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                <title>dalit - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>जेल में दलित युवक की मौत, भीड़ ने किया हंगामा</title>
                                    <description><![CDATA[सहारनपुर (एजेंसी)। उत्तर प्रदेश की सहारनपुर जिला जेल में दलित युवक की मौत से आक्रोशित लोगों ने जमकर हंगामा किया। बड़गांव क्षेत्र के सिमलाना गांव निवासी 21 वर्षीय दलित युवक अरूण कुमार की जिला जेल में बीमारी के बाद जिला अस्पताल में मौत हो गई थी। बीती रात मृतक के परिजन पोस्टमार्टम के बाद सहारनपुर […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/dalit-youth-dies-in-jail/article-40820"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-12/up.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>सहारनपुर (एजेंसी)।</strong> उत्तर प्रदेश की सहारनपुर जिला जेल में दलित युवक की मौत से आक्रोशित लोगों ने जमकर हंगामा किया। बड़गांव क्षेत्र के सिमलाना गांव निवासी 21 वर्षीय दलित युवक अरूण कुमार की जिला जेल में बीमारी के बाद जिला अस्पताल में मौत हो गई थी। बीती रात मृतक के परिजन पोस्टमार्टम के बाद सहारनपुर से शव को अपने गांव सिमलाना ले आए लेकिन उन्होंने शव का अंतिम संस्कार करने से मना कर दिया। परिजनों और ग्रामीणों ने शव को ट्रैक्टर ट्राली में रखकर बड़गांव मुख्य सड़क पर लाने का प्रयास किया जिसे पुलिस और पीएसी ने सफल नहीं होने दिया।</p>
<p style="text-align:justify;">सिमलाना में गोगामाढ़ी के पास रखकर सैकड़ों की संख्या में दलित और ग्रामीण शव के साथ धरने पर बैठ गए। सूचना मिलने पर एसपी सिटी अभिमन्यु मांगलिक, रामपुर मनिहारान की एसडीएम संगीता राघव, देवबंद के पुलिस उपाधीक्षक रामकरण सिंह, कई थानों की पुलिस और पीएसी सिमलाना में घटना स्थल पर पहुंच गई।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>क्या है मामला</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">मृतक के परिजन 25 लाख रूपए मुआवजा दिए जाने, बड़गांव के दरोगा विजयपाल और सहारनपुर जिला जेल प्रशासन की उच्च स्तरीय जांच एवं कार्रवाई की मांग कर रहे थे। एसडीएम संगीता राघव ने आक्रोशित दलितों को भरोसा दिया कि उनकी मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार किया जाएगा और वह उनकी मांग को जिलाधिकारी अखिलेश सिंह के समक्ष रखने का काम करेंगी। एसपी सिटी अभिमन्यु मांगलिक ने बताया कि अरूण कुमार की मौत को लेकर जेल प्रशासन की जांच कराई जाएगी। प्रशासन की ओर से एसडीएम संगीता राघव ने मृतक के परिजनों को अंत्येष्टि के लिए 20 हजार रूपए की धनराशि प्रदान की। बहुत समझाने-बुझाने के बाद दलित वर्ग के लोग अरूण कुमार का अंतिम संस्कार करने को राजी हुए।</p>
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                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 11 Dec 2022 10:18:35 +0530</pubDate>
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                <title>मंदिर में प्रवेश करने पर दलित परिवार पर हमला करने वालों में से पांच गिरफ़्तार</title>
                                    <description><![CDATA[भुज। गुजरात के कच्छ ज़िले में एक मंदिर में प्रवेश करने वाले दलित परिवार पर हमला करने के 19 आरोपियों में से पांच को पुलिस ने गिरफ़्तार कर लिया है। ज़िले के भचाउ तालुक़ा के नेर गांव में गत 20 अक्टूबर को स्थानीय राम मंदिर में एक अन्य समुदाय द्वारा आयोजित प्राण प्रतिष्ठा समारोह के […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/five-arrested-for-attacking-dalit-family-on-entering-temple/article-28009"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-10/dalit-family.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>भुज।</strong> गुजरात के कच्छ ज़िले में एक मंदिर में प्रवेश करने वाले दलित परिवार पर हमला करने के 19 आरोपियों में से पांच को पुलिस ने गिरफ़्तार कर लिया है। ज़िले के भचाउ तालुक़ा के नेर गांव में गत 20 अक्टूबर को स्थानीय राम मंदिर में एक अन्य समुदाय द्वारा आयोजित प्राण प्रतिष्ठा समारोह के दौरान इसमें प्रवेश करने वाले गांव के ही एक दलित परिवार की एक महिला समेत छह लोगों को दूसरे समुदाय के 19 लोगों ने हमला कर घायल कर दिया था। उन लोगों ने उनके खेत को भी नुक़सान पहुंचाया था। इस संबंध में भचाउ थाने में दो अलग अलग प्राथमिकी दर्ज कर कुल 19 लोगों को आरोपी बनाया गया है ।</p>
<p style="text-align:justify;">यह मामले भारतीय दंड संहिता की धारा 307 (हत्या का प्रयास), 323 (चोट पहुंचाना), 324 (घातक हथियारों से चोट पहुंचाना), 452 (बिना अनुमति किसी के आहते में प्रवेश), 120 बी (आपराधिक षड्यंत्र) , 506 ( धमकी देना), 395 (डकैती) 397 (डकैती के दौरान हमला कर घायल करना) तथा गाली देने और फ़साद करने से जुड़ी धाराओं के अलावा अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम की धाराओं के तहत दर्ज किए गए हैं। मामले के अनुसंधान अधिकारी और भचाउ के पुलिस उप अधीक्षक के जी झाला ने आज यूएनआई को बताया कि आरोपियों में से पांच को पुलिस ने कल रात लगभग साढ़े दस बजे हिरासत में ले लिया गया और नए नियम के अनुरूप कोरोना जांच के बाद देर रात विधिवत गिरफ्तार कर लिया गया। बाक़ी 14 आरोपियों की भी तलाश आधा दर्जन से अधिक पुलिस टीमें कर रही हैं। सिर और शरीर के अन्य हिस्सों में चोट लगने से घायल छह लोगों को भुज के सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">पुलिस के अनुसार आरोपियों ने 26 अक्टूबर को दलित परिवार के लोगों को दो बार हमला कर निशाना बनाया था। आरोप है कि काना अहिर और अन्य आरोपियों ने पहले दलित गोविंद वाघेला (40) के खेत को नुक़सान पहुंचाया और उन्हें रोकने पर गोविंद और उनके चाचा गणेश वाघेला को लाठी डंडे और अन्य हथियारों से मारपीट कर घायल कर दिया। इसके बाद वे उनके घर पहुंचे और उनके पिता जगा वाघेला(64), पत्नी बद्धिबेन, बेटे भूरा वाघेला तथा भतीजे हसमुख को भी हमला कर घायल कर दिया। हमलावर दलित परिवार के लोगों के मंदिर में प्रवेश करने की घटना को लेकर उनको जाति सूचक गालियां भी दे रहे थे।</p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 30 Oct 2021 13:26:23 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>मायावती ने दलितों के उत्पीड़न की निंदा की</title>
                                    <description><![CDATA[योगी के काम को सराहा मायावती ने शनिवार को एक के बाद एक तीन ट्वीट किए लखनऊ (एजेंसी)। बहुूजन समाज पार्टी की प्रमुख मायावती ने उत्तर प्रदेश के जौनपुर,आजमगढ़ तथा अन्य जगहों पर दलितों पर एक विशेष समुदाय के लोगों की ओर से हाल में किए गए हमलों की शनिवार को निंदा की और हमलावरों […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/mayawati-condemned-the-oppression-of-dalits/article-16072"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-06/mayawati1.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:center;">योगी के काम को सराहा</h3>
<ul>
<li style="text-align:justify;"><strong>मायावती ने शनिवार को एक के बाद एक तीन ट्वीट किए</strong></li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ (एजेंसी)।</strong> बहुूजन समाज पार्टी की प्रमुख मायावती ने उत्तर प्रदेश के जौनपुर,आजमगढ़ तथा अन्य जगहों पर दलितों पर एक विशेष समुदाय के लोगों की ओर से हाल में किए गए हमलों की शनिवार को निंदा की और हमलावरों पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ओर से की गई कार्रवाई की सराहना की। एक समुदाय विशेष की ओर से किए गए हम हमलों पर अब तक मायावती की चुप्पी पर राजनीतिक गलियारों में सवाल उठाए जा रहे थे कि वो मुसलमानों के वोट की खातिर कुछ नहीं बोल रही हैं लेकिन उन्होंने शनिवार को एक के बाद एक तीन ट्वीट किए।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि यूपी में चाहे आजमगढ, कानपुर देहात हो या जौनपुर में दलित समाज की बहन बेटियों पर हमले और उनके उत्पीड़न का मामला हो ,इसकी जितनी निंदा की जाय कम है। उन्होंने दूसरे ट्वीट में कहा कि इसके दोषी किसी भी जाति,धर्म सम्प्रदाय के हो या बड़े से बड़ा नेता हो उसे बख्शा नहीं जाना चाहिए। उन सभी के खिलाफ तुरंत कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।</p>
<h3 style="text-align:justify;">समाजवादी पार्टी के एक नेता समेत 35 लोगों को किया गिरफ्तार</h3>
<p style="text-align:justify;">मायावती ने तीसरे ट्वीट में कहा कि आजमगढ़ में दलित बेटी के उत्पीड़न पर यूपी के सीएम ने कड़ी कार्रवाई की है,यह अच्छी बात है। वो देर आए लेकिन दुरूस्त आए। बहत बेटियों के उत्पीड़न के मामले में तुरंत और समय से कार्रवाई हो तो बेहतर होगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पिछले मंगलवार को जौनपुर में समुदाय विशेष के लोगों की ओर दलितों के घर जलाए जाने पर कड़ी कार्रवाई की और समाजवादी पार्टी के एक नेता समेत 35 लोगों पर गैगेस्टर तथ रासुका के तहत गिरफ्तार कराया।</p>
<p> </p>
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                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 13 Jun 2020 12:45:03 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>राजनीति के शीर्ष पर दलित दांव</title>
                                    <description><![CDATA[देश के सबसे बड़े दो राजनीतिक दलों ने राष्ट्रपति के चुनाव हेतु दलित उम्मीदवारों की दावेदारी को दांव लगाकर राजनीति के दलित विमर्श को जन्म दे दिया है। एक लम्बे अरसे से यह कयास लगाया जा रहा था कि आखिरकार भाजपा बड़े नेताओं की महत्वकांक्षा और राष्ट्रपति पद पर सुयोग्य व्यक्ति को आसीन करने के […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/dalit-bets-on-top-of-politics/article-1552"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-06/kovind-2.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">देश के सबसे बड़े दो राजनीतिक दलों ने राष्ट्रपति के चुनाव हेतु दलित उम्मीदवारों की दावेदारी को दांव लगाकर राजनीति के दलित विमर्श को जन्म दे दिया है। एक लम्बे अरसे से यह कयास लगाया जा रहा था कि आखिरकार भाजपा बड़े नेताओं की महत्वकांक्षा और राष्ट्रपति पद पर सुयोग्य व्यक्ति को आसीन करने के बीच संतुलन किस प्रकार स्थापित करेगी। भाजपा ने रामनाथ कोविंद को राष्ट्रपति उम्मीदवार बनाकर एक तीर से कई निशाने साध दिए।</p>
<p style="text-align:justify;">जहां एक ओर रामनाथ कोविंद दलित समाज से ताल्लुक रखते हैं, वहीं दूसरी ओर वह मूलत: उत्तर-प्रदेश से भी हैं। इन द्विपक्षीय खासियतों के चलते विपक्ष के सामने व्यक्ति विरोध का कोई अवसर भी नहीं बचा और भाजपा ने कोविंद के सहारे 2019 के लिए यूपी की दलित राजनीति को साधने का भी प्रयास कर लिया। हालांकि इसमें कोई दोराय नहीं कि राष्ट्रपति पद की उम्मीदवारी को लेकर बीते कुछ दिनों से जो भी कयास चल रहे थे, उन सभी पर विराम लगाते हुए एक बार फिर मोदी के निर्णयों ने सभी को चौंका दिया।</p>
<p style="text-align:justify;">रामनाथ कोविंद का नाम जैसे ही फलक पर आया सियासत का बाजार भी गरम हो गया। विपक्षियों की सरगर्मी भी तेज हुई, साथ ही आगे की रणनीति को लेकर अटकलें भी लगाई जाने लगीं।</p>
<p style="text-align:justify;">दलित के बदले दलित उतारने की कवायद भी जोर पकड़ने लगी और इसी का परिणाम यह हुआ कि पूर्व स्पीकर मीरा कुमार का नाम यूपीए की तरफ से राष्ट्रपति पद की उम्मेदवारी के लिए घोषित कर दिया गया। लेकिन यह कह सकते हैं कि दलित दांव पहले खेलने में भाजपा समर्थ रही है। भाजपा के इस निर्णय के साथ बिहार के मुख्यमंत्री सहित उद्धव ठाकरे भी अब साथ खड़े दिख रहे हैं। टीआरएस भी समर्थन का संकेत कर चुकी है, जबकि ओडिशा के सीएम नवीन पटनायक साथ होने का एलान पहले ही कर चुके हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">अब चुनाव की राह में रोड़े अधिक नहीं है, पर शिकायत तो कईयों की बहुत है। बहुजन समाज पार्टी मुखिया मायावती दलित चेहरे की स्थिति को देखते हुए मना तो नहीं कर पाई हैं, पर असमंजस से जरूर गुजर रही होंगी। वामपंथ की शिकायत यह है कि उम्मीदवारी के मामले में निर्णय एकतरफा है, लेकिन एक बात यह है कि अब मीरा कुमार की उम्मेदवारी के चलते कई विपक्षी दलों को रामनाथ कोविंद का विरोध करने का अवसर मिल गया है। क्योंकि वह मीरा कुमार का साथ देकर और कोविंद का विरोध करके दलित विरोधी होने के दाग से बच निकलेंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">देखा जाए तो राष्ट्रपति के चुनाव को लेकर आंकड़े एनडीए की ओर झुके हुए दिखाई देते हैं, पर एनडीए का मानना है कि सर्वसम्मति से बात बने, तो अच्छा रहेगा। मोदी ने राष्ट्रपति पद के लिए जिस चेहरे को उतारा है, उसे लेकर कई अपने सियासी गुणा-भाग में लगे होंगे। आगे की राजनीति कठिन न हो, इसका भी ख्याल उनके मन में आ रहा होगा।</p>
<p style="text-align:justify;">लगभग सभी दलों के सियासी गुणा-भाग में दलितों का काफी महत्व देखा जा सकता है। खास यह भी है कि रामनाथ कोविंद यदि राष्ट्रपति चुने जाते हैं, तो वह यूपी के पहले राष्ट्रपति होंगे। जाहिर है आधा दर्जन प्रधानमंत्री देने वाले उत्तर प्रदेश के लिए भी यह गौरव से भरा संदर्भ होगा।</p>
<p style="text-align:justify;">हालांकि जिस तर्ज पर एनडीए ने राष्ट्रपति का उम्मीदवार घोषित किया, उसे राजनीति का मास्टर स्ट्रोक ही कहा जायेगा, क्योंकि रामनाथ कोविंद जिस उत्तर प्रदेश से सम्बन्धित हैं, वहां 2014 के लोकसभा चुनाव में 80 के मुकाबले 73 सीटें और फरवरी 2017 के विधानसभा चुनाव में 403 के मुकाबले 325 स्थान एनडीए के खाते में है।</p>
<p style="text-align:justify;">जाहिर है 2019 के लोकसभा चुनाव में इसे वह दोहराना चाहेगी। ऐसा नहीं है कि मात्र दलित चेहरे के चलते ही रामनाथ कोविंद की उम्मीदवारी तय हुई है। उनकी कार्यप्रणाली को परखा जाए, तो काबिलियत भी कम नहीं है।</p>
<p style="text-align:justify;">रामनाथ कोविंद हाईकोर्ट, सुप्रीम कोर्ट के बेहद कामयाब वकील रहे हैं। सामाजिक जीवन में सक्रियता के लिए जाने जाते हैं। 1994 में राज्यसभा के लिए भी चुने जा जुके हैं और लगातार दो बार उच्च सदन के सदस्य रहे हैं। गौरतलब है कि अटल बिहारी वाजपेयी और आडवाणी के युग में कोविंद भाजपा का सर्वाधिक बड़ा चेहरा माने जाते थे।</p>
<p style="text-align:justify;">एक सामाजिक कार्यकर्ता और साफ छवि के राजनेता कोविंद संयुक्त राष्ट्र में भारत का प्रतिनिधित्व भी कर चुके हैं। यह वाक्या अक्तूबर 2002 का है, जब उन्होंने यहां सम्बोधन दिया था। 8 अगस्त, 2015 से राष्ट्रपति के उम्मीदवार घोषित किये जाने के दो दिन बाद तक वे बिहार के राज्यपाल रहे।</p>
<p style="text-align:justify;">एक अन्य प्रश्न राष्ट्रपति उम्मीदवारी को लेकर यह भी उठ रहा है कि आडवाणी समेत कई कद्दावर नेताओं को क्यों दरकिनार किया गया? कहा जा रहा है कि एक बार फिर प्रधानमंत्री मोदी और अमित शाह ने अपनी बिसात पर सभी को चक्कर में डाल दिया है, पर वे दोनों अब किस चक्रव्यूह को भेदना चाहते हैं, इसको भी समझना जरूरी है।</p>
<p style="text-align:justify;">भाजपा कोविंद के बहाने अपनी सियासी पकड़ और मजबूत करने की फिराक में है। दलित चेहरा चुनने का रास्ता अख्तियार करके जाति की राजनीति और उसकी नब्ज को मजबूती से पकड़ने की कवायद फिलहाल देखी जा सकती है। हालांकि भाजपा इस आरोप को जरूर खारिज कर देगी और वह इस बात की वाहवाही लेना चाहेगी कि उसने एक दलित को राष्ट्रपति बनाने का काज किया है, न कि जातिगत राजनीति की है।</p>
<p style="text-align:justify;">सच तो यह है कि एनडीए में यहां तक कि केवल भाजपा में ही कोविंद के मुकाबले राष्ट्रपति के लिए दर्जनों उम्मीदवारों की लम्बी फेहरिस्त है, पर वे 2019 के लोकसभा में तुरूप का इक्का सिद्ध नहीं हो सकते थे। ऐसे में उनका दरकिनार होना स्वाभाविक था।</p>
<p style="text-align:justify;">अब चाहे रामनाथ कोविंद हों या मीरा कुमार यह बात सच है कि भारत में अर्से से सामाजिक रूप से शोषित रहा दलित समाज अब राजनीति और समाज में अपना स्थान बनाने लगा है। योग्यता के चलते अब सिर्फ जाति के नाम पर विरोध की परम्परा टूटने लगी है। उम्मीद है कि आने वाला समय भारतीय राजनीति को अधिक समावेशी बनाएगा, जिसमें समाज के प्रत्येक वर्ग की हिस्सेदारी होगी और एक नए प्रकार की राजनीतिक जमीन बनना प्रारंभ होगी।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>– पार्थ उपाध्याय</strong></p>
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                <pubDate>Fri, 23 Jun 2017 23:14:04 +0530</pubDate>
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