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                <title>Meira Kumar - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <description>Meira Kumar RSS Feed</description>
                
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                <title>कौन होगा देश का 14वां राष्ट्रपति?</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली:  देश का 14वां राष्ट्रपति कौन होगा, इसका फैसला गुरुवार को हो जाएगा। इसके लिए संसद भवन में काउंटिंग होगी। एनडीए कैंडिडेट रामनाथ कोविंद और यूपीए की मीरा कुमार में से एक नेता अगला प्रेसिडेंट होगा। दोनों में से कोई भी जीते, देश को केआर नारायणन के बाद दूसरा दलित राष्ट्रपति मिलना तय है। […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/who-will-be-the-14th-president-of-the-country/article-2453"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-07/elc-11.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली: </strong> देश का 14वां राष्ट्रपति कौन होगा, इसका फैसला गुरुवार को हो जाएगा। इसके लिए संसद भवन में काउंटिंग होगी। एनडीए कैंडिडेट रामनाथ कोविंद और यूपीए की मीरा कुमार में से एक नेता अगला प्रेसिडेंट होगा। दोनों में से कोई भी जीते, देश को केआर नारायणन के बाद दूसरा दलित राष्ट्रपति मिलना तय है। वे 1997 में चुने गए थे। वैसे, पलड़ा कोविंद का भारी है।</p>
<p style="text-align:justify;">वोटिंग से पहले उन्हें 63% वोटों का सपोर्ट था। लेकिन उम्मीद से ज्यादा करीब 70% वोटिंग उनके फेवर में होने का अनुमान है। सभी राज्यों से वोट के बैलेट बॉक्स संसद पहले ही पहुंच चुके हैं और संसद में कड़ी सुरक्षा में उसे रखा गया है। राष्ट्रपति चुनाव के लिए कुल 32 जगहों पर मतदान हुआ था। इनमें 29 राज्य, दिल्ली और पुडुचेरी समेत दो केंद्र शासित प्रदेश और संसद भवन शामिल है जहां पर राज्यसभा और लोकसभा के सांसदों ने मतदान किया।</p>
<h2 style="text-align:justify;">किस तरह होगी काउंटिंग?</h2>
<p style="text-align:justify;">सबसे पहले पार्लियामेंट का बैलेट बॉक्स खोला जाएगा। उसके बाद दूसरे राज्यों से आए बैलेट बॉक्स खोले जाएंगे। राज्यों के वोट की काउंटिंग अल्फाबेटिकल बेस पर होगी। वोट की काउंटिंग चार अलग-अलग टेबल पर की जाएगी। करीब आठ राउंड में यह पूरी की जाएगी।</p>
<h2 style="text-align:justify;">राष्ट्रपति चुनाव में हुई थी 99% वोटिंग</h2>
<p style="text-align:justify;">सोमवार को हुई वोटिंग में 99% वोटिंग हुई थी, रिटर्निंग अधिकारी अनूप मिश्रा ने बताया कि यह अब तक की सबसे ज्यादा वोटिंग है. अभी लोकसभा (543) और राज्यसभा (233) में कुल 776 सांसद हैं. दोनों लोकसभा और राज्यसभा से दो-दो सीट खाली हैं. बिहार के सासाराम से बीजेपी के सांसद छेदी पासवान के पास वोटिंग का अधिकार नहीं था, इस तरह 771 सांसदों को वोट डालना था, लेकिन 768 सांसदों ने ही वोटिंग की.</p>
<p style="text-align:justify;">
</p><p style="text-align:justify;">
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                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 19 Jul 2017 22:14:06 +0530</pubDate>
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                <title>मीरा कुमार ने साबरमती आश्रम से शुरू किया अभियान</title>
                                    <description><![CDATA[ चुनाव को दलित बनाम दलित के तौर पर पेश करने की निंदा अहमदाबाद। राष्ट्रपति पद के लिए कांग्रेस समेत 17 विपक्षी दलों के गठबंधन की उम्मीदवार तथा पूर्व लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार ने शुक्रवार को अपने चुनाव अभियान की विधिवत शुरूआत से ठीक पहले यहां महात्मा गांधी के ऐतिहासिक साबरमती आश्रम का दौरा किया और […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/other-news/meira-kumar-started-the-campaign-from-sabarmati-ashram/article-1804"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-06/meira-kumar2.jpg" alt=""></a><br /><h1 style="text-align:center;"> चुनाव को दलित बनाम दलित के तौर पर पेश करने की निंदा</h1>
<p style="text-align:justify;"><strong>अहमदाबाद।</strong> राष्ट्रपति पद के लिए कांग्रेस समेत 17 विपक्षी दलों के गठबंधन की उम्मीदवार तथा पूर्व लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार ने शुक्रवार को अपने चुनाव अभियान की विधिवत शुरूआत से ठीक पहले यहां महात्मा गांधी के ऐतिहासिक साबरमती आश्रम का दौरा किया और बाद में कहा कि देश के सर्वोच्च पद के लिए होने वाले इस चुनाव को जातीय आधार पर दलित बनाम दलित के तौर पर प्रस्तुत करने के प्रयासों की निंदा होनी चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">श्रीमती कुमार ने सुबह आश्रम का दौरा किया तथा बापू के निवास हृदय कुंज में चरखा भी चलाया। बाद में वह यहां गुजरात कांग्रेस मुख्यालय में आई और पार्टी विधायकों के साथ बैठक की। इसके बाद आयोजित संवाददाता सम्मेलन में उन्होंने कहा कि सोनिया गांधी के नेतृत्व में विचारधारा की समानता के आधार पर 17 विपक्षी दलों ने उन्हें प्रत्याशी बनाया है और उन्होंने सभी निर्वाचकों को पत्र लिख कर अंतरात्मा की आवाज पर वोट देने की अपील की। ज्ञातव्य है कि राजग के प्रत्याशी रामनाथ कोविंद ने 28 जून को जम्मू कश्मीर से अपने अभियान की शुरूआत की थी। निर्वाचक मंडल के अंकगणित के लिहाज से उनका पलड़ा काफी भारी है और 17 जुलाई को होने वाले चुनाव में उनकी जीत सुनिश्चित मानी जा रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>अन्य खबरें</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 30 Jun 2017 08:10:18 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>‘मीरा’ के बहाने एकजुटता का प्रयास</title>
                                    <description><![CDATA[राष्ट्रपति चुनाव : 2019 लोस चुनाव को लेकर विपक्ष को जोड़ने के प्रयास में कांग्रेस नई दिल्ली। राष्ट्रपति चुनाव में आंकड़ों और संख्याबल के मुताबिक राजग उम्मीदवार राम नाथ कोविंद की जीत को लेकर कोई शक नहीं है, लेकिन कांग्रेस नेता मीरा कुमार के मैदान में आने के बाद राष्ट्रपति चुनाव की लड़ाई दिलचस्प हो […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/congress-in-an-attempt-to-link-opposition-to-the-2019-presidential-election/article-1741"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-06/meira-kumar1.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:justify;">राष्ट्रपति चुनाव : 2019 लोस चुनाव को लेकर विपक्ष को जोड़ने के प्रयास में कांग्रेस</h2>
<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली।</strong> राष्ट्रपति चुनाव में आंकड़ों और संख्याबल के मुताबिक राजग उम्मीदवार राम नाथ कोविंद की जीत को लेकर कोई शक नहीं है, लेकिन कांग्रेस नेता मीरा कुमार के मैदान में आने के बाद राष्ट्रपति चुनाव की लड़ाई दिलचस्प हो गई है जहां भाजपा की रणनीति के खिलाफ सोनिया गांधी के नेतृत्व में विपक्ष की एकजुटता को साल 2019 में होने वाले लोकसभा चुनाव के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">जदयू अध्यक्ष और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और बीजद सुप्रीमो नवीन पटनायक द्वारा कोविंद को दिए समर्थन से विपक्ष में पड़ी फूट को भाजपा आने वाले समय के लिए संतोषजन मान रही और विपक्ष के फैसले के तुरंत बाद पार्टी के प्रवक्ताओं ने उनकी एकजुटता पर निशाना भी साधा है।</p>
<p style="text-align:justify;">भाजपा नेता सुधांशु त्रिवेदी ने से कहा कि तीन साल से विपक्ष बात-बात पर एकजुटता दिखाता रहा, लेकिन बार-बार वो बिखरता रहा। इस बार भी विपक्ष में जुटे लोग अपने स्वार्थ की वजह से साथ हैं जो जल्द ही फिर अलग दिखेंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">भाजपा अपनी जीत के लिए आश्वस्त है इसलिए कोविंद के सामने किसी भी विरोधी के मैदान में उतरने से उसे फर्क नहीं पड़ता, लेकिन इसके बहाने सपा, बसपा, लालू और शरद पवार का कांग्रेस के साथ आकर एकजुटता प्रदर्शित करना आने वाले समय खासकर 2019 के लोकसभा चुनाव के संदर्भ में चुनौती का संकेत जरूर है।</p>
<p style="text-align:justify;">हालांकि भाजपा नीतीश और पटनायक की ओर से कोविंद को समर्थन दिए जाने को सकारात्मक संकेत मान रही है। भाजपा नीत राजग ने 20 जून को रामनाथ कोविंद को राष्ट्रपति पद के लिए अपना उम्मीदवार घोषित किया था।</p>
<p style="text-align:justify;">
</p><p style="text-align:justify;">
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                <link>https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/congress-in-an-attempt-to-link-opposition-to-the-2019-presidential-election/article-1741</link>
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                <pubDate>Thu, 29 Jun 2017 01:33:41 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>राष्ट्रपति चुनाव: मीरा कुमार ने नॉमिनेशन फाइल किया</title>
                                    <description><![CDATA[New Delhi: राष्ट्रपति पद के लिए विपक्ष की उम्मीदवार मीरा कुमार ने बुधवार को संसद भवन में अपना नॉमिनेशन फाइल किया। इस मौके पर सोनिया गांधी, शरद पवार, मनमोहन सिंह, मल्लिकार्जुन खड़गे, सीताराम येचुरी समेत विपक्ष के कई नेता मौजूद थे। लालू प्रसाद यादव नहीं पहुंचे। इससे पहले मीरा राजघाट पहुंची और महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/meira-kumar-president-nomination/article-1693"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-06/meira-kumar.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>New Delhi:</strong> राष्ट्रपति पद के लिए विपक्ष की उम्मीदवार मीरा कुमार ने बुधवार को संसद भवन में अपना नॉमिनेशन फाइल किया। इस मौके पर सोनिया गांधी, शरद पवार, मनमोहन सिंह, मल्लिकार्जुन खड़गे, सीताराम येचुरी समेत विपक्ष के कई नेता मौजूद थे। लालू प्रसाद यादव नहीं पहुंचे। इससे पहले मीरा राजघाट पहुंची और महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि दी। वहीं, एनडीए के उम्मीदवार रामनाथ कोविंद ने भी बुधवार को ही अपना आखिरी यानी चौथा नॉमिनेशन दाखिल किया। कोविंद ने संसद भवन में 23 जून को तीन नॉमिनेशन फाइल किए थे। बता दें कि राष्ट्रपति चुनाव के लिए वोटिंग 17 जुलाई को होगी। काउंटिंग 20 जुलाई को कराई जाएगी। प्रणब मुखर्जी का टेन्योर 24 जुलाई को खत्म होगा।</p>
<p> </p>
<h1>हमें गर्व है: राहुल</h1>
<p>मीरा कुमार के नामांकन करने से पहले कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने भी ट्वीट किया। उन्होंने लिखा कि बांटने की नीति के खिलाफ हमनें देश को एक करने की विचारधारा को आगे रखा है। मीरा कुमार हमारी उम्मीदवार हैं, इस पर गर्व है।</p>
<p>इससे पहले उन्होंने मंगलवार को ऐलान किया था कि वह अपना चुनाव प्रचार साबरमती आश्रम से शुरू करेंगी. मीरा कुमार ने मंगलवार को प्रेस से भी बात की थी।</p>
<h1>विचारधारा की लड़ाई: मीरा</h1>
<p>मीरा कुमार ने कहा कि विपक्ष की पार्टियों ने सर्वसम्मति से मुझे राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाने का फैसला लिया। विपक्षी दलों की एकता समान विचारधारा पर आधारित है। मीरा कुमार ने कहा कि लोकतांत्रिक मूल्यों, पारदर्शिता, प्रेस की आजादी और गरीब का कल्याण हमारी विचारधारा के अंग हैं, इनमें मेरी गहरी आस्था है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि इस चुनाव में मैं इस विचारधारा पर ही राष्ट्रपति चुनाव लडूंगी। मीरा कुमार ने कहा कि मैंने सभी निर्वाचक मंडल के सभी सदस्यों को पत्र लिख मेरा समर्थन करने की अपील की है, उनके सामने इतिहास रचने का अवसर है।</p>
<p> </p>
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                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/meira-kumar-president-nomination/article-1693</link>
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                <pubDate>Wed, 28 Jun 2017 02:06:33 +0530</pubDate>
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                            </item>
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                <title>राजनीति के शीर्ष पर दलित दांव</title>
                                    <description><![CDATA[देश के सबसे बड़े दो राजनीतिक दलों ने राष्ट्रपति के चुनाव हेतु दलित उम्मीदवारों की दावेदारी को दांव लगाकर राजनीति के दलित विमर्श को जन्म दे दिया है। एक लम्बे अरसे से यह कयास लगाया जा रहा था कि आखिरकार भाजपा बड़े नेताओं की महत्वकांक्षा और राष्ट्रपति पद पर सुयोग्य व्यक्ति को आसीन करने के […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/dalit-bets-on-top-of-politics/article-1552"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-06/kovind-2.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">देश के सबसे बड़े दो राजनीतिक दलों ने राष्ट्रपति के चुनाव हेतु दलित उम्मीदवारों की दावेदारी को दांव लगाकर राजनीति के दलित विमर्श को जन्म दे दिया है। एक लम्बे अरसे से यह कयास लगाया जा रहा था कि आखिरकार भाजपा बड़े नेताओं की महत्वकांक्षा और राष्ट्रपति पद पर सुयोग्य व्यक्ति को आसीन करने के बीच संतुलन किस प्रकार स्थापित करेगी। भाजपा ने रामनाथ कोविंद को राष्ट्रपति उम्मीदवार बनाकर एक तीर से कई निशाने साध दिए।</p>
<p style="text-align:justify;">जहां एक ओर रामनाथ कोविंद दलित समाज से ताल्लुक रखते हैं, वहीं दूसरी ओर वह मूलत: उत्तर-प्रदेश से भी हैं। इन द्विपक्षीय खासियतों के चलते विपक्ष के सामने व्यक्ति विरोध का कोई अवसर भी नहीं बचा और भाजपा ने कोविंद के सहारे 2019 के लिए यूपी की दलित राजनीति को साधने का भी प्रयास कर लिया। हालांकि इसमें कोई दोराय नहीं कि राष्ट्रपति पद की उम्मीदवारी को लेकर बीते कुछ दिनों से जो भी कयास चल रहे थे, उन सभी पर विराम लगाते हुए एक बार फिर मोदी के निर्णयों ने सभी को चौंका दिया।</p>
<p style="text-align:justify;">रामनाथ कोविंद का नाम जैसे ही फलक पर आया सियासत का बाजार भी गरम हो गया। विपक्षियों की सरगर्मी भी तेज हुई, साथ ही आगे की रणनीति को लेकर अटकलें भी लगाई जाने लगीं।</p>
<p style="text-align:justify;">दलित के बदले दलित उतारने की कवायद भी जोर पकड़ने लगी और इसी का परिणाम यह हुआ कि पूर्व स्पीकर मीरा कुमार का नाम यूपीए की तरफ से राष्ट्रपति पद की उम्मेदवारी के लिए घोषित कर दिया गया। लेकिन यह कह सकते हैं कि दलित दांव पहले खेलने में भाजपा समर्थ रही है। भाजपा के इस निर्णय के साथ बिहार के मुख्यमंत्री सहित उद्धव ठाकरे भी अब साथ खड़े दिख रहे हैं। टीआरएस भी समर्थन का संकेत कर चुकी है, जबकि ओडिशा के सीएम नवीन पटनायक साथ होने का एलान पहले ही कर चुके हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">अब चुनाव की राह में रोड़े अधिक नहीं है, पर शिकायत तो कईयों की बहुत है। बहुजन समाज पार्टी मुखिया मायावती दलित चेहरे की स्थिति को देखते हुए मना तो नहीं कर पाई हैं, पर असमंजस से जरूर गुजर रही होंगी। वामपंथ की शिकायत यह है कि उम्मीदवारी के मामले में निर्णय एकतरफा है, लेकिन एक बात यह है कि अब मीरा कुमार की उम्मेदवारी के चलते कई विपक्षी दलों को रामनाथ कोविंद का विरोध करने का अवसर मिल गया है। क्योंकि वह मीरा कुमार का साथ देकर और कोविंद का विरोध करके दलित विरोधी होने के दाग से बच निकलेंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">देखा जाए तो राष्ट्रपति के चुनाव को लेकर आंकड़े एनडीए की ओर झुके हुए दिखाई देते हैं, पर एनडीए का मानना है कि सर्वसम्मति से बात बने, तो अच्छा रहेगा। मोदी ने राष्ट्रपति पद के लिए जिस चेहरे को उतारा है, उसे लेकर कई अपने सियासी गुणा-भाग में लगे होंगे। आगे की राजनीति कठिन न हो, इसका भी ख्याल उनके मन में आ रहा होगा।</p>
<p style="text-align:justify;">लगभग सभी दलों के सियासी गुणा-भाग में दलितों का काफी महत्व देखा जा सकता है। खास यह भी है कि रामनाथ कोविंद यदि राष्ट्रपति चुने जाते हैं, तो वह यूपी के पहले राष्ट्रपति होंगे। जाहिर है आधा दर्जन प्रधानमंत्री देने वाले उत्तर प्रदेश के लिए भी यह गौरव से भरा संदर्भ होगा।</p>
<p style="text-align:justify;">हालांकि जिस तर्ज पर एनडीए ने राष्ट्रपति का उम्मीदवार घोषित किया, उसे राजनीति का मास्टर स्ट्रोक ही कहा जायेगा, क्योंकि रामनाथ कोविंद जिस उत्तर प्रदेश से सम्बन्धित हैं, वहां 2014 के लोकसभा चुनाव में 80 के मुकाबले 73 सीटें और फरवरी 2017 के विधानसभा चुनाव में 403 के मुकाबले 325 स्थान एनडीए के खाते में है।</p>
<p style="text-align:justify;">जाहिर है 2019 के लोकसभा चुनाव में इसे वह दोहराना चाहेगी। ऐसा नहीं है कि मात्र दलित चेहरे के चलते ही रामनाथ कोविंद की उम्मीदवारी तय हुई है। उनकी कार्यप्रणाली को परखा जाए, तो काबिलियत भी कम नहीं है।</p>
<p style="text-align:justify;">रामनाथ कोविंद हाईकोर्ट, सुप्रीम कोर्ट के बेहद कामयाब वकील रहे हैं। सामाजिक जीवन में सक्रियता के लिए जाने जाते हैं। 1994 में राज्यसभा के लिए भी चुने जा जुके हैं और लगातार दो बार उच्च सदन के सदस्य रहे हैं। गौरतलब है कि अटल बिहारी वाजपेयी और आडवाणी के युग में कोविंद भाजपा का सर्वाधिक बड़ा चेहरा माने जाते थे।</p>
<p style="text-align:justify;">एक सामाजिक कार्यकर्ता और साफ छवि के राजनेता कोविंद संयुक्त राष्ट्र में भारत का प्रतिनिधित्व भी कर चुके हैं। यह वाक्या अक्तूबर 2002 का है, जब उन्होंने यहां सम्बोधन दिया था। 8 अगस्त, 2015 से राष्ट्रपति के उम्मीदवार घोषित किये जाने के दो दिन बाद तक वे बिहार के राज्यपाल रहे।</p>
<p style="text-align:justify;">एक अन्य प्रश्न राष्ट्रपति उम्मीदवारी को लेकर यह भी उठ रहा है कि आडवाणी समेत कई कद्दावर नेताओं को क्यों दरकिनार किया गया? कहा जा रहा है कि एक बार फिर प्रधानमंत्री मोदी और अमित शाह ने अपनी बिसात पर सभी को चक्कर में डाल दिया है, पर वे दोनों अब किस चक्रव्यूह को भेदना चाहते हैं, इसको भी समझना जरूरी है।</p>
<p style="text-align:justify;">भाजपा कोविंद के बहाने अपनी सियासी पकड़ और मजबूत करने की फिराक में है। दलित चेहरा चुनने का रास्ता अख्तियार करके जाति की राजनीति और उसकी नब्ज को मजबूती से पकड़ने की कवायद फिलहाल देखी जा सकती है। हालांकि भाजपा इस आरोप को जरूर खारिज कर देगी और वह इस बात की वाहवाही लेना चाहेगी कि उसने एक दलित को राष्ट्रपति बनाने का काज किया है, न कि जातिगत राजनीति की है।</p>
<p style="text-align:justify;">सच तो यह है कि एनडीए में यहां तक कि केवल भाजपा में ही कोविंद के मुकाबले राष्ट्रपति के लिए दर्जनों उम्मीदवारों की लम्बी फेहरिस्त है, पर वे 2019 के लोकसभा में तुरूप का इक्का सिद्ध नहीं हो सकते थे। ऐसे में उनका दरकिनार होना स्वाभाविक था।</p>
<p style="text-align:justify;">अब चाहे रामनाथ कोविंद हों या मीरा कुमार यह बात सच है कि भारत में अर्से से सामाजिक रूप से शोषित रहा दलित समाज अब राजनीति और समाज में अपना स्थान बनाने लगा है। योग्यता के चलते अब सिर्फ जाति के नाम पर विरोध की परम्परा टूटने लगी है। उम्मीद है कि आने वाला समय भारतीय राजनीति को अधिक समावेशी बनाएगा, जिसमें समाज के प्रत्येक वर्ग की हिस्सेदारी होगी और एक नए प्रकार की राजनीतिक जमीन बनना प्रारंभ होगी।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>– पार्थ उपाध्याय</strong></p>
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                                                            <category>लेख</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 23 Jun 2017 23:14:04 +0530</pubDate>
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                <title>राष्ट्रपति चुनाव: कोविंद की काट के लिए मैदान में मीरा</title>
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/opposition-parties-declared-presidential-candidate-to-meira-kumar/article-1500"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-06/meira.jpg" alt=""></a><br /><h1 style="text-align:center;">सोनिया गांधी ने ऐलान किया विपक्ष के उम्मीदवार का ऐलान</h1>
<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली।</strong> कांग्रेस और दूसरे विपक्षी दलों ने वीरवार शाम को राष्ट्रपति पद के लिए संयुक्त उम्मीदवार के नाम का ऐलान कर दिया। बैठक में चर्चा के बाद कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने मीरा कुमार के नाम की घोषणा की। बीजेपी नीत एनडीए ने 20 जून को रामनाथ कोविंद को राष्ट्रपति पद के लिए अपना उम्मीदवार घोषित किया था। रामनाथ कोविंद दलित जाति से आते हैं। ऐसे में उनके नाम को बीजेपी के दलित कार्ड के रूप में देखा जा रहा था।</p>
<p style="text-align:justify;">रामनाथ कोविंद के नाम का ऐलान करने से पहले बीजेपी ने कांग्रेस समेत दूसरे विरोधी दलों से राष्ट्रपति चुनाव में समर्थन की मांग की थी। जिसका विपक्षी दलों ने ये कहते हुए विरोध किया था कि उन्हें बीजेपी ने उम्मीदवार का नाम नहीं बताया, लेकिन जब बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने रामनाथ कोविंद के नाम का ऐलान किया तो तमाम दल हैरान रह गए। रामनाथ कोविंद कोरी जाति के दलित हैं और उत्तर प्रदेश के कानपुर से आते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">वहीं दूसरी तरफ 2019 में अपनी एकजुटता दिखाने के लिए विपक्ष को उम्मीदवार उतारना मजबूरी बन गई थी। ऐसे में बीजेपी के दलित कार्ड का जवाब दलित नाम से ही दिया। विपक्ष ने अपने उम्मीदवार के तौर पर मीरा कुमार के नाम का ऐलान किया। मीरा कुमार भी दलित जाति से आती हैं और दिवंगत दलित नेता बाबू जगजीवन राम की बेटी हैं। मीरा कुमार लोकसभा स्पीकर भी रह चुकी हैं, हालांकि, मीरा कुमार के नाम को लेकर तृणमूल कांग्रेस और लेफ्ट पार्टियों ने अहमति जाहिर की थी।</p>
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                <pubDate>Thu, 22 Jun 2017 08:18:02 +0530</pubDate>
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