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                <title>Anmol vachan DSS - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>Anmol Vachan: ‘मालिक के नाम में बेइंतहा खुशियां’</title>
                                    <description><![CDATA[सरसा (सच कहूँ )। सच्चे रूहानी रहबर पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि सत्संग में जीव जब चलकर आते हैं, राम नाम का पाठ संत उन्हें पढ़ाते हैं। सुन कर जो अमल कमाया करते हैं उनके जन्मों-जन्मों के पाप कर्म कट जाते हैं और मालिक की दया-मेहर मुसलाधार […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/spiritual/holy-sermons/there-is-infinite-joy-in-the-name-of-the-lord/article-65094"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2024-12/saint-dr-msg1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">सरसा (सच कहूँ )। सच्चे रूहानी रहबर पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि सत्संग में जीव जब चलकर आते हैं, राम नाम का पाठ संत उन्हें पढ़ाते हैं। सुन कर जो अमल कमाया करते हैं उनके जन्मों-जन्मों के पाप कर्म कट जाते हैं और मालिक की दया-मेहर मुसलाधार बरसती हुई उन्हें नजर आने लगती है। Anmol Vachan</p>
<p style="text-align:justify;">पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि मालिक के नाम में बेइंतहा खुशियां हैं। नाम का सुमिरन कोई नसीबों वाला और अच्छे संस्कारों वाला ही करता है। देखने में आता है कि मालिक का नाम अनमोल है। पर कोई-कोई ही ले पाता है, कोई-कोई ही उसका जाप कर पाता है। जो करता है, वो खुशियां जिसकी कभी कल्पना नहीं हो सकती, इन्सान को महसूस होती हैं। और इन्सान उन खुशियों को हासिल करके दोनों जहानों की सैर करना शुरू कर देता है। एक बार आत्मा अगर रुहानी मंडलों पर उड़ारी मार देती है तो कभी भी गिरती नहीं, बल्कि उड़ती चली जाती है। काल-महाकाल की भी ताकत नहीं होती कि उसे रोक सके। जीते-जी जब तक शरीर में आत्मा रहती है तो परमानंद की प्राप्ति होती है और मरणोपरांत आत्मा को मोक्ष मुक्ति मिलती है।</p>
<p style="text-align:justify;">पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि जब तक जिंदगी है मालिक की भक्ति करो, आत्मरक्षा हर प्राणी का फर्ज है उसे करते रहना चाहिए। सुमिरन करते रहना चाहिए। मन के हाथों चढ़कर गलत कदम कभी न उठाओ। मन बड़ा जालिम है, जो भी इन्सान मन के हाथों मजबूर होकर बुरे कर्म करते हैं वो हमेशा दुखी रहते हैं, परेशान रहते हैं तथा खुशियां कभी उनके पास नहीं आती। Anmol Vachan</p>
<p><a title="Yaad-e-Murshid Eye Camp: 33वाँ याद-ए-मुर्शिद फ्री आई कैंप इस दिन से शुरू! पर्चियां इस दिन से बनने लगेंगी!" href="http://10.0.0.122:1245/yaad-e-murshid-free-eye-camp-3/">Yaad-e-Murshid Eye Camp: 33वाँ याद-ए-मुर्शिद फ्री आई कैंप इस दिन से शुरू! पर्चियां इस दिन से बनने लग…</a></p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>अनमोल वचन</category>
                                            <category>अध्यात्म</category>
                                            <category>सत्संग</category>
                                            <category>प्रेरणास्रोत</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 07 Dec 2024 12:01:43 +0530</pubDate>
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                <title>मालिक का नाम लेने वाले पहले भी अमर थे और आज भी अमर हैं: पूज्य गुरु जी</title>
                                    <description><![CDATA[-बुराई और अच्छाई में हमेशा ही जंग रही है और जारी है -बुराई करने वालों का नामोनिशान नहीं मिलता: पूज्य गुरु जी सरसा (सच कहूँ न्यूज)। पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि धर्म और अधर्म का युद्ध हमेशा चलता रहा है। (Anmol vachan DSS) बुराई और अच्छाई में […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/anmol-vachan-dss-saint-dr-msg/article-87226"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-02/m-3.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:justify;"><strong>-बुराई और अच्छाई में हमेशा ही जंग रही है और जारी है</strong></h3>
<ul>
<li style="text-align:justify;"><strong>-बुराई करने वालों का नामोनिशान नहीं मिलता: पूज्य गुरु जी</strong></li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>सरसा (सच कहूँ न्यूज)।</strong> पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि धर्म और अधर्म का युद्ध हमेशा चलता रहा है। <strong>(Anmol vachan DSS)</strong> बुराई और अच्छाई में हमेशा ही जंग थी और जारी है। लेकिन इतिहास गवाह है कि अल्लाह, वाहेगुरु, गॉड, खुदा, रब्ब का नाम लेने वाले पहले भी थे, अब भी हैं और उनके नाम आज भी अमर हैं। उनके नाम दोनों जहान में जगमगा रहे हैं, जबकि बुराई करने वालों का नामोनिशान नहीं मिलता। खुदगर्ज लोग बड़ा तड़प कर मरते हैं। उनका वो हश्र होता है कि न जीने में, न मरने में। समय लग सकता है लेकिन कलियुग है, हो सकता है मालिक ज्यादा समय न लगाए।</p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>पीर, पैगम्बरों की काल के साथ हमेशा टक्कर रहती है : पूज्य गुरु जी<br />
</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">आप जी ने फरमाया कि आम इन्सान के साथ यही हाल होता रहता है। यह अलग बात है कि पीर, पैगम्बर, अवतारों की काल के साथ टक्कर रहती है, इतिहास गवाह है। श्रीराम जी को भगवान कहते हैं, लेकिन उन्होंने क्या बुरा किया था? श्रीराम जी को पुरुषोत्तम कहा गया यानि पुरुषों में उत्तम। यह कोई छोटी बात नहीं थी। श्रीराम जी अपनी मां को छोड़कर पहले दूसरी माताओं के पांव के हाथ लगाता था।</p>
<p style="text-align:justify;">अपनी मां को भी प्यार देना यह कायदा था। उनके पिता ने उन्हें नहीं बताया था कि कैकेई का यह वचन है लेकिन राम जी ने खुद पता करवाया। जब वचन के बारे में पता चला तो उसी समय वनवास के लिए तैयार हो गए। कहने का मतलब है कि उनका नाम आज भी है और उनका कोई बाल भी बांका नहीं कर सका।</p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>जो रूहानियत में आगे बढ़ता है वो बेइन्तहा खुशियां पाता है: पूज्य गुरु जी<br />
</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">आप जी ने फरमाया कि इन्सान जब रूहानियत में आगे बढ़ता है तो उसे बेइन्तहा खुशियां मिलती हैं। टोकने वाले टोकते हैं, रोकने वाले रोकते हैं लेकिन मालिक के नाम का आशिक दौड़ा चला आता है और खुशियां हासिल करता है। वह राम-नाम से अपने कदम कभी वापिस नहीं खींचता।</p>
<p style="text-align:justify;">अल्लाह, मालिक की याद में आकर बैठता है और वहां बरसने वाली मालिक की दया-मेहर, रहमत को हासिल जरूर करता है। इसकी निशानी यह है कि उसे जो सुकून, चैन, आनन्द मिलता है वो बाहर की दुनिया में कहीं से खरीदा नहीं जा सकता क्योंकि जहां मालिक की चर्चा होती हो, कहते हैं कि वहां मालिक खुद विराजमान होकर दया-मेहर, रहमत लूटाते हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>आप सही हैं तो मालिक अपने आप रहमत करेगा</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">आप जी ने फरमाया कि इन्सान निंदा-चुगली करता है लेकिन इन्सान को सिर्फ अपने तक सीमित रहना चाहिए। अगर आप सही हैं तो बढ़िया है, मालिक अपने आप रहमत करेगा लेकिन दूसरों को देखकर आप दुखी होते हैं तो खुशियां कैसे मिलेगी? इसलिए इन्सान को अपने अवगुण देखने चाहिए, किसी दूसरे के नहीं।</p>
<p style="text-align:justify;">आप जी ने आगे फरमाया कि इन्सान अपने अंदर जो कुछ देखता है वह निकल जाता है और जो कुछ दूसरों में देखता है वह उसके अंदर आ जाता है। इसलिए अगर दूसरे में अवगुण देखते हो तो वो अवगुण आपके अंदर आ जाएंगे और गुण देखोगे तो आपमें गुण आ जाएंगे। इसलिए अपने अंदर अगर देखना है तो अवगुण देखो और दूसरों में गुण देखो ताकि आप गुणवान बन जाओ और दोनों जहानों में परमात्मा की खुशियों से मालामाल हो जाओ।</p>
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                <pubDate>Fri, 03 Feb 2023 09:47:35 +0530</pubDate>
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