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                <title>Horticulture - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>परम्परागत खेती छोड़ अपनाई बागवानी, अब दूसरों को रोजगार दे रहे श्याम सिंह</title>
                                    <description><![CDATA[सोनीपत के प्रगतिशील किसान ने खेती के प्रति बदली सोच | Horticulture Farming चण्डीगढ़ (सच कहूँ न्यूज)। खेती घाटे का सौदा नहीं है, बल्कि यदि समय के साथ बदलाव किया जाए तो कृषि में आय बढ़ सकती है। सरकारी प्रोत्साहन के फलस्वरूप प्रदेश के किसान नजरिया बदलकर परंपरागत खेती की जगह बागवानी को अपनाएं तो अच्छा […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/agriculture/progressive-farmer-of-sonipat-changed-his-thinking-towards-farming/article-55281"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-11/horticulture-farming.jpg" alt=""></a><br /><h4 style="text-align:justify;">सोनीपत के प्रगतिशील किसान ने खेती के प्रति बदली सोच | Horticulture Farming</h4>
<p style="text-align:justify;"><strong>चण्डीगढ़ (सच कहूँ न्यूज)।</strong> खेती घाटे का सौदा नहीं है, बल्कि यदि समय के साथ बदलाव किया जाए तो कृषि में आय बढ़ सकती है। सरकारी प्रोत्साहन के फलस्वरूप प्रदेश के किसान नजरिया बदलकर परंपरागत खेती की जगह बागवानी को अपनाएं तो अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं। बागवानी से किसान अपने उत्पादों को प्रोडेक्ट के रूप में प्रस्तुत कर किसान उत्पादक समूह (एफपीओ) बनाकर खुद भी मार्केटिंग कर सकते हैं। Horticulture Farming</p>
<p style="text-align:justify;">नई दिल्ली के प्रगति मैदान में चल रहे अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेले में हरियाणा मंडप में ऐसे किसानों की स्टॉल हैं, जिन्होंने राज्य सरकार की योजनाओं का लाभ लेते हुए औषधीय पौधों से हर्बल प्रोडेक्ट तैयार कर बदलाव की कहानी के नायक बने हैं। खेती से खुद के साथ दूसरों को रोजगार की सोच के साथ आगे बढ़ रहे सोनीपत के एमपी माजरा निवासी श्याम सिंह ने बागवानी से अपने ही प्रोडेक्ट तैयार किए हैं। हरियाणा मंडप की स्टॉल पर उन लोगों की अधिक भीड़ देखी जा रही है जो हर्बल प्रोडेक्ट खरीदने में रूचि रखते हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">आंवला से मिला खेती को प्रोत्साहन | Horticulture Farming</h3>
<p style="text-align:justify;">किसान श्याम सिंह ने बताया कि उनके पास 18 एकड़ जमीन है। उन्होंने सबसे पहले आंवला 2 एकड में लगाया और उसके बाद आवला की खेती के बीच में ही हल्दी, सरसों, मूंगफली व सौंफ की खेती करने लगे। बागवानी में बड़ा बदलाव 2014 के बाद आया जब उन्होंने आंवला से अलग-अलग प्रोडेक्ट बनाने शुरू किये और अब वे 5 एकड़ में आंवला की खेती कर रहे हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">35 से अधिक हर्बल प्रोडेक्ट कर रहे तैयार, 17 लोगों को दिया रोजगार</h3>
<p style="text-align:justify;">श्याम सिंह ने बताया कि उनके यहां आंवला, बेलगिरी, सौंफ, धनिया, मोरिका, सरसों, गुलाब की खेती करने के साथ इनके हर्बल प्रोडेक्ट भी तैयार किए जा रहे है। शुरू में उनके पास आंवला के कुछ प्रोडेक्ट तैयार होते थे लेकिन अब वे 35 प्रकार के प्रोडेक्ट तैयार कर रहें हैं जिनमें आंवला कैंडी, आंवला अचार, लड्डू, मुरब्बा, बर्फी, पाउडर, जूस, गुलाब से गुलाबजल व गुलकंद प्रमुख हैं। उन्होंने बताया कि अब उनके यहां 17 लोगों को रोजगार मिला हुआ है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">खेत में ही आउटलेट, वहीं पहुंच रहे खरीददार | Horticulture Farming</h3>
<p style="text-align:justify;">श्याम सिंह के अनुसार पहले बागवानी विभाग ने उन्हें आंवला प्रोडेक्ट बनाने के लिए 11 लाख रुपए के प्रोजेक्ट में 40 प्रतिशत की सब्सिडी उपलब्ध करवाई थी। इसके बाद उन्होंने प्रोजेक्ट को बड़ा करने के लिए एमएसएमई योजना के अंतर्गत भी लोन लिया। उन्होंने बताया कि परंपरागत खेती की अपेक्षा बागवानी और हर्बल में उन्हें तीन गुना अधिक मुनाफा हो रहा है। हालांकि मार्केटिंग की आरंभ में कुछ समस्या आती है। उन्होंने खुद अपने खेत में आउटलेट बनाया हुआ है, जहां लोग उन द्वारा निर्मित प्रोडेक्ट खरीदने पहुंचते है। श्याम सिंह कई जिलों में अपने प्रोडेक्ट सप्लाई करते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">परंपरागत खेती की बजाय बागवानी में फायदा है, लेकिन किसान को अपनी सोच बदलनी होगी और जब वह बागवानी में कदम बढ़ाएगा तब उसे अपने प्रोडेक्ट बनाने की भी ललक पैदा होगी। जब सोच बदले तभी सवेरा आएगा। अब तो किसान हरियाणा सरकार की एफपीओ योजना लाभ उठाते हुए अपने समूह बनाकर उत्पादों की मार्केटिंग भी कर सकते हैं जिससे उनकी आमदनी बढ़ेगी।<br />
<strong>                                                                                              – श्याम सिंह, प्रगतिशील किसान।</strong></p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="Trident Group: ट्राइडेंट फाउंडेशन ने बरनाला गांव के हाई स्कूल में बनवाए नये शौचालय" href="http://10.0.0.122:1245/trident-foundation-build-new-toilets-in-the-high-school-of-barnala-village/">Trident Group: ट्राइडेंट फाउंडेशन ने बरनाला गांव के हाई स्कूल में बनवाए नये शौचालय</a></p>
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                                                            <category>कृषि</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/agriculture/progressive-farmer-of-sonipat-changed-his-thinking-towards-farming/article-55281</link>
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                <pubDate>Sun, 26 Nov 2023 16:29:18 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सोशल मीडिया से जानकारी जुटाकर किसान जितेन्द्र ने शुरु की बागवानी</title>
                                    <description><![CDATA[‘म्हारी खेती, म्हारे किसान’, उपराष्ट्रपति ने किया सरसा जिला में सबसे बेस्ट बागवानी के लिए सम्मानित | Bagwani Kheti Bagwani Kheti: सरे किसानों की तरह जितेंद्र सिंह भी कभी सामान्य ढंग से खेती करता था। लेकिन लागत अधिक व आमदन कम होने के चलते खेती में लगातार हो रहे घाटे ने उसे बागवानी के लिए […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/agriculture/farmer-jitendra-started-gardening-by-gathering-information-from-social-media/article-53625"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-10/bagwani-kheti.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:justify;">‘म्हारी खेती, म्हारे किसान’, उपराष्ट्रपति ने किया सरसा जिला में सबसे बेस्ट बागवानी के लिए सम्मानित | Bagwani Kheti</h3>
<p style="text-align:justify;">Bagwani Kheti: सरे किसानों की तरह जितेंद्र सिंह भी कभी सामान्य ढंग से खेती करता था। लेकिन लागत अधिक व आमदन कम होने के चलते खेती में लगातार हो रहे घाटे ने उसे बागवानी के लिए प्रेरित कर दिया। जितेंद्र सिंह ने सोशल मीडिया से ज्ञानवर्धक जानकारियां हासिल करते हुए विभागीय योजना का लाभ उठाकर बागवानी शुरू की। आज यह किसान हर वर्ष करीब 60 लाख रुपये की आमदन उठा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">इस प्रगतिशील किसान को 8 अक्टूबर को उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ व कृषि मंत्री जे.पी. दलाल ने जिला स्तर पर सबसे बेहतर बागवानी के लिए विशेष रूप से सम्मानित किया। यह युवा किसान आज दूसरे किसानों के लिए प्रेरणास्त्रोत बना हुआ है। ओढां खंड के गांव घुंकावाली निवासी किसान जितेन्द्र सिंह से जब बातचीत की गई तो उसने सामान्य खेती से लेकर बागवानी तक की पूरी जानकारी सांझा की। किसान जितेन्द्र सिंह ने बताया कि खेती में लगातार हो रहे घाटे के चलते उसके मन में बागवानी का विचार उत्पन्न हुआ था।</p>
<p style="text-align:justify;">जिसके बाद उसने कुछ किसानों को बागवानी (Bagwani Kheti) में अच्छी आमदन उठाते देखा तो उसकी बागवानी में रूचि और बढ़ गई। जिसके बाद उसने ट्रायल के तौर पर 20 एकड़ में किन्नु की बागवानी शुरू की। हालांकि ट्रायल के रूप में इतना बड़ा दायरा होने के चलते उसके परिजनों ने उसे टोका भी। लेकिन जितेन्द्र सिंह ने किसी की न सुनते हुए पूरा ध्यान बागवानी पर केन्द्रित कर लिया। 3 वर्ष में किन्नु के पौधे तैयार हुए तथा चौथे वर्ष किसान ने 50 हजार रुपये प्रति एकड़ की आमदन ली।</p>
<h3 style="text-align:justify;">सोशल मीडिया बना मार्गदर्शक | Bagwani Kheti</h3>
<p style="text-align:justify;">किसान जितेन्द्र सिंह ने बागवानी में सोशल मीडिया को मार्गदर्शक बनाया। जिससे उसने अच्छी ज्ञानवर्धक जानकारियां हासिल की। शुरूआत में तो उसे रसायनों का प्रयोग किया, लेकिन किसान ने धीरे-धीरे कर आॅर्गेनिक ढंग अपना लिया। सिंह ने बताया कि पिछले 5 वर्षांे से उसने खेत में किसी भी तरह के रसायनों का प्रयोग नहीं किया। यही कारण है कि जितेन्द्र सिंह के बाग के पौधे स्वस्थ हैं एवं फलों की मिठास भी सबसे अलग है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">हर रोज 20 लीटर तरल खाद होती है तैयार :-</h3>
<p style="text-align:justify;">किसान जितेन्द्र सिंह द्वारा देसी तरीके से 8 ड्रमों की यूनिट में ब्रह्मीवॉश सिस्टम तैयार कर रखा है। जिसके तहत ड्रमों में गोबर की खाद डालकर उसमें केंचुए छोड़े हुए हैं। केंचुओं का मल-मूत्र पाइप के माध्यम से अन्य ड्रम में एकत्रित होता है। इस प्रक्रिय के माध्यम से हर रोज करीब 20 लीटर तरल पदार्थ तैयार होता है। जिसमें 80 प्रतिशत पानी का मिश्रण कर छिड़काव करने के साथ-साथ उसे ड्रिप के माध्यम से भी पौधों की जड़ों तक पहुंचाया जाता है। इससे पौधे को पोषण मिलेगा और वह स्वस्थ रहेगा।</p>
<h3 style="text-align:justify;">वेस्ट डी कंपोजर के लिए बनाया बड़ा टैंक:-</h3>
<p style="text-align:justify;">किसान जितेन्द्र सिंह ने वेस्ट डी कंपोजर के लिए खेत में एक लाख लीटर का बड़ा टैंक बनाया हुआ है। जिसमें वह गुड़ व वेस्ट डी कंपोजर का कल्चर डालता है। इससे तैयार तरल पदार्थ ड्रिप सिस्टम के माध्यम से पौधे तक पहुंचता है। ये प्रक्रिया जमीन में फालतू के खरपतवार व अन्य अवशेषों को गलाकर खाद का रूप दे देती है। इससे भूमि की उर्वरक शक्ति काफी अधिक बढ़ जाती है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">फंगस के लिए भी होती है स्प्रे तैयार :-</h3>
<p style="text-align:justify;">देखा जाता है कि पौधों में अक्सर फंगस की समस्या अधिक आती है। इसमें किसान महंगे कीटनाशकों का सहारा लेते हैं। लेकिन किसान जितेन्द्र सिंह ने फंगस की समस्या के लिए भी यूनिट स्थापित कर रखी है। वह देसी तरीका अपनाते हुए लस्सी, तांबे व लोहे के माध्यम से स्प्रे तैयार करता है। इसके छिड़काव से पौधे पर फंगस की समस्या नहीं आती। खेत में ही खाद व स्प्रे तैयार करने की प्रक्रिया में किसान जितेन्द्र सिंह 75 प्रतिशत तक खर्च बचा रहा है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">हर वर्ष 60 लाख रुपये की आमदन:-</h3>
<p style="text-align:justify;">किसान जितेन्द्र सिंह 20 एकड़ बागवानी में हर वर्ष करीब 60 लाख रुपये की आमदन उठा रहा है। विगत वर्ष हालांकि बागवानी में किसानों को घाटा उठाना पड़ा था, लेकिन फिर भी किसान जितेन्द्र सिंह ने प्रति एकड़ करीब 3 लाख रुपये की आमदन उठाई। किसान ने कहा कि देसी तौर-तरीके अपनाने में थोड़ी मेहनत ज्यादा है, लेकिन आमदन अच्छी है। उसने किसानों से आह्वान किया कि सामान्य खेती के साथ-साथ बागवानी अपनाकर अच्छा मुनाफा कमाएं। Bagwani Kheti</p>
<p style="text-align:justify;">सरकार द्वारा बागवानी को बढ़ावा देने के लिए अच्छी योजनाएं चलाई जा रही हैं। पिछले कुछ समय से किसानों की बागवानी की तरफ रूचि बढ़ी है। किसान जितेन्द्र सिंह ने बहुत अच्छी बागवानी कर रखी है। हमने स्वयं जाकर निरीक्षण किया। किसान को सरसा जिला में बेस्ट बागवानी करने पर उपराष्ट्रपति द्वारा सम्मानित किया गया।<br />
<strong>                                                                            पुष्पेन्द्र राठौड़, जिला उद्यान अधिकारी (सिरसा)।</strong></p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="Why Blood Sugar Spikes in Winter: सर्दियों में बढ़ने लगता है ब्लड शुगर का लेवल, इस तरह रखें अपना ध्यान" href="http://10.0.0.122:1245/blood-sugar-level-starts-increasing-in-winter-take-care-like-this/">Why Blood Sugar Spikes in Winter: सर्दियों में बढ़ने लगता है ब्लड शुगर का लेवल, इस तरह रखें अपना ध्यान</a></p>
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                                                            <category>कृषि</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/agriculture/farmer-jitendra-started-gardening-by-gathering-information-from-social-media/article-53625</link>
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                <pubDate>Fri, 13 Oct 2023 15:37:03 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>म्हारी  खेती-म्हारे किसान : पीक्यूएनके पद्धति अपनाकर बागवानी में मोटा मुनाफा कमा रही सुनीता गोदारा</title>
                                    <description><![CDATA[ओढां (राजू)। न कभी खेत की बुआई, न कभी जुताई, (Gardening) न ही कोई खाद-स्प्रे का खर्च और न ही कभी खेत से खरपतवार निकालना। सीधे रूप से कहें कि जीरो बजट पर खेती। सुनने में ये जरूर लगता होगा कि भला कभी ऐसे भी खेती व आमदन उठाई जा सकती है। लेकिन इसका उदाहरण […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/agriculture/sunita-godara-is-making-huge-profits-in-horticulture/article-48641"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-06/sunita-godara.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>ओढां (राजू)। </strong>न कभी खेत की बुआई, न कभी जुताई, (Gardening) न ही कोई खाद-स्प्रे का खर्च और न ही कभी खेत से खरपतवार निकालना। सीधे रूप से कहें कि जीरो बजट पर खेती। सुनने में ये जरूर लगता होगा कि भला कभी ऐसे भी खेती व आमदन उठाई जा सकती है। लेकिन इसका उदाहरण ओढां खंड के गांव ख्योवाली में प्रगतिशील किसान सुनीता गोदारा के रूप में देखा जा सकता है। विदेशी पीक्यूएनके पद्धति अपनाकर किसान सुनीता बागवानी में हर वर्ष करीब 5 लाख रुपये का अतिरिक्त खर्च बचाकर करीब 20 लाख की आमदन उठा रही है। किसान सुनीता गोदारा से हमारे संवाददाता राजू ओढां ने विशेष बातचीत की। (Gardening)</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="SMALL BUSINESS: करें आपकी सोच में इजाफा, छोटे बिजनेस, बड़ा मुनाफा!" href="http://10.0.0.122:1245/increase-your-thinking-small-business-big-profit/">SMALL BUSINESS: करें आपकी सोच में इजाफा, छोटे बिजनेस, बड़ा मुनाफा!</a></p>
<p style="text-align:justify;">किसान सुनीता गोदारा ने बताया कि उसने करीब 14 वर्ष पूर्व 20 एकड़ भूमि में बागवानी (Gardening) शुरू की थी। इससे पहले वे सामान्य तरीके से खेतीबाड़ी करते थे। जब उसने बागवानी शुरू की थी तो लोगों ने इस बात के लिए टोका कि 20 एकड़ में ट्रायल के तौर पर बागवानी करना समझदारी नहीं है, लेकिन उसने किसी कि परवाह किए बगैर बागवानी में मेहनत शुरू कर दी। सुनीता गोदारा ने बताया कि उसने प्रथम वर्ष 20 एकड़ में बागवानी में करीब 4 लाख रुपये की आमदन उठाई। फिर दूसरे वर्ष उसने 4 गुना अधिक आमदन उठाई। किसान सुनीता गोदारा ने बताया कि उसने धीरे-धीरे में इसमें कई चीजों का और इस्तेमाल करते हुए आमदन को बढ़ाया।</p>
<h3 style="text-align:justify;">अपनाई विदेशी पद्धति | (Horticulture Farmer)</h3>
<p style="text-align:justify;">किसान सुनीता गोदारा ने बताया कि उसने 3 वर्ष पूर्व पीक्यूएनके (पायदान कुदरत ए निजामे काश्तकारी) पद्धति को अपनाया। इस पद्धति को पाकिस्तान के आशिफ शरीफ ने शुरू किया था। हालांकि साथ लगते पंजाब क्षेत्र के किसान पिछले 3-4 वर्षों से ये पद्धति अपनाकर बागवानी में अच्छा लाभ उठा रहे हैं। हरियाणा में ये पद्धति करीब 2 वर्ष पूर्व ही आई है। किसान सुनीता के मुताबिक उसने इस पद्धति को अपनाकर सबसे पहले सब-सोयलर मशीन द्वारा भूमि में सुधार किया। जिसके बाद उसने बागवानी के बीच में पौधे से 6 फुट दूर सिंचाई के लिए नाली बनाई और पौधों के आसपास पराली से मल्चिंग की। (Gardening)</p>
<p style="text-align:justify;">मल्चिंग विधि ने पौधों के आसपास की जगह को न केवल नमीयुक्त रखा बल्कि उसके आसपास पौधे को गुड़ाई भी नहीं करना पड़ा। इससे पानी की काफी बचत भी हुई। वहीं हर समय नमी मिलने के चलते पौधे भी स्वस्थ रहते हैं। किसान सुनीता ने बताया कि उसने बागवानी से न कभी खरपतवार निकाला और न ही कभी ट्रैक्टर से बुआई की। इसके अलावा उसने पौधों में न तो कभी खाद डाली और न कभी रसायनों का छिड़काव किया। यानि बागवानी ऑर्गेनिक होने के साथ-साथ जीरो बजट पर हो रही है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">नवाचार पर फोकस</h3>
<p style="text-align:justify;">बागवानी में किस तरह से नई-नई तकनीक अपनाकर किसान अति कम लागत में मोटा मुनाफा उठाएं, इसके लिए किसान सुनीता गोदारा सोशल मीडिया के माध्यम से देश व विदेश के प्रगतिशील किसानों से संपर्क बनाए रखती है। बागवानी में नालियों में ट्रैक्टर चलाना, पौधों की देखरेख करना, पौधों के बीच की जगह में बैड बनाना व खेती के अन्य कार्य सुनीता स्वयं करती है। उसकी मेहनत का ही फल है कि सुनीता हर वर्ष बागवानी में करीब 20 लाख रुपये की आमदन उठाती है। हालांकि विगत वर्ष में बागवानी काफी कमजोर रही, लेकिन किसान सुनीता ने फिर भी पीक्यूएनके पद्धति के जरिए अच्छा मुनाफा कमाया।</p>
<h3 style="text-align:justify;">बागवानी की रक्षा करेंगे बांस | (Horticulture Farmer)</h3>
<p style="text-align:justify;">किसान सुनीता ने अपने खेत की मेड पर चारों ओर बांस के पौधे लगाए हैं। सुनीता का मानना है कि बांस के पौधे न केवल गर्म हवा व आंधी से होने वाले नुकसान से बागवानी को बचाएंगे बल्कि ये आमदन का एक जरिया भी है। किसान ने बताया कि वह तो यह कहती है कि हर किसान को अपने खेत की मेड पर बांस के पौधे लगाने चाहिए। ये न केवल आमदन का जरिया है बल्कि इसके काफी लाभ भी हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">कर्म खर्च से उठाया जा सकता है मोटा मुनाफा | (Horticulture Farmer)</h3>
<p style="text-align:justify;">किसान सुनीता गोदारा ने बताया कि अक्सर देखा जाता है कि हम अधिक फसल लेने के चक्कर में खेती पर खर्च भी अधिक कर बैठते हैं। जरूरी नहीं कि अधिक खर्च करने से ही अधिक मुनाफा होता है। किसान खेती में बागवानी जरूर अपनाएं। इसमें सरकार की काफी अच्छी योजना भी है। दूसरा जीरो बजट पर भी अच्छा मुनाफा है। इसके अलावा ऑर्गेनिक फसल, पानी की बचत तथा फलों में एक अलग मिठास सहित अनेक फायदे हैं। किसान पराली जलाने की बजाय उसे मल्चिंग में प्रयुक्त करें। इससे दोहरा फायदा होगा।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>कृषि</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 09 Jun 2023 16:15:59 +0530</pubDate>
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                <title>डेयरी, बागवानी क्षेत्र में सहयोग करेगा नीदरलैंड</title>
                                    <description><![CDATA[सहमतिबागवानी विश्वविद्यालय के साथ सहयोग को कमेटी गठित हालैण्ड दूतावास में कृषि मंत्री संग हुई वार्ता हरियाणा डेयरी विकास प्राधिकरण के प्रतिनिधि होंगे सदस्य चंडीगढ़(सच कहूँ न्यूज)। प्रदेश के साथ डेयरी, पुष्प खेती एवं खारे पानी की तकनीक से पैरी एग्रीकल्चर बढ़ाने में सहयोग देने के लिए नीदरलैण्ड का एक शिष्टमण्डल ने हालैण्ड दूतावास में भारत […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/the-netherlands-will-help-in-the-field-of-dairy-horticulture/article-1519"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-06/ghoshala.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:justify;">सहमतिबागवानी विश्वविद्यालय के साथ सहयोग को कमेटी गठित</h2>
<ul>
<li style="text-align:justify;"><strong>हालैण्ड दूतावास में कृषि मंत्री संग हुई वार्ता</strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>हरियाणा डेयरी विकास प्राधिकरण के प्रतिनिधि होंगे सदस्य</strong></li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>चंडीगढ़(सच कहूँ न्यूज)। </strong>प्रदेश के साथ डेयरी, पुष्प खेती एवं खारे पानी की तकनीक से पैरी एग्रीकल्चर बढ़ाने में सहयोग देने के लिए नीदरलैण्ड का एक शिष्टमण्डल ने हालैण्ड दूतावास में भारत व श्रीलंका के कृषि सलाहकार वाउटर वरहे के नेतृत्व में हरियाणा के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री ओ.पी.धनखड़ से मुलाकात की।</p>
<p style="text-align:justify;">चर्चा के दौरान इस बात पर सहमति हुई कि हरियाणा में स्थापित किये जा रहे बागवानी विश्वविद्यालय के साथ सहयोग बढ़ाएगा इसके लिए हरियाणा सरकार ने चौधरी चरण सिंह कृषि विश्वविद्यालय, हिसार के कुलपति की अध्यक्षता में कार्यसमूह गठित किया गया है, जिसमें बागवानी, कृषि, पशुपालन एवं डेयरी, हरियाणा डेयरी विकास प्राधिकरण, हरियाणा राज्य कृषि विपणन बोर्ड के प्रतिनिधियों को सदस्य बनाया गया है, जबकि एस.के.सहरावत को इस कमेटी का सदस्य सचिव नियुक्त किया गया है।</p>
<h2 style="text-align:justify;">दुनिया के सभी मुल्क किसानों को देते हैं सब्सिडी</h2>
<p style="text-align:justify;">एक प्रश्न के उत्तर में धनखड़ ने कहा कि कृषि की अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ बनाने के लिए यूरोपियन देश में भी अपने तरीके से सब्सिडी देते हैं। उन्होंने कहा कि हरियाणा देश का ऐसा राज्य हैं जहां प्रति किसान प्रति एकड़ 11000 रुपये की विभिन्न प्रकार की सब्सिडयां दी जाती हैं। यदि हम इसकी वार्षिक गणना करें तो यह 62000 रुपये प्रति एकड़ बनती है।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि हरियाणा सरकार जैविक खेती, बागवानी खेती, पैरी एग्रीकल्चर अवधरणा पर जोर दे रही है। इस कड़ी में हाल ही में उनके आस्टे्रलिया, न्यूजीलैण्ड व फिजी जैसे देशों के दौरे के दौरान सहयोग की संभावनाएं बढ़ी हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">
</p><p style="text-align:justify;"><a href="http://10.0.0.122:1245/">Hindi News </a>से जुडे अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें <a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a> और <a href="https://x.com/SACHKAHOON">Twitter</a> पर फॉलो करें।</p>
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                                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 23 Jun 2017 00:46:12 +0530</pubDate>
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