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                <title>CEO - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <description>CEO RSS Feed</description>
                
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                <title>Flight of Spirits: 5 रुपये की मजदूरी करने वाली आज है अमेरिकी सॉफ्टवेयर कंपनी की सीईओ!</title>
                                    <description><![CDATA[1970 में वारंगल जिले के एक गरीब परिवार में जन्मी ज्योति रेड्डी के परिवार की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी इसलिए उनकी मां ने उन्हें अनाथालय भेज दिया। यहां मेधावी ज्योति ने अपनी मेहनत से अनाथालय अधीक्षक का दिल जीत लिया और अधीक्षक ने उसे अपने घर में बर्तन धोने और साफ-सफाई के काम पर […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/the-person-earning-a-wage-of-rs-5-is-today-the-ceo-of-an-american-software-company/article-55413"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2024-03/software-company-ceo.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">1970 में वारंगल जिले के एक गरीब परिवार में जन्मी ज्योति रेड्डी के परिवार की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी इसलिए उनकी मां ने उन्हें अनाथालय भेज दिया। यहां मेधावी ज्योति ने अपनी मेहनत से अनाथालय अधीक्षक का दिल जीत लिया और अधीक्षक ने उसे अपने घर में बर्तन धोने और साफ-सफाई के काम पर लगा लिया। अनाथालय में काम करने के साथ-साथ ज्योति ने अपनी पढ़ाई भी की। दिन-रात मेहनत करके उन्होंने सरकारी स्कूल से 10वीं पास की और टाइपराइटिंग भी सीखी। Flight of Spirits</p>
<p style="text-align:justify;">कुछ साल बाद जब ज्योति अनाथालय से घर लौटी तो परिवार ने 16 साल की उम्र में उनकी जबरन शादी कर दी। 18 साल की उम्र में वह दो बेटियों की मां बन गई। शादी के बाद अपने परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारने और बच्चों का पेट भरने के लिए उन्होंने खेतों में मजदूरी करना शुरू कर दिया। खेतों में काम करने के बदले में उन्हें 5 रुपये की दैनिक मजदूरी मिलती थी। इतने कम पैसों में घर का खर्च चलाना संभव नहीं था। कई बार ज्योति को भूखा भी रहना पड़ता था इसलिए उन्होंने एक रुपये प्रति पेटीकोट की दर से सिलाई का काम शुरू किया। Key Software Solutions</p>
<h3>कुछ समय उन्हें बाथरूम क्लीनिंग तक का काम करना पड़ा</h3>
<p style="text-align:justify;">इसी दौरान ज्योति को केंद्र सरकार की एक योजना के तहत नेहरू युवा केंद्र से जुड़ने का मौका मिला। इस संस्थान से जुड़कर उन्होंने फिर से अपनी पढ़ाई शुरू की। 1992 में बीए की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्हें एक स्कूल में नौकरी मिल गई। बाद में उन्होंने अन्ना विश्वविद्यालय से बी.एड की डिग्री प्राप्त की और एक सरकारी शिक्षिका बन गई। साल 2000 में अमेरिका में रहने वाली उनकी एक रिश्तेदार गांव आई और उनसे बातचीत के बाद ज्योति ने बच्चियों की बेहतर परवरिश और विदेश में तरक्की की ज्यादा संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए अमेरिका जाने का निश्चय कर लिया।</p>
<p style="text-align:justify;">अमेरिका में उन्होंने शुरू में वीडियो शॉप में सेल्सगर्ल की नौकरी की और फिर सियामेरिका नामक कंपनी में रिक्रूटर की जॉब भी की। अमेरिका में नौकरी करते हुए उन्हें आईसीएसए नामक कंपनी से बेहतर पैकेज पर जॉब आॅफर मिला। लेकिन वर्किंग वीजा न होने के कारण उन्हें यह नौकरी छोड़नी पड़ी, तब कुछ समय उन्हें बाथरूम क्लीनिंग तक का काम करना पड़ा। वर्किंग वीजा पाने के लिए ज्योति मैक्सिको गई। लेकिन वहां भी वीजा पाने में कई तरह के पापड़ बेलने पड़े। इतना संघर्ष करने पर उन्हें वीजा लेने के लिए क्या-क्या पेपर चाहिए इसका ज्ञान हो गया था। तब उन्होंने अपनी कंसल्टेंसी फर्म खोलकर बिजनेस में हाथ आजमाने का सोचा। Flight of Spirits</p>
<p style="text-align:justify;">साल 2001 में उन्होंने 4000 डॉलर की बचत के साथ अमेरिका के फीनिक्स में अपनी खुद की कंसल्टेंसी फर्म खोली, जो उनकी कड़ी मेहनत के कारण अच्छा चलने लगी और फिर उन्होंने Key Software Solutions नाम से एक सॉफ्टवेयर कंपनी शुरू की, जो आज अमेरिका की बड़ी-बड़ी कंपनियों को आईटी सपोर्ट मुहैया कराती है और ज्योति खुद उस कंपनी की सीईओ है। Flight of Spirits</p>
<p><a title="King Cobra Snake Viral Video: देखकर, अचानक चिल्लाने लगे सारे घर के लोग?" href="http://10.0.0.122:1245/seeing-the-king-cobra-all-the-family-members-suddenly-started-screaming/">King Cobra Snake Viral Video: देखकर, अचानक चिल्लाने लगे सारे घर के लोग?</a></p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>विचार</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 16 Mar 2024 13:14:15 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>सिल्वरकाॅर्प यूएसए के सीईओ के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट</title>
                                    <description><![CDATA[मेक्सिको सिटी। वेनेजुएला के महाभियोजक कार्यालय ने हाल में देश में हमले के प्रयास के मामले में निजी सैन्य कंपनी सिल्वरकाॅर्प यूएसए के मुख्य कार्यकारी अधिकारी(सीईओ) जाॅर्डन गोउडरियू और 21 अन्य लोगों के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया है। महाभियोजक टेरेक विलियम साब ने टीवीवी नोटिसियस ब्रॉडकास्टर को बताया कि इस मामले में सिल्वरकार्प यूएसए […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><p style="text-align:justify;"><strong>मेक्सिको सिटी।</strong> वेनेजुएला के महाभियोजक कार्यालय ने हाल में देश में हमले के प्रयास के मामले में निजी सैन्य कंपनी सिल्वरकाॅर्प यूएसए के मुख्य कार्यकारी अधिकारी(सीईओ) जाॅर्डन गोउडरियू और 21 अन्य लोगों के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया है। महाभियोजक टेरेक विलियम साब ने टीवीवी नोटिसियस ब्रॉडकास्टर को बताया कि इस मामले में सिल्वरकार्प यूएसए के सीईओ समेत 22 लोगों के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि गोउडरियू के अलावा वेनेजुएला के विपक्षी सांसद सर्जियो वेरगरा और एक राजनीतिक मामलों के विशेषज्ञ जॉन जोश रेन्डन के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय गिरफ्तारी वारंट जारी किया गया है। वाशिंगटन पोस्ट समाचारपत्र ने गुरुवार को एक दस्तावेज प्रकाशित किया था , जिसमें बताया गया कि वेनेजुएला में विपक्ष ने राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को अपदस्थ करने के लिए सिल्वरकार्प यूएसए के साथ 21.3 करोड़ डालर का सौदा किया है।</p>
<p> </p>
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                                                            <category>विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 09 May 2020 13:34:53 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अमेजन सीईओ बेजोस से क्यों नहीं मिले मोदी ?</title>
                                    <description><![CDATA[भारत क्या बेजोस की नीतियों से खफा है, अगर नहीं तो पीएम मोदी से उनकी मुलाकात क्यों नहीं हुई। जबकि भारत अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए विदेशी विनिवेश पर अधिक जोर दिया जा रहा है। जब अमेजन भारतीय उत्पादों को दुनिया तक पहुँचना चाहती है तो उसे मौका क्यों नहीं दिया गया। इसकी वजह […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/why-did-modi-not-meet-amazon-ceo-bezos/article-12716"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-01/amazon-ceo-1.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:center;">भारत क्या बेजोस की नीतियों से खफा है, अगर नहीं तो पीएम मोदी से उनकी मुलाकात क्यों नहीं हुई। जबकि भारत अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए विदेशी विनिवेश पर अधिक जोर दिया जा रहा है। जब अमेजन भारतीय उत्पादों को दुनिया तक पहुँचना चाहती है तो उसे मौका क्यों नहीं दिया गया। इसकी वजह मानी जा रहीं है कि बेजोस दक्षिणपंथी विचारधारा के खिलाफ हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी और उनकी सरकार की नीतियों की अपने अखबार वाशिंगटन पोस्ट में तीखी आलोचना की थी।</h3>
<p style="text-align:justify;"><strong>प्रभुनाथ शुक्ल</strong></p>
<h4 style="text-align:justify;">भारत में ई-बजार तेजी से बढ़ रहा है, जिसकी वजह से कुटीर और ट्रेडिशनल बाजार में गिरावट देखने को मिल रही है। अर्थव्यवस्था में बाजार एक अहम कड़ी है, लेकिन इसका विकेंद्रीकरण हो चला है। यूं कहे तो ग्लोबल दुनिया में पूरा बाजार मुट्ठी में हो गया है। अब भोजन से लेकर जीवन की आद्य और मॉडर्न सुविधाएं आपके बेडरूम में फैली हैं। आपके पास पैसा है तो जोमैटो और स्वीगी जैसे सुविधाएं कुछ मिनटों में आपकी डायनिंग टेबल पर होंगी। शहर तो शहर गाँव की झोपड़ी तक अमेजन, फ्लिपकार्ट, स्नैपडील जैसी कम्पनियां चाहत, पसंद और सुविधा के अनुसार डिलिवरी कर रहीं हैं। आनलाइन बाजार ग्राहक को खुला विकल्प दे रहा है। चॉइस की आजादी है और बाजार से कम कीमत पर सामान और सुविधाएं उपलब्ध हैं। यह दीगर बात है कि उसमें टिकाऊपन कितना है। भारतीय परंपरागत बाजार में छायी मंदी का यह भी एक बड़ा कारण है, लेकिन ग्लोबल होती दुनिया में ई- बाजार की पैठ तेजी से बढ़ रही है जबकि ट्रेडिशनल बाजार डूब रहा है। हालात यह है कि चाइना हमारे बजार पर पूरी पकड़ बना चुका है। चीन से भारत का व्यापार घाटा बढ़ता जा रहा है।</h4>
<h4 style="text-align:justify;">अमेजन सीईओ जेफ बेजोस हाल में भारत के दौरे पर थे। भारतीय व्यापारियों ने उनकी भारत यात्रा का पुरजोर विरोध भी किया। वह प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकत करना चाहते थे , लेकिन उन्हें पीएमओ से समय नहीं मिला। क्योंकि सरकार देशी व्यापार संगठनों की नाराजगी नहीं लेना चाहती थीं , क्योंकि अभी दिल्ली में चुनाव हैं, जिसकी वजह से सरकार ने फूंक- फूंक कर कदम रखा है। पीएम से उनकी मुलाकात का मुख्य उददेश्य था कि वह केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट ‘मेक इन इंडिया’ को आगे बढ़ाना चाहते थे। उन्होंने सात हजार करोड़ के निवेश के साथ 70 हजार करोड़ के भारतीय उत्पादों के निर्यात की घोषणा की थीं। बेजोस ने भारत की खूब प्रसंशा भी की लेकिन बात नहीं बन पाई। क्योंकि छोटे और मझोले कारोबारी ई- बाजार से बेहद खफा हैं। हालांकि बेजोस की भारत प्रशंसा के पीछे उनका बाजारवाद का फंडा छुपा था। अपनी भारत यात्रा में इसे सफल नहीं कर पाए। इसका उन्हें बेहद मलाल रहेगा।</h4>
<h4 style="text-align:justify;">बेजोस ने कश्मीर से धारा – 370 हटाए जाने पर एक शृंखला का भी प्रकाशन किया था। वहीं अमेरिका में पीएम मोदी को गोल कीपर अवार्ड दिए जाने पर सवाल भी खड़े किए थे, जिसकी वजह से उन्हें पीएमओ ने मुलाकात का मौका नहीं दिया गया। हालांकि इसकी दूसरी वजहें भी हो सकती हैं , लेकिन मीडिया में यही कयास लगाए गए हैं। फिलहाल यह सरकार का नीतिगत फैसला है उस पर कोई सवाल नहीं उठाए जा सकते हैं। दूसरी वजह यह भी मानी जा रही है कि जेफ बेजोस की भारत यात्रा का छोटे व्यापारी विरोध कर रहे थे। दिल्ली में चुनाव हैं उस हालात में मोदी और बेजोस की मुलाकात का यह अनुकूल मौसम नहीं था। सम्भवत इसी वजह से यह मुलाकत नहीं हो पाई।</h4>
<h4 style="text-align:justify;">भारत में ऑनलाइन बाजार काफी जड़े जमा चुका है। इसका सबसे बड़ा खामियाजा छोटे व्यापारियों को उठाना पड़ रहा है। कुटीर उद्योग दमतोड़ रहा है। जिसकी वजह से इस क्षेत्र में लगे लोगों के पास रोजी- रोटी का संकट खड़ा हो गया है। भारत में ट्रेडिशनल व्यापार की असीम सम्भावना है लेकिन सरकारें उस पर ध्यान नहीं दे रहीं हैं। ऐसे उद्योग और उद्यमियों को आगे लाने के लिए सरकार के पास कोई ठोस नीति नहीं है। कुछ योजनाएं हैं भी तो वह दमतोड़ रहीं हैं। स्किल इंडिया स्कीम का थोड़ा असर दिखता है लेकिन बेगारी दर लगातर बढ़ रही है। भारत में निम्नतर स्तर पर यह आंकड़ा पहुँच गया है। मुद्रा योजना अच्छी है पर बैंकों से सीधे कर्ज लेना आसान नहीं है। बिचौलियों की वजह से कर्ज की काफी राशि कमीशन में चली जाती है। अधिक से अधिक लोग सरकारी नौकरी पसंद करते हैं। उनकी शिक्षा काम में बाधा बनती है। कुटीर उद्योग को बढ़ावा देने के लिए सरकारों के पास कोई ठोस कार्ययोजना नहीं है। वायलेट संस्कृति ई- बाजार के लिए वरदान साबित हुई है। होम डिलीवरी और पसंद की आजादी ई- बाजार को बढ़ा रहा है। एक सामान जब तक न पसंद आए उसकी घर में डिलीवरी पाई जा सकती है। दूसरी वजह आज की युवा पीढ़ी के पास समय का बेहद अभाव है। वह जिंदगी में इतना उलझी है कि वह अपने परिवार के लिए समय नहीं निकाल पाती है। वह भौतिकवाद की सारी वस्तुओं के साथ भोजन तक की होम डिलेवरी करा रही है।</h4>
<h4 style="text-align:justify;">ई- बाजार ने परम्परागत बाजार की खामियों से भी मुक्ति दिलाई है, जिसकी वजह से इसका ट्रेड बढ़ा है। बाजारवाद की नई आजादी को नया आयाम मिला है। अगर आपकी जेब , वायलेट और बैंक में पैसा है तो घर से बजार जाने की जरूरत नहीं है। जीवन की सारी सुविधाएं आपको उपलब्ध हैं। मध्यमवर्गीय परिवार इस बाजारवाद का अधिक शिकार हो रहा है। घर में बच्चों की एक डिमांड पर स्वीगी और जोमैटो की सुविधा मौजूद है। बच्चों में मोटापे एक वजह यह भी है। ई- बाजारवाद ऐसा प्लेटफॉर्म है जहाँ पैसा फेंको और तमाशा देखो की नीति का अनुसरण किया जा रहा है। जबकि हमारे ट्रेडिशनल बाजार में ऐसी बात नहीं है। आप शहर में हैं या गांव में तो वहां आपके पास पैसा न होने पर भी आपको राशन, दूध , फल , चाय- नाश्ता और दूसरी वस्तुएं एक निश्चित सीमा के लिए मिल जाएंगी। आप नौकरी पेशा हैं और आपकी जेब समय से पहले खाली हो गई तो परम्परागत बजार आपकी जरूरत का खयाल रखता है। ट्रेडिशनल बाजार मानवतावादी नजरिया रखता है जबकि ई- बाजार में व्यापार पहली प्रथमिकता है। भारत के साथ दुनिया में ई- बाजार की सीमाएं निर्धारित होनी चाहिए। क्योंकि खुले बाजारवाद में हमें देशी और कुटीर उद्योग को उस स्पर्धा में खड़ा करना होगा। सरकार को मझोले व्यापारियों की नाराजगी का हल निकालना चाहिए। देश में कुटीर उद्योग और उद्यमियों को बचाया जा सके। ऑनलाइन बाजार पर नियंत्रण जरूरी है। देशी बाजार को बढ़ावा देना सरकार और देश के लोगों का राष्ट्रीय और नैतिक दायित्व है।</h4>
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                                                            <category>लेख</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/why-did-modi-not-meet-amazon-ceo-bezos/article-12716</link>
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                <pubDate>Thu, 23 Jan 2020 21:09:58 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>टेस्ला, मस्क ने सरकार के साथ विवाद चार करोड़ डॉलर में निपटाया</title>
                                    <description><![CDATA[सैन फ्रांसिस्को (एजेंसी)। टेस्ला और उसके मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) एलन मस्क(Tesla Elon Mu) ने सरकार की ओर दायर मुकदमे का निपटान करने के लिए कुल चार करोड़ डॉलर का भुगतान करने की सहमति दी है। इसके अलावा, कंपनी ने इस निपटान के लिए कई और रियायतें देने की भी घोषणा की है। सरकार का […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/international/tesla-elon-mu-settled-dispute-government-million-dollars/article-6083"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-09/tesla-elon-musk-.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>सैन फ्रांसिस्को (एजेंसी)।</strong> टेस्ला और उसके मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) एलन मस्क(<strong>Tesla Elon Mu</strong>) ने सरकार की ओर दायर मुकदमे का निपटान करने के लिए कुल चार करोड़ डॉलर का भुगतान करने की सहमति दी है। इसके अलावा, कंपनी ने इस निपटान के लिए कई और रियायतें देने की भी घोषणा की है।</p>
<p>सरकार का आरोप है कि मस्क ने कंपनी के एक प्रस्तावित अधिग्रहण के बारे में गुमराह करने वाले बयानों के जरिये निवेशकों के साथ धोखाधड़ी की। इस निपटान के बाद मस्क इस इलेक्ट्रिक कार कंपनी के सीईओ बने रहे सकते हैं, लेकिन उन्हें कम से कम तीन साल के लिए कंपनी के चेयरमैन पद को छोड़ना पड़ेगा।</p>
<p>टेस्ला को कंपनी के कामकाज के लिए एक स्वतंत्र चेयरमैन की नियुक्ति करनी होगी। प्रतिभूति एवं विनिमय आयोग (एसईसी) ने शनिवार को इस निपटान की घोषणा की। इससे दो दिन पहले ही एसईसी ने मस्क को हटाने के लिए मामला दायर किया था। इन मामलों को निपटाने के लिए अरबपति मस्क दो करोड़ डॉलर और टेस्ला कंपनी भी दो करोड़ डॉलर का भुगतान करेगी। जून के अंत तक टेस्ला के पास 2.2 अरब डॉलर नकद थे।</p>
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                                                            <category>विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 30 Sep 2018 17:44:11 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>इंफोसिस के CEO-MD पद से विशाल सिक्का ने दिया इस्तीफा</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली: देश की दूसरी सबसे बड़ी IT कंपनी इंफोसिस के CEO-MD पद से विशाल सिक्का ने इस्तीफा दे दिया है। विशाल की जगह प्रवीण राव को अंतरिम CEO-MD बनाया गया है। इसके साथ की विशाल सिक्का को कंपनी के एक्जिक्यूटिव वाइस-चेयरमैन के पद पर नियुक्त किया गया है। गौरतलब है कि विशाल सिक्का का इस्तीफा […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/vishal-sikka-resigned-from-ceo-md/article-3195"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-08/vishal-sikka-1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली:</strong> देश की दूसरी सबसे बड़ी IT कंपनी इंफोसिस के CEO-MD पद से विशाल सिक्का ने इस्तीफा दे दिया है। विशाल की जगह प्रवीण राव को अंतरिम CEO-MD बनाया गया है। इसके साथ की विशाल सिक्का को कंपनी के एक्जिक्यूटिव वाइस-चेयरमैन के पद पर नियुक्त किया गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">गौरतलब है कि विशाल सिक्का का इस्तीफा कंपनी की पोर्ड मीटिंग से ठीक एक दिन पहले आया। इस बोर्ड मीटिंग में इंफोसिस को कंपनी के शेयर्स बायबैक पर अहम फैसला करना था। इस्तीफे की खबर आते ही भारतीय शेयर बाजार पर कंपनी के शेयरों में जोरदार गिरावट देखने को मिली।</p>
<h1 style="text-align:justify;">क्या था विवाद ?</h1>
<p style="text-align:justify;">इंफोसिस के इस विवाद की जड़ में पूर्व चीफ फाइनेंनशियल ऑफिसर राजीव बंसल को दिया गया हर्जाना भत्ता है। बंसल को कंपनी ने 24 महीने की सैलरी कंपनी छोड़ते वक्त दी थी। इस रकम पर सेबी ने सवाल उठाया था जिसके बाद नारायण मूर्ति समेत अन्य फाउंडर्स ने विशाल सिक्का समेत कुछ शीर्ष अधिकारियों को कंपनी से मिल रही सैलरी और हर्जाने पर सवाल खड़ा कर इंफोसिस बोर्ड के सामने सवाल खड़ा कर दिया था।</p>
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                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 17 Aug 2017 23:37:21 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मोदी ने शीर्ष अमेरिकी कंपनियों के सीईओ से की मुलाकात</title>
                                    <description><![CDATA[वाशिंगटन। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपनी तीन देशों की यात्रा के दूसरे पड़ाव के तहत अमेरिका के वांिशगटन पहुंचने के बाद पहले दिन वाशिंगटन के होटल विलार्ड इंटरकंटीनेंटल में दिग्गज कंपनियों के मुख्यकार्यकारी अधिकारियों के साथ गोलमेज बैठक की। यह बैठक सवा घंटे से ज्यादा समय तक चली। इस दौरान मोदी के ‘मेक इन इंडिया’ […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/other-news/modi-meets-ceo-of-top-us-companies/article-1644"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-06/modi-12.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>वाशिंगटन।</strong> प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपनी तीन देशों की यात्रा के दूसरे पड़ाव के तहत अमेरिका के वांिशगटन पहुंचने के बाद पहले दिन वाशिंगटन के होटल विलार्ड इंटरकंटीनेंटल में दिग्गज कंपनियों के मुख्यकार्यकारी अधिकारियों के साथ गोलमेज बैठक की। यह बैठक सवा घंटे से ज्यादा समय तक चली। इस दौरान मोदी के ‘मेक इन इंडिया’ और ट्रंप के फर्स्ट अमेरिका नीतियों के बीच तालमेल बैठाने को लेकर अमेरिकी कंपनियों के सीईओ से बातचीत हुई।</p>
<h2 style="text-align:justify;">मुलाकात को लेकर बेहद उत्साहित</h2>
<p style="text-align:justify;">गौरतलब है कि प्रधानमंत्री मोदी के इस दौरे में कारोबार और जीएसटी मुद्दे पर निवेशकों से बातचीत शीर्ष एजेंडे में है। मोदी के साथ बैठक में एडोब के अध्यक्ष और सीईओ, चेयरमैन शांतनु नारायण, अमेजन के सीईओ जेफ बेजोस समेत 21 कंपनियों के सीईओ मौजूद रहे। जिन कंपनियों के CEO से मोदी ने मुलाकात की, उनमें से 19 कंपनियों की मार्केट वैल्यू 210 लाख करोड़ रुपए यानी 210 ट्रिलियन है।</p>
<p style="text-align:justify;">इससे पहले अमेरिका की दिग्गज कंपनियों के मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्री मोदी के साथ होने वाली इस मुलाकात को लेकर बेहद उत्साहित दिखे। इस बैठक का उद्देश्य भारत में निवेश को प्रोत्साहित करना था। दरअसल, जीएसटी (वस्तु एवं सेवा कर) को लेकर विदेशी निवेशकों में तमाम आशंकाएं थी। ऐसे में यह बैठक काफी अहम मानी जा रही है। इससे निवेशकों को जीएसटी को समझने में भी मदद मिली।</p>
<h2 style="text-align:justify;"> कंपनियों की मार्केट वैल्यू</h2>
<p style="text-align:justify;">मोदी जिन 21 CEO से मिले, उनकी कंपनियों की मार्केट वैल्यू 210 लाख करोड़ रुपए यानी 210 ट्रिलियन है। यह आंकड़ा फोर्ब्स और फॉर्च्यून की लिस्ट के मुताबिक है। बता दें कि 2015 के अपने दौरे में भी मोदी ने यूएस के टॉप 47 CEO से मुलाकात की। उन CEO की कंपनियों की उस वक्त मार्केट वैल्यू 300 लाख करोड़ रुपए यानी 300 ट्रिलियन थी।</p>
<p style="text-align:justify;">                     <strong>  CEO                                                                                    कंपनी मार्केट वैल्यू (बिलियन डॉलर)</strong></p>
<ul>
<li style="text-align:justify;">1 शांतनु नारायण, एडोब                                                                                                      64.40</li>
<li style="text-align:justify;">2 जेफ बेजोस, अमेजन                                                                                                          427</li>
<li style="text-align:justify;">3 जिम टैक्लेट, अमेरिका टावर कॉरपोरेशन                                                                             33</li>
<li style="text-align:justify;">4 टिम कुक, एप्पल                                                                                                                 752</li>
<li style="text-align:justify;">5 जिम उम्प्लेबाई, कैटरपिलर                                                                                                  56</li>
<li style="text-align:justify;">6 जॉन चैम्बर्स, सिस्को                                                                                                         165.10</li>
<li style="text-align:justify;">7 पुनित रेंजेन, डिलाइट                                                                                                           35</li>
<li style="text-align:justify;">8 डेविड फार, इमर्सन                                                                                                          38.30</li>
<li style="text-align:justify;">9 मार्क वेनबर्ग, अर्नेस्ट एंड यंग                                                                                               29.60</li>
<li style="text-align:justify;">10 सुंदर पिचाई, गूगल                                                                                                           600</li>
<li style="text-align:justify;">11 जेमी डिमोन, जेपी मॉर्गन                                                                                                     11</li>
<li style="text-align:justify;">12 मेरीलिन ह्यूसन, लॉकहीड मार्टिन                                                                                   78.30</li>
<li style="text-align:justify;">13 आर्ने सोरेनसन, मैरियट इंटरनेशनल                                                                               34.90</li>
<li style="text-align:justify;">14 अजय बंगा, मास्टरकार्ड                                                                                                 121.30</li>
<li style="text-align:justify;">15 इरेन रोसेनफील्ड , मोंडेलेज इंटरनेशनल                                                                         67.40</li>
<li style="text-align:justify;">16 डेविड रूबेन्स्टीन, कार्लाइल ग्रुप                                                                                       162</li>
<li style="text-align:justify;">17 डग मैकमिलन, वालमार्ट                                                                                                   221</li>
<li style="text-align:justify;">18 चार्ल्स काये, वारबर्ग पिनकस                                                                                             40</li>
<li style="text-align:justify;">19 डेनियल यारगिन, IHS मार्किट                                                                                          17.2</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>          </strong></p>
<p style="text-align:justify;"><strong>                                                                      कुल 3,275 बिलियन डॉलर, यानी 210 लाख करोड़ रुपए (210 ट्रिलियन)</strong></p>
<p style="text-align:justify;">
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                                                            <category>विदेश</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>अन्य खबरें</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 26 Jun 2017 06:25:31 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>UBER के CEO ने दिया इस्तीफा</title>
                                    <description><![CDATA[वाशिंगटन । दुनि‍या की सबसे बड़ी ऐप बेस्‍ड कैब प्रोवाइड उबर के फाउंडर ट्रेवि‍स कलानि‍क कंपनी की सीईओ पोस्ट से हट गए हैं।न्यूयॉर्क पोस्ट की खबर के मुताबिक, कलानिक ने गुरुवार को उबर कर्मचारियों को भेजे एक ईमेल में इसकी जानकारी दी। कलानिक ने कर्मचारियों को संबोधित कर कहा, ”आज सुबह (गुरुवार) मेरी राष्ट्रपति से आव्रजन […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/other-news/ceo-resigns-of-uber/article-1465"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-06/ceo.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>वाशिंगटन ।</strong> दुनि‍या की सबसे बड़ी ऐप बेस्‍ड कैब प्रोवाइड उबर के फाउंडर ट्रेवि‍स कलानि‍क कंपनी की सीईओ पोस्ट से हट गए हैं।न्यूयॉर्क पोस्ट की खबर के मुताबिक, कलानिक ने गुरुवार को उबर कर्मचारियों को भेजे एक ईमेल में इसकी जानकारी दी।</p>
<p>कलानिक ने कर्मचारियों को संबोधित कर कहा, ”आज सुबह (गुरुवार) मेरी राष्ट्रपति से आव्रजन संबंधी कार्यकारी आदेश और इससे हमारे समुदाय के समक्ष समस्याओं पर बात हुई।” कलानिक ने कहा, ”मैंने उन्हें यह भी बताया कि मैं इस आर्थिक परिषद का हिस्सा नहीं बन पाऊंगा। समूह का हिस्सा बनना राष्ट्रपति या उनके एजेंडे का समर्थन करना नहीं है लेकिन दुर्भाग्यवश इसे इसी संदर्भ में समझा जा रहा है।”</p>
<h2>आखिर क्यों दिया इस्तीफा</h2>
<p>उबर सीईओ को ट्रंप के साथ काम करने के लिए अपने कर्मचारियों और देश के दूसरे लोगों से बड़ी आलोचना झेलनी पड़ रही थी। लोगों का कहना था कि उनकी कंपनी उबर अप्रवासियों के भरोसे ही दुनियाभर में चल रही है और वो ट्रंप की सलाहकार समिति में शामिल हैं जो एक तरह से ट्रंप की नीतियों का समर्थन है। इन्हीं आलोचनाओं के कारण ट्रैविस क्लानिक ने अपने आप को ट्रंप की सलाहकार समिति से हटा लिया है।</p>
<p> </p>
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                                            <category>अन्य खबरें</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 21 Jun 2017 03:26:11 +0530</pubDate>
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