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                <title>आचरेकर: अंतिम यात्रा में विदाई देने पहुंचे सचिन तेंदुलकर</title>
                                    <description><![CDATA[लंबे समय से बीमार थे रमाकांत आचरेकर मुंबई। भारत रत्न सचिन तेंदुलकर के कोच रमाकांत आचरेकर की अंतिम यात्रा शुरू हो चुकी है। इसमें सचिन (Achrekar Sachin Tendulkar Came Give Farewell Last Visit) तेंडुलकर, विनोद कांबली और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना प्रमुख राज ठाकरे शामिल हुए। इस दौरान मुंबई के युवा क्रिकेटर्स ने आचरेकर को बल्ले […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><h1 style="text-align:justify;">लंबे समय से बीमार थे रमाकांत आचरेकर</h1>
<p style="text-align:justify;"><strong>मुंबई।</strong> भारत रत्न सचिन तेंदुलकर के कोच रमाकांत आचरेकर की अंतिम यात्रा शुरू हो चुकी है। इसमें सचिन (Achrekar Sachin Tendulkar Came Give Farewell Last Visit) तेंडुलकर, विनोद कांबली और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना प्रमुख राज ठाकरे शामिल हुए। इस दौरान मुंबई के युवा क्रिकेटर्स ने आचरेकर को बल्ले से सलामी दी। उनका अंतिम संस्कार शिवाजी पार्क में होगा। बुधवार को मुंबई में आचरेकर का निधन हो गया था। वे 87 साल के थे।</p>
<h2 style="text-align:justify;">बुधवार शाम 6.30 बजे मुंबई में ली अंतिम सांस</h2>
<p style="text-align:justify;">सचिन ने शुरुआती दिनों में आचरेकर से क्रिकेट सीखा। पूर्व क्रिकेटर विनोद कांबली भी (Achrekar Sachin Tendulkar Came Give Farewell Last Visit) उनसे ट्रेनिंग लिया करते थे। आचरेकर ने अजित अगरकर, चंद्रकांत पंडित और प्रवीण आमरे समेत कई दिग्गज क्रिकेटरों को भी कोचिंग दी थी। आचरेकर को द्रोणाचार्य अवॉर्ड और पद्मश्री से सम्मानित किया जा चुका है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आचरेकर के निधन पर शोक जताया। पीएमओ के ऑफिशियल ट्वीटर अकाउंट पर उन्होंने लिखा, “यह खेल जगह के लिए बड़ा नुकसान है।”</p>
<h2 style="text-align:justify;">‘स्वर्ग में क्रिकेट को समृद्ध करेंगे आचरेकर’</h2>
<p style="text-align:justify;">आचरेकर के निधन पर सचिन ने कहा, ”स्वर्ग में भी अगर क्रिकेट होगा तो आचरेकर सर उसे समृद्ध कर देंगे। उनके अन्य छात्रों की तरह मैंने भी क्रिकेट की एबीसीडी उनसे ही सीखी। मेरे जीवन में उनका योगदान शब्दों से नहीं बताया जा सकता। आज मैं जहां खड़ा हूं, उसका आधार उन्हीं ने बनाया था।”</p>
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                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 03 Jan 2019 12:21:39 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>महान योद्धा की विदाई</title>
                                    <description><![CDATA[भारतीय वायु सेना के मार्शल अर्जन सिंह भारत के बुलंद हौंसले, बहादुरी, देश भक्ति और सम्मान के प्रतीक हैं। अर्जन सिंह हमेशा एक युद्ध नायक के रूप में याद किए जाएंगे, जिन्होंने 1965 में पाकिस्तान के खिलाफ युद्ध में भारत की जीत में अहम भूमिका निभाई थी, जो भारतीय सेना की भावी पीढ़ियों के लिए […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/farewell-to-the-great-warrior/article-3323"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-09/arjan-singh.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">भारतीय वायु सेना के मार्शल अर्जन सिंह भारत के बुलंद हौंसले, बहादुरी, देश भक्ति और सम्मान के प्रतीक हैं। अर्जन सिंह हमेशा एक युद्ध नायक के रूप में याद किए जाएंगे, जिन्होंने 1965 में पाकिस्तान के खिलाफ युद्ध में भारत की जीत में अहम भूमिका निभाई थी, जो भारतीय सेना की भावी पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत व गौरवमयी बना रहेगा। अर्जन सिंह देश के इकलौते ऐसे वायुसेना अधिकारी थे, जो पदोन्नत होकर पांच सितारों वाली रैंक तक पहुंचे थे। यह रैंक थलसेना के फील्ड मार्शल के बराबर होती है। अर्जन सिंह पहले ऐसे अिधिकारी हैं जिनके जीते-जी किसी एयरबेस का नाम उनके नाम पर रखा गया। उन्होंने इस बात को सिद्ध कर दिया था कि युद्ध केवल हथियारों से ही नहीं बल्कि बुलंद हौसले।</p>
<p style="text-align:justify;">रणनीति और पूरी सूझ-बूझ से जीता जा सकता है। चाहे भारतीय वायु सेना ने तकनीकी तौर पर तरक्की कर ली है लेकिन अर्जन सिंह का बुलंद हौसला देशवासियों पर अमिट छाप छोड़ गया है। अर्जन सिंह ने अपने सैनिक परिवार की शान को भी चार चांद लगाए। दूसरे विश्व युद्ध में भाग लेने वाले अर्जन सिंह ने कोर्ट मार्शल दौरान ऐसा जवाब दिया कि अंग्रेज सरकार को भी चुप करवा दिया। चाहे उन्हें एक अधिकारी को प्रशिक्षण देने के लिए नियम तोड़ने पड़े लेकिन बाद में वही अधिकारी वायु सेना का प्रमुख भी बना। अर्जन सिंह बहादुर सिपाही नहीं बल्कि एक निपुण ट्रेनर भी था। उनसे प्रशिक्षण लेने वाले बुलंदियों को जा छू जाते थे।</p>
<p style="text-align:justify;">1965 के युद्ध में एयरफोर्स की तैयारी के लिए केवल एक घंटे का समय अर्जन सिंह की प्रशासनिक सूझ-बूझ व बहादुरी का ही परिणाम था। पाकिस्तान सहित अन्य पड़ोसी देशों के लिए अर्जन सिंह का नाम ही काफी था। सेवामुक्ति के बाद अर्जन सिंह में अटूट जिंदादिली व हौसला था। दिवंगत पूर्व राष्ट्रपति डॉ. अब्दुल कलाम को श्रद्धांजलि भेंट करने के लिए वह व्हील चेयर पर हवाई अड्डे पर पहुंचे और कुर्सी से उठकर श्रद्धांजलि भेंट की। जिस देश के पास अर्जन सिंह जैसे महान योद्धा हों व वह देश किसी भी ताकत को मुंह तोड़ जवाब दे सकता है। पिछले कुछ समय में कुछ सैनिकों ने घटिया खाना परोसने व सुविधाओं की कमी होने का विवाद खड़ा कर सेना की छवि को धूमिल किया। भ्रष्टाचार ने भी सैनिक प्रबंधों पर कलंक लगाया है। अर्जन सिंह की सेवाओं से प्रेरणा लेकर सैनिक प्रबंधों में सुधार किया जा सकता है।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>सम्पादकीय</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/farewell-to-the-great-warrior/article-3323</link>
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                <pubDate>Tue, 19 Sep 2017 02:15:44 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>निराशाजनक रही बोल्ट की विदाई</title>
                                    <description><![CDATA[चार गुणा 100 मीटर रेस को समाप्त नहीं कर सके बोल्ट लंदन (एजेंसी)। यूसेन बोल्ट के लिए ट्रैक एवं फील्ड स्पर्धा के इतिहास में अपने दशक भरे दबदबे का अंत अच्छा नहीं रहा क्योंकि वह मांसपेशियों में खिंचाव के कारण यहां चल रही विश्व एथलेटिक्स चैम्पियनशिप की पुरुष चार गुणा 100 मीटर रेस को समाप्त नहीं […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/sports/disappointing-farewell-of-usain-bolt/article-3113"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-08/bolt1.jpg" alt=""></a><br /><h1 style="text-align:center;">चार गुणा 100 मीटर रेस को समाप्त नहीं कर सके बोल्ट</h1>
<p style="text-align:justify;"><strong>लंदन (एजेंसी)। </strong>यूसेन बोल्ट के लिए ट्रैक एवं फील्ड स्पर्धा के इतिहास में अपने दशक भरे दबदबे का अंत अच्छा नहीं रहा क्योंकि वह मांसपेशियों में खिंचाव के कारण यहां चल रही विश्व एथलेटिक्स चैम्पियनशिप की पुरुष चार गुणा 100 मीटर रेस को समाप्त नहीं कर सके। यह उनकी अंतिम विश्व चैम्पियनशिप की आखिरी स्पर्धा थी और उनसे स्वर्णिम विदाई की उम्मीद की जा रही थी लेकिन मांसपेशियों में खिंचाव ने सभी की उम्मीदों पर पानी फेर दिया। अपने करियर की अंतिम रेस में 30 वर्षीय बोल्ट ने जमैकाई साथी योहान ब्लेक से बेटन ली लेकिन तभी उनकी मांसपेशियों में खिंचाव आ गया। उन्होंने कोशिश की लेकिन सब व्यर्थ गया क्योंकि वह रेस की अंतिम लैप में ब्रिटिश और अमेरिकी प्रतिद्वंद्वियों का पीछा नहीं कर सके।</p>
<h2 style="text-align:justify;"> मांसपेशियों में आया खिंचाव</h2>
<p style="text-align:justify;">बोल्ट ने लंबे कदम बढ़ाने शुरू किए लेकिन वह अपनी चिर परिचित रफ्तार नहीं ला सके और लड़खड़ाकर कुछ कदम आगे बढ़ते हुए गिर गए, वह दर्द से कराह रहे थे। जमैका टीम के डाक्टर केविन जोंस ने बाद में कहा कि उनकी बाईं हैमस्ट्रिंग की मांसपेशियों में खिंचाव आ गया है लेकिन उन्हें सबसे ज्यादा दर्द रेस हारने की निराशा से है। पिछले तीन हफ्ते उनके लिए काफी कठिन रहे हैं। ओलंपिक स्टेडियम में यह दृश्य काफी दुखद था, जहां उन्होंने 2012 ओलंपिक खेलों में तीन स्वर्ण पदक अपने नाम किए थे। बोल्ट निराशा में घुटने के बल बैठ गए और अपना सिर उन्होंने अपने हाथों में रख दिया। वह काफी देर तक अकेले ट्रैक पर ऐसे ही बैठे रहे और ब्लेक व टीम के अन्य साथियों जूलियन फोर्टे और ओमर मैकलियोड ने उन्हें घेर लिया।</p>
<p style="text-align:justify;">जमैका के इस लंबी कद काठी का एथलीट को मदद करके उठाया गया लेकिन वह फिनिशिंग लाइन पर लड़खड़े रहे थे। दर्शकों ने तालियां बजाकर उसका प्रोत्साहन किया। परिणाम के बोर्ड पर हालांकि जमैका टीम के आगे डीएनएफ (रेस पूरी नहीं की) दिख रहा था। हालांकि आज का दृश्य पिछले शनिवार से ज्यादा दुखद था जब बोल्ट अपनी अंतिम व्यक्तिगत रेस में 100 मीटर में लंबे समय के प्रतिद्वंद्वी जस्टिन गैटलिन से पिछड़ गए थे।</p>
<p style="text-align:justify;">
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                <link>https://www.sachkahoon.com/sports/disappointing-farewell-of-usain-bolt/article-3113</link>
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                <pubDate>Sun, 13 Aug 2017 09:17:00 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>विदाई समारोह में बोले राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी- ‘मौद्रिक मामलों में अध्यादेश न लाएं’</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली (एजेंसी)। निवर्तमान राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने विभिन्न मामलों में अध्यादेश जारी करने की प्रवृत्ति पर चिंता जताते हुए रविवार को कहा कि किसी भी सरकार को अध्यादेश का फैसला बाध्यकारी परिस्थितयों में ही लेना चाहिए। मुखर्जी ने संसद भवन के केन्द्रीय कक्ष में अपने विदाई भाषण में कहा कि अध्यादेश का सहारा बाध्यकारी […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/other-news/given-emotional-farewell-to-president-pranab-mukherjee/article-2564"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-07/pranab-mukherjee.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (एजेंसी)।</strong> निवर्तमान राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने विभिन्न मामलों में अध्यादेश जारी करने की प्रवृत्ति पर चिंता जताते हुए रविवार को कहा कि किसी भी सरकार को अध्यादेश का फैसला बाध्यकारी परिस्थितयों में ही लेना चाहिए। मुखर्जी ने संसद भवन के केन्द्रीय कक्ष में अपने विदाई भाषण में कहा कि अध्यादेश का सहारा बाध्यकारी परिस्थितियों में ही लिया जाना चाहिए। मौद्रिक मामलों में तो इसका सहारा कतई नहीं लेना चाहिए।</p>
<h2 style="text-align:justify;">प्रणव मुखर्जी को भावभीनी विदाई दी</h2>
<p style="text-align:justify;">संसद की कार्यवाही में गतिरोध पैदा करने के मामले में भी निवर्तमान राष्ट्रपति ने कहा कि संसद बहस, विचार-विमर्श तथा असहमति व्यक्त करने की एक जगह है और इसकी कार्यवाही में बाधा आने से विपक्ष को ही ज्यादा नुक्सान होता है। संसदीय कार्यवाही में बाधा से होने वाले नुकसान की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि इससे कानून बनाने के समय में कमी आई है। हालांकि उन्होंने हाल ही में वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के सर्वसम्मति से पारित होने और गत एक जुलाई से इसे लागू किए जाने पर प्रसन्नता जताई और कहा कि यह सहकारी संघवाद का शानदार उदाहरण है।</p>
<p style="text-align:justify;">इस दौरान संसद के केन्द्रीय कक्ष में राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी को भावभीनी विदाई दी गई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने मंत्रिमंडलीय सहयोगियों के साथ समारोह में हिस्सा लिया। इस अवसर पर पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और एच डी देवेगौड़ा, पूर्व उप प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी और राज्यसभा में विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद ने भाग लिया। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी तथा विपक्ष के प्रमुख नेताओं सहित संसद के दोनों सदनों के करीब-करीब सभी सदस्य समारोह में उपस्थित थे।</p>
<p style="text-align:justify;">
</p><p><a href="http://10.0.0.122:1245/">Hindi News </a>से जुडे अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें <a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a> और <a href="https://x.com/SACHKAHOON">Twitter</a> पर फॉलो करें।</p>
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                                            <category>देश</category>
                                            <category>अन्य खबरें</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 23 Jul 2017 08:21:25 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>13वें राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी का विदाई समारोह आज</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली: 13वें राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी का कार्यकाल 24 जुलाई को खत्म हो रहा है। आज राष्ट्रपति भवन के सेंट्रल हॉल में उनका फेयरवेल (Farewell) प्रोग्राम होगा। इस प्रोग्राम के लिए पार्लियामेंट मेंबर्स ने तैयारी की है। माना जा रहा है कि ये एक शानदार विदाई होगी। लेकिन, 55 साल पहले जिस तरह से देश […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/mukherjee-farewell-ceremony-today/article-2548"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-07/farewell.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली:</strong> 13वें राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी का कार्यकाल 24 जुलाई को खत्म हो रहा है। आज राष्ट्रपति भवन के सेंट्रल हॉल में उनका फेयरवेल <strong>(Farewell)</strong> प्रोग्राम होगा। इस प्रोग्राम के लिए पार्लियामेंट मेंबर्स ने तैयारी की है। माना जा रहा है कि ये एक शानदार विदाई होगी। लेकिन, 55 साल पहले जिस तरह से देश के पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद को विदाई दी गई, वैसी अब तक किसी को नहीं मिली। शाम 5.30 मिनट पर प्रणब मुखर्जी का फेयरवेल प्रोग्राम शुरू होगा और ये करीब आधे घंटे तक चलेगा। इस प्रोग्राम में लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन, उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी मौजूद रहेंगे। दोनों फेयरवेल के दौरान स्पीच देंगे। नरेंद्र मोदी भी इस प्रोग्राम में मौजूद रहेंगे।</p>
<h1 style="text-align:justify;">13 राष्ट्रपतियों को नहीं मिली राजेंद्र प्रसाद जैसी विदाई | Farewell</h1>
<ul>
<li style="text-align:justify;">10 मई 1962 में रामलीला मैदान (दिल्ली) में हजारों लोग देश के पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद को विदाई देने के लिए पहुंचे।</li>
<li style="text-align:justify;">प्रणब समेत 13 राष्ट्रपतियों को ऐसी विदाई नहीं मिली।</li>
<li style="text-align:justify;">राजेंद्र प्रसाद को प्रेसिडेंट पोस्ट से रिटायर होने पर 1100 रुपए की पेंशन मिली।</li>
<li style="text-align:justify;">भारत-चीन युद्ध के समय अपनी पत्नी की ज्वेलरी डोनेट कर दी थी।</li>
<li style="text-align:justify;">राजेंद्र प्रसाद गांधीजी के रास्ते पर चले और उन्होंने हमेशा सादा जीवन जिया।</li>
<li style="text-align:justify;">28 फरवरी 1963 को उनकी मृत्यु हो गई।</li>
<li style="text-align:justify;">राष्ट्रपति बनने से पहले प्रणब का 50 साल का पॉलिटिकल करियर रहा।</li>
<li style="text-align:justify;">14 साल तक संसद के दोनों सदनों का नेतृत्व किया।</li>
<li style="text-align:justify;">4 प्राइम मिनिस्टर्स के साथ काम किया।</li>
<li style="text-align:justify;">कोविंद दो बार राज्यसभा के मेंबर रहे।</li>
<li style="text-align:justify;">प्रणब मुखर्जी करीब 43 साल तक पार्लियामेंट मेंबर रहे और 22 साल तक मिनिस्टर की पोस्ट पर रहे।</li>
<li style="text-align:justify;">28 साल तक वे कांग्रेस वर्किंग कमेटी के मेंबर रहे।</li>
<li style="text-align:justify;">अपने कार्यकाल के दौरान प्रणब मुखर्जी ने 32 दया याचिकाओं पर फैसला किया, इनमें से कुछ 2000 से अटकी थीं।</li>
<li style="text-align:justify;">कसाब को 2012, अफजल गुरू को 2013 और याकूब मेमन को 2015 में फांसी दी गई।</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;">
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                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 22 Jul 2017 23:45:37 +0530</pubDate>
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                <title>अनिल कुंबले की रूखी विदाई</title>
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/hindi-editorial-bad-farewell-for-anil-kumble/article-1491"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-06/kumble.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">भारतीय क्रिकेट के कोच पद से अनिल कुंबले विदा हो गए हैं। यूं तो उनका कार्यकाल 20 जून को खत्म हो गया था, लेकिन भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड फिर भी उन्हे नये कोच के आने तक वेस्टइंडीज के दौरे पर जा रही क्रिकेट के साथ भेज रहा था। इससे एक तरह से बीसीसीआई अनिल कुंबले को सम्मानजनक विदाई देना चाह रहा था, जो कि कुंबले के व्यवहार के चलते संभव नहीं हो सका। क्रिकेट में रूचि रखने वालों का यह मानना भी अब जायज लगता है कि बीसीसीआई में एक धड़ा ऐसा भी था, जो कुंबले को बहुत जल्द कोच पद से हटा हुआ देखना चाह रहा था।</p>
<p style="text-align:justify;">आखिर क्यों भारतीय क्रिकेट बोर्ड पहले बडे सम्मान से पूर्व खिलाड़ियों को कोच पद पर लाता है फिर जल्द ही उनसे पीछा छुड़ाने के बहाने ढूढ़ने लगता है? कपिल देव, मदन लाल, संदीप पाटिल, अजीत वाडेकर, बिश्न सिंह बेदी ये कई ऐसे कोच रहे हैं जिनकी विदाई भी कोई ज्यादा सम्मानजनक नहीं रही। यदि ताजा हालात में कुंबले की बात करें, तब इनके प्रशिक्षण में भारतीय टीम ने अच्छा प्रदर्शन किया है। टीम इंडिया ने कुंबले की कोचिंग में 17 टैस्ट मैच खेले और 12 जीते हैं करीब चार मैच ड्रा करे हैं। ठीक ऐसे ही वन-डे मैचेज में भी टीम इंडिया ने अच्छा प्रदर्शन किया और कोई भी सीरीज नहीं हारी। टी-20 मैचेज में भी टीम इंडिया ने पांच मैच खेले दो जीत लिए, दो हार गई व एक अनिर्णीत रहा। यदि चैम्पियन ट्रॉफी के हाल के फाईनल मैच की हार को भुला दिया जाए, तब अनिल कुंबले की कोचिगं में दम रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">टीम इंडिया की यदि बात करे तब अनिल कुंबले का उनके साथ मैदान में ‘हैडमास्टर’ की भूमिका में रहना कहीं न कहीं उनकी रूखी विदाई की वजह बनी है। भारतीय क्रिकेट में टीम चयन करने व मैदान पर टीम प्रंबधन में कप्तान की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण रहती है। अब टीम इंडिया के कप्तान विराट कोहली दुनिया के बेहतरीन खिलाड़ी हैं। जो कि पूर्व के किसी भी कप्तान से क्रिकेट में कमतर नहीं हैं। यहां वह भी अनिल कुंबले के बारे में बीसीसीआई को मैसेज करते हैं कि कुंबले ‘ओवर बियरिंग’ हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">टीम इंडिया में कप्तान व कोच का विवाद अकसर बनता ही आया है। लेकिन कई दफा ये बहुत चर्चा में भी रहा है ग्रेग चैपल एंव सौरव गागुंली का मनमुटाव भारतीय क्रिकेट इतिहास की एक अहम घटना बन चुका है। अभी कुंबले व कोहली में वह परिस्थितियां नहीं बनी थी। फिर भी अनिल कुंबले की क्रिकेट से विदाई टीम इंडिया के कोच की कई पुरानी विदाइयों का दोहराव जरूर बन गई है। यहां ऐसा लग रहा है कि भाई, बहुत हुआ! आप जाइए, ताकि हम सांस ले सकें।</p>
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</p><p><a href="http://10.0.0.122:1245/">Hindi News </a>से जुडे अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें <a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a> और <a href="https://x.com/SACHKAHOON">Twitter</a> पर फॉलो करें।</p>
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                <pubDate>Thu, 22 Jun 2017 04:31:34 +0530</pubDate>
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