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                <title>Hindi Editorial - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>कला की अहमियत</title>
                                    <description><![CDATA[सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल में बहुचर्चित फिल्म ‘The Kerala Story’ पर बैन के फैसले पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने बंगाल सरकार से कहा कि फिल्म देखने वालों की सुरक्षा भी तय की जाए। इससे पहले तामिलनाडु सरकार ने भी फिल्म पर पाबंदी लगाई थी। दरअसल, यह फिल्म लड़कियों के धर्म परिवर्तन और […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/importance-of-art/article-47802"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-05/the-kerala-story-12.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल में बहुचर्चित फिल्म ‘The Kerala Story’ पर बैन के फैसले पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने बंगाल सरकार से कहा कि फिल्म देखने वालों की सुरक्षा भी तय की जाए। इससे पहले तामिलनाडु सरकार ने भी फिल्म पर पाबंदी लगाई थी। दरअसल, यह फिल्म लड़कियों के धर्म परिवर्तन और उन्हें आतंकी संगठन ‘आईएसआईएस’ में शामिल करवाने से संबंधित है। इससे पहले ’द कश्मीर फाइल्स’ भी खूब चर्चा में रही थी। वास्तव में देश भर में दो प्रमुख विचारधाराओं के बीच टकराव जारी है।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="दो युवकों के जनाजे एक साथ उठे तो नम हुईं सैंकडों आंखें" href="http://10.0.0.122:1245/the-funeral-of-both-the-youth-who-were-victims-of-the-road-accident/">दो युवकों के जनाजे एक साथ उठे तो नम हुईं सैंकडों आंखें</a></p>
<p style="text-align:justify;">कांग्रेस और भाजपा राजनीतिक दल होने के साथ-साथ इनकी विचारधारा भी है। दोनों पार्टियों में राजनीति के साथ-साथ सामाजिक और सांस्कृतिक स्तर पर मत भिन्नता का एक लंबा इतिहास रहा है। यही नहीं, दोनों दल एक दूसरे को इतिहास, कला, शिक्षा जैसे मुद्दों पर भी घेरते रहे हैं। दरअसल, फिल्मों का संबंध मनुष्य व समाज से जुड़ा हुआ है। राजनीति भी समाज का अभिन्न अंग होता है, इसीलिए कई फिल्मों की विषय-वस्तु राजनीति पर भी आधारित होती है। फिल्मों को मनोरंजन के लिए बनाया जाता हैं और यह भी वास्तविक्ता है कि फिल्मों को पूरी तरह राजनीति से रहित भी नहीं समझा जा सकता, लेकिन इसका तात्पर्य यह भी नहीं कि कोई फिल्म केवल राजनैतिक प्रचार होती है। फिल्मों में किसी राजनीतिक मुद्दे को उठाना कोई गलत बात नहीं, लेकिन फिल्म राजनीति मात्र नहीं है।</p>
<p style="text-align:justify;">समाज की वास्तविक्ता को प्रदर्शिन करना ही कालाकार का धर्म है, (‘The Kerala Story’) भले ही उसमें धार्मिक या राजनीतिक प्रसंग भी क्यों न हो, फिर भी फिल्म तो फिल्म ही होनी चाहिए। मानवीय मन पर सामाजिक गतिवधियों का गहरा असर होता है। कला, साहित्या या फिल्मों के माध्यम से सामाजिक परिस्थितियों को प्रदर्शित किया जाता है। कलाकार को मानवीय संवेदना की अभिव्यक्ति से रोकना प्रकृति व समाज के खिलाफ है। कांग्रेस व भाजपा के दावों में क्या यथार्थ है, राजनीतिक चर्च का विषय हो सकता है किंतु फिल्मों के लेखकों, संगीतकारों, स्क्रिपट राइटरों, डॉयरेक्टरों का यह दायित्व है कि वे कला को कला तक ही सीमित रखें, भले ही फिल्म का विषय कोई राजनीतिक मुद्दा भी क्यों न हो।</p>
<p style="text-align:justify;">फिल्में ऐतिहासिक सामग्री, तथ्यों की जांच व (‘The Kerala Story’) राजनीतिक हितों से रहित होनी चाहिए, ताकि समाज व दर्शकों में सकारात्मक संदेश जाए। कला स्वतंत्र होती है, जिसका सरोकार मानवीय संवेदनाओं से जुड़ा होता है। यही नहीं कला का संबंध किसी पार्टी, संगठन, विचारधारा के दायरे से ऊपर उठकर देश काल की सीमाओं से पार होता है। यही क्षमता ही कला के बहुमूल्य और अर्मत्व होने का आधार है। अपने इन्हीं गुणों व विशेषताओं के साथ ही कला हजारों वर्ष बाद भी जीवंत है।</p>
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                                                            <category>सम्पादकीय</category>
                                            <category>विचार</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 19 May 2023 09:30:36 +0530</pubDate>
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                <title>अपराध पर अंकुश के लिए जरुरी है ईमानदारी</title>
                                    <description><![CDATA[फिल्म अभिनेता शाहरुख खान के बेटे आर्यन खान का मामला इन दिनों चर्चा का (Honesty) विषय बना हुआ है। मामले की जांच कर रहे पूर्व एनसीबी अधिकारी समीर वानखेड़े पर आरोप लगा है कि उन्होंने आर्यन को केस से बाहर निकालने के लिए 25 करोड़ रुपये की मांग की थी। इस मामले में सच क्या […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/honesty-is-necessary-to-curb-crime/article-47714"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-05/honesty-6.jpg" alt=""></a><br /><p>फिल्म अभिनेता शाहरुख खान के बेटे आर्यन खान का मामला इन दिनों चर्चा का (Honesty) विषय बना हुआ है। मामले की जांच कर रहे पूर्व एनसीबी अधिकारी समीर वानखेड़े पर आरोप लगा है कि उन्होंने आर्यन को केस से बाहर निकालने के लिए 25 करोड़ रुपये की मांग की थी। इस मामले में सच क्या है, यह तो निष्पक्ष जांच के बाद ही पता चलेगा, लेकिन यह भी तथ्य है कि भ्रष्टाचार देश को घुन की भांति खा रहा है। पैसे के लालच में निर्दोषों पर झूठे केस बनाए जा रहे हैं। जांच अधिकारियों ने ‘अपराध’ को सोने की खदान बना लिया है। कुछ मामलों में ही सच उजागर करने के प्रयास किए जाते हैं, लेकिन अधिकतर मामलों में भ्रष्टाचार और राजनीतिक दखल के कारण झूठ का बोलबाला बढ़ता जा रहा है।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="Meerut : डेरा सच्चा सौदा की हेल्पलाइन बनी लाइफ लाइन" href="http://10.0.0.122:1245/dera-sacha-saudas-helpline-becomes-lifeline/">Meerut : डेरा सच्चा सौदा की हेल्पलाइन बनी लाइफ लाइन</a></p>
<p>पुलिस अधिकारी और कर्मचारी झूठे केसों में फंसाने या केसों से बाहर निकालने के (Honesty) नाम पर रिश्वत लेकर खूब चांदी कूट रहे हैं। यही कारण है कि देश भर में हजारों पुलिस अधिकारी व कर्मचारी रिश्वत लेने के आरोप में अदालतों में सुनवाई का सामना कर रहे हैं। अपराध पर अंकुश नहीं लगने का सबसे बड़ा कारण ही भ्रष्टाचार है। यदि देश की पुलिस में भ्रष्टाचार खत्म हो जाए और वे इमानदारी से कार्रवाई करने लगें तब देश की दशा को हम कुछ दिनों में बदलता हुआ महसूस करने लगेंगे। रिश्वतखोरी के कारण ही अपराधी कानूनी कार्रवाई से बच निकलते हैं, दूसरी तरफ ईमानदार, जो रिश्वत नहीं देता उसे झूठे केसों में फंसा दिया जाता है। कोई ऐसा शहर और गांव नहीं, जहां लगभग रोजाना चोरी की घटनाएं न घटित हों।</p>
<p>चोरी के लाखों मामले आज भी थानों में लंबित पड़े हैं। यदि पूर्ण इच्छाशक्ति व (Honesty) से कानूनी कार्रवाई हो, फिर ही इस तरह की घटनाएं बंद हो सकती है। ईमानदारी से ही देश की सभी समस्याओं का समाधान संभव है। यदि गुप्त सूचनाओं के आधार पर विदेशों से घुसे आतंकियों को गिरफ्तार किया जा सकता है, तो चोरी करने वाले स्थानीय व्यक्ति को पकड़ना मुश्किल नहीं। दरअसल, हमारे देश और दूसरे देशों में व्यवस्था में बहुत अंतर है। वहां सभी अफसर, कर्मचारी किसी के भी दबाव में न आकर ईमानदारी से ड्यूटी करते हैं। यही कारण है कि वहां नियमों की उल्लंघना नाममात्र है। हमारे देश में यदि कोई बिगड़ैल व्यक्ति भी दूसरे देश में जाता है तो वहां अधिकारियों की सख्ती को भांपकर सुधर जाता है। यह भी नहीं कि हमारे देश में ईमानदार अफसरों की कमी है, लेकिन उनकी संख्या आटे में नमक के बराबर ही है।</p>
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                                                            <category>सम्पादकीय</category>
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                <pubDate>Wed, 17 May 2023 09:34:49 +0530</pubDate>
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                <title>तमाशबीन बना चीन</title>
                                    <description><![CDATA[चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कश्मीर समस्या का जिक्र कर भारत के जख्मों पर एक बार फिर नमक छिड़का है। अमरनाथ यात्रियों की हत्याओं के मामले में खामोश रहकर चीन ने इस बात की परवाह की है कि भारत व पाक के बीच चल रहा टकराव दक्षिणी एशिया के लिए खरतनाक है। दरअसल […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/hindi-editorial-china-become-spectacle/article-2260"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-07/india-11.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कश्मीर समस्या का जिक्र कर भारत के जख्मों पर एक बार फिर नमक छिड़का है। अमरनाथ यात्रियों की हत्याओं के मामले में खामोश रहकर चीन ने इस बात की परवाह की है कि भारत व पाक के बीच चल रहा टकराव दक्षिणी एशिया के लिए खरतनाक है। दरअसल चीन का उद्देश्य कश्मीर के मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय मंच पर विवादित दिखाना है। चीन भारत के खिलाफ कोई मौका नहीं छोड़ता। एक तरफ पूरा विश्व आतंकवादी साजिशों को बाखूबी समझ रहा है, दूसरी ओर चीन आतंकवादी कार्रवाई पर चुप रहकर भारत के खिलाफ साजिशें रच रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">चीन का निशाना भारत की छवि को खराब कर कश्मीर मुद्दे के हल के लिए तीसरे पक्ष के दखल की गुंजाइश पैदा करना है। बीजिंग यह हत्थकंडे बहुत ही चतुराई से इस्तेमाल कर रहा है, लेकिन चीन का सरकारी मीडिया स्पष्ट तौर पर भारत के खिलाफ जहर उगलकर अपनी भारत विरोधी विदेश नीति को जाहिर कर रहा है। अमरनाथ यात्रियों पर हमला भारत पर गहरा जख्म है, जिसकी अलगाववादी नेताओं ने भी निंदा की है। निर्दोष यात्रियों की हत्या इंसानियत व धर्मों के खिलाफ है।</p>
<p style="text-align:justify;">भारत ऐसा देश है जो अपने नागरिकों को केवल धार्मिक स्वतंत्रता ही नहीं देता बल्कि उनके विश्वास का भी सम्मान करता है। देश के भीतर व बाहर धार्मिक यात्राओं के लिए विशेष प्रबंध किए जाते हैं। फिर ऐसे देश में धार्मिक यात्रियों पर हमले बेहद दुखद हैं। ऐसे दौर में जब आतंकवादी निर्दोषों की हत्या कर रहे हों तब चीन का कश्मीर मुद्दे की दुहाई देना उसकी कथनी व करनी पर सवाल खड़े करता है। ऐसा कर चीन कश्मीर में सक्रिय आतंकवादियों को झेल रहा है। हांलाकि संयुक्त राष्ट्र में चीन की कार्रवाईयां पहले ही भारत विरोधी साबित हो चुकी हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">मसूद अजहर जैसे आतंकवादियों के बचाव के लिए चीन समर्थन कर चुका है। आतंकवाद किसी भी देश के हित में नहीं। आतंकवाद को पालने वाले देश खुद ही धोखा खा रहे हैं। चीन आतंकवाद के पौधे को बढ़ने-फूलने में सहयोग देने की बजाय अमन-शांति व खुशहाली का रास्ता चुने। भारत को भी चीन की कुत्सित कार्रवाईयों के प्रति सक्रिय रहने की आवश्यकता है। भारत चीन की कुचालों को नाकाम बनाने के लिए सशक्त विदेश नीति अपनाए।</p>
<p style="text-align:justify;">
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]]></content:encoded>
                
                                                            <category>सम्पादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 13 Jul 2017 00:26:50 +0530</pubDate>
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                <title>राष्ट्रपति चुनाव के सहारे दलितों के दिल में जगह बनाने की कवायद</title>
                                    <description><![CDATA[पक्ष एवं विपक्ष दोनो तरफ से भारत के राष्ट्रपति चुनाव के लिए उम्मीदवार तय कर लिए गए हैं। इस बार के चुनाव में यूं तो 11 के करीब अन्य उम्मीदवार भी मैदान में उतरे हैं, लेकिन जिन उम्मीदवारों के बीच वास्तविक मुकाबला होना है, रामनाथ कोविंद राजग की ओर से व मीरा कुमार यूपीए की […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/hindi-editorial-on-presidential-election/article-1511"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-06/ramnath-kovind.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">पक्ष एवं विपक्ष दोनो तरफ से भारत के राष्ट्रपति चुनाव के लिए उम्मीदवार तय कर लिए गए हैं। इस बार के चुनाव में यूं तो 11 के करीब अन्य उम्मीदवार भी मैदान में उतरे हैं, लेकिन जिन उम्मीदवारों के बीच वास्तविक मुकाबला होना है, रामनाथ कोविंद राजग की ओर से व मीरा कुमार यूपीए की ओर से दलित समुदाय से संबंध रखने वाले हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">दोनों उम्मीदवार राजनीतिक पृष्ठभूमि से हैं। दोनों नेताओं में तीन बात समान देखने को मिल रही हैं। पहला, मीरा कुमार व रामनाथ कोविंद अपनी युवावस्था में भारतीय विदेश सेवा एवं भारतीय प्रशासनिक सेवा जैसे देश की सबसे प्रभावपूर्ण अफसरशाही के लिए चुने जा चुके थे। यहां मीरा कुमार ने कई वर्ष विदेश सेवा की नौकरी भी की है,</p>
<p style="text-align:justify;">लेकिन रामनाथ कोविंद मनपसंद रैंक न मिलने के कारण भारतीय प्रशासनिक सेवा में नहीं गए। तत्पश्चात दोनों ने राजनीतिक जीवन को चुना और लंबे समय तक संसद सदस्य रहे हैं। तीसरी बात जो शुरु में ही बताई जा चुकी है कि ये दोनों नेता दलित हैं। इस बार 14वें राष्ट्रपति के लिए ये चुनाव हो रहा है। एनडीए व यूपीए के पास यदि संभावित वोटों की गिनती करें, तब एनडीए का पलड़ा भारी नजर आ रहा है</p>
<p style="text-align:justify;">और इस बात की पूरी संभावना है कि एनडीए उम्मीदवार रामनाथ कोविंद अगले राष्ट्रपति होंगे। राज्यों, लोकसभा व राज्यसभा में कुल मतों का 60 फीसदी यानि 661278 मतों के करीब एनडीए के पास हैं, बाकि बचे 40 फीसदी मतों में 434241 के करीब मत यूपीए के पास हैं। इस बार लोकसभा में जहां भाजपा गठबंधन एनडीए मजबूत स्थिति में है,</p>
<p style="text-align:justify;">वहीं राज्यसभा में कांग्रेस गठबंधन यूपीए मजबूत स्थिति में है। राज्यों में यदि बिहार, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडू, पश्चिम बंगाल, ओडिशा जैसे बड़े राज्यों को निष्पक्ष मान लिया जाए, तब राष्ट्रपति चुनाव को लेकर कांग्रेस, भाजपा को मजबूत टक्कर दे रही थी, लेकिन नीतिश कुमार, चंदबाबू नायडू व तमिलनाडू की एआईएडीएमके भाजपा के साथ आ गए हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">अत: भाजपानीत राजग का पलड़ा भारी हो गया है। राष्ट्रपति दलों से इतर यदि राष्ट्रपति पद के लिए उम्मीदवारों की व्यक्तिगत तुलना की जाए, तब मीरा कुमार, रामनाथ कोविंद से ज्यादा दम रखती हैं। मीरा कुमार का राजनीतिक अनुभव व कांग्रेस में रहते हुए भी उनकी बाकी दलों के साथ कोई ज्यादा दूरी नहीं कही जा सकती।</p>
<p style="text-align:justify;">रामनाथ कोविंद भाजपा या यूं कहें कि भाजपा में अध्यक्ष अमित शाह की खोज कहे जाएंगे, क्योंकि भाजपा में इस बार कई शीर्ष नेताओं को यह उम्मीद थी कि वह पार्टी की ओर से राष्ट्रपति चुनाव के उम्मीदवार बनाए जा सकते हैं, जिनमें व्योवृद्ध नेता लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी प्रमुख रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">कुछ दिनों पहले तक संघ प्रमुख मोहन भागवत का भी नाम लिया जाता रहा है। शीर्ष राजनीतिक दलों का राष्ट्रपति उम्मीदवार तय करने में आंतरिक गुणा-भाग जो भी रहा हो, परंतु इतना जरूर स्पष्ट है कि कांग्रेस व भाजपा वर्ष-2019 का लोकसभा चुनाव कहीं न कहीं दलित वर्गों को केन्द्रीय धुरी मानकर लड़ने जा रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">क्योंकि अभी राष्ट्रपति फलक पर कोई भी नेता ऐसा नहीं बचा है, जिसे भारत का दलित वर्ग अपना नेता मान रहा हो। एक वक्त में मायावती तेजी से उभरी थीं, लेकिन उनकी यूपी में जो गत हुई है, उसे दलित अब नेता के तौर पर पूरी तरह से भुला चुके हैं। नि:संदेह भावी राष्ट्रपति में भारतीय दलित वर्ग के लिए एक सर्वमान्य नेता तराशे जाने की भी व्यवायद हो रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">जबकि सबको पता है कि भारत का राष्ट्रपति कोई राजनीतिक भूमिका नहीं निभाता, लेकिन ये दल उसे एक छलावे की तरह अवश्य दिखाएंगे। जिस पर भारत का दलित समाज मोहित होकर भावी चुनाव में इन राष्ट्रपति दलों की नैया पार लगा सकता है।</p>
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                                                            <category>सम्पादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 22 Jun 2017 23:22:09 +0530</pubDate>
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                <title>अनिल कुंबले की रूखी विदाई</title>
                                    <description><![CDATA[भारतीय क्रिकेट के कोच पद से अनिल कुंबले विदा हो गए हैं। यूं तो उनका कार्यकाल 20 जून को खत्म हो गया था, लेकिन भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड फिर भी उन्हे नये कोच के आने तक वेस्टइंडीज के दौरे पर जा रही क्रिकेट के साथ भेज रहा था। इससे एक तरह से बीसीसीआई अनिल कुंबले […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/hindi-editorial-bad-farewell-for-anil-kumble/article-1491"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-06/kumble.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">भारतीय क्रिकेट के कोच पद से अनिल कुंबले विदा हो गए हैं। यूं तो उनका कार्यकाल 20 जून को खत्म हो गया था, लेकिन भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड फिर भी उन्हे नये कोच के आने तक वेस्टइंडीज के दौरे पर जा रही क्रिकेट के साथ भेज रहा था। इससे एक तरह से बीसीसीआई अनिल कुंबले को सम्मानजनक विदाई देना चाह रहा था, जो कि कुंबले के व्यवहार के चलते संभव नहीं हो सका। क्रिकेट में रूचि रखने वालों का यह मानना भी अब जायज लगता है कि बीसीसीआई में एक धड़ा ऐसा भी था, जो कुंबले को बहुत जल्द कोच पद से हटा हुआ देखना चाह रहा था।</p>
<p style="text-align:justify;">आखिर क्यों भारतीय क्रिकेट बोर्ड पहले बडे सम्मान से पूर्व खिलाड़ियों को कोच पद पर लाता है फिर जल्द ही उनसे पीछा छुड़ाने के बहाने ढूढ़ने लगता है? कपिल देव, मदन लाल, संदीप पाटिल, अजीत वाडेकर, बिश्न सिंह बेदी ये कई ऐसे कोच रहे हैं जिनकी विदाई भी कोई ज्यादा सम्मानजनक नहीं रही। यदि ताजा हालात में कुंबले की बात करें, तब इनके प्रशिक्षण में भारतीय टीम ने अच्छा प्रदर्शन किया है। टीम इंडिया ने कुंबले की कोचिंग में 17 टैस्ट मैच खेले और 12 जीते हैं करीब चार मैच ड्रा करे हैं। ठीक ऐसे ही वन-डे मैचेज में भी टीम इंडिया ने अच्छा प्रदर्शन किया और कोई भी सीरीज नहीं हारी। टी-20 मैचेज में भी टीम इंडिया ने पांच मैच खेले दो जीत लिए, दो हार गई व एक अनिर्णीत रहा। यदि चैम्पियन ट्रॉफी के हाल के फाईनल मैच की हार को भुला दिया जाए, तब अनिल कुंबले की कोचिगं में दम रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">टीम इंडिया की यदि बात करे तब अनिल कुंबले का उनके साथ मैदान में ‘हैडमास्टर’ की भूमिका में रहना कहीं न कहीं उनकी रूखी विदाई की वजह बनी है। भारतीय क्रिकेट में टीम चयन करने व मैदान पर टीम प्रंबधन में कप्तान की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण रहती है। अब टीम इंडिया के कप्तान विराट कोहली दुनिया के बेहतरीन खिलाड़ी हैं। जो कि पूर्व के किसी भी कप्तान से क्रिकेट में कमतर नहीं हैं। यहां वह भी अनिल कुंबले के बारे में बीसीसीआई को मैसेज करते हैं कि कुंबले ‘ओवर बियरिंग’ हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">टीम इंडिया में कप्तान व कोच का विवाद अकसर बनता ही आया है। लेकिन कई दफा ये बहुत चर्चा में भी रहा है ग्रेग चैपल एंव सौरव गागुंली का मनमुटाव भारतीय क्रिकेट इतिहास की एक अहम घटना बन चुका है। अभी कुंबले व कोहली में वह परिस्थितियां नहीं बनी थी। फिर भी अनिल कुंबले की क्रिकेट से विदाई टीम इंडिया के कोच की कई पुरानी विदाइयों का दोहराव जरूर बन गई है। यहां ऐसा लग रहा है कि भाई, बहुत हुआ! आप जाइए, ताकि हम सांस ले सकें।</p>
<p style="text-align:justify;">
</p><p><a href="http://10.0.0.122:1245/">Hindi News </a>से जुडे अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें <a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a> और <a href="https://x.com/SACHKAHOON">Twitter</a> पर फॉलो करें।</p>
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                                                            <category>सम्पादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 22 Jun 2017 04:31:34 +0530</pubDate>
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