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                <title>Bad things - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>परेशानियों से छुटकारा दिलाता है राम-नाम</title>
                                    <description><![CDATA[पूज्य हजूर पिता संत डॉ गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि दुनिया में राम-नाम ही ऐसा है जो इन्सान के सारे दु:ख-दर्द, चिंता, परेशानियों को दूर करता है। राम-नाम लेने के लिए कोई काम-धन्धा, घर-परिवार, धर्म नहीं छोड़ना और न ही कोई रुपया-पैसा लगता है। राम का नाम अनमोल है और संत […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/spiritual/holy-sermons/gods-word-saves-from-bad-things/article-4706"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-07/guruji-1-1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">पूज्य हजूर पिता संत डॉ गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि दुनिया में राम-नाम ही ऐसा है जो इन्सान के सारे दु:ख-दर्द, चिंता, परेशानियों को दूर करता है। राम-नाम लेने के लिए कोई काम-धन्धा, घर-परिवार, धर्म नहीं छोड़ना और न ही कोई रुपया-पैसा लगता है। राम का नाम अनमोल है और संत इसे बिना दाम के देते हैं। जो दान-दक्षिणा लेते हैं वो संत ही नहीं होते, क्योंकि संत माया के लिए नहीं बल्कि राम-नाम जपाने के लिए इस दुनिया में आते हैं। जब भगवान ही पैसा नहीं लेते तो संत पैसा क्यों लें? सभी धर्मों में लिखा है कि भगवान दाता था, दाता है और दाता ही रहेगा।</p>
<p style="text-align:justify;">पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि भगवान हर इन्सान के अंदर समाया हुआ है। भगवान को देखने के लिए किसी जंगल, पहाड़ आदि कहीं पर भी जाने की कोई आवश्यकता नहीं होती। इन्सान भगवान को अपने घर-परिवार में रहते हुए ही देख सकता है। ऐसे-ऐसे रोग जिनको डॉक्टर लाईलाज बता देते हैं, राम-नाम के द्वारा वो लाईलाज रोग भी ठीक होते हुए देखे गए हैं। भगवान सर्वव्यापक है।</p>
<p style="text-align:justify;">भगवान को अल्लाह, वाहेगुरु, गॉड, खुदा, रब्ब चाहे जो भी नाम दें, लेकिन वो एक ही है। जिस तरह पानी को पानी, आब, वाटर, नीर आदि कहने से उसके रंग, स्वाद में कोई परिवर्तन नहीं आता उसी तरह भगवान का नाम बदलने से उसकी ताकत नहीं बदलती।</p>
<p style="text-align:justify;">आप जी फरमाते हैं कि इन्सान को हर रोज सुबह-शाम आधा-आधा घंटा राम-नाम का सुमिरन जरूर करना चाहिए। जिस तरह इन्सान खाने-पीने, सोने के लिए समय निश्चित करता है, सुबह नाश्ता, दोपहर का भोजन और शाम का भोजन खाना इन्सान नहीं भूलता उसी तरह राम का नाम भी नहीं भूलना चाहिए।</p>
<p> </p>
<p> </p>
<p> </p>
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                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>अनमोल वचन</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 07 Jul 2018 03:19:47 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>जन्मों-जन्मों के पाप कर्मों को काटता है राम नाम</title>
                                    <description><![CDATA[जिन्हें कर्म रोग कहते हैं वो राम नाम से कट जाया करते हैं पूज्य हजूर पिता संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि इन्सान अपने किये कर्मों का फल जरूर भोगता है। कई बार इन्सान सोचता है कि मैंने ऐसा कौन-सा कर्म किया है जिसकी वजह से मैं दु:खी हूं। लोग […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><h1 style="text-align:center;">जिन्हें कर्म रोग कहते हैं वो राम नाम से कट जाया करते हैं</h1>
<p style="text-align:justify;">पूज्य हजूर पिता संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि इन्सान अपने किये कर्मों का फल जरूर भोगता है। कई बार इन्सान सोचता है कि मैंने ऐसा कौन-सा कर्म किया है जिसकी वजह से मैं दु:खी हूं।</p>
<p style="text-align:justify;">लोग मिलते हैं कि मैंने इस जीवन में कोई बुरा कर्म नहीं किया, कोई गलत कर्म नहीं किया फिर भी मैं दु:खी हूं, परेशान हूं। आप जी फरमाते हैं कि इसकी वजह होती है इन्सान के संचित कर्म, जन्मों-जन्मों के संचित कर्म इन्सान के साथ जुड़े होते हैं। उन पाप कर्मों को अल्लाह, वाहेगुरु, गॉड, खुदा, राम का नाम ही खत्म कर सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि सभी रोगों की मुकमल दवा, औषधि है अल्लाह, वाहेगुरु, गॉड, खुदा, राम का नाम। सच्चे दिल से, सच्ची भावना से कोई प्रभु का नाम लेता है तो जन्मों-जन्मों के पाप कर्म तो कटते ही हैं, जो बेवजह काम-धंधे में बाधा, शरीर में रोगों का लग जाना, जिन्हें कर्म रोग कहते हैं वो राम नाम से कट जाया करते हैं।</p>
<h1 style="text-align:center;">लाईलाज का इलाज़ राम नाम</h1>
<p style="text-align:justify;">आप जी फरमाते हैं कि यहां लाखों मरीज आते हैं और उनके अनुभव बताते हैं कि उन्होंने राम का नाम जपा और जन्मों-जन्मों के पाप कर्म कट गए। कैंसर जैसे रोग, जिन्हें डॉक्टर लाईलाज कहते हैं, जिन्हें थर्ड स्टेज का कैंसर था और आज भी वो जिंदा हैं। ऐसा कैसे संभव है?</p>
<p style="text-align:justify;">इस बारे में आप जी फरमाते हैं कि जैसे बच्चा भूखा हो तो मां तड़प उठती है, आपके बच्चे के जरा-सी चोट लग जाए तो आंखों से बेइंतहा आंसू आ जाते हैं। ऐसी ही भावना अगर इन्सान अल्लाह, वाहेगुरु, राम के लिए बनाए, उसे याद करे, उसकी भक्ति करे तो जिस मालिक ने शरीर बनाया उसके लिए शरीर से रोग निकालना इस तरह है जैसे मक्खन से बाल निकालना।</p>
<h1 style="text-align:center;">भगवान आपके पैसे का भूखा नहीं है</h1>
<p style="text-align:justify;">पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि भगवान आपके पैसे का भूखा नहीं है, अगर ऐसा होता तो अरबों-खरबोंपति तो कभी बीमार ही न होते। वह भगवान भावना से मिलता है। जिसकी शुद्ध भावना होती है वो मालिक को पा लिया करते हैं। उन्हीं पर मालिक की कृपादृष्टि होती है, साक्षात मालिक के दर्शन कर सकते हैं।</p>
<p> </p>
<p> </p>
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                                            <category>अनमोल वचन</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 15 Jun 2018 09:53:17 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सत्संग में आने से कटते हैं पाप कर्म : पूज्य गुरु जी</title>
                                    <description><![CDATA[पूज्य हजूर पिता संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि सत्संग भागों वालों को मिला करता है, और जो सत्संग में चलकर आते हैं वो और भाग्यशाली बन जाया करते हैं। क्योंकि दुनिया में कहीं भी आप जाओ, दुनिया में चुगली है, निंदा है, टांग खिंचाई है, लड़ाई-झगड़े, काम-वासना, मोह-ममता, मन-माया […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><p style="text-align:justify;">पूज्य हजूर पिता संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि सत्संग भागों वालों को मिला करता है, और जो सत्संग में चलकर आते हैं वो और भाग्यशाली बन जाया करते हैं। क्योंकि दुनिया में कहीं भी आप जाओ, दुनिया में चुगली है, निंदा है, टांग खिंचाई है, लड़ाई-झगड़े, काम-वासना, मोह-ममता, मन-माया इसका मकड़जाल फैला हुआ है।</p>
<p style="text-align:justify;">कहीं भी आप जाएंगे लोग ऐसा कर्म करते आपको नजर आएंगे। सत्संग में आते हो तो जिस तरह आप अपने मैले कपड़े धोबी को दे देते हो वो बिल्कुल धोकर साफ कर देता है, चमका देता है उसी तरह सत्संग में आने से आपके पाप कर्म कटना शुरु हो जाते हैं। आप पाक-पवित्र बन जाते हैं, आत्मा उज्जवल हो जाती है, हृदय निर्मल हो जाता है और आप इस लायक बन जाते हैं कि मालिक की याद में ध्यान लगने लगता है। पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि यदि आप अपने विचारों का शुद्धिकरण चाहते हो, अपने विचारों को बदलना चाहते हो और चाहते हो कि आप को परमानंद मिलें, खुशियां मिले तो जरूरी है सत्संग में चलकर आओ। दुनियादारी में लोग गुमराह करने के सिवाए कुछ नहीं करते। आप से प्यार करते हैं, अगर अच्छा व्यवहार करते हैं उसके पीछे कोई न कोई उनकी मंशा जरूर छिपी होती है।</p>
<p style="text-align:justify;">कोई न कोई स्वार्थ जरूर होता है। फिर भी आपको लगता है कोई नि:स्वार्थ आपको प्यार करता है तो वो संत करते हैं या फिर सच्चे शिष्य करते हैं। अदरवाईज दुनिया में बहुत मुश्किल है कि कोई बेगर्ज प्यार करे। नि:स्वार्थ भावना से आपसे बात करे। लोग खिलाते पिलाते हैं। उसके पीछे भी बहुत मकसद होेते हैं।कई बार अपना साजो सामान बेचने के लिए अपना उल्लू सीधा करने के लिए लोग आपको बरगला लेते हैं। मीठी-मीठी बातें करते हैं, आपको भरमाने के लिए तरह-तरह के हथकंडे अपनानते हैं ताकि आप गुमराह हो जाएं और मालिक से दूर हो जाएं। तो ये जरूरी है कि आप रब का नाम लें, ईश्वर को याद करें, सत्ंसग सुनें। तभी आपको अच्छे बुरे की समझ आएगी।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>अनमोल वचन</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 28 May 2018 10:54:09 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>भयानक पाप-कर्मों से बचाता है सत्संग</title>
                                    <description><![CDATA[पूज्य हजूर पिता संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि जो जीव ओम, हरि, अल्लाह, वाहेगुरु, मालिक की याद में आकर बैठते हैं, तथा उस परमपिता परमात्मा की चर्चा करते हैं, वो बहुत भाग्यशाली होते हैं या भाग्यशाली बन जाया करते हैं। आप जी फरमाते हैं कि जन्मों-जन्मों के संचित कर्म […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><p style="text-align:justify;">पूज्य हजूर पिता संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि जो जीव ओम, हरि, अल्लाह, वाहेगुरु, मालिक की याद में आकर बैठते हैं, तथा उस परमपिता परमात्मा की चर्चा करते हैं, वो बहुत भाग्यशाली होते हैं या भाग्यशाली बन जाया करते हैं। आप जी फरमाते हैं कि जन्मों-जन्मों के संचित कर्म कितने हैं, इसका दायरा कितना बड़ा है, इसके बारे में कुछ भी लिख-बोलकर नहीं बताया जा सकता, लेकिन यह हकीकत है कि जीव सत्संग सुनकर अमल करे तो जीव अपने भयानक से भयानक पाप-कर्मों से बच जाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि सत्संग सुनकर अमल करने का मतलब है कि आप नाम जपो, मालिक की औलाद से नि:स्वार्थ भावना से प्यार करो, कभी भी किसी का दिल न दुखाओ। अहंकारवश, काम-वासना, क्रोध, लोभ, मोह, मन-मायावश जब जीव किसी का दिल दुखाता है तो उसकी भक्ति कटती है, वह खुद दुखी होता है और मालिक से दूर हो जाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">इसलिए कभी किसी का बुरा नहीं सोचना चाहिए। जब इतने बड़े महापुरुष, संत, पीर-फकीरों ने यह लिख दिया कि ‘कबीरा सबसे हम बुरे, हम तज भला सब कोय, जिन ऐसा कर मानेया, मीत हमारा सोय।।’ कहने का मतलब है कि कहने को कोई भी कह देगा कि मैं ये हूं, वो हूं लेकिन जो लोग ऐसा मान लेते हैं कि मैं दूसरों को बुरा क्यों कहूं और वो असल में किसी को बुरा नहीं कहता, बल्कि अपने आपको ही बुरा कहता है तो जो ऐसा कहकर मान लेते हैं, वो मालिक के मीत, प्यारे, अति प्यारे हो जाया करते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">आप जी फरमाते हैं कि सत्संग में जीव को समझ आती है, लेकिन यह जरूरी है कि आदमी सुनकर अमल करे। तभी खुशियां हासिल होती हैं। सुनना अच्छी बात है। जैसे पत्थर गर्मी में रहते हैं तो किसी का पांव सड़ा देते हैं। उन पर थोड़ा पानी गिरता रहे तो वो ठंडे रहते हैं। सत्संग सुन कर जीव चाहे अमल न करे फिर भी न सुनने वाले से तो बेहतर हैं लेकिन सुनकर अमल करने से ही खुशियां आती हैं, वरना किए कर्मों का भुगतान करना पड़ता है। पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि सत्संग में संत जीवों को शिक्षा देते हैं कि मानो भाई, अमल करो और जो सुनकर अमल कर लिया करते हैं, वो ही दोनों जहान की खुशियों के हकदार बनते हैं। उन्हीं के अंदर पवित्रता आती है, चेहरे पर नूर आता है। वो एक दिन मालिक के दर्श-दीदार के काबिल जरूर बन जाया करते हैं।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अनमोल वचन</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 23 Mar 2018 06:02:50 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मन से लड़ने का एकमात्र उपाय राम-नाम का जाप</title>
                                    <description><![CDATA[सरसा (सकब)। पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि इस घोर कलियुग में मालिक का नाम लेना बड़ा मुश्किल है। मन और मनमते लोग रोकते-टोकते हैं। इन्सान प्रभु का नाम लेना भी चाहे तो मन तरह-तरह की परेशानी खड़ी कर देता है। आप सुमिरन करने लगते हैं, कुछ देर […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><p style="text-align:justify;"><strong>सरसा (सकब)।</strong> पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि इस घोर कलियुग में मालिक का नाम लेना बड़ा मुश्किल है। मन और मनमते लोग रोकते-टोकते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">इन्सान प्रभु का नाम लेना भी चाहे तो मन तरह-तरह की परेशानी खड़ी कर देता है। आप सुमिरन करने लगते हैं, कुछ देर ही सुमिरन कर पाते हैं और बाद में होश ही नहीं रहता कि मन आपको कहां से कहां ले गया।</p>
<h2 style="text-align:justify;">मन इन्सान को सुमिरन नहीं करने देता</h2>
<p style="text-align:justify;">पूज्य गुरु जी आगे फरमाते हैं कि इस घोर कलियुग में मन-इंद्रियां बड़े फैलाव पर हैं। मन इन्सान को सुमिरन नहीं करने देता, मालिक की तरफ नहीं चलने देता। जहां मालिक की चर्चा होती हो, वहां मीन-मेख (कमियां) निकालता रहता है, हालांकि उसकी खुद की कमियों का कोई अंदाजा ही नहीं होता।</p>
<p style="text-align:justify;">आप जी फरमाते हैं कि मन बड़ा ही जालिम, शातिर है। आप जब तक सुमिरन नहीं करेंगे, यह काबू में नहीं आएगा। सुमिरन करने से मन काबू में आता है। अगर सुमिरन, भक्ति-इबादत की जाए तो मन काबू में आ सकता है अन्यथा मन बढ़ता चला जाता है और जीव गुमराह हो जाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">जैसे टायर में हवा भरते हैं तो वह फूलता चला जाता है उसी तरह मन गंदे, बुरे विचारों की हवा देता है और इन्सान फूलता चला जाता है। उसमें अहंकार, घमंड अपने आप आने लगता है।</p>
<p style="text-align:justify;">उसे पीर-फकीर के वचन अच्छे नहीं लगते। उसे सिर्फ अपनी बातें सही लगती हैं और दूसरे सभी गलत लगते हैं। इस तरह से मन इन्सान को भटकाता, गुमराह करता है, मालिक से दूर करता है।</p>
<h2 style="text-align:justify;">चलते, फिरते करो सुमिरन</h2>
<p style="text-align:justify;">पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि मन से लड़ने का एकमात्र उपाय प्रभु का नाम है। आपको घर में, काम-धन्धे में कोई भी परेशानी, दु:ख-तकलीफ है तो आप घर में खाना वगैरह सुमिरन करके बनाओ।</p>
<p style="text-align:justify;">चलते, फिरते सुमिरन करो। दो-तीन महीने लगातार सुमिरन करो, मेहनत करो तो यकीनन मालिक अंदर से ख्याल देंगे और आपको परेशानी से निकलने का रास्ता जरूर मिल जाएगा।</p>
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                                            <category>अनमोल वचन</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/spiritual/holy-sermons/only-meditation-help-us-to-fight-with-bad-things-saint-dr-msg/article-2047</link>
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                <pubDate>Fri, 07 Jul 2017 03:00:36 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>परेशानियों से छुटकारा दिलाता है राम-नाम : पूज्य गुरु जी</title>
                                    <description><![CDATA[राम का नाम अनमोल है और संत इसे बिना दाम के देते हैं सरसा (सकब)। पूज्य हजूर पिता संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि दुनिया में राम-नाम ही ऐसा है जो इन्सान के सारे दु:ख-दर्द, चिंता, परेशानियों को दूर करता है। राम-नाम लेने के लिए कोई काम-धन्धा, घर-परिवार, धर्म नहीं […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><h2 style="text-align:justify;">राम का नाम अनमोल है और संत इसे बिना दाम के देते हैं</h2>
<p style="text-align:justify;"><strong>सरसा (सकब)।</strong> पूज्य हजूर पिता संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि दुनिया में राम-नाम ही ऐसा है जो इन्सान के सारे दु:ख-दर्द, चिंता, परेशानियों को दूर करता है।</p>
<p style="text-align:justify;">राम-नाम लेने के लिए कोई काम-धन्धा, घर-परिवार, धर्म नहीं छोड़ना और न ही कोई रुपया-पैसा लगता है। राम का नाम अनमोल है और संत इसे बिना दाम के देते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">जो दान-दक्षिणा लेते हैं वो संत ही नहीं होते, क्योंकि संत माया के लिए नहीं बल्कि राम-नाम जपाने के लिए इस दुनिया में आते हैं। जब भगवान ही पैसा नहीं लेते तो संत पैसा क्यों लें? सभी धर्मों में लिखा है कि भगवान दाता था, दाता है और दाता ही रहेगा। पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि भगवान हर इन्सान के अंदर समाया हुआ है।</p>
<h2 style="text-align:justify;">इन्सान भगवान को अपने घर-परिवार में रहते हुए ही देख सकता है</h2>
<p style="text-align:justify;">भगवान को देखने के लिए किसी जंगल, पहाड़ आदि कहीं पर भी जाने की कोई आवश्यकता नहीं होती। इन्सान भगवान को अपने घर-परिवार में रहते हुए ही देख सकता है। ऐसे-ऐसे रोग जिनको डॉक्टर लाइलाज बता देते हैं, राम-नाम के द्वारा वो लाईलाज रोग भी ठीक होते हुए देखे गए हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">भगवान सर्वव्यापक है। भगवान को अल्लाह, वाहेगुरु, गॉड, खुदा, रब्ब चाहे जो भी नाम दें, लेकिन वो एक ही है। जिस तरह पानी को पानी, आब, वाटर, नीर आदि कहने से उसके रंग, स्वाद में कोई परिवर्तन नहीं आता उसी तरह भगवान का नाम बदलने से उसकी ताकत नहीं बदलती।</p>
<h2 style="text-align:justify;">राम-नाम का सुमिरन जरूर करना चाहिए</h2>
<p style="text-align:justify;">आप जी फरमाते हैं कि इन्सान को हर रोज सुबह-शाम आधा-आधा घंटा राम-नाम का सुमिरन जरूर करना चाहिए। जिस तरह इन्सान खाने-पीने, सोने के लिए समय निश्चित करता है, सुबह नाश्ता, दोपहर का भोजन और शाम का भोजन खाना इन्सान नहीं भूलता उसी तरह राम का नाम भी नहीं भूलना चाहिए। भोजन तो केवल शरीर को ताकत देता है लेकिन राम का नाम आत्मा, रूह को ताकत देता है।</p>
<p style="text-align:justify;">जिस तरह मजबूत पेड़ पर लगने वाली टहनियां, फल आदि अपने आप आ जाते हैं उसी तरह जिस इन्सान की आत्मा शुद्ध होती है तो उसे सारे सुख मिल जाते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">जिस समय इन्सान के आत्मबल में कमी आती है तो बहुत से लोग सोचते हैं कि वो तो मरने की कगार पर है और उस पर कोई भी दवा काम नहीं करती, लेकिन उस समय अगर इन्सान राम के नाम का जाप करे तो राम-नाम एक दवा का काम करता है और वो इन्सान ठीक हो जाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">
</p><p style="text-align:justify;">
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                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>अनमोल वचन</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/spiritual/holy-sermons/gods-word-saves-from-bad-things-saint-dr-msg/article-2006</link>
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                <pubDate>Thu, 06 Jul 2017 02:05:18 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>मन को सेवा व अच्छे विचारों से साफ करो</title>
                                    <description><![CDATA[सेवा-सुमिरन करके मन से लड़ना सीखो सरसा। पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि इस कलियुग में जीव दिन-रात काम, वासना, क्रोध, मोह, लोभ, मन-माया में इस कदर फंस कर रह गया है कि उसे परमात्मा का नाम लेना फिजूल की बात लगती है। इतिहास गवाह है कि जिस […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><h2 style="text-align:justify;">सेवा-सुमिरन करके मन से लड़ना सीखो</h2>
<p style="text-align:justify;"><strong>सरसा।</strong> पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि इस कलियुग में जीव दिन-रात काम, वासना, क्रोध, मोह, लोभ, मन-माया में इस कदर फंस कर रह गया है कि उसे परमात्मा का नाम लेना फिजूल की बात लगती है। इतिहास गवाह है कि जिस इन्सान का मन उस पर हावी हो जाता है तो फिर वह किसी भी गुरु, पीर की नहीं सुनता।</p>
<p style="text-align:justify;">ऐसा लोग हमेशा दु:खी रहते हैं, लेकिन जो पीर, फकीर की बात सुनकर मन का सामना करते हैं, उनको आवागमन के चक्कर से मुक्ति मिलती है व जीते-जी भी उनके गम, दु:ख चिंताएं दूर होती चली जाती हैं। इसलिए मन से लड़ना सीखो। मन को परमात्मा के नाम, सेवा व अच्छे विचारों से साफ करो। अगर जीव के अंदर बुरे विचार चलते रहते हैं तो इन्सान का मन उसके काबू में नहीं आता। इसलिए सेवा-सुमिरन करके मन से लड़ना सीखो।</p>
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                                            <category>अनमोल वचन</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 24 Jun 2017 02:56:05 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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