंट की चपेट में आ गया।</p>
<p style="text-align:justify;">उसी दौरान अखबार में हॉकर का काम करने वाला 20 वर्षीय गुरजीत हरिकेश निवासी ढाकल रोड़ भी अपने दोस्त की दुकान की तरफ आ रहा था तो उसने देखा की सचिन अपनी दुकान के बाहर पानी में पड़ा था। तो उसने अपना साईकिल खड़ा करके सचिन के उठाने की कोशिश की तो वह भी करंट की चपेट में आ गया और दोनों दोस्तों की मौके पर ही मौत हो गई। आसपास के दुकानदारों ने बताया कि घटना बरसात के मौसम के कारण हुई है क्योंकि दुकानों के बाहर सड़क पर पानी भरा हुआ था जिसके कारण ही पोल में करंट आ गया।</p>
<h2 style="text-align:justify;">चार बहनों का इकलौता भाई था गुरजीत</h2>
<p style="text-align:justify;">गुरजीत भले ही सुबह अखबार बांटने का काम करता था लेकिन वह अपने परिवार की आर्थिक सहायता के लिए मजदूरी भी कर लेता था। इसके साथ गुरजीत इंसानियत का भी प्रतिक था और इसी इंसानियत ने उसकी जान ले ली। गुरजीत के पिता के पास गुरजीत के अलावा 4 लड़कियों भी हैं। लेकिन गुरजीत की मौत के बाद 4 बहनों के सिर से भाई का साया उठ गए। गुरजीत के पिता चिनाई का काम करते हैं और उन्हें पता नहीं था कि उसका बेटा सुबह उठकर अखबार बांटने का काम करता था।</p>
<h2 style="text-align:justify;">अब कैसे होगा परिवार का गुजारा</h2>
<p style="text-align:justify;">गुरजीत व सचिन दोनों जिगरी दोस्त थे और सुबह अक्सर उनकी मुलाकात सचिन की दुकान पर ही होती थी। सचिन फूल बेचकर ही अपने परिवार की आर्थिक सहायता कर रहा था। लेकिन उसकी मौत उसकी ही दुकान के बाहर उसके जिगरी दोस्त के साथ होगी ऐसे उसने कभी सोचा भी नहीं होगा। मंगलवार को सचिन अपनी दुकान खोलने से पहले ही इस संसार को छोड़ चला। सचिन के पिता भी मजदूरी का काम करते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;"><a href="http://10.0.0.122:1245/">Hindi News </a>से जुडे अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें <a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a> और <a href="https://x.com/SACHKAHOON">Twitter</a> पर फॉलो करें।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/haryana/painful-death-of-two-friends-from-current/article-1463</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/state/haryana/painful-death-of-two-friends-from-current/article-1463</guid>
                <pubDate>Tue, 20 Jun 2017 23:24:45 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2017-06/current-1.jpg"                         length="63762"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>

            </channel>
        </rss>
        