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                <title>elderly - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>शोध : बच्चों के प्रारंभिक विकास के लिए बुजुर्गों का सानिध्य जरूरी</title>
                                    <description><![CDATA[आधुनिक परिप्रेक्ष्य में एकल परिवारों की संख्या में वृद्धि  (Elderly) बदलती जीवन शैली और व्यवसायिक परिस्थितियों ने व्यक्ति को अपना घर-परिवार, अपने माता-पिता से दूर जीवन व्यतीत करने के लिए विवश कर दिया है। आय के बेहतर अवसरों की तलाश और आर्थिक स्थिति सशक्त बनाने के लिए व्यक्ति जब अपने अभिभावकों से अलग दूसरे शहरों […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/home-and-family/research-necessary-for-the-development-of-children-with-the-elderly/article-86982"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-01/oldeg.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:center;"><strong>आधुनिक परिप्रेक्ष्य में एकल परिवारों की संख्या में वृद्धि </strong></h2>
<p style="text-align:justify;">(Elderly) बदलती जीवन शैली और व्यवसायिक परिस्थितियों ने व्यक्ति को अपना घर-परिवार, अपने माता-पिता से दूर जीवन व्यतीत करने के लिए विवश कर दिया है। आय के बेहतर अवसरों की तलाश और आर्थिक स्थिति सशक्त बनाने के लिए व्यक्ति जब अपने अभिभावकों से अलग दूसरे शहरों में रहने लगता है, तो ऐसे में वह वहीं अपना परिवार बसा लेता है। परिणामस्वरूप आधुनिक परिप्रेक्ष्य में एकल परिवारों की संख्या में दिनों-दिन वृद्धि होने लगी है।</p>
<h4><strong>नैतिक और मानसिक विकास को भी बढ़ावा देते हैं बुजुर्ग | Elderly</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">भले ही यह एकल परिवार आज के युवाओं की पहली पसंद हों, लेकिन हाल ही में हुए एक शोध ने यह प्रमाणित कर दिया है कि बच्चों के प्रारंभिक विकास के लिए परिवार के बड़े-बुजुर्गों का सानिध्य अत्यंत उपयोगी सिद्ध होता है। सबसे हैरान करने वाली बात तो यह है कि यह सर्वेक्षण एक ब्रिटिश संस्थान द्वारा कराया गया है। जहां व्यक्तिगत स्वतंत्रता और हितों को अत्याधिक महत्व मिलने के चलते संयुक्त परिवारों का औचित्य लगभग समाप्त हो चुका है। वह भी इस तथ्य को स्वीकारते हैं कि दादा-दादी, बच्चों को केवल लाड़-प्यार ही नहीं करते बल्कि उनके नैतिक और मानसिक विकास को भी बढ़ावा देते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">यद्यपि यह शोध एक विदेशी कंपनी द्वारा कराया गया है लेकिन यह भारतीय परिदृश्य के संदर्भ में और अधिक प्रासंगिक प्रतीत होता है। आमतौर पर यह देखा जा सकता है कि विदेशों में संबंधों में मधुरता और लगाव का प्रभाव समान रूप से माता-पिता और बच्चों पर भी पड़ता है। जहां एक ओर बच्चे अपने अभिभावकों को पर्याप्त महत्व नहीं देते वहीं अभिभावक भी बच्चों के जीवन में हस्तक्षेप करना बंद कर देते हैं जो एकल परिवारों की प्रमुखता का कारण बनता है।</p>
<ul>
<li style="text-align:justify;"><strong>संयुक्त परिवार का महत्व गौण होने के पीछे सबसे बड़ा उत्तरदायी कारक लोगों में आत्मकेंद्रित होती मानसिकता है ।</strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>जो उन्हें केवल अपने परिवार और अपने तक ही सीमित रखती है। </strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>मॉडर्न होते युवा माता-पिता के साथ रहना आउट आफ फैशन समझते हैं।</strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong> अपना अलग घर, अपनी अलग दुनिया बसाना उन्हें बहुत आकर्षक लगता है।</strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong> इसके अलावा बढ़ती महंगाई भी एक और कारण है ।</strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>जिसकी वजह से घर में ज्यादा सदस्य होना बोझिल लगने लगता है।</strong></li>
</ul>
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                                                            <category>घर परिवार</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 22 Jan 2021 16:05:29 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पटियाला : सिविल सर्जन ने वृद्ध आश्रम में बुजुर्गों के साथ मनाया नववर्ष</title>
                                    <description><![CDATA[डॉ. मल्होत्रा ने बुजुर्गों को नववर्ष की मुबारकबाद देते हुए परमात्मा के आगे उनकी सेहतंमद रहने और लम्बी उम्र की कामना की।
उन्होंने कहा कि बुजुर्ग हमारे लिए सम्मानजनक हैं जो कि अपना स्वार्थ त्याग कर हमारी खुशी के लिए समर्पित रहते हैं।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/punjab/jerseys-distributed-to-protect-the-elderly-from-coldjerseys-distributed-to-protect-the-elderly-from-cold/article-12161"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-01/walefare-work.jpg" alt=""></a><br /><h1 style="text-align:center;">बुजुर्गों को सर्दी से बचाने के लिए बांटी जर्सियां | Welfare Work</h1>
<ul>
<li style="text-align:justify;"><strong>अस्पतालों में बुजुर्गों के ईलाज के लिए दाखिल होने संबंधी बैड आरक्षित : सिविल सर्जन</strong></li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>पटियाला(खुशवीर सिंह तूर)।</strong> बुजुर्गों को सेहत प्रति जागरूक करने व समाज में बनता <strong>(Welfare Work)</strong> मान सत्कार देने के लिए सिविल सर्जन डॉ. हरीश मल्होत्रा और उनकी टीम ने गांव रोगंला के वृद्ध आश्रम में बुजुर्गों के साथ मिलकर नववर्ष मनाया और उनको सर्दी से बचाने के लिए बुजुर्गों को गर्म लोईयां और बुजुर्ग महिलाओं को गर्म शालें व जर्सियां बांटकर बुजुर्गों से आर्शीवाद लिया।</p>
<p style="text-align:justify;">इस मौके डॉ. मल्होत्रा ने बुजुर्गों को नववर्ष की मुबारकबाद देते हुए परमात्मा के आगे उनकी सेहतंमद रहने और लम्बी उम्र की कामना की। उन्होंने कहा कि बुजुर्ग हमारे लिए सम्मानजनक हैं जो कि अपना स्वार्थ त्याग कर हमारी खुशी के लिए समर्पित रहते हैं। उन्होंने कहा कि बुजुर्गों की वजह से ही आज हम जीवन का आनंद उठा रहे हैं।</p>
<h2> सरकारी अस्पतालों में बुजुर्गों के लिए ओपीडी में पर्ची बनाने के लिए बनाई अलग कतार</h2>
<p style="text-align:justify;">नोडल अधिकारी डॉ. जतिन्दर कांसल ने बताया कि बुजुर्गों की अच्छी सेहत संभाल के लिए सेहत विभाग की तरफ से बुजुर्गों की देख भाल संबंधी राष्ट्रीय प्रोगराम के अंतर्गत सरकारी अस्पतालों में बुजुर्गों के लिए ओपीडी में पर्ची बनाने के लिए अलग कतार बनाई गई है और अस्पतालों में बुजुर्गों के ईलाज के लिए दाखिल होने संबंधी बैड आरक्षित रखे गए हैं। लखविन्दर की ओर से सेहत विभाग के इस प्रयास की भरपूर प्रशंसा की गई और सेहत विभाग का धन्यवाद भी किया।</p>
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                                                            <category>पंजाब</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 01 Jan 2020 19:20:50 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>एसपी रैंक के अधिकारी वृद्ध आश्रमों में जाकर बुजुर्गों की सुनेंगे मुश्किलें</title>
                                    <description><![CDATA[सराहनीय प्रयास। बुजुर्ग दिवस मौके पटियाला पुलिस की नयी पहल| Veterans Day एसएसपी ने पटियाला जिले में की ईलडरज कनैक्ट प्रॉजैक्ट की शुरूआत पटियाला(खुशवीर सिंह तूर)। पटियाला पुलिस ने बुजुर्ग दिवस (Veterans Day) मौके एक अनौखी पहल की शुरूआत करते ईलडरज कनैक्ट प्रॉजैक्ट की शुरूआत की है। इस प्रॉजैक्ट द्वारा अब पटियाला पुलिस की ओर […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/punjab/sp-rank-officers-will-hear-the-difficulties-of-the-elderly/article-10570"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2019-10/patiala.jpg" alt=""></a><br /><h1 style="text-align:center;">सराहनीय प्रयास। बुजुर्ग दिवस मौके पटियाला पुलिस की नयी पहल| <span class="tlid-translation translation" lang="en" xml:lang="en"><span title="">Veterans Day</span></span></h1>
<ul>
<li style="text-align:justify;"><strong>एसएसपी ने पटियाला जिले में की ईलडरज कनैक्ट प्रॉजैक्ट की शुरूआत</strong></li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>पटियाला(खुशवीर सिंह तूर)।</strong> पटियाला पुलिस ने बुजुर्ग दिवस <strong>(Veterans Day)</strong> मौके एक अनौखी पहल की शुरूआत करते ईलडरज कनैक्ट प्रॉजैक्ट की शुरूआत की है। इस प्रॉजैक्ट द्वारा अब पटियाला पुलिस की ओर से वृद्ध आश्रमों व जिले में अकेले रहते बुजुर्गों को विशेष सुविधा देने के उद्देश्य के साथ एक अलग कन्ट्रोल रूप का मोबाईल नंबर व ई-मेल आईडी जारी की गई है, जिससे अब बुजुर्गों के साथ संबंधी मामलो को पहल के आधार पर हल करने के लिए तरजीह दी सकेगी।</p>
<ul>
<li style="text-align:justify;"><strong>इस संबंधी जानकारी देते जिला पुलिस प्रमुख मनदीप सिंह सिद्धू ने कहा कि पटियाला</strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong> पुलिस द्वारा बुजुर्गों की मुश्किलों के हल के लिए विशेष प्रयास किए जा रहे हैं।</strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong> पटियाला पुलिस की ओर से शुरू की गई इस मुहिम के तहत जिले के सभी </strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>एसपी महीने में एक बार वृद्ध आश्रमों में जाकर बुजुर्गोें की मुश्किलोें को सुनेंगे </strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>घरों में रहते बुजुर्गों के लिए पटियाला पुलिस की ओर से एक अलग कन्ट्रोल </strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>रूम का नंबर व ई-मेल आई डी जारी की गई है </strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>जिस पर बुजुर्ग अपनी मश्किलें बता सकेंगे </strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>इसके नोड़ल अधिकारी डीएसपी हैडक्वाटर पुनित सिंह चाहल पहुंचने वाली </strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>शिकायतों को समय पर निपटाना यकीनी बनाएंगे।</strong></li>
</ul>
<h2><strong>बुजुर्गाें के लिए अलग फोन नंबर व ई-मेल आईडी की जारी | </strong><span class="tlid-translation translation" lang="en" xml:lang="en"><span title="">Veterans Day</span></span></h2>
<p style="text-align:justify;">इंचार्ज सीपीआरसी सुखविन्द्र कौर सहायक नोडल अधिकारी होंगे। उन्होंने बताया कि इस संबंधी पटियाला जिले के हर थाने में एक नोडल अधिकारी नियुक्त किया जा रहा है जो बुजुर्गोँ संबंधी किसी भी किस्म की मुश्किलों के हल के लिए काम करेगा। एसएसपी ने बताया कि इस प्रॉजैक्ट संबंधी एसपी हैडक्वाटर नवनीत सिंह बैंस द्वारा दिए गए ।</p>
<p style="text-align:justify;">सुझाव पर पुलिस के सीनीयर अधिकारियों द्वारा वृद्ध आश्रमों में जाकर बुजुर्गों से मुलाकात की गई व अब पटियाला पुसिल द्वारा इसे एक प्रॉजैक्ट के तौर पर शुरू किया जा रहा है। इस मौके डीएसपी हरवंत कौर, डीएसपी हैडक्वाटर, इंचार्ज सांझ केन्द्र सुखविन्द्र कौर, एसएचओ थाना वुमैन मनप्रीत कौर सहित प्रोबेशनल एसएचओ आदि उपस्थित थे।</p>
<ul>
<li style="text-align:justify;"><strong>आज बुजुर्ग दिवस मौके हर वृद्ध आश्रम में पटियाला पुलिस की टीम जाएगी, </strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>जिसमें दो महिला पुलिस अधिकारी व दो पुरूष पुलिस अधिकारी शामिल होंगे </strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>जो बुजुर्गों की मुश्किलों को सुनकर उनका हल करवाने के लिए प्रयास करेंगे। </strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>उन्होंने इस प्रॉजैक्ट को शूरू करने के उद्देश्य संबंधी बताया कि </strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong> मुश्किलों को हल कर उनको जिंदगी के इस पड़ाव पर ओर मुश्किलें न आने देना है।</strong></li>
</ul>
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                                                            <category>पंजाब</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/punjab/sp-rank-officers-will-hear-the-difficulties-of-the-elderly/article-10570</link>
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                <pubDate>Tue, 01 Oct 2019 19:20:51 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>यमुनानगर स्टेशन पर इंसानियत शर्मसार</title>
                                    <description><![CDATA[डेढ़ घंटे तक तड़पता रहा घायल बुजुर्ग, मौत यमुनानगर(सच कहूँ न्यूज)। यमुनानगर के रेलवे स्टेशन पर उस समय इंसानियत शर्मसार हो गई, जब एक बुजुर्ग ने तड़प-तड़पकर दम तोड़ दिया। दरअसल बुजुर्ग ट्रेन में चढ़ते हुए उसकी चपेट में आ गया और जख्मी हो गया। करीब डेढ़ घंटे तक वह तड़पता रहा। रेलवे अधिकारी से […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/death-of-elderly-on-yamunanagar-station/article-6422"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-10/yar-01.jpg" alt=""></a><br /><h1 style="text-align:justify;">डेढ़ घंटे तक तड़पता रहा घायल बुजुर्ग, मौत</h1>
<p style="text-align:justify;"><strong>यमुनानगर(सच कहूँ न्यूज)।</strong></p>
<p style="text-align:justify;">यमुनानगर के रेलवे स्टेशन पर उस समय इंसानियत शर्मसार हो गई, जब एक बुजुर्ग ने तड़प-तड़पकर दम तोड़ दिया। दरअसल बुजुर्ग ट्रेन में चढ़ते हुए उसकी चपेट में आ गया और जख्मी हो गया। करीब डेढ़ घंटे तक वह तड़पता रहा। रेलवे अधिकारी से लेकर आरपीएफ और जीआरपी कर्मी तमाशा देखते रहे। आखिर में उसकी मौत हो गई। जीआरपी और आरपीएफ की इस पर काफी ठनी। इस दौरान न तो स्टेशन मास्टर ने और न ही जीआरपी और आरपीएफ ने बुजुर्ग की कोई मदद की। लगभग डेढ़ घंटे तक बुजुर्ग तड़पता रहा लेकिन एंबुलेंस नहीं आई। जब तक मौके पर एंबुलेंस पहुंची बुजुर्ग की मौत हो चुकी थी। इस पर गुस्साए लोगों ने स्टेशन मास्टर आॅफिस और आरपीएफ कार्यालय में जमकर हंगामा किया।</p>
<h1 style="text-align:center;">चाय पीने के लिए ट्रेन से नीचे उतरा था बुजुर्ग,<br />
चढ़ने लगा तो हुआ हादसा</h1>
<p style="text-align:justify;">यात्रियों ने बताया कि दोपहर में यमुनानगर रेलवे स्टेशन पर गंगानगर से आई एक गाड़ी से बुजुर्ग चाय पीने के लिए नीचे उतरा था। तभी ट्रेन चल पड़ी और वह भागकर चढ़ने लगा तो पैर फिसल गया। इस वजह से बुजुर्ग गंभीर रुप से घायल हो गया। वहां मौजूद लोगों ने बुजुर्ग को एक बैंच पर लेटा दिया और स्टेशन मास्टर को सूचित कर दिया।</p>
<h1 style="text-align:center;">हंगामे के बाद मृतक को पहुंचाया अस्पताल</h1>
<p style="text-align:justify;">इसके बाद जीआरपी के एसएचओ, आरपीएफ के एएसआई और स्टेशन मास्टर के बीच जमकर बहस हुई। हंगामे के बाद मृतक के शव को एंबुलेंस से अस्पताल पहुंचाया गया। जीआरपी के एसएचओ सुरेश कुमार ने बताया कि सूचना मिलते ही वे मौके पर पहुंच गए थे। वहां मौजूद लोगों को शांत करवाया गया। मृतक के शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भिजवा दिया है।</p>
<p style="text-align:justify;">
</p><p> </p>
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                                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/haryana/death-of-elderly-on-yamunanagar-station/article-6422</link>
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                <pubDate>Wed, 24 Oct 2018 19:26:36 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>गुमशुदा मानसिक रूप से परेशान बजुर्ग व्यक्ति का सहारा बनी साध-संगत</title>
                                    <description><![CDATA[संगरिया। पूज्य हजूर पिता संत डा. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां की पावन प्रेरणाओं का अनुसरण करते हुए ब्लॉक की साध-संगत ने शुक्रवार को एक ओर लगभग 70 वर्षीय गुमशुदा मंदबुद्वि की संभाल कर परिजनो का पता लगाने में जुट गई है। संगरिया ब्लॉक भंगीदास कृष्ण सोनी इन्सां ने बताया कि भगवानपुरा ब्लॉक के […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/rajasthan/missing-disabled-mentally-disturbed-elderly-persons-support-is-consistent/article-6363"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-10/missing-disabled-mentally-disturbed-elderly-persons-support-is-consistent.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>संगरिया।</strong></p>
<p style="text-align:justify;">पूज्य हजूर पिता संत डा. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां की पावन प्रेरणाओं का अनुसरण करते हुए ब्लॉक की साध-संगत ने शुक्रवार को एक ओर लगभग 70 वर्षीय गुमशुदा मंदबुद्वि की संभाल कर परिजनो का पता लगाने में जुट गई है। संगरिया ब्लॉक भंगीदास कृष्ण सोनी इन्सां ने बताया कि भगवानपुरा ब्लॉक के पन्नीवाला गांव के सेवादार भाई सोमा सिंह इन्सां व रमेश कुमार इन्सां को एक मानसिक रूप से परेशान व्यक्ति मिला जो नहर के किनारे बैठा अकेला ही कुछ बोले जा रहा था भूख के कारण उसका बुरा हाल था व उसके नाक पर कुछ चोट के निशान भी थे। प्रेमी भाईयों ने बजुर्ग के पास जाकर उसके बारे में पुछा तो उसने अपना नाम मान सिंह पुत्र सिमरू निवासी सुभरी तहसील रामपुर जिला सहारणपुर उतर प्रदेश जाति कहार बताया इसके अलावा उसने अपने बारे में कोई पुख्ता जानकारी नहीं दी व उसे यह भी कुछ याद नहीं की वो यहां कैसे आ गया।</p>
<p style="text-align:justify;">ऐसी हालत में प्रेमी भाईयों ने बजुर्ग व्यक्ति की सार संभाल की खाना खिलाया व उसे संगरिया के नाम चर्चा घर में लेकर आये और उसके परिजनो की तलाश करने में साध संगत का सहयोग मांगा। इस पर संगरिया की साध संगत ने उक्त भाई के ईलाज के बाद नामचर्चा घर में रहने व खाने पीने की व्यवस्था करने के बाद उसके परिजनो की तलाश के लिए लिए सोशल मीडिया के सहारे गुमशुदा व्यक्ति की फोटो वायरल की व इस संबध में पुलिस थाना व मीडिया से भी सहयोग की अपील की है। मदबुद्वि के घर का पता लगाने के लिए उत्तर प्रदेश की सेवादार कमेटियों से भी सम्पर्क किया जा रहा है। इस कार्य में मुख्य रूप से भंगीदास कृष्ण सोनी इन्सां, हरपाल सोनी इन्सां, सुभाष गोदारा इन्सां ने सहयोग किया।</p>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 20 Oct 2018 17:54:48 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>भारत में वृद्धजनों की दुर्दशा चिंतनीय</title>
                                    <description><![CDATA[नीचे गिरे सूखे पत्तों पर जरा अदब से पैर रखिए, कभी कड़ी धूप में इन्हीं से छाव मांगी थी तुमनें। किसी लेखक की यह पंक्तियां कृतज्ञता के भावों को श्रेष्ठ रूप में अभिव्यक्त करने के साथ वर्तमान पीढ़ी के अपने कर्तव्यों से विमुख होने पर सटीक ईशारा करती है। हाल ही में हेल्पेज इंडिया ने […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/the-plight-of-elderly-in-india-is-worrisome/article-4196"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-06/earldy.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">नीचे गिरे सूखे पत्तों पर जरा अदब से पैर रखिए, कभी कड़ी धूप में इन्हीं से छाव मांगी थी तुमनें। किसी लेखक की यह पंक्तियां कृतज्ञता के भावों को श्रेष्ठ रूप में अभिव्यक्त करने के साथ वर्तमान पीढ़ी के अपने कर्तव्यों से विमुख होने पर सटीक ईशारा करती है। हाल ही में हेल्पेज इंडिया ने बुजुर्गो के प्रति व्यवहार पर देश के चुनिंदा शहरों में सर्वेक्षण किया।</p>
<p style="text-align:justify;">नतीजे कोई खास अच्छे सामने निकल कर नहीं आये। सर्वेक्षण के परिणाम में मंगलुरु पहले पायदान पर रहा, जहाँ 47 फीसद वृद्धजनों के साथ बुरा बर्ताव होता है। इस क्रम में दूसरे स्थान अहमदाबाद को मिला है जहाँ 46 फीसद वृद्धजन अपनों के द्वारा ही सताये हुए है। मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल 39 फीसद के साथ तीसरे तथा अहमदाबाद को 35 फीसद के साथ इस सूची में चौथा स्थान मिला है।</p>
<p style="text-align:justify;">सबसे आश्चर्य जनक आँकड़े तो यह है कि समाज की मान्यता के अनुसार जहा परिवारों में बहुएं अपने सास-ससुर से खराब बर्ताव के लिए प्रथम दृष्टया संदेह के घेरे में आती है लेकिन यहां ऐसा नहीं है। हेल्पेज इण्डिया के अनुसार बुजुर्गो को सताने में 52 फीसदी बेटों का योगदान है तो बहुओं का प्रतिशत 34 फीसद है। बेटों की चाह में इतने आगे निकल आये हम कि आज यह आँकड़े स्थति को बयां कर रहे है! सताये हुए 82 प्रतिशत बुजुर्ग शिकायत ही नहीं करते और 34 प्रतिशत तो ऐसे है जिनको यह भी ज्ञात नहीं की इस समस्या से कैसे निपटा जाए!</p>
<p style="text-align:justify;">गांवो को देहात और वहां के लोगो को असभ्य करार दिया जाता है लेकिन वहां के वृद्धजन सुखी है उनके कम पढ़े लिखे बच्चे उनके कहने में है। आबो हवा तो शहरों की खराब हुई है,आधुनिक होने के चलते इतने विकसित हो गए हम कि जन्म देने वाले ही बोझ लगने लगे। सबसे खराब स्थति शिक्षित संतानों की है। विजयपत सिंघानिया देश का जाना माना नाम है लेकिन बेटे ने उन्हें पाई पाई का मोहताज बना कर रख दिया।</p>
<p style="text-align:justify;">मुंबई के एक रिहायशी इलाके में फ्लैट में माँ को मरे साल हो जाते हैं और बेटा अमेरिका से जब लौटता है तो घर में माँ का शव ही पूरी तरह नष्ट हो चुका होता है। ऐसी घटनायें अचम्भित करने के साथ उस शिक्षा पर प्रश्न खड़ा करती है जिसके दम पर हम खुद को सभ्य कहते है! जो संताने अपने दूध का कर्ज न उतार सके वे कैसे सभ्य हो सकती हैं?</p>
<p style="text-align:justify;">जो जितना ज्यादा शिक्षित होता है वह उतनी क्षमता और ऊर्जा का उपयोग बुरे कामो में करता है। देश में एक वाक्या ऐसा ही हुआ, बहु अपने ससुर को खाने में स्लो पॉइजन दे रही थी बेटे ने शक होने पर जाँच की तब यह बात सामने निकल कर आई। प्रताड़ना के तरीके भी आधुनिक हो गए है। आज की मासूम पीढ़ी जो अपनी नजरों के सामने अपने माता-पिता को यह सब करते हुए देखेगी वह वैसा ही सब भविष्य में उनके साथ दोहराएगी। बच्चे परिवेश में ही सीखते है,आस-पास की घटनाओं का प्रभाव उनके मस्तिष्क पर तेजी से पड़ता है।</p>
<p style="text-align:justify;">यूनाइटेड नेशन पॉपुलेशन फण्ड के अनुसार 90 फीसद बुजुर्गो को सम्मानजनक जिंदगी जीने के लिए काम करना पड़ता है तो वही साढ़े पांच करोड़ बुजुर्ग ऐसे हैं जो रोज रात को भूखे पेट सोने को मजबूर है। अपना खून पसीना एक कर औलाद को पढ़ा लिखा वे लायक बनाते है लेकिन उनके बुढ़ापे में उनके लायक बच्चे ही नालायक बनकर उन्हें भूखा रहने पर विवश कर देते। देश के हर आठ में से एक बुजुर्ग को यह लगता है कि उसके रहने या नहीं रहने से किसी को कोई फर्क नहीं पड़ता।</p>
<p style="text-align:justify;">जून 2014 के केअर एंड क्राइसिस इन ओल्ड ऐज होम के सर्वे के आँकड़ों पर भी गौर करें तो 62 प्रतिशत बुजुर्ग सम्मानजनक जीवन जीने के लिए वृद्धाश्रम में रहने को मजबूर हैं। 63 प्रतिशत बुजुर्गो को घर में अकेलापन लगता है इसलिए वे आश्रम की राह चुनते है। कुल वृद्धजनों की आबादी का आधा लगभग 5 करोड़ वृद्ध गरीबी रेखा के नीचे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">यदि हर समस्या के समाधान का ठीकरा सरकार के ऊपर फोड़ेंगे तो इससे कुछ ठीक नहीं होगा। यह समस्या सरकार द्वारा नहीं बल्कि समाज द्वारा हल हो यह आवश्यक है। सरकार ने तो वर्ष 2007 में मेंटेनेंस एंड वेलफेयर आॅफ पेरेंट्स एंड सीनियर सिटीजन एक्ट बना दिया था लेकिन परिणाम आज देखिये क्या रहा?</p>
<p style="text-align:justify;">सरकार की जीडीपी का मात्र 0.03 प्रतिशत हिस्सा ही सरकार बुजुर्ग पेंशन के नाम पर खर्च करती है। एक संगठन के अनुमान के मुताबिक देश में 728 ओल्ड ऐज होम है इनमें से 547 की उपलब्ध जानकारी के अनुसार 325 होम नि:शुल्क है जबकि 95 ऐसे है जहाँ रहने के पैसे देना होते है वही 116 दोनों प्रकार के है। सर्वाधिक ओल्ड ऐज होम केरल में है जिनकी संख्या 124 के करीब है।</p>
<p style="text-align:justify;">देश में आज 97000 बेड ही ओल्ड ऐज होम में उपलब्ध है अनुमान कहता है कि अगले 10 सालों में 9 लाख बिस्तरों की आवश्यकता पड़ने वाली है। स्थति कितनी भयानक होगी इससे अनुमान लगाया जा सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">1 मई 2016 से शंघाई में तो कानून लागू कर दिया गया है कि बच्चे यदि अपने माता पिता से नहीं मिलते तो माता पिता को बच्चों पर केस करने का अधिकार होगा तथा बच्चों के क्रेडिट स्कोर कार्ड में यह जोड़ा जाएगा जिससे उन्हें मिलने वाले लोन, वित्तीय सुविधाएं,योजनाओं के लाभ से वंचित किया जा सके।</p>
<p style="text-align:justify;">हमारे यहां के बुजुर्ग चाहे अपमान में रह लेंगे लेकिन अपने घर की बात चारदीवारी में रखने के चलते अपनी समस्या किसी से नहीं कहेंगे इसलिए हमारे यहां ऐसी व्यवस्था की कल्पना करना सही नहीं होगा। किन्तु सरकार के लिए आवश्यक है कि वर्द्धजनों को कष्ट देने की सही शिकायतों पर कड़ी कार्यवाही करते हुए सभी सरकारी योजनाओं के लाभ तथा सरकारी नौकरियो व सेवाओं से वंचित करने संबधी नियमो निर्माण करें।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>-सौरभ जैन</strong></p>
<p> </p>
<p> </p>
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                <pubDate>Sat, 16 Jun 2018 08:48:10 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>वृद्धों को मिले जीने की नई दिशा</title>
                                    <description><![CDATA[हमारे देश में अन्तर्राष्ट्रीय दिवसों का प्रचलन बढ़ता जा रहा है। अगस्त माह में अनेक अन्तर्राष्ट्रीय दिवस आयोजित होते हैं जैसे युवा दिवस, मित्रता दिवस, हिरोशिमा दिवस, स्तनपान दिवस, आदिवासी दिवस, मच्छर दिवस, फोटोग्राफी दिवस, मानवीय दिवस आदि-आदि उनमें एक महत्वपूर्ण दिवस है विश्व वरिष्ठ नागरिक दिवस जो 8 अगस्त को पूरी दुनिया में वृद्धों […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><p style="text-align:justify;">हमारे देश में अन्तर्राष्ट्रीय दिवसों का प्रचलन बढ़ता जा रहा है। अगस्त माह में अनेक अन्तर्राष्ट्रीय दिवस आयोजित होते हैं जैसे युवा दिवस, मित्रता दिवस, हिरोशिमा दिवस, स्तनपान दिवस, आदिवासी दिवस, मच्छर दिवस, फोटोग्राफी दिवस, मानवीय दिवस आदि-आदि उनमें एक महत्वपूर्ण दिवस है विश्व वरिष्ठ नागरिक दिवस जो 8 अगस्त को पूरी दुनिया में वृद्धों को समर्पित किया गया है। यह दिवस वरिष्ठ नागरिकों के उन्नत, स्वस्थ एवं खुशहाल जीवन के लिये आयोजित होता है। इस दिवस को आयोजित करने की आवश्यकता इसलिये पड़ी कि आज के वरिष्ठ नागरिक जो दुनियाभर में उपेक्षा के शिकार हो रहे हैं, उनको उचित सम्मान एवं उन्नत जीवन जीने की दिशाएं मिलें।</p>
<p style="text-align:justify;">वर्तमान दौर की एक बहुत बड़ी विडम्बना है कि इस समय की बुजुर्ग पीढ़ी घोर उपेक्षा और अवमानना की शिकार है। यह पीढ़ी उपेक्षा, भावनात्मक रिक्तता और उदासी को ओढ़े हुए है। इस पीढ़ी के चेहरे पर पड़ी झुर्रियां, कमजोर आंखें, थका तन और उदास मन जिन त्रासद स्थितियों को बयां कर रही है उसके लिए जिम्मेदार है हमारी आधुनिक सोच और स्वार्थपूर्ण जीवन शैली। समूची दुनिया में वरिष्ठ नागरिकों की दयनीय स्थितियां एक चुनौती बन कर खड़ी है, एक अन्तर्राष्ट्रीय समस्या बनी हुई है।</p>
<p style="text-align:justify;">भारतीय परिप्रेक्ष्य में वरिष्ठ नागरिकों की दशा अधिक चिन्तनीय है। दादा-दादी, नाना-नानी की यह पीढ़ी एक जमाने में भारतीय परंपरा और परिवेश में अतिरिक्त सम्मान की अधिकारी हुआ करती थी और उसकी छत्रछाया में संपूर्ण पारिवारिक परिवेश निश्चिंत और भरापूरा महसूस करता था। न केवल परिवार में बल्कि समाज में भी इस पीढ़ी का रुतबा था, शान थी। आखिर यह शान क्यों लुप्त होती जा रही है? क्यों वृद्ध पीढ़ी उपेक्षित होती जा रही है? क्यों वृद्धों को निरर्थक और अनुपयोगी समझा जा रहा है? वृद्धों की उपेक्षा से परिवार तो कमजोर हो ही रहे हैं लेकिन सबसे ज्यादा नई पीढ़ी प्रभावित हो रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">क्या हम वृद्ध पीढ़ी को परिवार की मूलधारा में नहीं ला सकते? ऐसे कौन से कारण और हालात हैं जिनके चलते वृद्धजन इतने उपेक्षित होते जा रहे हैं? यह इतनी बड़ी समस्या कि किसी एक अभियान से इसे रास्ता नहीं मिल सकता। इस समस्या का समाधान पाने के लिए जन-जन की चेतना को जागना होगा। इस दृष्टि से विश्व वरिष्ठ नागरिक दिवस की आयोजना की एक महत्वपूर्ण हो सकती है।</p>
<p style="text-align:justify;">जरूरी है कि हम बुजुर्ग पीढ़ी को उसकी उम्र के अंतिम पड़ाव में मानसिक स्वस्थता का माहौल दें, आधि, व्याधि और उपाधियों को भोग चुकने के बाद वे अपना अंतिम समय समाधि के साथ गुजार सकें ऐसी स्थितियों को निर्मित करें। नई पीढ़ी और बुजुर्ग पीढ़ी की संयुक्त जीवनशैली से अनेक तरह के फायदे हैं जिनसे न केवल समाज और राष्ट्र मजबूत होगा बल्कि परिवार भी अपूर्व शांति और उल्लास का अनुभव करेगा। सबसे अधिक नई पीढ़ी अपने बुजुर्ग दादा-दादी या नाना-नानी की छत्रछाया में अपने आपको शक्तिशाली एवं समृद्ध महसूस करेगी। एक अवस्था के पश्चात निश्चित ही व्यक्ति में परिपक्वता और ठोसता आती है। बड़े लोगों के अनुभव से लाभ उठाकर युवा पीढ़ी भी संस्कार समृद्ध बन सकती है और वृद्धजनों के अनुभवों का वैभव और ज्ञान की अपूर्व संपदा उन्हें दुनिया की रफ्तार के साथ कदमताल करने में सहायक हो सकती है।</p>
<p style="text-align:justify;">हावर्ड और वर्लिन के वैज्ञानिकों/मनोचिकित्सकों ने इस दिशा में गहन खोजें की हंै। जर्मन वैज्ञानिकों ने युवाओं और बुजुर्गों के समक्ष कुछ जटिल समस्याएं तथा कुछ सुविधाजनक परिस्थितियां प्रस्तुत कीं और उन्हें हल करने को कहा। देखा गया कि जीवन संबंधी समस्याओं को सुलझाने में युवाओं की अपेक्षा बुजुर्ग लोग अधिक सफल या कुशल साबित हुए।</p>
<p style="text-align:justify;">अन्य अध्ययनों/विश्लेषणों से भी यह तथ्य सामने आया कि बुजुर्गों के सामने यदि कोई लक्ष्य रख दिया जाए तो वे अपने धीमे सोचने की शक्ति की क्षतिपूर्ति अपने पैने नजरिए एवं बेहतर योजनाओं के द्वारा कर लेते हैं। यह भी एक तथ्य है कि सम्यक दृष्टिकोण, पारदर्शी सोच, परिणामों का आंकलन किसी भी चीज के अच्छे-बुरे पहलुओं को तोलने/परखने की क्षमता-ये गुण वृद्धों में अपेक्षाकृत अच्छी मात्रा में उपलब्ध होते हैं। अत: आॅफिसों, संस्थाओं या घरों में बुजुर्गों को उपेक्षित करने का जो प्रचलन बढ़ रहा है, उस पर गंभीरता से पुनर्विचार की जरूरत है।</p>
<p style="text-align:justify;"><em>यह पीढ़ी उपेक्षा, भावनात्मक रिक्तता और उदासी को ओढ़े हुए है। इस पीढ़ी के चेहरे पर पड़ी झुर्रियां, कमजोर आंखें, थका तन और उदास मन जिन त्रासद स्थितियों को बयां कर रही है उसके लिए जिम्मेदार है हमारी आधुनिक सोच और स्वार्थपूर्ण जीवनशैली।</em></p>
<p style="text-align:justify;">
<em><strong>-ललित गर्ग</strong></em></p>
<p style="text-align:justify;">
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                <link>https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/new-direction-of-living-for-elderly/article-2973</link>
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                <pubDate>Tue, 08 Aug 2017 03:45:10 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अमृतसर में स्वाइन फ्लू वायरस से बुजुर्ग की मौत</title>
                                    <description><![CDATA[अमृतसर (सच कहूँ न्यूज)। नवंबर व दिसंबर की ठंड में सक्रिय होने वाला स्वाइन फ्लू वायरस इस बार जून महीने में ही आक्रामक हो उठा है। स्वाइन फ्लू ने शनिवार को गुरु नगरी में 58 वर्षीय बुजुर्ग की जान ले ली, जबकि दो महिलाओं को अपनी चपेट में लिया है। मृतक का नाम राकेश कुमार […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/punjab/death-of-elderly-from-swine-flu-virus-in-amritsar/article-1585"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-06/flu.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>अमृतसर (सच कहूँ न्यूज)।</strong> नवंबर व दिसंबर की ठंड में सक्रिय होने वाला स्वाइन फ्लू वायरस इस बार जून महीने में ही आक्रामक हो उठा है। स्वाइन फ्लू ने शनिवार को गुरु नगरी में 58 वर्षीय बुजुर्ग की जान ले ली, जबकि दो महिलाओं को अपनी चपेट में लिया है। मृतक का नाम राकेश कुमार है और वह अमृतसर के आकाश एवेन्यू क्षेत्र का रहने वाला था। हालांकि स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि मरीज की मौत इंफ्लुएंजा—ए वायरस के चलते हुई है। इसमें एच1एन1 वायरस नहीं पाया गया है। हालांकि इंफ्लुएंजा-ए वायरस स्वाइन फ्लू का ही दूसरा नाम है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">बुखार के बाद सांस लेने में तकलीफ</h3>
<p style="text-align:justify;">दरअसल, राकेश कुमार पिछले पंद्रह दिन से संदिग्ध बुखार से पीड़ित था। परिजनों ने उन्हें श्री गुरु रामदास अस्पताल वल्ला में दाखिल करवाया था। बीते रविवार को उन्हें रतन सिंह चौक स्थित मेडिकेड अस्पताल में लाया गया। अस्पताल के संचालक डॉ. रवनीत ग्रोवर के अनुसार राकेश कुमार को तेज बुखार के साथ-साथ सांस लेने में तकलीफ थी। स्वाइन फ्लू की आशंका के मद्देनजर उसका सैंपल लेकर जांच की गई। जांच रिपोर्ट में स्वाइन फ्लू होने की पुष्टि हुई।</p>
<h3 style="text-align:justify;">परिजनों को सौंपा शव</h3>
<p style="text-align:justify;">मामले की जानकारी स्वास्थ्य विभाग को दी गई। स्वास्थ्य विभाग ने भी अपने स्तर पर मरीज के सैंपल लिए और सरकारी मेडिकल कॉलेज स्थित स्वाइन फ्लू टेस्टिंग लैब में भेजा। इसी बीच शनिवार की सुबह राकेश कुमार ने दम तोड़ दिया। राकेश का शव प्रीकॉशन किट में रखवाकर परिजनों के हवाले कर दिया गया है। राकेश को आईसीयू वार्ड में बने आइसोलेशन कक्ष में रखा गया था। उसकी मौत के बाद तीमारदारी कर रहे स्टाफ को एहतियात के तौर पर टेमीफ्लू दवा खिलाई गई है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">चिकित्सकों का मानना</h3>
<p style="text-align:justify;">डॉ. ग्रोवर के अनुसार सामान्यत: स्वाइन फ्लू का वायरस गर्मी में सक्रिय नहीं होता। उनके करियर का यह पहला मामला है जब गर्मी के मौसम में स्वाइन फ्लू से किसी मरीज की मौत हुई है। राकेश कुमार ने एक प्रतिष्ठित निजी लेबोरेटरी से भी इसकी जांच करवाई थी। यहां भी स्वाइन फ्लू होने की पुष्टि हुई थी। इसके अतिरिक्त हरदीप कौर व चरणजीत कौर नामक महिलाओं भी स्वाइन फ्लू से ग्रसित हैं और उनके ही अस्पताल में उपचाराधीन हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">स्वास्थ्य विभाग ने किया इंकार</h3>
<p style="text-align:justify;">दूसरी तरफ स्वास्थ्य विभाग इससे इंकार कर रहा है कि राकेश कुमार की मौत स्वाइन फ्लू की वजह से हुई है। डिस्ट्रिक्ट एपीडिमोलॉजिस्ट डॉ. मदन मोहन का कहना है कि मरीज की मौत इंफ्लुएंजा-ए वायरस के चलते हुई है। यह सामान्य बुखार था। सरकारी लैब में सैंपल की रिपोर्ट में इस बात की पुष्टि हुई है। हो सकता है कि मरीज को ब्लड प्रेशर व शुगर हो, जो उसकी मौत का कारण बना हो।</p>
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                                                            <category>पंजाब</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 24 Jun 2017 09:22:03 +0530</pubDate>
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                <title>बच्चों व बुजुर्गों को पासपोर्ट शुल्क में मिलेगी 10 फीसदी की छूट</title>
                                    <description><![CDATA[हिंदी और अंग्रेजी, दोनों भाषाओं में बनेंगे पासपोर्ट नई दिल्ली। विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने घोषणा की है कि अब से पासपोर्ट केवल अंग्रेजी में नहीं, बल्कि हिंदी भाषा में भी होंगे। उन्होंने घोषणा की कि जिन आवेदकों की आयु आठ वर्ष से कम या 60 वर्ष से अधिक है उन्हें पासपोर्ट शुल्क में 10 […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/children-and-elderly-get-10-discount-on-passport-fee/article-1535"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-06/susma.jpg" alt=""></a><br /><h1 style="text-align:center;">हिंदी और अंग्रेजी, दोनों भाषाओं में बनेंगे पासपोर्ट</h1>
<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली।</strong> विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने घोषणा की है कि अब से पासपोर्ट केवल अंग्रेजी में नहीं, बल्कि हिंदी भाषा में भी होंगे। उन्होंने घोषणा की कि जिन आवेदकों की आयु आठ वर्ष से कम या 60 वर्ष से अधिक है उन्हें पासपोर्ट शुल्क में 10 फीसदी की छूट दी जाएगी। वर्तमान में पासपोर्ट पर निजी जानकारी केवल अंग्रेजी भाषा में ही छापी जाती है।</p>
<p style="text-align:justify;">विदेश और संचार मंत्रालय के साझा सहयोग से पासपोर्ट अधिनियम 1967 के 50 साल पूरे होने के मौके पर एक कार्यक्रम में केंद्रीय विदेश मंत्री सुषमा स्वराज सरकार की ओर से पासपोर्ट नियमों में सुधार, पासपोर्ट सेवा में सुधार और पासपोर्ट सेवा आपके द्वार के सिद्धांतों पर काम करते हुए निर्धारित लक्ष्य को हासिल करने की बात कही।</p>
<p style="text-align:justify;">स्वराज ने कहा कि डाक विभाग और पासपोर्ट विभाग मिलकर 235 केंद्र खोलने जा रहा है। मंत्रालय 50 किमी. के दायरे में पासपोर्ट सेवा उपलब्ध कराने की कोशिश कर रहा है।</p>
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                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 23 Jun 2017 06:25:56 +0530</pubDate>
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