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                <title>Waqf Bill - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>Khizrabad: वक्फ (संशोधन) विधेयक-2025 मुसलमानों के हक में है : पूर्व कैबिनेट मंत्री कंवरपाल गुर्जर</title>
                                    <description><![CDATA[खिजराबाद (सच कहूँ/राजेंद्र कुमार)। Khizrabad News: ’वक्फ सुधार जन जागरण अभियान’ को लेकर पूर्व कैबिनेट मंत्री कंवरपाल गुर्जर ने कहा कि वक्फ कानून से कांग्रेस व अन्य विपक्षी दलों में बेचैनी बढ़ी हुई है, इसलिए ये लोग मुसलमानों को भ्रमित कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि वक्फ (संशोधन) विधेयक-2025 से भ्रष्टाचार पर रोक लगेगी और […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/waqf-amendment-bill-2025-is-in-favor-of-muslims-kanwar-pal-gujjar/article-69791"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2025-04/khizrabad-news-3.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>खिजराबाद (सच कहूँ/राजेंद्र कुमार)।</strong> Khizrabad News: ’वक्फ सुधार जन जागरण अभियान’ को लेकर पूर्व कैबिनेट मंत्री कंवरपाल गुर्जर ने कहा कि वक्फ कानून से कांग्रेस व अन्य विपक्षी दलों में बेचैनी बढ़ी हुई है, इसलिए ये लोग मुसलमानों को भ्रमित कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि वक्फ (संशोधन) विधेयक-2025 से भ्रष्टाचार पर रोक लगेगी और गरीब का हक सिर्फ गरीब को ही मिलेगा। यह कानून मुसलमानों के खिलाफ नहीं है।पूर्व कैबिनेट मंत्री कंवरपाल गुर्जर ने बताया कि “वक्फ संशोधन विधेयक बहुत सोच-समझकर लाया गया है। यह किसी के खिलाफ नहीं है। बड़ी संख्या में मुस्लिम समुदाय के लोग इससे संतुष्ट हैं। Yamunanagar News</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने नागरिकों के लिए संपत्ति के अधिकारों की रक्षा करने के महत्वपूर्ण कदम उठाया है। कांग्रेस की सरकारों ने वक्फ प्रणाली के जरिए संवैधानिक अधिकारों को कमजोर करने का काम किया। पूर्व कैबिनेट मंत्री कंवरपाल गुर्जर ने कहा कि यह कानून समानता लाएगा और संपत्ति के अधिकारों की रक्षा करेगा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा सरकार हर नागरिक को न्याय, समानता और अधिकार देने के लिए प्रतिबद्ध होकर काम कर रही है। पूर्व कैबिनेट मंत्री कंवरपाल गुर्जर ने कहा कि विपक्ष के नेता झूठा प्रचार-प्रसार करके मुसलमानों को भ्रमित करने का काम कर रहे हैं। Yamunanagar News</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने मुस्लिम समाज के लोगों से आग्रह करते हुए कहा कि वे विपक्ष के नेताओं द्वारा फैलाए जा रहे झूठ और छल को समझे और उनके बहकावे में ना आएं। भाजपा जिलाध्यक्ष राजेश सपरा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में वक्फ (संशोधन) विधेयक-2025 से वक्फ संपत्तियों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित होगी और भ्रष्टाचार पर प्रभावी नियंत्रण लगेगा। उन्होंने कहा कि वक्फ का नया कानून पारदर्शिता पूर्ण है। कांग्रेस पार्टी को घेरते हुए उन्होंने कहा कि कांग्रेस मुसलमानों को गुमराह करती आई है। कांग्रेस ने कभी भी मुसलमानों को सशक्त और समृद्ध करने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए।</p>
<p style="text-align:justify;">कांग्रेस पार्टी ने वक्फ में लूट का रास्ता प्रशस्त किया।भाजपा जिलाध्यक्ष राजेश सपरा ने कहा कि “वक्फ संशोधन कानून को मोदी सरकार सोच समझकर लाई है और यह कानून किसी के खिलाफ नहीं है। वक्फ की आड़ में जो लोग मनमानी करते थे अब उनकी मनमानी पर लगाम लगेगी और गरीब लोगों तक वक्फ का लाभ पहुंचेगा। भाजपा जिला यमुनानगर मीडिया प्रभारी कपिल मनीष गर्ग ने कहा कि मोदी सरकार ने सही समय पर यह निर्णय लिया है। देश के गरीब मुसलमानों के लिए यह कानून फायदेमंद साबित होगा। Yamunanagar News</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="Income Tax Notice: भिवानी के टेंपो चालक को 31 करोड़ रुपये का नोटिस" href="http://10.0.0.122:1245/bhiwani-tempo-driver-gets-notice-of-rs-thirty-one-crore/">Income Tax Notice: भिवानी के टेंपो चालक को 31 करोड़ रुपये का नोटिस</a></p>
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                                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 17 Apr 2025 15:40:07 +0530</pubDate>
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                <title>Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट वक्फ संशोधन अधिनियम के खिलाफ याचिकाओं पर समय रहते विचार करने को सहमत</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)। New Delhi: उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को कहा कि वह ‘वक्फ (संशोधन) अधिनियम-2025’ की वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर समय रहते विचार करेगा। मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना तथा न्यायाधीश संजय कुमार और के वी विश्वनाथन की पीठ ने कुछ याचिकाकतार्ओं की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/supreme-court-agrees-to-consider-petitions-against-waqf-amendment-act-in-time/article-69410"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2025-04/new-delhi-5.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)। </strong>New Delhi: उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को कहा कि वह ‘वक्फ (संशोधन) अधिनियम-2025’ की वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर समय रहते विचार करेगा। मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना तथा न्यायाधीश संजय कुमार और के वी विश्वनाथन की पीठ ने कुछ याचिकाकतार्ओं की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल और ए एम सिंघवी के शीघ्र सुनवाई के लिए ‘तत्काल उल्लेख’ किए जाने के बाद समय रहते याचिका पर विचार करने पर सहमति व्यक्त की। संसद के दोनों सदनों में संबंधित विधेयक पास होने के बाद पांच अप्रैल को नये कानून को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु की मंजूरी मिल गई। New Delhi</p>
<p style="text-align:justify;">वक्फ (संशोधन) विधेयक (संसद के दोनों सदनों में पारित हो गयी था, लेकिन तब राष्ट्रपति की मंजूरी नहीं मिली थी) की वैधता को चुनौती देने वाली कई याचिकाएं पहले ही दायर की जा चुकी हैं। याचिकाएं दायर करने वालों में कांग्रेस सांसद मोहम्मद जावेद, आॅल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन प्रमुख एवं सांसद असदुद्दीन ओवैसी और दिल्ली में आम आदमी पार्टी के विधायक अमानतुल्लाह खान शामिल हैं। एसोसिएशन फॉर प्रोटेक्शन आॅफ सिविल राइट्स, जमीयत उलमा-ए-हिंद, समस्त केरल जमीयतुल उलमा जैसे संगठनों ने भी शीर्ष अदालत में रिट याचिकाएं दायर की हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">याचिकाकर्ताओं ने दावा किया कि यह अधिनियम मुसलमानों की धार्मिक स्वतंत्रता को छीनने की एक खतरनाक साजिश है। उन्होंने तर्क दिया कि यह संशोधन वक्फ के धार्मिक स्वरूप को भी विकृत करेगा और वक्फ तथा वक्फ बोर्डों के प्रशासन में लोकतांत्रिक प्रक्रिया को भी अपरिवर्तनीय रूप से नुकसान पहुंचाएगा। उनकी याचिकाओं में शीर्ष अदालत से अधिनियम को असंवैधानिक और संविधान के अनुच्छेद 14, 15, 21, 25, 26 और 300-ए का उल्लंघन करने वाला घोषित करने का निर्देश देने की भी मांग की गई। याचिकाओं में प्रतिवादी केंद्र सरकार और कानून एवं न्याय मंत्रालय को इसके प्रावधानों को लागू करने या लागू करने से रोकने का आदेश देने की गुहार लगाई गई है। नये वक्फ कानून ह्यएकीकृत वक्फ प्रबंधन, सशक्तीकरण, दक्षता और विकास अधिनियम, 1995ह्ण ने ह्यवक्फ अधिनियम, 1995ह्ण की जगह ली है। New Delhi</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="Shamshan Ghat : एक श्मशान ऐसा भी! जहां लोग सुबह-शाम परिवार के साथ आते हैं घूमने" href="http://10.0.0.122:1245/people-come-to-the-crematorium-with-their-families-in-the-morning-and-evening-to-visit/">Shamshan Ghat : एक श्मशान ऐसा भी! जहां लोग सुबह-शाम परिवार के साथ आते हैं घूमने</a></p>
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                                                            <category>देश</category>
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                <pubDate>Mon, 07 Apr 2025 17:40:16 +0530</pubDate>
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                <title>‘गरीब मुसलमानों की तकदीर बदलेगा नया वक्फ कानून’</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)। New Delhi: सरकार ने लोकसभा में विपक्ष के विरोध के बीच मुस्लिम धार्मिक संपत्तियों के प्रबंधन करने वाले वक्फ संशोधन विधेयक 2025 को पेश किया और कहा कि यह विधेयक किसी भी मस्जिद, दरगाह या अन्य किसी धार्मिक स्थान को हड़पने के लिए नहीं है बल्कि शुद्ध रूप से दान […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/new-waqf-law-will-change-the-fate-of-poor-muslims/article-69178"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2025-04/new-delhi-2-1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)।</strong> New Delhi: सरकार ने लोकसभा में विपक्ष के विरोध के बीच मुस्लिम धार्मिक संपत्तियों के प्रबंधन करने वाले वक्फ संशोधन विधेयक 2025 को पेश किया और कहा कि यह विधेयक किसी भी मस्जिद, दरगाह या अन्य किसी धार्मिक स्थान को हड़पने के लिए नहीं है बल्कि शुद्ध रूप से दान की गई संपत्ति के बेहतर प्रबंधन के लिए है ताकि मुस्लिम समाज के गरीबों एवं महिलाओं की तकदीर बदली जा सके। New Delhi</p>
<p style="text-align:justify;">सदन में प्रश्नकाल के बाद आवश्यक दस्तावेज पटल पर रखवाने के उपरान्त अध्यक्ष ओम बिरला ने अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रिजीजू का नाम वक्फ संशोधन विधेयक 2025 तथा मुसलमान वक्फ निरसन विधेयक 2024 को सदन के विचार एवं पारित करने के लिए रखने को पुकारा। सदन में उपनेता एवं रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, गृह मंत्री अमित शाह, सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी, कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान भी उपस्थित थे। विपक्ष की ओर से आरएसपी के नेता एन के प्रेमचंद्रन ने विधेयक के मसौदे पर आपत्ति जताते हुए कहा कि किसी भी संयुक्त संसदीय समिति को विधेयक के पाठ को बदलने का हक नहीं है।</p>
<p style="text-align:justify;">अलबत्ता सरकार और मंत्री यह काम कर सकते हैं। इस पर गृह मंत्री श्री शाह ने स्पष्ट किया कि संयुक्त संसदीय समिति ने जिस मसौदे को स्वीकृति दी है, उसे केन्द्रीय मंत्रिमंडल की स्वीकृति दिलाने के बाद ही संसद में लाया गया है। इसलिए किसी नियम का कोई उल्लंघन नहीं हुआ है। श्री शाह ने कहा कि जेपीसी ने विधेयक में कई संशोधन किये हैं। कांग्रेस के जमाने में कमेटियां ठप्पा होतीं थीं। हमारे समय में कमेटियां विचार करके जरूरी परिवर्तन करतीं हैं। इसके बाद अध्यक्ष श्री बिरला ने विपक्ष की आपत्तियों को खारिज करके विधेयक को पेश करने की अनुमति प्रदान की। New Delhi</p>
<p style="text-align:justify;">श्री रिजीजू ने विधेयक को सदन के समक्ष विचार के लिए प्रस्तुत करते हुए कहा कि इस विधेयक पर संयुक्त संसदीय समिति ने पूरे देश में तमाम वर्ग के लोगों के साथ व्यापक चर्चा के बाद अपनी रिपोर्ट दी थी और उसके आधार पर यह विधेयक पारित कराया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जेपीसी ने इस विधेयक के बारे में अभूतपूर्व परिश्रम किया है। करीब 97 लाख, 27 हजार 772 सुझावों, अपीलों, ज्ञापनों एवं सिफारिशों का निस्तारण किया है। सभी राज्यों एवं केन्द्र शासित प्रदेशों, अलग अलग संगठनों, धार्मिक समुदायों, शोधकतार्ओं आदि ने अपने विचार साझा किये हैं। उन्हें पूरा विश्वास है कि जो लोग इस विधेयक का विरोध कर रहे हैं, इसके तथ्यों के बारे में जानकर उनका दिल बदलेगा और वे सब समर्थन करेंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि यह विधेयक शुद्ध रूप से संपत्ति के प्रबंध का मामला है और इससे किसी धर्म के कार्यकलाप में कोई हस्तक्षेप नहीं होता है। उन्होंने कहा, ह्ल सरकार किसी धार्मिक कार्य में हस्तक्षेप नहीं कर रही है…यह कोई मंदिर, मस्जिद का विषय नहीं है। यह शुद्ध रूप से संपत्ति के प्रबंधन से जुड़ा मामला है।ह्व उन्होंने कहा कि वक्फ की संपत्तियों का प्रबंध मुतव्वली करता है और यह विधेयक उसी प्रबंध से संबंधित है। New Delhi</p>
<p style="text-align:justify;">संसदीय कार्य मंत्री ने इस संबंध में केरल और इलाहाबाद उच्च न्यायालयों तथा उच्चतम न्यायालय के तीन निर्णयों का उल्लेख करते हुये कहा कि तीनों ही निर्णयों में न्यायालयों ने स्पष्ट किया है कि मुस्लिम वक्फ या हिन्दू मंदिरों की संपत्तियों के प्रबंध का काम स्वाभाविक रूप से सेक्युलर (गैरधार्मिक प्रकृति का काम) है।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने विपक्षी सदस्यों की टोका-टोकी के बीच कहा कि वक्फ संशोधन विधेयक के बारे में ह्यआप यह तर्क बंद करें, कि मुसलमानों (की संपत्ति) के मामले में गैर-मुस्लिम को क्यों जोड़ा जा रहा है। मंत्री ने विपक्ष खासकर कांग्रेस पर वोट बैंक की निरर्थक राजनीति करने का आरोप लगाते हुये कहा कि 2014 के चुनाव के ठीक पहले कांग्रेस के नेतृत्व वाली तत्कालीन संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार ने शहरी विकास मंत्रालय की दिल्ली में 123 संपत्तियों को दिल्ली वक्फ बोर्ड को हस्तांतरित कर दिया था।</p>
<p style="text-align:justify;">रिजिजू ने कहा, ‘आपको तो इसका फायदा हुआ नहीं, आप चुनाव हार गए। फिर ऐसा काम क्यों करते हैं।ह्व उन्होंने कहा कि विपक्ष को इस विधेयक पर चर्चा करनी चाहिए और इसको लेकर कोई भ्रम पैदा नहीें करना चाहिए। यह विधेयक किसी के खिलाफ नहीं है, बल्कि मुसलमानों के हित में है और तमाम मुसलमान चाहते हैं कि वक्फ की संपत्तियों का कायदे से प्रबंध हो। मंत्री ने कहा कि इसमें वक्फ प्रबंधन समिति में 22 लोगों में से 10 मुस्लिम समाज के लोग, दो पूर्व न्यायाधीश, एडवोकेट, मुस्लिम महिलाएं, दो गैर मुस्लिम सदस्य होंगे। उन्होंने कहा कि वक्फ संशोधन विधेयक में देश के कानूनों को जगह देकर ट्रिब्यूनल में लंबित हजारों केसों को निस्तारित करने का रास्ता खोजा है। New Delhi</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि यह कहा जा रहा है कि सेना एवं रेलवे के बाद वक्फ के पास सबसे ज़्यादा जमीन है। तो यह समझना चाहिए कि रेलवे की जमीन पर पटरी बिछी है और उस पर देश की जनता चलती है। इसलिए रेलवे की जमीन देश की जमीन है। इसी तरह से सेना की जमीन भी देश की जमीन है। लेकिन वक्फ की संपत्ति निजी संपत्ति है। उन्होंने कहा कि दुनिया में सबसे ज़्यादा वक्फ संपत्ति भारत में है लेकिन हमारा गरीब मुसलमान परेशान क्यों है। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार के गरीब मुसलमानों के अधिकारों के लिए किये जा रहे काम का विरोध क्यों किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि चंद वोटों के लिए देश की इतनी वक्फ संपत्ति यूं ही नहीं पड़ी रह सकती है। इसे गरीब मुसलमानों के उपयोग में लाना ही पड़ेगा।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि सच्चर कमेटी की रिपोर्ट में कहा गया है कि वर्ष 2004 में जिस वक्फ संपत्ति से 163 करोड़ रुपए की आमदनी हुई थी, उससे अधिक संपत्ति होने के बावजूद वर्ष 2013 में आमदनी 166 करोड़ रुपए हुई। जबकि सच्चर कमेटी ने कहा कि इससे 12 हजार करोड़ रुपए की आमदनी हो सकती थी। मतलब साफ है कि यदि वक्फ संपत्ति का ढंग से उपयोग होता तो मुसलमानों की तकदीर बदल जाती। New Delhi</p>
<p style="text-align:justify;">श्री रिजीजू ने कहा कि आज देश में नागरिकता संशोधन विधेयक (सीएए) लागू हो चुका है। किसी भी मुसलमान की नागरिकता नहीं गयी है। लेकिन जब कानून लाया गया तो कितना दुष्प्रचार किया कि इससे मुसलमानों की नागरिकता चली जाएगी। आज फिर से भ्रम फैलाने की कोशिश की जा रही है और ऐसे लोगों को फिर से मुंह की खानी पड़ेगी। उन्होंने कहा कि पहले लोग संपत्ति को अपनी मर्जी से वक्फ कर देते थे और महिलाओं एवं बच्चों के हितों का ख्याल नहीं रखते थे। इस प्रकार से पुराने कानून में महिलाओं के अधिकारों का दमन किया जाता था। नये विधेयक में प्रावधान किया गया है कि पहले महिला का हक सुरक्षित किया जाएगा और उसके बाद ही संपत्ति वक्फ की जा सकेगी।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि सरकारी जमीन पर वक्फ के दावे पर कलेक्टर से ऊपर स्तर के अधिकारी द्वारा जांच कराने की मांग मान ली गयी है। एक महत्वपूर्ण तथ्य यह भी है कि आदिवासियों की जमीन वक्फ नहीं की जा सकेगी। ट्रिब्यूनल में दो सदस्यों की जगह तीन सदस्य की बात भी मान ली गयी है। इसका कार्यकाल भी निश्चित किया गया है और यदि ट्रिब्यूनल के फैसले से कोई संतुष्ट नहीं है तो अदालत में जाया जा सकता है। इसके साथ ही इस कानून के दुरुपयोग की संभावनाओं को समाप्त किया है। तमिलनाडु के सुरन्दरेश्वर मंदिर हो या कर्नाटक की जमीन, हरियाणा में यमुनानगर में सिख गुरुद्वारे की जमीन का मामला हो या केरल में 600 ईसाइयों की जमीन का मामला, अब इस कानून का दुरुपयोग नहीं हो पाएगा। New Delhi</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="जाखल गांव की बाजीगर बस्ती स्थित उपस्वास्थ्य केंद्र में स्वास्थ्य कर्मियों ने अपनी सेवाएं बहाल की" href="http://10.0.0.122:1245/health-workers-resumed-their-services-at-the-sub-health-center-located-in-bajigar-basti-of-jakhal-village/">जाखल गांव की बाजीगर बस्ती स्थित उपस्वास्थ्य केंद्र में स्वास्थ्य कर्मियों ने अपनी सेवाएं बहाल की</a></p>
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                                                            <category>देश</category>
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                <link>https://www.sachkahoon.com/national/new-waqf-law-will-change-the-fate-of-poor-muslims/article-69178</link>
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                <pubDate>Wed, 02 Apr 2025 16:15:33 +0530</pubDate>
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                <title>Waqf Bill: वक्फ विधेयक संविधान पर हमला, सरकार फैला रही है भ्रम: विपक्ष</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)। Waqf Bill: विपक्ष ने लोकसभा में बुधवार को पेश वक्फ (संशोधन) विधेक 2025 को सरकार की संविधान विरोधी नीति का परिणाम बताया और कहा कि इस विधेयक को लाकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) देश में भ्रम फैला रही है और समाज को बांटने का काम कर रही है। कांग्रेस के […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/wakf-bill-is-an-attack-on-the-constitution-government-is-spreading-confusion-opposition/article-69177"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2025-04/new-delhi-2.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)।</strong> Waqf Bill: विपक्ष ने लोकसभा में बुधवार को पेश वक्फ (संशोधन) विधेक 2025 को सरकार की संविधान विरोधी नीति का परिणाम बताया और कहा कि इस विधेयक को लाकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) देश में भ्रम फैला रही है और समाज को बांटने का काम कर रही है। कांग्रेस के गौरव गोगोई ने अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरन रिजिजू द्वारा सदन में विधेयक को चर्चा करके पारित करने के लिए प्रस्ताव पर बहस शुरू करते हुए कहा कि विपक्ष भी चाहता है कि कानून में आवश्यक संशोधन हो, लेकिन सरकार की मंशा ठीक नहीं है और विभाजन की राजनीति कर रही है। New Delhi</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि सरकार वक्फ विधेयक को लेकर भ्रम फैलाने का प्रयास कर रही है। देश का संविधान हर व्यक्ति को बराबरी, मौलिक अधिकारों की रक्षा, संघीय ढांचे की सुरक्षा और राष्ट्र की अखंडता सुनिश्चित करने की बात करता है, लेकिन सरकार का वक्फ विधेयक संविधान पर आक्रमण है और भ्रम फैलाकर समाज को विभाजित कर वोट बैंकं की हिफाजत करना है। उनका कहना था कि सरकार यह कहते हुए भ्रम फैला रही है कि विधेयक पर व्यापक रूप से चर्चा हुई है जबकि सरकार इस पर मनमानी करती रही और सदन में व्यापक चर्चा की बात कर भ्रम फैला रही है। उनका यह भी कहना था कि इस विधेयक को लेकर जो बैठकें हुई है उन बैठकों के मिनट्स सरकार सदन में रखेगी तो सच्चाई सबके सामने आ जाएगी। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि यह विधेयक अल्पसंख्यक मंत्रालय नहीं बल्कि किसी और मंत्रालय ने तैयार किया है इसलिए इसमें अल्पसंख्यकों के हितों के कोई प्रावधान नहीं किए गये हैं। New Delhi</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि कोई भी व्यक्ति वक्फ कर सकता है, लेकिन सरकार इस कानून के जरिए एक व्यक्ति के अधिकार को छीनने का काम कर रही है। यह विधेयक देश की अखंडता, समाज की एकता, नागरिकों के मौलिक अधिकारों और संविधान की आत्मा के विरुद्ध है और इसके जरिए पूरी तरह से भ्रम फैलाने का काम सरकार कर रही है। उन्होंने कहा कि विधेयक में पहले से ही था कि इसमें दो या उससे अधिक महिलाएं सदस्य हो सकती हैं, लेकिन भाजपा सरकार ने उसे दो महिलाएं तक ही सीमित कर दिया है। सरकार भ्रम फैला रही है कि वक्फ के प्रावधान गलत हैं लेकिन इसमें जो प्रावधान सरकार कर रही है वह पहले से ही थे तो इसमें बदलाव क्यों किया गया है। सरकार ने राजस्व वाले नियम को कमजोर किया है ताकि वक्फ बोर्ड आर्थिकरूप से कमजोर हो। उनका कहना था कि सरकार की नजर एक समुदाय की उस जमीन पर नजर है जो उसके लोगों ने दान की है। New Delhi</p>
<p style="text-align:justify;">कांग्रेस नेता ने कहा कि सरकार इस विधेयक के जरिए राज्यों की ताकत को कमजोर करने का काम कर रही है। इसके एक कानून में राज्यों के लिए जो प्रावधान किए गये हैं उसे हटा दिया गया है। उन्होंने कहा कि सरकार सिर्फ एक कौम को भ्रमित करना चाहती है और अगर ऐसा नहीं है तो सरकार को अन्य धर्मों की संपत्तियों के लिए भी इस तरह का अधिनियम बनाना चाहिए। उनका कहना था कि इस कौम के नेताओं ने देश के लिए कुर्बानियां दी हैं और भारत की आजादी में अहम भूमिका निभाई है। भारत छोड़ों आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाते हुए जेलों में रहे हैं उस कौम के लोगों को भ्रमित करने का प्रयास नहीं किया जाना चाहिए। सरकार का समाज को बांटने का यही सिद्धांत है जो हमारे राष्ट्रवाद को भी अपने हित में और अपने हिसाब से परिभाषित करने का काम कर रही है। उनका कहना था कि सरकार ने 108 खंड को हटा दिया है इस कानून में संशोधन के लिए जेपीसी बनी थी, लेकिन इस सरकार ने जेपीसी में भी अनुच्छेद दर अनुच्छेद चर्चा नहीं करने दी। उन्होंने कहा कि आंध्र प्रदेश में इस कानून को लेकर जो प्रावधान हैं यह सरकार उन प्रावधानों को हटाने का काम रही है। New Delhi</p>
<p style="text-align:justify;">भाजपा के रवि शंकर प्रसाद ने कहा कि वक्फ विधेयक के जरिए बोर्ड में पिछड़े मुसलमानों को जगह दी जा रही है तो इसमें किसी को आपत्ति नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर वक्फ की जमीन लूटी जा रही है तो संविधान अधिकार देता है कि उसे रोका जाना चाहिए। उनका कहना था कि वक्फ धार्मिक संस्था नहीं है और अगर इस संस्था को दान दी जाने वाली संपत्ति लूटी जा रही है तो सरकार इस पर चुप नहीं रह सकती है। उनका कहना था कि वक्फ की अथाह संपत्ति है तो बताया जाना चाहिए कि इस संपत्ति के माघ्यम से कितनी विधवाओं, गरीबों, अनाथों और पीड़ितों को मदद मिली है। उनका कहना था कि कांग्रेस की सरकारें रही हैं, लेकिन तीन तलाक से परेशान होने वाली मुस्लिम महिलाओं के हित के लिए कानून नहीं बनाया गया लेकिन आज उनकी सरकार ने देश में तीन तलाक के कारण पीड़ित महिलाओं को राहत दी है और उन्हें कानूनी अधिकार देकर उनके जीवन को सुखद बनाया है। New Delhi</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि जब भाजपा सरकार ने तीन तलाक कानून बनाया तो पूरे देश में कुछ मुसलमान इसके विरोध में खड़े हो गये। वे नहीं चाहते थे कि मुस्लिम महिलाओं को आजादी से जीने का अधिकार मिले इसलिए वे इसका विरोध करते रहे। जब कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाया गया तो इसका भी विरोध हुआ, लेकिन आज जम्मू-कश्मीर में तिरंगा लहराता है और वहां अमन चैन है। वहां के लोगों को सारे हक मिल रहे हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस कहती है कि उसने वक्फ विधेयक में कई बार बदलावा किए हैं इसके बावजूद इसे बेहतर नहीं बनया जा सका हैं तो साफ है कि कांग्रेस का मकसद अकलियत की सेवा करना नहीं बल्कि वोट बैंक पर नजर रखना था। भाजपा नेता ने कहा कि इस विधेयक में यह बहुत स्पष्टरूप से कहा गया है कि वक्फ को लेकर अगर किसी तरह की शिकायत है तो लोग इसको लेकर न्यायालय में भी जा सकते हैं। उन्होंने केरल का जिक्र किया और कहा कि वहां ईसाई लोग इसलिए परेशान हैं कि उनकी संपत्ति को हड़पा जा रहा है और वे इस विधेयक में बदलाव लाना चाहते हैं। वक्फ की संपत्ति सबके काम आए यह विधेयक इसका रास्ता खोलता है। New Delhi</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="Sugarcane Juice Side Effects: क्या गन्ने के रस के भी होते हैं नुकसान! जानें किन लोगों को नहीं पीना चाहिए?" href="http://10.0.0.122:1245/sugarcane-juice-side-effects/">Sugarcane Juice Side Effects: क्या गन्ने के रस के भी होते हैं नुकसान! जानें किन लोगों को नहीं पीना चाहिए?</a></p>
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                                                            <category>देश</category>
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                <pubDate>Wed, 02 Apr 2025 15:13:41 +0530</pubDate>
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                <title>Waqf Bill: वक्फ बोर्ड में मुस्लिम महिलाओं की हो गई मौज, संसद में किरेन रिजिजू ने की घोषणा</title>
                                    <description><![CDATA[Waqf Amendment Bill Voting In Lok Sabha LIVE: नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)। लोकसभा में वक्फ बिल पेश हो गया है। किरेन रिरिजू ने बिल को पेश करते हुए इसके बारे में जानकारी दी है। उन्होंने कहा कि वक्फ बोर्ड में 10 मुस्लिम सदस्य होंगे, जिनमें 2 महिला मेंबर जरूरी। वक्फ संशोधन बिल किसी धर्म […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/muslim-women-have-a-good-time-in-wakf-board-kiren-rijiju-made-the-announcement-in-parliament/article-69174"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2025-04/waqf-bill.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Waqf Amendment Bill Voting In Lok Sabha LIVE: नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)। लोकसभा में वक्फ बिल पेश हो गया है। किरेन रिरिजू ने बिल को पेश करते हुए इसके बारे में जानकारी दी है। उन्होंने कहा कि वक्फ बोर्ड में 10 मुस्लिम सदस्य होंगे, जिनमें 2 महिला मेंबर जरूरी। वक्फ संशोधन बिल किसी धर्म के खिलाफ नहीं है। वहीं लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने प्वाइंट आॅफ आॅर्डर को खारिज कर दिया और कहा कि संसदीय समिति किसी भी विधेयक में पूर्ण रूप संशोधन कर सकती है। Waqf Bill</p>
<p style="text-align:justify;">रिजिजू ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि नरेंद्र मोदी सरकार ने संसद को बचाने में मदद की, जिसे यूपीए ने अन्यथा वक्फ की जमीन के रूप में दे दिया होता। केंद्रीय मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि विधेयक का उद्देश्य कभी भी किसी धार्मिक प्रथा या किसी मस्जिद के प्रबंधन में हस्तक्षेप करना नहीं है।</p>
<p style="text-align:justify;">रिजिजू ने कहा, ‘सरकार किसी धार्मिक कार्य में हस्तक्षेप नहीं कर रही है…यह कोई मंदिर, मस्जिद का विषय नहीं है। यह शुद्ध रूप से संपत्ति के प्रबंधन से जुड़ा मामला है।ह्व उन्होंने कहा कि वक्फ की संपत्तियों का प्रबंध मुतव्वली करता है और यह विधेयक उसी प्रबंध से संबंधित है।</p>
<p style="text-align:justify;">संसदीय कार्य मंत्री ने इस संबंध में केरल और इलाहाबाद उच्च न्यायालयों तथा उच्चतम न्यायालय के तीन निर्णयों का उल्लेख करते हुये कहा कि तीनों ही निर्णयों में न्यायालयों ने स्पष्ट किया है कि मुस्लिम वक्फ या हिन्दू मंदिरों की संपत्तियों के प्रबंध का काम स्वाभाविक रूप से सेक्युलर (धर्मनिरपेक्ष प्रकृति का काम) है। उन्होंने विपक्षी सदस्यों की टोका-टोकी के बीच कहा कि वक्फ संशोधन विधेयक के बारे में ह्यआप यह तर्क बंद करें, कि मुसलमानों (की संपत्ति) के मामले में गैर-मुस्लिम को क्यों जोड़ा जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">मंत्री ने विपक्ष खासकर कांग्रेस पर वोट बैंक की निरर्थक राजनीति करने का आरोप लगाते हुये कहा कि 2014 के चुनाव के ठीक पहले कांग्रेस के नेतृत्व वाली तत्कालीन संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार ने शहरी विकास मंत्रालय की दिल्ली में 123 संपत्तियों को दिल्ली वक्फ बोर्ड को हस्तांतरित कर दिया था। रिजिजू ने कहा, ‘आपको तो इसका फायदा हुआ नहीं, आप चुनाव हार गए…फिर ऐसा काम क्यों करते हैं।ह्व उन्होंने कहा कि विपक्ष को इस विधेयक पर चर्चा करनी चाहिए और इसको लेकर कोई भ्रम पैदा नहीें करना चाहिए। यह विधेयक किसी के खिलाफ नहीं है, बल्कि मुसलमानों के हित में है और तमाम मुसलमान चाहते हैं कि वक्फ की संपत्तियों का कायदे से प्रबंध हो। मंत्री ने कहा कि इस विधेयक पर संयुक्त संसदीय समिति ने पूरे देश में तमाम वर्ग के लोगों के साथ व्यापक चर्चा के बाद अपनी रिपोर्ट दी थी और उसके आधार पर यह विधेयक पारित कराया जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">पीछे की ओर एक नज़र: विधेयक को पिछले साल विपक्ष के हंगामे के बीच संसद में पेश किया गया था और बाद में इसे जांच के लिए भाजपा सांसद जगदंबिका पाल की अध्यक्षता वाली संसद की संयुक्त समिति के पास भेज दिया गया था। 13 फरवरी को सदन की समिति ने अपनी रिपोर्ट पेश की, जिसे 19 फरवरी को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने मंजूरी दे दी। हालांकि, पैनल में विपक्षी सांसदों ने अपने प्रस्तावित संशोधनों को खारिज किए जाने पर चिंता जताई और दावा किया कि उनकी असहमति के नोटों को उनकी जानकारी के बिना रिपोर्ट से हटा दिया गया था। पैनल ने एनडीए सांसदों द्वारा सुझाए गए 14 बदलावों को स्वीकार कर लिया और विपक्षी सदस्यों द्वारा प्रस्तावित सभी 44 बदलावों को खारिज कर दिया।</p>
<p style="text-align:justify;">543 सदस्यीय सदन में, भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए के पास वर्तमान में 293 सदस्य हैं। विधेयक को पारित होने के लिए 272 वोटों की आवश्यकता है। तुलनात्मक रूप से इंडिया ब्लॉक के पास कुल 235 सांसद हैं, जिसमें कुल 241 में एआईएमआईएम, वाईएसआरसीपी और आज़ाद समाज पार्टी जैसी गैर-गठबंधन पार्टियों को शामिल किया गया है, जिन्होंने विधेयक का विरोध करने की घोषणा की है।</p>
<p style="text-align:justify;">जबकि भाजपा के पास स्वयं 240 सदस्य हैं, इसके पक्ष में सहयोगी दल तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी) लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के पास 5, एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के पास 7, राष्ट्रीय लोक दल (आरएलडी), जनता दल-सेक्युलर (जेडी-एस) और जनसेना पार्टी (जेएसपी) के पास 2-2 सांसद हैं, तथा एनसीपी, अपना दल, हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा, ऑल झारखंड स्टूडेंट्स यूनियन और पूर्वोत्तर की पार्टियों एजीपी, यूपीपीएल और एसकेएम के पास 1-1 सांसद हैं। जेडी(यू) और टीडीपी ने विधेयक के कुछ प्रावधानों पर चिंता व्यक्त की है, लेकिन उम्मीद है कि वे इसका समर्थन करेंगे। इन दलों के सूत्रों ने कहा कि उनके सदस्य कुछ खंडों में संशोधन पेश कर सकते हैं, लेकिन विधेयक का समर्थन करेंगे। जिन विपक्षी दलों ने घोषणा की है कि वे विधेयक के खिलाफ मतदान करेंगे, उनमें कांग्रेस (99 सांसद), समाजवादी पार्टी (37), तृणमूल कांग्रेस (28), डीएमके (22), शिवसेना-यूबीटी (9), एनसीपी-एसपी (8), सीपीआई-एम (4), आरजेडी (4), आम आदमी पार्टी (3), जेएमएम (3), आईयूएमएल (3), और जे-के नेशनल कॉन्फ्रेंस (2) शामिल हैं। इसके अलावा 13 अन्य दल भी हैं। विधेयक का विरोध करने वाले गैर-गठबंधन दलों में एआईएमआईएम और आज़ाद समाज पार्टी के पास 1-1 सांसद और वाईएसआरसीपी के पास 4 सांसद हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">मुंडारी और हो जैसी आदिवासी भाषाओं को आठवीं अनुसूची में शामिल किये जाने की मांग |Waqf Bill</h3>
<p style="text-align:justify;">राज्यसभा में बुधवार को अनेक राज्यों में बोली जाने वाली मुंडारी , हो और भूमिज जैसी आदिवासी भाषाओंं को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल किये जाने की मांग की गयी। बीजू जनता दल के सस्मित पात्रा ने शून्यकाल में यह विषय उठाते हुए कहा कि ये भाषाएं अनेक राज्यों के लाखों लोगों द्वारा बोली जाती हैं। उन्होंने कहा कि ओडिशा विधानसभा इस बारे में पहले ही एक प्रस्ताव पारित कर चुकी हैं। उन्होंने कहा कि ये भाषाएं देश की विरासत हैं और इनका संरक्षण जरूरी हैं इसलिए इन्हें संविधान की आठवीं अनुसूची में जगह दी जानी चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">कांग्रेस के नीरज डांगी ने वृद्धजनों के लिए स्वास्थ्य बीमा प्रीमियम पर जीएसटी की 18 प्रतिशत की दर को कम कर पांच प्रतिशत करने की मांग की। उन्होंने कहा कि इससे वृद्धजनों को बहुत बड़ी राहत मिलेगी क्योंकि बढती उम्र में उनकी स्वास्थ्य बीमा प्रीमियम राशि वैसे ही बढती रहती है। उन्होंने आयुष्मान योजना में 70 वर्ष की उम्र में दिये जाने वाले लाभों के लिए उम्र सीमा 60 वर्ष किये जाने की भी मांग की। आम आदमी पार्टी की स्वाति मालीवाल ने बिना नियम कानूनों के चलाये जा रहे ई रिक्शा के कारण सड़कों पर अराजकता की स्थिति उत्पन्न होने का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि ई रिक्शा के कारण मेट्रो स्टेशनों और बाजारों में जाम लगा रहता है।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि रिक्शा में क्षमता से अधिक आठ से दस लोग बैठाये जाते हैं जिससे इनके पलटने का खतरा रहता है। उन्होंने कहा कि ई रिक्शा चालकों के पास न तो लाइसेंस होता और न ही उन्हें प्रशिक्षण दिया जाता इसलिए वे खतरनाक तरीके से सड़कों पर चलते हैं। उन्होंने कहा कि जब टैक्सी आटो रिक्शा के लिए सख्त नियम हैं तो ई रिक्शा के लिए नियम क्योंं नहीं हैं । उन्होंने कहा कि राजधानी दिल्ली में ही ढाई लाख ई रिक्शा हैं । इनके पास न तो लाइसेंस हैं और न ही इनका पंजीकरण किया जाता। सदस्य ने कहा कि नियम तोडने पर इनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। तृणमूल कांग्रेस के रीताब्रता बनर्जी ने विभिन्न कंपनियों द्वारा कर्मचारी भविष्य निधि के कर्मचारियों की भविष्य निधि राशि जमा नहीं कराये जाने पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि वर्ष 2023-24 के अनुसार कर्मचारियों की 26 हजार करोड रुपए की भविष्य निधि राशि जमा नहीं करायी गयी है। उन्होंने कहा कि इस तरह की कंपनियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि कई कंपनी कर्मचारी के वेतन से उसका पीएफ काट लेती हैं लेकिन नियोक्ता की ओर से अंशदान जमा नहीं कराया जाता।</p>
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                                                            <category>देश</category>
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                <pubDate>Wed, 02 Apr 2025 12:55:47 +0530</pubDate>
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