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                <title>Farmers Protests - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <description>Farmers Protests RSS Feed</description>
                
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                <title>Farmers Protests: राहुल गांधी के खिलाफ फूटा किसानों का गुस्सा! फूंका भूपेंद्र सिंह हुड्डा का पुतला </title>
                                    <description><![CDATA[तीन कृषि कानूनों की वापसी का श्रेय कांग्रेस नेता राहुल गांधी को दिए जाने के बयान पर किसानों का गुस्सा फूट पड़ा। भारतीय किसान एकता (बीकेई) के बैनर तले सोमवार को किसानों ने लघु सचिवालय के बाहर प्रदर्शन करते हुए हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा का पुतला फूंका।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/farmers-protests-farmers-anger-erupted-against-rahul-gandhi-bhupendra-singh/article-84665"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-05/sirsa-farmer-protest.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Farmers Protests: सरसा (सच कहूँ/सुनील वर्मा)। तीन कृषि कानूनों की वापसी का श्रेय कांग्रेस नेता राहुल गांधी को दिए जाने के बयान पर किसानों का गुस्सा फूट पड़ा। भारतीय किसान एकता (बीकेई) के बैनर तले सोमवार को किसानों ने लघु सचिवालय के बाहर प्रदर्शन करते हुए हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा का पुतला फूंका। Sirsa News</p>
<p style="text-align:justify;">किसानों ने आरोप लगाया कि इस तरह के बयान किसान आंदोलन और उसमें शहीद हुए किसानों के संघर्ष का अपमान हैं। प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे बीकेई अध्यक्ष लखविंद्र सिंह ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा लाए गए तीनों कृषि कानूनों के खिलाफ देशभर के किसानों ने ऐतिहासिक आंदोलन किया था। किसान 378 दिनों तक दिल्ली की सीमाओं पर डटे रहे। इस दौरान हजारों किसानों पर मुकदमे दर्ज किए गए और करीब 750 किसानों ने आंदोलन के दौरान अपनी शहादत दी।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि लखीमपुर खीरी जैसी घटनाओं में किसानों ने अपने साथियों को खोया, लेकिन इसके बावजूद आंदोलन जारी रखा गया। किसानों के लंबे संघर्ष और देशभर में बने जनदबाव के बाद ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरु नानक देव जी के प्रकाश पर्व के अवसर पर देश से माफी मांगते हुए तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने की घोषणा की थी। किसान नेताओं ने कहा कि अब कांग्रेस नेताओं द्वारा यह दावा करना कि कृषि कानून राहुल गांधी के कारण वापस हुए, पूरी तरह गलत और भ्रामक है।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि यह बयान किसान आंदोलन को कमजोर करने और शहीद किसानों के संघर्ष को नजरअंदाज करने जैसा है। बीकेई नेताओं ने भूपेंद्र सिंह हुड्डा से सार्वजनिक रूप से किसानों से माफी मांगने की मांग की। उन्होंने कहा कि किसान समाज अपने शहीद साथियों के अपमान को कभी स्वीकार नहीं करेगा। किसान नेताओं ने यह भी कहा कि किसान आज भी एमएसपी की कानूनी गारंटी, कर्ज मुक्ति और अन्य मांगों को लेकर संघर्ष कर रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">ऐसे में राजनीतिक दलों को किसानों के संघर्ष का श्रेय लेने की बजाय उनकी समस्याओं के समाधान पर ध्यान देना चाहिए। प्रदर्शन के दौरान अंग्रेज सिंह कोटली, गुरप्रीत संधू, गुरप्रीत जैलदार, जगतार बराड़, गुरजीत मान, नत्था सिंह झोरड़ रोही, विनोद मोड़ावाली, राजू सिंह, महावीर गुडियाखेड़ा, राकेश खारिया, गुरसेवक सिंह वीरूवाला, बलकार सिंह और शिरा सिंह सहित बड़ी संख्या में किसान मौजूद रहे। Sirsa News</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
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                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 12 May 2026 13:14:55 +0530</pubDate>
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                <title>Ladowal Toll Plaza: पंजाब का सबसे महंगा टोल प्लाजा किसानों के लिए फ्री, जानें अभी की स्थिति</title>
                                    <description><![CDATA[लुधियाना (सच कहूँ न्यूज)। भारतीय किसान मजदूर यूनियन, भारतीय किसान यूनियन दोआबा और राजनीतिक पार्टियों के नेताओं ने आज नेशनल हाईवे पर लाडोवाल टोल प्लाजा पर विरोध प्रदर्शन किया और टोल फ्री करवा दिया। टोल प्लाजा पर धरना देने के बाद टोल को पूरी तरह से फ्री कर दिया गया है और किसी भी गाड़ी […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/punjab/punjabs-most-expensive-toll-plaza-is-now-free-for-farmers-know-the-current-situation/article-80737"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-01/ladowal-toll.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">लुधियाना (सच कहूँ न्यूज)। भारतीय किसान मजदूर यूनियन, भारतीय किसान यूनियन दोआबा और राजनीतिक पार्टियों के नेताओं ने आज नेशनल हाईवे पर लाडोवाल टोल प्लाजा पर विरोध प्रदर्शन किया और टोल फ्री करवा दिया। टोल प्लाजा पर धरना देने के बाद टोल को पूरी तरह से फ्री कर दिया गया है और किसी भी गाड़ी वाले को टोल फीस जमा नहीं करने दी जा रही है। Ladowal Toll Plaza</p>
<p style="text-align:justify;">इस मौके पर भारतीय किसान मजदूर यूनियन पंजाब के प्रेसिडेंट दिलबाग सिंह गिल, भारतीय किसान यूनियन दोआबा मालवा जोन के प्रेसिडेंट इंदरवीर सिंह कादियान, साहनेवाल विधानसभा क्षेत्र के यूथ कांग्रेस पंजाब कोऑर्डिनेटर एडवोकेट मनवीर सिंह धालीवाल और भारतीय जनता पार्टी के स्पोक्सपर्सन प्रितपाल सिंह बालीवाल आदि ने मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि आज साहनेवाल विधानसभा क्षेत्र के गांव ससराली कॉलोनी का बांध न बनने और राहों रोड का निर्माण शुरू न होने के विरोध में टोल प्लाजा पर धरना देकर पंजाब सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि ससराली कॉलोनी का बांध पिछले 6 महीने से टूटा हुआ है, लेकिन पंजाब सरकार आंखें मूंदकर बैठी है। खबर लिखे जाने तक यह टोल प्लाजा फ्री चल रहा था। Ladowal Toll Plaza</p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>पंजाब</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 27 Jan 2026 14:11:04 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>Farmers Protests: किसानों ने जिला कलक्ट्रेट समक्ष किया प्रदर्शन</title>
                                    <description><![CDATA[राष्ट्रीय कृषि बाजार नीति की प्रतियां जलाईं, राष्ट्रपति के नाम एडीएम को सौंपा ज्ञापन Farmers Protests in Hanumangarh हनुमानगढ़। किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल की जान बचाने के लिए किसान संगठनों के साथ बातचीत करने, दिल्ली कूच करने वाले किसानों पर दमन बंद करने व राष्ट्रीय कृषि बाजार नीति को वापस लेने की मांग को […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/rajasthan/farmers-demonstrated-in-front-of-the-district-collectorate/article-65639"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2024-12/protests-hanumangarh.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:justify;">राष्ट्रीय कृषि बाजार नीति की प्रतियां जलाईं, राष्ट्रपति के नाम एडीएम को सौंपा ज्ञापन</h3>
<p style="text-align:justify;">Farmers Protests in Hanumangarh हनुमानगढ़। किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल की जान बचाने के लिए किसान संगठनों के साथ बातचीत करने, दिल्ली कूच करने वाले किसानों पर दमन बंद करने व राष्ट्रीय कृषि बाजार नीति को वापस लेने की मांग को लेकर किसानों ने सोमवार को संयुक्त किसान मोर्चा के देशव्यापी आह्वान पर जिला कलक्ट्रेट के समक्ष प्रदर्शन किया। किसानों ने केन्द्र सरकार की ओर से जारी राष्ट्रीय कृषि बाजार नीति की प्रतियां जलाते हुए इस नीति का पुरजोर विरोध किया। इसके बाद राष्ट्रपति के नाम अतिरिक्त जिला कलक्टर को ज्ञापन सौंपा। Farmers Protests</p>
<p style="text-align:justify;">किसान प्रतिनिधियों ने कहा कि संयुक्त किसान मोर्चा ने 18वीं लोकसभा चुनाव के बाद एनडीए सरकार के सत्ता में आने के ठीक बाद प्रधानमंत्री, संसद के दोनों सदनों में विपक्ष के नेताओं और सभी संसद सदस्यों को ज्ञापन सौंपा था। किसानों ने 9 अगस्त को पूरे देश में कृषि पर कॉरपोरेट नियंत्रण के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन किया। एसकेएम ने केन्द्रीय ट्रेड यूनियनों और कृषि श्रमिक संघों व मंचों के साथ मिलकर 500 से अधिक जिलों में बड़े पैमाने पर मजदूर-किसान विरोध प्रदर्शन किए।</p>
<h3>पीएम मोदी संघर्ष कर रहे किसान संगठनों के साथ चर्चा करने के लिए तैयार नहीं</h3>
<p style="text-align:justify;">यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी संघर्ष कर रहे किसान संगठनों के साथ चर्चा करने के लिए तैयार नहीं हैं। इसकी बजाए, पंजाब के शंभू और खनौरी सीमाओं और उत्तर प्रदेश के नोएडा-ग्रेटर नोएडा में किसानों के संघर्ष को आंसू गैस के गोले, रबर की गोलियां, पानी की बौछारों का इस्तेमाल कर और शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन कर रहे सैकड़ों किसानों को जेल में डालकर क्रूरता से दबाने के लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि नई राष्ट्रीय कृषि बाजार नीति तीन कृषि कानूनों को पिछले दरवाजे से फिर से लागू करने की कॉरपोरेट एजेंडे की रणनीति का हिस्सा है।</p>
<p style="text-align:justify;">कॉरपोरेट ताकतें भारत के मेहनतकश लोगों को चुनौती दे रही हैं और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केन्द्र सरकार केवल कॉरपोरेट हितों की सेवा कर रही है। ज्ञापन के जरिए मांग की गई कि किसान संगठनों के साथ बातचीत की जाए और किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल की जान बचाए। दिल्ली कूच करने वाले किसानों पर दमन बंद हो। नोएडा-ग्रेटर नोएडा के सभी किसानों को जेल से रिहा किया जाए। राष्ट्रीय कृषि बाजार नीति को वापस लिया जाए। सभी किसान संगठनों के साथ तत्काल चर्चा कर 9 दिसम्बर, 2021 के पत्र में सहमति के अनुसार सभी लंबित मुद्दों का समाधान किया जाए। इस मौके पर रघुवीर वर्मा, रेशमसिंह माणुका, सुभाष गोदारा, रायसाहब चाहर, वेदप्रकाश, आत्मासिंह आदि मौजूद रहे। Farmers Protests</p>
<p><a title="चिकित्सा मंत्री खींवसर ने श्रीजवाहिर चिकित्सालय का किया औचक निरीक्षण" href="http://10.0.0.122:1245/medical-minister-khinvsar-did-a-surprise-inspection-of-shri-jawahar-hospital/">चिकित्सा मंत्री खींवसर ने श्रीजवाहिर चिकित्सालय का किया औचक निरीक्षण</a></p>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 23 Dec 2024 16:08:09 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Kisan Rail Roko Andolan: किसानों ने पंजाब में रोकी ट्रेनें</title>
                                    <description><![CDATA[एमएसपी सहित मांगों को लेकर कर रहे हैं आंदोलन Kisan Rail Roko Andolan: चंडीगढ़ (ब्यूरो)। एमएसपी सहित विभिन्न मांगों को लेकर शंभू बॉर्डर और खनौरी बॉर्डर पर आंदोलन कर रहे किसानों के समर्थन में बुधवार को किसानों ने पंजाब में 3 घंटे रेलवे ट्रैक जाम किए। इस दौरान किसानों ने दोपहर 12 बजे से 3 […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/punjab/farmers-stopped-trains-in-punjab/article-65465"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2024-12/kisan-punjab.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:justify;">एमएसपी सहित मांगों को लेकर कर रहे हैं आंदोलन</h3>
<p style="text-align:justify;">Kisan Rail Roko Andolan: चंडीगढ़ (ब्यूरो)। एमएसपी सहित विभिन्न मांगों को लेकर शंभू बॉर्डर और खनौरी बॉर्डर पर आंदोलन कर रहे किसानों के समर्थन में बुधवार को किसानों ने पंजाब में 3 घंटे रेलवे ट्रैक जाम किए। इस दौरान किसानों ने दोपहर 12 बजे से 3 बजे तक ट्रैकों को जाम रखा। रेलवे ट्रैक जाम होने से दिल्ली-पठानकोट सुपरफास्ट एक्सप्रेस को लुधियाना के ढंडारी कलां में रोकना पड़ा। वहीं कुछ ट्रेनों को कैंसिल तो कुछ को डायवर्ट भी करना पड़ा। किसानों के प्रदर्शन से दर्जनों ट्रेनों की आवाजाही पर असर पड़ा। वहीं खनौरी बॉर्डर पर चल रहे किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल के आमरण अनशन को लेकर संयुक्त किसान मोर्चा की चंडीगढ़ स्थित किसान भवन में इमरजेंसी मीटिंग हुई। मीटिंग में डल्लेवाल को समर्थन देने का फैसला लिया गया। Kisan Andolan News</p>
<p style="text-align:justify;">उधर फसलों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य सहित मांगों को लेकर आन्दोलनरत किसान संगठन बुधवार को सुप्रीम कोर्ट की गठित कमेटी से नहीं मिले। अभिमन्यु कोहड़ और अन्य किसान नेताओं ने खनौरी बॉर्डर पर मीडिया से बातचीत में बताया कि समिति की तरफ से किसान मजदूर मोर्चा और संयुक्त किसान मोर्चा (गैर-राजनीतिक) को पत्र मिला था, जिसमें बताया गया था कि कमेटी पंचकुला में बुधवार दोपहर एक बजे विश्राम गृह में मिलेगी। दोनों संगठनों ने चर्चा के बाद तय किया कि किसान कमेटी से नहीं मिलेंगे।</p>
<h3>डल्लेवाल के साथ आया किसान मोर्चा | Kisan Andolan News</h3>
<p>कमेटी को लिखे जवाबी पत्र (जिस पर आमरण अनशन पर बैठे किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल के हस्ताक्षर हैं) में कहा गया है कि 26 नवंबर से खनौरी बॉर्डर पर अनशन चल रहा है। डल्लेवाल की चिकित्सकीय स्थिति के बारे में आपको पता ही होगा। आमरण अनशन की घोषणा चार नवंबर को की गई थी, यानी घोषणा को 43 दिन और अनशन शुरू हुए 22 दिन हो चुके हैं। पत्र में यह भी कहा गया कि इस दौरान शंभू बॉर्डर से पैदल जाने वाले किसानों पर पुलिस ने ज्यादतियां कीं, जिसमें 40 से अधिक किसान घायल हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">पत्र में कहा गया कि सुप्रीम कोर्ट ने कमेटी का गठन किसानों और सरकार में विश्वास बहाली के लिए बनाई गई थी, लेकिन आपने कोई ठोस प्रयास नहीं किया और न ही किसानों की जायज मांगों को पूरा कराने के लिए केन्द्र सरकार से बातचीत का कोई गंभीर प्रयास किया। पत्र में कहा गया है कि दोनों संगठनों को पहले ही अंदेशा था कि कमेटियां खानापूर्ति के लिए बनाई जाती हैं, पर सुप्रीम कोर्ट और कमेटी का सम्मान करते हुए दोनों किसान संगठनों का प्रतिनिधिमण्डल चार नवंबर से कमेटी से मिला, लेकिन गंभीर स्थिति होने के बावजूद कमेटी अब तक शंभू और खनौरी मोर्चे पर नहीं आ सकी।</p>
<h3>सुप्रीम कोर्ट की कमेटी से नहीं मिले किसान</h3>
<p style="text-align:justify;">पत्र में कहा गया है कि कमेटी को इतनी देर से सक्रिय होने पर दु:ख हुआ है। क्या यह कमेटी डल्लेवाल की मृत्यु का इंतजार कर रही है? पत्र में कहा गया कि किसानों को कमेटी से इतनी संवेदनहीनता की उम्मीद नहीं थी और अब किसान संगठनों ने डल्लेवाल की नाजुक स्थिति को देखते हुए और घायल किसानों को देखते हुए यह फैसला किया है कि वह कमेटी से नहीं मिलेंगे और जो भी बातचीत करनी होगी सीधे केंद्र सरकार से ही करेंगे। Kisan Andolan News</p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>पंजाब</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 18 Dec 2024 17:22:46 +0530</pubDate>
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