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                <title>Sach Kahoon Story - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>Kaithal: घर की चार दीवारी से बाहर निकलकर आत्मनिर्भरता की दिशा में मजबूत कदम बढ़ा रही महिलाएं  </title>
                                    <description><![CDATA[महिलाएं अनाज मंडियों, लघु सचिवालय, शुगर मिल, राजकीय कॉलेज में चला रही कैंटीन कैथल (सच कहूँ/कुलदीप नैन)। अब ग्रामीण महिलाएँ घर की चारदीवारी तक सीमित नहीं हैं, बल्कि सरकार की विभिन्न योजनाओं और अन्य माध्यमों से आत्मनिर्भरता की दिशा में मजबूत कदम बढ़ा रही हैं। महिलाओं के इस साहसी कदम ने न केवल महिलाओं को […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/women-are-taking-strong-steps-towards-self-reliance/article-77944"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2025-11/kaithal-womens.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:justify;">महिलाएं अनाज मंडियों, लघु सचिवालय, शुगर मिल, राजकीय कॉलेज में चला रही कैंटीन</h3>
<div style="text-align:justify;">कैथल (सच कहूँ/कुलदीप नैन)। अब ग्रामीण महिलाएँ घर की चारदीवारी तक सीमित नहीं हैं, बल्कि सरकार की विभिन्न योजनाओं और अन्य माध्यमों से आत्मनिर्भरता की दिशा में मजबूत कदम बढ़ा रही हैं। महिलाओं के इस साहसी कदम ने न केवल महिलाओं को रोजगार से जोड़ा है, बल्कि उन्हें आत्मविश्वास और सम्मान भी दिलाया है। Kaithal News</div>
<div style="text-align:justify;">सरकार द्वारा शुरू की गई राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन योजना महिलाओं के लिए किसी वरदान से कम सिद्ध नहीं हुई है। इस योजना के तहत जिला की करीब 150 से ज्यादा महिलायें जिले भर में घरों से बाहर निकलकर अपनी किस्मत खुद लिख रही हैं। स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएँ अब छोटे व्यवसायों के माध्यम से अपने परिवार की आमदनी बढ़ा रही हैं और इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई गति मिल रही है।</div>
<div style="text-align:justify;">स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिलाएं जिले की अनाज मंडियों, लघु सचिवालय, शुगर मिल, राजकीय कॉलेज में कैंटीन चला रही हैं। जहां मंडियों में किसानों और मजदूरों को मात्र 10 रुपए में भर पेट खाना दिया जा रहा है। इसके अलावा मार्केटिंग बोर्ड भी इन्हें 15 रुपए थाली के हिसाब से मदद कर रहा है। जिला लघु सचिवालय में स्वंय सहायता समूह से जुड़कर महिलाएं चाय कैंटीन चला रही हैं। ये सभी महिलाएं हरियाणा राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन द्वारा ट्रेनिंग दिए जाने के बाद से लगातार आगे बढ़ रही हैं। Kaithal News</div>
<h3 style="text-align:justify;">अब आत्मनिर्भर बन रही महिलाएं</h3>
<div style="text-align:justify;">कुछ समय पहलें दिहाड़ी-मजदूरी करने वाली ये महिलाएं अब खुद का काम चलाकर बेहद खुश हैं। लघु सचिवालय में काम करने वाले अधिकारी- कर्मचारी भी अब इनकी चाय के मुरीद हैं। इनकी सेवाओं से अब ग्राहक विशेषकर महिला कर्मचारी भी इनको आगे बढ़ता देख बेहद खुश हैं। यह मिशन महिलाओं को न केवल आत्मनिर्भर बनाने के दिशा में ुएक बड़ा कदम है बल्कि वे इसके तहत घर से बाहर निकलकर अपना व्यवसाय भी चला पा रही हैं तथा अपने परिवार का भरण-पोषण कर रही हैं। इन महिलाओं की कहानियाँ यह साबित करती हैं कि गाँव की महिलाएँ अब सहायता मांगने वाली नहीं, बल्कि सहायता देने वाली बन चुकी हैं।</div>
<h3 style="text-align:justify;">महिलाओं के समूह को सस्ती ब्याज दर पर मिलता है ऋण | Kaithal News</h3>
<div style="text-align:justify;">राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन ऐसी महिलाओं के सामाजिक एवं आर्थिक सशक्तिकरण का सशक्त माध्यम बनकर उभरा है। इस योजना के अंतर्गत महिलाएँ स्वयं सहायता समूहों से जुड़कर स्वरोजगार के अवसर प्राप्त कर रही हैं। इस योजना की विशेष बात यह है कि इस योजना में उन महिलाओं को शामिल किया जा रहा है जिनकी आर्थिक स्थित बहुत ही कमजोर है। योजना के तहत समूह बनाकर ऐसी महिलाओं को बैंक के माध्यम से मामूली ब्याज दर पर बैंक से ऋण उपलब्ध करवा कर उनका व्यवसाय शुरू करवाया जाता है। महिलाओं की आर्थिक स्थिति भी सुधरने लगी है और वे अपने पैरों पर खड़ी हो रही हैं।</div>
<h3 style="text-align:justify;">परिवार ने किया समर्थन: सुमन</h3>
<div style="text-align:justify;">नैना निवासी महिला सुमन ने बताया कि जब केंद्र सरकार की ओर से सीआरपी की टीम और हरियाणा राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन की टीम उनके गांव पहुंची, तब उन्होंने गांव की महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों से जुड़ने की जानकारी दी। शुरूआत में महिलाएं असमंजस में थीं कि समूह से जुड़ना चाहिए या नहीं। कुछ का मानना था कि इससे कोई लाभ नहीं होगा, बल्कि नुकसान हो सकता है। जब इस विषय पर परिवार से बात की, तो उनके पति, सास और अन्य परिजनों ने उन्हें समर्थन दिया। परिवार के सहयोग से उनका आत्मविश्वास बढ़ा और उन्होंने स्वयं सहायता समूह से जुड़ने का निर्णय लिया। इसके बाद उन्होंने न केवल खुद बाहर निकलकर काम शुरू किया, बल्कि अन्य महिलाओं को भी प्रेरित किया।</div>
<h3 style="text-align:justify;">इस योजना से जुड़ने पर परिवार की बढ़ी आमदनी: संतोष</h3>
<div style="text-align:justify;">नैना गांव की महिला संतोष ने बताया कि राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत ही वह स्वावलम्बी व आत्मनिर्भर बन पाई हैं। उन्होंने बताया कि वे पहले एक मजदूर के तौर पर कार्य करती थी और काफी मेहनत करने के बाद भी परिवार का पालन-पोषण करना मुश्किल होता था। इस योजना से जुड़कर उनके परिवार की आमदनी भी बढ़ी है।</div>
<h3 style="text-align:justify;">परिवार की दशा बदली: मीना</h3>
<div style="text-align:justify;">स्वंय सहायत समूह के तहत कार्य करने वाली महिला मीना ने बताया कि आज महिलाओं का सामाजिक एवं आर्थिक विकास हो रहा है। आजीविका मिशन ने उनकी व उनके परिवार की दशा बदल दी है। ग्रामीण क्षेत्र में बहुत-सी महिलाएं घर का काम करने के बाद अपने आपको खाली महसूस करती हैं। लेकिन इस योजना से जुड़कर महिलाएं रोजगार प्राप्त कर सकती हैं। Kaithal News</div>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>हरियाणा</category>
                                            <category>सच कहूँ विशेष स्टोरी</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 09 Nov 2025 21:25:06 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>Flight of Spirits: एक पैर की कमी भी सरसा की ज्योति के हौसले को कम नहीं कर सकी!</title>
                                    <description><![CDATA[आत्मविश्वास के बल पर शॉटपुट, डिस्कस थ्रो और जैवलीन थ्रो में बनी मिसाल Flight of spirits: सरसा/ओढ़ां (सच कहूँ /राजू ओढ़ां)। आत्मविश्वास मजबूत हो और मन में कुछ कर गुजरने की प्रबल ललक हो तो शारीरिक असक्षमता भी घुटने टेक देती है। इसका प्रत्यक्ष उदाहरण है ओढ़ां के जवाहर नवोदय स्कूल की दसवीं कक्षा में […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/even-the-lack-of-a-leg-could-not-dampen-the-spirits-of-jyoti-of-sirsa/article-65783"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2024-12/jyoti-sirsa.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:justify;">आत्मविश्वास के बल पर शॉटपुट, डिस्कस थ्रो और जैवलीन थ्रो में बनी मिसाल</h3>
<p style="text-align:justify;">Flight of spirits: सरसा/ओढ़ां (सच कहूँ /राजू ओढ़ां)। आत्मविश्वास मजबूत हो और मन में कुछ कर गुजरने की प्रबल ललक हो तो शारीरिक असक्षमता भी घुटने टेक देती है। इसका प्रत्यक्ष उदाहरण है ओढ़ां के जवाहर नवोदय स्कूल की दसवीं कक्षा में पढ़ने वाली ऐलनाबाद निवासी 16 वर्षीय छात्रा ज्योति। ज्योति एक पैर से दिव्यांग है लेकिन उसने अपनी इस कमजोरी को हावी नहीं होने दिया बल्कि इस पर जीत हासिल करते हुए खेलों में कदम आगे बढ़ाए। Sirsa News</p>
<p style="text-align:justify;">दो सालों की मेहनत के बलबूते पर ज्योति ने निशक्त खिलाड़ियों के खेलों में अपनी पहचान बनाई और शॉटपुट, डिस्कस थ्रो और जैवलीन थ्रो में राष्ट्रीय व अंतर्राष्टÑीय स्तर पर 12 पदक जीतकर अपने संस्थान, देश प्रदेश व माता पिता का नाम गौरवांवित किया। ज्योति उन बच्चों के लिए प्रेरणास्त्रोत है जो शारीरिक असक्षमता के चलते अपने आप को कमजोर समझकर आगे नहीं बढ़ पाते। ज्योति का सपना है कि वो एक दिन पेराओलंपिक खेलों में देश का नाम रोशन करे। 16 वर्षीय इस उभरती हुई खिलाड़ी ज्योति से सच-कहूँ प्रतिनिधि ने विशेष बातचीत की।</p>
<h4 style="text-align:justify;">2 वर्षों में जीते 12 मेडल | Sirsa News</h4>
<p style="text-align:justify;">ज्योति 2 वर्ष के अंतराल में 2 नेशनल, 2 इंटरनेशनल व 2 स्टेट खेल चुकी है। जिसमें उसने शॉटपुट में 4, जैवलीन थ्रो में 4 तथा डिस्कस थ्रो में 4 सहित कुल 12 मेडल हासिल किए हैं। इनमें 12 मेडल में से 4 मेडल गोल्ड हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">हैदराबाद में शिक्षा व ट्रेनिंग साथ-साथ, पहली बार रोहतक में झटके 2 गोल्ड</h3>
<p style="text-align:justify;">ज्योति को वर्ष 2022 में हैदराबाद के रंगारेड्डी में स्थित जवाहर नवोदय विद्यालय में बुलाया गया। वहां पर शिक्षा के साथ-साथ आदित्य मैहता फाउंडेशन की ओर से खेलों की ट्रेनिंग भी दी जाती। 2 वर्ष तक ज्योति ने वहां रहकर 9वीं व 10वीं की शिक्षा ग्रहण की और साथ-साथ खेलों की ट्रेनिंग भी ली। जिसके बाद जनवरी 2023 में रोहतक में राज्यस्तरीय खेल हुए जिसमें ज्योति ने शॉटपुट व जैवलीन थ्रो में 2 गोल्ड मेडल हासिल किए। उसका चयन नेशनल लेवल खेलों के लिए हो गया। फिर अप्रैल 2023 में गुजरात में हुए राष्ट्रीय स्तरीय खेलों में ज्योति ने बेहतर प्रदर्शन किया और शॉटपुट में गोल्ड व जैवलीन थ्रो में सिल्वर मेडल जीते।</p>
<h3 style="text-align:justify;">कृत्रिम पैर बना सहारा तो लगा दिये मैडलों के ढेर | Sirsa News</h3>
<p style="text-align:justify;">ज्योति ने बताया कि उसका एक पैर दूसरे पैर से काफी छोटा है। जिसके चलते वह चलने में असमर्थ थी। ऐेसे में वह कृत्रिम पैर के सहारे खड़ी हुई और एक सामान्य खिलाड़ी की तरह ही एक नहीं बल्कि तीन तीन खेलों में भाग लेकर बड़ी उपलब्धि हासिल की। ज्योति ने राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर खेलकर 12 मेडल जीतकर ये साबित कर दिखाया कि प्रतिभा शारीरिक क्षमता की मोहताज नहीं होती।</p>
<p style="text-align:justify;">ज्योति ने बताया कि उसके घर में पिता, मां, 2 बहनें व एक भाई सहित कुल 6 सदस्य हैं। जन्म से ही एक पैर से दिव्यांग है। उसने 5वीं तक की शिक्षा अपने गांव ऐलनाबाद के सरकारी स्कूल से ग्रहण की। उसके बाद ओढ़ां के जवाहर नवोदय विद्यालय में कक्षा 6वीं में उसका चयन हो गया। अप्रैल 2022 में हरिद्वार में दिव्यांग बच्चों के लिए आदित्य मैहता फाउंडेशन की ओर से एक शिविर लगाया गया। जिसमें देश के विभिन्न राज्यों से काफी दिव्यांग बच्चे पहुंचे। इस शिविर में ज्योति ने शॉटपुट व डिस्कस थ्रो में भाग लिया और उसकी बेहतर प्रतिभा के चलते उसका चयन हो गया।</p>
<p style="text-align:justify;">हमें ज्योति पर गर्व है। दिव्यांग होने के बावजूद भी शिक्षा व खेल को मेंटेन रखना अपने आप में काफी मुश्किल भरा है, लेकिन ज्योति ने ये कर दिखाया। हमें विश्वास है ज्योति एक दिन पेराओलंपिक में देश के लिए गोल्ड लाएगी।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>— ललित कालड़ा, प्राचार्य (जवाहर नवोदय विद्यालय ओढां)</strong></p>
<h3 style="text-align:justify;">फरवरी में दुबई में खेलने के लिए उत्साहित ज्योति | Sirsa News</h3>
<p style="text-align:justify;">ज्योति अब फरवरी 2025 में दुबई में होने वाले अंतर्राष्ट्रीय स्तरीय खेलों में भाग लेने के लिए वह काफी उत्साहित है। फरवरी में उसकी 10वीं की परीक्षा भी है। इसके लिए उस पर एक तरह से दोहरा दबाव भी है, लेकिन फिर भी वह शिक्षा व खेलों को पूरा समय दे रही है। उसे पूरा विश्वास है कि वह पढ़ाई और खेल दोनों में बेहतर प्रदर्शन करेगी। इसके साथ-साथ वह 2025 में होने वाली यूथ एशियन चैंपियनशिप भी भाग लेने के लिए उत्साहित है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">बेटी किसी से कम नहीं, बच्चों को दें शिक्षा व खेलों में आजादी</h3>
<p style="text-align:justify;">जब बेटी का खेलों का लिए चयन हुआ तो एक समय तो हमें ये लगा कि वह किस तरह से कर पाएगी। लेकिन जब उसने प्रथम बार गोल्ड जीता तो मेरा विश्वास बढ़ गया कि उनकी बेटी किसी से कम नहीं है। मुझे ज्योति पर नाज है। जो बच्चे दिव्यांग है उन बच्चों के अभिभावकों से मैं आह्वान करता हूं कि प्रतिभा उम्र या शारीरिक क्षमता की मोहताज नहीं होती। अपने बच्चों को शिक्षा व खेलों में आजादी अवश्य दें।           <strong>— विजयपाल, ज्योति के पिता।</strong></p>
<h3 style="text-align:justify;">”अपने आप को किसी से कम न समझें” | Success Story</h3>
<p style="text-align:justify;">जो बच्चे दिव्यांग हैं और अपने आप को अन्य से कम समझते हैं, मैं उनसे कहना चाहती हूं कि शारीरिक असक्षमता को कभी अपने आप पर हावी न होने दें। अपनी प्रतिभा को बाहर निकलने दें। वे किसी से भी कम नहीं हैं। मेरे इस खेल व शिक्षा के सफर में मेरे माता-पिता मेरे कवच के रूप में मददगार रहे।       <strong>— ज्योति</strong></p>
<h3 style="text-align:justify;">बैंगुलुरु में हुए ट्रायल, थाइलैंड के लिए हुआ चयन</h3>
<p style="text-align:justify;">जून 2023 में बैंगुलुरु में ओपन ट्रायल हुए। जिसमें अंडर-20 एथलेटिक्स में ज्योति का मुकाबला सीनियर खिलाड़ी के साथ हुआ। इस मुकाबले में ज्योति के बेहतर प्रदर्शन के चलते उसका चयन थाइलैंड में होने वाले अंतर्राष्ट्रीय खेलों के लिए हुआ। दिसंबर 2023 में थाइलैंड में आयोजित हुए अंतर्राष्ट्रीय स्तरीय खेलों में ज्योति ने एक साथ 3 खेलों में भाग लिया और तीनों में मेडल हासिल किए। जिसमें जैवलीन थ्रो में सिल्वर, शॉटपुट में सिल्वर तथा डिस्कस थ्रो में ब्रांज मेडल शामिल था।</p>
<h3 style="text-align:justify;">इस बार गोल्ड नहीं मिला तो अगली बार पक्का</h3>
<p style="text-align:justify;">थाइलैंड में भले ही ज्योति का प्रदर्शन बेहतर रहा, लेकिन वह इस बात को लेकर मायूस दिखी कि गोल्ड नहीं जीत पाई। फिर ज्योति के कोच वीनू कोटी ने उसमें ऊर्जा भरते हुए कहा कि कभी आत्मविश्वास को कमजोर न पड़ने देना। वह अपनी तैयारी पूरी रखे, इस बार गोल्ड नहीं मिला तो क्या अगली बार पक्का है। जिसके बाद अप्रैल 2024 में बैंगलुरु में हुए राष्ट्रीय स्तरीय खेलों में ज्योति ने भाग लेकर शॉटपुट में सिल्वर व डिस्कस थ्रो में सिल्वर मेडल जीते। जिसके बाद दिसंबर 2024 में फिर से थाइलैंड में अंतर्राष्ट्रीय स्तरीय खेल हुए और इस बार दौरान ज्योति ने गोल्ड की चाह को पूरा कर दिया। उसने जैवलीन में गोल्ड व डिस्कस थ्रो में सिल्वर मेडल हासिल कर भारत देश का नाम चमकाया। Sirsa News</p>
<p><a title="इधर सर्दी का सितम बढ़ा तो उधर डेरा सच्चा सौदा के इंसानियत की भलाई के कार्य बढ़ने लगे!" href="http://10.0.0.122:1245/warm-clothes-distributed-to-the-families-of-labourers-living-at-brick-kilns-in-yamunanagar/">इधर सर्दी का सितम बढ़ा तो उधर डेरा सच्चा सौदा के इंसानियत की भलाई के कार्य बढ़ने लगे!</a></p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>हरियाणा</category>
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                <pubDate>Fri, 27 Dec 2024 10:57:22 +0530</pubDate>
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